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खारघर शराब जब्ती से उठे बड़े सवाल: वाहन, गोदाम और डिस्पैच रिकॉर्ड की जांच कहां तक पहुंची?


 


खारघर/नवी मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

जनवरी 2026 में खारघर में महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग द्वारा की गई शराब जब्ती की कार्रवाई के बाद अब जांच के दायरे को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान एक वाहन से कथित तौर पर बिना वैध परिवहन दस्तावेजों के शराब के दो कार्टन सहित विदेशी शराब जब्त किए जाने और वाहन चालक को गिरफ्तार किए जाने का उल्लेख है।

हालांकि, दस्तावेजों में सामने आने वाली वाहन, लाइसेंस, गोदाम और परिवहन संबंधी जानकारियों को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच केवल वाहन चालक तक सीमित रही, या फिर माल के स्रोत से लेकर उसके डिस्पैच और विभिन्न डिलीवरी पॉइंट्स तक पूरी सप्लाई चेन की भी पड़ताल की गई?

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर बालाजी एंटरप्रायझेस, उसके लाइसेंस धारक, प्रबंधक, कर्मचारियों या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी सिद्ध नहीं हुई है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच से जुड़े सवालों को सामने रखना है।

3 जनवरी को खारघर में हुई थी कार्रवाई

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 3 जनवरी 2026 को पनवेल शहर प्रभाग-2 के महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क अधिकारियों ने खारघर के सेक्टर-6 क्षेत्र में गोल्ड कॉइन वाइन मार्ट के पास एक अशोक लेलैंड वाहन को रोका था।

दस्तावेजों में जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब ₹7.94 लाख बताई गई है। जब्त सामग्री में ब्लेंडर्स प्राइड, रॉयल स्टैग और इंपीरियल ब्लू जैसे ब्रांड के लेबल वाली बोतलों का उल्लेख मिलता है।

मौके पर किए गए प्रारंभिक फील्ड टेस्ट में अल्कोहल की रीडिंग करीब 30 प्रतिशत दर्ज होने की बात सामने आती है, जबकि संबंधित उत्पाद के लेबल पर करीब 42.8 प्रतिशत ABV का उल्लेख बताया गया है।

हालांकि, फील्ड टेस्ट के इस अंतर के आधार पर शराब को तत्काल "जहरीली" या निश्चित रूप से "मिलावटी" घोषित करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। इसकी वास्तविक प्रकृति और गुणवत्ता का अंतिम निष्कर्ष अधिकृत प्रयोगशाला की केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकता है।

वाहन से बालाजी एंटरप्रायझेस तक जुड़ती दस्तावेजी कड़ी

इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू जब्त वाहन MH-05-FJ-8234 से जुड़ी जानकारी है। उपलब्ध दस्तावेजों में यह वाहन मेसर्स बालाजी एंटरप्रायझेस के नाम पर पंजीकृत बताया गया है।

इसके साथ ही दस्तावेजों में FL-1 लाइसेंस क्रमांक 140 तथा भिवंडी तालुका के कोनगांव स्थित बॉन्डेड वेयरहाउस का संदर्भ भी सामने आता है। परिवहन दस्तावेजों में F.L. 1-A पास और बालाजी एंटरप्रायझेस से संबंधित चालान का उल्लेख होने की बात कही गई है।

यदि ये दस्तावेज पूर्ण और प्रामाणिक पाए जाते हैं, तो जांच के लिहाज से यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वाहन में मौजूद प्रत्येक कार्टन किस स्रोत से आया था और उसका अधिकृत रिकॉर्ड क्या था।

दो कार्टन को लेकर सबसे बड़ा सवाल

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वाहन में मौजूद दो कार्टन के संबंध में वैध ट्रांसपोर्ट पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आती है।

यहीं से जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न शुरू होता है—

इन कार्टनों को वाहन में किसने लोड किया?

क्या यह माल अधिकृत डिस्पैच प्रक्रिया का हिस्सा था?
क्या किसी कर्मचारी या सुपरवाइजर ने इसे लोड कराया?
क्या चालक को इसकी जानकारी थी?
क्या गोदाम के स्टॉक रजिस्टर में इसका कोई रिकॉर्ड था?
क्या संबंधित कार्टनों का चालान या परिवहन पास जारी हुआ था?

इन सवालों का उत्तर गोदाम के लोडिंग रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड, डिस्पैच रजिस्टर, चालान, परिवहन पास, कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध CCTV फुटेज के मिलान से ही स्पष्ट हो सकता है।

सुबह 5:05 बजे डिस्पैच का रिकॉर्ड क्या कहता है?

चालक के उपलब्ध बयान में कथित तौर पर गोदाम प्रबंधक के रूप में उल्लेखित राहुल सपकाळे द्वारा 2 जनवरी की रात फोन कर वाहन रवाना करने के निर्देश दिए जाने की बात दर्ज है।

बयान के अनुसार, वाहन 3 जनवरी की सुबह लगभग 5:05 बजे कोनगांव से रवाना हुआ।

इससे एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं नियामक प्रश्न सामने आता है—यदि उस समय शराब का स्टॉक डिस्पैच करने पर लाइसेंस की शर्तों के तहत कोई समय संबंधी प्रतिबंध था, तो उस समय माल रवाना करने की अनुमति किसके स्तर से दी गई थी और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है?

