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‘पहले कानून, फिर प्रक्रिया’—महापौर अश्विनी निकम ने 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव पर लगाया विराम।


 


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में 7 मनोनीत (नामनिर्देशित) सदस्यों के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम ने मनोनीत सदस्यों के फॉर्म भरने सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

महापौर द्वारा 4 सितंबर 2026 को आयुक्त/महापालिका सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 31 अगस्त 2026 को विशेष महासभा की सूचना जारी कर 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 7 सितंबर को नामनिर्देशन फॉर्म भरने तथा 11 सितंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था।

हालांकि, इस मामले से संबंधित न्यायालयीन संदर्भ सामने आने के बाद महापौर ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और शासन से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की है।

‘न्यायालयीन मामला लंबित, इसलिए जल्दबाजी उचित नहीं’

अपने पत्र में महापौर निकम ने उल्लेख किया है कि उन्हें 3 सितंबर को अधिवक्ता रामचंद्र मंदाडकर तथा 4 सितंबर को अधिवक्ता विनोद वी. पाटिल द्वारा संबंधित पत्रों के माध्यम से मामले की न्यायालयीन स्थिति से अवगत कराया गया है।

महापौर ने कहा कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने अथवा नहीं बढ़ाने के संबंध में शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करना आवश्यक है। इसी कारण उन्होंने 31 अगस्त को बुलाई गई विशेष महासभा के आधार पर शुरू की गई आगे की चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है।

उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि संबंधित विषय पर सक्षम स्तर से राय एवं अभिप्राय प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया लागू की जाए। तब तक मनोनीत सदस्यों के चुनाव से संबंधित पूरी प्रक्रिया स्थगित रहेगी।

कानून और संवैधानिक व्यवस्था को प्राथमिकता

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस निर्णय को महानगरपालिका की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके निर्णय से यह संदेश गया है कि किसी भी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी एवं संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।

उनके समर्थकों का कहना है कि महापौर ने इस मामले में जल्दबाजी करने के बजाय न्यायालयीन स्थिति और शासन के मार्गदर्शन को प्राथमिकता देकर कानून की मर्यादा तथा संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उल्हासनगर महानगरपालिका में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज थी। अब शासन से मिलने वाले मार्गदर्शन और न्यायालयीन प्रक्रिया के अगले घटनाक्रम पर सभी की नजरें रहेंगी।

‘संविधान और कानून सर्वोपरि’ का संदेश

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस फैसले को उनके समर्थकों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधानवादी विचारों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की सर्वोच्चता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, उनके समर्थकों का कहना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के न्याय, प्रशासन और जनहित के आदर्शों को भी महत्व देती हैं।

हालांकि, इस निर्णय का अंतिम प्रभाव शासन के निर्देश और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे के परिणाम पर निर्भर करेगा। फिलहाल उल्हासनगर महानगरपालिका के 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की पूरी प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई है।


















बिहार के मोतिहारी में ‘नशामुक्त युवा’ पर सेमिनार, पूर्व NCB निदेशक समीर वानखेड़े ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने की।


 

मोतिहारी: दिनेश मीरचंदानी

युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और समाज में नशामुक्ति को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को मोतिहारी स्थित बापू सभागार में ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘नशामुक्त युवा’ विषय पर विशेष सेमिनार आयोजित कर युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), मुंबई जोन के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए नशे के दुष्प्रभावों, इससे उत्पन्न सामाजिक चुनौतियों और नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

समीर वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने भविष्य और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाकर ही मजबूत और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने की। उन्होंने भी युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने तथा स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।

नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर

‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है। कार्यक्रम के दौरान नशे की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान पर भी चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि युवाओं को नशे से दूर रखकर शिक्षा, रोजगार, खेल और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जाए, तो देश के विकास को नई गति मिल सकती है।

सेमिनार में युवाओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इस सामाजिक बुराई से बचाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम की जानकारी भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गुलरेज शहजाद ने दी। उन्होंने बताया कि ‘नशामुक्त युवा’ के संदेश को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने तथा नशे के खिलाफ सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।











































टी.ओ.के./शिंदे गुट में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर खींचतान, संतोष पांडे के दावे की अग्निपरीक्षा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

मनोनीत नगरसेवक पदों के चयन को लेकर उल्हासनगर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा के साथ-साथ टीम ओमी कालानी (टी.ओ.के.) और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में आने वाले मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर कालानी परिवार के साथ लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े संतोष पांडे के नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है।

संतोष पांडे को उत्तर भारतीय समाज की आवाज के रूप में देखा जाता है और बताया जाता है कि वह पिछले करीब 17 वर्षों से कालानी परिवार और संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी वर्षों की निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राजनीतिक योगदान को इस बार मनोनीत नगरसेवक पद के रूप में सम्मान मिलेगा या फिर बदलते राजनीतिक समीकरण किसी दूसरे नाम के पक्ष में जाएंगे।

चार-चार पदों के समीकरण से बदली पूरी तस्वीर

बताया जाता है कि शुरुआत में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में चार-चार मनोनीत नगरसेवक पद जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गणित तैयार किया जा रहा था। लेकिन शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े पूजा भोईर और विक्की लबाना के जाति प्रमाणपत्र से संबंधित मामले में उनके पद निरस्त होने के बाद मनोनीत नगरसेवक पदों का पूरा समीकरण बदल गया है।

इसी बदले हुए राजनीतिक गणित के बीच अब विभिन्न नामों को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई है।

 पूर्व महापौर पंचम कालानी ओर संतोष पांडे के नाम चर्चा में?

