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उल्हासनगर मनपा में RTI जानकारी को लेकर विवाद! दो कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड पर दिलीप मिश्रा ने उठाए सवाल,आयुक्त मनीषा आव्हाळे से जांच की मांग।


 








उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर एक नया मामला सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के महानगर प्रमुख दिलीप मिश्रा ने महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती मनीषा आव्हाळे को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि दो महानगरपालिका कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कानून की गलत व्याख्या की गई और जानकारी देने से परहेज किया गया।

शिकायत में मिश्रा ने आयुक्त से संबंधित अधिकारी के उत्तर की जांच करने, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कानूनी रूप से उपलब्ध जानकारी प्रदान करने के निर्देश देने तथा यदि जानकारी अनुचित तरीके से अस्वीकार की गई हो, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

6 अगस्त को किया था RTI आवेदन

शिकायत के अनुसार, दिलीप मिश्रा ने 6 अगस्त 2026 को टोकन क्रमांक 2766 के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में उल्हासनगर महानगरपालिका के कर्मचारी श्री अक्षय मनोज जाधव और श्री मनीष सुरेश लहांडे से संबंधित नियुक्ति एवं सेवा संबंधी विभिन्न जानकारियां मांगी गई थीं।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मांगी गई जानकारी में दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति की तिथि, नियुक्ति की पृष्ठभूमि, उनके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेज, नियुक्ति से संबंधित नियमावली और लागू कोटे की जानकारी शामिल थी।

आवेदक के अनुसार, यह जानकारी प्रशासनिक एवं वस्तुनिष्ठ प्रकृति की थी और इसका उद्देश्य संबंधित नियुक्तियों की प्रक्रिया तथा नियमों के अनुपालन से जुड़े तथ्यों को समझना था।

10 सितंबर के पत्र को लेकर जताई आपत्ति

दिलीप मिश्रा ने अपनी शिकायत में पत्र क्रमांक 258/2026, दिनांक 10 सितंबर 2026 का उल्लेख करते हुए कहा है कि जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग के उत्तर में कानून की गलत व्याख्या करते हुए मांगी गई जानकारी देने से परहेज किया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराई जा सकने वाली जानकारी पर नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए था। उन्होंने संबंधित उत्तर पर आपत्ति जताते हुए आयुक्त से पूरे मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।

हालांकि, संबंधित अधिकारी द्वारा दिए गए मूल उत्तर, उसमें उल्लिखित कानूनी आधार और मांगी गई प्रत्येक जानकारी का विवरण स्वतंत्र रूप से उपलब्ध न होने के कारण यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि जानकारी का इनकार निश्चित रूप से कानून के विरुद्ध था। इस संबंध में महानगरपालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

आयुक्त मनीषा आव्हाळे से तीन प्रमुख मांगें

शिकायत में आयुक्त से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

- उत्तर की जांच: जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिए गए जवाब की कानूनी एवं तथ्यात्मक समीक्षा की जाए।

- जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश: सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कानूनी रूप से उपलब्ध जानकारी नियमानुसार प्रदान की जाए।

- जिम्मेदारी तय करने की मांग: यदि जांच में जानकारी अनुचित तरीके से अस्वीकार किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए।

इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता ने आयुक्त से अनुरोध किया है कि इस शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।

RTI और प्रशासनिक पारदर्शिता का मुद्दा

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास उपलब्ध रिकॉर्ड तक पहुंच प्राप्त करने का कानूनी माध्यम प्रदान करता है। हालांकि, मांगी गई प्रत्येक जानकारी का खुलासा स्वतः अनिवार्य नहीं होता। संबंधित जानकारी की प्रकृति, अधिनियम के तहत लागू अपवादों और अन्य वैधानिक प्रावधानों के आधार पर उसका निर्णय किया जाता है।

इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि क्या आवेदन में मांगी गई जानकारी पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उचित विचार किया गया था और यदि किसी जानकारी को देने से इनकार किया गया, तो क्या उसके लिए पर्याप्त कानूनी आधार बताया गया था।

यदि शिकायतकर्ता संबंधित उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं, तो अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध अपील के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

अब महानगरपालिका प्रशासन के रुख पर नजर

दिलीप मिश्रा की शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महानगरपालिका आयुक्त इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और संबंधित विभाग से क्या स्पष्टीकरण मांगा जाता है।

फिलहाल, शिकायतकर्ता ने जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में आयुक्त कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग और संबंधित जन सूचना अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष: उल्हासनगर महानगरपालिका में नियुक्ति संबंधी जानकारी को लेकर उठे इस मामले ने सूचना का अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। अब शिकायत पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और नियमानुसार की जाने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए पत्र में उल्लिखित तथ्यों और आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा मूल RTI उत्तर स्वतंत्र रूप से सत्यापित होने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।















उल्हासनगर में कथित अवैध कारोबार पर निगरानी बढ़ाने की मांग, पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका पर नजर।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में कथित अवैध जुआ अड्डों, रोलेट गेम, गुटखा बिक्री, नशीले पदार्थों के संभावित कारोबार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर कार्रवाई की मांग का मुद्दा महत्वपूर्ण है। इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और युवा पीढ़ी को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के लिए संबंधित पुलिस प्रशासन तथा सक्षम विभागों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, इन गतिविधियों के वास्तविक स्वरूप, संबंधित स्थानों और कथित कारोबार में शामिल व्यक्तियों के संबंध में स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए मामले को तथ्यों के आधार पर देखना, प्राप्त शिकायतों की जांच करना और संबंधित विभागों का पक्ष सामने लाना जरूरी है।

शहर में कथित अवैध गतिविधियों पर निगरानी की जरूरत

किसी भी शहर में कानून के विरुद्ध संचालित गतिविधियों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी, नागरिकों की शिकायतों पर उचित ध्यान और संबंधित विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है। उल्हासनगर में भी यदि जुआ, रोलेट गेम, प्रतिबंधित गुटखा या नशीले पदार्थों की बिक्री एवं वितरण से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में प्रमुख सवाल यह है कि क्या संबंधित पुलिस थानों और सक्षम विभागों को ऐसी गतिविधियों के बारे में शिकायतें प्राप्त हुई हैं? यदि शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो उनकी जांच की स्थिति क्या है और तथ्यों के आधार पर आगे क्या कदम उठाए गए हैं?

