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अंबरनाथ MIDC में ‘Cluster-2’ की कथित प्लॉटिंग पर सवाल; 400 KV लाइन के सुरक्षा क्षेत्र की जांच की मांग।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ के अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्र स्थित आनंदनगर MIDC परिसर में हाई-वोल्टेज विद्युत लाइन और टावरों के आसपास प्रस्तावित औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत एवं RTI आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 400 KV अतिरिक्त उच्चदाब विद्युत लाइन के कथित सुरक्षा क्षेत्र के आसपास औद्योगिक भूखंडों के आवंटन तथा ‘Cluster-2’ के नाम पर लगभग 100 से 120 प्लॉट विकसित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

मामले में अब मुख्य सवाल यह है कि संबंधित भूखंडों और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देते समय विद्युत सुरक्षा मानकों, लागू नियमों, स्वीकृत लेआउट और संबंधित NOC की तकनीकी वैधता की जांच किस स्तर पर की गई।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। उपलब्ध शिकायत/RTI मसौदे के आधार पर उठाए गए सवालों का वास्तविक उत्तर संबंधित मंजूरी फाइल, NOC, तकनीकी रिपोर्ट, स्थल निरीक्षण और अधिकृत विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

400 KV लाइन के पास 200 वर्ग मीटर भूखंड आवंटन का दावा

शिकायत में दावा किया गया है कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) की ओर से M/s Arul Cluster Association को 200 वर्ग मीटर का भूखंड आवंटित किया गया है और इस प्रक्रिया में संबंधित विद्युत प्राधिकरण की NOC का महत्व बताया गया है।

अब यह जांच का विषय है कि उक्त भूखंड 400 KV अतिरिक्त उच्चदाब विद्युत लाइन के Right of Way अथवा निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र के भीतर या उसके निकट आता है या नहीं।

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया है कि यदि संबंधित क्षेत्र विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील है, तो NOC जारी करने से पहले क्या प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण किया गया था? क्या वास्तविक सुरक्षा दूरी मापी गई? क्या टावर की स्थिति और विद्युत लाइन का लेआउट स्वीकृत नक्शे से मिलाया गया? और क्या MIDC ने संबंधित NOC का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन किया?

‘Cluster-2’ में 100 से 120 प्लॉट विकसित करने का आरोप

MIDC के चीफ इंजीनियर प्रकाश चव्हाण को दिए गए एक पत्र में अनिल लक्ष्मण भोईर की ओर से आरोप लगाया गया है कि एन्व्हेंशिया कंपनी के सामने से आर.आर. सर्कल तथा आर.आर. सर्कल से ठाकुरपाड़ा क्षेत्र तक हाई-वोल्टेज विद्युत लाइनों और टावरों के आसपास बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पत्र में दावा किया गया है कि ‘Cluster-2’ के नाम पर लगभग 100 से 120 प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं और भविष्य में इन पर विभिन्न कंपनियों तथा औद्योगिक निर्माणों की संभावना है।

हालांकि, इस कथित प्लॉटिंग की आधिकारिक मंजूरी, स्वीकृत लेआउट, भूखंडों की वास्तविक संख्या और विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुपालन की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

ऐसे में प्रमुख सवाल है कि यदि यह प्लॉटिंग अधिकृत है तो उसका स्वीकृत लेआउट क्या है और क्या उसे मंजूरी देते समय 400 KV लाइन के सुरक्षा क्षेत्र को ध्यान में रखा गया था?

GNP परियोजना पर भी उठे सवाल, लेकिन आरोपों की पुष्टि बाकी

मामले में GNP कंपनी, निखिल लटके और उदय ढाले की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परियोजना को मंजूरी दिलाने में इनकी भूमिका रही तथा कुछ MIDC अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मंजूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

हालांकि, यह एक गंभीर आरोप है और बिना आधिकारिक रिकॉर्ड या जांच के इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

इसलिए अब जांच के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि—

- GNP परियोजना का प्रस्ताव किस संस्था या व्यक्ति ने प्रस्तुत किया?

- परियोजना की जांच किन अधिकारियों ने की?

- निखिल लटके और उदय ढाले की आधिकारिक भूमिका क्या थी?

- क्या उनके नाम किसी फाइल, प्रस्ताव, बैठक, अनुशंसा या मंजूरी रिकॉर्ड में दर्ज हैं?

- परियोजना को मंजूरी देते समय विद्युत सुरक्षा से संबंधित कौन-सी तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध थी?

- अंतिम मंजूरी किस अधिकारी ने और किस आधार पर दी?

इन सवालों का उत्तर संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।

‘MIDC अधिकारियों की मिलीभगत’ के आरोप की भी होगी दस्तावेजों से जांच

शिकायत में MIDC अधिकारियों की कथित मिलीभगत से परियोजना को मंजूरी देने का आरोप लगाया गया है। लेकिन किसी अधिकारी की भूमिका या कथित मिलीभगत स्थापित करने के लिए केवल शिकायत अथवा आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

इसके लिए पूरी फाइल की जांच आवश्यक होगी—मसलन प्रस्ताव किस स्तर से शुरू हुआ, किस अधिकारी ने परीक्षण किया, किस तकनीकी विभाग ने रिपोर्ट दी, NOC किस अधिकारी ने स्वीकार की, स्थल निरीक्षण किसने किया और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई।

यदि फाइल रिकॉर्ड में नियमों के अनुरूप प्रक्रिया का पालन पाया जाता है, तो प्रशासन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, यदि दस्तावेजों में गंभीर विसंगति या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकता है।

RTI के जरिए मांगे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज

इस मामले में RTI के माध्यम से कथित रूप से पूरी मंजूरी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज हासिल करने का प्रयास किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—

- M/s Arul Cluster Association द्वारा प्रस्तुत NOC की प्रमाणित प्रति

- NOC के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और फाइल नोटिंग

- भूखंड आवंटन की पूरी नोटशीट और मंजूरी फाइल

- संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियां एवं अनुमोदन

- 24 नवंबर 2023 की बैठक के मिनट्स एवं रेजोल्यूशन

- Arul Cluster Association का पंजीकरण, संविधान और पदाधिकारियों की जानकारी

- सुरक्षा क्षेत्र में भूखंड आवंटन से संबंधित MIDC नियम, सरकारी आदेश एवं नीतिगत प्रावधान

- संबंधित लेआउट एवं तकनीकी दस्तावेज

- स्थल निरीक्षण और सुरक्षा जांच रिपोर्ट

मांगी गई हैं।

इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंजूरी प्रक्रिया वास्तव में किस आधार पर पूरी की गई थी।

NOC की वैधता से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका तकनीकी आधार

इस पूरे मामले में NOC सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक बनकर सामने आ रही है।

सिर्फ NOC मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी आवश्यक है कि NOC किस अधिकारी ने जारी की, कब जारी की गई, किस स्थल निरीक्षण के आधार पर जारी हुई और क्या उस समय वास्तविक सुरक्षा दूरी का तकनीकी परीक्षण किया गया था।

विशेष रूप से यह जांच जरूरी होगी कि—

क्या टावर की वास्तविक स्थिति का सर्वे किया गया था?

