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UMC की डिजिटल व्यवस्था पर सवाल: प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बाद भी पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम बरकरार।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के सैकड़ों प्रॉपर्टी धारकों का आरोप है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और महानगरपालिका से आधिकारिक प्रॉपर्टी ट्रांसफर (टाइटल म्यूटेशन) लेटर प्राप्त होने के बावजूद उनकी संपत्तियों का स्वामित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप नागरिक महीनों तक अपने ही अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनपा कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार इंडेक्स-2, सेल डीड, स्टांप ड्यूटी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है। दस्तावेजों की जांच के उपरांत मनपा प्रशासन स्वामित्व हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए आधिकारिक ट्रांसफर लेटर भी जारी कर देता है। लेकिन इसके बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाता, जिससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

कागजों पर नया मालिक, ऑनलाइन सिस्टम में अब भी पुराना नाम

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिकों के हाथ में मनपा द्वारा जारी वैध ट्रांसफर लेटर मौजूद होता है, लेकिन जब वे प्रॉपर्टी टैक्स भरने, रिकॉर्ड डाउनलोड करने या ऑनलाइन विवरण देखने के लिए महानगरपालिका के पोर्टल पर जाते हैं, तो वहां अब भी पुराने मालिक या डेवलपर का नाम दिखाई देता है। इससे नागरिकों को यह साबित करने में भी कठिनाई होती है कि संबंधित संपत्ति अब उनके नाम पर है।

बैंक लोन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर असर

ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने का सबसे बड़ा असर बैंकिंग और वित्तीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। कई बैंक होम लोन, मॉर्गेज लोन अथवा संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं। जब पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है, तो ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई मामलों में आवेदन लंबित हो जाते हैं।

इसके अलावा नामांतरण से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन तथा भविष्य में संपत्ति के विक्रय या हस्तांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

मनपा कार्यालयों के लगातार चक्कर, लेकिन समाधान नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इस समस्या को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी "सर्वर डाउन" होने की बात कही जाती है, कभी "डेटा अपडेट हो रहा है" का हवाला दिया जाता है, तो कभी अगले सप्ताह आने को कहा जाता है। कई नागरिकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस कारण लोगों का समय, पैसा और श्रम तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कई नागरिकों को नौकरी या व्यवसाय छोड़कर बार-बार मनपा कार्यालय जाना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।

नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष

एक पीड़ित प्रॉपर्टी धारक ने बताया कि उन्हें लगभग छह महीने पहले महानगरपालिका से प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर मिल चुका है, लेकिन आज भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दिखाई दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया।

इसी प्रकार अन्य नागरिकों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, तब तक ट्रांसफर लेटर का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

उल्हासनगर महानगरपालिका समय-समय पर कर प्रणाली के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। 'प्रोजेक्ट मंथन' जैसे अभियानों के माध्यम से रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और कर संग्रह प्रणाली को डिजिटल बनाने की बात भी कही गई थी।

लेकिन ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होना इन दावों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि विभागीय स्तर पर डेटा एंट्री या सिस्टम अपडेट समय पर नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

शहर के समाजसेवियों, कर विशेषज्ञों और नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही इसके लिए जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर जारी होने के साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जाए।

नामांतरण प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (SLA) तय की जाए।

लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने हेतु पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

जब महानगरपालिका स्वयं डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब स्वामित्व हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रक्रिया का महीनों तक अधूरा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर उनके विश्वास को भी कमजोर करता है। अब देखना यह होगा कि मनपा प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है और नागरिकों को राहत कब मिलती है।


















उल्हासनगर में अवैध गुटखे का काला कारोबार जारी, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के रडार पर संदिग्ध नेटवर्क।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रतिबंध के बावजूद उल्हासनगर शहर में अवैध गुटखे का कारोबार कथित रूप से आज भी धड़ल्ले से जारी है। शहर के विभिन्न इलाकों में चोरी-छिपे गुटखा और सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंधित उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और इससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उल्हासनगर के कुछ संदिग्ध कारोबारी भी विभाग की निगरानी में बताए जा रहे हैं। विभाग द्वारा ऐसे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है, जो प्रतिबंधित गुटखे के भंडारण, परिवहन और वितरण में कथित रूप से शामिल हो सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि अवैध गुटखे का कारोबार संगठित तरीके से संचालित किया जाता है, जिसमें सप्लाई चेन, गोदाम और वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध गुटखे के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शहर के प्रमुख बाजारों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर नियमित छापेमारी कर इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जाए।

हालांकि, इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से उल्हासनगर के किसी विशेष कारोबारी के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई या नाम की पुष्टि नहीं की गई है। यदि विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, तो इससे अवैध गुटखा कारोबार पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।यदि यह खबर प्रकाशन के लिए है, तो इसे उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों या पुष्टि किए गए तथ्यों के अनुसार और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।

Direct Email Contacts:

Food Complaints: jc-foodhq@gov.inDrug

Complaints: jchq.fda-mah@nic.in or Hqfdadesk13@gmail

comVigilance: pavigilancefda@gmail.com

Mumbai FDA Office Contact Numbers: 022-26590548 or 022-2612265

Maharashtra State FDA, call the toll-free helpdesk number at 1800 222 365.

















