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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘तीर-कमान और टीवी’ वाली अपील से पैनल नंबर 9 में सियासी उलझन, मतदाताओं के सामने बड़ा सवाल..??


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 में अब सियासी तस्वीर और भी जटिल होती जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया बयान ने पैनल नंबर 9 को चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज पैनल बना दिया है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से गठबंधन को मजबूत करने के लिए ‘तीर-कमान’ (शिवसेना) और ‘टीवी’ (साई पार्टी) चुनाव चिन्हों को वोट देने की खुली अपील की।

उपमुख्यमंत्री की इस अपील के बाद पैनल नंबर 9 के मतदाताओं के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है।

उपमुख्यमंत्री की अपील बनाम जमीनी सियासत

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मंच से एकता और गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया, लेकिन पैनल नंबर 9 की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

इसी पैनल में श्रीमती कविता मनोज लस्सी (शिवसेना / TOK समर्थित)

और श्रीमती आशा जीवन इदनानी (साई पार्टी – ‘टीवी’ चुनाव चिन्ह)

दोनों ही एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।

मतदाताओं के सामने धर्मसंकट

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

जब उपमुख्यमंत्री दोनों चुनाव चिन्हों को जिताने की अपील कर रहे हैं, तो पैनल 9 का मतदाता किसे वोट दे?

एक ओर शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार

दूसरी ओर गठबंधन की ही साई पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी

यही टकराव मतदाताओं को दो हिस्सों में बांटता नजर आ रहा है।

वोटों के बिखराव का खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री शिंदे का बयान भले ही गठबंधन को एकजुट करने के उद्देश्य से दिया गया हो, लेकिन पैनल नंबर 9 में यह बयान “दुधारी तलवार” बन गया है।

यदि वोट ‘टीवी’ चिन्ह को जाते हैं, तो साई पार्टी को सीधा फायदा होगा।

यदि वोट शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार को मिलते हैं, तो गठबंधन का दूसरा घटक कमजोर पड़ सकता है।

इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ भाजपा की प्रत्याशी दीपा नारायण पंजाबी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गठबंधन के वोटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है।

गली-मोहल्लों में चर्चा तेज

पैनल नंबर 9 की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—

“जब बड़े नेता एकता की बात कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार क्यों नहीं?”

उपमुख्यमंत्री की अपील से कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस पैनल में असमंजस और सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है।

निष्कर्ष

पैनल नंबर 9 अब केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संदेश, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि मतदाता ‘तीर-कमान’ पर भरोसा जताते हैं, ‘टीवी’ को चुनते हैं, या फिर इस आपसी फूट का फायदा भाजपा उठाने में सफल होती है

📌 उल्हासनगर चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।













नववर्ष पर सेवा और संवेदना का संदेश: उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा की पहल से सैकड़ों जरूरतमंदों को ठंड से राहत।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

नववर्ष के पावन अवसर पर सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के माध्यम से सैकड़ों गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव हेतु कंबल वितरित कर राहत पहुंचाई गई।

कैंप क्रमांक 3, दशहरा मैदान, इंदिरा गांधी गार्डन के सामने स्थित उल्हास जनपथ कार्यालय में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों ने लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त, समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने की भावना के तहत रात्रि के समय फुटपाथों, रेलवे स्टेशन परिसरों तथा मंदिरों के बाहर खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे गरीब एवं बेसहारा लोगों तक स्वयं पहुंचकर कंबल वितरित किए गए, जिससे वे कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रह सकें।

इस मानवीय पहल को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं लाभार्थियों ने शिवकुमार मिश्रा के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की है। नववर्ष की शुरुआत सेवा, करुणा और सामाजिक समर्पण के इस संदेश के साथ समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।













उल्हासनगर में ट्रांसफर विवाद ने पकड़ा तूल — TPD विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार पर गंभीर आरोप, उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त से जनता का सवाल: कार्रवाई कब.?


(फाइल फोटो)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग (TPD) विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की ट्रांसफर को लेकर शहर में तीव्र विरोध और सवालों की हवा तेज हो गई है।

शहर के जागरूक नागरिकों, आविभिन्न सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्टों ने उल्हासनगर महानगर पालिक आयुक्त मनीषा अव्हाले तथा प्रशासन से यह पूछा है कि सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद अभी तक संजय पवार की बदली क्यों नहीं की गई?