क्या विद्युत लाइन की स्थिति और प्रस्तावित निर्माण के बीच दूरी मापी गई थी?

क्या स्वीकृत लेआउट में विद्युत सुरक्षा क्षेत्र दर्शाया गया है?

क्या संबंधित विद्युत प्राधिकरण की तकनीकी सहमति उपलब्ध है?

और क्या MIDC ने NOC का स्वतंत्र सत्यापन किया?

400 KV लाइन के सुरक्षा कॉरिडोर पर तकनीकी जांच जरूरी

शिकायत में Central Electricity Authority (CEA) Regulations, 2022 और संबंधित भारतीय मानकों का हवाला दिया गया है। मसौदे में 400 KV ट्रांसमिशन लाइन के संदर्भ में लगभग 46 से 52 मीटर के Right of Way/सुरक्षा कॉरिडोर का उल्लेख भी किया गया है।

हालांकि, वास्तविक लागू सुरक्षा दूरी केवल किसी एक आंकड़े के आधार पर निर्धारित नहीं की जा सकती। यह संबंधित तकनीकी परिस्थितियों, टावर की संरचना, लाइन की व्यवस्था और उस समय लागू आधिकारिक नियमों के अनुसार संबंधित सक्षम तकनीकी प्राधिकरण द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

इसलिए इस मामले में कागजी दावे के बजाय संयुक्त स्थल सर्वेक्षण और आधिकारिक तकनीकी माप अधिक निर्णायक साबित होंगे।

BCC जारी करने से पहले संयुक्त स्थल निरीक्षण की मांग

अनिल भोईर की ओर से दिए गए पत्र में निर्माणों को Building Completion Certificate (BCC) देने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

मांग की गई है कि कार्यकारी अभियंता, अंबरनाथ; चीफ इंजीनियर, अंधेरी तथा संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त स्थल निरीक्षण किया जाए।

इसके बाद—

1. विद्युत लाइन और टावर से वास्तविक दूरी मापी जाए।

2. स्वीकृत लेआउट से मौके की स्थिति का मिलान किया जाए।

3. संबंधित NOC की तकनीकी जांच की जाए।

4. सुरक्षा मानकों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार की जाए।

5. रिपोर्ट के आधार पर ही BCC पर आगे निर्णय लिया जाए।

“BCC जरूरी है या मजदूरों की सुरक्षा?”—उठाया गया सवाल

शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि औद्योगिक विकास और रोजगार का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के साथ श्रमिकों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पत्र में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि हाई-वोल्टेज लाइन के आसपास निर्माण कार्य चल रहे हैं तो किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी।

इसी संदर्भ में पत्र का संदेश है कि कागजी मंजूरी, NOC या BCC किसी दुर्घटना के बाद होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते।

इसलिए मांग की गई है कि पहले वास्तविक सुरक्षा स्थिति का तकनीकी सत्यापन किया जाए और उसके बाद ही निर्माण संबंधी प्रमाणपत्रों पर निर्णय लिया जाए।

अनधिकृत प्लॉटिंग या नियम उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की मांग

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि जांच में अनधिकृत प्लॉटिंग, नियम-विरुद्ध निर्माण अथवा विद्युत सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित भू-स्वामियों, डेवलपर्स, कंपनियों अथवा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

यदि पहले से कोई NOC, लाइसेंस अथवा BCC जारी किया गया है, तो उसके आधार, निरीक्षण रिपोर्ट और तकनीकी अनुमोदन भी सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई है।

दस्तावेज गलत पाए जाने पर कार्रवाई की मांग, लेकिन अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

शिकायत के मसौदे में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान कोई दस्तावेज फर्जी, गलत अथवा गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त किया गया पाया जाता है, तो लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।

लेकिन वर्तमान उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी दस्तावेज के आधिकारिक रूप से फर्जी घोषित किए जाने या इस संबंध में कोई अपराध सिद्ध होने की पुष्टि नहीं है।

इसलिए फिलहाल इसे केवल जांच की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

15 दिनों में Action Taken Report की मांग

अनिल भोईर के पत्र में मामले की विस्तृत जांच कर 15 दिनों के भीतर लिखित Action Taken Report देने की मांग की गई है।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि संयुक्त स्थल निरीक्षण और सुरक्षा सत्यापन के बिना BCC देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

अब प्रशासन के सामने छह बड़े सवाल

इस पूरे मामले में दस्तावेज सामने आने तक निम्न सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं—

1. ‘Cluster-2’ की आधिकारिक स्थिति और मंजूरी क्या है?

2. लगभग 100 से 120 प्लॉट की कथित प्लॉटिंग किस स्वीकृत लेआउट के आधार पर की गई है?

3. 400 KV विद्युत लाइन और प्रस्तावित निर्माणों के बीच वास्तविक सुरक्षा दूरी कितनी है?

4. संबंधित NOC किस स्थल निरीक्षण और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर जारी की गई?

5. GNP परियोजना की मंजूरी में किन अधिकारियों ने फाइल की जांच की और अंतिम मंजूरी किस स्तर पर दी गई?

6. निखिल लटके और उदय ढाले की परियोजना में आधिकारिक भूमिका क्या थी?

