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उल्हासनगर के कथित बोगस सनद मामले में पत्रकार दिलीप मालवणकर ने मुख्यमंत्री और महसूल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में कथित बोगस सनद (फर्जी प्रमाणपत्र) प्रकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार एवं अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप मालवणकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।

मालवणकर का आरोप है कि उल्हासनगर महानगरपालिका का टाउन प्लानिंग विभाग लंबे समय से विवादों के घेरे में रहा है। बिना वैध अनुमति निर्मित इमारतों को नियमित करने, एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) में कथित हेरफेर तथा टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति और पदस्थापन को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रहती है तथा इन पदों के लिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।

पूर्व प्रशासक के कार्यकाल पर सवाल

दिलीप मालवणकर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से सैकड़ों गैरकानूनी सनदें जारी की गईं, जिनकी विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका दावा है कि इन मामलों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और जांच लंबित रहने से अनेक प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रांत अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में भी कथित रूप से इसी प्रकार की प्रक्रिया जारी है। मालवणकर का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप

मालवणकर के अनुसार, कई मामलों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में अपील स्तर तक कथित लेनदेन की व्यवस्था होने की चर्चाएं सामने आई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दुरुपयोग का आरोप

दिलीप मालवणकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 से पूर्व के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर दिए गए निर्देशों का कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किए गए और बाद में प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए।

मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मालवणकर ने मुख्यमंत्री तथा राज्य के महसूल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे और वर्तमान प्रांत अधिकारी विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में जारी सभी सनदों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित कार्यालयों की सीसीटीवी फुटेज की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस मुद्दे ने शहर की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला उल्हासनगर के सबसे बड़े कथित प्रशासनिक और राजस्व घोटालों में से एक साबित हो सकता है।














आरटीओ की नोटिस के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! उल्हासनगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर फिर दिखी लाल-नीली फ्लैशिंग बत्ती, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देशभर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वर्षों पहले वाहनों पर लाल-नीली बत्तियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन में नियमों की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले की सरकारी गाड़ी पर प्रतिबंधित फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी मुद्दे पर कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से वही ‘जिगजैग’ फ्लैशिंग बत्ती दिखाई देने से प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

आरटीओ की कार्रवाई के बाद भी नहीं हटी बत्ती

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कल्याण आरटीओ ने आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर अनधिकृत फ्लैशिंग बत्ती लगाए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था। उम्मीद की जा रही थी कि इसके बाद संबंधित वाहन से प्रतिबंधित उपकरण हटा दिए जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

सोमवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए आयुक्त मनीषा आव्हाले जिस सरकारी वाहन से पहुंचीं, उस पर फिर वही फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती देखी गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।

कल्याण आरटीओ ने जारी की आधिकारिक नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याण उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी आशुतोष बारकुल द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को आधिकारिक नोटिस जारी की गई है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रमांक MH-05-FP-9445 पर लाल एवं नीली फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। आरटीओ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी वाहन पर इस प्रकार की फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग वैध नहीं है।

नोटिस के माध्यम से संबंधित वाहन से फ्लैशिंग बत्ती तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि महानगरपालिका के वाहन विभाग के उप आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

क्या कहते हैं नियम?

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के उद्देश्य से देशभर में लाल बत्ती के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किया था। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पद और शक्ति प्रदर्शन की मानसिकता को समाप्त करना तथा आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच समानता का संदेश देना था।

वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन विभाग और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लाल अथवा नीली फ्लैशिंग बत्तियों के उपयोग की अनुमति है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सीमित संवैधानिक पदों को छोड़कर किसी भी मंत्री, जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी को अपने वाहन पर ऐसी बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से कानून का सम्मान करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनका पालन भी बिना किसी अपवाद के किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

आरटीओ द्वारा जारी नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस आदेश का तत्काल पालन करेगा? क्या आयुक्त की सरकारी गाड़ी से प्रतिबंधित फ्लैशिंग बत्ती हटाई जाएगी, या फिर यह विवाद आगे और बढ़ेगा?

