सियासत
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
महाराष्ट्र में प्रतिबंध के बावजूद उल्हासनगर शहर में अवैध गुटखे का कारोबार कथित रूप से आज भी धड़ल्ले से जारी है। शहर के विभिन्न इलाकों में चोरी-छिपे गुटखा और सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंधित उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और इससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उल्हासनगर के कुछ संदिग्ध कारोबारी भी विभाग की निगरानी में बताए जा रहे हैं। विभाग द्वारा ऐसे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है, जो प्रतिबंधित गुटखे के भंडारण, परिवहन और वितरण में कथित रूप से शामिल हो सकते हैं।
जानकारों का कहना है कि अवैध गुटखे का कारोबार संगठित तरीके से संचालित किया जाता है, जिसमें सप्लाई चेन, गोदाम और वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध गुटखे के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शहर के प्रमुख बाजारों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर नियमित छापेमारी कर इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जाए।
हालांकि, इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से उल्हासनगर के किसी विशेष कारोबारी के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई या नाम की पुष्टि नहीं की गई है। यदि विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, तो इससे अवैध गुटखा कारोबार पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।यदि यह खबर प्रकाशन के लिए है, तो इसे उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों या पुष्टि किए गए तथ्यों के अनुसार और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।
Direct Email Contacts:
Food Complaints: jc-foodhq@gov.inDrug
Complaints: jchq.fda-mah@nic.in or Hqfdadesk13@gmail
comVigilance: pavigilancefda@gmail.com
Mumbai FDA Office Contact Numbers: 022-26590548 or 022-2612265
Maharashtra State FDA, call the toll-free helpdesk number at 1800 222 365.
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर शहर के विभिन्न श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के नाम पर कथित अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने धर्मादाय आयुक्त, ठाणे विभाग तथा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शहर के चार पंजीकृत श्मशान घाट ट्रस्टों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिवारों से कथित रूप से अनुचित एवं अवैध तरीके से राशि वसूली जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
इन चार ट्रस्टों पर उठे सवाल
शिकायत पत्र के अनुसार धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत निम्नलिखित ट्रस्ट वर्तमान में शहर के विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कर रहे हैं—
प्रबंधक श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-1)
श्मशान घाट स्वर्गधाम आश्रम (उल्हासनगर-3)
प्रबंधक मुक्तिधाम सामाजिक संस्था (उल्हासनगर-4)
प्रबंधक स्वर्गद्वार श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-5)
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन सभी ट्रस्टों के संचालन और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मुफ्त लकड़ी उपलब्ध होने के बावजूद परिजनों से वसूली का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि उल्हासनगर महानगरपालिका अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी नि:शुल्क उपलब्ध कराती है तथा इसकी विधिवत रसीद भी संबंधित श्मशान घाटों के माध्यम से मृतकों के परिजनों को दी जाती है।
इसके बावजूद आरोप है कि श्मशान घाट संचालित करने वाले ट्रस्ट अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों से रसीद बुक के माध्यम से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये अथवा उससे अधिक राशि की मांग करते हैं। शिकायतकर्ता ने इसे अवैध वसूली करार देते हुए सवाल उठाया है कि जब आवश्यक सामग्री पहले से ही महानगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, तब अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है।
उन्होंने मांग की है कि ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि यह धन किस उद्देश्य और किस मद में खर्च किया गया।
ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों द्वारा धर्मादाय विभाग में प्रस्तुत की गई ऑडिट रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी तो धर्मादाय विभाग ने उसे स्वीकार कैसे किया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अधूरी अथवा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले ट्रस्टों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई।
उन्होंने मांग की है कि सभी ट्रस्टों की ऑडिट रिपोर्ट, आय-व्यय का पूरा विवरण तथा वित्तीय अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं ताकि नागरिकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
महानगरपालिका और ट्रस्टों के अनुबंध पर भी उठे सवाल
शिकायत में महानगरपालिका और संबंधित ट्रस्टों के बीच हुए अनुबंध को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि इन ट्रस्टों को श्मशान घाट संचालन का अधिकार किन शर्तों पर दिया गया, अनुबंध की अवधि कितनी है, वित्तीय जिम्मेदारियां क्या हैं तथा महानगरपालिका द्वारा इनकी निगरानी किस प्रकार की जाती है।
आरोप लगाया गया है कि धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने भी इस संबंध में महानगरपालिका से कोई स्पष्ट जानकारी या स्पष्टीकरण प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया।
तीन से चार महीने से केवल जांच का आश्वासन
शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले तीन से चार महीनों से संबंधित विभागों द्वारा केवल जांच का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद उन्हें जांच की प्रगति अथवा विभागीय कार्रवाई की कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तथा जांच की लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद यदि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था या अन्य स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और विभागों की होगी।