RTI से सामने आएगी मंजूरी प्रक्रिया की पूरी तस्वीर?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका RTI से मिलने वाले दस्तावेजों की हो सकती है।

राजनीतिक आरोप, शिकायतें या मौखिक दावे अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन मूल फाइल, नोटशीट, NOC, तकनीकी रिपोर्ट, स्वीकृत लेआउट, बैठक के प्रस्ताव और स्थल निरीक्षण रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।

यदि सभी मंजूरियां नियमानुसार हुई हैं, तो संबंधित प्रशासन के पास दस्तावेजों के जरिए स्थिति स्पष्ट करने का अवसर होगा। दूसरी ओर, यदि दस्तावेजों में नियमों के उल्लंघन, विसंगतियां या सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं, तो आगे की जांच और जिम्मेदारी तय करने का आधार भी तैयार हो सकता है।

निष्कर्ष: औद्योगिक विकास जरूरी, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं

अंबरनाथ MIDC में औद्योगिक विकास रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन हाई-वोल्टेज विद्युत लाइन और टावरों के आसपास प्रस्तावित निर्माण के मामले में सार्वजनिक एवं श्रमिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘Cluster-2’ की कथित प्लॉटिंग से लेकर 400 KV विद्युत कॉरिडोर, NOC, भूखंड आवंटन, GNP परियोजना और BCC तक—हर स्तर पर दस्तावेजी और तकनीकी सत्यापन आवश्यक दिखाई देता है।

इस पूरे प्रकरण में फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने के बजाय यह जरूरी है कि MIDC और संबंधित विद्युत प्राधिकरण संयुक्त स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें और RTI के माध्यम से मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं।

आखिर सवाल केवल यह नहीं है कि फाइल पर मंजूरी किसने दी, बल्कि यह भी है कि क्या मौके पर वास्तविक सुरक्षा मानकों का पालन हुआ?

कागज पर मंजूरी महत्वपूर्ण है या मजदूरों की सुरक्षा—इसका जवाब अब दस्तावेजों, तकनीकी जांच और प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण से ही सामने आना चाहिए।

















अंबरनाथ में दो युवकों से तलवारें मिलने का पुलिस का दावा; मनाही आदेश उल्लंघन का केस दर्ज, नोटिस देकर रिहाई पर सवाल—कार्रवाई में कथित खानापूर्ति को लेकर चर्चा तेज।


(फाइल इमेज) 

अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजीनगर पुलिस थाना क्षेत्र में दो युवकों के कब्जे से लोहे की तलवारें बरामद किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 5 अक्टूबर 2026 को हनुमान नगर चौक, समर्थ रिक्शा स्टैंड के पास, कानसाई-ओम दर्शन अपार्टमेंट परिसर के आसपास की गई।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मामले में सिद्धेश हेमंत शिंदे (21) और अनिकेत अशोक कसारे (29) के खिलाफ अपराध क्रमांक I-425/2026 दर्ज किया गया है। मामला भारतीय हथियार कानून की धारा 4 व 25, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) तथा महाराष्ट्र पुलिस कानून की धारा 37(1) और 135 के तहत दर्ज किए जाने का उल्लेख दस्तावेज़ में है।

दो तलवारें जब्त किए जाने का उल्लेख

पुलिस द्वारा दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से दो लोहे की तलवारें बरामद की गईं। इनमें एक तलवार की अनुमानित कीमत ₹350 और दूसरी की ₹250 बताई गई है। दोनों तलवारों की कुल अनुमानित कीमत ₹600 दर्ज की गई है।

दस्तावेज़ के अनुसार, पहली तलवार की कुल लंबाई करीब 33 इंच और दूसरी की करीब 31 इंच बताई गई है। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों हथियारों का विस्तृत माप भी दर्ज किया गया है।

मनाही आदेश लागू होने के दौरान हथियार रखने का आरोप

पुलिस के अनुसार, ठाणे शहर के पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा) द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी मनाही आदेश के तहत 2 अक्टूबर 2026 से 16 अक्टूबर 2026 तक तलवार, भाला, बंदूक, लाठी अथवा अन्य खतरनाक हथियार रखने पर प्रतिबंध लागू था।

पुलिस रिकॉर्ड में आरोप है कि इसी मनाही आदेश के प्रभावी रहने के दौरान दोनों युवकों के पास तलवारें पाई गईं। इसी आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

BNSS 35(3) के तहत नोटिस

महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध पुलिस दस्तावेज़ के अनुसार दोनों आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि पुलिस ने जांच में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया है। यह अपने-आप में दोष सिद्ध होने या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक राजकुमार नरुटे कर रहे हैं। घटनास्थल का दौरा पुलिस अधिकारी, डी.बी. स्टाफ तथा बीट मार्शल के कर्मचारियों द्वारा किए जाने का भी उल्लेख दस्तावेज़ में है।

मामले में ई-साक्ष्य संकलित कर लिंक किए जाने की जानकारी भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है।

नोट: यह समाचार उपलब्ध पुलिस दस्तावेज़ में दर्ज जानकारी पर आधारित है। आरोपों और पुलिस के दावों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। संबंधित आरोपियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

















‘बंशी-बिर्जू’ नाम से चर्चित कथित जुआ अड्डे पर पुलिस की कार्रवाई? अंबरनाथ शिवाजीनगर थाने के रिकॉर्ड में 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज।


 

अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजीनगर पुलिस थाना क्षेत्र में कथित मटका-जुआ गतिविधि के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को शिवाजी चौक के पास, समुद्र बार के बगल की एक दुकान में कार्रवाई की गई। इस मामले में महाराष्ट्र जुआ प्रतिबंध अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत अपराध क्रमांक 424/2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस दस्तावेज के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुल ₹14,200 नकद तथा मटका-जुआ से संबंधित बताई गई सामग्री बरामद की गई। मामले में सात व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार इनमें कुछ व्यक्तियों पर जुआ खिलाने तथा अन्य पर जुआ खेलने के लिए मौजूद होने का आरोप है। सभी संबंधित आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिए जाने की जानकारी दस्तावेज में दर्ज है।

दो व्यक्तियों पर जुआ खिलाने का आरोप

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी क्रमांक 1 धरम रूपलाल गौर के कब्जे से ₹5,100 नकद तथा जुआ खेलने में इस्तेमाल होने वाली बताई गई सामग्री बरामद हुई। वहीं आरोपी क्रमांक 2 नादिर निअमतउल्ला खान के कब्जे से ₹4,300 नकद और मटका-जुआ से संबंधित बताई गई एक चकरी तथा अन्य सामग्री बरामद होने का उल्लेख है।

इसके अलावा सबीर हबीब शेख, अमर श्रीपति काले, मुरलीधर सुकण्या पाटिल, आकम अलीहुसैन शेख और संजय बाबू गरड के कब्जे से अलग-अलग रकम बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस दस्तावेज में दी गई है।

