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कला भारती के सदस्य अभिषेक कोली भाजपा में शामिल, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ भव्य कार्यक्रम संपन्न।


 


नवी मुंबई: दिपिका पारकर

राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कला भारती एसोसिएशन के सदस्य अभिषेक कोली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और उद्यमियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास करना भी था। इस दौरान महिलाओं को आर्थिक साक्षरता, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, GEM पोर्टल, मुद्रा योजना, स्वरोजगार के अवसर, उद्यमिता विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना ही इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम, विधान परिषद सदस्य उमा खापरे, मुंबई भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष योजना ठोकले, विधान परिषद सदस्य माधवी नाइक, भाजपा के पदाधिकारी तथा अन्य कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी के मार्गदर्शन में नगरसेविका स्वप्ना म्हात्रे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा राष्ट्रहित और समाजसेवा की भावना से कार्य करने वाले लोगों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोगों के लिए भाजपा एक सशक्त मंच है। उन्होंने कला भारती एसोसिएशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का सराहनीय प्रयास कर रही है।

वहीं, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाजपा हमेशा नई पीढ़ी को अवसर देने और उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने में विश्वास रखती है। उन्होंने अभिषेक कोली के भाजपा में प्रवेश का स्वागत करते हुए कहा कि युवा नेतृत्व समाज और राजनीति दोनों के लिए नई ऊर्जा लेकर आता है। उन्होंने उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन के साथ मिलकर कार्य करने और जमीनी स्तर पर जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत करने का संदेश दिया।

महापौर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि राज्य में युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं रविंद्र चव्हाण, अमित साटम और चित्रा वाघ के योगदान की भी प्रशंसा की।

कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनके अनुसार विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भाजपा में शामिल होने के बाद अभिषेक कोली ने कहा कि राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने कहा कि कला भारती एसोसिएशन और भाजपा मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठन के माध्यम से समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक आकर्षण “उड़ान” दिव्यांग संगीत समूह (ब्लाइंड ऑर्केस्ट्रा) की प्रस्तुति रही। समूह के कलाकारों ने अपने संगीत और प्रतिभा से उपस्थित लोगों को भावुक और प्रेरित किया। कार्यक्रम में इस समूह का विशेष सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान समाज में प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास है।

इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए महिला एवं पुरुष उद्यमियों, हस्तशिल्प कलाकारों और समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। गुजरात, महेश्वर, संभाजीनगर, पुणे सहित विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला, हस्तकला और महिला उद्यमिता को मंच प्रदान कर स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।














FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिल सकती है Z+ सुरक्षा, सख्त कार्रवाईयों के बीच सुरक्षा बढ़ाने पर मंथन।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार कर रही हैं तथा इस संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा जारी है।

जानकारी के मुताबिक, हाल के महीनों में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने राज्यभर में गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई के कारण अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में उनकी सुरक्षा को लेकर समीक्षा किए जाने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्राप्त इनपुट और सुरक्षा आकलन रिपोर्टों के आधार पर मुंढे की सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो उन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जो देश में उपलब्ध सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है।

तुकाराम मुंढे अपनी कठोर प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए जाने जाते हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। FDA आयुक्त के रूप में भी उन्होंने राज्यभर में कई चर्चित कार्रवाईयों को अंजाम दिया है, जिसके चलते वे लगातार सुर्खियों में रहे हैं।

हाल ही में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

हालांकि, Z+ सुरक्षा को लेकर अभी तक राज्य सरकार, गृह विभाग अथवा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो तुकाराम मुंढे उन चुनिंदा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।














उल्हासनगर में सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण: संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सरोकारों के साथ धूमधाम से मनाया गया।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उल्हास जनपथ के संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्यों के साथ अत्यंत उत्साह एवं भव्यता से मनाया गया। जन्मदिन के अवसर पर उल्हास जनपथ कार्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और शिव कुमार मिश्रा को शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं।

कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि जन्मदिन को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे समाजसेवा से जोड़ा गया। इस अवसर पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल बैग, पुस्तकें एवं पेंसिल सेट वितरित किए गए, ताकि उनकी शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा न आए और वे बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।

इसके साथ ही जरूरतमंद महिलाओं को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं से युक्त राशन किट प्रदान की गईं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को मानसून को ध्यान में रखते हुए छतरियां वितरित की गईं। इस पहल की उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की और इसे समाज के प्रति संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण तब देखने को मिला जब सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम एवं द्वितीय कक्षा की बालिकाओं के लिए विशेष लकी ड्रॉ आयोजित किया गया। लकी ड्रॉ के माध्यम से चयनित छात्राओं को साइकिलें भेंट की गईं। इस उपहार से बालिकाओं और उनके अभिभावकों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल बेटियों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश भी देती है।

कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और विभिन्न क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने शिव कुमार मिश्रा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। साथ ही समाजहित में लगातार किए जा रहे उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।

जन्मदिन समारोह सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी शिव कुमार मिश्रा इसी तरह समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए प्रेरणादायी कार्य करते रहेंगे।























सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को मिला प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान 2026"


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं जनहितैषी व्यक्तित्व डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण, जनसेवा तथा मानव एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और प्रभावशाली योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

