सियासत
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर सेक्टर-3 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा द्वारा सोमवार, 23 फरवरी 2026 को एक व्यापक संपूर्ण स्वास्थ्य जांच एवं आयुर्वेदिक उपचार शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में ग्राहकों, बैंक कर्मचारियों तथा स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।
इस शिविर का आयोजन Unicare Health Center के सहयोग से किया गया, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने विभिन्न जांच और परामर्श सेवाएं प्रदान कीं।
उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं
शिविर में लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण जांच और परामर्श सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं, जिनमें शामिल हैं:
मधुमेह (शुगर) जांच
रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जांच
नाड़ी परीक्षण (आयुर्वेदिक पद्धति)
विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श
व्यक्तिगत आहार (डाइट) सलाह
योग एवं जीवनशैली मार्गदर्शन
आंखों की जांच
BMI (बॉडी मास इंडेक्स) मापन
रियायती दर पर विशेष पैथोलॉजी जांच
शिविर में इच्छुक लोगों के लिए पूर्ण शरीर जांच और रक्त परीक्षण रियायती दरों पर उपलब्ध कराया गया। जांच पैकेज में निम्न परीक्षण शामिल थे:
CBC एवं ESR
किडनी फंक्शन टेस्ट (RFT)
लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल)
लिवर फंक्शन टेस्ट
आयरन की कमी की जांच
थायरॉयड प्रोफाइल
डायबिटीज स्क्रीनिंग
विटामिन D3 एवं विटामिन B12 परीक्षण
स्वास्थ्य जागरूकता को मिला बढ़ावा
शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और नियमित जांच के महत्व को समझाना था। विशेषज्ञों ने बताया कि समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने से कई गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होती है।
शाखा प्रबंधक रवि शामनानी तथा महेश चावला सहित बैंक स्टाफ ने शिविर के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय नागरिकों ने बैंक की इस सामाजिक पहल की सराहना करते हुए इसे जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
इस प्रकार, बैंक ऑफ बड़ौदा की यह पहल न केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित रही, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
यह शिविर महेश चावला के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। महेश चावला का जन्मदिन 26 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 में अब सियासी तस्वीर और भी जटिल होती जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया बयान ने पैनल नंबर 9 को चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज पैनल बना दिया है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से गठबंधन को मजबूत करने के लिए ‘तीर-कमान’ (शिवसेना) और ‘टीवी’ (साई पार्टी) चुनाव चिन्हों को वोट देने की खुली अपील की।
उपमुख्यमंत्री की इस अपील के बाद पैनल नंबर 9 के मतदाताओं के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है।
उपमुख्यमंत्री की अपील बनाम जमीनी सियासत
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मंच से एकता और गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया, लेकिन पैनल नंबर 9 की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
इसी पैनल में श्रीमती कविता मनोज लस्सी (शिवसेना / TOK समर्थित)
और श्रीमती आशा जीवन इदनानी (साई पार्टी – ‘टीवी’ चुनाव चिन्ह)
दोनों ही एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।
मतदाताओं के सामने धर्मसंकट
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब उपमुख्यमंत्री दोनों चुनाव चिन्हों को जिताने की अपील कर रहे हैं, तो पैनल 9 का मतदाता किसे वोट दे?
एक ओर शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार
दूसरी ओर गठबंधन की ही साई पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी
यही टकराव मतदाताओं को दो हिस्सों में बांटता नजर आ रहा है।
वोटों के बिखराव का खतरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री शिंदे का बयान भले ही गठबंधन को एकजुट करने के उद्देश्य से दिया गया हो, लेकिन पैनल नंबर 9 में यह बयान “दुधारी तलवार” बन गया है।
यदि वोट ‘टीवी’ चिन्ह को जाते हैं, तो साई पार्टी को सीधा फायदा होगा।
यदि वोट शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार को मिलते हैं, तो गठबंधन का दूसरा घटक कमजोर पड़ सकता है।
इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ भाजपा की प्रत्याशी दीपा नारायण पंजाबी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गठबंधन के वोटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है।
गली-मोहल्लों में चर्चा तेज
पैनल नंबर 9 की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—
“जब बड़े नेता एकता की बात कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार क्यों नहीं?”