कुल ₹14,200 की बरामदगी

दस्तावेज के अनुसार बरामद नकदी का विवरण इस प्रकार है:

- धरम रूपलाल गौर — ₹5,100

- नादिर निअमतउल्ला खान — ₹4,300

- आकम अलीहुसैन शेख — ₹1,350

- सबीर हबीब शेख — ₹1,200

- अमर श्रीपति काले — ₹900

- मुरलीधर सुकण्या पाटिल — ₹750

- संजय बाबू गरड — ₹600

कुल बरामदगी — ₹14,200।

पुलिस रिकॉर्ड में जुआ खेलने-खिलाने से संबंधित सामग्री, जिसमें पासे/गुड़गुड़ी, चकरी, अंक वाले प्लास्टिक बैनर और अन्य सामान शामिल होने का उल्लेख है। मामले में ई-साक्ष्य भी प्राप्त किए जाने की जानकारी दर्ज है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी का भी उल्लेख

पुलिस दस्तावेज के अनुसार, घटनास्थल का दौरा करने वाले अधिकारियों में शिवाजीनगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटिल, पुलिस निरीक्षक गहिनीनाथ गमे तथा पुलिस उपनिरीक्षक नरूटे का उल्लेख है। घटनास्थल का दौरा 5 अक्टूबर 2026 को रात 00:05 बजे से आगे किए जाने की जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।

मामले की प्राथमिक जांच पुलिस उपनिरीक्षक नरूटे द्वारा किए जाने तथा अपराध दर्ज करने की कार्रवाई पुलिस हवलदार एस.एम. सालुंखे द्वारा किए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।

‘बंशी-बिर्जू’ अड्डे से जोड़ने की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि जरूरी

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर इसे कथित रूप से ‘बंशी-बिर्जू’ नाम से चर्चित जुआ अड्डे से जोड़कर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस दस्तावेज में ‘बंशी-बिर्जू’ नाम को आरोपी के रूप में दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इस नाम को किसी व्यक्ति या कथित जुआ अड्डे से जोड़कर निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।

इसी तरह, यह दावा कि संबंधित गतिविधि “वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की नाक के नीचे” चल रही थी, एक आरोप/दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुलिस रिकॉर्ड में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटिल का घटनास्थल पर दौरा किए जाने का उल्लेख जरूर है।

आगे की जांच पर नजर

मामले में पुलिस द्वारा बरामद सामग्री, नकदी और ई-साक्ष्य के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। कार्रवाई के पीछे कथित जुआ नेटवर्क का दायरा क्या था, क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या संगठित तंत्र सक्रिय था और ‘बंशी-बिर्जू’ नाम से की जा रही चर्चाओं का वास्तविकता से कोई संबंध है या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्रालय टाइम्स की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि इस समाचार में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज होना और आरोप सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम न्यायालय और जांच प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

















अंबरनाथ के शिवजी नगर पुलिस स्टेशन के आहते से जब्त ट्रक ले जाने की कथित कोशिश! मौके पर पकड़े जाने के बाद कार्रवाई को लेकर उठे सवाल.!


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में जब्त किए गए ट्रक को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कोशिश किए जाने के आरोप सामने आए हैं। दावा है कि यह प्रयास दिनदहाड़े किया गया और संबंधित व्यक्ति को मौके पर पकड़ भी लिया गया। हालांकि, उसके खिलाफ बाद में क्या कानूनी कार्रवाई की गई, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर की शाम शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के परिसर में खड़े सरकारी पानी की पाइपों से लदे जब्त ट्रक को कथित रूप से बाहर ले जाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने किसी अधिकारी का नाम लेकर पुलिस पर प्रभाव डालने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटील ने मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति को पकड़ लिया।

हालांकि, इस कथित घटना के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ रॉबरी, चोरी के माल को हटाने के प्रयास अथवा अन्य लागू कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

27 सितंबर को कथित चोरी के मामले में ट्रक जब्त

इस मामले की पृष्ठभूमि 27 सितंबर की रात से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, अंबरनाथ पूर्व क्षेत्र से सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा था। एसीपी शैलेश काळे के मार्गदर्शन में पीएसआई केशव हसगोले की टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने और पाइपों से लदे MH-01-EW-4252 नंबर के ट्रक को कब्जे में लेकर शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन परिसर में जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि ट्रक में मौजूद सामग्री की जांच तथा उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर पुलिस द्वारा पड़ताल की जा रही थी। ऐसे में जांच के दायरे में मौजूद वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कथित कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

BNSS की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख

मामले से जुड़ी जानकारी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख किया जा रहा है। इस प्रावधान के तहत पुलिस को ऐसी स्थिति में बिना वारंट कार्रवाई करने का अधिकार हो सकता है, जब किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसी वस्तु पाए जाने का उचित संदेह हो जो चोरी की संपत्ति हो।

हालांकि, इस प्रावधान का वास्तविक अनुप्रयोग मामले के उपलब्ध तथ्यों, पुलिस की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए इस मामले में धारा 35(1)(e) के तहत हुई कार्रवाई और उसके बाद की प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जब्त ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की भी चर्चा

मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि जांच के दौरान न्यायालय के समक्ष संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया गया था और जब्त ट्रक को जांच के दायरे में रखा गया था। इसके बावजूद बाद में ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

यदि ऐसा हुआ है, तो ट्रक को किस आदेश, किस प्रक्रिया और किन शर्तों के आधार पर छोड़ा गया, यह स्पष्ट होना आवश्यक है। साथ ही, पुलिस स्टेशन परिसर से उसी वाहन को दोबारा बाहर ले जाने के कथित प्रयास की स्थिति में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

₹1.70 लाख के कथित लेन-देन का आरोप

इस पूरे प्रकरण के बीच एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर ₹1.70 लाख लिए जाने और बाद में रकम वापस किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इस कथित आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

ऐसे आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए संबंधित व्यक्तियों के बयान, आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—पुलिस स्टेशन परिसर में सुरक्षा और जब्त माल की निगरानी पर

यदि पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को वास्तव में बाहर ले जाने का प्रयास किया गया था, तो यह केवल एक व्यक्ति की कथित हरकत तक सीमित मामला नहीं माना जा सकता। इससे जब्त संपत्ति की सुरक्षा, पुलिस स्टेशन की निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे सवाल भी उठते हैं।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि कथित प्रयास में कौन-कौन लोग शामिल थे, वाहन को बाहर ले जाने का उद्देश्य क्या था और घटना के बाद पुलिस ने कौन-सी कानूनी कार्रवाई की।

डीसीपी स्तर पर जांच की मांग

घटना से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब निगाहें उल्हासनगर जोन-4 के डीसीपी सचिन गोरे की ओर हैं। यदि आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

अब बड़ा सवाल यही है—पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को बाहर ले जाने की कथित कोशिश के मामले में आखिर आधिकारिक तौर पर क्या कार्रवाई हुई?





















