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उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में स्टाफ की कमी से कामकाज प्रभावित, व्यवस्था पर उठे सवाल।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित होने की चर्चा सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों और संबंधित कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग में लंबे समय से स्टाफ की कमी बनी हुई है। आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता नहीं होने के कारण कार्यालयीन कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कई मामलों में फाइलों और दस्तावेजों से संबंधित कार्यों के साथ-साथ अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बैठाने की चर्चा

वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कुछ सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बुलाकर बैठाया गया है और उनसे कार्यालयीन कार्यों से संबंधित जिम्मेदारियां लिए जाने की चर्चा है। इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और इसे नियमों के अनुरूप है या नहीं, इस पर स्पष्टता की मांग की जा रही है। 

हालांकि, सेवानिवृत्त शिक्षकों को कार्यालय में बैठाने और उनसे किसी प्रकार का कार्य लिए जाने संबंधी दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग

उल्हासनगर की जनता ने महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों से जुड़े कार्य समय पर पूरे हो सकें।

जनता की मांग है कि शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार स्टाफ की नियुक्ति या उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और यदि नियमों के विपरीत किसी प्रकार की व्यवस्था की गई है तो उसकी भी जांच की जाए।

उल्हासनगर महानगरपालिका के शिक्षा विभाग में एक अलग ही स्थिति सामने आने की चर्चा है। जानकारी के मुताबिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी कार्यालय में काम कर रहे हैं, जबकि स्कूलों में नियुक्त शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय कार्यालयीन कार्यों में लगाए जा रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि शिक्षकों को कार्यालय में काम करने के लिए कोई लिखित आदेश भी जारी नहीं किया गया है। ऐसे में बिना लिखित आदेश शिक्षकों से कार्यालयीन काम करवाए जाने को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

अब देखना होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन और आयुक्त मनीषा आव्हाले इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।















🚩 शिवसेना संगठन को और मजबूत करने के उद्देश्य से नगरसेवकों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसी शिविर में शामिल होने के लिए उल्हासनगर के शिवसेना नगरसेवक कलानी महल से रवाना हुए।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने तथा जनसेवा को प्रभावी बनाने की दिशा में पार्टी की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे के आदेश एवं सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के मार्गदर्शन में उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवकों के लिए रामभाऊ म्हालगी प्रशिक्षण प्रबोधिनी, उत्तन (भाईंदर) में विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है।

9 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रशिक्षण शिविर के लिए आज कलानी महल से नगरसेवकों ने प्रस्थान किया। शिविर का उद्घाटन सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के शुभहस्ते किया जाएगा, जबकि 11 अगस्त को शाम 5 बजे होने वाले समापन कार्यक्रम में मंत्री श्री संजय शिरसाट उपस्थित रहेंगे।

प्रशिक्षण शिविर के दौरान नगरसेवकों को संगठनात्मक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधि के दायित्व और प्रभावी जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण शिवसेना के नगरसेवकों को भविष्य में बेहतर तरीके से जनता के बीच काम करने और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर शिवसेना नेता कमलेश निकम ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन के माध्यम से जनसेवा को और प्रभावी बनाया जा सकता है तथा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

यह प्रशिक्षण शिविर विशेष रूप से नगरसेवकों के लिए आयोजित किया गया है और सभी नगरसेवकों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है।

इस आयोजन में आनंद परांजपे, संगठन प्रमुख महाराष्ट्र राज्य, तथा गोपाल लांडगे, जिलाप्रमुख कल्याण सहित संगठन के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

शिवसेना की ओर से संगठनात्मक क्षमता बढ़ाने, जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने और जमीनी स्तर पर जनसेवा को और प्रभावी बनाने की दिशा में इस प्रशिक्षण शिविर को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण शिविर के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कार्यसम्राट सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के कुशल नेतृत्व में शिवसेना संगठन को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिवसेना पूरे महाराष्ट्र में नंबर वन पार्टी के रूप में उभरेगी।


















बांद्रा में फिर समीर वानखेडे!14 अगस्त को गेटी-गैलेक्सी के बाहर ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल होंगे।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

ड्रग्स और नशे के खिलाफ युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार की ओर से 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में ‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में होने वाले इस अभियान में पूर्व NCB अधिकारी समीर वानखेडे भी शामिल होंगे।

कार्यक्रम का आयोजन 14 अगस्त की सुबह 10:30 बजे बांद्रा स्थित गेटी-गैलेक्सी सिनेमा के बाहर किया जाएगा। अभियान में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की बढ़ती समस्या के प्रति जागरूक करना और उन्हें ड्रग्स से दूर रहने का संदेश देना है।

बांद्रा और समीर वानखेडे का पुराना कनेक्शन

समीर वानखेडे की बांद्रा में मौजूदगी इसलिए भी चर्चा का विषय बन रही है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले के दौरान वानखेडे राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे। उस मामले की जांच और उससे जुड़ी कार्रवाई को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिली थी।

अब कई वर्षों बाद उसी बांद्रा इलाके में ड्रग्स के खिलाफ आयोजित एक बड़े जनजागरूकता अभियान में वानखेडे की मौजूदगी एक बार फिर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने पर रहेगा जोर