इन सवालों का उत्तर संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगा। बिना सत्यापित तथ्यों के किसी व्यक्ति, प्रतिष्ठान या समूह को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल बताना उचित नहीं होगा।

युवा पीढ़ी का भविष्य: समाज के सामने गंभीर चुनौती

जुए की लत युवाओं को आर्थिक नुकसान, कर्ज और पारिवारिक तनाव जैसी समस्याओं की ओर धकेल सकती है। इसी प्रकार, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और तंबाकू उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

ऐसे में केवल कार्रवाई की मांग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं को जागरूक करना, परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर नशामुक्ति एवं परामर्श संबंधी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।

यदि शहर में किसी स्थान पर युवाओं को प्रभावित करने वाली संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत मिलती है, तो संबंधित विभागों द्वारा उसकी जांच और आवश्यक हस्तक्षेप से संभावित नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है।

गुटखा और प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण जरूरी

गुटखा तथा अन्य प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री, भंडारण और वितरण से संबंधित मामलों में लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। ऐसी शिकायतों की जांच में पुलिस के साथ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी उनके अधिकार क्षेत्र के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकती है।

इसी तरह, नशीले पदार्थों की कथित बिक्री या वितरण से संबंधित शिकायतों पर उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनों के आधार पर जांच की जानी चाहिए। यदि किसी गतिविधि के गैरकानूनी होने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, उल्हासनगर में इस संबंध में किसी विशेष कार्रवाई, छापेमारी, जब्ती या गिरफ्तारी की पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा रही है।

पुलिस प्रशासन से अपेक्षाएं और नागरिकों के सवाल

शहर में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दों पर नागरिकों की अपेक्षा है कि उनकी शिकायतों पर उचित ध्यान दिया जाए। इस मामले में निम्नलिखित सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होगा:

- क्या कथित अवैध जुआ अड्डों और रोलेट गेम के संचालन को लेकर पुलिस को शिकायतें मिली हैं?

- क्या प्रतिबंधित गुटखा या नशीले पदार्थों की कथित बिक्री एवं वितरण की जांच की जा रही है?

- क्या संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने या संयुक्त निरीक्षण करने की आवश्यकता का आकलन किया गया है?

- शिकायतों की पुष्टि होने पर संबंधित कानूनों के तहत क्या कार्रवाई की जाएगी?

- युवाओं को जुए की लत, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और तंबाकू सेवन से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की कोई योजना है?

इन सवालों के जवाब से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और नागरिकों की चिंताओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है।

निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई पर जोर

जनहित से जुड़े ऐसे मामलों में जरूरी है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के विरुद्ध आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।

नागरिकों के पास यदि किसी संदिग्ध गतिविधि के संबंध में विश्वसनीय जानकारी या दस्तावेज हैं, तो वे संबंधित पुलिस थाने अथवा सक्षम विभाग को शिकायत देकर जांच की मांग कर सकते हैं।

अब आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

उल्हासनगर में कथित अवैध जुआ अड्डों, रोलेट गेम, गुटखा और नशीले पदार्थों से जुड़े कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित पुलिस प्रशासन एवं सक्षम विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। शिकायतों की वास्तविक स्थिति, जांच की प्रगति और संभावित कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इस विषय पर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

जनहित का सवाल: शहर की युवा पीढ़ी को संभावित नुकसान से बचाने और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाएंगे?

निष्कर्ष: उल्हासनगर में कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष जांच, प्रभावी निगरानी, जनजागरूकता और पारदर्शिता आवश्यक हैं। यदि कथित गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

महत्वपूर्ण संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार जनहित में उठाए गए सवालों और जांच की मांग पर आधारित है। इसमें उल्लिखित कथित गतिविधियों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को दोषी नहीं ठहराया गया है। संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।




















उल्हासनगर सनद वितरण मामला गरमाया! नोवेल साल्वे ने उपविभागीय अधिकारी विजयानंद शर्मा के निलंबन और CBI जांच की मांग की; 28 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी।



 





उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में सनद वितरण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने महाराष्ट्र शासन के राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी विजयानंद शर्मा के खिलाफ कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अधिकारी को निलंबित करने, उनकी संपत्ति की जांच कराने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग उठाई है। साल्वे ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे 28 अक्टूबर 2026 से मुंबई के आजाद मैदान में दोबारा अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।

पहले भी कर चुके हैं अनशन, शासन के निर्देशों का दिया हवाला

नोवेल साल्वे के पत्र के अनुसार, उन्होंने सनद वितरण में कथित भ्रष्टाचार की विभागीय जांच कराने के लिए कोंकण आयुक्त से लेकर महाराष्ट्र शासन तक कई बार पत्राचार किया था। उनका आरोप है कि लगातार पत्राचार के बावजूद उन्हें कोई ठोस कार्रवाई होती हुई दिखाई नहीं दी। इसी के विरोध में उन्होंने 23 सितंबर 2026 को मुंबई के आजाद मैदान में जनहित के मुद्दे पर अनिश्चितकालीन अनशन किया था।

साल्वे का दावा है कि उनके अनशन का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने कोंकण आयुक्त और ठाणे जिलाधिकारी को निर्धारित समयसीमा में मामले की जांच कर रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि, उनके अनुसार, अब तक इस मामले में अपेक्षित और पारदर्शी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

इस संबंध में शासन की ओर से जारी निर्देशों, जांच की वर्तमान स्थिति और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की आशंका जताई

सनद वितरण से संबंधित मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताते हुए नोवेल साल्वे ने मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। उनके पत्र में इस कथित प्रकरण में सैकड़ों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की गई है।

हालांकि, भ्रष्टाचार की कथित राशि और आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जांच तथा सक्षम एजेंसियों की रिपोर्ट से ही हो सकेगी। फिलहाल, इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

साल्वे की प्रमुख मांगों में उपविभागीय अधिकारी विजयानंद शर्मा का निलंबन, उनकी संपत्ति की जांच और सनद वितरण से संबंधित सभी मामलों की सीबीआई से जांच कराना शामिल है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी।

15 दिनों का अल्टीमेटम, 28 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी

राजस्व विभाग को भेजे गए पत्र में साल्वे ने स्पष्ट किया है कि पत्र प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 28 अक्टूबर 2026 से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा है कि यह आंदोलन मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।

पत्र में अनशन के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में महाराष्ट्र शासन के राजस्व विभाग को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही गई है। इस चेतावनी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और शासन स्तर पर पहले दिए गए कथित जांच निर्देशों की स्थिति क्या है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार

यह मामला केवल एक अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, सनद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से भी जुड़ा है।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो सक्षम जांच एजेंसी के माध्यम से तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, संबंधित अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप हो।

फिलहाल प्रमुख सवाल यही हैं:

क्या राजस्व विभाग इस मामले में पहले दिए गए जांच निर्देशों की स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या शिकायतकर्ता को जांच की प्रगति से अवगत कराया जाएगा? और क्या 28 अक्टूबर से प्रस्तावित अनशन से पहले प्रशासन कोई ठोस कदम उठाएगा?

इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

नोट: यह समाचार सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे द्वारा प्रस्तुत पत्र और उसमें किए गए दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारी एवं प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।





























उल्हासनगर में स्ट्रीट लाइटों की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल; सुबह जल्दी बंद और शाम को देर से चालू होने की शिकायत, महावितरण को तत्काल कार्रवाई की मांग।




 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों के समय से पहले बंद होने, शाम को देर से चालू होने और कुछ क्षेत्रों में लाइटें पूरी तरह बंद रहने की शिकायत को लेकर अब महावितरण कंपनी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। प्रहार सामाजिक संघटना, ठाणे जिला के अध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल दिलीप पाटिल ने 12 अक्टूबर 2026 को महावितरण के संबंधित अधिकारियों सहित उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को ईमेल भेजकर इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर के विभिन्न इलाकों में स्ट्रीट लाइटें सुबह जल्दी बंद हो रही हैं, जबकि शाम के समय निर्धारित समय पर चालू नहीं हो रही हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित मीटर बंद होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने और लाइटें शुरू नहीं होने की शिकायतें भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति और तकनीकी कारणों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

सुबह और रात के समय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने पत्र में कहा है कि स्ट्रीट लाइटों की अनियमित व्यवस्था के कारण सुबह जल्दी काम पर जाने वाले नागरिकों, रात में यात्रा करने वाले लोगों तथा अन्य राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दुर्घटनाओं और चोरी जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शहर में धार्मिक कार्यक्रमों और उत्सवों के दौरान रात के समय नागरिकों तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में सार्वजनिक सड़कों और प्रमुख आवागमन मार्गों पर पर्याप्त रोशनी बनाए रखना आवश्यक है। इसी आधार पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था को केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा से जुड़ा विषय बताया गया है।

मनपा के विद्युत विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ने का दावा

पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि दिन के समय स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बंद रहने के कारण उल्हासनगर महानगरपालिका के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग को मरम्मत, मीटरों की जांच, कंट्रोल पैनल के निरीक्षण और आवश्यक तकनीकी परीक्षण करने में कठिनाई हो सकती है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, विद्युत आपूर्ति के अनियमित समय और संभावित बाधाओं का असर स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव तथा मरम्मत कार्यों पर पड़ रहा है। ऐसे में महावितरण कंपनी और महानगरपालिका के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

हालांकि, विद्युत आपूर्ति बाधित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, क्या संबंधित मीटरों में तकनीकी खराबी है या टाइमर एवं नियंत्रण प्रणाली में कोई समस्या है, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से जांच और स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

महावितरण के सामने रखीं प्रमुख मांगें

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने अपने ईमेल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:

- बंद मीटरों की तत्काल जांच: जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों के मीटर या संबंधित विद्युत आपूर्ति बंद होने की शिकायत है, वहां जांच कर आवश्यक आपूर्ति बहाल की जाए।

- निर्धारित समय पर रोशनी: महानगरपालिका द्वारा लगाए गए टाइमर के अनुसार स्ट्रीट लाइटें निर्धारित समय पर चालू और बंद हों, यह सुनिश्चित किया जाए।

- पूर्व सूचना की व्यवस्था: यदि किसी तकनीकी या अन्य कारण से विद्युत आपूर्ति बंद करना आवश्यक हो, तो महानगरपालिका के संबंधित विद्युत विभाग को पहले से सूचित किया जाए।

- तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत: शहर में स्ट्रीट लाइटों, मीटरों और कंट्रोल पैनलों की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत की जाए।

- स्थायी समाधान: भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए महावितरण और महानगरपालिका के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

जवाबदेही तय करने की चेतावनी

अपने पत्र में एडवोकेट पाटिल ने स्पष्ट किया है कि स्ट्रीट लाइटों की विद्युत आपूर्ति बाधित होने से नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी तत्काल आवश्यक कदम उठाएं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। यह शिकायतकर्ता की ओर से व्यक्त की गई चेतावनी है; फिलहाल किसी अधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रहार सामाजिक संघटना विधायक बच्चू भाऊ कडू के मार्गदर्शन में बांद्रा स्थित प्रकाश गढ़ में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकती है।

उन्होंने अपने ईमेल की प्रतिलिपि उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त, महावितरण कंपनी के कल्याण परिमंडल के अधीक्षक अभियंता, उल्हासनगर के संबंधित अभियंताओं और महानगरपालिका के कार्यकारी अभियंता को भी भेजी है, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई और विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

अब संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर नजर

इस शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महावितरण कंपनी और उल्हासनगर महानगरपालिका इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। क्या बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और मीटरों की जांच की जाएगी? क्या टाइमर व्यवस्था को दुरुस्त कर निर्धारित समय पर रोशनी सुनिश्चित की जाएगी? और क्या भविष्य में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में दोनों विभागों के बीच समन्वय के लिए कोई स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी?

फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधा के मुद्दे के रूप में सामने आया है। संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया, तकनीकी जांच के निष्कर्ष और की गई कार्रवाई का विवरण सामने आने के बाद ही समस्या की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जनहित का सवाल: शहर की सड़कों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना नागरिकों की सुरक्षा और सुचारु आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे शिकायत की जांच कर आवश्यक कदम उठाएं और नागरिकों को नियमित स्ट्रीट लाइट व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करें।
















उल्हासनगर मनपा में RTI प्रकरण गरमाया, 8 अधिकारियों पर ₹2 लाख का दंड और आवेदक को मुआवजा देने का मामला चर्चा में।

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका (मनपा) में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने से जुड़े मामले में आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कुल 2 लाख रुपये का दंड लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन से दंड की राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी मामले में RTI आवेदक सुदेश रोहरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का विषय भी सामने आया है।

बताया गया है कि इस प्रकरण में आयुक्त एवं उपायुक्त (मुख्यालय) डॉ. दीपाली चौगुले की ओर से संबंधित अधिकारियों के वेतन से राशि वसूलने को मंजूरी दी गई है। हालांकि, दंड के आदेश, मुआवजे की स्वीकृति तथा वसूली की वर्तमान स्थिति से संबंधित मूल आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

RTI जानकारी देने में देरी पर कार्रवाई

सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सार्वजनिक प्राधिकरणों की जवाबदेही तय करना है। निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराने अथवा अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्राप्त समाचार विवरण के मुताबिक, उल्हासनगर मनपा से जुड़े इस मामले में राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अलग-अलग राशि का दंड निर्धारित किया गया है। कुल दंड की राशि 2 लाख रुपये बताई गई है। इस घटनाक्रम ने मनपा में RTI आवेदनों के निपटारे, विभागीय जवाबदेही और सूचना उपलब्ध कराने की प्रशासनिक व्यवस्था पर ध्यान आकर्षित किया है।

आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर निर्धारित दंड का विवरण

1. उद्धव लुल्ला— कर निर्धारक एवं संकलक, यूनिट 1 से 4: ₹80,000

2. मनोज गोकलानी— कर निर्धारक एवं संकलक, यूनिट 5 से 8 तथा तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹30,000

3. संक्षिप्त शा. निकम — कर निरीक्षक एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹20,000

4. चंदू एन. साववानी — कर निरीक्षक एवं तत्कालीन जन सूचना अधिकारी: ₹20,000

5. राम आयलानी— तत्कालीन कर निरीक्षक: ₹12,500

6. आनंद भानुशाली — तत्कालीन सेवानिवृत्त कर निरीक्षक: ₹12,500

7. भानू परमार — कर निरीक्षक: ₹12,500

8. सुंदर लांडगे— कर निरीक्षक: ₹12,500

उपलब्ध सूची में उल्लिखित राशियों का कुल योग 2 लाख रुपये होता है। हालांकि, प्रत्येक अधिकारी के विरुद्ध दंड लगाने के आधार, संबंधित आदेश की तारीख और वसूली की वास्तविक स्थिति को मूल आदेश से सत्यापित किया जाना जरूरी है।

आवेदक को ₹2 लाख मुआवजा देने का मामला

इस प्रकरण का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू RTI आवेदक सुदेश रोहरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने से संबंधित है। समाचार विवरण के मुताबिक, इस भुगतान की जिम्मेदारी महानगरपालिका पर निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अधिकारियों पर लगाया गया कुल 2 लाख रुपये का दंड और आवेदक को दिए जाने वाले 2 लाख रुपये के मुआवजे को एक ही राशि नहीं माना जाना चाहिए। दोनों की कानूनी प्रकृति, भुगतान का आधार और वसूली की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। मुआवजे के वास्तविक आदेश, भुगतान की स्थिति तथा संबंधित अधिकारियों से राशि वसूलने के आधार की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण पर भी चर्चा

इस कार्रवाई के बीच महानगरपालिका की निर्णय-प्रक्रिया और प्रशासनिक अधिकारों के वितरण को लेकर भी सवाल उठने की बात सामने आई है। कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय लेने के महत्वपूर्ण अधिकार आयुक्त मनीषा आव्हाले के स्तर पर केंद्रित हैं।

इन अधिकारियों का कथित तौर पर कहना है कि विभाग प्रमुखों को कामकाज की जिम्मेदारी तो सौंपी जाती है, लेकिन संबंधित निर्णय लेने के लिए आवश्यक अधिकार पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होते। इस दावे के संबंध में यह भी कहा गया है कि आयुक्त से संपर्क करने के प्रयासों के बावजूद आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण से संबंधित इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें संबंधित अधिकारियों के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति समझने के लिए मनपा के लागू अधिकार-विभाजन, वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया, विभागीय आदेशों और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष की जानकारी आवश्यक होगी।

जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी पर मनपा प्रशासन

RTI से जुड़े इस प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में सूचना उपलब्ध कराने की समय-सीमा, जन सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी और नागरिकों की शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर चर्चा को महत्वपूर्ण बना दिया है।

यदि संबंधित आदेशों के अनुसार दंड और मुआवजे की वसूली निर्धारित की गई है, तो उसके क्रियान्वयन की स्थिति भी सार्वजनिक हित में स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने और प्रशासन को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

इस मामले में राज्य सूचना आयोग के मूल आदेश, मनपा के वसूली संबंधी निर्देश, मुआवजे की स्वीकृति और भुगतान की स्थिति सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

निष्कर्ष: उल्हासनगर मनपा में RTI से संबंधित इस मामले में आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कुल 2 लाख रुपये का दंड निर्धारित किए जाने और आवेदक को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने की खबर प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, दंड एवं मुआवजे के आदेशों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक अधिकारों के केंद्रीकरण से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और पक्षों की प्रतिक्रिया के आधार पर की जानी चाहिए।
















 



उल्हासनगर में NCP-SP को मिला जनसमर्थन! महेश तापसे और सीमा महेश आहूजा के नेतृत्व में 200 से अधिक लोगों ने थामा पार्टी का दामन।


 




उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर: शहर की राजनीतिक गतिविधियों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महेश तापसे जी और सीमा महेश आहूजा जी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 200 से अधिक लोगों के पार्टी में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर पार्टी के संगठन विस्तार और जनसंपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्टी में शामिल होने वाले लोगों में बड़ी संख्या में दिव्यांग बंधु और युवा शामिल थे। बताया गया है कि इस जनसमूह में लगभग 70 से 80 दिव्यांगजन तथा 100 से 150 युवा मौजूद थे। इनकी भागीदारी को सामाजिक समावेशन और युवाओं की राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ती रुचि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महेश तापसे और सीमा महेश आहूजा के नेतृत्व में आयोजन

इस कार्यक्रम में महेश तापसे जी और सीमा महेश आहूजा जी की प्रमुख भूमिका रही। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता के चलते यह आयोजन स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है। पार्टी में शामिल हुए नए सदस्यों से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने तथा जनसंपर्क गतिविधियों को गति देने की उम्मीद जताई जा रही है।

सहयोगियों के योगदान की सराहना

कार्यक्रम के सफल आयोजन और सहयोग के लिए टिकम उदासी, मनीष होतवानी, महेश चौहान और यूनुस अंसारी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। आयोजन से जुड़े लोगों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके सहयोग की सराहना की गई।

प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर इमरान खान, वनिता रामरखानी, हमजा शेख, महेश आहूजा और ज्योति शेलके सहित अन्य प्रमुख लोगों की उपस्थिति का उल्लेख किया गया। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया।

स्थानीय राजनीति में क्या होगा असर?