यह सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि लाइसेंस की शर्तों, गोदाम के अधिकृत कार्य समय और उस दिन के वास्तविक डिस्पैच रिकॉर्ड के बीच मिलान करने के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या कोनगांव गोदाम की जांच हुई?

जांच के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक कोनगांव स्थित बॉन्डेड वेयरहाउस है।

यदि जब्त वाहन और परिवहन दस्तावेजों की कड़ी इस गोदाम तक पहुंचती है, तो जांच के तहत निम्न पहलुओं का सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है—

उस दिन का पूरा स्टॉक रिकॉर्ड

स्टॉक का भौतिक सत्यापन

माल की आवक-जावक का विवरण

डिस्पैच रजिस्टर

लोडिंग रिकॉर्ड

संबंधित चालान एवं ट्रांसपोर्ट पास

उस समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की जानकारी

वाहन की एंट्री और एग्जिट रिकॉर्ड

CCTV/DVR/NVR रिकॉर्ड

अन्य वाहनों के डिस्पैच का विवरण


यदि यह जांच पहले ही की जा चुकी है, तो उसके निष्कर्ष आधिकारिक केस रिकॉर्ड या विभागीय दस्तावेजों से स्पष्ट हो सकते हैं।

CCTV फुटेज का सवाल भी महत्वपूर्ण

उपलब्ध सामग्री के अनुसार, 5 मार्च को एक गोदाम सुपरवाइजर के बयान में संबंधित अवधि की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, फुटेज उपलब्ध न होना अपने आप में सबूत नष्ट किए जाने का प्रमाण नहीं है। तकनीकी खराबी, सीमित स्टोरेज, ऑटोमैटिक ओवरराइटिंग या अन्य तकनीकी कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं।

फिर भी जांच के लिहाज से यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि—

घटना के दिन कैमरे काम कर रहे थे या नहीं?

DVR/NVR में रिकॉर्डिंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहती थी?

संबंधित अवधि की रिकॉर्डिंग ऑटोमैटिक ओवरराइट हुई थी या नहीं?

DVR/NVR की तकनीकी जांच हुई या नहीं?

किसी डिजिटल फॉरेंसिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया या नहीं?


यदि माल लोड करने की प्रक्रिया का CCTV रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो अन्य दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्यों का महत्व और बढ़ जाता है।

खारघर से पहले की डिलीवरी भी जांच का हिस्सा बन सकती है

चालक के उपलब्ध बयान के अनुसार, वाहन खारघर पहुंचने से पहले कई शराब दुकानों पर गया था।

बताई गई समय-सारिणी के अनुसार वाहन ने कथित तौर पर घनसोली, कोपरखैरणे, नेरुल और बेलापुर क्षेत्र में कई डिलीवरी कीं और बाद में खारघर स्थित गोल्ड कॉइन वाइन मार्ट पहुंचा।

यदि यह समय-सारिणी आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होती है, तो इन सभी डिलीवरी पॉइंट्स के दस्तावेजों का मिलान जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।

मसलन—

संबंधित दुकानों के चालान

ट्रांसपोर्ट पास

बैच नंबर

स्टॉक रजिस्टर

संबंधित शराब का स्टॉक

डिलीवरी का समय

वाहन की आवाजाही

दुकानदारों एवं कर्मचारियों के बयान


इनका मिलान करने से यह स्पष्ट हो सकता है कि जब्त माल किसी बड़े कंसाइनमेंट का हिस्सा था या अलग से वाहन में आया था।

FL-1 लाइसेंस नंबर 140 की स्थिति पर भी सवाल

दस्तावेजों में FL-1 लाइसेंस नंबर 140 का संदर्भ होने के कारण इस लाइसेंस की विभागीय स्थिति भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है।

यदि जांच में लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठान से संबंधित किसी माल के अनधिकृत परिवहन, दस्तावेजी अनियमितता या लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो आपराधिक जांच के अलावा विभागीय और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई का प्रश्न भी सामने आ सकता है।

इसलिए यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि—

क्या लाइसेंस की विभागीय समीक्षा की गई?
क्या गोदाम का निरीक्षण हुआ?
क्या स्टॉक का पूर्ण मिलान कराया गया?
क्या लाइसेंस धारक अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए?