‘भव्य नशामुक्ति अभियान’ के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं को ड्रग्स के स्वास्थ्य, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान के जरिए युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील किए जाने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी को देखते हुए इसे युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

14 अगस्त पर टिकी नजरें

समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक और मीडिया स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य नशामुक्ति और जनजागरूकता है और फिलहाल किसी नए विवाद या कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

ऐसे में 14 अगस्त को बांद्रा के गेटी-गैलेक्सी के बाहर होने वाला यह अभियान युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता के साथ-साथ समीर वानखेडे की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में रहने की संभावना है।















उल्हासनगर की सियासत में AKK की तिकड़ी का बढ़ता दबदबा, अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह की जोड़ी की शहरभर में चर्चा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की स्थानीय राजनीति में इन दिनों AKK की तिकड़ी—अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। महानगरपालिका की सत्ता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में इस तिकड़ी की बढ़ती सक्रियता को लेकर शहर में तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह के बीच बढ़ता राजनीतिक तालमेल उल्हासनगर की राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है। यही वजह है कि इन तीनों नेताओं की गतिविधियों और उनके बीच दिखाई देने वाली नजदीकियों पर राजनीतिक जानकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।

महानगरपालिका की सत्ता में प्रभाव को लेकर चर्चा

उल्हासनगर महानगरपालिका की सत्ता से जुड़े विभिन्न राजनीतिक फैसलों और गतिविधियों के बीच AKK की तिकड़ी के प्रभाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। शहर की स्थानीय राजनीति में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण महानगरपालिका की सत्ता और संगठनात्मक स्तर पर किस तरह की भूमिका निभाता है।

डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी माने जाने की चर्चा

राजनीतिक हलकों में अरुण आशान, कमलेश निकम और कलवंत सिंह को शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के करीबी नेताओं में भी माना जाता है। इसी राजनीतिक नजदीकी के चलते उल्हासनगर में AKK की तिकड़ी को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है।

हालांकि, इस तिकड़ी की राजनीतिक भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर अभी कई बातें राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित हैं। आने वाले दिनों में इनके बीच तालमेल और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का असर उल्हासनगर की राजनीति पर कितना पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल, AKK की तिकड़ी उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का नया केंद्र बन गई है और शहर के राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तक इनके नाम और राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चाएं जारी हैं।


















“15 साल बनाम 5 महीने”: विधायक कुमार ऐलानी पर बरसे शिव सेना नेता कमलेश निकम, विकास कार्यों को लेकर किया बड़ा दावा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना नेता कमलेश निकम ने उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल और शहर के विकास को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। निकम ने आरोप लगाया कि विधायक कुमार ऐलानी करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन इस लंबे कार्यकाल के बावजूद उल्हासनगर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

कमलेश निकम ने कहा कि महापौर के महज पांच महीने के कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और अन्य विकास कार्यों को लेकर महापौर की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

15 अगस्त से 30 नई बस सेवाओं का दावा

निकम ने कहा कि महापौर के प्रयासों से आगामी 15 अगस्त को उल्हासनगर शहरवासियों को 30 नई बस सेवाओं की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने इसे शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई बस सेवाएं शुरू होना आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

“ऐलानी सिर्फ एंटीलिया और साहूकारों के विधायक”

विधायक कुमार ऐलानी पर निशाना साधते हुए कमलेश निकम ने आरोप लगाया कि “कुमार ऐलानी केवल एंटीलिया इमारत और साहूकारों के विधायक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने कहा कि विधायक को शहर के आम नागरिकों, उनकी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विधानसभा में उल्हासनगर की आवाज नहीं उठाने का आरोप

निकम ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्रों में भी विधायक कुमार ऐलानी ने उल्हासनगर के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, यातायात, सार्वजनिक परिवहन, पानी, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

कमलेश निकम ने कहा कि “उल्हासनगर की जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों पर विश्वास करेगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की जनता यह तय करेगी कि कौन जनहित के मुद्दों के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति तक सीमित है।

हालांकि, निकम द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विधायक कुमार ऐलानी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।


















IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने त्रिची के प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर में किए दर्शन, विधिवत पूजा-अर्चना कर लिया भगवान शिव का आशीर्वाद।



त्रिची, तमिलनाडु: दिनेश मीरचंदानी

IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने आज तमिलनाडु के त्रिची (तिरुचिरापल्ली) स्थित प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

ऐतिहासिक रॉकफोर्ट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर त्रिची के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक महत्व और पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर में पहुंचकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए देश और समाज की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।

धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक स्थल का किया अनुभव

रॉकफोर्ट मंदिर की यात्रा के दौरान समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विशेषताओं का भी अनुभव किया। त्रिची का रॉकफोर्ट क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है तथा तमिलनाडु के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है।

समीर वानखेड़े की मंदिर यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह दौरा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। उनकी इस धार्मिक यात्रा को आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

भगवान शिव के दर्शन के साथ समीर वानखेड़े ने मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव किया।































उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।