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मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर कनेक्शन गहराया — ड्रग्स का उभरता मुख्य केंद्र बनता उल्हासनगर.!


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में सामने आए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले ने अब बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों को इस पूरे मामले में उल्हासनगर का मजबूत कनेक्शन मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस ड्रग्स नेटवर्क का संचालन केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि उल्हासनगर से बड़े पैमाने पर ड्रग्स की सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि पार्टी, कॉन्सर्ट और हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में ड्रग्स की सप्लाई के लिए उल्हासनगर को एक प्रमुख हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

उल्हासनगर बनता जा रहा ड्रग्स सप्लाई का नया हब

जांच एजेंसियों के मुताबिक, उल्हासनगर में पिछले कुछ महीनों से ड्रग्स से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि:

उल्हासनगर में छोटे-छोटे नेटवर्क बन चुके हैं

युवाओं को ड्रग्स सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है

मुंबई के हाई-प्रोफाइल इवेंट्स तक ड्रग्स पहुंचाई जा रही थी

व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम टेलीग्राम और स्नॅपचॅट प्लेटफॉर्म के जरिए सप्लाई नेटवर्क चलाया जा रहा था

यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की डिलीवरी के लिए अलग-अलग शहरों के बीच कूरियर चैनल बनाए गए थे, जिससे पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई का शक

जांच में यह भी सामने आया है कि गोरेगांव नेस्को सेंटर में आयोजित कॉन्सर्ट और निजी पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी। इस दौरान:

MDMA (एक्स्टेसी)

कोकीन

गांजा

सिंथेटिक ड्रग्स

जैसे नशीले पदार्थों की सप्लाई होने की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ ड्रग्स सप्लायर सीधे उल्हासनगर से मुंबई पहुंचते थे और इवेंट के दौरान ग्राहकों को सप्लाई करते थे।

युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि इस नेटवर्क का मुख्य निशाना युवा वर्ग था। कॉलेज स्टूडेंट्स और पार्टी सर्कल में ड्रग्स तेजी से फैलने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और धीरे-धीरे मुंबई महानगर क्षेत्र में अपना विस्तार कर रहा था।

पुलिस और एजेंसियां अलर्ट मोड पर

मुंबई पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम ने इस मामले में कई संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस अब:

उल्हासनगर में छापेमारी की तैयारी कर रही है

ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े लोगों की सूची तैयार कर रही है

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया डेटा की जांच कर रही है

सप्लाई चैन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है

सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

मामला क्यों है बेहद गंभीर

ड्रग्स नेटवर्क का अंतर-शहर कनेक्शन

युवाओं को निशाना बनाया जा रहा

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई

संगठित नेटवर्क का विस्तार

इन सभी कारणों से यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।

आगे क्या?

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और उल्हासनगर से जुड़े बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।

🚨 यह मामला केवल एक ड्रग्स सप्लाई का नहीं, बल्कि शहरों में तेजी से फैलते संगठित ड्रग्स नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है — जो आने वाले समय में कानून व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।














मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस की जांच तेज, आठवां आरोपी शुभ अग्रवाल गिरफ्तार — उल्हासनगर का मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार, उल्हासनगर से ड्रग नेटवर्क के तार गहराए।

मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठवें आरोपी शुभ अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी को मामले में अहम सफलता माना जा रहा है। वानराई पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद अब ड्रग सप्लाई नेटवर्क के कई नए तार सामने आने लगे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य सप्लायर उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य अभी भी फरार है। जांच एजेंसियों को Snapchat चैट, डिजिटल ट्रेल, मोबाइल लोकेशन और UPI लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर पुलिस ड्रग नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।

गिरफ्तार आरोपी शुभ अग्रवाल को अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी से ड्रग सप्लाई चेन, पार्टी नेटवर्क और अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

उल्हासनगर कनेक्शन गहराया, कई संदिग्ध रडार पर

जांच के दौरान उल्हासनगर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर निवासी साहिल, मोहित, दीपेश और धीरज का नाम भी संदेह के दायरे में आया है।

पुलिस को शक है कि ये सभी कथित तौर पर ड्रग सप्लाई, पार्टी नेटवर्क और युवाओं तक ड्रग्स पहुंचाने में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इन सभी की गतिविधियों और संपर्कों की जांच कर रही है।

उल्हासनगर की कुछ युवतियों की भूमिका की भी जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में उल्हासनगर की कुछ युवतियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ये युवतियां कथित तौर पर पार्टी नेटवर्क और ड्रग वितरण चैनल से जुड़ी हो सकती हैं।

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

गिरफ्तारी के डर से कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी, तकनीकी सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग कर रही हैं।

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है। 

हाई-प्रोफाइल पार्टी नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि यह नेटवर्क केवल नेस्को सेंटर में आयोजित एक म्यूज़िक कॉन्सर्ट तक सीमित था या फिर मुंबई के अन्य हाई-प्रोफाइल पार्टियों और इवेंट्स तक फैला हुआ है।

पुलिस को शक है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर Snapchat, के जरिए ड्रग्स की डीलिंग की जा रही थी, जबकि UPI और डिजिटल पेमेंट के माध्यम से लेनदेन किया जा रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 11 अप्रैल को गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित म्यूज़िक कॉन्सर्ट के दौरान संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से दो मैनेजमेंट छात्रों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह मामला हाई-प्रोफाइल बन गया।

घटना के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कई परतें सामने आने लगीं।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ड्रग सप्लाई चेन, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और पार्टी नेटवर्क को लेकर जांच तेज कर दी गई है।

