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उल्हासनगर में 58 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पुलिस ने परिजनों की तलाश शुरू की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 के मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन क्षेत्र में 58 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस द्वारा इसे अकस्मात मृत्यु के रूप में दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। मृत महिला की पहचान पुष्पा रमेश पवार (58) के रूप में हुई है। पुलिस ने महिला के परिजनों या परिचितों की जानकारी रखने वाले लोगों से पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की अपील की है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पुष्पा रमेश पवार बैरक नंबर 1132, इमली पाड़ा, फॉरेस्ट लाइन, उल्हासनगर-3, जिला ठाणे की निवासी थीं। बताया गया है कि उनकी तबीयत 26 मार्च 2026 से खराब चल रही थी और वह ठीक से खाना-पीना नहीं कर रही थीं।

पुलिस के मुताबिक, 27 जुलाई 2026 की शाम करीब 7:45 बजे एक महिला उनसे मिलने पहुंची। उस दौरान पुष्पा पवार के शरीर में कोई हलचल दिखाई नहीं दी। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3 ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद करीब रात 8:45 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

महिला का हुलिया

पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मृतका की उम्र 58 वर्ष, कद करीब 5 फीट 3 इंच और रंग सांवला था। उनकी कद-काठी मजबूत थी। बाल काले-सफेद तथा दांत साबुत थे। शरीर पर किसी विशेष पहचान चिन्ह या गोदने की जानकारी नहीं मिली है। दोनों पैरों में घुटनों के नीचे पुरानी चोटों के निशान बताए गए हैं। मृत्यु के समय उन्होंने फूलों के डिजाइन वाली काले, भगवा और नीले रंग की कुर्ती पहन रखी थी।

पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया महिला की मौत किसी शारीरिक बीमारी के कारण होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मामले में आवश्यक पुलिस प्रक्रिया और जांच जारी है।

परिजनों से संपर्क की अपील

मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को पुष्पा रमेश पवार के परिजनों, रिश्तेदारों या परिचितों के बारे में कोई जानकारी हो, तो वह तत्काल पुलिस से संपर्क करे, ताकि मृतका के परिवार तक सूचना पहुंचाई जा सके।

📞 मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3:

0251-2706900 / 8108112242


















समीर वानखेड़े के खिलाफ NCB की विभागीय जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, अदालत ने एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एनसीबी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गुमनाम शिकायतों और उन आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियों के अधिकारियों को हर मामले में आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों या अनाम शिकायतों के आधार पर जांच का सामना करना पड़ेगा, तो वे भविष्य में अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और निर्भीक होकर पालन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के मनोबल और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एनसीबी उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में संभाले गए चर्चित मामलों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और विभागीय जांच का उद्देश्य उन्हें परेशान करना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है। केवल आरोपियों के आरोप या गुमनाम शिकायतें किसी निष्पक्ष जांच का पर्याप्त आधार नहीं बन सकतीं।

अदालत ने फिलहाल समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी विभागीय पूछताछ और जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मादक पदार्थ मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

















उल्हासनगर के कार गैलेरिया से जुड़े दो कारोबारी भाइयों पर ₹61 लाख की कथित ठगी का मामला, बदलापुर में केस दर्ज।

उल्हासनगर/बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

फ्रेंडली लोन के नाम पर ₹61 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बदलापुर पश्चिम पुलिस ने उल्हासनगर स्थित कार गैलेरिया के दो कारोबारी भाइयों के खिलाफ एक बदलापुर निवासी से आर्थिक तंगी का हवाला देकर बड़ी रकम उधार लेने और बाद में वापस नहीं करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रुपेश इरमाली (35), निवासी राधे पैराडाइज, बदलापुर पश्चिम, ने अपनी शिकायत में बताया है कि उल्हासनगर-4 के सेक्शन 30-ए निवासी नितिन अमरलाल बजाज और बंटी अमरलाल बजाज, जो कार गैलेरिया नाम से व्यवसाय संचालित करते हैं, ने अपने कारोबार में गंभीर आर्थिक संकट होने की बात कहकर उनसे फ्रेंडली लोन के रूप में पैसे मांगे थे।