उल्हासनगर जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय शहर में किसी भी पार्टी के साथ बड़ी संख्या में नए लोगों का जुड़ना संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से अहम माना जाता है। NCP-SP में 200 से अधिक लोगों के शामिल होने की यह जानकारी पार्टी की स्थानीय गतिविधियों और जनाधार को लेकर चर्चा को बढ़ा सकती है।

हालांकि, इस घटनाक्रम का आगामी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, इस आयोजन को NCP-SP के स्थानीय संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।













उल्हासनगर के रिहायशी इलाकों में छोटे कारखानों के संचालन पर सवाल; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच उल्हासनगर-5 जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 समेत अन्य क्षेत्रों में भूमि उपयोग और वैध अनुमतियों की जांच की मांग।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

आवासीय क्षेत्रों में स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक अथवा औद्योगिक गतिविधियों के संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मौजूदा नगर नियोजन नियमों की पृष्ठभूमि में अब उल्हासनगर में भी इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में आवासीय परिसरों के भीतर छोटे सिलाई कारखाने, जींस से संबंधित कामकाज तथा अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की चर्चा सामने आती रही है।

विशेष रूप से उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 तथा शहर के अन्य इलाकों में छोटे स्तर पर सिलाई एवं अन्य प्रकार के उत्पादन/व्यावसायिक कार्य संचालित होने की बात कही जाती रही है। हालांकि, किसी विशेष परिसर या प्रतिष्ठान के संबंध में यह निष्कर्ष निकालने से पहले उसके स्वीकृत भूमि उपयोग, मंजूर नक्शे, जोनिंग तथा संबंधित विभागों से प्राप्त अनुमतियों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।

क्या Residential Property में Commercial या Industrial Activity की अनुमति है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन परिसरों का मूल या स्वीकृत उपयोग आवासीय है, वहां संचालित होने वाली व्यावसायिक अथवा उत्पादन संबंधी गतिविधियों के लिए क्या सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है?

क्या संबंधित परिसरों में Change of User की अनुमति ली गई है? क्या वहां संचालित गतिविधि स्थानीय Development Plan और लागू Development Control Regulations के अनुरूप है? क्या संबंधित प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक लाइसेंस अथवा अन्य वैधानिक अनुमतियां उपलब्ध हैं?

इन सवालों का जवाब केवल स्थल निरीक्षण से नहीं, बल्कि महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वीकृत दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

उल्हासनगर में व्यापक सर्वे की जरूरत?

यदि किसी आवासीय क्षेत्र में स्वीकृत उपयोग से अलग गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित महानगरपालिका विभागों द्वारा क्षेत्रवार सर्वेक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की आवश्यकता हो सकती है।

ऐसे सर्वेक्षण में प्रत्येक परिसर के Sanctioned Plan, Occupancy/Completion Certificate, Property Use, Zoning, Trade Licence, Change of User Permission तथा अन्य लागू अनुमतियों की जांच की जा सकती है।

इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी गतिविधियां नियमों के तहत अनुमेय हैं और किन मामलों में अतिरिक्त अनुमति अथवा नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।

सिर्फ सिलाई कारखाने ही नहीं, अन्य गतिविधियों की भी जांच का सवाल

यह मुद्दा केवल सिलाई कारखानों तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि आवासीय परिसरों में अन्य प्रकार की उत्पादन इकाइयां, गोदाम, वर्कशॉप अथवा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो उनके मामले में भी स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर की जांच की जा सकती है।

हालांकि, प्रत्येक गतिविधि की वैधानिकता अलग-अलग नियमों और स्थानीय प्रावधानों पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी भी प्रतिष्ठान को केवल उसके बाहरी स्वरूप या गतिविधि के आधार पर अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा।

महानगरपालिका से स्पष्टता की अपेक्षा

अब मुख्य सवाल उल्हासनगर महानगरपालिका से जुड़ा है—क्या शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित छोटे कारखानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का कोई व्यापक सर्वेक्षण या रिकॉर्ड-आधारित जांच की गई है? यदि की गई है, तो कितने परिसरों को नियमों के अनुरूप पाया गया और कितने मामलों में नोटिस या अन्य वैधानिक कार्रवाई की गई?

नागरिकों की अपेक्षा है कि इस विषय पर कानून और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर पारदर्शी कार्रवाई की जाए, ताकि वैध रूप से संचालित व्यवसायों और नियमों के विपरीत संचालित गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।

महत्वपूर्ण: किसी भी विशेष क्षेत्र, दुकान, कारखाने या व्यक्ति के संबंध में अवैधता का निष्कर्ष संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, निरीक्षण और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक कार्रवाई के बिना नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में उल्हासनगर महानगरपालिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

















गारमेंट व्यापारियों के संगठन UGMA का 70वां वार्षिक उत्सव, तीन दिनों तक होंगे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम।



 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA) की ओर से संगठन के 70वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5 में तीन दिवसीय अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर एसोसिएशन की ओर से दुकानदारों एवं व्यापारी भाइयों से इसमें सहभागी होकर सेवा कार्य में सहयोग करने और प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।

पोस्टर के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे पूज्य चालिहा साहिब मंदिर में होगी। इस अवसर पर अखंड पाठ साहिब का आरंभ साई कालीराम साहिब (वसण शाह दरबार वाले) द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद प्रसाद एवं आम भंडारे का आयोजन रहेगा तथा रात में भी भंडारा जारी रहने की जानकारी दी गई है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजे कन्याओं के भोजन की व्यवस्था रखी गई है। इसके पश्चात प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन जारी रहेगा।

वहीं बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे अखंड पाठ साहिब का भोग साई कालीराम साहिब द्वारा किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया है। इसके बाद उपस्थित दुकानदार भाइयों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