मुंबई पुलिस का कहना है कि पूरे ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।

🚨 अब तक की स्थिति

8 आरोपी गिरफ्तार

मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार

कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

उल्हासनगर ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

Snapchat और UPI लेनदेन जांच के दायरे में

🚨 मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ केस में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














 

मुंबई नेस्को ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा: उल्हासनगर के आयुष साहित्य आरोपी का नाम आया सामने, मुंबई पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटीं।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट में सामने आए ड्रग्स ओवरडोज़ मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आयुष साहित्य फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस ने कई विशेष टीमें गठित कर दी हैं।

यह मामला पहले ही दो युवाओं की मौत के कारण सुर्खियों में था, और अब नए नाम सामने आने से जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

क्या है पूरा मामला

11 अप्रैल को मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में एक हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स का सेवन किया गया, जिसके बाद दो मैनेजमेंट छात्रों की संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से मौत हो गई। 

इसके अलावा एक अन्य युवक की तबीयत भी बिगड़ गई थी, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और मुंबई पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

जांच में सामने आया नया नाम

पुलिस जांच के दौरान ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी क्रम में अब उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम भी सामने आया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयुष साहित्य की भूमिका ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी होने की आशंका है। जांच एजेंसियों को शक है कि कॉन्सर्ट में ड्रग्स उपलब्ध कराने या सप्लाई चेन में उसकी सक्रिय भूमिका हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी तक उसकी भूमिका को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापेमारी

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उल्हासनगर, मुंबई और आसपास के कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस आयुष साहित्य के मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल्स और संपर्कों की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अब तक कितनी हुई गिरफ्तारी

नेस्को ड्रग्स मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां इस मामले को संगठित ड्रग्स नेटवर्क से जोड़कर भी देख रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आने की संभावना है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस का आधिकारिक बयान

पुलिस अधिकारियों ने मामले को लेकर कहा है कि,

"जांच के दौरान सामने आने वाले हर व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।"

हाई-प्रोफाइल पार्टियों पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर हाई-प्रोफाइल पार्टियों और म्यूज़िक कॉन्सर्ट में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे टिकट, निजी टेबल और वीआईपी पास वाले ऐसे आयोजनों में ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, जो युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

मुंबई पुलिस अब इस मामले में आयोजकों, सप्लाई चेन और शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

⚠️ जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














मुंबई के गोरेगांव ड्रग्स पार्टी मामला: उल्हासनगर का आयुष साठ्ये फरार, मुंबई पुलिस की तलाश तेज — दो MBA छात्रों की मौत के बाद बड़ा खुलासा।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित टेक्नो म्यूज़िक कॉन्सर्ट में हुए ड्रग्स ओवरडोज़ मामले में जांच तेज हो गई है। इस सनसनीखेज मामले में अब उल्हासनगर का नाम भी सामने आया है। मुंबई पुलिस उल्हासनगर निवासी आयुष साठ्ये की तलाश कर रही है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

दो MBA छात्रों की मौत से मचा हड़कंप

कुछ दिन पहले गोरेगांव में आयोजित टेक्नो म्यूज़िक कॉन्सर्ट के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स का अधिक सेवन करने से MBA के दो छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य छात्रों की तबीयत भी बिगड़ गई थी। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी।

कल्याण से आनंद पटेल गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने कल्याण निवासी आनंद पटेल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान आनंद पटेल ने पुलिस को अहम जानकारी देते हुए बताया कि उसने ड्रग्स उल्हासनगर के आयुष साठ्ये से खरीदे थे।

आनंद पटेल के इस खुलासे के बाद पुलिस ने आयुष साठ्ये की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही आयुष साठ्ये फरार हो गया।

सप्लाई चेन का खुलासा

जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। मामले में गिरफ्तार प्रतीक पांडेय ने पुलिस को बताया कि उसने ड्रग्स आनंद पटेल से खरीदा था। इससे ड्रग्स सप्लाई की एक चेन सामने आई है:

आयुष साठ्ये (उल्हासनगर) → आनंद पटेल (कल्याण) → प्रतीक पांडेय → कॉन्सर्ट में छात्र

इस खुलासे के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

बड़े ड्रग्स रैकेट की आशंका

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे बड़े ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का कनेक्शन मुंबई, ठाणे, कल्याण और उल्हासनगर के अन्य इलाकों से भी जुड़ा हुआ है।

पुलिस की टीमें तलाश में जुटीं

मुंबई पुलिस की कई टीमें आयुष साठ्ये की तलाश में जुटी हुई हैं। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और मोबाइल लोकेशन व संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

युवाओं में बढ़ते ड्रग्स चलन पर चिंता

इस घटना ने मुंबई और आसपास के इलाकों में युवाओं के बीच बढ़ते ड्रग्स चलन को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पुलिस अब ऐसे कॉन्सर्ट और पार्टियों पर भी नजर रख रही है, जहां ड्रग्स के इस्तेमाल की आशंका रहती है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।














उल्हासनगर-2 जवेरी बाजार में बड़ा खतरा: अवैध गैस सिलेंडरों से चल रहे सोने के कारखाने, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल।

(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-2 के सिरू चौक स्थित प्रसिद्ध जवेरी बाजार की सोनारा गली में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां बड़ी संख्या में सोने के अवैध कारखाने बिना अनुमति संचालित किए जा रहे हैं, जहां अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा विस्फोट या आगजनी जैसी घटना होने का खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोनारा गली में संचालित कई गोल्ड प्रोसेसिंग और ज्वेलरी निर्माण इकाइयों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का अवैध उपयोग किया जा रहा है। इन कारखानों में न तो फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही आपातकालीन निकास की कोई सुविधा मौजूद है। ऐसे में यह क्षेत्र किसी भी समय बड़े हादसे का केंद्र बन सकता है। 

