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पुलिस स्मृति दिवस पर महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर ने शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।


मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिसकर्मियों एवं सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कर्तव्य के प्रति समर्पण, साहस और निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के योगदान को याद किया गया।

पुलिस स्मृति दिवस देश के उन पुलिसकर्मियों के बलिदान को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने कर्तव्यपालन के दौरान अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिवस पुलिस बलों के साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्मरण करने के साथ-साथ समाज में सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

इस अवसर पर राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के उन कर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया, जिन्होंने देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन जवानों का बलिदान पुलिस सेवा की उस भावना को दर्शाता है, जिसमें व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर जनसेवा, कानून का पालन और राष्ट्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

पुलिसकर्मी आतंकवाद, संगठित अपराध, हिंसा, आपातकालीन परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में शहीद जवानों का स्मरण न केवल उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों को कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सेवा की भावना से प्रेरित करने का माध्यम भी है।

स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके परिवारों के त्याग और धैर्य को सम्मान देने का भी प्रतीक है। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों का योगदान भी इस स्मरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



























महाराष्ट्र आबकारी विभाग के अधीक्षक उत्तम शिंदे के खिलाफ कथित आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग। RTI कार्यकर्ता सुधीर शरद गुजर ने राष्ट्रीय महिला आयोग से हस्तक्षेप और स्वतंत्र SIT जांच की मांग की। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के अधीक्षक उत्तम शिंदे की कथित कार्यप्रणाली और महिला कर्मचारियों को देर रात फोन किए जाने से संबंधित आरोपों को लेकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। इस संबंध में स्वतंत्र खोजी पत्रकार एवं सूचना का अधिकार (RTI) कार्यकर्ता सुधीर शरद गुजर ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर को ज्ञापन सौंपकर मामले का संज्ञान लेने और संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

ज्ञापन में महिला कर्मचारियों की गरिमा, कार्यस्थल पर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसी जांच व्यवस्था अपनाने की मांग की गई है, जो किसी भी प्रकार के प्रशासनिक दबाव से मुक्त हो और सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का समान अवसर प्रदान करे।

हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर अधीक्षक उत्तम शिंदे के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्राधिकरण की ओर से ज्ञापन पर की गई कार्रवाई और मामले की आधिकारिक स्थिति की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के बजाय शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों के रूप में देखा जाना आवश्यक है।

देर रात फोन कॉल को लेकर उठे सवाल

सुधीर शरद गुजर द्वारा दिए गए ज्ञापन के अनुसार, कुछ महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर देर रात फोन किए जाने और इससे मानसिक परेशानी उत्पन्न होने की शिकायतों की जांच की जानी चाहिए।

ज्ञापन में मांग की गई है कि संबंधित फोन कॉल की परिस्थितियों, उनके उद्देश्य, सरकारी कार्य से उनके संभावित संबंध, संपर्क की आवृत्ति और बातचीत की प्रकृति की उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल की जाए।

इसके अतिरिक्त, यह भी जांचने का अनुरोध किया गया है कि कथित घटनाओं का संबंधित महिला कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता, पेशेवर गरिमा और कार्यालयीन वातावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है या नहीं।

इस मामले में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या संबंधित संपर्क आधिकारिक कार्य की आवश्यकता के तहत किए गए थे या शिकायतों में वर्णित परिस्थितियों में किसी प्रकार की अनुचित कार्यप्रणाली सामने आती है। इसका निर्धारण केवल स्वतंत्र जांच, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही किया जा सकता है।

राष्ट्रीय महिला आयोग से हस्तक्षेप की मांग

ज्ञापन में राष्ट्रीय महिला आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह अपने वैधानिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत मामले का प्रारंभिक परीक्षण करे और आवश्यकता के अनुसार महाराष्ट्र सरकार तथा संबंधित सक्षम अधिकारियों से रिपोर्ट मांगे।

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की सिफारिश करने पर विचार किया जाए।

ज्ञापन में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच मौजूद प्रशासनिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जांच की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें शिकायतकर्ताओं को बिना किसी दबाव के अपनी बात रखने का अवसर मिले। हालांकि, प्रशासनिक दबाव या किसी प्रकार के हस्तक्षेप की वास्तविक स्थिति भी जांच के दौरान ही स्पष्ट हो सकेगी।

प्रस्तावित जांच व्यवस्था में महिला प्रतिनिधि, सक्षम वरिष्ठ अधिकारी और आवश्यकता के अनुसार महिला उत्पीड़न से संबंधित कानूनों के विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही, शिकायतों की प्रकृति के अनुरूप मामले को संबंधित शिकायत निवारण समिति या सक्षम सतर्कता एजेंसी के समक्ष भेजने की मांग भी की गई है।

फोन रिकॉर्ड, संदेशों और प्रशासनिक दस्तावेजों की पड़ताल का सुझाव

ज्ञापन में संबंधित आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए उपलब्ध साक्ष्यों की व्यवस्थित जांच करने पर जोर दिया गया है। इसमें कानून के अनुसार प्राप्त किए जा सकने वाले फोन कॉल रिकॉर्ड, संबंधित संदेशों, कार्यालयीन पत्राचार, पूर्व शिकायतों और प्रशासनिक आदेशों की पड़ताल करने का अनुरोध शामिल है।

ऐसी जांच में संबंधित संचार का संदर्भ, समय, उद्देश्य और आधिकारिक जिम्मेदारियों से उसका संबंध महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी फोन कॉल या संदेश की मौजूदगी मात्र से अपने आप अनुचित व्यवहार सिद्ध नहीं होता। इसलिए सभी उपलब्ध तथ्यों का संदर्भ सहित मूल्यांकन करना आवश्यक होगा।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि संबंधित महिला कर्मचारियों के बयान गोपनीय और सुरक्षित वातावरण में दर्ज किए जाने चाहिए। उनकी पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और शिकायत से जुड़े संवेदनशील विवरणों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।