इन प्रश्नों के उत्तर आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकते हैं।

महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 का पहलू

इस मामले में महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 से संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार हुआ या नहीं, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

हालांकि, किसी कर्मचारी या एजेंट के कथित कृत्य के आधार पर लाइसेंस धारक को स्वतः दोषी नहीं माना जा सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित आवश्यक शर्तों, संबंधित व्यक्ति की भूमिका, नियंत्रण एवं जानकारी तथा उपलब्ध वैधानिक बचावों का परीक्षण आवश्यक होता है।

इसलिए इस मामले में धारा 79 सहित अन्य संभावित कानूनी प्रावधानों का प्रयोग हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड और अभियोजन दस्तावेजों से ही की जानी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य: अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट

इस पूरे मामले में वैज्ञानिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट हो सकती है।

फील्ड टेस्ट में अल्कोहल की रीडिंग और लेबल पर दर्ज ABV में अंतर दिखाई देना अपने आप में अंतिम निष्कर्ष नहीं है। प्रयोगशाला परीक्षण से ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि जब्त तरल की वास्तविक संरचना क्या थी और वह निर्धारित मानकों के अनुरूप था या नहीं।

इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने या उपलब्ध होने से पहले "जहरीली शराब", "घातक शराब" या किसी विशेष विषैले पदार्थ की मौजूदगी जैसे निष्कर्षों से बचना आवश्यक है।

उत्पाद शुल्क विभाग से 15 प्रमुख सवाल

इस मामले की पारदर्शिता और जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग से निम्न प्रश्नों पर आधिकारिक जानकारी अपेक्षित है—

1. क्या खारघर कार्रवाई के बाद कोनगांव बॉन्डेड वेयरहाउस का आधिकारिक निरीक्षण किया गया?


2. क्या गोदाम का संपूर्ण भौतिक स्टॉक ऑडिट किया गया?


3. क्या डिस्पैच रजिस्टर, चालान और ट्रांसपोर्ट पास का मिलान किया गया?


4. वाहन में माल लोड करने वाले कर्मचारियों की पहचान कर बयान दर्ज किए गए?


5. 3 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 5:05 बजे वाहन रवाना करने की अनुमति किस रिकॉर्ड के आधार पर दी गई?


6. दो कथित बिना-पास वाले कार्टनों का स्रोत क्या पाया गया?


7. उन कार्टनों के संबंध में स्टॉक रिकॉर्ड में क्या प्रविष्टि थी?


8. क्या गोदाम के CCTV/DVR/NVR की तकनीकी या फॉरेंसिक जांच की गई?


9. क्या खारघर से पहले के डिलीवरी पॉइंट्स की जांच की गई?


10. क्या संबंधित दुकानों के स्टॉक और चालानों का मिलान किया गया?


11. अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति क्या है?


12. FL-1 लाइसेंस नंबर 140 की कोई विभागीय समीक्षा की गई?


13. क्या संबंधित लाइसेंस धारक, प्रबंधक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए?


14. क्या महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों पर विचार किया गया?


15. वर्तमान में मामले की जांच, अभियोजन और चार्जशीट की वास्तविक स्थिति क्या है?



जांच का दायरा वाहन से आगे क्यों जाना चाहिए?

यह मामला केवल इस सवाल तक सीमित नहीं होना चाहिए कि "वाहन कौन चला रहा था?"

यदि दस्तावेजों से वाहन, लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय, गोदाम, डिस्पैच रिकॉर्ड और डिलीवरी नेटवर्क के बीच संबंध सामने आते हैं, तो जांच का स्वाभाविक दायरा यह निर्धारित करना होगा कि माल की पूरी श्रृंखला में किस स्तर पर क्या हुआ।

एक संभावित जांच-श्रृंखला इस प्रकार हो सकती है—

लाइसेंस धारक → कोनगांव गोदाम → स्टॉक रिकॉर्ड → लोडिंग → डिस्पैच → वाहन → चालक → डिलीवरी पॉइंट्स → खारघर में जब्ती

यह श्रृंखला अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं करती। लेकिन यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति है, तो प्रत्येक चरण की जिम्मेदारी और नियंत्रण का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

दो संभावित स्थितियां, दोनों में जांच जरूरी

उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर व्यापक जांच से मोटे तौर पर दो संभावित स्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

पहली स्थिति: जब्त माल किसी लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय के आधिकारिक स्टॉक या डिस्पैच से जुड़ा पाया जाए।

दूसरी स्थिति: संदिग्ध कार्टन अधिकृत व्यवसाय की जानकारी या अनुमति के बिना वाहन में रखे गए हों।

दोनों परिस्थितियों में सच्चाई सामने लाने के लिए दस्तावेजी रिकॉर्ड, स्टॉक मिलान, गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल कई सवालों के जवाब बाकी

खारघर में वाहन पकड़ा गया, चालक अस्पाक महबूब शेख को गिरफ्तार किया गया और शराब जब्त की गई। लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों में जांच की संभावित कड़ियां वाहन से आगे बालाजी एंटरप्रायझेस, FL-1 लाइसेंस नंबर 140, कोनगांव गोदाम, डिस्पैच रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और कथित डिलीवरी पॉइंट्स तक जाती दिखाई देती हैं।

ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या इन सभी कड़ियों की जांच वास्तव में की गई है?