⚠️ संकरी गली में चल रहे कारखाने, बचाव कार्य होगा मुश्किल

सोनारा गली अत्यंत संकरी होने के कारण यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है, तो दमकल विभाग और राहत टीमों को मौके पर पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। आसपास घनी आबादी, दुकानों और कारखानों की मौजूदगी से खतरा कई गुना बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के कारखानों में उच्च तापमान, गैस और ज्वलनशील रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यदि गैस सिलेंडर में रिसाव या विस्फोट होता है, तो आग तेजी से फैल सकती है और बड़ा नुकसान हो सकता है।

📄 पहले भी जारी हुए थे नोटिस, लेकिन कार्रवाई शून्य

सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा इन अवैध गैस सिलेंडरों और बिना अनुमति चल रहे कारखानों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

नोटिस जारी होने के बाद भी कारखाने पहले की तरह संचालित हो रहे हैं, जिससे महानगरपालिका और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

❓ उठ रहे बड़े सवाल

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं:

• क्या अवैध कारखानों को लेकर किसी प्रकार का लेन-देन हुआ है?

• क्या राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई रोकी गई है?

• नोटिस जारी होने के बावजूद महानगरपालिका कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

• क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

इन सवालों ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

⚡ हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा विस्फोट या आग लगने की घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी उल्हासनगर महानगरपालिका और महानगरपालिका के फायर विभाग पर तय की जानी चाहिए।

नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण हजारों लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

📢 प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है:

• अवैध गैस सिलेंडरों की तुरंत जांच की जाए

• बिना अनुमति चल रहे कारखानों को तुरंत सील किया जाए

• फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए

• जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए

• क्षेत्र में नियमित निरीक्षण शुरू किया जाए

⚠️ प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का विषय

फिलहाल इस गंभीर मुद्दे पर उल्हासनगर महानगरपालिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

उल्हासनगर-2 के जवेरी बाजार की सोनारा गली में बढ़ता यह खतरा अब प्रशासन की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। नागरिकों की मांग है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले प्रशासन जागे और ठोस कार्रवाई करे।














उल्हासनगर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर शिवसेना नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग 19) के मार्गदर्शन में महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महामानव, बोधिसत्व, विश्वरत्न परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उल्हासनगर में एक भव्य महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिवसेना के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

यह महा स्वास्थ्य जांच शिविर रविवार, 13 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन काली माता मंदिर, कुल्ला कैंप, उल्हासनगर-4 में किया गया है, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों के पहुंचने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार, इस शिविर में विभिन्न प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें सामान्य स्वास्थ्य जांच से लेकर गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

शिविर में उपलब्ध निःशुल्क सुविधाएं

- जनरल हेल्थ जांच

- आंखों की जांच

- स्त्री रोग जांच

- एंजियोप्लास्टी संबंधी मार्गदर्शन

- हड्डियों से संबंधित जांच

- निःशुल्क दवाइयां वितरण

- ECG जांच

- मधुमेह (डायबिटीज) जांच

- एंजियोग्राफी संबंधी मार्गदर्शन

- बाल रोग जांच

- कैंसर संबंधी निःशुल्क मार्गदर्शन

- निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सुविधा

इस शिविर का आयोजन नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग क्रमांक 19) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार के साथ स्वास्थ्य जांच करवाएं।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर को सामाजिक सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों के लिए यह शिविर विशेष रूप से लाभकारी साबित होने की उम्मीद है।

आयोजकों ने बताया कि शिविर में अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी और जरूरतमंद मरीजों को आगे के इलाज के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस महा स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ उठाने की अपील की गई है।















उल्हासनगर महानगरपालिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव, उल्हासनगर मनपा को जल्द मिल सकता है नया आयुक्त, वर्तमान आयुक्त के तबादले की चर्चा तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मनपा के वर्तमान आयुक्त का जल्द ही तबादला होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि उनकी जगह नए आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चा चल रही है और इसी क्रम में उल्हासनगर महानगरपालिका का भी नाम प्रमुखता से सामने आया है। बताया जा रहा है कि शहर में चल रहे कई महत्वपूर्ण विकास कार्य, प्रशासनिक निर्णय और कुछ लंबित मामलों को देखते हुए सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति पर विचार कर रही है।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

इस संभावित बदलाव की खबर सामने आते ही मनपा के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारी वर्ग में नए आयुक्त को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं कई विभागों में लंबित फाइलों को लेकर भी तेजी देखी जा रही है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

उल्हासनगर शहर में इस समय कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें —

शहर के बुनियादी ढांचे का विकास

प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान

अवैध निर्माण पर कार्रवाई

स्वच्छता और जल निकासी परियोजनाएं

इन सभी पर नए आयुक्त की नियुक्ति के बाद प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी बढ़ी दिलचस्पी

उल्हासनगर की राजनीति हमेशा से प्रशासनिक बदलावों को लेकर संवेदनशील रही है। ऐसे में आयुक्त के संभावित तबादले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नए आयुक्त के साथ विकास कार्यों को गति देने की उम्मीद जता रहे हैं।

जल्द हो सकता है आधिकारिक आदेश

हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार द्वारा तबादला आदेश जारी किया जा सकता है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को नया आयुक्त कब मिलता है और नए प्रशासनिक नेतृत्व में शहर के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।