इसके साथ ही, शिकायतकर्ताओं को किसी संभावित दबाव, धमकी या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के भय के बिना अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की गई है। यदि ऐसी किसी आशंका की पुष्टि होती है, तो सक्षम प्राधिकरण द्वारा नियमानुसार उचित सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा सकता है।

आरोप सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग

सुधीर शरद गुजर ने ज्ञापन में अनुरोध किया है कि यदि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होती है, तो लागू कानूनों, विभागीय सेवा नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उचित अनुशासनात्मक अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई की जाए।

वहीं, यदि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच के निष्कर्ष भी तथ्यों के आधार पर सामने आने चाहिए। निष्पक्ष जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी मानना नहीं, बल्कि शिकायतों की वास्तविकता का पता लगाना और कानून के अनुरूप निर्णय सुनिश्चित करना होना चाहिए।

ज्ञापन में राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत पर की गई कार्रवाई, जांच की स्थिति और संबंधित निर्णय की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया गया है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, ज्ञापन की प्रतियां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राज्य के मुख्य सचिव और आबकारी विभाग के सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी के लिए भेजे जाने का उल्लेख है। हालांकि, इन कार्यालयों में ज्ञापन प्राप्त होने अथवा उस पर कोई औपचारिक कार्रवाई शुरू होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल का मुद्दा

यह मामला केवल किसी अधिकारी की कथित कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की गरिमा, कार्यस्थल की सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता जैसे व्यापक प्रशासनिक सवाल भी उठाता है।

यदि किसी कर्मचारी को अपने कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार या मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो शिकायत की निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के तहत जांच महत्वपूर्ण है। साथ ही, किसी भी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का परीक्षण भी निष्पक्षता, साक्ष्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाना चाहिए।

इसलिए मामले में संबंधित महिला कर्मचारियों के कथनों, उपलब्ध दस्तावेजों, प्रशासनिक परिस्थितियों और अधीक्षक उत्तम शिंदे के पक्ष सहित सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच आवश्यक होगी। संबंधित अधिकारी का पक्ष और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष: अब आधिकारिक कार्रवाई और जांच की स्थिति पर नजर

राष्ट्रीय महिला आयोग से हस्तक्षेप और स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले इस ज्ञापन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्राधिकरण शिकायत का संज्ञान लेते हैं या नहीं और आगे किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

फिलहाल, अधीक्षक उत्तम शिंदे के विरुद्ध लगाए गए आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हैं। ज्ञापन पर आधिकारिक कार्रवाई, संबंधित अधिकारी का पक्ष और किसी जांच की शुरुआत के संबंध में भी पुष्टि की प्रतीक्षा है।

महत्वपूर्ण संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार उपलब्ध ज्ञापन संबंधी विवरण पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोपों को सत्यापित तथ्य या दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित अधिकारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए। मामले में अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकरण की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
















ड्रग्स, युवा और समाज के मुद्दे पर विशेष इंस्टाग्राम लाइव; IRS अधिकारी समीर वानखेड़े रखेंगे मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनी बात।


नई दिल्ली/मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

भारत में मादक पदार्थों के सेवन, युवाओं पर इसके प्रभाव, रोकथाम, कानून के प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आगामी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को एक विशेष इंस्टाग्राम लाइव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का विषय ‘सुर्खियों से परे: भारत में ड्रग्स, युवा और समाज’ (Beyond the Headlines: Drugs, Youth & Society in India) रखा गया है। पोस्टर के अनुसार, यह बातचीत मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मादक पदार्थों से जुड़े विभिन्न सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं को समझने पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में समीर वानखेड़े, IRS, पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर, शामिल होंगे। कार्यक्रम में ड्रग्स से जुड़े मुद्दों को केवल कानून और कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोगों, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, नीति, प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे व्यापक पहलुओं के संदर्भ में चर्चा किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

युवा ड्रग्स की ओर क्यों आकर्षित होते हैं?

कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में मादक पदार्थों का सेवन (Substance Abuse) शामिल है। इसके तहत युवाओं के ड्रग्स की ओर आकर्षित होने के संभावित सामाजिक एवं व्यवहारिक कारणों पर चर्चा की जाएगी।

इसके साथ ही रोकथाम (Prevention) पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्चा का एक प्रमुख सवाल यह होगा कि मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए वास्तव में कौन से उपाय प्रभावी साबित हो सकते हैं और समाज, परिवार तथा संस्थाएं इस दिशा में किस प्रकार भूमिका निभा सकती हैं।

NDPS कानून और प्रवर्तन पर चर्चा

कार्यक्रम में NDPS अधिनियम से संबंधित कानून, प्रवर्तन और उसके प्रभाव पर भी चर्चा प्रस्तावित है। मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में कानून की भूमिका तथा उसके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।

पुनर्वास और दूसरा मौका भी चर्चा का हिस्सा

मादक पदार्थों से जुड़ी समस्या के उपचार और पुनर्वास को भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। रिकवरी, सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों को दूसरा मौका जैसे विषयों पर बातचीत होने की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम के व्यापक विषयों में ‘कानून, लोग, व्यवहार और वास्तविकता’ तथा ‘नीति, प्रवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास’ जैसे मुद्दे शामिल हैं।

कार्यक्रम की जानकारी

📅 दिनांक: 4 अक्टूबर 2026, रविवार

⏰ समय: शाम 6:30 बजे (IST)