फिलहाल आरटीओ की सख्त नोटिस के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है और आम जनता की नजरें अब आयुक्त कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।















उल्हासनगर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की तैयारी, सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी होंगे एकजुट।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के कई सामाजिक संगठन, नागरिक मंच और शहर के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवी जल्द ही FDA आयुक्त Tukaram Munde से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित बैठक में शहर से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल शहर में खाद्य सुरक्षा, अवैध गुटखा कारोबार, जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों तथा आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों द्वारा तैयार किए गए शिकायत पत्र और सुझाव भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में FDA द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे सख्त अभियान और आयुक्त तुकाराम मुंढे की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय संगठनों ने सीधे संवाद का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। इस मुलाकात के माध्यम से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन शहर के सामाजिक और नागरिक संगठनों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि यह बैठक होती है, तो उल्हासनगर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।














उल्हासनगर मनपा में चुनावी घोटाले की चर्चा तेज, आयुक्त ने अधिकारियों-कर्मचारियों को जारी किया ‘कारण बताओ नोटिस’


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के आम चुनाव के लिए खरीदी गई चुनावी सामग्री में करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान खरीदी गई सामग्री को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर खरीदने तथा चुनाव समाप्त होने के बाद उसे महानगरपालिका के रिकॉर्ड और कब्जे में जमा न कर निजी स्तर पर ठिकाने लगाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।

सूत्रों के अनुसार, चुनाव विभाग के माध्यम से कंप्यूटर, कैमरे, पेन-कागज, टेबल-कुर्सियां, डस्टबिन, मंडप, पानी की बोतलें समेत अन्य आवश्यक सामग्री की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी। आरोप है कि इन वस्तुओं की खरीद में नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार भाव से अधिक कीमतें दिखाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामग्री महानगरपालिका के स्वामित्व में वापस जमा होना अपेक्षित था, लेकिन बड़ी मात्रा में सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चुनावी सामग्री का गैरकानूनी तरीके से निपटारा किया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव विभाग के खर्चों का नियमित ऑडिट न होने का फायदा उठाकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। जब यह मामला आयुक्त मनीषा आव्हाले के संज्ञान में आया, तब उन्होंने तत्काल उस समय चुनाव विभाग में कार्यरत अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।

आयुक्त की इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की मांग उठाई है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में यदि अनियमितताएं साबित होती हैं, तो प्रशासन दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की परतें कब तक खुलती हैं।














प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पर दुकान-गोदाम सील नहीं कर सकती उल्हासनगर महानगर पालिका - बॉम्बे हाईकोर्ट


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में नगर निकाय बकाया संपत्ति कर वसूलने के लिए किसी परिसर को सील नहीं कर सकते। अदालत ने मंगलवार को उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) को निर्देश दिया कि वह कथित टैक्स बकाया के कारण सील किए गए एक फास्ट-फूड आउटलेट और गोदाम को तुरंत खोल दे।

जस्टिस गौतम अंखाड और जस्टिस संदीप डी. पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश दुकान मालिक लछमन दुसेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दुसेजा की संपत्तियों को 30 मार्च को सील किया गया था।

पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी निगम के वकील हमें ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सके, जो संपत्ति कर का भुगतान न होने पर परिसर सील करने का अधिकार देता हो।”

अदालत ने UMC को दुसेजा के गोदाम और दुकान को तुरंत अनसील करने का आदेश दिया।

दुसेजा के अनुसार, UMC अधिकारियों ने 30 मार्च को उनके परिसरों का दौरा किया और दोनों संपत्तियों को सील करने से पहले अटैचमेंट आदेश जारी किया। निगम ने गोदाम पर ₹5.64 लाख और दुकान पर ₹1.30 लाख संपत्ति कर बकाया होने का दावा किया था।

दुसेजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस.बी. राव ने दलील दी कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1949 और उसके तहत बनाए गए नियम नगर निकायों को संपत्ति कर वसूली के लिए परिसर सील करने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

अदालत ने यह दलील स्वीकार कर ली, क्योंकि UMC के वकील सुरेश कांबले इस कार्रवाई के समर्थन में कोई वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके।

दुसेजा ने अदालत को बताया कि वह संपत्ति कर चुकाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निकाय द्वारा लगाए गए जुर्माने और विलंब शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने उन्हें बकाया कर जमा करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की।














उल्हासनगर में बिजली चोरी पर बड़ा खुलासा, MSEDCL अधिकारी पर रिश्वत लेकर कनेक्शन जोड़ने का आरोप।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) में कथित भ्रष्टाचार और बिजली चोरी को संरक्षण देने का गंभीर मामला सामने आया है। उल्हासनगर-3 स्थित स्नेहदीप अपार्टमेंट्स में हुई कार्रवाई के दौरान MSEDCL के एक वरिष्ठ अधिकारी पर बिजली चोरी पकड़ने के बाद कथित रूप से रिश्वत लेकर दोबारा बिजली कनेक्शन जोड़ने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और फोटो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