उल्हासनगर मनपा में बड़ा राजनीतिक फेरबदल संभव, स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद पर राजेंद्र सिंह भुल्लर का नाम सबसे आगे, शिवसेना आलाकमान जल्द कर सकता है घोषणा।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक और प्रभावशाली नेता राजेंद्र सिंह भुल्लर को स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इस संबंध में शिवसेना आलाकमान जल्द ही औपचारिक घोषणा कर सकता है।

सूत्रों का कहना है कि मनपा में सत्ता समीकरण को मजबूत करने और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से पार्टी नेतृत्व अनुभवी और सक्रिय चेहरे को आगे लाने के पक्ष में है। इसी क्रम में राजेंद्र सिंह भुल्लर का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।

राजेंद्र सिंह भुल्लर को शिवसेना के वरिष्ठ, सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है। मनपा के विभिन्न विकास कार्यों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। नगरसेवक के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र में कई बुनियादी सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसके चलते संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना नेतृत्व ऐसे चेहरे को स्टैंडिंग कमेटी की जिम्मेदारी देना चाहता है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ संगठन को भी मजबूत कर सके। भुल्लर को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है।

स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद को उल्हासनगर महानगरपालिका में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर बैठने वाले नेता को मनपा के आर्थिक और विकास कार्यों पर महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं। बजट स्वीकृति, विकास कार्यों की मंजूरी और विभिन्न प्रशासनिक फैसलों में स्टैंडिंग कमेटी की अहम भूमिका रहती है।

अगर शिवसेना आलाकमान राजेंद्र सिंह भुल्लर के नाम पर मुहर लगाता है, तो यह उल्हासनगर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। साथ ही आने वाले समय में मनपा की कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें शिवसेना आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जिसकी घोषणा कभी भी की जा सकती है।














सेंचुरी रेयॉन टैक्स विवाद: ₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ तक कटौती, कमेटी रिपोर्ट पर बढ़ा सस्पेंस, ₹9.15 करोड़ के कथित लाभ पर उठे सवाल, महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आय का प्रमुख स्रोत हाउस टैक्स है। प्रशासन बकाया कर वसूली के लिए सख्ती भी दिखा रहा है और कई संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। इसी बीच सेंचुरी रेयॉन कंपनी के टैक्स मामले को लेकर शहर में गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की है कि सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही इस पूरे मामले में महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग तेज हो गई है।

₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ — टैक्स में बड़ी कटौती पर विवाद

करीब सवा साल पहले उल्हासनगर बीजेपी जिला अध्यक्ष राजेश वढारिया ने उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया।

आरोपों के अनुसार:

पहले सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर लगभग 11 करोड़ 80 लाख रुपये टैक्स बकाया बताया गया

बाद में पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) के नाम पर नया बिल जारी किया गया

संशोधित बिल में टैक्स घटाकर करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये कर दिया गया

इस तरह कंपनी को लगभग 9 करोड़ 15 लाख रुपये का लाभ मिलने का आरोप लगाया गया

इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।

जांच के लिए बनी कमेटी, लेकिन रिपोर्ट अब तक गोपनीय

शिकायत के बाद तत्कालीन आयुक्त अज़ीज़ शेख द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। बताया गया कि कमेटी ने संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया।

टैक्स विभाग की अधिकारी नीलम कदम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी ने टैक्स असेसमेंट में त्रुटि होने की शिकायत की थी।

उनके अनुसार:

कंपनी ने असेसमेंट गलत होने की बात रखी

प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया गया

हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

6 बड़े सवाल, जिन पर सबकी नजर

इस मामले में शहर के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई अहम सवाल उठाए हैं:

1. री-असेसमेंट में कुल कितने लाख स्क्वेयर फीट का अंतर निकाला गया?

2. री-असेसमेंट के बाद टैक्स राशि में कितना अंतर आया?

3. कंपनी का संशोधित असेसमेंट आधिकारिक रूप से लागू किया गया या नहीं?

4. टैक्स वर्तमान वित्त वर्ष से लागू किया गया या पिछली तारीख से?

5. सेंचुरी रेयॉन कंपनी की सेल्फ री-असेसमेंट रिपोर्ट क्या थी?

6. क्या इस मामले में न्यायालय में कोई याचिका दायर हुई थी? यदि हां, तो अदालत का निर्णय क्या रहा?

इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं, जिससे मामले को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।

नागरिकों की मांग — रिपोर्ट सार्वजनिक कर हो पारदर्शिता

शहर के नागरिकों का कहना है कि जब महानगरपालिका आम नागरिकों से टैक्स वसूली के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है, तो बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग:

कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए

यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध हो तो कार्रवाई की जाए

महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज

इस पूरे मामले को लेकर अब महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

फिलहाल, सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है और इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।























उल्हासनगर मनपा के कर विभाग पर गंभीर आरोप दलालों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत, ‘चेंज ऑफ नेम’ समेत कई कार्यों में भेदभाव के आरोप — आयुक्त के हस्तक्षेप की मांग तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगर पालिका के कर विभाग में अनियमितताओं और पक्षपात के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार, विभाग में कुछ पुराने कर्मचारियों और दलालों की कथित मिलीभगत से ‘चेंज ऑफ नेम’ सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि साधारण नागरिकों को अपने काम के लिए महीनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि चुनिंदा दलालों के माध्यम से आने वाले मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। इस कथित व्यवस्था के कारण पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कर विभाग में प्रक्रिया स्पष्ट होने के बावजूद जानबूझकर फाइलें लंबित रखी जा रही हैं। कई आवेदकों ने आरोप लगाया है कि बिना दलालों की मदद के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अविश्वास बढ़ रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उल्हासनगर महानगर पालिका आयुक्त मनीष अव्हाले से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो भ्रष्टाचार और पक्षपात की यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद अब आयुक्त स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि विभागीय कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और आम जनता के लिए पारदर्शी तथा समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।