शिकायत के अनुसार, 1 अप्रैल 2019 से 31 अक्टूबर 2020 के बीच आरोपियों ने अलग-अलग समय पर कुल ₹61 लाख उधार लिए। उन्होंने शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया था कि आर्थिक स्थिति सुधरते ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी विश्वास के आधार पर शिकायतकर्ता ने उन्हें यह राशि दी।

हालांकि, आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी आरोपियों ने उधार ली गई रकम वापस नहीं की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार पैसे लौटाने की मांग की, लेकिन हर बार टालमटोल की गई। आरोप है कि आरोपियों ने उधार ली गई राशि का उपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया और जानबूझकर रकम लौटाने से परहेज किया, जिससे शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायत की जांच के बाद बदलापुर पश्चिम पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की मंशा से रकम हासिल की थी या नहीं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक पल्लेवाड कर रहे हैं। जांच के दौरान लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
























महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस व्यवस्था पर रोक। अब न नए लाइसेंस जारी होंगे और न ही पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाएगा। गृह विभाग ने सभी पुलिस आयुक्तों, एसपी और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।


 
मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और बार में ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर चल रही कथित अश्लील गतिविधियों और कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत ऑर्केस्ट्रा (लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस) के लिए कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, वर्तमान में जारी लाइसेंसों की अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं होगा।

गृह विभाग द्वारा सोमवार को जारी परिपत्र के माध्यम से राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को इस निर्णय का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस के माध्यम से संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार के अनुसार वर्ष 2016 में लागू 'महाराष्ट्र होटल, उपाहारगृह एवं मद्यपान कक्ष (डांस बार) में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध तथा महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम' के बाद डांस बारों पर कई कानूनी प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, समय के साथ कई प्रतिष्ठानों ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की 'सार्वजनिक मनोरंजन नियमावली' के अंतर्गत ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस प्राप्त करना शुरू कर दिया। सरकार के संज्ञान में यह बात आई कि इन लाइसेंसों की आड़ में कई स्थानों पर कथित रूप से अश्लील नृत्य और अन्य अवैध गतिविधियां फिर से संचालित की जा रही थीं।

इन्हीं शिकायतों और लगातार मिल रही सूचनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने ऑर्केस्ट्रा प्रतिष्ठानों को भी 2016 के अश्लील नृत्य प्रतिबंध कानून के दायरे में लाने का निर्णय लिया। इस संबंध में 2 जुलाई 2026 को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा के हालिया मानसून सत्र में संशोधित विधेयक पारित किया गया और राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के उपरांत 22 जुलाई 2026 को इसे राज्य सरकार के राजपत्र में प्रकाशित कर अधिनियम लागू कर दिया गया।

गृह विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

गृह विभाग की सहसचिव मुग्धा धुरी द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत ऑर्केस्ट्रा के लिए कोई नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाएगा। साथ ही, जिन प्रतिष्ठानों के पास वर्तमान में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस हैं, उनकी अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन को इस निर्णय का सख्ती से पालन कराने तथा किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

दुरुपयोग रोकने की दिशा में अहम कदम

सरकार का मानना है कि इस फैसले से ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस की आड़ में डांस बार कानून को दरकिनार कर संचालित की जा रही कथित अश्लील गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, महिलाओं की गरिमा की रक्षा, कानून का कड़ाई से पालन और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण और सख्त पहल माना जा रहा है।


















उल्हासनगर में अवैध गुटखे का काला कारोबार जारी, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के रडार पर संदिग्ध नेटवर्क।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रतिबंध के बावजूद उल्हासनगर शहर में अवैध गुटखे का कारोबार कथित रूप से आज भी धड़ल्ले से जारी है। शहर के विभिन्न इलाकों में चोरी-छिपे गुटखा और सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंधित उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और इससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उल्हासनगर के कुछ संदिग्ध कारोबारी भी विभाग की निगरानी में बताए जा रहे हैं। विभाग द्वारा ऐसे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है, जो प्रतिबंधित गुटखे के भंडारण, परिवहन और वितरण में कथित रूप से शामिल हो सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि अवैध गुटखे का कारोबार संगठित तरीके से संचालित किया जाता है, जिसमें सप्लाई चेन, गोदाम और वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध गुटखे के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शहर के प्रमुख बाजारों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर नियमित छापेमारी कर इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जाए।

हालांकि, इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से उल्हासनगर के किसी विशेष कारोबारी के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई या नाम की पुष्टि नहीं की गई है। यदि विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, तो इससे अवैध गुटखा कारोबार पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।यदि यह खबर प्रकाशन के लिए है, तो इसे उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों या पुष्टि किए गए तथ्यों के अनुसार और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।

Direct Email Contacts:

Food Complaints: jc-foodhq@gov.inDrug

Complaints: jchq.fda-mah@nic.in or Hqfdadesk13@gmail

comVigilance: pavigilancefda@gmail.com

Mumbai FDA Office Contact Numbers: 022-26590548 or 022-2612265

Maharashtra State FDA, call the toll-free helpdesk number at 1800 222 365.

