यदि जांच की गई है तो उसके निष्कर्ष सार्वजनिक या आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्ट होने चाहिए। यदि नहीं की गई है, तो इसके कारणों को भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

संपादकीय एवं कानूनी सावधानी

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, दर्ज बयानों और उनसे उठने वाले जांच संबंधी प्रश्नों पर आधारित है। उपलब्ध सामग्री के आधार पर बालाजी एंटरप्रायझेस, उसके लाइसेंस धारक, राहुल सपकाळे, चालक अस्पाक महबूब शेख अथवा किसी अन्य संबंधित व्यक्ति को दोषी ठहराने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है।

"बनावटी", "मिलावटी", "जहरीली" अथवा "घातक" जैसे शब्दों का अंतिम और निश्चित प्रयोग केवल संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट या अन्य सक्षम आधिकारिक साक्ष्य से पुष्टि होने के बाद ही किया जाना उचित होगा।

इसी प्रकार, किसी अधिकारी या विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत अथवा जानबूझकर लापरवाही का निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होंगे।

महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग, संबंधित अधिकारियों, बालाजी एंटरप्रायझेस, लाइसेंस धारक, राहुल सपकाळे, अस्पाक महबूब शेख तथा अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष इस रिपोर्ट में महत्वपूर्ण है। उनका आधिकारिक स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे उचित स्थान दिया जाना चाहिए।

केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट, गोदाम निरीक्षण रिपोर्ट, CCTV/DVR संबंधी जांच, FL-1 लाइसेंस की विभागीय स्थिति, केस डायरी/चार्जशीट तथा अन्य सत्यापन योग्य आधिकारिक दस्तावेज सामने आने पर रिपोर्ट को उसके अनुसार अपडेट किया जा सकता है।

मुख्य सवाल अब भी यही है—जांच की अगली कड़ी कहां तक पहुंची




























आत्महत्या से खुली साजिश: पुलिस, राजनीति और ड्रग माफिया का खतरनाक गठजोड़।


नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

नवी मुंबई के खारघर क्षेत्र में बिल्डर गुनाताई आत्मलिये की आत्महत्या मामले में चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। आत्महत्या नोट के आधार पर खारघर पुलिस स्टेशन के एक पुलिस कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह पुलिस कांस्टेबल न केवल बिल्डर पर आर्थिक दबाव बना रहा था, बल्कि ड्रग रैकेट के संचालन में भी सक्रिय रूप से शामिल था।

मृतक आत्मलिये द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) के कुछ अधिकारियों के नाम भी उजागर किए गए हैं, जिन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इस नोट को प्रमुख सबूत मानते हुए पुलिस ने अपनी ही फोर्स के सदस्य के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है।

ड्रग तस्करी में पुलिस कर्मचारी की भूमिका उजागर

जांच में यह सामने आया है कि गिरफ्तार पुलिस कांस्टेबल पहले से पकड़े गए ड्रग तस्करों के संपर्क में था और नशीली दवाओं के धंधे में लिप्त लोगों से लगातार वसूली कर रहा था। जानकारी के अनुसार, इस कांस्टेबल के बड़े पुलिस अधिकारियों और कुछ राजनीतिक हस्तियों से भी संबंध होने का संदेह है। इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने पुलिस कैंटीनों में भी भारी निवेश किया था।

करोड़ों रुपये की ड्रग्स बरामद

हाल ही में पनवेल एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने खारघर के सेक्टर-15 से करोड़ों रुपये की ड्रग्स जब्त की थी। इस कार्रवाई में 15 से 16 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि यह पूरा रैकेट उलवे क्षेत्र से संचालित हो रहा था। अब तक की पूछताछ में गिरफ्तार पुलिस कर्मचारी की इस गिरोह में सक्रिय भूमिका होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

संपूर्ण पुलिस महकमा सकते में

पुलिस आयुक्त को जब इस बात की जानकारी मिली कि उनके ही विभाग का एक कर्मचारी ड्रग तस्करी में संलिप्त है, तो पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है। खारघर पुलिस अब इस प्रकरण की हर कोण से गहराई से जांच कर रही है।

निष्कर्ष:

बिल्डर आत्महत्या प्रकरण ने नवी मुंबई पुलिस के भीतर गहरे भ्रष्टाचार और आपराधिक मिलीभगत के संकेत दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, आम जनता ने भी इस मामले में पारदर्शी जांच और कठोर दंड की मांग की है।











नवी मुंबई में बिल्डर गुरुनाथ चिचकर ने की आत्महत्या, NCB के वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप..!


नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

नवी मुंबई में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जब प्रसिद्ध बिल्डर गुरुनाथ चिचकर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना सुबह करीब 6:30 बजे के आसपास उनके निवास स्थान पर घटी। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

गुरुनाथ चिचकर, कुख्यात ड्रग्स माफिया नवीन चिचकर के पिता थे, जो पहले से ही कई मामलों में एनसीबी की जांच के दायरे में है। सुसाइड नोट के अनुसार, चिचकर पर एनसीबी के एक उच्च अधिकारी द्वारा लगातार पैसों की मांग की जा रही थी और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इस दबाव और उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने यह कठोर कदम उठाया।

सूत्रों की मानें तो चिचकर ने आत्महत्या से पहले अपने करीबी मित्रों से भी बात की थी और अपने ऊपर बन रहे दबाव की जानकारी दी थी। पुलिस और एनसीबी की टीम अब सुसाइड नोट की जांच कर रही है और आरोपी अधिकारी की भूमिका को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।

यह मामला सामने आने के बाद एनसीबी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह देश की एक प्रमुख जांच एजेंसी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।

जांच जारी, वरिष्ठ अधिकारियों से भी होगी पूछताछ

पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिचकर की आत्महत्या को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस वरिष्ठ एनसीबी अधिकारियों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है। साथ ही, घटनास्थल से बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ और अन्य दस्तावेज़ों की भी जांच की जा रही है।

यह मामला अब न केवल एक आत्महत्या का है, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार, दुरुपयोग और दबाव की राजनीति के गहरे संकेत मिल रहे हैं, जो देश की जांच एजेंसियों की साख पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।












30 करोड़ की ठगी: टॉरेस ज्वेलरी घोटाले में युक्रेनियन महिला ने भारतीयों को लगाया चूना।


नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी/ प्रतिक यादव 

सानपाड़ा, नवी मुंबई में टॉरेस ज्वेलरी के नाम पर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। युक्रेन की एक महिला ने भारतीय नागरिकों को साधारण पत्थरों को महंगे रत्नों के रूप में बेचकर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये की ठगी की है।

बॉलीवुड सितारों के जरिए हुआ भव्य उद्घाटन

इस घोटाले की शुरुआत बड़े ही धूमधाम से हुई। मुंबई के दादर स्थित टॉरेस ज्वेलरी स्टोर का उद्घाटन बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के हाथों कराया गया। आकर्षक विज्ञापन और भव्य उद्घाटन समारोह के जरिए लोगों को आकर्षित किया गया।

साधारण पत्थरों को महंगे रत्न बताकर ठगा

टॉरेस ज्वेलरी के तहत साधारण पत्थरों को महंगे रत्नों का दर्जा देकर ग्राहकों को प्रति टुकड़ा 7000 रुपये में बेचा गया, जबकि इनकी वास्तविक कीमत मात्र 200 रुपये थी। आकर्षक ऑफर्स और विज्ञापनों के सहारे मुंबई और उपनगरीय क्षेत्रों के नागरिकों को इस धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया।

महिलाओं को 10% रिटर्न का झांसा

महिलाओं को साधारण पत्थरों पर हर हफ्ते 10% रिटर्न का लालच दिया गया। इस प्रलोभन में आकर कई महिलाओं ने अपने पतियों को ज्वेलरी खरीदने के लिए राजी किया। यहां तक कि उच्च वर्ग की महिलाओं ने भी इस घोटाले में लाखों रुपये का निवेश किया।

लकी ड्रॉ के नाम पर गाड़ी देने का प्रलोभन

मुंबई और उपनगरीय क्षेत्रों में भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हर रविवार लकी ड्रॉ के जरिए विजेता को कार गिफ्ट करने का वादा किया गया। इस लालच में कई लोगों ने भारी मात्रा में निवेश किया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

ग्राहकों की शिकायत के बाद पुलिस ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी फरार है और उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने नागरिकों से ऐसी आकर्षक योजनाओं से सतर्क रहने की अपील की है। अब तक 1500 से अधिक लोगों ने इस घोटाले की शिकायत दर्ज कराई है।

सानपाड़ा पुलिस स्टेशन में इस मामले में केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।









नवी मुंबई पुलिस द्वारा साइबर क्राइम जागरूकता चैनल शुरू।



नवी मुंबई : दिनेश मीरचंदानी 

नवी मुंबई पुलिस आयुक्तालय ने नागरिकों के लिए एक साइबर क्राइम जागरूकता चैनल बनाया है, जो 12 अगस्त 2024 से शुरू होगा। इस चैनल के माध्यम से नागरिकों को साइबर क्राइम से सावधान रहने और अपनी ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए जानकारी प्रदान की जाएगी। नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस चैनल को फॉलो करें और साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक रहें।




SC रिजर्वेशन में कोटे में कोटा मंजूर:सुप्रीम कोर्ट ने अपना 19 साल पुराना फैसला पलटा, कहा- राज्य आरक्षण में सब कैटेगरी बना सकते हैं

राज्य सरकारें अब अनुसूचित जाति, यानी SC के रिजर्वेशन में कोटे में कोटा दे सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अगस्त) को इस बारे में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने 20 साल पुराना अपना ही फैसला पलटा है। तब कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जातियां खुद में एक समूह हैं, इसमें शामिल जातियों के आधार पर और बंटवारा नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने अपने नए फैसले में राज्यों के लिए जरूरी हिदायत भी दी है। कहा है कि राज्य सरकारें मनमर्जी से फैसला नहीं कर सकतीं। इसके लिए दो शर्तें होंगी...
पहली: अनुसूचित जाति के भीतर किसी एक जाति को 100% कोटा नहीं दे सकतीं।
दूसरी: अनुसूचित जाति में शामिल किसी जाति का कोटा तय करने से पहले उसकी हिस्सेदारी का पुख्ता डेटा होना चाहिए।