उपमुख्यमंत्री की अपील से कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस पैनल में असमंजस और सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है।
निष्कर्ष
पैनल नंबर 9 अब केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संदेश, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि मतदाता ‘तीर-कमान’ पर भरोसा जताते हैं, ‘टीवी’ को चुनते हैं, या फिर इस आपसी फूट का फायदा भाजपा उठाने में सफल होती है
📌 उल्हासनगर चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
नववर्ष के पावन अवसर पर सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के माध्यम से सैकड़ों गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव हेतु कंबल वितरित कर राहत पहुंचाई गई।
कैंप क्रमांक 3, दशहरा मैदान, इंदिरा गांधी गार्डन के सामने स्थित उल्हास जनपथ कार्यालय में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों ने लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त, समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने की भावना के तहत रात्रि के समय फुटपाथों, रेलवे स्टेशन परिसरों तथा मंदिरों के बाहर खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे गरीब एवं बेसहारा लोगों तक स्वयं पहुंचकर कंबल वितरित किए गए, जिससे वे कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रह सकें।
इस मानवीय पहल को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं लाभार्थियों ने शिवकुमार मिश्रा के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की है। नववर्ष की शुरुआत सेवा, करुणा और सामाजिक समर्पण के इस संदेश के साथ समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग (TPD) विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की ट्रांसफर को लेकर शहर में तीव्र विरोध और सवालों की हवा तेज हो गई है।
शहर के जागरूक नागरिकों, आविभिन्न सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्टों ने उल्हासनगर महानगर पालिक आयुक्त मनीषा अव्हाले तथा प्रशासन से यह पूछा है कि सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद अभी तक संजय पवार की बदली क्यों नहीं की गई?
महाराष्ट्र सरकारी सेवा नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण हर 3 वर्षों में अनिवार्य है, लेकिन संजय पवार पिछले 10 से अधिक वर्षों से लगातार TPD विभाग में पदस्थापित हैं।
नियमों की यह अवहेलना नागरिकों के बीच गंभीर संदेह और असंतोष का कारण बन रही है।
🚨 गंभीर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के आरोप
सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने, बिल्डर और भूमाफिया से मिलीभगत, तथा TDR से जुड़े अनियमित कार्यों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं।
इसके अलावा, बताया जाता है कि साल 2014 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें कथित रूप से 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
इसके बावजूद आज तक न तो विभागीय स्तर पर कोई कठोर कार्रवाई हुई और न ही उनका ट्रांसफर किया गया, जिससे नागरिकों में रोष और बढ़ गया है।
📑 राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों में शिकायतें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय पवार के विरुद्ध
CBI, ACB, ED और आयकर विभाग
जैसी जांच एजेंसियों में भी शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि:
“प्रशासन की खामोशी और लंबे समय तक पदस्थ बने रहना, दोनों ही स्थितियाँ अत्यंत संदिग्ध हैं।”
✊ जनता और सामाजिक संगठनों की स्पष्ट मांग
नागरिकों ने कड़े शब्दों में कहा:
“जब नियम सभी पर समान लागू होते हैं, तो फिर 10 साल से अधिक समय से एक ही पद पर जमे अधिकारी को हटाने में देरी क्यों?”
लोगों की प्रमुख माँग:
संजय युवराज पवार का तत्काल ट्रांसफर किया जाए
सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए
❓ अब प्रशासन के सामने बड़े सवाल
👉 क्या उल्हासनगर प्रशासन जनता की आवाज सुनेगा?
👉 क्या संजय युवराज पवार की बहुप्रतीक्षित बदली अब होगी या मामला फिर दबा दिया जाएगा?
👉 क्या नागरिकों को न्यायपूर्ण और पारदर्शी निर्णय मिलेगा?
📍 इस पूरे मामले पर शहर की निगाहें अब UMC प्रशासन और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग विभाग में पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार इन दिनों फिर से गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र सरकार के सेवा नियमों और शासन-निर्देश (GR) के अनुसार, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी एक ही विभाग में तीन वर्ष से अधिक पदस्थ नहीं रह सकता। निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसकी बदली अनिवार्य होती है।
इसके बावजूद, संजय युवराज पवार पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जिससे यह बड़ा प्रश्न उठ रहा है कि आखिर कौन-सी शक्तियाँ हैं जो उनकी बदली रोक रही हैं?