महाराष्ट्र सरकारी सेवा नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण हर 3 वर्षों में अनिवार्य है, लेकिन संजय पवार पिछले 10 से अधिक वर्षों से लगातार TPD विभाग में पदस्थापित हैं।

नियमों की यह अवहेलना नागरिकों के बीच गंभीर संदेह और असंतोष का कारण बन रही है।

🚨 गंभीर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के आरोप

सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने, बिल्डर और भूमाफिया से मिलीभगत, तथा TDR से जुड़े अनियमित कार्यों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं।

इसके अलावा, बताया जाता है कि साल 2014 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें कथित रूप से 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

इसके बावजूद आज तक न तो विभागीय स्तर पर कोई कठोर कार्रवाई हुई और न ही उनका ट्रांसफर किया गया, जिससे नागरिकों में रोष और बढ़ गया है।

📑 राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों में शिकायतें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय पवार के विरुद्ध

CBI, ACB, ED और आयकर विभाग

जैसी जांच एजेंसियों में भी शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि:

“प्रशासन की खामोशी और लंबे समय तक पदस्थ बने रहना, दोनों ही स्थितियाँ अत्यंत संदिग्ध हैं।”

✊ जनता और सामाजिक संगठनों की स्पष्ट मांग

नागरिकों ने कड़े शब्दों में कहा:

“जब नियम सभी पर समान लागू होते हैं, तो फिर 10 साल से अधिक समय से एक ही पद पर जमे अधिकारी को हटाने में देरी क्यों?”

लोगों की प्रमुख माँग:

संजय युवराज पवार का तत्काल ट्रांसफर किया जाए

सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए

❓ अब प्रशासन के सामने बड़े सवाल

👉 क्या उल्हासनगर प्रशासन जनता की आवाज सुनेगा?

👉 क्या संजय युवराज पवार की बहुप्रतीक्षित बदली अब होगी या मामला फिर दबा दिया जाएगा?

👉 क्या नागरिकों को न्यायपूर्ण और पारदर्शी निर्णय मिलेगा?

📍 इस पूरे मामले पर शहर की निगाहें अब UMC प्रशासन और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।












उल्हासनगर महानगर पालिका के टाउन प्लानिंग विभाग में बड़ा सवाल उठ खड़ा — आखिर जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की बदली क्यों नहीं..??


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग विभाग में पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार इन दिनों फिर से गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र सरकार के सेवा नियमों और शासन-निर्देश (GR) के अनुसार, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी एक ही विभाग में तीन वर्ष से अधिक पदस्थ नहीं रह सकता। निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसकी बदली अनिवार्य होती है।

इसके बावजूद, संजय युवराज पवार पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जिससे यह बड़ा प्रश्न उठ रहा है कि आखिर कौन-सी शक्तियाँ हैं जो उनकी बदली रोक रही हैं?

जागरूक नागरिकों की शिकायतें कई एजेंसियों में दाखिल

सूत्रों के अनुसार, कुछ सजग नागरिकों ने इस विषय को लेकर:

ED (Enforcement Directorate)

CBI (Central Bureau of Investigation)

Anti-Corruption Bureau

Income Tax Department

जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें गंभीर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण संरक्षण के आरोप शामिल हैं।

भू-माफिया और बिल्डर लॉबी से सांठगांठ के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संजय युवराज पवार उल्हासनगर के भू-माफियाओं और बड़े बिल्डरों के साथ मिलकर काम करते हैं, और शहर में बड़े पैमाने पर अवैध व अनियमित निर्माण को संरक्षण प्रदान करते हैं।

2014 में रिश्वत लेते पकड़े गए थे

यह भी उल्लेखनीय है कि साल 2014 में पवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने टाउन प्लानिंग विभाग में ही रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस समय भी मामला गंभीर था, परंतु उसके बाद भी उन्हें निलंबित करने या विभाग से हटाने के बजाए उन्हें पुनः उसी पद पर कार्यरत रहने दिया गया, जो स्वयं में कई सवाल खड़े करता है।

TDR घोटाले और अन्य अनियमितताओं के आरोप

संजय युवराज पवार का नाम हाल ही में उजागर हुए TDR घोटाले सहित अन्य निर्माण-संबंधी घोटालों में भी जोड़ा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि:

संजय पवार कथित तौर पर कहते हैं:

“मेरा ट्रांसफर करवाना किसी की ताकत में नहीं है। मेरे ऊपर तक मजबूत पकड़ और सेटिंग है। मंत्रालय के अर्बन डेवलपमेंट विभाग के बड़े अधिकारी मेरे समर्थन में हैं। मुझे कोई न हटाएगा और न ही मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकता है।”

अब तक एक्शन क्यों नहीं?