फैसला सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ का है। इसमें कहा गया कि अनुसूचित जाति को उसमें शामिल जातियों के आधार पर बांटना संविधान के अनुच्छेद-341 के खिलाफ नहीं है।

फैसले का आधार: अदालत ने फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया है, जिनमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण का फायदा उनमें शामिल कुछ ही जातियों को मिला है। इससे कई जातियां पीछे रह गई हैं। उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए कोटे में कोटा होना चाहिए। इस दलील के आड़े 2004 का फैसला आ रहा था, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जातियों को सब-कैटेगरी में नहीं बांट सकते।

फैसले के मायनेः राज्य सरकारें अब राज्यों में अनुसूचित जातियों में शामिल अन्य जातियों को भी कोटे में कोटा दे सकेंगी। यानी अनुसूचित जातियों की जो जातियां वंचित रह गई हैं, उनके लिए कोटा बनाकर उन्हें आरक्षण दिया जा सकेगा।

मसलन- 2006 में पंजाब ने अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित कोटे के भीतर वाल्मीकि और मजहबी सिखों को सार्वजनिक नौकरियों में 50% कोटा और पहली वरीयता दी थी।


जस्टिस गवई फैसला देने वाली 7 जजों की बेंच में शामिल थे।

कोर्ट रूम लाइव...

पक्ष में फैसला देने वाले जजों के बयान...

  • CJI डीवाई चंद्रचूड़ : सब-क्लासिफिकेशन (कोटे में कोटा) आर्टिकल 14 का उल्लंघन नहीं करता, क्योंकि सब-कैटेगरीज को सूची से बाहर नहीं रखा गया है। आर्टिकल 15 और 16 में ऐसा कुछ नहीं है जो राज्य को किसी जाति को सब-कैटेगरी में बांटने से रोकता हो। SC की पहचान बताने वाले पैमानों से ही पता चल जाता है कि वर्गों के भीतर बहुत ज्यादा फर्क है।
  • जस्टिस बीआर गवई : सब कैटेगरी का आधार राज्यों के आंकड़ों से होना चाहिए, वह अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकता। क्योंकि आरक्षण के बाद भी निम्न ग्रेड के लोगों को अपने पेशे को छोड़ने में कठिनाई होती है। ईवी चिन्नैया केस में असली गलती यह है कि यह इस समझ पर आगे बढ़ा कि आर्टिकल 341 आरक्षण का आधार है।
  • जस्टिस गवई : इस जमीनी हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता, एससी/एसटी के भीतर ऐसी कैटेगरी हैं जिन्हें सदियों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। सब कैटेगरी का आधार यह है कि बड़े समूह के अंतर्गत आने वाले एक समूह को ज्यादा भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अनुसूचित जातियों के हाई क्लास वकीलों के बच्चों की तुलना गांव में मैला ढोने वाले के बच्चों से करना गलत है।
  • जस्टिस गवई : बीआर अंबेडकर ने कहा है कि इतिहास बताता है कि जब नैतिकता का सामना अर्थव्यवस्था से होता है तो जीत अर्थव्यवस्था की होती है। सब-कैटेगरी की परमिशन देते समय, राज्य केवल एक सब-कैटेगरी के लिए 100% आरक्षण नहीं रख सकता है।
  • जस्टिस शर्मा : मैं जस्टिस गवई के इस विचार से सहमत हूं कि एससी/एसटी में क्रीमी लेयर की पहचान का मुद्दा राज्य के लिए संवैधानिक अनिवार्यता बन जाना चाहिए।

पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत खारिज:UPSC ने धोखाधड़ी-जालसाजी की FIR दर्ज कराई थी, एक दिन पहले IAS सिलेक्शन भी रद्द किया

 ट्रेनी IAS अफसर रही पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने खारिज कर दी है। पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार 1 अगस्त को दिल्ली पुलिस को आदेश दिया कि UPSC परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले बाकी कैंडिडेट्स की भी जांच की जाए। साथ ही अगर UPSC के किसी कर्मचारी ने पूजा की मदद की हो, तो उसकी भी जांच हो।

पूजा खेडकर पर उम्र, माता-पिता की गलत जानकारी, पहचान बदलकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेस का एग्जाम देने का आरोप था। UPSC ने दस्तावेजों की जांच के बाद पूजा को सीएसई-2022 नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया था। इसके बाद UPSC ने उनके खिलाफ एफआईआर कराई थी।

धोखाधड़ी और जालसाजी के इस केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए पूजा ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। कोर्ट में UPSC के वकील ने कहा था कि उन्होंने सिस्टम को धोखा दिया है। वह एक साधन संपन्न व्यक्ति हैं और उनके द्वारा कानून का दुरुपयोग करने की संभावना बनी हुई है। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