📱 माध्यम: Instagram Live

🎙️ अतिथि: समीर वानखेड़े, IRS

पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर

मादक पदार्थों की समस्या को लेकर जागरूकता, रोकथाम, कानून और पुनर्वास पर केंद्रित यह संवाद युवाओं, अभिभावकों और समाज के लिए विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।



















भाजपा युवा मोर्चा मुंबई सचिव प्रणव सिंह ठाकुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भाजपा युवा मोर्चा मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी नियुक्त।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई में संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। युवा मोर्चा मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद पर नियुक्त किया है।

इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति पत्र में दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

नियुक्ति पत्र में कहा गया है कि प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। साथ ही, उनके आगामी कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं भी दी गई हैं।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में युवा मोर्चा के सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी संगठन की गतिविधियों, कार्यक्रमों और जनसंपर्क से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाने में अहम मानी जाती है।

यह नियुक्ति पत्र भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।


















इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी बने बॉम्बे हाईकोर्ट के 50वें मुख्य न्यायाधीश।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का 50वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट को नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक अनुभवी न्यायाधीश का नेतृत्व मिलेगा।

न्यायमूर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट महाराष्ट्र और गोवा से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों की सुनवाई करता है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से अहम होगी।

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायिक सेवाएं दे रहे हैं। अब उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद न्यायपालिका से जुड़े लोगों और कानूनी क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

















 

मनसे का भव्य ‘गुणगौरव समारोह’ कल, मेधावी छात्रों का होगा सम्मान; समीर वानखेड़े, अमित ठाकरे और बाला नांदगांवकर रहेंगे प्रमुख अतिथि।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

विद्यार्थियों की मेहनत, प्रतिभा और शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मान देने तथा युवा पीढ़ी का उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की ओर से भव्य ‘गुणगौरव समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।

‘जिद का सम्मान, युवा ऊर्जा की सराहना’ की संकल्पना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की मेहनत को पहचान देना और उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। समारोह को लेकर आयोजकों की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

समारोह में कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

रविवार, 30 अगस्त 2026 को शाम 6 बजे आयोजित होने वाले इस समारोह में कई प्रमुख नेताओं एवं गणमान्य व्यक्तियों की विशेष उपस्थिति रहेगी।

कार्यक्रम में समीर वानखेड़े (आईआरएस), अमित ठाकरे, अध्यक्ष—महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना, तथा बाला नांदगांवकर, नेता—महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे।

प्रमुख अतिथियों की मौजूदगी में मेधावी विद्यार्थियों का गुणगौरव किया जाएगा तथा उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उन्हें सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जाएगा।

घाटकोपर पश्चिम मनसे विभाग की पहल

इस कार्यक्रम का आयोजन गणेश चुक्कल, विभाग अध्यक्ष—महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, घाटकोपर पश्चिम द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना समाज में सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह में विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों, नागरिकों और शुभचिंतकों से भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है। आयोजकों का उद्देश्य है कि मेधावी विद्यार्थियों को सम्मान मिलने के साथ-साथ अन्य युवाओं को भी शिक्षा और मेहनत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।

📍 कार्यक्रम का स्थान

ले. जगजीतसिंह अरोड़ा क्रीड़ांगन, कैलाश कॉम्प्लेक्स, 90 फीट रोड, बृहन्मुंबई महानगरपालिका स्कूल के पास, विक्रोली (पश्चिम), मुंबई।

📅 दिनांक: रविवार, 30 अगस्त 2026

🕕 समय: शाम 6 बजे

📞 संपर्क: 9930914444

मनसे के इस गुणगौरव समारोह को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह देखने को मिल रहा है।




















ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता की पहल, मुंबई के पवई में 29 अगस्त को विशेष सेमिनार। IRS अधिकारी समीर वानखेड़े युवाओं से करेंगे संवाद, देंगे नशामुक्त समाज का संदेश।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

युवाओं को नशे के बढ़ते खतरे से जागरूक करने और समाज में नशामुक्त जीवन के प्रति सकारात्मक संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से भारत विकास परिषद, पवई चांदिवली शाखा और CSC – चंद्रभान शर्मा कॉलेज, पवई के संयुक्त आयोजन में एक विशेष ड्रग जागरूकता सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।

यह विशेष कार्यक्रम शनिवार, 29 अगस्त 2026 को गोपाल शर्मा ऑडिटोरियम, पवई, मुंबई में आयोजित होगा। कार्यक्रम का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित किया गया है।

समीर वानखेड़े होंगे मुख्य वक्ता

सेमिनार में श्री समीर वानखेड़े, IRS, अतिरिक्त निदेशक, DGTS, चेन्नई, मुख्य वक्ता के रूप में युवाओं एवं उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के माध्यम से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से होने वाले सामाजिक एवं व्यक्तिगत नुकसान, युवाओं पर इसके प्रभाव तथा नशे से दूर रहने के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा की जाएगी।

आयोजकों के अनुसार, यह केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं को स्वस्थ, जिम्मेदार और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

‘आज जागरूक रहें, कल सुरक्षित रहें’

सेमिनार की मुख्य थीम “आज जागरूक रहें, कल सुरक्षित रहें” रखी गई है। कार्यक्रम में युवाओं को नशे से जुड़े तथ्यों को समझने, नशीले पदार्थों से स्पष्ट रूप से दूरी बनाए रखने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया जाएगा।

कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट है—

“आपका आज का चुनाव ही आपके कल को आकार देता है।”

भारत विकास परिषद और CSC की इस पहल का उद्देश्य युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में यह संदेश मजबूत करना है कि नशे को ना कहना और जीवन को चुनना ही सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य की दिशा है।