महादेव बेटिंग ऐप पर बड़ा शिकंजा: मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार, जांच के दायरे में देशभर के नेटवर्क; उल्हासनगर कनेक्शन पर भी एजेंसियों की नजर।


मुंबई/नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप प्रकरण में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। महादेव ऐप के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान से गिरफ्तार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही उसे भारत लाकर पूछताछ की जाएगी। इस गिरफ्तारी को ऑनलाइन सट्टेबाजी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप के माध्यम से देशभर में हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कारोबार का संचालन किए जाने के आरोप हैं। इस मामले में पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच एजेंसियां तथा अन्य संबंधित संस्थाएं मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। एजेंसियां उन व्यक्तियों, ऑपरेटरों और कथित बुकी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनके माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किए जाने की आशंका है। डिजिटल भुगतान, बैंक खातों, हवाला चैनलों, विदेशी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है।

उल्हासनगर के कथित सट्टा नेटवर्क पर भी उठे सवाल

जांच के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि महाराष्ट्र के उल्हासनगर से जुड़े कुछ कथित सट्टा संचालकों और बुकी नेटवर्क की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, इन नेटवर्कों के गोवा, दुबई और अन्य विदेशी ठिकानों से कथित संपर्कों की भी जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि वित्तीय लेन-देन और डिजिटल ट्रेल में कोई कड़ी मिलती है, तो जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती हैं।

हालांकि, अब तक किसी भी व्यक्ति, बुकी या संगठन का नाम ईडी, सीबीआई, पुलिस अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि इस समय नहीं की जा सकती।

पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। इससे देशभर में फैले ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क, फर्जी कंपनियों, बैंकिंग चैनलों तथा कथित सहयोगियों की भूमिका पर भी नया खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से जितनी जानकारी साझा की जाएगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई और खुलासे सामने आएंगे।














महाराष्ट्र में 288 विधायक, लेकिन सड़कों पर 'MLA' स्टिकर लगी हजारों-लाखों गाड़ियां! नियमों के पालन और वीआईपी संस्कृति पर उठे गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र विधानसभा में निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या केवल 288 है, लेकिन राज्यभर की सड़कों पर 'MLA' (विधायक) स्टिकर लगी गाड़ियों की बड़ी संख्या लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दिखाई देते हैं, जिन पर 'MLA', 'Government of Maharashtra', 'On Duty' या अन्य वीआईपी पहचान वाले स्टिकर लगे होते हैं।

इसी को लेकर अब आम नागरिकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब पूरे राज्य में केवल 288 विधायक हैं, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियां किसकी हैं? क्या इन सभी वाहनों का उपयोग वास्तव में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है, या फिर प्रभाव जमाने और विशेष पहचान दिखाने के लिए इन स्टिकरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है?

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में रहा है। जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक पदों और संवैधानिक पहचान का अनधिकृत उपयोग कानून के शासन के लिए चुनौती बन सकता है। इससे न केवल आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि कई बार ऐसे स्टिकरों का इस्तेमाल ट्रैफिक नियमों से बचने, सरकारी प्रतिष्ठानों में अनावश्यक प्रभाव दिखाने या वीआईपी होने का आभास देने के लिए भी किया जाता है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बिना वैधानिक अधिकार के सरकारी पद अथवा जनप्रतिनिधि का संकेत देने वाले स्टिकर या प्रतीक का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। इसी कारण पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर अनधिकृत वीआईपी स्टिकर, हूटर, फ्लैशर लाइट और अन्य अवैध पहचान चिह्नों के खिलाफ कार्रवाई करते रहे हैं।

हालांकि, इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे वाहनों की संख्या कम होती दिखाई नहीं देती। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि इस विषय पर व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वीआईपी संस्कृति पर अंकुश लगाया जा सके और सभी नागरिकों के लिए समान कानून की भावना मजबूत हो।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा जमकर वायरल हो रहा है। एक व्यंग्यात्मक पोस्ट में लिखा गया—

"महाराष्ट्र में विधायक 288, लेकिन 'MLA' स्टिकर वाली गाड़ियां लाखों! लगता है राज्य में विधायक कम और विधायकों की गाड़ियां ज्यादा हैं… हर घर विधायक योजना!"