इस पूरे प्रकरण में कुछ पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत है जिनके नाम आनेवाले समय में सामने आने की संभावनाएं है, जो कई वर्षों से इसी विभाग में ढेरा जमाकर बैठे हैं। 

⚠️ फिलहाल, उल्हासनगर महानगर पालिका प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।














शिकायत के बाद उल्हासनगर-3 के खत्री भवन में भीषण आग — नशेड़ियों की गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल, पहले ही दी गई थी पुलिस को चेतावनी।


 

उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प‑3 खत्री भवन में देर रात लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। आग इतनी भयंकर थी कि एक जीन्स निर्माण कंपनी पूरी तरह जलकर खाक हो गई। फैक्ट्री में रखा तैयार माल, मशीनरी और अन्य सामान पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घटना के समय फैक्ट्री बंद थी, जिसके चलते किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले ही दी गई थी पुलिस को चेतावनी

गौरतलब है कि गुरु गुलराज साहेब मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले ही ओ.टी. सेक्शन में बढ़ती नशेड़ियों की गतिविधियों को लेकर उप पुलिस आयुक्त (DCP) ज़ोन-4 को लिखित शिकायत सौंपी थी।

दिनांक 24 मार्च 2026 को भेजी गई इस शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि क्षेत्र में नशेड़ियों का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है और वे सुनसान जगहों पर नशा करने के साथ-साथ कचरे में आग लगाने जैसी खतरनाक गतिविधियां भी कर रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इन गतिविधियों से आसपास की फैक्ट्रियों, दुकानों और घरों को आग लगने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों ने जताई गंभीर आशंका

स्थानीय व्यापारियों, नागरिकों और सूत्रों के अनुसार, जिस जीन्स कंपनी में आग लगी, उसके आसपास रोजाना रात के समय कुछ नशेड़ी जमा होकर नशा करते थे। कई बार इन लोगों द्वारा कचरा जलाने और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं भी सामने आई थीं।

निवासियों का कहना है कि शिकायत के बाद यदि नशेड़ियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आग की घटना को उनकी नाराजगी या लापरवाही का परिणाम मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

शिकायत में बताए गए प्रभावित क्षेत्र

गुरु गुलराज साहेब मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में जिन क्षेत्रों को अत्यधिक प्रभावित बताया था, उनमें शामिल हैं:

किरपी सोसायटी

खत्री भवन क्षेत्र

केके इंडस्ट्रियल एस्टेट

फ्लाईओवर के नीचे का इलाका

पिंटो पार्क क्षेत्र

पहलूमल कंपाउंड

मुरलीधर कंपाउंड

संतोष नगर

इन इलाकों में रहने वाले लोगों ने लंबे समय से नशेड़ियों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी।

जांच शुरू, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे

पुलिस और दमकल विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का जल्द खुलासा किया जाएगा।

व्यापारियों में रोष, सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों में रोष का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:

क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए

नशेड़ियों और ड्रग डीलरों पर सख्त कार्रवाई की जाए

औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर उल्हासनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती नशे की समस्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद इतनी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता था।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।














उल्हासनगर TDR घोटाला: महाराष्ट्र राज्य में हड़कंप, मुख्य सचिव की बैठक में कड़े फैसले — खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक।


 



उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर में उजागर हुए बहुचर्चित TDR (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) घोटाले ने महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें व्यापक जांच के आदेश दिए गए और कई अहम निर्णय लिए गए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए TDR से जुड़े सभी खरीद-बिक्री लेनदेन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत ऑडिट जांच कराने, संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं।

सरकार ने इस पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए साफ किया है कि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने शहर में अब तक हुए सभी TDR लेनदेन की गहन जांच शुरू कर दी है, जिससे पूरे घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद है।

📌 सरकार के सख्त फैसले

TDR खरीद-बिक्री पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध

पूरे मामले की व्यापक ऑडिट जांच के आदेश

दोषी अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई

सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच

💻 डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

मुंबई महानगरपालिका की तर्ज पर अब उल्हासनगर में भी TDR से जुड़ी संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाएगी। नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि अगले 10 दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया: दबाव और साजिश के आरोप

प्रहार जनशक्ति पार्टी के ठाणे जिलाध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल पाटील ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस घोटाले को उजागर करने के दौरान उन पर भारी दबाव बनाया गया और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा,
"सरकार द्वारा जांच के आदेश देना सच्चाई की जीत की शुरुआत है। जब तक इस घोटाले के हर दोषी पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"

📊 🔍 जांच में सामने आए प्रारंभिक संकेत

• TDR नंबर 14 —  गौरव राजेश गेमनानी के नाम दर्ज

• TDR नंबर 17 —  राजेश जवाहरलाल गेमनानी के नाम दर्ज

• TDR नंबर 18 —  सुरेश गुरलदास थदानी के नाम दर्ज

⚠️ प्रमुख निष्कर्ष:

• कई जगहों पर अनियमितताओं के ठोस संकेत मिले हैं
• करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका जताई जा रही है
• परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी और निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन सामने आया है

🔍 आगे क्या?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले से जुड़े नए नाम और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर तेज हलचल के बीच यह मामला राज्य की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

👉 निष्कर्ष

उल्हासनगर का TDR घोटाला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस मामले का प्रभाव व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर देखने को मिल सकता है।























अवैध बांग्लादेशी कारीगरों का मुद्दा गरमाया: उल्हासनगर के सराफा बाजारों में काम करने का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल..!