इन गंभीर आरोपों और दर्ज शिकायतों के बावजूद, संजय युवराज पवार आज भी टाउन प्लानिंग विभाग में सक्रिय रूप से ड्यूटी पर हैं। यह स्थिति:

राजनीतिक संरक्षण,

प्रशासनिक पंगुता

या संगठित भ्रष्टाचार

जैसे गंभीर प्रश्नों को जन्म दे रही है।

जनता की मांग

उल्हासनगर के जागरूक नागरिकों ने राज्य सरकार, मनपा आयुक्त और जांच एजेंसियों से मांग की है कि:

आरोपों की उच्च-स्तरीय जांच की जाए,

पवार को तत्काल विभाग से हटाया जाए,

सभी TDR और निर्माण अनुमोदनों की समीक्षा की जाए।

क्या सरकार और एजेंसियां कार्रवाई करेंगी?

अब सभी की नज़र इस बात पर है कि:

क्या महाराष्ट्र सरकार नियमों का पालन करवाएगी?

क्या संजय पवार की संरक्षक राजनीतिक शक्तियों का पर्दाफाश होगा?

और क्या उल्हासनगर के विकास को निगल रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी?

यह मामला उल्हासनगर की राजनीति और प्रशासन की साख के लिए अग्निपरीक्षा बन चुका है।

उल्हासनगर महानगर पालिका में टाउन प्लानिंग विभाग पर गंभीर आरोप — जूनियर इंजीनियर संजय पवार विवादों के केंद्र में..!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग विभाग से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार पर आरोप है कि उन्होंने शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुए अवैध और अनियमित निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा स्थानीय निर्माण माफियाओं के साथ उनकी गहरी सांठगांठ रही है।

अवैध निर्माणों में भूमिका का आरोप

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि उल्हासनगर में तेजी से बढ़े अवैध निर्माणों के पीछे संजय पवार की सक्रिय भूमिका रही है। आरोप है कि:

अवैध निर्माणों को मौन सहमति,

TDR सेटिंग एवं फाइल क्लियरेंस,

और मंजूरी प्रक्रियाओं में भारी राशि की वसूली की गई।

कई एजेंसियों में शिकायतें दर्ज

सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार ने कथित रूप से अवैध आय से कई संपत्तियाँ अर्जित की हैं। इस संबंध में शिकायतें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग में दर्ज कराई गई हैं। जानकारी मिली है कि इन शिकायतों पर उच्च स्तरीय जांच प्रक्रिया जल्द प्रारंभ होने वाली है।

पुराना रिश्वत कांड फिर चर्चा में

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में UMC टाउन प्लानर मनोज तरानी और जूनियर इंजीनियर संजय पवार पर ₹50,000 की रिश्वत मांगने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था और मामला दर्ज किया गया था। यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उस कार्रवाई के बावजूद विभाग में अवैध गतिविधियाँ जारी रहीं।

नागरिकों की नाराजगी — फोन कॉल्स का जवाब नहीं

उल्हासनगर के नागरिकों ने आरोप लगाया है कि संजय पवार जनता की कॉल्स का जवाब नहीं देते, जिससे जनसुविधा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का प्रश्न है: "यदि शहर में कोई आपात स्थिति या गंभीर दुर्घटना हो जाए, तब भी क्या वह फोन नहीं उठाएँगे?"

तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

नागरिकों ने उल्हासनगर महानगरपालिका के आयुक्त से तुरंत हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार रोका जा सके और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित हो।












गरीब मरीजों का बुरा हाल: उल्हासनगर-3 सेंट्रल हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी ठप, अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज के डीन पर लापरवाही का आरोप।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इस कॉलेज को ग्रामीण हॉस्पिटल बदलापूर, छाया हॉस्पिटल अंबरनाथ, सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 और गवर्नमेंट मैटरनिटी होम उल्हासनगर-4 का प्रशासनिक चार्ज अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज के डीन को दिया गया है।

लेकिन इसके बावजूद गरीब मरीजों को आवश्यक उपचार और सर्जरी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

सर्जरी बंद — मरीजों को किया जा रहा है जबरन ट्रांसफर

पिछले तीन महीनों से सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 में जनरल सर्जरी पूरी तरह बंद है।

यह आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज के डीन द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टरों को भेजने से लगातार इंकार किया जा रहा है, जिसके कारण गरीब मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

डीन की निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर प्रश्न

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दायित्व है कि:

स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को संबद्ध सरकारी अस्पतालों में भेजा जाए

छोटी-बड़ी सभी सर्जरी वहीं पर की जाएं

गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले

लेकिन इन अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर भेजे जा रहे हैं, और न ही सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है।

समाजसेवक हिरो राजाई की चेतावनी

समाजसेवक हिरो राजाई ने कहा है कि यदि अंबरनाथ मेडिकल कॉलेज की ओर से तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात नहीं किए गए, तथा बदलापूर, अंबरनाथ, उल्हासनगर-3 और 4 के सरकारी अस्पतालों में सभी सर्जरी शुरू नहीं की गईं,

तो वे सेंट्रल हॉस्पिटल के गेट पर भूख हड़ताल करने को बाध्य होंगे।

> “गरीब मरीजों का इलाज रुकना बहुत बड़ा अपराध है। सरकारी सुविधाएँ जनता के लिए हैं, न कि फाइलों में बंद रखने के लिए।”

— हिरो राजाई, समाजसेवक

जनता की मांग

✔ तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती

✔ सभी प्रकार की सर्जरी तत्काल शुरू

✔ गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ












TDR-14 रद्द प्रकरण: उल्हासनगर में सभी निर्माण अनुमति आदेश स्थगित, नगररचना विभाग की लापरवाही उजागर।


 







उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका के नगररचना विभाग द्वारा 14 नंबर TDR (Transfer of Development Rights) रद्द किए जाने के बाद क्षेत्र में जारी सभी निर्माण अनुमति आदेशों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय कानूनी व प्रशासनिक स्पष्टता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

लेकिन इसी प्रकरण में नगररचना विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जारी किए गए स्थगन पत्रों में —

❌ न तो निर्माण अनुमति संख्या का उल्लेख है

❌ और न ही संबंधित निर्माण स्थलों का पूर्ण पता दर्ज है

इसके कारण निर्माणकर्ताओं, परियोजना धारकों, नागरिकों और संबंधित विभागों के बीच भारी अस्पष्टता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

🟥 प्रमुख मुद्दे

• TDR-14 रद्द होने के बाद सभी निर्माण अनुमति आदेशों को नगररचना विभाग ने रोक दिया

• लेकिन जारी स्थगन पत्रों में प्राथमिक जानकारी का अभाव

• अनुमति क्रमांक और साइट पता न होने से कानूनी विवाद की आशंका

• बिल्डरों और परियोजना धारकों द्वारा विभाग की निष्क्रियता पर सवाल

• भविष्य में कोर्ट केस और प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना

📌 विशेषज्ञों की राय

नगर विकास विशेषज्ञों का कहना है कि बिना निर्माण आदेश नंबर और बिना साइट पता के जारी किया गया स्थगन पत्र कानूनी रूप से अधूरा माना जाएगा और यह आगे चलकर तकरार और न्यायालयीन विवाद को जन्म दे सकता है।

📍 स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रिया

नागरिकों का कहना है कि नगररचना विभाग की इस तरह की लापरवाही बार-बार उजागर होती है, जिसके कारण शहर की विकास प्रक्रिया लगातार बाधित हो रही है।

निष्कर्ष

महानगरपालिका प्रशासन को इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए —

🔹 सभी स्थगन पत्रों में आवश्यक विवरण जोड़कर पुनः जारी करना चाहिए

🔹 जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए

उल्हासनगर के विकास से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर आगे भी नजर बनाए रखी जाएगी।