यह पोस्ट लोगों के बीच तेजी से साझा की जा रही है और वीआईपी संस्कृति पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रचलित 2,80,000 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियों का दावा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। यह संख्या व्यंग्य और जनचर्चा के संदर्भ में साझा की जाती है। बावजूद इसके, अनधिकृत वीआईपी स्टिकरों का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है और नागरिकों की मांग है कि इस पर प्रभावी एवं समान रूप से कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए।














विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा, डांस बार संचालन के नियम होंगे और कड़े।

(फाइल फोटो) 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में डांस बारों के संचालन पर और अधिक सख्ती करने का फैसला किया है। डांस बार संचालकों द्वारा कानून की खामियों का फायदा उठाकर नियमों से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में व्यापक संशोधन करने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार डांस बारों के संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की कानूनी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ डांस बार संचालक डांस बार संबंधी कानून के तहत लाइसेंस लेने के बजाय अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर संचालन की अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। इससे वे डांस बारों पर लागू सख्त नियमों और प्रतिबंधों से बच निकलते हैं। इस खामी को दूर करने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में संशोधन करेगी, ताकि ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को केवल संशोधित कानून के तहत ही लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य हो और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

यह घोषणा कांग्रेस विधायक नाना पटोले द्वारा विधानसभा में ठाणे जिले में संचालित डांस बारों का मुद्दा उठाए जाने के बाद की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले से ही डांस बारों के नियमन के लिए कई कठोर नियम लागू कर चुकी है, लेकिन कुछ संचालक कानूनी प्रावधानों की कमजोरियों का लाभ उठाकर इन नियमों से बचने का प्रयास करते हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसी सभी खामियों को पूरी तरह समाप्त करना है।

फडणवीस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार तेज आवाज में डीजे बजाने और ध्वनि प्रदूषण के मामलों को लेकर भी गंभीर है। उन्होंने बताया कि मौजूदा शोर प्रदूषण नियमों के तहत अनुमति दी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले डांस बारों और अन्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने के लिए भी कानून में आवश्यक संशोधन करने पर विधि एवं न्याय विभाग के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं और कानून-व्यवस्था दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील है। हालांकि, किसी भी कानून में संशोधन करते समय संवैधानिक अधिकारों और न्यायालयों द्वारा निर्धारित कानूनी सीमाओं का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में कानून का दुरुपयोग न हो और वह न्यायिक कसौटी पर भी खरा उतर सके।

उन्होंने यह भी बताया कि डांस बारों के संचालन में अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन में यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य डांस बारों के संचालन में पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।













मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स केस में बड़ा मोड़: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से जल्द मिल सकते हैं IRS अधिकारी समीर वानखेड़े, आरोपियों पर मकोका लगाने की करेंगे मांग।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई के बहुचर्चित गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में जल्द ही बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, IRS अधिकारी समीर वानखेड़े महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर मामले की गंभीरता से अवगत कराने के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई करने का आग्रह कर सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि वानखेड़े का मानना है कि यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि ड्रग्स तस्करी किसी संगठित गिरोह या आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही थी, तो केवल सामान्य कानूनी धाराएं पर्याप्त नहीं होंगी। ऐसे में मकोका के तहत कार्रवाई से पूरे नेटवर्क की आर्थिक और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा तथा मामले में शामिल सभी लोगों तक जांच का दायरा बढ़ाया जा सकेगा।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित मुलाकात के दौरान नेस्को ड्रग्स केस की जांच की वर्तमान स्थिति, ड्रग्स सिंडिकेट की कार्यप्रणाली, अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की संभावना तथा आगे की कानूनी रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