गणेशोत्सव में डीजे की तेज आवाज पर लगाम, अंबरनाथ-बदलापुर की सोसायटियों के लिए नए निर्देश।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र में प्रशासन ने हाउसिंग सोसायटियों के लिए सख्त रुख अपनाया है। सोसायटी परिसरों में निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करते हुए तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनिक्षेपक उपकरण बजाए जाने की शिकायत मिलने पर संबंधित सोसायटी के पदाधिकारियों और प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

इस संबंध में अंबरनाथ तालुका के सहायक निबंधक राजेंद्र विठ्ठल मरकड ने 8 सितंबर 2026 को अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सहकारी संस्थाओं की प्रबंधन समितियों को परिपत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन अनिवार्य

प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर निर्धारित नियमों और ध्वनि सीमा का पालन करना आवश्यक है। गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में ध्वनिक्षेपक या डीजे का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मानकों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

यदि किसी सोसायटी परिसर से निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे या लाउडस्पीकर बजाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो मामले में संबंधित सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष तथा प्रबंधन समिति के सदस्यों की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों को परेशानी का मुद्दा

गणेशोत्सव और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से आसपास रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों, विद्यार्थियों तथा बीमार लोगों को परेशानी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सोसायटी पदाधिकारियों से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक उत्सव और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान नागरिकों की सुविधा तथा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्वनि की निर्धारित सीमा का पालन किया जाना चाहिए।

14 से 25 सितंबर तक विशेष सतर्कता

गणेशोत्सव की अवधि में 14 से 25 सितंबर 2026 के दौरान सोसायटियों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सोसायटी प्रबंधन से अपेक्षा की गई है कि कार्यक्रमों के दौरान ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन न हो और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों के पदाधिकारियों के सामने उत्सव आयोजन के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी रहेगी।

सोसायटी पदाधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी

प्रशासन के इस परिपत्र के बाद अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सोसायटियों में गणेशोत्सव के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की संभावना है। नियमों का पालन कराने में सोसायटी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस कदम का उद्देश्य गणेशोत्सव जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के दौरान उत्सव का माहौल बनाए रखते हुए ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करना बताया गया है।



















‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना पर बढ़ा विवाद, अनिल भोईर ने मांगी कानूनी और पर्यावरणीय पुनर्तपासणी।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ शहर में नागरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर नगरपालिका की विशेष सभा आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नागरिक एवं प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन आनंदनगर औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर अपेक्षित चर्चा न होने का मुद्दा अब राजनीतिक और नागरिक स्तर पर उठने लगा है।

ठाकरे गुट के कल्याण उपजिलाप्रमुख एवं अंबरनाथ बचाव कृति समिति के अध्यक्ष अनिल भोईर ने इस मामले में महायुति से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए परियोजना के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की है।

विशेष सभा के एजेंडे में परियोजना क्यों नहीं?

अनिल भोईर के अनुसार, नगरपालिका की विशेष सभा में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से सीधे जुड़े प्रस्तावित जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया प्रकल्प को बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।

भोईर का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि शहर के कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अध्ययन एवं प्रशिक्षण दौरों में हिस्सा लेते हैं, तो ऐसे में प्रस्तावित परियोजना के संभावित प्रभावों पर भी सार्वजनिक और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

‘अध्ययन दौरा’ परियोजना स्थल से शुरू करने की मांग

परियोजना को लेकर वास्तविक स्थिति समझने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा संबंधित स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किए जाने की मांग भी सामने आई है।

भोईर ने कहा कि यदि परियोजना के संबंध में अध्ययन किया जाना है, तो सबसे पहले मानसुदेवी-गोवड़ी परिसर स्थित प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना स्थल का दौरा कर वहां की मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, परियोजना से स्थानीय क्षेत्र में पर्यावरण, यातायात, कचरा प्रबंधन और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित प्रभावों का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाना आवश्यक है।

कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की दोबारा जांच की मांग

अनिल भोईर ने परियोजना की कानूनी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रिया की पुनर्तपासणी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियों, पर्यावरणीय मानकों और नागरिक हितों से जुड़े पहलुओं की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर महायुति से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद इस संवेदनशील विषय पर स्पष्टता क्यों नहीं सामने आ रही है।

नागरिकों की शंकाओं का समाधान जरूरी

परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों में यदि किसी प्रकार की आशंका या चिंता है, तो उसका समाधान तथ्यों और अधिकृत जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर निर्णय लेते समय विशेषज्ञों की राय, संबंधित विभागों की रिपोर्ट और लागू नियमों का भी संज्ञान लिया जाना जरूरी है।

भोईर ने मांग की है कि परियोजना को लेकर नागरिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया जाए।

आंदोलन की चेतावनी, संघर्ष जारी रखने का संकेत

अनिल भोईर ने परियोजना के खिलाफ नागरिकों के हित में संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों की चिंताओं का समाधान नहीं होता और परियोजना के पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिलती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

अब जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नजर

जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर उठे सवालों के बाद अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाली नगरपालिका बैठकों में क्या इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा होती है, क्या परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाता है और क्या इसके कानूनी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा होगी—इन सवालों पर अंबरनाथ के नागरिकों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल, ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना को लेकर उठी मांगों ने अंबरनाथ में नागरिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





















अंबरनाथ में शिवसेना की अंदरूनी खींचतान फिर आई सामने, शिवसेना के वरिष्ठ नेता अरविंद वाळेकर ने विधायक डॉ. बालाजी किणीकर पर जमकर निशाना साधा; राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ की राजनीति में शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर बढ़ते मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नगराध्यक्ष अरविंद वाळेकर ने अपने हालिया बयान में बिना किसी का नाम लिए विधायक डॉ. बालाजी किणीकर के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

अरविंद वाळेकर ने कहा कि अंबरनाथ की जनता आज भी पानी, बिजली, सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान इन समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों और शक्ति प्रदर्शन पर अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जनता विकास और जवाबदेही चाहती है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