जागरूक नागरिकों की शिकायतें कई एजेंसियों में दाखिल
सूत्रों के अनुसार, कुछ सजग नागरिकों ने इस विषय को लेकर:
ED (Enforcement Directorate)
CBI (Central Bureau of Investigation)
Anti-Corruption Bureau
Income Tax Department
जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण संरक्षण के आरोप शामिल हैं।
भू-माफिया और बिल्डर लॉबी से सांठगांठ के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संजय युवराज पवार उल्हासनगर के भू-माफियाओं और बड़े बिल्डरों के साथ मिलकर काम करते हैं, और शहर में बड़े पैमाने पर अवैध व अनियमित निर्माण को संरक्षण प्रदान करते हैं।
2014 में रिश्वत लेते पकड़े गए थे
यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2014 में पवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने टाउन प्लानिंग विभाग में ही रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस समय भी मामला गंभीर था, परंतु उसके बाद भी उन्हें निलंबित करने या विभाग से हटाने के बजाए उन्हें पुनः उसी पद पर कार्यरत रहने दिया गया, जो स्वयं में कई सवाल खड़े करता है।
TDR घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप
संजय युवराज पवार का नाम हाल ही में उजागर हुए TDR घोटाले सहित अन्य निर्माण-संबंधी घोटालों में भी जोड़ा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि:
संजय पवार कथित तौर पर कहते हैं:
“मेरा ट्रांसफर करवाना किसी की ताकत में नहीं है। मेरे ऊपर तक मजबूत पकड़ और सेटिंग है। मंत्रालय के अर्बन डेवलपमेंट विभाग के बड़े अधिकारी मेरे समर्थन में हैं। मुझे कोई न हटाएगा और न ही मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है।”
अब तक एक्शन क्यों नहीं?
इन गंभीर आरोपों और दर्ज शिकायतों के बावजूद, संजय युवराज पवार आज भी टाउन प्लानिंग विभाग में सक्रिय रूप से ड्यूटी पर हैं। यह स्थिति:
राजनीतिक संरक्षण,
प्रशासनिक पंगुता
या संगठित भ्रष्टाचार
जैसे गंभीर प्रश्नों को जन्म दे रही है।
जनता की मांग
उल्हासनगर के जागरूक नागरिकों ने राज्य सरकार, मनपा आयुक्त और जांच एजेंसियों से मांग की है कि:
आरोपों की उच्च-स्तरीय जांच की जाए,
पवार को तत्काल विभाग से हटाया जाए,
सभी TDR और निर्माण अनुमोदनों की समीक्षा की जाए।
क्या सरकार और एजेंसियां कार्रवाई करेंगी?
अब सभी की नज़र इस बात पर है कि:
क्या महाराष्ट्र सरकार नियमों का पालन करवाएगी?
क्या संजय पवार की संरक्षक राजनीतिक शक्तियों का पर्दाफाश होगा?
और क्या उल्हासनगर के विकास को निगल रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी?
यह मामला उल्हासनगर की राजनीति और प्रशासन की साख के लिए अग्निपरीक्षा बन चुका है।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार पर आरोप है कि उन्होंने शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए अवैध और अनियमित निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा स्थानीय निर्माण माफियाओं के साथ उनकी गहरी सांठगांठ रही है।
अवैध निर्माणों में भूमिका का आरोप
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि उल्हासनगर में तेजी से बढ़े अवैध निर्माणों के पीछे संजय पवार की सक्रिय भूमिका रही है। आरोप है कि:
अवैध निर्माणों को मौन सहमति,
TDR सेटिंग एवं फाइल क्लियरेंस,
और मंजूरी प्रक्रियाओं में भारी राशि की वसूली की गई।
कई एजेंसियों में शिकायतें दर्ज
सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार ने कथित रूप से अवैध आय से कई संपत्तियाँ अर्जित की हैं। इस संबंध में शिकायतें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग में दर्ज कराई गई हैं। जानकारी मिली है कि इन शिकायतों पर उच्च स्तरीय जांच प्रक्रिया जल्द प्रारंभ होने वाली है।
पुराना रिश्वत कांड फिर चर्चा में
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में UMC टाउन प्लानर मनोज तरानी और जूनियर इंजीनियर संजय पवार पर ₹50,000 की रिश्वत मांगने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था और मामला दर्ज किया गया था। यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस कार्रवाई के बावजूद विभाग में अवैध गतिविधियाँ जारी रहीं।
नागरिकों की नाराजगी — फोन कॉल्स का जवाब नहीं
उल्हासनगर के नागरिकों ने आरोप लगाया है कि संजय पवार जनता की कॉल्स का जवाब नहीं देते, जिससे जनसुविधा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का प्रश्न है: "यदि शहर में कोई आपात स्थिति या गंभीर दुर्घटना हो जाए, तब भी क्या वह फोन नहीं उठाएँगे?"
तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
नागरिकों ने उल्हासनगर महानगरपालिका के आयुक्त से तुरंत हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार रोका जा सके और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इस कॉलेज को ग्रामीण हॉस्पिटल बदलापूर, छाया हॉस्पिटल अंबरनाथ, सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 और गवर्नमेंट मैटरनिटी होम उल्हासनगर-4 का प्रशासनिक चार्ज अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज के डीन को दिया गया है।
लेकिन इसके बावजूद गरीब मरीजों को आवश्यक उपचार और सर्जरी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
सर्जरी बंद — मरीजों को किया जा रहा है जबरन ट्रांसफर
पिछले तीन महीनों से सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 में जनरल सर्जरी पूरी तरह बंद है।
यह आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टरों को भेजने से लगातार इंकार किया जा रहा है, जिसके कारण गरीब मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
डीन की निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर प्रश्न
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दायित्व है कि:
स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को संबद्ध सरकारी अस्पतालों में भेजा जाए
छोटी-बड़ी सभी सर्जरी वहीं पर की जाएं
गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले
लेकिन इन अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर भेजे जा रहे हैं, और न ही सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है।
समाजसेवक हिरो राजाई की चेतावनी
समाजसेवक हिरो राजाई ने कहा है कि यदि अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज की ओर से तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं किए गए, तथा बदलापूर, अंबरनाथ, उल्हासनगर-3 और 4 के सरकारी अस्पतालों में सभी सर्जरी शुरू नहीं की गईं,
तो वे सेंट्रल हॉस्पिटल के गेट पर भूख हड़ताल करने को बाध्य होंगे।
> “गरीब मरीजों का इलाज रुकना बहुत बड़ा अपराध है। सरकारी सुविधाएँ जनता के लिए हैं, न कि फाइलों में बंद रखने के लिए।”
— हिरो राजाई, समाजसेवक
जनता की मांग
✔ तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती
✔ सभी प्रकार की सर्जरी तत्काल शुरू
✔ गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका के नगररचना विभाग द्वारा 14 नंबर TDR (Transfer of Development Rights) रद्द किए जाने के बाद क्षेत्र में जारी सभी निर्माण अनुमति आदेशों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय कानूनी व प्रशासनिक स्पष्टता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
लेकिन इसी प्रकरण में नगररचना विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जारी किए गए स्थगन पत्रों में —
❌ न तो निर्माण अनुमति संख्या का उल्लेख है
❌ और न ही संबंधित निर्माण स्थलों का पूर्ण पता दर्ज है
इसके कारण निर्माणकर्ताओं, परियोजना धारकों, नागरिकों और संबंधित विभागों के बीच भारी अस्पष्टता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
🟥 प्रमुख मुद्दे
• TDR-14 रद्द होने के बाद सभी निर्माण अनुमति आदेशों को नगररचना विभाग ने रोक दिया
• लेकिन जारी स्थगन पत्रों में प्राथमिक जानकारी का अभाव
• अनुमति क्रमांक और साइट पता न होने से कानूनी विवाद की आशंका
• बिल्डरों और परियोजना धारकों द्वारा विभाग की निष्क्रियता पर सवाल
• भविष्य में कोर्ट केस और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना
📌 विशेषज्ञों की राय
नगर विकास विशेषज्ञों का कहना है कि बिना निर्माण आदेश नंबर और बिना साइट पता के जारी किया गया स्थगन पत्र कानूनी रूप से अधूरा माना जाएगा और यह आगे चलकर तकरार और न्यायालयीन विवाद को जन्म दे सकता है।