हालांकि, इस संभावित मुलाकात को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और समीर वानखेड़े की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन यदि यह बैठक होती है और मकोका लगाने पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो इसे महाराष्ट्र में संगठित ड्रग्स अपराध के खिलाफ सरकार के कड़े रुख के रूप में देखा जाएगा।

यह मामला पहले से ही काफी चर्चा में है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और जांच एजेंसियां इस दिशा में क्या निर्णय लेती हैं।













लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या उल्हासनगर के कोचिंग क्लासेस में भी मंडरा रहा है मौत का खतरा?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में कई छात्रों की जान चली गई, जबकि दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। आग लगने के बाद भवन में फंसे छात्रों की चीख-पुकार, खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से जान बचाने के लिए छलांग लगाने के दृश्य ने देशभर के अभिभावकों को भयभीत कर दिया।

लखनऊ की इस त्रासदी के बाद अब सवाल उल्हासनगर की ओर भी उठने लगे हैं। शिक्षा का बड़ा केंद्र बन चुके उल्हासनगर में सैकड़ों कोचिंग क्लासेस, ट्यूशन सेंटर, लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। लेकिन क्या इन संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या कोई बड़ा हादसा होने से पहले प्रशासन जागेगा?

संकरी गलियां, भीड़भाड़ वाली इमारतें और सुरक्षा पर सवाल

उल्हासनगर के कई कोचिंग क्लासेस ऐसी बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही सीढ़ी उपलब्ध है। कई जगहों पर पार्किंग क्षेत्र, कॉरिडोर और सीढ़ियां भी अतिक्रमण या सामान से भरी हुई दिखाई देती हैं। यदि ऐसी स्थिति में आग लग जाए या कोई अन्य आपातकालीन घटना हो जाए, तो सैकड़ों छात्रों की सुरक्षित निकासी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आग से अधिक जानें धुएं, घबराहट और भगदड़ के कारण जाती हैं। यदि भवन में पर्याप्त वेंटिलेशन, फायर एग्जिट और आपातकालीन व्यवस्था न हो तो कुछ ही मिनटों में स्थिति भयावह रूप ले सकती है।

फायर NOC है या सिर्फ कागजों में सुरक्षा?

शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल सभी कोचिंग क्लासेस और शिक्षण संस्थानों का विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट कराए। यह जांच की जाए कि:

क्या सभी संस्थानों के पास वैध फायर NOC है?

क्या भवनों में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं?

क्या फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर कार्यरत हैं?

क्या आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था है?

क्या छात्रों और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है?

क्या अग्निशमन विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाता है?

हजारों अभिभावकों की बढ़ी चिंता

लखनऊ हादसे के बाद उल्हासनगर के अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए कोचिंग क्लासेस भेजते हैं, लेकिन यदि सुरक्षा व्यवस्था ही कमजोर हो तो यह किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है।

अभिभावकों का मानना है कि जिस तरह स्कूलों के लिए सुरक्षा मानक अनिवार्य हैं, उसी प्रकार कोचिंग संस्थानों के लिए भी कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए और उनके पालन की नियमित निगरानी होनी चाहिए।

प्रशासन के लिए चेतावनी या इंतजार किसी हादसे का?

उल्हासनगर में अब तक किसी बड़े कोचिंग अग्निकांड की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के मामले में लापरवाही अक्सर हादसे के बाद ही उजागर होती है। ऐसे में प्रशासन, उल्हासनगर महानगरपालिका, अग्निशमन विभाग और संबंधित अधिकारियों को समय रहते व्यापक निरीक्षण अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों की समीक्षा करनी चाहिए।

बड़ा सवाल

क्या उल्हासनगर में लखनऊ जैसी त्रासदी को रोकने के लिए प्रशासन अभी से सक्रिय होगा, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खुलेगी?