UPSC ने बुधवार 31 जुलाई को पूजा का सिलेक्शन रद्द कर दिया था। साथ ही भविष्य में UPSC का कोई एग्जाम देने पर भी रोक लगा दी थी। पूजा को एग्जाम में 2022 में 841वीं रैंक मिली थी। वे 2023 बैच की ट्रेनी IAS थीं और जून 2024 से ट्रेनिंग पर थीं।

UPSC ने कहा था- पूजा को 2 बार समय दिया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया

  • पूजा ने रूल्स तोड़े: UPSC ने बताया था कि पहचान बदलकर तय सीमा से ज्यादा बार सिविल सर्विसेस का एग्जाम देने के लिए 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था। इसमें कहा गया है कि पूजा को 25 जुलाई तक अपना जवाब देना था, लेकिन उन्होंने अपने जवाब के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए 4 अगस्त तक का समय मांगा। आयोग ने कहा- उन्हें फिर 30 जुलाई को दोपहर 3:30 बजे तक समय दिया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

नई संसद की छत से पानी लीक, नीचे बाल्टी रखी:विपक्ष बोला- संसद के बाहर पेपर लीक और अंदर पानी लीक; लोकसभा सचिवालय बोला- ठीक करा लिया


कांग्रेस नेता मणिकम टैगाेर समेत कई नेताओं ने वीडियो शेयर किया, जिसमें संसद की छत से पानी टपकता हुआ दिखाई दे रहा है। - Money Bhaskar

कांग्रेस नेता मणिकम टैगाेर समेत कई नेताओं ने वीडियो शेयर किया, जिसमें संसद की छत से पानी टपकता हुआ दिखाई दे रहा है।

एक साल पहले बनकर तैयार हुई नई संसद की छत से पानी लीक होने का एक वीडियो सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि संसद की लॉबी में छत से पानी गिर रहा है और उसके नीचे एक बाल्टी रखी है जिसमें पानी जमा हो रहा है। यह वीडियो कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने शेयर कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- संसद के बाहर पेपर लीक और अंदर पानी लीक।

इसे लेकर लोकसभा सचिवालय ने कहा कि ग्रीन संसद की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए संसद भवन के कई हिस्सों में कांच के गुंबद (ग्लास डोम) लगाए गए हैं, ताकि नेचुरल लाइट आ सके। इसमें लॉबी भी शामिल है। बुधवार को भारी बारिश के बाद ग्लास डोम को सील करने के लिए लगाया गया ग्लू हट गया था, जिसके चलते पानी का रिसाव हुआ। हालांकि इसे अब ठीक कर लिया गया है।

बुधवार को नई संसद के मकर द्वार के बाहर बारिश का पानी भर गया।
बुधवार को नई संसद के मकर द्वार के बाहर बारिश का पानी भर गया।

अखिलेश बोले- इससे तो पुरानी संसद अच्छी थी
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इस नई संसद से अच्छी तो वो पुरानी संसद थी, जहां पुराने सांसद भी आकर मिल सकते थे। क्यों न फिर से पुरानी संसद चलें, कम से कम तब तक के लिए, जब तक अरबों रुपयों से बनी संसद में पानी टपकने का कार्यक्रम चल रहा है। जनता पूछ रही है कि भाजपा सरकार में बनी हर नई छत से पानी टपकना, उनकी सोच-समझकर बनाई गई डिजाइन का हिस्सा होता है या फिर…

वहीं सपा के मीडिया सेल ने ट्वीट किया कि भाजपा सरकार में नेता इंजीनियर बन जाते हैं, इंजीनियरों को निर्देश देना शुरू कर देते हैं, काम में दखलंदाजी और आर्किटेक्चर में दखल देते हैं जिसका परिणाम सामने है। नए संसद भवन में पानी टपक रहा है। न पानी निकासी के इंतजाम हैं, न सीवर ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त है। भाजपा सरकार में दिल्ली हो या यूपी दोनों जगह यही हो रहा है।

दिल्ली में बुधवार को एक घंटे में 114 मिमी से ज्यादा बारिश
दिल्ली में बीते कुछ दिनों से बारिश के चलते हालात बेहद खराब हैं। 27 जुलाई को ओल्ड राजेंद्र नगर में बारिश के बाद पानी भरने से राउ कोचिंग इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में पानी भर गया। इसमें तीन स्टूडेंट्स की जान चली गई। वहीं, 31 जुलाई को सिर्फ एक घंटे में 114 मिमी बारिश हुई। इसके चलते संसद, सुप्रीम कोर्ट, एम्स, लुटियंस दिल्ली, भारत मंडपम, इंडिया गेट-रिंग रोड टनल, प्रगति मैदान पानी में डूबे रहे।

सोना ₹596 बढ़कर ₹69,905 पर पहुंचा:चांदी ₹568 चढ़कर ₹83,542 प्रति किलो बिक रही, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत



सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 1 अगस्त को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 596 रुपए बढ़कर 69,905 रुपए पर पहुंच गया है। कल इसके दाम 69,309 रुपए प्रति दस ग्राम थे।