📍 स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया
नागरिकों का कहना है कि नगररचना विभाग की इस तरह की लापरवाही बार-बार उजागर होती है, जिसके कारण शहर की विकास प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है।
निष्कर्ष
महानगरपालिका प्रशासन को इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए —
🔹 सभी स्थगन पत्रों में आवश्यक विवरण जोड़कर पुनः जारी करना चाहिए
🔹 जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए
उल्हासनगर के विकास से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर आगे भी नजर बनाए रखी जाएगी।
आज माननीय प्रशासन अधिकारी, शिक्षण विभाग एवं उल्हासनगर महानगरपालिका को महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (मनसे विद्यार्थीसैनिक) की ओर से एक महत्वपूर्ण निवेदन सौंपा गया। निवेदन में मांग की गई कि 6 दिसंबर, जो कि भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है, उस दिन उल्हासनगर शहर के सभी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया जाए।
ज्ञात हो कि 6 दिसंबर को पूरे देशभर में सामाजिक न्याय, समानता, बंधुता और संविधानिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। विभिन्न सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक संस्थानों तथा शैक्षणिक संस्थाओं में अभिवादन कार्यक्रम, श्रद्धांजलि सभा और जनजागरण गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
इसी दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग चैत्यभूमि, दादर जाकर बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ऐसे में कई विद्यार्थियों को अपने परिवार के साथ वहाँ उपस्थित होना पड़ता है, जिसके चलते उनके लिए विद्यालय में उपस्थित होना संभव नहीं हो पाता।
इसी महत्वपूर्ण संदर्भ को ध्यान में रखते हुए मनसे विद्यार्थी सेना की ओर से उल्हासनगर शहर के सभी स्कूलों के विद्यार्थियों को 6 दिसंबर को अवकाश प्रदान करने की मांग प्रशासन के समक्ष औपचारिक रूप से रखी गई है।
मनसे विद्यार्थी सेना ने प्रशासन से इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा व्यक्त की है।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगर पालिका चुनाव 2025 को लेकर शहर का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर पैनल नंबर 11 में राजनीतिक हलचल चरम पर है, जहाँ स्थानीय नागरिकों के बीच रवि हाउसिंग एजेंसी के संचालक और समाजसेवी दिलीप अच्छरा का नाम तेजी से उभर रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि इस बार जनता ऐसे उम्मीदवार को देखना चाहती है जिसकी छवि साफ-सुथरी हो, जो क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता देकर समाधान करने की क्षमता रखता हो।
जानकारी के अनुसार, पैनल नंबर 11 के बड़ी संख्या में रहवासी यह मानते हैं कि लंबे समय से कुछ सीमित और पुराने चेहरे चुनावी मैदान में दिखाई देते रहे हैं, जबकि अब बदलते दौर में क्षेत्र को नए और सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है। इसी वजह से लोगों का विश्वास और समर्थन दिलीप अच्छरा की ओर झुकता हुआ नज़र आ रहा है, जिन्हें सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और समाजसेवा में सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, ऐसा भी माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) दिलीप अच्छरा को संभावित उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार सकती है। हालांकि, इस संभावित चुनावी यात्रा पर अभी तक न तो पार्टी की ओर से और न ही दिलीप अच्छरा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की गई है।
अब कई अहम सवाल चर्चा में:
क्या दिलीप अच्छरा आगामी चुनाव में आधिकारिक रूप से उतरने के लिए तैयार होंगे?