सोसायटी प्रशासन का आरोप है कि 22 मई 2026 को MSEDCL उल्हासनगर डिवीजन के अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता श्री भास्कर कोले अपनी टीम के साथ स्नेहदीप अपार्टमेंट्स पहुंचे थे। सोसायटी द्वारा लंबे समय से फ्लैट नंबर 105 (A-विंग) और फ्लैट नंबर 204 (B-विंग) में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग की शिकायत की जा रही थी।

बिना मीटर चल रही थी भारी बिजली खपत

सोसायटी के अनुसार दोनों फ्लैटों में बिना मीटर के भारी बिजली उपयोग किया जा रहा था, जो बिजली अधिनियम की धारा 126 और 135 का उल्लंघन है। आरोप है कि इन फ्लैटों पर लाल पंजाबी और गोविंद पंजाबी नामक व्यक्तियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बताया गया कि मूल फ्लैट मालिकों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है।

शिकायत के बाद MSEDCL की टीम मौके पर पहुंची और कथित रूप से अवैध बिजली लाइन काटी गई। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।

“30 मिनट की बंद कमरे की डील” का आरोप

सोसायटी सदस्यों का आरोप है कि बिजली लाइन काटने के तुरंत बाद अधिकारी श्री भास्कर कोले अपनी टीम और एक निजी मध्यस्थ के साथ आरोपी फ्लैट के अंदर गए। करीब 30 मिनट तक टीम फ्लैट के भीतर रही और इस दौरान किसी भी सोसायटी सदस्य को अंदर नहीं आने दिया गया।

आरोप यह भी है कि मौके पर कोई पंचनामा तैयार नहीं किया गया और बाहर आने के बाद FIR दर्ज करने की बजाय उसी बिजली लाइन को दोबारा जोड़ दिया गया जिसे कुछ मिनट पहले अवैध बताते हुए काटा गया था।

रिश्वत लेकर मामला दबाने का आरोप

स्थानीय सूत्रों और सोसायटी प्रशासन का दावा है कि बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान करीब ₹25,000 की रिश्वत देकर मामले को दबा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कथित फोटो और वीडियो अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय नागरिकों ने अधिकारी से सवाल किया कि बिजली चोरी करने वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, तो उन्होंने कथित रूप से कहा:

“अब यह मामला लीगल डिपार्टमेंट का है, मेरा काम खत्म हो गया।”

इसके बाद अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके से रवाना हो गए।

Vigilance और ACB को भेजे गए सबूत

सोसायटी सचिव भूषण बलदेव खत्री ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े फोटो और दस्तावेज मुंबई स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO), ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।

सोसायटी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल की गई MSEB की गाड़ी को जानबूझकर बिल्डिंग से दूर खड़ा किया गया ताकि पूरी कार्रवाई सार्वजनिक नजरों से दूर रहे।

“सरकारी खजाने की खुली लूट” – सोसायटी प्रशासन

सोसायटी प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:

“यह सरकारी खजाने की खुलेआम लूट है। जिन अधिकारियों को बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, वही आरोपियों को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। यदि 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी।”

मीडिया को सौंपे गए दस्तावेज

सोसायटी प्रशासन ने मीडिया को निम्न दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया है:

MSEDCL को दी गई प्रारंभिक शिकायतों की प्रतियां

मौके पर ली गई तस्वीरें और कथित वीडियो

अधिकारी और टीम की मौजूदगी के फोटो

कथित अवैध बिजली इंस्टॉलेशन से जुड़े रिकॉर्ड

अब इस पूरे मामले में MSEDCL, Vigilance विभाग और ACB की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।























आम जनता पर सख्ती, सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर नरमी? उल्हासनगर मनपा पर उठे सवाल


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के टैक्स बिल तेजी से अपडेट किए जा रहे हैं, लेकिन प्रसिद्ध सेंचुरी रेयान कंपनी के मामले में अब तक कोई स्पष्ट अपडेट सामने नहीं आने से गंभीर संदेह पैदा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सेंचुरी रेयान कंपनी पर बकाया टैक्स की रकम को लेकर महानगरपालिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड और बिल अपडेट करने की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब आम जनता से टैक्स वसूली के लिए महानगरपालिका सख्ती दिखाती है, तब बड़े उद्योग समूहों के मामले में नरमी क्यों बरती जा रही है? इस दोहरे रवैये को लेकर अब टैक्स विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में महानगरपालिका के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि करोड़ों रुपये के संभावित टैक्स बकाया को लेकर फाइलों को दबाने और प्रक्रिया को धीमा करने का खेल चल रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नागरिकों की ओर से उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को इस पूरे प्रकरण की बड़ी स्तर पर स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर सेंचुरी रेयान कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड अब तक अपडेट क्यों नहीं किए गए और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है।

यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह मुद्दा शहर की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा विवाद बन सकता है।














उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद, जांच और कार्रवाई की मांग तेज।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अस्पताल परिसर के हिरणी कक्ष, नवनाथ मंदिर तथा अपघात (दुर्घटना) विभाग के पास स्थित करीब 6 से 8 बड़े पेड़ों को काट दिया गया और बाद में लकड़ी को बेच भी दिया गया।

मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेड़ों की कटाई बिना आवश्यक अनुमति के की गई। पर्यावरण नियमों के अनुसार बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध माना जाता है। आरोप यह भी है कि पेड़ काटने के बाद अस्पताल से जुड़े एक जूनियर क्लर्क द्वारा लकड़ी को बेचने का काम किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील परिसर में इस प्रकार पेड़ों की कटाई बेहद गंभीर विषय है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

साथ ही Central Hospital Ulhasnagar के सिविल सर्जन समेत संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं, तो यह केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने शहर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।














उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” मामला: नाम बदलकर युवती से शादी करने का आरोप, धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना का दावा।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक हिंदू युवती ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक ने अपनी असली पहचान छिपाकर खुद को “विजय” बताकर उससे प्रेम संबंध बनाए और बाद में शादी कर ली। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद उसे आरोपी की वास्तविक पहचान का पता चला, जिसके बाद उसके साथ मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना शुरू हो गई।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी युवक उसे अपने साथ बिहार ले गया, जहां उस पर मुस्लिम रीति-रिवाज अपनाने का लगातार दबाव बनाया गया। युवती ने आरोप लगाया कि उसे जबरन बुर्का और हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं, उस पर गोमांस खाने का दबाव भी डाला गया। पीड़िता का यह भी दावा है कि आरोपी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करता था, जिससे उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।

इस पूरे मामले को लेकर पीड़िता ने Ulhasnagar Central Police Station में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी इमरान शेख, उसके दो भाइयों तथा माता-पिता के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमरान शेख और उसके दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को आज अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, आरोपी के माता-पिता की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। पीड़िता के आरोपों, शादी से जुड़े दस्तावेजों, पहचान छिपाने के दावों और कथित धार्मिक दबाव से संबंधित सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।














उल्हासनगर-5 का जींस मार्केट फिर संदेह के घेरे में, हवाला और चेक डिस्काउंटिंग से भारत सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका।

(फाइल इमेज) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित प्रसिद्ध जींस मार्केट एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में आ गया है। बाजार में बड़े पैमाने पर हवाला कारोबार, चेक डिस्काउंटिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं के जरिए भारत सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, जीएसटी विभाग तथा अन्य संबंधित केंद्रीय एजेंसियों में शिकायतें दर्ज कराए जाने की तैयारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि जींस और डेनिम कपड़ा व्यापार से जुड़े कुछ कारोबारी लंबे समय से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में शामिल हैं। आरोप है कि नकद रकम को हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर किया जा रहा है, जबकि चेक डिस्काउंटिंग के जरिए बड़ी मात्रा में अनधिकृत आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि कई कारोबारियों द्वारा फर्जी बिलिंग, नकली खरीद-बिक्री के दस्तावेज और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। यदि प्रारंभिक स्तर पर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यापारियों और उनके सहयोगियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों ने भी इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए विस्तृत दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े सबूत संबंधित विभागों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बड़े नाम सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।

वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि हवाला और चेक डिस्काउंटिंग जैसे कारोबार बिना निगरानी के चलते रहे, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित होता है बल्कि वैध व्यापारिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे मामलों में केंद्रीय एजेंसियां आमतौर पर बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न और नकद लेन-देन की विस्तृत जांच करती हैं।

फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बाजार में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वहीं व्यापारिक क्षेत्र में भी संभावित जांच और कार्रवाई को लेकर हलचल देखी जा रही है।