ल्हासनगर:  दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-2 के प्रसिद्ध सिरू चौक स्थित सोनार गली और जवेरी बाजार में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी कारीगरों के काम करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन बाजारों में बड़ी संख्या में बाहरी कारीगर सक्रिय हैं, जिनकी वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, इन कारीगरों की पहचान और दस्तावेजों की जांच को लेकर अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह सुरक्षा और रोजगार दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

इस बीच, उल्हासनगर की कई सामाजिक संस्थाएं और समाजसेवक इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही भाजपा के पूर्व सांसद Kirit Somaiya को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और यदि अवैध रूप से रह रहे कारीगर पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।














शिव कुमार मिश्रा की पहल से सजी बच्चों की होली, बांटी गई सामग्री और मिठास।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जरूरतमंद बच्चों के बीच खुशियां बांटने की सराहनीय पहल की गई। कैम्प क्रमांक 3 स्थित दशहरा मैदान के सामने, इंदिरा गांधी गार्डन के समीप स्थित उल्हास जनपथ कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां बच्चों को होली सामग्री वितरित की गई।

इस सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी शिव कुमार मिश्रा की ओर से किया गया। कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद बच्चों को पिचकारी, रंग, फुगे (गुब्बारे), मिठाइयां और नए कपड़े वितरित किए गए। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।

कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं की भी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और त्योहारों की असली भावना को मजबूत करते हैं।

शिव कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों के साथ त्योहार की खुशियां बांटना ही सच्ची होली है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के सामाजिक कार्यों से समाज के कमजोर वर्गों को संबल मिलता है और त्योहार की खुशियां हर घर तक पहुंचती हैं।

इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि त्योहार तभी सार्थक होते हैं, जब उनकी खुशियां समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।





















बैंक ऑफ बड़ौदा उल्हासनगर सेक्टर-3 शाखा में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच व आयुर्वेदिक उपचार शिविर आयोजित।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर सेक्टर-3 स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा द्वारा सोमवार, 23 फरवरी 2026 को एक व्यापक संपूर्ण स्वास्थ्य जांच एवं आयुर्वेदिक उपचार शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में ग्राहकों, बैंक कर्मचारियों तथा स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया।

इस शिविर का आयोजन Unicare Health Center के सहयोग से किया गया, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने विभिन्न जांच और परामर्श सेवाएं प्रदान कीं।

उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं

शिविर में लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण जांच और परामर्श सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं, जिनमें शामिल हैं:

मधुमेह (शुगर) जांच

रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जांच

नाड़ी परीक्षण (आयुर्वेदिक पद्धति)

विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श

व्यक्तिगत आहार (डाइट) सलाह

योग एवं जीवनशैली मार्गदर्शन

आंखों की जांच

BMI (बॉडी मास इंडेक्स) मापन

रियायती दर पर विशेष पैथोलॉजी जांच

शिविर में इच्छुक लोगों के लिए पूर्ण शरीर जांच और रक्त परीक्षण रियायती दरों पर उपलब्ध कराया गया। जांच पैकेज में निम्न परीक्षण शामिल थे:

CBC एवं ESR

किडनी फंक्शन टेस्ट (RFT)

लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल)

लिवर फंक्शन टेस्ट

आयरन की कमी की जांच

थायरॉयड प्रोफाइल

डायबिटीज स्क्रीनिंग

विटामिन D3 एवं विटामिन B12 परीक्षण

स्वास्थ्य जागरूकता को मिला बढ़ावा

शिविर का मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और नियमित जांच के महत्व को समझाना था। विशेषज्ञों ने बताया कि समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने से कई गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होती है।

शाखा प्रबंधक रवि शामनानी तथा महेश चावला सहित बैंक स्टाफ ने शिविर के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय नागरिकों ने बैंक की इस सामाजिक पहल की सराहना करते हुए इसे जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

इस प्रकार, बैंक ऑफ बड़ौदा की यह पहल न केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित रही, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

यह शिविर महेश चावला के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। महेश चावला का जन्मदिन 26 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।












अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु, मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन ने जारी की सूचना।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3 द्वारा एक अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की गई है। यह मामला आकस्मिक मृत्यु प्रकरण क्रमांक 02/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह सूचना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के अंतर्गत दी है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 4 जनवरी 2026 को आपातकालीन सेवा 112 के माध्यम से मैक्सलाइफ हॉस्पिटल, शांतिनगर, उल्हासनगर-3 से सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे, जहां एक अज्ञात पुरुष व्यक्ति अचेत अवस्था में पाया गया। व्यक्ति के शरीर में किसी प्रकार की हलचल नहीं थी और वह गंदे कपड़े पहने हुए था।

उक्त व्यक्ति को तत्काल एम्बुलेंस की सहायता से उपचार के लिए मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3 ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद शाम 5:05 बजे (17:05) उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक का हुलिया

पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष के बीच बताई जा रही है। उसकी लंबाई करीब 6 फीट, शरीर मजबूत, रंग काला-सांवला और बाल काले हैं। मृतक की आंखें और जीभ बाहर निकली हुई तथा सूजी हुई पाई गईं। दांत सुरक्षित थे।