वाळेकर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक आम नागरिकों की समस्याओं की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों को अब जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और उचित समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।

उनके इस बयान को शिवसेना के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संगठन के भीतर नेतृत्व और कार्यशैली को लेकर असंतोष धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रहा है। पार्टी के नेताओं के सार्वजनिक बयान संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

हालांकि शिवसेना नेतृत्व पहले भी अंबरनाथ में किसी प्रकार की गुटबाजी से इनकार करता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले नेताओं के बयानों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद वाळेकर के ताजा बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि अंबरनाथ इकाई में सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेदों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल वाळेकर के बयान ने अंबरनाथ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजरें शिवसेना नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।


















22 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले में गिरफ्तार अंबरनाथ के व्यापारी निखिल वलेचा को कल्याण सेशन्स कोर्ट से मिली जमानत।

अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

22 करोड़ रुपये के बहुचर्चित जीएसटी घोटाले में गिरफ्तार किए गए अंबरनाथ के युवा उद्यमी निखिल नरेश वलेचा (उम्र 28 वर्ष) को कल्याण सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने वलेचा को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया, जिससे व्यापारी वर्ग में हलचल के बीच राहत की भावना देखी जा रही है।

निखिल वलेचा, जो अंबरनाथ में बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई व्यवसाय से जुड़े हैं, को 17 जुलाई 2025 को मुंबई के मझगांव इलाके से राज्य कर विभाग (State Tax Department) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। उन पर महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 132(1)(c) के तहत फर्जी इनवॉइस के माध्यम से लगभग ₹20.20 करोड़ की जीएसटी चोरी का गंभीर आरोप है।

📌 कोर्ट ने कहा – निरंतर हिरासत उचित नहीं

माननीय सत्र न्यायाधीश पी. आर. अस्‍हतुरकर ने यह मानते हुए जमानत स्वीकृत की कि आरोपी की निरंतर न्यायिक हिरासत 'पूर्व-ट्रायल दंड' जैसी प्रतीत हो रही है, जो न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

📌 वकील की दलील – सहयोग कर रहे हैं वलेचा, झूठा फंसाया गया

सुनवाई के दौरान वलेचा के अधिवक्ता अर्जुन भोजराज जेसवानी ने यह प्रस्तुत किया कि:

वलेचा एक सम्मानित व्यापारी हैं और 2023 से जांच में पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।

उन्होंने विभाग को ₹2.5 करोड़ की कर राशि स्वयं जमा कराई है।

अब तक कोई औपचारिक एफआईआर या चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, जो गिरफ्तारी को संदिग्ध बनाता है।

📌 जमानत की शर्तें

न्यायालय ने वलेचा को ₹50,000 के निजी मुचलके एवं समान राशि की एक जमानती (surety) की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, जमानत की सख्त शर्तें निर्धारित की गईं:

आरोपी जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे।

किसी भी प्रकार से सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

जमानत अवधि में कोई आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

📌 क्या है पूरा मामला?

विभागीय जांच में यह सामने आया कि वलेचा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी फर्म के माध्यम से फर्जी कंपनियों के नाम पर इनवॉइस जनरेट किए, जिससे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी की गई।

हालांकि, अब जब अदालत ने उन्हें जमानत दी है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रकरण की आगे की जांच किस दिशा में जाती है और क्या विभाग उन पर चार्जशीट दायर करता है या नहीं।

📝 नोट: यह मामला व्यापारिक और कर प्रशासन से जुड़े बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है, और इसकी कानूनी व प्रशासनिक प्रगति पर उद्योग जगत की पैनी नजर बनी हुई है।














नशा मुक्त भारत को नई ऊर्जा: IRS अधिकारी समीर वानखेडे ने अंबरनाथ में भरी हुंकार, नारी शक्ति के योगदान को बताया निर्णायक।


 






अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी 

नशा मुक्त भारत अभियान को गति देते हुए वरिष्ठ IRS अधिकारी समीर वानखेडे ने अंबरनाथ में एक प्रभावशाली कार्यक्रम में हिस्सा लिया और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए मजबूत जनजागृति का संदेश दिया। यह महत्वपूर्ण आयोजन प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. कृष्ण भावले और नगरसेवक श्री सुभाष सालुंखे के संयोजन में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जनसामान्य, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान श्री वानखेडे ने अपने संबोधन में कहा, “नशा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की नींव को कमजोर करता है। आज जरूरत है ऐसे प्रयासों की जो मानसिक और सामाजिक चेतना को जागृत करें। नशा मुक्ति एक आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है।”

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘नारी शक्ति कार्यक्रम’ रहा, जिसमें महिला सशक्तिकरण की भावना को नए आयाम मिले। इस अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद की सम्माननीय सदस्य श्रीमती मनीषा कयांडे, अंबरनाथ के लोकप्रिय विधायक डॉ. बालाजी किनीकर तथा शिवसेना कल्याण जिला प्रमुख श्री गोपाल लांडे मंच पर उपस्थित रहे।

इस मंच से बोलते हुए श्री वानखेडे ने कहा, “नारी शक्ति ही परिवर्तन की असली वाहक है। यदि महिलाएं नशा मुक्ति अभियान में अग्रसर होती हैं, तो समाज को एक नई दिशा मिलेगी। माताएं, बहनें और बेटियां यदि नशे के खिलाफ खड़ी हो जाएं, तो यह सामाजिक बुराई खुद समाप्त हो जाएगी।”

कार्यक्रम में युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और नशा मुक्त भारत की शपथ ली। आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी सामाजिक संदेशों का प्रभावी संप्रेषण किया गया।

यह आयोजन न केवल अंबरनाथ के लिए बल्कि पूरे महाराष्ट्र में नशा मुक्ति और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल बनकर उभरा है। समीर वानखेडे की सक्रिय भागीदारी ने अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की है।



















अंबरनाथ में नशामुक्ति की नई पहल: IRS अधिकारी समीर वानखेडे और क्रांति रेडकर की होगी विशेष उपस्थिति।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

शहर के प्रख्यात नगरसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता मा. सुभाष साळुंके  के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य नशामुक्ति शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर रविवार, 11 मई को सुबह 10 बजे से रोटरी क्लब हॉल, वड़वली स्टेशन, अंबरनाथ (पूर्व) में आयोजित किया जाएगा।