उल्हासनगर-5 जींस मार्केट के डेनिम रोल कपड़ा व्यापारियों पर टैक्स गड़बड़ी के गंभीर आरोप, हवाला और चेक डिस्काउंटिंग के माध्यम से भारत सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान पहुंचाने की आशंका, जल्द बड़ी कार्रवाई संभव।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित प्रसिद्ध जींस मार्केट एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। डेनिम जींस रोल कपड़ा कारोबार से जुड़े कुछ व्यापारियों पर भारत सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी और इनकम टैक्स नियमों में कथित हेराफेरी कर बड़े स्तर पर टैक्स चोरी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, उल्हासनगर-5 के कुछ कपड़ा व्यापारी राजस्थान के भीलवाड़ा, गुजरात के अहमदाबाद तथा महाराष्ट्र के इचलकरंजी की विभिन्न टेक्सटाइल मिलों से 5 प्रतिशत जीएसटी के पक्के बिल पर डेनिम कपड़ा खरीदते हैं। इसके बाद यही माल स्थानीय जींस मार्केट में 2.5 प्रतिशत जीएसटी के कच्चे बिलों के माध्यम से बेचा जाता है।

आरोप है कि शेष 2.5 प्रतिशत राशि हवाला कारोबार और चेक डिस्काउंटिंग के जरिए समायोजित की जाती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को मिलने वाले टैक्स में भारी कमी लाई जा रही है, जिससे केंद्र सरकार के राजस्व को बड़ा नुकसान हो रहा है।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला कारोबारियों, चेक डिस्काउंटिंग एजेंटों और कुछ अन्य आर्थिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित विभागों — जीएसटी, इनकम टैक्स और आर्थिक अपराध शाखा — को जल्द ही विस्तृत शिकायत सौंपी जा सकती है, जिसमें कई कारोबारियों और संबंधित लोगों के नाम भी शामिल होने की संभावना है।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में लंबे समय से टैक्स चोरी और बिना उचित दस्तावेजों के कारोबार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि अब मामला बड़े स्तर पर सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल जीएसटी चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हवाला लेन-देन, फर्जी बिलिंग, टैक्स चोरी और मनी ट्रेल जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों के दायरे में भी आ सकता है। ऐसे में संबंधित कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई होने की संभावना से बाजार में हड़कंप का माहौल बताया जा रहा है।














उल्हासनगर-4 स्थित “कुमार मटन” होटल के फ्राइड राइस में लोहे की कील मिलने की शिकायत, ग्राहक ने जताया विरोध।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-4 के विनस चौक स्थित प्रसिद्ध “कुमार मटन” होटल से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। होटल से मंगाए गए फ्राइड राइस में कथित रूप से लोहे की कील मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने होटलों और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता तथा गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने होटल से फ्राइड राइस ऑर्डर किया था। खाना खाते समय अचानक उसे भोजन के भीतर लोहे की कील दिखाई दी। यह देखकर ग्राहक हैरान रह गया और उसने तुरंत इस मामले पर नाराजगी जताई। ग्राहक का कहना है कि यदि यह कील गलती से निगल ली जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था और किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

घटना की जानकारी सामने आते ही स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल बन गया। नागरिकों ने होटल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खाने जैसी संवेदनशील चीजों में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। लोगों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट में नियमित जांच और स्वच्छता मानकों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की गंभीर जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि घटना से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल मामले को लेकर होटल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं नागरिकों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।














डायबिटीज मरीजों में पैरों से जुड़ी बढ़ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में 10 मई को शिवसेना नगरसेविका मीना सोंडे की पहल पर निशुल्क विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

डायबिटीज के मरीजों में तेजी से बढ़ रही पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में एक विशेष “डायबिटिक फुट कैंप” का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर 10 मई 2026 को फिनिक्स हॉस्पिटल, कुर्ला कैंप रोड, बाबासाई नगर, उल्हासनगर में आयोजित होगा, जहां मुंबई के प्रसिद्ध डायबिटिक फुट विशेषज्ञ मरीजों की जांच और परामर्श देंगे।

डॉक्टरों के अनुसार डायबिटीज का असर केवल शुगर लेवल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समय पर उपचार न मिलने पर पैरों में सूजन, जलन, झुनझुनी, न भरने वाले घाव, बार-बार संक्रमण और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कई मामलों में मरीजों को पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।