दाहिने हाथ की कोहनी के पास हरी पट्टी बंधी हुई थी, जबकि दाहिने पैर के घुटने, पिंडली और पंजे के पास पट्टियों के निशान पाए गए। मृतक ने नीले-काले रंग की गंदी टी-शर्ट (सफेद आड़ी धारियों वाली) और लाल बॉर्डर वाली काली ट्रैक पैंट पहन रखी थी। उसके माथे के दाहिने हिस्से पर एक दाग था, जहां की त्वचा उखड़ी हुई पाई गई। शरीर पर किसी प्रकार का टैटू या अन्य पहचान चिन्ह नहीं मिला।

बीमारी से मौत की आशंका

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि व्यक्ति की मृत्यु शारीरिक बीमारी के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, मामले की आगे की जांच जारी है।

नागरिकों से अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को इस अज्ञात मृतक के रिश्तेदारों या पहचान से संबंधित कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3, जिला ठाणे से संपर्क करें।
संपर्क नंबर: 0251-2706900
एपीआई दिपाली अंकुश वाघ
मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन,
9011977567

पुलिस का कहना है कि मृतक की पहचान होने से उसके परिजनों को सूचित किया जा सकेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।



















उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘तीर-कमान और टीवी’ वाली अपील से पैनल नंबर 9 में सियासी उलझन, मतदाताओं के सामने बड़ा सवाल..??


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 में अब सियासी तस्वीर और भी जटिल होती जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया बयान ने पैनल नंबर 9 को चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज पैनल बना दिया है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से गठबंधन को मजबूत करने के लिए ‘तीर-कमान’ (शिवसेना) और ‘टीवी’ (साई पार्टी) चुनाव चिन्हों को वोट देने की खुली अपील की।

उपमुख्यमंत्री की इस अपील के बाद पैनल नंबर 9 के मतदाताओं के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है।

उपमुख्यमंत्री की अपील बनाम जमीनी सियासत

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मंच से एकता और गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया, लेकिन पैनल नंबर 9 की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

इसी पैनल में श्रीमती कविता मनोज लस्सी (शिवसेना / TOK समर्थित)

और श्रीमती आशा जीवन इदनानी (साई पार्टी – ‘टीवी’ चुनाव चिन्ह)

दोनों ही एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।

मतदाताओं के सामने धर्मसंकट

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

जब उपमुख्यमंत्री दोनों चुनाव चिन्हों को जिताने की अपील कर रहे हैं, तो पैनल 9 का मतदाता किसे वोट दे?

एक ओर शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार

दूसरी ओर गठबंधन की ही साई पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी

यही टकराव मतदाताओं को दो हिस्सों में बांटता नजर आ रहा है।

वोटों के बिखराव का खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री शिंदे का बयान भले ही गठबंधन को एकजुट करने के उद्देश्य से दिया गया हो, लेकिन पैनल नंबर 9 में यह बयान “दुधारी तलवार” बन गया है।

यदि वोट ‘टीवी’ चिन्ह को जाते हैं, तो साई पार्टी को सीधा फायदा होगा।

यदि वोट शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार को मिलते हैं, तो गठबंधन का दूसरा घटक कमजोर पड़ सकता है।

इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ भाजपा की प्रत्याशी दीपा नारायण पंजाबी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गठबंधन के वोटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है।

गली-मोहल्लों में चर्चा तेज

पैनल नंबर 9 की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—

“जब बड़े नेता एकता की बात कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार क्यों नहीं?”

उपमुख्यमंत्री की अपील से कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस पैनल में असमंजस और सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है।

निष्कर्ष

पैनल नंबर 9 अब केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संदेश, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि मतदाता ‘तीर-कमान’ पर भरोसा जताते हैं, ‘टीवी’ को चुनते हैं, या फिर इस आपसी फूट का फायदा भाजपा उठाने में सफल होती है

📌 उल्हासनगर चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।













नववर्ष पर सेवा और संवेदना का संदेश: उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा की पहल से सैकड़ों जरूरतमंदों को ठंड से राहत।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

नववर्ष के पावन अवसर पर सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के माध्यम से सैकड़ों गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव हेतु कंबल वितरित कर राहत पहुंचाई गई।

कैंप क्रमांक 3, दशहरा मैदान, इंदिरा गांधी गार्डन के सामने स्थित उल्हास जनपथ कार्यालय में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों ने लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त, समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने की भावना के तहत रात्रि के समय फुटपाथों, रेलवे स्टेशन परिसरों तथा मंदिरों के बाहर खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे गरीब एवं बेसहारा लोगों तक स्वयं पहुंचकर कंबल वितरित किए गए, जिससे वे कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रह सकें।

इस मानवीय पहल को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं लाभार्थियों ने शिवकुमार मिश्रा के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की है। नववर्ष की शुरुआत सेवा, करुणा और सामाजिक समर्पण के इस संदेश के साथ समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।













उल्हासनगर में ट्रांसफर विवाद ने पकड़ा तूल — TPD विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार पर गंभीर आरोप, उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त से जनता का सवाल: कार्रवाई कब.?


(फाइल फोटो)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग (TPD) विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की ट्रांसफर को लेकर शहर में तीव्र विरोध और सवालों की हवा तेज हो गई है।

शहर के जागरूक नागरिकों, आविभिन्न सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्टों ने उल्हासनगर महानगर पालिक आयुक्त मनीषा अव्हाले तथा प्रशासन से यह पूछा है कि सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद अभी तक संजय पवार की बदली क्यों नहीं की गई?