इन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिलाध्यक्ष स्वप्निल पाटिल, उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अब यह पूरा मामला धर्मादाय आयुक्त कार्यालय और उल्हासनगर महानगरपालिका की आगामी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे श्मशान घाटों के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता और नागरिकों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा।
नई दिल्ली | दिनेश मीरचंदानी
देश के प्रख्यात समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सोनम वांगचुक के जारी अनशन को लेकर लोकशाही रक्षक फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल संवेदनशील एवं सकारात्मक हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस विषय को केवल एक आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, उत्तरदायी शासन और नागरिकों के विश्वास से जुड़े राष्ट्रीय महत्व के विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।
डॉ. घाडगे ने कहा कि देश ने फिल्म '3 इडियट्स' के लोकप्रिय किरदार 'रैंचो' के माध्यम से सोनम वांगचुक के व्यक्तित्व, विचारों और शिक्षा सुधार के प्रति उनके समर्पण को सराहा तथा उन्हें प्रेरणा का स्रोत माना। आज वही व्यक्तित्व शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और राष्ट्रीय हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहा है। ऐसे में उनके अनशन की उपेक्षा करना किसी भी सशक्त लोकतंत्र के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्ता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारस्परिक विश्वास में निहित होती है। मतभेद किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन जब संवाद के रास्ते बंद हो जाएं और किसी जागरूक नागरिक को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए अनशन जैसा कठोर कदम उठाना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन जाता है।
डॉ. घाडगे ने कहा कि लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नागरिकों की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना है। सरकार और समाज—दोनों का दायित्व है कि वे संवेदनशीलता, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जनविश्वास को और मजबूत करें।
उन्होंने भारत सरकार से विनम्र किंतु दृढ़ आग्रह किया कि वह तत्काल पहल करते हुए सोनम वांगचुक के साथ सम्मानजनक, सकारात्मक और सार्थक संवाद स्थापित करे तथा उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए ऐसा सर्वमान्य समाधान निकाले, जिससे उनका अनशन सम्मानपूर्वक समाप्त हो और लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।
डॉ. घाडगे ने कहा कि एक सशक्त भारत केवल आर्थिक विकास से नहीं बनता, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व, लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और प्रत्येक जागरूक नागरिक के विश्वास पर खड़ा होता है। इसी विश्वास की रक्षा करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति और सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर डॉ. घाडगे ने देश में छात्र आंदोलनों की घटती सक्रियता पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत में आज भी श्रमिक संगठनों की आवाज विभिन्न मंचों पर सुनाई देती है, किंतु एक समय सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक जागरण का नेतृत्व करने वाले छात्र संगठन आज अपेक्षित रूप से सक्रिय दिखाई नहीं देते। यह स्थिति लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के महत्वपूर्ण प्रश्नों से स्वयं को दूर कर लेते हैं, तब लोकतांत्रिक जवाबदेही भी कमजोर होने लगती है। एक जागरूक छात्र समाज ही एक जवाबदेह शासन की सबसे मजबूत नींव होता है। इसलिए युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय, जागरूक, शांतिपूर्ण और संविधानसम्मत भागीदारी लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अपने संदेश के अंत में डॉ. घाडगे ने देश के विद्यार्थियों और युवाओं से भावनात्मक आह्वान करते हुए कहा:
"विद्यार्थियों, जागिए। प्रश्न पूछिए, संवाद कीजिए, संविधान के मूल्यों को आत्मसात कीजिए और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाइए। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों और सक्रिय विद्यार्थियों से जीवंत रहता है। आज का जागरूक छात्र ही कल के सशक्त, उत्तरदायी और संवेदनशील भारत का निर्माता होगा।"
उन्होंने अंत में देशवासियों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद, संवेदनशीलता और नागरिक सहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण सरकार और नागरिकों की समान भागीदारी से ही संभव है, और यही भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
मुंबई: दिनेश मीरचंदानी
महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय व्यवस्थेत प्रामाणिकपणा, धाडसी निर्णयक्षमता आणि जनहिताला सर्वोच्च प्राधान्य देणाऱ्या अधिकाऱ्यांमध्ये IRS अधिकारी समीर वानखेडे आणि IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे यांची नावे विशेष आदराने घेतली जातात. आपल्या कर्तव्यनिष्ठ, निर्भीड आणि परिणामकारक कार्यपद्धतीमुळे या दोन्ही अधिकाऱ्यांनी राज्यातील प्रशासनाला वेगळी ओळख निर्माण करून दिली आहे.
IRS अधिकारी समीर वानखेडे यांनी अमली पदार्थांच्या अवैध तस्करीविरोधात कायद्याची कठोर अंमलबजावणी करत अनेक मोठ्या कारवायांद्वारे समाजहिताचे रक्षण करण्याचा प्रयत्न केला. कायद्यापुढे कोणताही व्यक्ती मोठा नसल्याचा संदेश देत त्यांनी आपल्या कार्यशैलीमुळे देशभरात वेगळी ओळख निर्माण केली.
दुसरीकडे, IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे, सध्या महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (FDA) विभागात कार्यरत असून, अन्नभेसळ, बनावट औषधे आणि सार्वजनिक आरोग्याशी संबंधित नियमांची कठोर अंमलबजावणी करण्यासाठी ओळखले जातात. नागरिकांना सुरक्षित व दर्जेदार अन्न आणि औषधे उपलब्ध व्हावीत, यासाठी त्यांनी अनेक ठोस निर्णय घेतले असून राज्यभरात प्रभावी मोहिमा राबवल्या आहेत.