UGMA की ओर से जारी कार्यक्रम सूचना में 5 और 6 अक्टूबर की रात विशेष खीर (खीरनी) का प्रसाद ग्रहण करने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही व्यापारी भाइयों से अपनी यथाशक्ति के अनुसार सेवा कार्य में सहयोग करने की अपील की गई है।

एसोसिएशन की ओर से जारी संदेश में सभी दुकानदार भाइयों से तीनों दिन कार्यक्रम में उपस्थित होकर सेवा कार्य में सहभागी बनने, गुरु साहिब का आशीर्वाद लेने तथा भोजन-प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध किया गया है।

स्थान: पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5

दिनांक: 5, 6 एवं 7 अक्टूबर 2026

आयोजक: उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA)

बताया जाता है कि गोपी वाधवानी, किशन गंगवानी, बाबू ताराचंदानी, नरेश अमरलाल मास्टर तथा उनके कुछ साथियों और दुकानदारों द्वारा मिलकर यह गतिविधि की जाती रही हैं।

नोट: कार्यक्रम से संबंधित उपरोक्त विवरण आयोजक संस्था द्वारा जारी पोस्टर/सूचना के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।


















उल्हासनगर के क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर शिकायतें; कथित सट्टा-जुआ और बिजली चोरी के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में संचालित कुछ क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर शिकायतें और सवाल सामने आने की जानकारी मिल रही है। टर्फ ग्राउंड के संचालन, आवश्यक अनुमतियों और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ वहां कथित रूप से सट्टा-जुआ जैसी गतिविधियां चलने तथा बड़े पैमाने पर बिजली के अनधिकृत उपयोग की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में किसी व्यक्ति, संस्था या टर्फ ग्राउंड संचालक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। शिकायतों की वास्तविकता संबंधित पुलिस प्रशासन, महानगरपालिका और बिजली वितरण कंपनी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सट्टा और जुआ को लेकर क्या है शिकायत?

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों में दावा किया जा रहा है कि कुछ टर्फ ग्राउंड में क्रिकेट खेलने की गतिविधियों के अलावा कथित तौर पर सट्टेबाजी अथवा जुए से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित हो सकती हैं।

यदि ऐसी गतिविधियों की शिकायत पुलिस प्रशासन के पास प्राप्त हुई है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों में कितनी वास्तविकता है। जांच में यदि किसी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग पर भी सवाल

इसी के साथ कुछ टर्फ ग्राउंड में बड़े पैमाने पर बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग अथवा बिजली चोरी की शिकायतें भी सामने आने की चर्चा है।

टर्फ ग्राउंड में फ्लडलाइट, अन्य विद्युत उपकरण और रात के समय होने वाली गतिविधियों के कारण बिजली की खपत स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है। ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि वहां वैध विद्युत कनेक्शन, मीटर और संबंधित अनुमति मौजूद है या नहीं तथा बिजली का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।

यदि बिजली चोरी की शिकायत आधिकारिक रूप से प्राप्त हुई है, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी द्वारा मीटर और कनेक्शन की जांच किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस और प्रशासन कब करेगा जांच?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन शिकायतों पर पुलिस प्रशासन, उल्हासनगर महानगरपालिका और संबंधित बिजली विभाग की ओर से कोई निरीक्षण या जांच की जाती है या नहीं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतों में तथ्य हैं, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार जांच करनी चाहिए और यदि शिकायतें निराधार हैं, तो आधिकारिक स्पष्टीकरण देकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

इसके अलावा टर्फ ग्राउंड के निर्माण, जमीन के उपयोग, व्यावसायिक संचालन, फायर सेफ्टी, आवश्यक परवाने और अन्य लागू नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी प्रशासनिक स्तर पर जांच किए जाने की मांग उठ सकती है।

शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल सट्टा-जुआ और बिजली चोरी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन शिकायतों को फिलहाल शिकायत और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मंत्रालय टाइम्स का स्पष्ट मत है कि यदि किसी टर्फ ग्राउंड के खिलाफ गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और आरोप गलत पाए जाने पर संबंधित पक्ष को क्लीन चिट—दोनों ही स्थितियों में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।

अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेते हैं और क्रिकेट टर्फ ग्राउंड के संचालन से जुड़े इन सवालों पर क्या कार्रवाई अथवा स्पष्टीकरण सामने आता है।

















विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब मामले में अब UMC की बारी! मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से पहुंची शिकायत, जनता की निगाहें आयुक्त के फैसले पर।


 









उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क


उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।


विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।


मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला


प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।


बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।


अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।


विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा


इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।











उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।

मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।

बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।

अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।

विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा

इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि इन पत्रों के माध्यम से विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से संबंधित विषय पर महानगरपालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

अब उल्हासनगर की जनता का सवाल—कार्रवाई कब?

मामले में विभिन्न स्तरों पर शिकायतों और पत्राचार की जानकारी सामने आने के बाद उल्हासनगर की जनता के बीच भी सवाल उठ रहा है कि विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे पर UMC प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और कब की जाएगी?

स्थानीय नागरिकों की नजर अब UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के कार्यालय से होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई, जांच या निर्णय पर बनी हुई है।

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप अथवा दावे रिकॉर्ड और नियमों की जांच में सही पाए जाते हैं, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार क्या कदम उठाए जाएंगे। वहीं, यदि शिकायतों में लगाए गए दावे रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो प्रशासन द्वारा उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जा सकती है।

जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी

फिलहाल शिकायतों में किए गए दावों या आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

मामले की वास्तविक स्थिति UMC प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

उल्हासनगर में अब मुख्य सवाल यही है—राज्य सरकार के स्तर से मामला UMC तक पहुंचने और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किए जाने के बाद, विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब के संबंध में महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी?