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य शराब और अन्य व्यसनों की चपेट में आए नागरिकों को नशामुक्त कर एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर जीवन की ओर प्रेरित करना है। कार्यक्रम में समुपदेशन, औषधि और उपचार तीनों का समन्वय किया जाएगा।

विशेष आकर्षण:

पहले 100 पंजीकरण करने वालों को मुफ्त उपचार

हार्मोन इंजेक्शन थेरपी द्वारा 48 घंटे में दारू की भावना बंद करने का उपचार

नाममात्र शुल्क (₹100/-) में औषधि उपलब्ध

विशेष उपस्थितियाँ:

मा. समीर वानखेडे (IRS), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी

प्रसिद्ध अभिनेत्री मा. क्रांति रेडकर

शिवसेना नेता मा. सुभाष साळुंके के मार्गदर्शन में

आयोजन की प्रमुख: सौ. सुवर्णा साळुंके

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कृष्णचंद्र भागले (नशामुक्ति विशेषज्ञ) एवं सहयोगी मा. सुनील कदम इस शिविर को सफलता की ओर ले जाने हेतु प्रयासरत हैं।

पंजीकरण और जानकारी हेतु संपर्क करें: 9423080608 / 8788515075












अंबरनाथ के पालेगांव से कमलेश वध्या लापता, परिजन चिंतित – नागरिकों से सहयोग की अपील।


अंबरनाथ (पालेगांव): दिनेश मीरचंदानी 

23 अप्रैल की रात करीब 10 बजे से पालेगांव स्थित सीजन पार्क बिल्डिंग से कमलेश चुर्मल वध्या रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। इस घटना से परिजनों में गहरी चिंता और इलाके में हलचल मच गई है।

परिजनों ने तुरंत अंबरनाथ शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तलाश शुरू कर दी है और नागरिकों से सहयोग की अपील की है।

पुलिस स्टेशन संपर्क सूत्र:

शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन, अंबरनाथ – 0251-2607020

यदि किसी को कमलेश वध्या के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त हो, तो कृपया निम्नलिखित संपर्क नंबरों पर तुरंत सूचित करें:

शंकरलाल वध्या (भाई): 9604613341

मोहित पंजाबी (दामाद): 9923235588

कमलेश वध्या के परिवारजन बेहद चिंतित हैं और आम जनता से सहयोग की अपील कर रहे हैं। यदि किसी ने उन्हें हाल ही में देखा हो या उनके बारे में कोई जानकारी हो, तो कृपया उपरोक्त नंबरों पर तत्काल संपर्क करें।












प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे महाराष्ट्र में 9 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों का वर्चुअल शुभारंभ, अंबरनाथ समेत कई जिलों को मिलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की सौगात।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में नवनिर्मित 9 शासकीय मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बुधवार, 09 अक्टूबर 2024 को दोपहर 1:30 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में अंबरनाथ (ठाणे) जिला भी प्रमुख रूप से शामिल है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा योगदान देगा।

महाराष्ट्र सरकार के चिकित्सा शिक्षण एवं औषधीय द्रव्य विभाग के तहत इन नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जो राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त बनाएंगे और युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सुनहरे अवसर प्रदान करेंगे। इन कॉलेजों के शुरू होने से डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा सकेंगी।







इस कार्यक्रम का आयोजन राजकीय शिष्टाचार के अनुसार किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जिलों के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। अंबरनाथ के सरकारी मेडिकल कॉलेज का प्रबंधन इस कार्यक्रम के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिला प्रशासन द्वारा इस समारोह का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस कार्यक्रम से जुड़ सकें।

प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम महाराष्ट्र के चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। नए मेडिकल कॉलेजों के जरिए न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा में विस्तार होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ आम जनता को भी बड़ी राहत मिलेगी।

अंबरनाथ में निसार्ग ग्रीन सोसायटी के निवासियों ने प्रदूषण के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है।


 




अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

प्रदूषण के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान

निसार्ग ग्रीन सोसायटी के निवासियों ने स्थानीय एमआईडीसी क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों द्वारा उत्पन्न प्रदूषण के खिलाफ एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान में शिवसेना नेता अरविंद वालेकर ने भी समर्थन दिया है।

निवासियों की मांग

निवासियों ने सरकार से मांग की है कि वे औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करें, ताकि उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को रोका जा सके।

उद्देश्य

इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय में जागरूकता फैलाना और प्रदूषण के खिलाफ एकजुटता को बढ़ावा देना है।






अंबरनाथ में रासायनिक गैस लीक का कहर धुएं का साम्राज्य फैला, नागरिकों में घबराहट अग्निशमन दल ने पाया नियंत्रण, कोई जानहानी नहीं प्रशासन ने की सुरक्षा के लिए अपील।


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

अंबरनाथ शहर के मोरिवली एमआईडीसी परिसर में 12 सितंबर की शाम को एक रासायनिक गैस लीक की घटना सामने आई। इस घटना में एक रासायनिक कंपनी से गुरुवार की रात देर से गैस लीक होने से पूरे शहर में धुएं का साम्राज्य फैल गया।

नागरिकों में घबराहट फैल गई और कई लोगों को आंखों और गले की समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, अग्निशमन दल को गैस लीक पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली और किसी भी प्रकार की जानहानी नहीं हुई।

प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने और अधिक जानकारी के लिए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।





महाराष्ट्र : अंबरनाथ में केमिकल फैक्ट्री में गैस लीक, शहर में फैला जहरीला धुआं।


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

ठाणे जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। अंबरनाथ की मोरिवली औद्योगिक क्षेत्र में एक केमिकल कंपनी में गैस लीक हुई है, जिससे जहरीला धुआं पूरे शहर में फैल गया है। अंबरनाथ शहर की हवा में केमिकल का धुआं फैल गया है, जिससे रेलवे मार्ग पर भी धुएं का साम्राज्य है और दृश्यता कम हो गई है।

शहर भर में जहरीले धुएं के फैलने से नागरिकों में भय का माहौल है। हालांकि, इस गैस लीक से किसी भी प्रकार की नुकसान की खबर नहीं है। गैस लीक के कारणों की जांच की जा रही है और प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

रात के समय मोरिवली एमआईडीसी में एक केमिकल कंपनी से गैस लीक होने लगी, जिससे पूरे अंबरनाथ शहर में धुआं फैल गया है। नागरिकों को परेशानी हो रही है, जिसमें आंखों में जलन, गले में खराश और मिचली जैसी समस्याएं शामिल हैं।