महाराष्ट्र सरकारी सेवा नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण हर 3 वर्षों में अनिवार्य है, लेकिन संजय पवार पिछले 10 से अधिक वर्षों से लगातार TPD विभाग में पदस्थापित हैं।

नियमों की यह अवहेलना नागरिकों के बीच गंभीर संदेह और असंतोष का कारण बन रही है।

🚨 गंभीर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के आरोप

सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने, बिल्डर और भूमाफिया से मिलीभगत, तथा TDR से जुड़े अनियमित कार्यों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं।

इसके अलावा, बताया जाता है कि साल 2014 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें कथित रूप से 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

इसके बावजूद आज तक न तो विभागीय स्तर पर कोई कठोर कार्रवाई हुई और न ही उनका ट्रांसफर किया गया, जिससे नागरिकों में रोष और बढ़ गया है।

📑 राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों में शिकायतें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय पवार के विरुद्ध

CBI, ACB, ED और आयकर विभाग

जैसी जांच एजेंसियों में भी शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि:

“प्रशासन की खामोशी और लंबे समय तक पदस्थ बने रहना, दोनों ही स्थितियाँ अत्यंत संदिग्ध हैं।”

✊ जनता और सामाजिक संगठनों की स्पष्ट मांग

नागरिकों ने कड़े शब्दों में कहा:

“जब नियम सभी पर समान लागू होते हैं, तो फिर 10 साल से अधिक समय से एक ही पद पर जमे अधिकारी को हटाने में देरी क्यों?”

लोगों की प्रमुख माँग:

संजय युवराज पवार का तत्काल ट्रांसफर किया जाए

सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए

❓ अब प्रशासन के सामने बड़े सवाल

👉 क्या उल्हासनगर प्रशासन जनता की आवाज सुनेगा?

👉 क्या संजय युवराज पवार की बहुप्रतीक्षित बदली अब होगी या मामला फिर दबा दिया जाएगा?

👉 क्या नागरिकों को न्यायपूर्ण और पारदर्शी निर्णय मिलेगा?

📍 इस पूरे मामले पर शहर की निगाहें अब UMC प्रशासन और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।












उल्हासनगर महानगर पालिका के टाउन प्लानिंग विभाग में बड़ा सवाल उठ खड़ा — आखिर जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की बदली क्यों नहीं..??


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग विभाग में पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार इन दिनों फिर से गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र सरकार के सेवा नियमों और शासन-निर्देश (GR) के अनुसार, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी एक ही विभाग में तीन वर्ष से अधिक पदस्थ नहीं रह सकता। निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसकी बदली अनिवार्य होती है।

इसके बावजूद, संजय युवराज पवार पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जिससे यह बड़ा प्रश्न उठ रहा है कि आखिर कौन-सी शक्तियाँ हैं जो उनकी बदली रोक रही हैं?

जागरूक नागरिकों की शिकायतें कई एजेंसियों में दाखिल

सूत्रों के अनुसार, कुछ सजग नागरिकों ने इस विषय को लेकर:

ED (Enforcement Directorate)

CBI (Central Bureau of Investigation)

Anti-Corruption Bureau

Income Tax Department

जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण संरक्षण के आरोप शामिल हैं।

भू-माफिया और बिल्डर लॉबी से सांठगांठ के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संजय युवराज पवार उल्हासनगर के भू-माफियाओं और बड़े बिल्डरों के साथ मिलकर काम करते हैं, और शहर में बड़े पैमाने पर अवैध व अनियमित निर्माण को संरक्षण प्रदान करते हैं।

2014 में रिश्वत लेते पकड़े गए थे

यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2014 में पवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने टाउन प्लानिंग विभाग में ही रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस समय भी मामला गंभीर था, परंतु उसके बाद भी उन्हें निलंबित करने या विभाग से हटाने के बजाए उन्हें पुनः उसी पद पर कार्यरत रहने दिया गया, जो स्वयं में कई सवाल खड़े करता है।

TDR घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप

संजय युवराज पवार का नाम हाल ही में उजागर हुए TDR घोटाले सहित अन्य निर्माण-संबंधी घोटालों में भी जोड़ा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि:

संजय पवार कथित तौर पर कहते हैं:

“मेरा ट्रांसफर करवाना किसी की ताकत में नहीं है। मेरे ऊपर तक मजबूत पकड़ और सेटिंग है। मंत्रालय के अर्बन डेवलपमेंट विभाग के बड़े अधिकारी मेरे समर्थन में हैं। मुझे कोई न हटाएगा और न ही मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है।”

अब तक एक्शन क्यों नहीं?

इन गंभीर आरोपों और दर्ज शिकायतों के बावजूद, संजय युवराज पवार आज भी टाउन प्लानिंग विभाग में सक्रिय रूप से ड्यूटी पर हैं। यह स्थिति:

राजनीतिक संरक्षण,

प्रशासनिक पंगुता

या संगठित भ्रष्टाचार

जैसे गंभीर प्रश्नों को जन्म दे रही है।

जनता की मांग

उल्हासनगर के जागरूक नागरिकों ने राज्य सरकार, मनपा आयुक्त और जांच एजेंसियों से मांग की है कि:

आरोपों की उच्च-स्तरीय जांच की जाए,

पवार को तत्काल विभाग से हटाया जाए,

सभी TDR और निर्माण अनुमोदनों की समीक्षा की जाए।

क्या सरकार और एजेंसियां कार्रवाई करेंगी?

अब सभी की नज़र इस बात पर है कि:

क्या महाराष्ट्र सरकार नियमों का पालन करवाएगी?

क्या संजय पवार की संरक्षक राजनीतिक शक्तियों का पर्दाफाश होगा?

और क्या उल्हासनगर के विकास को निगल रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी?

यह मामला उल्हासनगर की राजनीति और प्रशासन की साख के लिए अग्निपरीक्षा बन चुका है।