आयोजन की प्रमुख जानकारी

📅 दिन: शनिवार, 29 अगस्त 2026

⏰ समय: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक

📍 स्थान: गोपाल शर्मा ऑडिटोरियम, पवई, मुंबई

🎤 मुख्य वक्ता: श्री समीर वानखेड़े, IRS

🏛️ आयोजक: भारत विकास परिषद, पवई चांदिवली शाखा एवं CSC – चंद्रभान शर्मा कॉलेज

नारा:

“नशे को कहें ना, जीवन को चुनें।”

“आइए, मिलकर बेहतर कल चुनें।”


















‘मेवाड आइसक्रीम’ की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल, FDA से वैज्ञानिक जांच की मांग।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों के बाहरी इलाकों तक इन दिनों ठेलों और चलती-फिरती गाड़ियों के माध्यम से आइसक्रीम, कुल्फी और रबड़ी की बिक्री बढ़ती नजर आ रही है। कम कीमत, आकर्षक रंग-रूप और अलग-अलग स्वाद के कारण इन उत्पादों की ओर खासकर बच्चे तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसी बीच ‘मेवाड आइसक्रीम’ नाम से बेचे जा रहे कुछ उत्पादों की गुणवत्ता और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर नागरिकों ने चिंता जताई है।

नागरिकों का कहना है कि इन उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केवल आधिकारिक जांच के जरिए ही मिल सकता है। इसी कारण खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से संबंधित उत्पादों के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक एवं प्रयोगशाला जांच कराने की मांग की जा रही है।

दूध की वसा या वनस्पति वसा? जांच से सामने आएगी वास्तविकता

नागरिकों की मांग है कि जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित उत्पादों में दूध की वसा का इस्तेमाल किया जा रहा है या वनस्पति वसा जैसी सामग्री का। साथ ही इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्य रंग, फ्लेवर और अन्य सामग्री निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जाए।

हालांकि, किसी भी उत्पाद में ‘डालडा’, वनस्पति वसा या अन्य किसी संदिग्ध सामग्री के इस्तेमाल का दावा बिना आधिकारिक नमूना जांच के प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसलिए इन आरोपों को लेकर निष्कर्ष निकालने के बजाय FDA द्वारा नमूने लेकर प्रयोगशाला रिपोर्ट सामने लाना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट में अंतर भी महत्वपूर्ण

खाद्य उत्पाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आधार पर आइसक्रीम और अन्य फ्रोजन डेजर्ट की श्रेणी अलग हो सकती है। ऐसे में केवल उत्पाद का नाम या उसकी कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह निर्धारित मानकों के अनुसार आइसक्रीम है या किसी अन्य श्रेणी का फ्रोजन उत्पाद।

चलती-फिरती गाड़ियों और खुले बाजार में बिकने वाले कई उत्पादों पर निर्माता, सामग्री, लाइसेंस या अन्य आवश्यक जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में आधिकारिक नमूना लेकर उसकी जांच कराना ही उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और श्रेणी निर्धारित करने का उचित तरीका है।

कथित मिलावट को लेकर चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

कुछ नागरिकों ने आशंका जताई है कि कम कीमत पर उत्पाद तैयार करने के लिए वनस्पति वसा या अन्य वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा कृत्रिम रंग और फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

कुछ लोगों द्वारा डिटर्जेंट, औद्योगिक रंग, यूरिया या फॉर्मेलिन जैसे पदार्थों के संभावित इस्तेमाल की आशंका भी व्यक्त की गई है। लेकिन इन गंभीर दावों की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसलिए बिना प्रयोगशाला जांच के ऐसे पदार्थों की मौजूदगी का दावा करना उचित नहीं होगा। खाद्य सुरक्षा के मामले में अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक परीक्षण और आधिकारिक रिपोर्ट को ही आधार बनाया जाना चाहिए।

खुले में बिक्री और स्वच्छता भी जांच के दायरे में हो

गुणवत्ता के साथ-साथ चलती-फिरती गाड़ियों से खाद्य पदार्थों की बिक्री के दौरान स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था की जांच भी जरूरी है।

खुले वातावरण में रखे गए खाद्य पदार्थ धूल, वाहनों के धुएं, मक्खियों और अन्य प्रदूषकों के संपर्क में आ सकते हैं। इसके अलावा विक्रेताओं की व्यक्तिगत स्वच्छता, इस्तेमाल किए जाने वाले पानी, चम्मच एवं बर्तनों की सफाई तथा उत्पादों के सुरक्षित तापमान पर भंडारण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

चूंकि आइसक्रीम और कुल्फी बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

FSSAI पंजीकरण और लाइसेंस की जांच की मांग

नागरिकों ने संबंधित विक्रेताओं के FSSAI पंजीकरण या आवश्यक लाइसेंस की भी जांच करने की मांग की है।

प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की गई है कि संबंधित खाद्य उत्पाद कहां तैयार किए जाते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल कहां से आता है, उत्पादों का भंडारण किस प्रकार किया जाता है और बिक्री के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

यदि जांच में किसी प्रकार का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ लागू कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।

FDA से विशेष जांच अभियान चलाने की मांग

नागरिकों की ओर से FDA के समक्ष मुख्य रूप से निम्न मांगें रखे जाने की बात कही जा रही है—

- चलती-फिरती आइसक्रीम, कुल्फी और रबड़ी विक्रेताओं की विशेष जांच की जाए।

- बिक्री के लिए रखे खाद्य पदार्थों के आधिकारिक नमूने लिए जाएं।

- नमूनों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाए।

- खाद्य रंग, फ्लेवर, दूध की वसा या वनस्पति वसा सहित इस्तेमाल की जा रही सामग्री की जांच की जाए।

- संबंधित विक्रेताओं के FSSAI पंजीकरण और लाइसेंस की पुष्टि की जाए।

- खाद्य पदार्थों के भंडारण, तापमान नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की जाए।

