(फाइल इमेज)
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानीउल्हासनगर-2 के सिरू चौक स्थित प्रसिद्ध जवेरी बाजार की सोनारा गली में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां बड़ी संख्या में सोने के अवैध कारखाने बिना अनुमति संचालित किए जा रहे हैं, जहां अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा विस्फोट या आगजनी जैसी घटना होने का खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोनारा गली में संचालित कई गोल्ड प्रोसेसिंग और ज्वेलरी निर्माण इकाइयों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का अवैध उपयोग किया जा रहा है। इन कारखानों में न तो फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही आपातकालीन निकास की कोई सुविधा मौजूद है। ऐसे में यह क्षेत्र किसी भी समय बड़े हादसे का केंद्र बन सकता है।
⚠️ संकरी गली में चल रहे कारखाने, बचाव कार्य होगा मुश्किल
सोनारा गली अत्यंत संकरी होने के कारण यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है, तो दमकल विभाग और राहत टीमों को मौके पर पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। आसपास घनी आबादी, दुकानों और कारखानों की मौजूदगी से खतरा कई गुना बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के कारखानों में उच्च तापमान, गैस और ज्वलनशील रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यदि गैस सिलेंडर में रिसाव या विस्फोट होता है, तो आग तेजी से फैल सकती है और बड़ा नुकसान हो सकता है।
📄 पहले भी जारी हुए थे नोटिस, लेकिन कार्रवाई शून्य
सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा इन अवैध गैस सिलेंडरों और बिना अनुमति चल रहे कारखानों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नोटिस जारी होने के बाद भी कारखाने पहले की तरह संचालित हो रहे हैं, जिससे महानगरपालिका और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
❓ उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं:
• क्या अवैध कारखानों को लेकर किसी प्रकार का लेन-देन हुआ है?
• क्या राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई रोकी गई है?
• नोटिस जारी होने के बावजूद महानगरपालिका कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
• क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
इन सवालों ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
⚡ हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा विस्फोट या आग लगने की घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी उल्हासनगर महानगरपालिका और महानगरपालिका के फायर विभाग पर तय की जानी चाहिए।
नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण हजारों लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
📢 प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
• अवैध गैस सिलेंडरों की तुरंत जांच की जाए
• बिना अनुमति चल रहे कारखानों को तुरंत सील किया जाए
• फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए
• जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए
• क्षेत्र में नियमित निरीक्षण शुरू किया जाए
⚠️ प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का विषय
फिलहाल इस गंभीर मुद्दे पर उल्हासनगर महानगरपालिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
उल्हासनगर-2 के जवेरी बाजार की सोनारा गली में बढ़ता यह खतरा अब प्रशासन की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। नागरिकों की मांग है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले प्रशासन जागे और ठोस कार्रवाई करे।

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