क्या BJP उन्हें टिकट देकर पैनल नंबर 11 में नया राजनीतिक समीकरण तैयार करेगी?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिलीप अच्छरा चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो पैनल नंबर 11 में मुकाबला इस बार काफी रोमांचक और निर्णायक हो सकता है, क्योंकि जनता में बदलाव की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर-3 स्थित लोकनिर्माण विभाग (PWD) के डिवीजन-बी कार्यालय में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर अनिल (उपनाम बदल दिया गया) पर गंभीर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अघोषित संपत्ति अर्जित करने के आरोप सामने आए हैं। विभागीय सूत्रों और स्थानीय ठेकेदारों के अनुसार, यह अधिकारी लंबे समय से ठेकेदारों को विभिन्न प्रोजेक्ट्स के कामकाज में अनावश्यक अड़चनें डालकर “लेन-देन” के नाम पर वसूली करता रहा है।
जानकारी के अनुसार, अनिल नामक यह इंजीनियर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कार्यादेशों, बिलों की मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया को रोककर ठेकेदारों से पैसों की मांग करता था। ठेकेदारों के अनुसार, जो लोग उसकी मांगों को पूरा नहीं करते, उनके कामों में जानबूझकर अड़चनें डाली जाती थीं।
सूत्रों का दावा है कि उक्त अधिकारी ने पिछले कुछ वर्षों में अघोषित संपत्ति का विशाल जाल खड़ा कर लिया है, जिसमें शहर और आसपास के इलाकों में कई फ्लैट्स, भूखंड, और अन्य निवेश शामिल हैं। बताया जाता है कि वह अपने प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों का हवाला देकर अकसर कहता है — “मेरी ऊपर तक पहुंच है, कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
अब यह मामला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT) और अन्य डिपार्टमेंट के रडार पर आ गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इस इंजीनियर की आय और संपत्तियों की जांच शुरू की जा सकती है। साथ ही, विभागीय स्तर पर भी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने और कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वहीं, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय और राज्य सरकार के उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान या सफाई जारी नहीं की गई है।
स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला उल्हासनगर पीडब्ल्यूडी इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला साबित हो सकता है।
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने अपनी निगरानी तेज कर दी है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उल्हासनगर महानगर पालिका के कई प्रमुख विभागों — विशेषकर भवन निर्माण, कर वसुली, जल आपूर्ति, स्वच्छता विभाग, लोक निर्माण विभाग(PWD) और अन्य कई विभाग— के अधिकारी एसीबी के रडार पर आ गए हैं।
पिछले कुछ महीनों से उल्हासनगर महानगर पालिका में बड़े पैमाने पर अवैध लेनदेन, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, तथा बिल पास करने में कथित कमीशनखोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इन शिकायतों की प्राथमिक जांच के बाद एसीबी ने संबंधित विभागों की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखनी शुरू कर दी है।
सूत्र बताते हैं कि कुछ मामलों में अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से प्रतिशत के रूप में रिश्वत लेने और कार्यों की फाइलों में जानबूझकर देरी करने जैसी प्रथाओं की भी पुष्टि हुई है। एसीबी अब इन मामलों में ठोस सबूत इकट्ठा करने में जुटी है, जिसके बाद बड़ी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
उल्हासनगर के नागरिकों में भी इस कार्रवाई को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के जाल में उलझे अधिकारी बेनकाब होंगे और उल्हासनगर महानगर पालिका की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लौटेगी।
सूत्रों का दावा: “आने वाले दिनों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर छापेमारी या पूछताछ की कार्रवाई संभव है।”
👉 यह खबर उल्हासनगर की प्रशासनिक दुनिया में हलचल पैदा करने वाली साबित हो सकती है।
शिकायत दर्ज करने के लिए संपर्क कर सकते हैं।
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Anti-Corruption Bureau (ACB) Maharashtra:
Phone: 24954826, 24921212
Email: acbwebmail@mahapolice.gov.in
Online Complaint Portal: ACB Maharashtra's online complaint portal
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर के कैम्प-3 स्थित भाऊ गोप बहरानी चौक पर बीती रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने उत्पात मचाया। मौके पर खड़ी लगभग 7–8 कारों, एक टेम्पो और करीब 15–20 मोटरसाइकिलों में तोड़फोड़ की गई, जिससे वाहनों को भारी नुकसान हुआ है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना देर रात की है जब क्षेत्र में सन्नाटा था। आसपास के लोगों ने सुबह वाहनों की टूटी-फूटी हालत देखकर पुलिस को सूचना दी।
स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जाए, ताकि इन समाजकंटकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