- किसी भी नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

- जांच के निष्कर्षों को आवश्यकतानुसार सार्वजनिक किया जाए, ताकि अफवाहों और गलत जानकारी पर रोक लग सके।

सभी ‘मेवाड’ विक्रेताओं को दोषी मानना उचित नहीं

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘मेवाड आइसक्रीम’ नाम का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक विक्रेता या उत्पाद को खराब, मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताना उचित नहीं होगा।

किसी खास उत्पाद में मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि केवल आधिकारिक नमूना, वैज्ञानिक परीक्षण और सक्षम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है।

यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी। वहीं, यदि उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो यह जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलेगी और बिना आधार की चर्चाओं पर भी रोक लगेगी।

अभिभावकों से सावधानी बरतने की अपील

जब तक संबंधित उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, अभिभावकों को बच्चों के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

खरीदारी करते समय यह देखना उपयोगी है कि उत्पाद सुरक्षित और साफ तरीके से रखा गया है या नहीं, बिक्री स्थल की स्वच्छता कैसी है तथा खाद्य पदार्थों का भंडारण उचित तरीके से किया जा रहा है या नहीं।

कम कीमत और आकर्षक स्वाद से अधिक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ की सुरक्षा और गुणवत्ता है।

अब मुख्य नजर FDA की संभावित कार्रवाई पर है। क्या संबंधित विक्रेताओं के नमूने लिए जाएंगे? क्या उनकी प्रयोगशाला जांच होगी? और क्या जांच रिपोर्ट से इन उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी?

फिलहाल यह मामला आरोपों से अधिक वैज्ञानिक जांच की मांग का है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

















 


ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और बेबाक कार्यशैली की पहचान: समीर वानखेड़े और तुकाराम मुंडे भारत देश की शान।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

देश की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसे अधिकारियों का विशेष महत्व है, जो अपने पद की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने को प्राथमिकता देते हैं। IRS अधिकारी समीर वानखेड़े और IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और बेबाक कार्यशैली के लिए अलग पहचान रखते हैं।

दोनों अधिकारियों की कार्यशैली में जनहित को प्राथमिकता, नियमों के पालन के प्रति प्रतिबद्धता और अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता देखने को मिलती है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के दौरान चुनौतियों का सामना करते हुए दृढ़ता के साथ काम करने की उनकी शैली ने उन्हें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनाया है।

समीर वानखेड़े अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान सख्त और प्रभावी कार्रवाई के लिए चर्चित रहे हैं, वहीं तुकाराम मुंडे भी अपने स्पष्ट निर्णयों, अनुशासनप्रियता और कर्तव्य के प्रति समर्पित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। दोनों अधिकारियों की कार्यशैली में एक समान बात यह है कि वे अपने दायित्वों को गंभीरता से लेने और व्यवस्था में जवाबदेही को महत्व देने के लिए पहचाने जाते हैं।

आज के दौर में प्रशासनिक सेवाओं में ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करना बेहद आवश्यक है। ऐसे में कर्तव्य के प्रति समर्पित अधिकारियों का कार्य आम नागरिकों में प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समीर वानखेड़े और तुकाराम मुंडे जैसे अधिकारियों की कार्यशैली उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो देश की सेवा के लिए प्रशासनिक क्षेत्र में आने का सपना देखते हैं। उनकी निष्ठा, अनुशासन और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

देश के प्रति समर्पण और कर्तव्य के प्रति निष्ठा रखने वाले ऐसे कर्मठ अधिकारियों पर हर भारतीय को गर्व है। समीर वानखेड़े और तुकाराम मुंडे जैसे अधिकारी निश्चित रूप से भारत की शान हैं।


















दूध-पनीर समेत खाद्य पदार्थों में मिलावट पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, MCOCA की तैयारी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। आम नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की जान और स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया है कि दूध, पनीर सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ व्यापक और प्रभावी कार्रवाई की जाए। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच, नमूने लेने, छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को और तेज करने पर जोर दिया गया है।

संगठित मिलावटखोरी पर MCOCA का शिकंजा

सरकार की ओर से गंभीर और संगठित तरीके से मिलावट का कारोबार चलाने वालों के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य उन लोगों और गिरोहों पर शिकंजा कसना है, जो बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

दूध-पनीर की गुणवत्ता पर विशेष नजर

दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। ऐसे में इन उत्पादों में मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार के निर्देशों के बाद FDA द्वारा मिलावटखोरों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मिलावटखोरों को सरकार की दो टूक चेतावनी

सरकार के इस सख्त रुख से खाद्य पदार्थों में मिलावट का अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मचने की संभावना है। प्रशासन का संदेश साफ है कि मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में राज्यभर में जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
















महाराष्ट्र नगरपालिका विधेयक 2026: लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों की प्रशासन में दखलंदाजी पर अब सख्ती होगी। पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाना अपराध माना जाएगा। CM देवेंद्र फडणवीस सरकार का बड़ा कदम।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और औद्योगिक नगरियों के कामकाज में लोकप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत लोकप्रतिनिधियों की ओर से उनके पति-पत्नी, बच्चों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाना अथवा सरकारी कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करना अपराध माना जा सकता है।

सरकार का मानना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके नाम पर परिवार के सदस्यों या अन्य रिश्तेदारों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव डालना व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है।

प्रस्तावित प्रावधानों का उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रशासन को अनावश्यक राजनीतिक और पारिवारिक दबाव से मुक्त रखना है। इससे अधिकारियों को नियमों के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लाए जा रहे महाराष्ट्र नगर परिषद विधेयक 2026 में प्रशासनिक कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति लोकप्रतिनिधि के नाम या उनकी ओर से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