प्रशासनातील पारदर्शकता, निष्पक्ष निर्णयप्रक्रिया आणि जनहितासाठीची अविरत बांधिलकी हीच राज्याच्या प्रगतीची खरी ताकद असल्याचे या दोन्ही अधिकाऱ्यांच्या कार्यातून अधोरेखित होते. त्यांच्या धाडसी आणि लोकाभिमुख निर्णयांमुळे शासनाविषयीचा जनतेचा विश्वास अधिक दृढ होत असल्याचे मत विविध स्तरांतून व्यक्त केले जात आहे.
"कर्तव्य प्रथम, जनहित सर्वोच्च" या मूल्यांचा अंगीकार करून कार्य करणारे अधिकारी हेच सक्षम, सुरक्षित आणि प्रगत महाराष्ट्राच्या उभारणीचे भक्कम आधारस्तंभ असल्याचे नागरिकांमध्ये बोलले जात आहे.
कल्याण: दिनेश मीरचंदानी
मुरबाड विधानसभा क्षेत्र के विधायक किशन कथोरे ने कल्याण में स्वतंत्र क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (Regional Passport Office-RPO) स्थापित करने की मांग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से पहल करने का आग्रह किया है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर कल्याण में जल्द से जल्द क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शुरू करने की मांग की है।
विधायक कथोरे ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान में ठाणे, रायगढ़, पालघर सहित आसपास के कई जिलों के नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाओं के लिए मुंबई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। लगातार बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विकास और विदेश यात्रा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कल्याण में स्वतंत्र क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना अब समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।
उन्होंने बताया कि यदि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय स्थापित किया जाता है तो कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, अंबरनाथ, बदलापुर, मुरबाड, शाहापुर, नेरळ और कर्जत सहित विस्तृत क्षेत्र के नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इन शहरों और तालुकों की संयुक्त आबादी 40 से 45 लाख से अधिक है। शिक्षा, रोजगार, उद्योग, व्यापार, पर्यटन तथा चिकित्सा उपचार के लिए विदेश जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे पासपोर्ट की मांग भी तेजी से बढ़ी है।
पासपोर्ट कार्य के लिए मुंबई-ठाणे जाना बनता है परेशानी का कारण
वर्तमान व्यवस्था के तहत क्षेत्र के लोगों को पासपोर्ट आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और अन्य संबंधित कार्यों के लिए ठाणे अथवा मुंबई जाना पड़ता है। इससे नागरिकों का समय और धन दोनों खर्च होते हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, विद्यार्थियों, दिव्यांगजनों, नौकरीपेशा लोगों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को लंबी दूरी तय करने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से होंगे कई बड़े लाभ
विधायक किशन कथोरे ने कहा कि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शुरू होने से लाखों नागरिकों को अनेक सुविधाएं मिलेंगी। इससे नागरिकों का समय और यात्रा खर्च बचेगा, पासपोर्ट आवेदनों का तेजी से निपटारा होगा तथा विद्यार्थियों, उद्यमियों, व्यवसायियों और विदेश में रोजगार के इच्छुक युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि नया कार्यालय शुरू होने से मुंबई और ठाणे स्थित मौजूदा पासपोर्ट कार्यालयों पर बढ़ता कार्यभार कम होगा। साथ ही बढ़ती आबादी को बेहतर, आधुनिक और आसानी से उपलब्ध सरकारी सेवाएं मिल सकेंगी। भविष्य में विकसित हो रहे कल्याण महानगर क्षेत्र की प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
सरकार से शीघ्र मंजूरी देने की अपील
विधायक किशन कथोरे ने केंद्र और राज्य सरकार से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कल्याण में जल्द से जल्द क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को मंजूरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह निर्णय ठाणे, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लाखों नागरिकों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा तथा सरकार की नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
इस मांग का समर्थन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के कोंकण विभाग के आईटी सेल संयोजक एवं ठाणे ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष मिलिंद धारवाडकर ने विश्वास व्यक्त किया कि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना से क्षेत्र के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और सरकारी सेवाओं की पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगी।
Advertisement
Most Reading
-
ट्रेनी IAS अफसर रही पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली कोर्ट ने खारिज कर दी है। पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार 1 अगस्त को दिल्ली पुलि...
-
राज्य सरकारें अब अनुसूचित जाति, यानी SC के रिजर्वेशन में कोटे में कोटा दे सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अगस्त) को इस बारे में बड़ा फैस...
-
महाराष्ट्र : दिनेश मीरचंदानी महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है, जैसा कि सूत्रों से पता चला है कि आयुष्मान भारत मिशन महाराष्...
-
मुंबई. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे मंगलवार को अपनी पत्नी रश्मी और विधायक पुत्र आदित्य ठाक...
-
अमेजन इंडिया के कंट्री हेड मनीष तिवारी ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के स्पोक्सपर्सन ने मनीष के इस्तीफे की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताब...

