उल्हासनगर में श्मशान घाटों पर कथित वसूली का मामला गरमाया, प्रहार सामाजिक संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के कैंप नंबर 1 से 5 में स्थित विभिन्न श्मशान घाटों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोलके ने आरोप लगाया है कि इन श्मशान घाटों में कुछ कथित गैर-कानूनी ट्रस्टों एवं संस्थाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद नागरिकों से आर्थिक वसूली की जा रही है।

शरद पोळके का दावा है कि संबंधित संस्थाओं और उल्हासनगर महानगरपालिका के बीच किसी भी प्रकार का समझौता या इकरारनामा नहीं हुआ है। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित ट्रस्टों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में श्मशान घाटों के संचालन तथा नागरिकों से कथित तौर पर की जा रही आर्थिक वसूली को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

प्रहार सामाजिक संगठन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों या संस्थाओं से कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के जुड़े होने के कारण महानगरपालिका प्रशासन पर कथित रूप से दबाव है। संगठन का आरोप है कि इसी वजह से प्रशासन संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है।

हालांकि, राजनीतिक दबाव या किसी व्यक्ति की संलिप्तता संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। संबंधित ट्रस्टों, संस्थाओं और महानगरपालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन से दस्तावेजों की जांच और कार्रवाई की मांग

शरद पोळके ने महानगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि कैंप नंबर 1 से 5 के सभी श्मशान घाटों के संचालन से संबंधित दस्तावेज, ट्रस्टों की वैधता, महानगरपालिका के साथ हुए किसी भी समझौते तथा नागरिकों से ली जाने वाली फीस या अन्य आर्थिक वसूली की पूरी जांच की जाए।

उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की है कि यदि संबंधित संस्थाओं के पास श्मशान घाटों के संचालन या आर्थिक वसूली का कोई वैध अधिकार नहीं है, तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए और गरीब नागरिकों पर पड़ रहे कथित आर्थिक बोझ को रोका जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोळके ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में महानगरपालिका प्रशासन ने अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो संगठन की ओर से बड़े जन आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन प्रहार जनशक्ति पक्ष के नेता बच्चू कडू के आदेश तथा स्वप्निल पाटिल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किए जाने की बात कही है।

श्मशान घाट जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक हित से जुड़े विषय में लगाए गए इन आरोपों के बाद अब निगाहें महानगरपालिका प्रशासन की ओर हैं। प्रशासन संबंधित ट्रस्टों की वैधता, उपलब्ध दस्तावेजों और कथित आर्थिक वसूली की जांच करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

— शरद पोळके

अध्यक्ष, प्रहार सामाजिक संगठन, उल्हासनगर
















उल्हासनगर-5 के सेक्शन-39 में प्रतिबंधित गुटखा के खिलाफ कार्रवाई, सरकारी काम में बाधा का आरोप; दो के खिलाफ हिललाइन पुलिस में मामला दर्ज।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर-5 के सेक्शन-39 परिसर में प्रतिबंधित खाद्य सामग्री, जिसमें गुटखा शामिल होने की जानकारी सामने आई है, के कथित भंडारण के मामले में हिललाइन पुलिस थाने में दो लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार, यह घटना 29 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे बैरक नंबर 1865/19 के सामने हुई।

पुलिस दस्तावेज में दर्ज शिकायत के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम प्रतिबंधित एवं मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताई गई खाद्य सामग्री के कथित भंडारण के संबंध में कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने की घटना सामने आई।

कार्रवाई के दौरान अधिकारी को धक्का देने का आरोप

शिकायत के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सहायक खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमित ढफड़े के साथ आरोपी सोनु उर्फ पुरुषोत्तम गोपालदास रोहरा द्वारा कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। शिकायत में आरोप है कि धक्का लगने के बाद अधिकारी जमीन पर गिर गए, जिससे उनके दोनों पैरों में चोट आई।

पुलिस दस्तावेज में यह भी आरोप दर्ज है कि घटना के बाद सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई और आरोपी मौके से फरार हो गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती है।

दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

इस मामले में शिकायतकर्ता के रूप में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रणजित हनुमंत माने का नाम दर्ज है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार, आरोपियों के रूप में सोनु उर्फ पुरुषोत्तम गोपालदास रोहरा और पारीबाई गोपालदास रोहरा के नाम दर्ज किए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम और BNS की धाराएं

पुलिस दस्तावेज के अनुसार, मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं 26(2)(i), 26(2)(iv), 27(3)(e), 59, 30(2)(a) और 62 के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामले की जांच सपोनि/खुळे (सहायक पुलिस निरीक्षक खुळे) द्वारा किए जाने की जानकारी दस्तावेज में दी गई है।

प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई पर नजर

उल्हासनगर क्षेत्र में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के कथित भंडारण और बिक्री के मामलों को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे मामलों में प्रतिबंधित सामग्री की जब्ती, उसके स्रोत और वितरण नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच संबंधित विभाग और पुलिस द्वारा की जाती है।

महत्वपूर्ण: यह समाचार पुलिस में दर्ज शिकायत एवं उपलब्ध दस्तावेज में दर्ज आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किया जाना बाकी है। आरोपियों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। मामले में पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर आगे की जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।



















उल्हासनगर-3: होटल डॉल्फीन क्लब के बाहर ₹20 हजार के लेन-देन को लेकर कथित मारपीट व चाकू हमले का आरोप। मध्यवर्ती पुलिस ने BNS की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू की।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर-3 स्थित होटल डॉल्फीन क्लब के गेट के सामने कथित तौर पर दिनदहाड़े मारपीट और चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्यवर्ती पुलिस थाने में FIR No. 0565/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026, को दर्ज की गई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत और उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता जयेश सुंदरदास आहूजा (31), निवासी कल्याण पश्चिम, का करीब ₹20 हजार का कथित आर्थिक लेन-देन फिरोज जवरानी नामक व्यक्ति के साथ था। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित रकम वापस नहीं मिलने तथा फोन पर संपर्क नहीं होने के बाद वह उक्त व्यक्ति से मिलने के लिए गया था।

बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने का आरोप

शिकायतकर्ता के बयान के मुताबिक, 25 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे वह होटल डॉल्फीन क्लब के पास मौजूद था। इसी दौरान रोशन हरेश पुरुस्वानी अपने दो साथियों के साथ कथित तौर पर वहां पहुंचा।

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर गाली-गलौज तथा मारपीट शुरू हो गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान उस पर चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी नाक पर चोट लगी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई तथा उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

BNS की इन धाराओं के तहत मामला दर्ज

उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, मध्यवर्ती पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118(1), 115(2), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जांच अधिकारी: पुलिस निरीक्षक विठ्ठल बाबासाहेब बधे।