उल्हासनगर के चारो श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, धर्मादाय आयुक्त और मनपा से कार्रवाई की अपील।


 







उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के विभिन्न श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के नाम पर कथित अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने धर्मादाय आयुक्त, ठाणे विभाग तथा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शहर के चार पंजीकृत श्मशान घाट ट्रस्टों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिवारों से कथित रूप से अनुचित एवं अवैध तरीके से राशि वसूली जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है।

इन चार ट्रस्टों पर उठे सवाल

शिकायत पत्र के अनुसार धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत निम्नलिखित ट्रस्ट वर्तमान में शहर के विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कर रहे हैं—

प्रबंधक श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-1)

श्मशान घाट स्वर्गधाम आश्रम (उल्हासनगर-3)

प्रबंधक मुक्तिधाम सामाजिक संस्था (उल्हासनगर-4)

प्रबंधक स्वर्गद्वार श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-5)

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन सभी ट्रस्टों के संचालन और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मुफ्त लकड़ी उपलब्ध होने के बावजूद परिजनों से वसूली का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि उल्हासनगर महानगरपालिका अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी नि:शुल्क उपलब्ध कराती है तथा इसकी विधिवत रसीद भी संबंधित श्मशान घाटों के माध्यम से मृतकों के परिजनों को दी जाती है।

इसके बावजूद आरोप है कि श्मशान घाट संचालित करने वाले ट्रस्ट अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों से रसीद बुक के माध्यम से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये अथवा उससे अधिक राशि की मांग करते हैं। शिकायतकर्ता ने इसे अवैध वसूली करार देते हुए सवाल उठाया है कि जब आवश्यक सामग्री पहले से ही महानगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, तब अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है।

उन्होंने मांग की है कि ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि यह धन किस उद्देश्य और किस मद में खर्च किया गया।

ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों द्वारा धर्मादाय विभाग में प्रस्तुत की गई ऑडिट रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी तो धर्मादाय विभाग ने उसे स्वीकार कैसे किया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अधूरी अथवा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले ट्रस्टों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने मांग की है कि सभी ट्रस्टों की ऑडिट रिपोर्ट, आय-व्यय का पूरा विवरण तथा वित्तीय अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं ताकि नागरिकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

महानगरपालिका और ट्रस्टों के अनुबंध पर भी उठे सवाल

शिकायत में महानगरपालिका और संबंधित ट्रस्टों के बीच हुए अनुबंध को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि इन ट्रस्टों को श्मशान घाट संचालन का अधिकार किन शर्तों पर दिया गया, अनुबंध की अवधि कितनी है, वित्तीय जिम्मेदारियां क्या हैं तथा महानगरपालिका द्वारा इनकी निगरानी किस प्रकार की जाती है।

आरोप लगाया गया है कि धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने भी इस संबंध में महानगरपालिका से कोई स्पष्ट जानकारी या स्पष्टीकरण प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया।

तीन से चार महीने से केवल जांच का आश्वासन

शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले तीन से चार महीनों से संबंधित विभागों द्वारा केवल जांच का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद उन्हें जांच की प्रगति अथवा विभागीय कार्रवाई की कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन

प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तथा जांच की लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद यदि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था या अन्य स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और विभागों की होगी।

इन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि

शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिलाध्यक्ष स्वप्निल पाटिल, उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है।

अब यह पूरा मामला धर्मादाय आयुक्त कार्यालय और उल्हासनगर महानगरपालिका की आगामी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे श्मशान घाटों के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता और नागरिकों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा।


















शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष में नई जिम्मेदारी: मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख नियुक्त, गरीब मरीजों को मिलेगा उपचार और आर्थिक सहायता का लाभ।


 


उल्हासनगर/कल्याण: दिनेश मीरचंदानी

गरीब, जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बालासाहेब ठाकरे शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के निर्देश एवं मंगेश नरसिंह चिवटे के मार्गदर्शन में श्रीमती मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख (उल्हासनगर एवं अंबरनाथ) पद पर छह माह के लिए नियुक्त किया गया है।

जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार, मीना (ताई) सोंडे को शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और चिकित्सा सहायता सुविधाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस नियुक्ति के तहत वे धर्मार्थ अस्पतालों में उपलब्ध 10 प्रतिशत आरक्षित कोटा के माध्यम से मरीजों को उपचार दिलाने, निजी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों की निःशुल्क अथवा रियायती दरों पर सर्जरी कराने में सहायता करेंगी। साथ ही महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों में पात्र मरीजों को निःशुल्क इलाज एवं शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी देंगी।

नियुक्ति पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गंभीर एवं महंगी सर्जरी की आवश्यकता वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सहायता दिलाने के लिए प्रधानमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, श्री सिद्धिविनायक ट्रस्ट, टाटा ट्रस्ट सहित विभिन्न सहायता निधियों एवं ट्रस्टों के माध्यम से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके लिए बालासाहेब भवन स्थित केंद्रीय कार्यालय से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पत्र पर संस्थापक एवं अध्यक्ष मंगेश नरसिंह चिवटे तथा कार्यालय प्रमुख रामहरी भीमराव राजन के हस्ताक्षर हैं। नियुक्ति पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के बाद अधिकृत पदाधिकारियों को अपने लेटरहेड के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क अथवा रियायती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

इस नियुक्ति से कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ क्षेत्र के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं, चिकित्सा सहायता और आर्थिक सहयोग तक पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।





















उल्हासनगर के श्मशान घाटों में कथित अवैध वसूली का मामला गरमाया, ट्रस्ट संचालकों पर कार्रवाई की मांग।


 







































उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत संचालित विभिन्न श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं, अवैध कब्जे और मृतकों के परिजनों से जबरन धन वसूली के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले में प्रहार जनशक्ति पक्ष के प्रभारी अध्यक्ष शरद दिनकर पोळके द्वारा महानगरपालिका आयुक्त और पुलिस प्रशासन को विस्तृत शिकायत सौंपकर व्यापक जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर-1 से लेकर उल्हासनगर-5 तक स्थित विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कुछ ट्रस्टों द्वारा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूमि और वहां उपलब्ध सभी मूलभूत सुविधाएं उल्हासनगर महानगरपालिका की हैं। आरोप है कि बिजली, पानी, रखरखाव, मरम्मत और गरीब परिवारों के लिए अंतिम संस्कार हेतु लकड़ियों का खर्च महानगरपालिका उठाती है, लेकिन इसके बावजूद ट्रस्ट संचालक मृतकों के परिजनों से अंतिम संस्कार के नाम पर ₹500 से लेकर ₹2500 तक की राशि वसूल रहे हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि मृतक के परिजन ट्रस्ट द्वारा मांगी गई राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें आवश्यक रसीद देने में टालमटोल की जाती है और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे शोकाकुल परिवारों को मानसिक और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शरद पोळके ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जब श्मशान घाटों की सभी सुविधाओं का खर्च महानगरपालिका वहन कर रही है, तब ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ट्रस्टों की रसीद पुस्तिकाओं पर चैरिटी कमिश्नर का पंजीकरण नंबर तक अंकित नहीं है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो जाता है।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि महानगरपालिका द्वारा संबंधित ट्रस्टों को हर वर्ष अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली लकड़ियों के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि ट्रस्टों और महानगरपालिका के बीच किसी प्रकार का वैध लिखित करार या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना किसी विधिवत समझौते के सरकारी धन का भुगतान किया जाना सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी के समान बताया गया है।

प्रहार जनशक्ति पक्ष ने मांग की है कि संबंधित ट्रस्टों को दी जाने वाली सभी आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, महानगरपालिका सभी श्मशान घाटों को अपने सीधे नियंत्रण में ले, ट्रस्टों के वित्तीय लेन-देन और ऑडिट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ट्रस्ट संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रहार जनशक्ति पक्ष लगातार प्रशासन से पत्राचार करता रहा है। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कड़ू ने उल्हासनगर महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त धीरज चव्हाण को इस विषय में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले का लगातार फॉलोअप प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिला अध्यक्ष स्वप्नील पाटील के मार्गदर्शन में शरद पोळके द्वारा किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन और कानूनी संघर्ष जारी रहेगा।

अब सभी की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल श्मशान घाटों के संचालन में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और आम नागरिकों से कथित अवैध वसूली से जुड़े बड़े घोटाले का भी खुलासा हो सकता है।