इस विशेष कैंप में डायबिटिक फुट सर्जरी और उपचार के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. अरुण बाल और उनकी टीम मरीजों को मार्गदर्शन देंगे। कैंप में कंसल्टेंट डायबिटिक फुट सर्जन डॉ. सचिन विल्हेकर और डॉ. अर्चित चिटणीस भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही उल्हासनगर महानगरपालिका की सभापति डॉ. मीना सोंडे की भी उपस्थिति रहेगी।

कैंप में पैरों की सूजन, लालिमा, कॉर्न, कैलोसिटी, न भरने वाले घाव, तेज दर्द, ऐंठन, टखनों की विकृति, अंदर की ओर मुड़ने वाले नाखून और गैंग्रीन जैसी समस्याओं की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ मरीजों को उचित उपचार और भविष्य में सावधानी बरतने संबंधी सलाह भी देंगे।

यह कैंप सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कैंप में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। इच्छुक मरीज 88 79 88 28 32 और 91 67 67 67 90 नंबर पर संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल (ए फोर्टिस एसोसिएट), माहिम, मुंबई द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कैंप डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं और समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।














यूरोप से उल्हासनगर पहुंचा ड्रग्स नेटवर्क! मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स केस की जांच में सामने आए कई सनसनीखेज खुलासे।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की कथित ड्रग ओवरडोज से हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की जांच में अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए भुगतान का खुलासा हुआ है, जिसने इस पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी महेश खेमलानी ने यूरोप में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए करीब 4,000 एक्स्टेसी पिल्स मंगवाई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप दो अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र लाई गई और बाद में उल्हासनगर तक पहुंचाई गई।

अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में करीब 3,000 एक्स्टेसी गोलियां भेजी गई थीं, जबकि दूसरी खेप में 1,000 गोलियां शामिल थीं। दोनों खेप कथित तौर पर कूरियर सेवा के माध्यम से आरोपी के साथी आयुष साहित्य के परिचित के पते पर पहुंचाई गईं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी हुई है।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ड्रग सप्लायर को भुगतान पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से नहीं, बल्कि टेथर (Tether) नामक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का उद्देश्य लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों से बचना था।

सूत्रों के अनुसार, मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट, डार्क वेब नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन एंगल की भी गहन जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों, ड्रग सप्लाई चैन और फंडिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।















उल्हासनगर पर ड्रग्स नेटवर्क का साया: भविष्य में ‘हब’ बनने की आशंका, आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede की सख्त चेतावनी।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर का नाम सामने आने के बाद इस शहर को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उल्हासनगर भविष्य में ड्रग्स का बड़ा हब बन सकता है।

उल्हासनगर में आयोजित एक ड्रग्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि हालिया घटनाओं ने इस क्षेत्र को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और इसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने खासतौर पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ड्रग्स का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक व्यापक सामाजिक संकट है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

वानखेड़े ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान, खुफिया निगरानी को मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।














उल्हासनगर कैम्प-5 में अवैध डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ बड़ा आंदोलन: साईं हीरालाल जी बने नवगठित समिति के अध्यक्ष।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प-5 क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बने अवैध डंपिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब संगठित रूप से आवाज बुलंद कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार, 4 मई को संत प्रभाराम मंदिर, उल्हासनगर-5 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक नवगठित समिति का गठन किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से साईं वसनशाह दरबार के साईं हीरालाल जी को समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी सदस्यों के विशेष आग्रह पर साईं हीरालाल जी ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उनके नेतृत्व में अब इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है।

समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रकाश गोविंदराम लुंड (पिकी), मनीष नारा, राजकुमार कुकरेजा, राजेश चांगलानी, विजय वाधवा, मनीष ठाकुर, रॉकी शर्मा, नरेश आहुजा, निल शर्मा, जैकी सुखेजा और शशिकांत दायमा शामिल हैं। सभी सदस्यों ने एक स्वर में अवैध डंपिंग ग्राउंड को तत्काल हटाने की मांग की।

बैठक में यह भी गंभीर रूप से उठाया गया कि उक्त डंपिंग ग्राउंड में मृत पशुओं को फेंका जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए समिति ने मृत पशुओं के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए शवदाहिनी (इंसीनरेटर) की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, क्षेत्र में फैल रहे धुएं, प्रदूषण और बदबू की समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाययोजनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समिति ने निर्णय लिया कि इस पूरे मुद्दे को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी।