भारत गौरव फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान देश के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समर्पित है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, नागरिक जागरूकता बढ़ाने तथा राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. घाडगे का चयन उनके वर्षों से चले आ रहे समर्पित सामाजिक कार्यों, जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को ध्यान में रखते हुए किया गया।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपने कार्यकाल के दौरान सामाजिक न्याय, समान अवसर, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने, जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित विभिन्न जनहितकारी अभियानों ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विशेष रूप से मानव और पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके प्रयासों की व्यापक सराहना की गई है। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथा सेवा भाव ने उन्हें एक जिम्मेदार और प्रेरणादायी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है। उनके कार्यों में सदैव पारदर्शिता, नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा है।

इस अवसर पर जारी आधिकारिक प्रशस्ति में कहा गया है—

"सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण और मानवीय सेवा के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता तथा एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को भारत भूषण सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाता है।"

भारत भूषण सम्मान को देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है जिनकी सेवाएं व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर व्यापक समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। डॉ. घाडगे का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब समाज को संवेदनशील, जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब डॉ. सागर प्रकाश घाडगे जैसे व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य करते हैं। उनका जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि समर्पण, सेवा, साहस और नैतिक मूल्यों के आधार पर समाज में सार्थक एवं स्थायी परिवर्तन संभव है।

देश के विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और जनसेवी संगठनों ने डॉ. घाडगे को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर जनसेवा की कामना की है।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को "भारत भूषण सम्मान 2026" प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

"समाज सेवा • न्याय के प्रति प्रतिबद्धता • राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण'














उल्हासनगर के कथित बोगस सनद मामले में पत्रकार दिलीप मालवणकर ने मुख्यमंत्री और महसूल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में कथित बोगस सनद (फर्जी प्रमाणपत्र) प्रकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार एवं अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप मालवणकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।

मालवणकर का आरोप है कि उल्हासनगर महानगरपालिका का टाउन प्लानिंग विभाग लंबे समय से विवादों के घेरे में रहा है। बिना वैध अनुमति निर्मित इमारतों को नियमित करने, एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) में कथित हेरफेर तथा टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति और पदस्थापन को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रहती है तथा इन पदों के लिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।

पूर्व प्रशासक के कार्यकाल पर सवाल

दिलीप मालवणकर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से सैकड़ों गैरकानूनी सनदें जारी की गईं, जिनकी विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका दावा है कि इन मामलों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और जांच लंबित रहने से अनेक प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रांत अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में भी कथित रूप से इसी प्रकार की प्रक्रिया जारी है। मालवणकर का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप

मालवणकर के अनुसार, कई मामलों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में अपील स्तर तक कथित लेनदेन की व्यवस्था होने की चर्चाएं सामने आई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दुरुपयोग का आरोप

दिलीप मालवणकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 से पूर्व के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर दिए गए निर्देशों का कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किए गए और बाद में प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए।

मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मालवणकर ने मुख्यमंत्री तथा राज्य के महसूल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे और वर्तमान प्रांत अधिकारी विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में जारी सभी सनदों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित कार्यालयों की सीसीटीवी फुटेज की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस मुद्दे ने शहर की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला उल्हासनगर के सबसे बड़े कथित प्रशासनिक और राजस्व घोटालों में से एक साबित हो सकता है।














आरटीओ की नोटिस के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! उल्हासनगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर फिर दिखी लाल-नीली फ्लैशिंग बत्ती, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देशभर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वर्षों पहले वाहनों पर लाल-नीली बत्तियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन में नियमों की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले की सरकारी गाड़ी पर प्रतिबंधित फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी मुद्दे पर कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से वही ‘जिगजैग’ फ्लैशिंग बत्ती दिखाई देने से प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

आरटीओ की कार्रवाई के बाद भी नहीं हटी बत्ती

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कल्याण आरटीओ ने आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर अनधिकृत फ्लैशिंग बत्ती लगाए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था। उम्मीद की जा रही थी कि इसके बाद संबंधित वाहन से प्रतिबंधित उपकरण हटा दिए जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

सोमवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए आयुक्त मनीषा आव्हाले जिस सरकारी वाहन से पहुंचीं, उस पर फिर वही फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती देखी गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।

कल्याण आरटीओ ने जारी की आधिकारिक नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याण उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी आशुतोष बारकुल द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को आधिकारिक नोटिस जारी की गई है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रमांक MH-05-FP-9445 पर लाल एवं नीली फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। आरटीओ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी वाहन पर इस प्रकार की फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग वैध नहीं है।

नोटिस के माध्यम से संबंधित वाहन से फ्लैशिंग बत्ती तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि महानगरपालिका के वाहन विभाग के उप आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

क्या कहते हैं नियम?

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के उद्देश्य से देशभर में लाल बत्ती के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किया था। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पद और शक्ति प्रदर्शन की मानसिकता को समाप्त करना तथा आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच समानता का संदेश देना था।

वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन विभाग और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लाल अथवा नीली फ्लैशिंग बत्तियों के उपयोग की अनुमति है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सीमित संवैधानिक पदों को छोड़कर किसी भी मंत्री, जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी को अपने वाहन पर ऐसी बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से कानून का सम्मान करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनका पालन भी बिना किसी अपवाद के किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

आरटीओ द्वारा जारी नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस आदेश का तत्काल पालन करेगा? क्या आयुक्त की सरकारी गाड़ी से प्रतिबंधित फ्लैशिंग बत्ती हटाई जाएगी, या फिर यह विवाद आगे और बढ़ेगा?

फिलहाल आरटीओ की सख्त नोटिस के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है और आम जनता की नजरें अब आयुक्त कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।