अंबरनाथ में पहली बार होगा मसाने की होली का आयोजन।


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र के अंबरनाथ शहर के प्राचीन शिव मंदिर में पहली बार विश्व प्रसिद्ध काशी मर्णिकर्णिका घाट की प्रसिद्ध मसाने की होली का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन 1 सितंबर 2024 को शाम 6:00 बजे होगा।

आयोजकों में विजय चाहू पाटील, रवि चाहू पाटील, युवराज विजय पाटील और रुद्रराज रवि पाटील शामिल हैं।

यह आयोजन शहर में पहली बार हो रहा है और इसे लेकर लोगों में उत्साह है। मसाने की होली एक पारंपरिक कार्यक्रम है जो काशी के मर्णिकर्णिका घाट पर आयोजित किया जाता है।






पत्रकार सरंक्षण कायद्याची अमलबजावणी झालीच पाहिजे अंबरनाथ तालुक्यातील पत्रकारांचे तहसीलदारांना निवेदन..!


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

देशातील पत्रकारांच्या सुरक्षिततेसाठी सरकारने पत्रकार सरंक्षण कायदा अस्तित्वात आणला, परंतु या कायद्याची पूर्णपणे अंमलबजावणी होताना दिसत नाही.

मागील आठवड्यात बदलापूर शहरात एका अतिसंवेदनशील घटनेची बातमी करणाऱ्या एका महिला पत्रकाराला येथील माजी नगराध्यक्ष वामन म्हात्रे यांनी आवाच्य भाषेत वार्तालाप करून अपमानित केले. बदलापूर पोलिसांनी या प्रकरणी तपास करून वामन म्हात्रे यांच्यावर अट्रोसिटी आणि विनयभंग असा गुन्हा दाखल केला. परंतु एका महिला पत्रकारासोबत घडलेल्या या प्रकरणात पोलिसांना पत्रकार सुरक्षा कायदा का आठवला नाही ?, असा प्रश्न उपस्थित करत अंबरनाथ तालुक्यातील पत्रकारांनी बुधवारी अंबरनाथ तहसीलदारांना लेखी निवेदन देऊन सदर प्रकरणात दोषीवर पत्रकार सुरक्षा कायद्यांतर्ग कारवाई करण्यात यावी अशी मागणी केली आहे.





अंबरनाथ प्राचीन शिवमंदिर में श्रावण हिंदू महोत्सव में जगदगुरु का प्रवचन, शैक्षणिक उपक्रमों के तहत स्कूलों को मिला संगणक और दिव्यांगों इलेक्ट्रिक व्हिल चेयर वितरित किए गए।


 


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ प्राचीन शिवमंदिर में श्रावण हिंदू धर्म संस्कृती संवर्धन महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें जगदगुरु रामानंदाचार्य श्री स्वामी नरेंद्रचार्यजी महाराज (नानिज) ने प्रवचन दिया।

सामाजिक सरोकार के साथ धार्मिक आयोजन

इस अवसर पर महाराज ने अपने अनुयायियों और उपस्थित लोगों को संबोधित किया और अपने मनोभावे दर्शन दिए। साथ ही, श्रावण हिंदू धर्म संस्कृती संवर्धन महोत्सव के आयोजकों और प्राचीन शिवमंदिर के पुजारियों ने शैक्षणिक उपक्रमों के तहत उल्हासनगर के 5 स्कूलों को 2-2 संगणक, वाटर कुलर और दिव्यांगों के लिए इलेक्ट्रिक व्हिल चेयर वितरित किए।

सामाजिक कार्यों में अग्रणी

इस अवसर पर श्री विजय चाहू पाटील, श्री रवी चाहु पाटील, श्री युवराज विजय पाटील और कु. रुद्रराज रवी पाटील उपस्थित थे। यह आयोजन सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए जाने जाने वाले प्राचीन शिवमंदिर की ओर से किया गया था।




अंबरनाथ में 9 साल की लड़की के साथ लैंगिक अत्याचार, आरोपी गिरफ्तार।


अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र में एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। अंबरनाथ में 9 साल की लड़की के साथ लैंगिक अत्याचार की घटना हुई है। आरोपी ने लड़की को अश्लील वीडियो दिखाकर अत्याचार किया।

यह घटना अंबरनाथ पश्चिम के एक परिसर में सार्वजनिक शौचालय के पास हुई। आरोपी का नाम संतोष कांबळे है और उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

इस मामले में लैंगिक अत्याचार और पॉक्सो कानून के तहत केस दर्ज किया गया है। बदलापुर में हाल ही में हुई एक समान घटना के बाद यह घटना सामने आई है, जिससे इलाके में आक्रोश है।




अंबरनाथ येथील प्राचीन शिवमंदिर नारळी पौर्णिमा उत्सव साजरा करण्यात येणार आहे।



अंबरनाथ : दिनेश मीरचंदानी 

नारळी पौर्णिमा हा हिंदू धर्मातील एक महत्त्वाचा सण आहे. या दिवशी भगवान शिव आणि माता पार्वतीची पूजा केली जाते. या दिवशी नारळीचे फोडून आणि समुद्रात प्रार्थना केली जाते. या दिवशी नवीन कामाला सुरुवात करण्याची आणि नवीन कपडे घालण्याची प्रथा आहे.

या वर्षी नारळी पौर्णिमा १९ ऑगस्ट रोजी साजरी केली जाणार आहे. यानिमित्त अंबरनाथ येथील प्राचीन शिव मंदिर येथे विशेष पूजा आणि उत्सव आयोजित करण्यात आला आहे. या उत्सवात सर्व ग्रामस्थांना सहभागी होण्याचे आवाहन करण्यात आले आहे.

या उत्सवात पारंपारिक वेशभूषा करून येण्याची विनंती करण्यात आली आहे. याशिवाय, उत्सवात भजन, कीर्तन आणि इतर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करण्यात येतील.

हा उत्सव सर्व धर्मांच्या लोकांसाठी खुला आहे. उत्सवात सहभागी होण्यासाठी कोणतेही शुल्क आकारण्यात येणार नाही.

सर्व ग्रामस्थांना या उत्सवात सहभागी होण्याचे आवाहन करण्यात येते. या उत्सवामुळे आपल्या संस्कृतीचे जतन होण्यास मदत होईल.

नारळी पौर्णिमाच्या सर्वांना शुभेच्छा!