इस कदम से स्थानीय निकायों में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अधिकारों की स्पष्ट सीमा तय होने की उम्मीद है। साथ ही, सरकारी निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Maharashtra Municipal Council Bill 2026 | Bill No. 251SP















बांद्रा में फिर समीर वानखेडे!14 अगस्त को गेटी-गैलेक्सी के बाहर ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

ड्रग्स और नशे के खिलाफ युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार की ओर से 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में होने वाले इस अभियान में पूर्व NCB अधिकारी समीर वानखेडे भी शामिल होंगे।

कार्यक्रम का आयोजन 14 अगस्त की सुबह 10:30 बजे बांद्रा स्थित गेटी-गैलेक्सी सिनेमा के बाहर किया जाएगा। अभियान में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की बढ़ती समस्या के प्रति जागरूक करना और उन्हें ड्रग्स से दूर रहने का संदेश देना है।

बांद्रा और समीर वानखेडे का पुराना कनेक्शन

समीर वानखेडे की बांद्रा में मौजूदगी इसलिए भी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले के दौरान वानखेडे राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे। उस मामले की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली थी।

अब कई वर्षों बाद उसी बांद्रा इलाके में ड्रग्स के खिलाफ आयोजित एक बड़े जनजागरूकता अभियान में वानखेडे की मौजूदगी एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा जोर

‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं को ड्रग्स के स्वास्थ्य, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान के जरिए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील किए जाने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी को देखते हुए इसे युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

14 अगस्त पर टिकी नजरें

समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक और मीडिया स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य नशामुक्ति और जनजागरूकता है और फिलहाल किसी नए विवाद या कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

ऐसे में 14 अगस्त को बांद्रा के गेटी-गैलेक्सी के बाहर होने वाला यह अभियान युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता के साथ-साथ समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में रहने की संभावना है।















पूर्व एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े ने नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों का किया सम्मान, विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर समेत कई सांसद-विधायक रहे मौजूद।


 










मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में चयनित नव-नियुक्त IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों के सम्मान में आयोजित भव्य समारोह में पूर्व एनसीबी के जोनल निदेशक एवं भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित युवा अधिकारियों का सम्मान किया गया और उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर सहित कई सांसद, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। सभी अतिथियों ने नव-चयनित अधिकारियों को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में युवा अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

मुख्य अतिथि समीर वानखेड़े ने अपने संबोधन में कहा कि सिविल सेवा केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं, बल्कि संविधान के मूल्यों की रक्षा करते हुए देश और समाज की सेवा करने का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी को हर परिस्थिति में निष्पक्षता, पारदर्शिता, ईमानदारी और कानून के शासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने नव-चयनित अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करें।

वानखेड़े ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने चयनित अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने, निरंतर सीखते रहने तथा जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी अपने संबोधन में चयनित अधिकारियों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और जनसेवा की भावना के साथ प्रवेश करने वाले ये युवा अधिकारी भारत के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित होंगे।

समारोह के दौरान सभी नव-चयनित IAS, IPS, IRS और IFS अधिकारियों को स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, गौरव और प्रेरणा का वातावरण देखने को मिला। उपस्थित अतिथियों ने चयनित अधिकारियों के साथ संवाद भी किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल प्रशासनिक जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

यह समारोह न केवल नव-चयनित अधिकारियों के सम्मान का अवसर बना, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का भी केंद्र रहा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सेवाओं में पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति बड़ी जिम्मेदारी का प्रारंभ है। समारोह का समापन सभी अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान की कामना के साथ हुआ।


















समीर वानखेड़े के खिलाफ NCB की विभागीय जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, अदालत ने एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एनसीबी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गुमनाम शिकायतों और उन आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियों के अधिकारियों को हर मामले में आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों या अनाम शिकायतों के आधार पर जांच का सामना करना पड़ेगा, तो वे भविष्य में अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और निर्भीक होकर पालन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के मनोबल और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एनसीबी उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में संभाले गए चर्चित मामलों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और विभागीय जांच का उद्देश्य उन्हें परेशान करना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है। केवल आरोपियों के आरोप या गुमनाम शिकायतें किसी निष्पक्ष जांच का पर्याप्त आधार नहीं बन सकतीं।

अदालत ने फिलहाल समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी विभागीय पूछताछ और जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मादक पदार्थ मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

















महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस व्यवस्था पर रोक। अब न नए लाइसेंस जारी होंगे और न ही पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाएगा। गृह विभाग ने सभी पुलिस आयुक्तों, एसपी और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।


 
मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और बार में ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर चल रही कथित अश्लील गतिविधियों और कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत ऑर्केस्ट्रा (लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस) के लिए कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, वर्तमान में जारी लाइसेंसों की अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं होगा।

गृह विभाग द्वारा सोमवार को जारी परिपत्र के माध्यम से राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को इस निर्णय का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस के माध्यम से संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार के अनुसार वर्ष 2016 में लागू 'महाराष्ट्र होटल, उपाहारगृह एवं मद्यपान कक्ष (डांस बार) में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध तथा महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम' के बाद डांस बारों पर कई कानूनी प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, समय के साथ कई प्रतिष्ठानों ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की 'सार्वजनिक मनोरंजन नियमावली' के अंतर्गत ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस प्राप्त करना शुरू कर दिया। सरकार के संज्ञान में यह बात आई कि इन लाइसेंसों की आड़ में कई स्थानों पर कथित रूप से अश्लील नृत्य और अन्य अवैध गतिविधियां फिर से संचालित की जा रही थीं।