राजनीतिक संबंध को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आरोपी रोशन पुरुस्वानी और शिवसेना के मौजूदा नगरसेवक जम्मू पुरुस्वानी के परिवार के बीच कथित पारिवारिक संबंध होने की चर्चा भी सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इस कथित पारिवारिक संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR को केवल कथित पारिवारिक या राजनीतिक संबंधों के आधार पर किसी राजनीतिक दल अथवा निर्वाचित प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से जोड़ना भी उचित नहीं होगा। यदि कोई आपराधिक कृत्य हुआ है, तो उसकी जांच संबंधित पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

पूर्व घटनाओं को लेकर भी दावे, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर आरोपी के खिलाफ पहले भी लोगों को डराने-धमकाने अथवा मारपीट जैसी घटनाओं में कथित रूप से शामिल होने की चर्चाएं होने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पुराने मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें किसी स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान यदि ऐसे किसी पूर्व रिकॉर्ड की पुष्टि होती है, तो संबंधित जानकारी आधिकारिक स्रोतों के आधार पर सामने आ सकती है।

नागरिकों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील

मारपीट, धमकी, जबरन वसूली या किसी अन्य प्रकार की आपराधिक घटना का सामना करने वाले नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। आपात स्थिति में 112 पर पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल यह मामला पुलिस में दर्ज FIR और शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

महत्वपूर्ण कानूनी नोट: FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। आरोपी को दोष सिद्ध होने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है।

स्रोत: मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, ठाणे शहर — FIR Copy No. 0565, दिनांक 25/09/2026; शिकायतकर्ता का बयान।



















उल्हासनगर की निर्माणाधीन इमारतों के OC-CC को लेकर विवाद, स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण में अंतर की जांच की मांग; बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और TPD विभाग की भूमिका पर भी सवाल।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में तेजी से हो रहे नए भवन निर्माण के बीच स्वीकृत प्लान, वास्तविक निर्माण और Occupancy Certificate (OC) तथा Completion Certificate (CC) जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में निर्माणाधीन इमारतों को लेकर कथित तौर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि निर्माण कार्य को स्वीकृत प्लान के अनुरूप पूर्ण दिखाने के बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत OC और CC जारी किए जाते हैं, जबकि बाद के चरण में उन्हीं इमारतों में स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण या बदलाव किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी इमारत को महानगरपालिका के संबंधित विभाग द्वारा OC या CC जारी किया गया है, तो उसके बाद वहां होने वाले कथित अतिरिक्त निर्माण, फेरबदल या प्लान से अलग किए गए कार्यों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।

बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतों और उठाए जा रहे सवालों के केंद्र में निर्माणकर्ताओं (Builders), आर्किटेक्ट्स तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग की भूमिका भी बताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जानकारों के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में स्वीकृत प्लान और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण के बीच समानता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किए जाने का आरोप है, तो संबंधित दस्तावेजों, मंजूर नक्शे, साइट निरीक्षण रिपोर्ट और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

OC और CC जारी होने के बाद कथित उल्लंघन का मुद्दा

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि OC और CC जारी किए जाने के समय संबंधित इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या निर्माण कार्य स्वीकृत प्लान के अनुरूप था?

यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी और वैधानिक स्थिति अलग-अलग तथ्यों एवं दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।

इसी वजह से शहर में कुछ नागरिकों और संबंधित शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग उठाई जा रही है कि हाल के वर्षों में जारी किए गए OC और CC से जुड़े मामलों का दस्तावेजी और स्थल निरीक्षण के आधार पर ऑडिट किया जाए।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है—

- संबंधित इमारत का मूल स्वीकृत प्लान क्या था?

- निर्माण के दौरान कितने संशोधित प्लान मंजूर किए गए?

- मौके पर वास्तविक निर्माण स्वीकृत प्लान के अनुरूप है या नहीं?

- OC और CC जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था या नहीं?

- निरीक्षण के दौरान तैयार की गई रिपोर्ट में क्या उल्लेख किया गया है?

- प्रमाणपत्र जारी होने के बाद इमारत में कोई अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किया गया या नहीं?

- यदि कोई कथित उल्लंघन पाया गया, तो महानगरपालिका द्वारा उस पर क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकते हैं।

प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण को देखते हुए OC और CC जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमानुसार निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी निर्माण परियोजना के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित स्वीकृत प्लान, साइट की मौजूदा स्थिति और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच से विवाद की वास्तविकता सामने आ सकती है।

फिलहाल, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स अथवा महानगरपालिका के किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित बिल्डरों/आर्किटेक्ट्स की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

















एमएम ग्रुप की गणपति परंपरा जारी: 2012 में 321 से बढ़कर 2026 में 351 मूर्तियों की स्थापना, आज होगा विसर्जन।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के अवसर पर एमएम ग्रुप की ओर से इस वर्ष बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रुप के अनुसार, साल 2026 में कुल 351 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई है। इन सभी मूर्तियों का विसर्जन आज किया जा रहा है।

एमएम ग्रुप से जुड़े सदस्यों के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना और उनके विधिवत विसर्जन की परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012 में ग्रुप की ओर से 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। इसके बाद इस संख्या में बढ़ोतरी होने की जानकारी दी गई है।

2012 में 321 से 2026 में 351 मूर्तियां

एमएम ग्रुप के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2012 में 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 351 बताई जा रही है। इस तरह 14 वर्षों के दौरान स्थापित की जाने वाली गणपति मूर्तियों की संख्या में 30 की वृद्धि दर्ज होने की बात कही गई है।

आज गणपति विसर्जन के अवसर पर ग्रुप से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य इस आयोजन में शामिल होकर स्थापित गणपति मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने का दावा

एमएम ग्रुप की ओर से यह भी बताया गया है कि ग्रुप का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह जानकारी ग्रुप के सदस्यों द्वारा साझा की गई है। रिकॉर्ड से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर उसके आधार पर अतिरिक्त जानकारी सामने रखी जा सकती है।

ये हैं एमएम ग्रुप के पदाधिकारी और सदस्य

एमएम ग्रुप से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:

अनिल — ग्रुप अध्यक्ष

सनी — ग्रुप उपाध्यक्ष

बंटी — सदस्य

बबलो — सदस्य

रवि — सदस्य

हिमेश — सदस्य

हिरेन — सदस्य

गणपति विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के गणेशोत्सव का यह आयोजन भी संपन्न हो रहा है। एमएम ग्रुप की ओर से हर वर्ष गणपति स्थापना और विसर्जन से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता की जाती है।