वहीं एक किलो चांदी 568 रुपए चढ़कर 83,542 रुपए प्रति किलो बिक रही है। इससे पहले चांदी 82,974 रुपए किलो प्रति पर थी। इस साल चांदी 29 मई को अपने ऑल टाइम हाई 94,280 रुपए प्रति पर पहुंच गई थी।


4 महानगरों और भोपाल में सोने की कीमत

  • दिल्ली: 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 64,650 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 70,510 रुपए है।
  • मुंबई: 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 64,500 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 70,360 रुपए है।
  • कोलकाता: 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 64,500 रुपए और 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 70,360 रुपए है।
  • चेन्नई: 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 64,300 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 70,150 रुपए है।
  • भोपाल: 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत 64,550 रुपए और 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 70,410 रुपए है।

फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो का मुनाफा 127 गुना बढ़ा:2 करोड़ से बढ़कर 253 करोड़ रुपए हुआ, शेयर 4% चढ़कर बंद



फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो का अप्रैल-जून तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 126.5 गुना बढ़कर 253 करोड़ रुपए हो गया है। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2 करोड़ रुपए था।

जोमैटो ने गुरुवार, 1 अगस्त को वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी की पहली तिमाही में आय (रेवेन्यू) 74% बढ़कर 4,206 करोड़ हो गई। एक साल पहले की समान तिमाही में रेवेन्यू 2,416 करोड़ रुपए था।


2026 के अंत तक 2,000 स्टोर बनाने का प्लान
जोमैटो का क्विक कॉमर्स बिजनेस 'ब्लिंकट' तेजी से ग्रो कर रहा है। इसके 31 मार्च 2024 तक 526 स्टोर थे जो जून में बढ़कर 629 हो गए। यानी, जून तिमाही में 113 नए स्टोर खोले गए हैं। ब्लिंकिट के को-फाउंडर अलबिंदर ढींडसा ने कहा- कंपनी का लक्ष्य 2026 के अंत तक 2,000 स्टोर बनाने का है। इनमें से ज्यादातर स्टोर भारत के टॉप 10 शहरों में होंगे।

जोमैटो का शेयर 3.68% चढ़ा, 237.90 रुपए पर बंद
रिजल्ट आने के बाद जोमैटो का शेयर 3.68% बढ़कर 237.90 रुपए पर बंद हुआ। बीते 6 महीने में कंपनी का शेयर 69.26% बढ़ा है। वहीं बीते एक साल में कंपनी के शेयर ने 180% का रिटर्न दिया है। 1 अगस्त 2023 को जोमैटो 84.75 रुपए पर था।

सरकार ने जुलाई में GST से ₹1.82 लाख करोड़ जुटाए:ये 2024-25 का दूसरा बड़ा कलेक्शन, सालाना आधार पर 10% बढ़ा; ₹16,283 करोड़ रिफंड जारी



सरकार ने जुलाई 2024 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, यानी GST से 1.82 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। सालाना आधार पर इसमें 10.3% की बढ़ोतरी हुई है। ये अब तक का किसी भी महीने जुटाया गया तीसरा और वित्त वर्ष 2024-25 का दूसरा सबसे बड़ा GST कलेक्शन है।

सरकार ने इस दौरान डोमेस्टिक यानी देश के अंदर होने वाले कारोबार से 1.34 लाख करोड़ टैक्स वसूला है। सालाना आधार पर इसमें 8.9% का ग्रोथ हुआ है। वहीं, इंपोर्ट के जरिए 48,039 करोड़ GST सरकार ने जुटाया है। एक साल में इसमें 14.2% की बढ़ोतरी हुई है।

  • जुलाई में सरकार ने टोटल 16,283 करोड़ रुपए की राशि रिफंड की।
  • रिफंड के बाद, जुलाई के लिए नेट GST रेवेन्यू 1,65,793 करोड़ रहा।
  • पिछले वर्ष की समान अवधि (जुलाई 2023) की तुलना में ये 14.4% ज्यादा है।

वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक GST कलेक्शन

महीनाGST कलेक्शन (लाख करोड़ में)
अप्रैल 2024₹2.10
मई 2024₹1.73
जून 2024₹1.74
जुलाई 2024₹1.82
टोटल₹7.39

नोट: आंकड़े लाख करोड़ रुपए में हैं
सोर्स: GST पोर्टल

टॉप-5 GST कलेक्शन

अप्रैल 2024₹2.10 लाख करोड़
अप्रैल 2023₹1.87 लाख करोड़
जुलाई 2024₹1.82 लाख करोड़
मार्च 2024₹1.78 लाख करोड़
मई 2024₹1.73 लाख करोड़

जून में सरकार ने GST का डेटा जारी नहीं किया
सरकार ने जून महीने का GST कलेक्शन का डेटा जारी नहीं किया था, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जून में GST संग्रह ₹1.74 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के जून की तुलना में लगभग 8% ज्यादा है।

पिछले साल जून में सरकार ने GST से 1.61 लाख करोड़ रुपए GST से जुटाए थे। वहीं अगर मई 2024 के कलेक्शन को देखें तो सरकार ने तब GST से 1.73 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। यानी, मई और जून का कलेक्शन लगभग बराबर रहा है।