बैठक में उपस्थित नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रदूषण और अव्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए यह मामला अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में समिति की अगुवाई में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन होने की संभावना जताई जा रही है।














शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उल्हासनगर में किया अहम बदलाव, दिलीप मिश्रा महानगर प्रमुख नियुक्त।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए उल्हासनगर महानगर प्रमुख पद पर दिलीप मिश्रा की नियुक्ति की है। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर की गई इस नियुक्ति को आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिलीप मिश्रा लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए एक सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देने की क्षमता रखते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को उल्हासनगर में पार्टी की गतिविधियों को तेज करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें स्थानीय जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों और विचारधारा को प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह नियुक्ति खास मायने रखती है। उल्हासनगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में संगठन को मजबूत करना किसी भी पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम होता है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह कदम पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों का संकेत भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के जरिए शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। दिलीप मिश्रा की नियुक्ति से न केवल संगठन में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

उल्हासनगर की नियुक्तियां

उपज़िलाप्रमुख उल्हासनगर विधानसभा व महानगरपालिका क्षेत्र - राजेंद्र शाहू, महानगरप्रमुख - दिलीप मिश्रा, विधानसभा क्षेत्रप्रमुख - राजन वेलकर, विधानसभा क्षेत्र संगठक - कृष्णा पुजारी, शहरप्रमुख - शिवाजी जावळे, शहर संगठक - भगवान मोहिते।

उपशहरप्रमुख

 सुरेश पाटिल (कैम्प नं. 1)

 अवतार सिंह गिल (कैम्प नं. 2)

 शिवाजी हावळे (कैम्प नं. 3)

 दशरथ चौधरी (कैम्प नं. 3)

 विभागप्रमुख:

 करीम शेख (कैम्प नं. 1)

 अशोक सातपुते (कैम्प नं. 2)

 आदिनाथ पालवे (कैम्प नं. 3)

 संतोष यादव (कैम्प नं. 3)

उपविभागप्रमुख:

संतोष गवारे, भास्कर शिंदे, नरेंद्र हिंगोरानी, अशोक जाधव, साहेबराव ससाणे (सभी कैम्प नं. 3)

हकीम शेख (कैम्प नं. 1)













उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल में संदिग्ध निर्माण पर उठे सवाल: बिना बोर्ड, बिना जानकारी जारी कामकाज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर परिसर में एक निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के शवगृह (मॉर्चरी) के समीप स्थित एक खुला मैदान(जगह) पड़ी इमारत में कथित रूप से निर्माण कार्य जारी है, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इससे पहले भी सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 के सिविल सर्जन डॉ. बनसोडे पर मनमानी तरीके से काम करने के आरोप लग चुके हैं। करोड़ों रुपये के विभिन्न कार्यों में गड़बड़ी और अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि ऑक्सीजन प्लांट को लोगों के घरों के सामने स्थापित किया गया, साथ ही सोलर सिस्टम, जनरेटर और MGPAY से जुड़े करोड़ों रुपये के कामों में भी धांधली की गई है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, जिस इमारत में निर्माण हो रहा है, वहां न तो संबंधित ठेकेदार कंपनी का नाम दर्शाने वाला बोर्ड लगाया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि निर्माण कार्य का प्लान संबंधित प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृत है या नहीं। आमतौर पर किसी भी सरकारी या सार्वजनिक परियोजना में प्लान पास होने की जानकारी, प्रोजेक्ट की लागत, ठेकेदार का नाम और समयसीमा का उल्लेख अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इस तरह की कोई पारदर्शिता नजर नहीं आ रही है।

इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जिस जमीन पर यह निर्माण हो रहा है, वह आधिकारिक रूप से अस्पताल के नाम पर दर्ज है या नहीं। इस संबंध में किसी प्रकार के भूमि स्वामित्व या दस्तावेजों की जानकारी भी स्थल पर प्रदर्शित नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले तहसीलदार या प्रांत कार्यालय में रॉयल्टी और अन्य सरकारी शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन इन प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य “चुपचाप” तरीके से किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले में अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है। नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि यह एक वैध और सार्वजनिक हित का प्रोजेक्ट है, तो फिर इसे लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जा रही है।

हैरानी की बात यह भी है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या स्थानीय नेता ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। न तो किसी ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और न ही उद्घाटन या आधिकारिक घोषणा की गई, जिससे राजनीतिक चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य की तत्काल जांच करे, सभी आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों और स्थल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासनिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)