लखनऊ की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा संस्थानों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई भी छोटी चूक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।














उल्हासनगर मनपा और पुलिस के दावों की खुली पोल, फर्जी डॉक्टर अब भी कर रहे इलाज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और दर्जनों शिकायतों के बावजूद अवैध चिकित्सा का कारोबार खुलेआम जारी रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस में मामले दर्ज होने और महानगरपालिका द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाने के बावजूद कई कथित फर्जी डॉक्टर अब भी बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शहर में ऐसे कई व्यक्तियों की पहचान की गई थी जो बिना वैध मेडिकल लाइसेंस के क्लीनिक संचालित कर रहे थे। इनमें से कई के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं और कुछ मामलों में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की। इसके बावजूद संबंधित क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

26 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें, फिर भी जारी है प्रैक्टिस

जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 26 कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोग बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं, बीमारियों का उपचार कर रहे हैं और चिकित्सा परामर्श भी दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि वास्तविकता में कई क्लीनिक आज भी संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

महानगरपालिका प्रशासन पर उठे सवाल

फर्जी डॉक्टरों के मामले में महानगरपालिका प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और निरीक्षण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम उठाए होते, तो लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर जोखिमों को रोका जा सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिना योग्य डॉक्टरों द्वारा किया जाने वाला उपचार मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। गलत निदान, अनुचित दवाइयों का उपयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में सही चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध क्लीनिकों को तत्काल सील कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कड़ी कार्रवाई की मांग

शहर के नागरिकों ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध क्लीनिकों की जांच की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोगों की जान से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।














FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिल सकती है Z+ सुरक्षा, सख्त कार्रवाईयों के बीच सुरक्षा बढ़ाने पर मंथन।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार कर रही हैं तथा इस संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा जारी है।

जानकारी के मुताबिक, हाल के महीनों में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने राज्यभर में गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई के कारण अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में उनकी सुरक्षा को लेकर समीक्षा किए जाने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्राप्त इनपुट और सुरक्षा आकलन रिपोर्टों के आधार पर मुंढे की सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो उन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जो देश में उपलब्ध सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है।

तुकाराम मुंढे अपनी कठोर प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए जाने जाते हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। FDA आयुक्त के रूप में भी उन्होंने राज्यभर में कई चर्चित कार्रवाईयों को अंजाम दिया है, जिसके चलते वे लगातार सुर्खियों में रहे हैं।

हाल ही में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

हालांकि, Z+ सुरक्षा को लेकर अभी तक राज्य सरकार, गृह विभाग अथवा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो तुकाराम मुंढे उन चुनिंदा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।














पूर्व मुंबई ज़ोनल NCB अधिकारी समीर वानखेड़े को बड़ी सफलता, अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क के आरोपियों को अदालत ने दोषी माना।


ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई और ठाणे से जुड़े अंडरवर्ल्ड तथा अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई में ठाणे की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दाऊद इब्राहिम के कथित करीबी सहयोगी परवेज नसरुल्लाह खान उर्फ “चिंकू पठान” समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है। यह मामला वर्ष 2021 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा उजागर किए गए बहुचर्चित सिंथेटिक ड्रग्स रैकेट से जुड़ा है, जिसने देशभर की जांच एजेंसियों को चौंका दिया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के तार सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल और हवाला चैनलों से भी जुड़े हुए थे। मामले में डोंगरी निवासी कथित ड्रग कारोबारी मोहम्मद आरिफ भुजवाला का नाम भी प्रमुखता से सामने आया था, जिस पर बड़े स्तर पर सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण और सप्लाई का आरोप है।

समीर वानखेड़े की अगुवाई में शुरू हुई थी हाई-प्रोफाइल जांच

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जनवरी 2021 में उस समय शुरू हुई थी, जब तत्कालीन NCB जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के नेतृत्व में कई स्थानों पर देर रात छापेमारी की गई थी। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई में मिले सुरागों ने जांच एजेंसियों को अंडरवर्ल्ड से जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचा दिया।

अदालत ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की कड़ी धाराओं के तहत पांच आरोपियों को दोषी माना, जबकि पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। विशेष लोक अभियोजक इरानी ने अदालत में अंतिम दलीलें पेश करते हुए पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और बरामद सबूतों को विस्तार से रखा।

कैसे खुला ड्रग्स फैक्ट्री का राज?

जांच के दौरान NCB अधिकारियों ने नवी मुंबई के घनसोली इलाके में चिंकू पठान को मेफेड्रोन (MD) और हेरोइन की व्यावसायिक मात्रा के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

सूत्रों के मुताबिक, चिंकू पठान ने अधिकारियों को डोंगरी स्थित एक फ्लैट में चल रही गुप्त सिंथेटिक ड्रग्स लैब की जानकारी दी, जहां मोहम्मद आरिफ भुजवाला के संचालन का आरोप था। इसके बाद NCB ने वहां छापा मारा।

बताया जाता है कि छापेमारी के दौरान भुजवाला इमारत की स्कैफोल्डिंग के सहारे नीचे उतरकर फरार हो गया था। हालांकि बाद में उसे रायगढ़ जिले के माणगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?

