उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका में 7 मनोनीत (नामनिर्देशित) सदस्यों के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम ने मनोनीत सदस्यों के फॉर्म भरने सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।
महापौर द्वारा 4 सितंबर 2026 को आयुक्त/महापालिका सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 31 अगस्त 2026 को विशेष महासभा की सूचना जारी कर 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 7 सितंबर को नामनिर्देशन फॉर्म भरने तथा 11 सितंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था।
हालांकि, इस मामले से संबंधित न्यायालयीन संदर्भ सामने आने के बाद महापौर ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और शासन से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की है।
‘न्यायालयीन मामला लंबित, इसलिए जल्दबाजी उचित नहीं’
अपने पत्र में महापौर निकम ने उल्लेख किया है कि उन्हें 3 सितंबर को अधिवक्ता रामचंद्र मंदाडकर तथा 4 सितंबर को अधिवक्ता विनोद वी. पाटिल द्वारा संबंधित पत्रों के माध्यम से मामले की न्यायालयीन स्थिति से अवगत कराया गया है।
महापौर ने कहा कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने अथवा नहीं बढ़ाने के संबंध में शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करना आवश्यक है। इसी कारण उन्होंने 31 अगस्त को बुलाई गई विशेष महासभा के आधार पर शुरू की गई आगे की चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है।
उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि संबंधित विषय पर सक्षम स्तर से राय एवं अभिप्राय प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया लागू की जाए। तब तक मनोनीत सदस्यों के चुनाव से संबंधित पूरी प्रक्रिया स्थगित रहेगी।
कानून और संवैधानिक व्यवस्था को प्राथमिकता
महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस निर्णय को महानगरपालिका की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके निर्णय से यह संदेश गया है कि किसी भी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी एवं संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।
उनके समर्थकों का कहना है कि महापौर ने इस मामले में जल्दबाजी करने के बजाय न्यायालयीन स्थिति और शासन के मार्गदर्शन को प्राथमिकता देकर कानून की मर्यादा तथा संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उल्हासनगर महानगरपालिका में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज थी। अब शासन से मिलने वाले मार्गदर्शन और न्यायालयीन प्रक्रिया के अगले घटनाक्रम पर सभी की नजरें रहेंगी।
‘संविधान और कानून सर्वोपरि’ का संदेश
महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस फैसले को उनके समर्थकों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधानवादी विचारों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की सर्वोच्चता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, उनके समर्थकों का कहना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के न्याय, प्रशासन और जनहित के आदर्शों को भी महत्व देती हैं।
हालांकि, इस निर्णय का अंतिम प्रभाव शासन के निर्देश और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे के परिणाम पर निर्भर करेगा। फिलहाल उल्हासनगर महानगरपालिका के 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की पूरी प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई है।








