इन्हीं शिकायतों और लगातार मिल रही सूचनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने ऑर्केस्ट्रा प्रतिष्ठानों को भी 2016 के अश्लील नृत्य प्रतिबंध कानून के दायरे में लाने का निर्णय लिया। इस संबंध में 2 जुलाई 2026 को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा के हालिया मानसून सत्र में संशोधित विधेयक पारित किया गया और राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के उपरांत 22 जुलाई 2026 को इसे राज्य सरकार के राजपत्र में प्रकाशित कर अधिनियम लागू कर दिया गया।

गृह विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

गृह विभाग की सहसचिव मुग्धा धुरी द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत ऑर्केस्ट्रा के लिए कोई नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाएगा। साथ ही, जिन प्रतिष्ठानों के पास वर्तमान में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस हैं, उनकी अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन को इस निर्णय का सख्ती से पालन कराने तथा किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

दुरुपयोग रोकने की दिशा में अहम कदम

सरकार का मानना है कि इस फैसले से ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस की आड़ में डांस बार कानून को दरकिनार कर संचालित की जा रही कथित अश्लील गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, महिलाओं की गरिमा की रक्षा, कानून का कड़ाई से पालन और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण और सख्त पहल माना जा रहा है।


















मुलुंड के वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का भव्य आयोजन, संत परंपरा और नैतिक मूल्यों का दिया गया संदेश।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुलुंड (पूर्व) स्थित वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और मातृभाषाओं के सम्मान को समर्पित एक भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में "विठ्ठल... विठ्ठल..." के जयघोष, संतों के अभंग, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आध्यात्मिक वातावरण ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं अतिथि भक्ति रस में सराबोर हो गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री विठ्ठल माऊली की भव्य पालकी यात्रा के आगमन से हुआ। इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। सामूहिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके पश्चात विद्यार्थियों ने संत परंपरा पर आधारित मराठी अभंगों का मधुर गायन और वारकरी संप्रदाय की संस्कृति को जीवंत करती आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकार विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भक्त पुंडलिक और भगवान विठ्ठल के जीवन प्रसंगों पर आधारित प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया गया। संत तुकाराम महाराज के विचारों पर आधारित प्रेरक प्रस्तुति, पारंपरिक भारुड, सामाजिक जागरूकता से ओतप्रोत पथनाट्य तथा भगवान विठ्ठल को समर्पित भावपूर्ण पत्र वाचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए पथनाट्य में विद्यार्थियों ने आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पीढ़ियों के बीच संवाद, भारतीय संस्कृति की विरासत और मातृभाषाओं के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि तकनीकी युग में भी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

वारकरी संप्रदाय के प्रसिद्ध अभंगों और भगवान विठ्ठल के जयघोष से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा और संत संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रत्येक प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने अपने संबोधन में कहा कि संतों की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। उन्होंने विद्यार्थियों से संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संत महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गौरव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से भी जोड़ना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय समय-समय पर ऐसे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने भगवान विठ्ठल को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर पूरे समारोह को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मातृभाषा के प्रति सम्मान भी जुड़ा हो। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर आयोजित यह भव्य उत्सव न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और भाषा संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला एक अविस्मरणीय आयोजन भी साबित हुआ।



















मुंबई प्रेस क्लब चुनाव: 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल का दबदबा, सभी प्रमुख पदों पर जीत; सुरेंद्र गंगन बने अध्यक्ष।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई प्रेस क्लब के चुनाव में 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। अध्यक्ष, चेयरमैन, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे सभी महत्वपूर्ण पदों पर इस पैनल के उम्मीदवारों ने निर्णायक बढ़त के साथ जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्रेस क्लब के अधिकांश सदस्यों ने 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल पर अपना भरोसा जताया है। वहीं, कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना का कार्य अभी जारी है।

अध्यक्ष पद पर 'सेव द प्रेस क्लब' के उम्मीदवार सुरेंद्र गंगन ने 579 वोट प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उनके मुकाबले प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवार राजीव खांडेकर को 258 वोट मिले। इस चुनाव में 22 मत अमान्य घोषित किए गए।

चेयरमैन पद पर बालकृष्ण ने 508 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी मयुरेश गणपत को 320 वोट मिले।

उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) पद पर धोंडिबा पांडुरंग म्हस्के ने 537 वोट प्राप्त कर विजय हासिल की। उनके मुकाबले आशिष राजे को 290 वोट मिले।

सचिव पद के लिए हुए मुकाबले में अनिल कुमार सिंह ने 513 वोट के साथ जीत दर्ज की, जबकि सौरभ शर्मा को 313 वोट प्राप्त हुए।

संयुक्त सचिव पद पर सुधाकर कश्यप ने 515 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी रुचा कोनालकर को 323 वोट मिले।

कोषाध्यक्ष पद पर ओम प्रकाश तिवारी ने 487 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि शशांक परदे को 330 वोट मिले।

फिलहाल प्रेस क्लब की कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना जारी है। प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस की ओर से आशिष राणे, अनुराग कांबले, अनीश पाटिल, ज्योत्स्ना गंगणे, गिरीश गायकवाड़, गिरीश चित्रे, स्वप्नील मिश्रा, संजय रंजीत, सचिन हराळकर और गौरव गुप्ता मैदान में हैं। वहीं, 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की ओर से आदित्य दुबे, वैभव परब, मनीषा रेगे, अंसारी शहीद, मधु नैहान, पूनम अपराज, अनीता शुक्ला, स्वप्नील शिंदे, उमेश गोस्वामी और के. जे. बेनीयचन चुनावी मुकाबले में हैं।

मुंबई प्रेस क्लब के इन चुनाव परिणामों को मीडिया जगत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी प्रमुख पदों पर 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की जीत ने संगठन में उसके प्रभाव और सदस्यों के व्यापक समर्थन को दर्शाया है। अब सभी की निगाहें कमेटी सदस्य पदों की मतगणना पर टिकी हैं, जिसके बाद प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।


