निवासियों का कहना है कि यह घटना क्षेत्र की शांति भंग करने की कोशिश है और अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
पुलिस प्रशासन से अपील की गई है कि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर कठोर सज़ा दी जाए, ताकि आगे ऐसी नुकसानदायक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर-1 के आज़ाद नगर क्षेत्र से 9 वर्षीय खुशी सुखमिलाल गौतम नामक बालिका के लापता होने का मामला सामने आया है। यह बच्ची 13 अक्टूबर 2025 से घर से गायब है, जिसके बाद से परिजन और पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं।
परिवार के अनुसार, खुशी उस दिन बिना किसी को बताए घर से बाहर निकली और अब तक वापस नहीं लौटी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि खुशी अक्सर अपना नाम बदलकर बताती है और लोगों से कहती है कि उसके माता-पिता नहीं हैं, जिससे उसकी पहचान में कठिनाई आ रही है।
उल्हासनगर पुलिस ने नागरिकों से इस बच्ची की तलाश में सहयोग की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को यह बच्ची दिखाई देती है, तो तुरंत नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क करें—
पोलीस उपनिरीक्षक पोपट नवले: 📞 9922174516 / 0251-2710005
खुशी के पिता सुखमिलाल गौतम: 📞 7768857332
पुलिस और परिवार का कहना है कि — आपकी एक कॉल एक मासूम बच्ची को उसके घर तक पहुँचाने में मददगार साबित हो सकती है।
फिलहाल पुलिस टीम ने आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी को खुशी के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका के टाउन प्लानिंग विभाग में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी संजय पवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों के अनुसार, पवार द्वारा उल्हासनगर के नंबर-1 से लेकर नंबर-5 तक के क्षेत्रों में अवैध बांधकाम (निर्माण) को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इन अवैध निर्माण स्थलों पर नियमानुसार आवश्यक फलक बोर्ड तक नहीं लगाए जाते, जबकि महाराष्ट्र सरकार की स्पष्ट GR (Government Resolution) के अनुसार, हर निर्माण स्थल पर फलक बोर्ड लगाना अनिवार्य है। यह बोर्ड निर्माण की मंजूरी, वास्तुविद का नाम, लाइसेंस नंबर, मंजूरी की तारीख जैसी जानकारी प्रदान करता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
लेकिन उल्हासनगर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो किसी साइट पर जानकारी प्रदर्शित की जाती है, और न ही नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है। आरोप है कि यह सब कुछ संजय पवार की मिलीभगत और संरक्षण में हो रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए, ताकि नगर विकास विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
जनता की मांग:
टाउन प्लानिंग विभाग में निष्पक्ष जांच
संजय पवार को तत्काल निलंबित कर पूछताछ
अवैध निर्माणों पर त्वरित कार्रवाई
सभी निर्माण स्थलों पर GR के अनुसार बोर्ड लगाना सुनिश्चित किया जाए
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक जनहित का मुद्दा बन गया है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो शहर की संरचना और नागरिक सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर-5 स्थित प्रसिद्ध जींस मार्केट और डेनिम फैब्रिक कारोबारियों पर अब जीएसटी विभाग की पैनी नजर है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां के कई व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर कच्चे बिलों पर लेनदेन किया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका है।
जींस बेचने वाले अनेक दुकानदार ग्राहकों से नकद में लेनदेन कर रहे हैं, लेकिन इनका अधिकांश व्यापार "कच्चे बिलों" के आधार पर किया जा रहा है। यानी बिना पक्के बिल के ही बिक्री की जा रही है, ताकि टैक्स की चोरी की जा सके।
इतना ही नहीं, डेनिम के थोक विक्रेता — जो मिलों से कपड़ा मंगवाते हैं — वे भी इस घोटाले में शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कपड़ा कारोबारियों द्वारा मिलों से कपड़ा "पक्के बिल" पर मंगवाया जाता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जब वही कपड़ा बाजार में बेचा जाता है तो उसका एक बड़ा हिस्सा "कच्चे" में यानी बिना टैक्स इनवॉइस के बेचा जाता है।
जीएसटी विभाग ने इस संदिग्ध गतिविधियों की जांच प्रारंभ कर दी है और निकट भविष्य में यहां बड़े पैमाने पर छापेमारी की संभावना जताई जा रही है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उल्हासनगर के टैक्स चोरी से जुड़ा सबसे बड़ा मामला बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे-पक्के लेनदेन की यह प्रणाली लंबे समय से चल रही है, तो इससे न केवल सरकार को करोड़ों का घाटा हुआ है, बल्कि ईमानदारी से व्यापार करने वाले व्यापारी भी इस अनियमित व्यवस्था की वजह से नुकसान में हैं।
अब देखना यह होगा कि जीएसटी विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या उल्हासनगर की यह जींस मार्केट आगामी दिनों में कर चोरी के बड़े खुलासे का केंद्र बनती है या नहीं।
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