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आम जनता पर सख्ती, सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर नरमी? उल्हासनगर मनपा पर उठे सवाल


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के टैक्स बिल तेजी से अपडेट किए जा रहे हैं, लेकिन प्रसिद्ध सेंचुरी रेयान कंपनी के मामले में अब तक कोई स्पष्ट अपडेट सामने नहीं आने से गंभीर संदेह पैदा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सेंचुरी रेयान कंपनी पर बकाया टैक्स की रकम को लेकर महानगरपालिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड और बिल अपडेट करने की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब आम जनता से टैक्स वसूली के लिए महानगरपालिका सख्ती दिखाती है, तब बड़े उद्योग समूहों के मामले में नरमी क्यों बरती जा रही है? इस दोहरे रवैये को लेकर अब टैक्स विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में महानगरपालिका के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि करोड़ों रुपये के संभावित टैक्स बकाया को लेकर फाइलों को दबाने और प्रक्रिया को धीमा करने का खेल चल रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नागरिकों की ओर से उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को इस पूरे प्रकरण की बड़ी स्तर पर स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर सेंचुरी रेयान कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड अब तक अपडेट क्यों नहीं किए गए और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है।

यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह मुद्दा शहर की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा विवाद बन सकता है।














उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद, जांच और कार्रवाई की मांग तेज।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अस्पताल परिसर के हिरणी कक्ष, नवनाथ मंदिर तथा अपघात (दुर्घटना) विभाग के पास स्थित करीब 6 से 8 बड़े पेड़ों को काट दिया गया और बाद में लकड़ी को बेच भी दिया गया।

मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेड़ों की कटाई बिना आवश्यक अनुमति के की गई। पर्यावरण नियमों के अनुसार बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध माना जाता है। आरोप यह भी है कि पेड़ काटने के बाद अस्पताल से जुड़े एक जूनियर क्लर्क द्वारा लकड़ी को बेचने का काम किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील परिसर में इस प्रकार पेड़ों की कटाई बेहद गंभीर विषय है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

साथ ही Central Hospital Ulhasnagar के सिविल सर्जन समेत संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं, तो यह केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने शहर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।














उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” मामला: नाम बदलकर युवती से शादी करने का आरोप, धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना का दावा।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में कथित “लव जिहाद” का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक हिंदू युवती ने आरोप लगाया है कि एक मुस्लिम युवक ने अपनी असली पहचान छिपाकर खुद को “विजय” बताकर उससे प्रेम संबंध बनाए और बाद में शादी कर ली। पीड़िता का कहना है कि शादी के बाद उसे आरोपी की वास्तविक पहचान का पता चला, जिसके बाद उसके साथ मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना शुरू हो गई।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी युवक उसे अपने साथ बिहार ले गया, जहां उस पर मुस्लिम रीति-रिवाज अपनाने का लगातार दबाव बनाया गया। युवती ने आरोप लगाया कि उसे जबरन बुर्का और हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं, उस पर गोमांस खाने का दबाव भी डाला गया। पीड़िता का यह भी दावा है कि आरोपी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करता था, जिससे उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।

इस पूरे मामले को लेकर पीड़िता ने Ulhasnagar Central Police Station में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी इमरान शेख, उसके दो भाइयों तथा माता-पिता के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमरान शेख और उसके दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को आज अदालत में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, आरोपी के माता-पिता की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। पीड़िता के आरोपों, शादी से जुड़े दस्तावेजों, पहचान छिपाने के दावों और कथित धार्मिक दबाव से संबंधित सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।














उल्हासनगर-5 का जींस मार्केट फिर संदेह के घेरे में, हवाला और चेक डिस्काउंटिंग से भारत सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका।

(फाइल इमेज) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित प्रसिद्ध जींस मार्केट एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में आ गया है। बाजार में बड़े पैमाने पर हवाला कारोबार, चेक डिस्काउंटिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं के जरिए भारत सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, जीएसटी विभाग तथा अन्य संबंधित केंद्रीय एजेंसियों में शिकायतें दर्ज कराए जाने की तैयारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि जींस और डेनिम कपड़ा व्यापार से जुड़े कुछ कारोबारी लंबे समय से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में शामिल हैं। आरोप है कि नकद रकम को हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर किया जा रहा है, जबकि चेक डिस्काउंटिंग के जरिए बड़ी मात्रा में अनधिकृत आर्थिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि कई कारोबारियों द्वारा फर्जी बिलिंग, नकली खरीद-बिक्री के दस्तावेज और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। यदि प्रारंभिक स्तर पर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यापारियों और उनके सहयोगियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

जानकारी के मुताबिक, कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों ने भी इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए विस्तृत दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े सबूत संबंधित विभागों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ बड़े नाम सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।

वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि हवाला और चेक डिस्काउंटिंग जैसे कारोबार बिना निगरानी के चलते रहे, तो इससे न केवल सरकारी राजस्व प्रभावित होता है बल्कि वैध व्यापारिक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे मामलों में केंद्रीय एजेंसियां आमतौर पर बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न और नकद लेन-देन की विस्तृत जांच करती हैं।

फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बाजार में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वहीं व्यापारिक क्षेत्र में भी संभावित जांच और कार्रवाई को लेकर हलचल देखी जा रही है।















उल्हासनगर-5 जींस मार्केट के डेनिम रोल कपड़ा व्यापारियों पर टैक्स गड़बड़ी के गंभीर आरोप, हवाला और चेक डिस्काउंटिंग के माध्यम से भारत सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान पहुंचाने की आशंका, जल्द बड़ी कार्रवाई संभव।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित प्रसिद्ध जींस मार्केट एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। डेनिम जींस रोल कपड़ा कारोबार से जुड़े कुछ व्यापारियों पर भारत सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी और इनकम टैक्स नियमों में कथित हेराफेरी कर बड़े स्तर पर टैक्स चोरी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक, उल्हासनगर-5 के कुछ कपड़ा व्यापारी राजस्थान के भीलवाड़ा, गुजरात के अहमदाबाद तथा महाराष्ट्र के इचलकरंजी की विभिन्न टेक्सटाइल मिलों से 5 प्रतिशत जीएसटी के पक्के बिल पर डेनिम कपड़ा खरीदते हैं। इसके बाद यही माल स्थानीय जींस मार्केट में 2.5 प्रतिशत जीएसटी के कच्चे बिलों के माध्यम से बेचा जाता है।

आरोप है कि शेष 2.5 प्रतिशत राशि हवाला कारोबार और चेक डिस्काउंटिंग के जरिए समायोजित की जाती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को मिलने वाले टैक्स में भारी कमी लाई जा रही है, जिससे केंद्र सरकार के राजस्व को बड़ा नुकसान हो रहा है।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में हवाला कारोबारियों, चेक डिस्काउंटिंग एजेंटों और कुछ अन्य आर्थिक माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित विभागों — जीएसटी, इनकम टैक्स और आर्थिक अपराध शाखा — को जल्द ही विस्तृत शिकायत सौंपी जा सकती है, जिसमें कई कारोबारियों और संबंधित लोगों के नाम भी शामिल होने की संभावना है।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, उल्हासनगर-5 जींस मार्केट में लंबे समय से टैक्स चोरी और बिना उचित दस्तावेजों के कारोबार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि अब मामला बड़े स्तर पर सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल जीएसटी चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हवाला लेन-देन, फर्जी बिलिंग, टैक्स चोरी और मनी ट्रेल जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों के दायरे में भी आ सकता है। ऐसे में संबंधित कारोबारियों पर कड़ी कार्रवाई होने की संभावना से बाजार में हड़कंप का माहौल बताया जा रहा है।














उल्हासनगर-4 स्थित “कुमार मटन” होटल के फ्राइड राइस में लोहे की कील मिलने की शिकायत, ग्राहक ने जताया विरोध।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-4 के विनस चौक स्थित प्रसिद्ध “कुमार मटन” होटल से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। होटल से मंगाए गए फ्राइड राइस में कथित रूप से लोहे की कील मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने होटलों और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता तथा गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, एक ग्राहक ने होटल से फ्राइड राइस ऑर्डर किया था। खाना खाते समय अचानक उसे भोजन के भीतर लोहे की कील दिखाई दी। यह देखकर ग्राहक हैरान रह गया और उसने तुरंत इस मामले पर नाराजगी जताई। ग्राहक का कहना है कि यदि यह कील गलती से निगल ली जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था और किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

घटना की जानकारी सामने आते ही स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल बन गया। नागरिकों ने होटल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि खाने जैसी संवेदनशील चीजों में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। लोगों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट में नियमित जांच और स्वच्छता मानकों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की गंभीर जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि घटना से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल मामले को लेकर होटल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं नागरिकों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।















मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने पासपोर्ट रिन्यूअल से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और नागरिक अधिकारों को मजबूत करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी आपराधिक मामले के लंबित होने भर से किसी व्यक्ति के पासपोर्ट के नवीनीकरण (Passport Renewal) पर स्वतः रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक के यात्रा करने और आजीविका कमाने के अधिकार को केवल तकनीकी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

29 अप्रैल को दिए गए अपने आदेश में हाई कोर्ट ने उन परिस्थितियों पर गंभीर चिंता जताई, जिनमें आवेदकों को पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए आपराधिक अदालतों से “नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट” (NOC) लेने के लिए मजबूर किया जाता है। अदालत ने कहा कि कई मामलों में न तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ समन जारी हुआ होता है और न ही अदालत द्वारा मामले पर औपचारिक संज्ञान लिया गया होता है, इसके बावजूद NOC की शर्त लगाना नागरिकों के लिए अनावश्यक देरी और परेशानी का कारण बनता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हों। अदालत के अनुसार, केवल लंबित जांच या प्रारंभिक स्तर के मामलों के आधार पर पासपोर्ट रिन्यूअल रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई स्पष्ट न्यायिक आदेश मौजूद न हो।

इस फैसले को उन हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर आपराधिक मामले लंबित हैं और जिन्हें नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा या अन्य कारणों से विदेश यात्रा करनी पड़ती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में पासपोर्ट अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकता है।