NCB की कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने भारी मात्रा में नशीले पदार्थों और अन्य संदिग्ध सामग्री को जब्त किया। बरामदगी में शामिल हैं:

मेफेड्रोन (MD)

मेथामफेटामाइन

एफेड्रिन

हेरोइन

12 किलो से अधिक सिंथेटिक नशीले पदार्थ

ऑटोमैटिक हथियार

हवाला नेटवर्क से जुड़े कोडेड दस्तावेज

2.18 करोड़ रुपये से अधिक नकद रकम

अंडरवर्ल्ड-ड्रग्स-हवाला गठजोड़ पर बड़ा संकेत

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए अंडरवर्ल्ड, हवाला नेटवर्क और अवैध हथियारों के गठजोड़ की भी परतें खुली हैं। अदालत का यह फैसला महाराष्ट्र में सक्रिय संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।














उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद, जांच और कार्रवाई की मांग तेज।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अस्पताल परिसर के हिरणी कक्ष, नवनाथ मंदिर तथा अपघात (दुर्घटना) विभाग के पास स्थित करीब 6 से 8 बड़े पेड़ों को काट दिया गया और बाद में लकड़ी को बेच भी दिया गया।

मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेड़ों की कटाई बिना आवश्यक अनुमति के की गई। पर्यावरण नियमों के अनुसार बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध माना जाता है। आरोप यह भी है कि पेड़ काटने के बाद अस्पताल से जुड़े एक जूनियर क्लर्क द्वारा लकड़ी को बेचने का काम किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील परिसर में इस प्रकार पेड़ों की कटाई बेहद गंभीर विषय है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

साथ ही Central Hospital Ulhasnagar के सिविल सर्जन समेत संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं, तो यह केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने शहर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।














उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” मामला: नाम बदलकर युवती से शादी करने का आरोप, धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना का दावा।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक हिंदू युवती ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक ने अपनी असली पहचान छिपाकर खुद को “विजय” बताकर उससे प्रेम संबंध बनाए और बाद में शादी कर ली। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद उसे आरोपी की वास्तविक पहचान का पता चला, जिसके बाद उसके साथ मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना शुरू हो गई।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी युवक उसे अपने साथ बिहार ले गया, जहां उस पर मुस्लिम रीति-रिवाज अपनाने का लगातार दबाव बनाया गया। युवती ने आरोप लगाया कि उसे जबरन बुर्का और हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं, उस पर गोमांस खाने का दबाव भी डाला गया। पीड़िता का यह भी दावा है कि आरोपी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करता था, जिससे उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।

इस पूरे मामले को लेकर पीड़िता ने Ulhasnagar Central Police Station में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी इमरान शेख, उसके दो भाइयों तथा माता-पिता के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमरान शेख और उसके दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को आज अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, आरोपी के माता-पिता की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। पीड़िता के आरोपों, शादी से जुड़े दस्तावेजों, पहचान छिपाने के दावों और कथित धार्मिक दबाव से संबंधित सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।














उल्हासनगर-4 स्थित “कुमार मटन” होटल के फ्राइड राइस में लोहे की कील मिलने की शिकायत, ग्राहक ने जताया विरोध।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-4 के विनस चौक स्थित प्रसिद्ध “कुमार मटन” होटल से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। होटल से मंगाए गए फ्राइड राइस में कथित रूप से लोहे की कील मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने होटलों और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता तथा गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने होटल से फ्राइड राइस ऑर्डर किया था। खाना खाते समय अचानक उसे भोजन के भीतर लोहे की कील दिखाई दी। यह देखकर ग्राहक हैरान रह गया और उसने तुरंत इस मामले पर नाराजगी जताई। ग्राहक का कहना है कि यदि यह कील गलती से निगल ली जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था और किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

घटना की जानकारी सामने आते ही स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल बन गया। नागरिकों ने होटल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खाने जैसी संवेदनशील चीजों में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। लोगों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट में नियमित जांच और स्वच्छता मानकों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की गंभीर जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि घटना से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल मामले को लेकर होटल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं नागरिकों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।















मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पासपोर्ट रिन्यूअल से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और नागरिक अधिकारों को मजबूत करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने भर से किसी व्यक्ति के पासपोर्ट के नवीनीकरण (Passport Renewal) पर स्वतः रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के यात्रा करने और आजीविका कमाने के अधिकार को केवल तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

29 अप्रैल को दिए गए अपने आदेश में हाई कोर्ट ने उन परिस्थितियों पर गंभीर चिंता जताई, जिनमें आवेदकों को पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए आपराधिक अदालतों से “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” (NOC) लेने के लिए मजबूर किया जाता है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में न तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ समन जारी हुआ होता है और न ही अदालत द्वारा मामले पर औपचारिक संज्ञान लिया गया होता है, इसके बावजूद NOC की शर्त लगाना नागरिकों के लिए अनावश्यक देरी और परेशानी का कारण बनता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हों। अदालत के अनुसार, केवल लंबित जांच या प्रारंभिक स्तर के मामलों के आधार पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई स्पष्ट न्यायिक आदेश मौजूद न हो।

इस फैसले को उन हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर आपराधिक मामले लंबित हैं और जिन्हें नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा या अन्य कारणों से विदेश यात्रा करनी पड़ती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में पासपोर्ट अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकता है।















यूरोप से उल्हासनगर पहुंचा ड्रग्स नेटवर्क! मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स केस की जांच में सामने आए कई सनसनीखेज खुलासे।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की कथित ड्रग ओवरडोज से हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की जांच में अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए भुगतान का खुलासा हुआ है, जिसने इस पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी महेश खेमलानी ने यूरोप में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए करीब 4,000 एक्स्टेसी पिल्स मंगवाई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप दो अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र लाई गई और बाद में उल्हासनगर तक पहुंचाई गई।

अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में करीब 3,000 एक्स्टेसी गोलियां भेजी गई थीं, जबकि दूसरी खेप में 1,000 गोलियां शामिल थीं। दोनों खेप कथित तौर पर कूरियर सेवा के माध्यम से आरोपी के साथी आयुष साहित्य के परिचित के पते पर पहुंचाई गईं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी हुई है।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ड्रग सप्लायर को भुगतान पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से नहीं, बल्कि टेथर (Tether) नामक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का उद्देश्य लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों से बचना था।

सूत्रों के अनुसार, मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट, डार्क वेब नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन एंगल की भी गहन जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों, ड्रग सप्लाई चैन और फंडिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।















उल्हासनगर पर ड्रग्स नेटवर्क का साया: भविष्य में ‘हब’ बनने की आशंका, आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede की सख्त चेतावनी।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर का नाम सामने आने के बाद इस शहर को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उल्हासनगर भविष्य में ड्रग्स का बड़ा हब बन सकता है।

उल्हासनगर में आयोजित एक ड्रग्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि हालिया घटनाओं ने इस क्षेत्र को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और इसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने खासतौर पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ड्रग्स का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक व्यापक सामाजिक संकट है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

वानखेड़े ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान, खुफिया निगरानी को मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।














उल्हासनगर में फैलता ड्रग्स नेटवर्क बना गंभीर चुनौती: सख्त कार्रवाई की मांग तेज, IRS अधिकारी समीर वानखेड़े कर सकते हैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैलते ड्रग्स नेटवर्क ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रही शिकायतों और स्थानीय स्तर पर बढ़ती गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि यह इलाका धीरे-धीरे नशे के कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों के बीच इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। उनका कहना है कि नशे की बढ़ती उपलब्धता के कारण युवाओं और छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है, जिससे समाज पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसी बीच, सूत्रों के अनुसार IRS अधिकारी Sameer Wankhede इस गंभीर मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि वे जल्द ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मुलाकात कर सकते हैं। इस संभावित बैठक में ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ व्यापक और सख्त कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित चर्चा में राज्य स्तर पर विशेष अभियान चलाने, पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तथा ड्रग्स सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा सकता है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में खुलेआम नशे की बिक्री हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित छापेमारी, सख्त निगरानी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है।

फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए किस स्तर की कार्रवाई की जाती है।