महाराष्ट्राच्या सशक्त प्रशासनाचे दोन प्रेरणादायी चेहरे; IRS समीर वानखेडे आणि IAS तुकाराम मुंढे यांच्या कार्याचा गौरव।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय व्यवस्थेत प्रामाणिकपणा, धाडसी निर्णयक्षमता आणि जनहिताला सर्वोच्च प्राधान्य देणाऱ्या अधिकाऱ्यांमध्ये IRS अधिकारी समीर वानखेडे आणि IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे यांची नावे विशेष आदराने घेतली जातात. आपल्या कर्तव्यनिष्ठ, निर्भीड आणि परिणामकारक कार्यपद्धतीमुळे या दोन्ही अधिकाऱ्यांनी राज्यातील प्रशासनाला वेगळी ओळख निर्माण करून दिली आहे.

IRS अधिकारी समीर वानखेडे यांनी अमली पदार्थांच्या अवैध तस्करीविरोधात कायद्याची कठोर अंमलबजावणी करत अनेक मोठ्या कारवायांद्वारे समाजहिताचे रक्षण करण्याचा प्रयत्न केला. कायद्यापुढे कोणताही व्यक्ती मोठा नसल्याचा संदेश देत त्यांनी आपल्या कार्यशैलीमुळे देशभरात वेगळी ओळख निर्माण केली.

दुसरीकडे, IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे, सध्या महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (FDA) विभागात कार्यरत असून, अन्नभेसळ, बनावट औषधे आणि सार्वजनिक आरोग्याशी संबंधित नियमांची कठोर अंमलबजावणी करण्यासाठी ओळखले जातात. नागरिकांना सुरक्षित व दर्जेदार अन्न आणि औषधे उपलब्ध व्हावीत, यासाठी त्यांनी अनेक ठोस निर्णय घेतले असून राज्यभरात प्रभावी मोहिमा राबवल्या आहेत.

प्रशासनातील पारदर्शकता, निष्पक्ष निर्णयप्रक्रिया आणि जनहितासाठीची अविरत बांधिलकी हीच राज्याच्या प्रगतीची खरी ताकद असल्याचे या दोन्ही अधिकाऱ्यांच्या कार्यातून अधोरेखित होते. त्यांच्या धाडसी आणि लोकाभिमुख निर्णयांमुळे शासनाविषयीचा जनतेचा विश्वास अधिक दृढ होत असल्याचे मत विविध स्तरांतून व्यक्त केले जात आहे.

"कर्तव्य प्रथम, जनहित सर्वोच्च" या मूल्यांचा अंगीकार करून कार्य करणारे अधिकारी हेच सक्षम, सुरक्षित आणि प्रगत महाराष्ट्राच्या उभारणीचे भक्कम आधारस्तंभ असल्याचे नागरिकांमध्ये बोलले जात आहे.
















आचार्य पवन त्रिपाठी: संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व का सशक्त चेहरा, भाजपा में निभा रहे अहम जिम्मेदारी।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आचार्य पवन त्रिपाठी संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक सरोकार और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका के कारण मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहचान रखते हैं। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े आचार्य पवन त्रिपाठी ने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

आचार्य पवन त्रिपाठी ने भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे और बाद में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्हें मुंबई भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं के समन्वय और जनसंपर्क को सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

राजनीतिक जीवन के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्हें देश के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़े विभिन्न कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह नियुक्ति उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का भी प्रमाण मानी जाती है।

मुंबई में विशेष रूप से उत्तर भारतीय (हिंदीभाषी) समाज के बीच आचार्य पवन त्रिपाठी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करते हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता से जुड़े कई अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

आचार्य पवन त्रिपाठी विभिन्न सरकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, वक्ता और मार्गदर्शक के रूप में भी आमंत्रित किए जाते हैं। संगठनात्मक अनुभव, समाजसेवा और जनसंपर्क के कारण वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व के संतुलित समन्वय के कारण आचार्य पवन त्रिपाठी ने मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की है। भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

















 

ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद में बड़ा फैसला: नवाब मलिक की भांजी और AIMIM पार्षद अयोग्य, बीएमसी की दो सीटें खाली।

 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में जाति प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर की जा रही जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला सामने आया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की दो महिला पार्षदों की सदस्यता उनके जाति प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बाद समाप्त कर दी गई है। इस कार्रवाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता नवाब मलिक की भांजी सनोबर मलिक और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की पार्षद नाज़िया पटेल को अयोग्य घोषित किया गया है।

राज्य सरकार ने यह निर्णय सक्षम जाति सत्यापन समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया। समिति ने जांच के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के जाति प्रमाणपत्रों को वैध नहीं माना। इसके बाद महाराष्ट्र के संबंधित प्रावधानों के तहत उनकी पार्षद सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।

सनोबर मलिक मुंबई महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 137, जबकि नाज़िया पटेल वार्ड क्रमांक 98 से निर्वाचित हुई थीं। दोनों वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थे। आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र और उसका सत्यापन अनिवार्य होता है। जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित होने के बाद संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त होने का प्रावधान है।

इस फैसले के बाद दोनों वार्डों की सीटें रिक्त हो गई हैं। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, उपचुनाव की तारीखों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी पड़ सकता है। जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर राज्य में पहले भी कई जनप्रतिनिधियों की सदस्यता पर सवाल उठ चुके हैं और विभिन्न मामलों की सुनवाई जारी है।

यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि आरक्षित श्रेणी की सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जाति प्रमाणपत्र की वैधता और उसका विधिवत सत्यापन कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि जांच में प्रमाणपत्र अमान्य पाया जाता है, तो निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।