सूत्रों के हवाले से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि संतोष पांडे या पूर्व महापौर पंचम कालानी सूत्रों के अनुसार मनोनीत नगरसेवक बनाने की पंचम कालानी की तैयारी रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।

यदि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया जाता है, तो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और कालानी समर्थक खेमे के भीतर राजनीतिक असंतोष पैदा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। खासकर 17 वर्षों से संगठन के लिए सक्रिय रहे संतोष पांडे के समर्थक इस निर्णय को किस रूप में लेते हैं, यह भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार

दूसरी ओर भाजपा के कोटे से मनोनीत नगरसेवक पद के लिए भी कई नामों को लेकर जोरदार लॉबिंग की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार धनंजय बोड़ारे, हेमा पिंजानी, मनु खेमचंदानी और प्रदीप रामचंदानी और प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं।

इन प्रमुख नामों के अलावा करीब 20 भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मनोनीत नगरसेवक पद के लिए अपनी इच्छा शीर्ष नेतृत्व के समक्ष व्यक्त की है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने भी अंतिम नाम तय करना आसान नहीं माना जा रहा है।

11 सितंबर पर टिकी सभी की निगाहें

अब इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन 11 सितंबर माना जा रहा है। इसी दिन होने वाले चयन से स्पष्ट होगा कि भाजपा अपने संभावित दावेदारों में से किसे अवसर देती है और टी.ओ.के./शिवसेना शिंदे गुट संतोष पांडे की करीब 17 वर्षों की राजनीतिक निष्ठा एवं संगठनात्मक योगदान को सम्मान देता है या फिर बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते किसी अन्य नाम पर मुहर लगती है।

मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार निष्ठा और संगठनात्मक योगदान की जीत होगी या राजनीतिक समीकरण भारी पड़ेंगे?

11 सितंबर को होने वाला फैसला न केवल नए मनोनीत नगरसेवकों के नाम तय करेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में आने वाले दिनों के नए समीकरणों के संकेत भी दे सकता है।



















उल्हासनगर में CHM कॉलेज के बैंक खाते से ₹16.69 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी, UPI के जरिए रकम उड़ाने का आरोप।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन बैंकिंग और UPI के माध्यम से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता डॉ. मंजू निशीकांत लालवाणी/पाठक (53) पेशे से प्रिंसिपल हैं और अंबरनाथ पूर्व के रॉयल पार्क क्षेत्र में रहती हैं। शिकायत के मुताबिक, उनके CHM कॉलेज के कैनरा बैंक स्थित करंट अकाउंट से बिना अनुमति के UPI के माध्यम से कथित तौर पर अनधिकृत लेनदेन किए गए।

ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा शुरू नहीं होने के बावजूद खाते में सेंध

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 15 अगस्त 2025 से 13 अगस्त 2026 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने बैंक खाते से संबंधित UPI प्रणाली में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया। बताया गया है कि संबंधित खाते में ऑनलाइन बैंकिंग अथवा UPI सुविधा शुरू नहीं की गई थी और कॉलेज के शिकायतकर्ता या किसी अधिकृत व्यक्ति ने भी इस प्रकार के लेनदेन की अनुमति नहीं दी थी।

इसके बावजूद आरोपी ने कथित तौर पर ऑनलाइन UPI के जरिए कई अनधिकृत लेनदेन किए। इन लेनदेन के दौरान शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर OTP संदेश प्राप्त होने की बात भी सामने आई है।

OTP का कथित रूप से किया गया दुरुपयोग

शिकायत के अनुसार, अज्ञात आरोपी ने शिकायतकर्ता की जानकारी और अनुमति के बिना प्राप्त OTP का कथित रूप से अनधिकृत इस्तेमाल किया। इसके माध्यम से बैंक खाते से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण प्रक्रिया का दुरुपयोग कर UPI प्रणाली के जरिए लेनदेन किए गए।

पुलिस शिकायत में दावा किया गया है कि इस कथित साइबर धोखाधड़ी के जरिए कुल ₹16,69,229 की राशि खाते से निकाल ली गई, जिससे शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान हुआ।

अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

मामले में आरोपी की पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है। मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब कथित ऑनलाइन लेनदेन, OTP के इस्तेमाल, UPI गतिविधियों और बैंक खाते से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक (अपराध) तुकाराम पाटिल, मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3 द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान आरोपी की पहचान और कथित लेनदेन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

















आबकारी विभाग में तनाव का माहौल? कल्याण कार्यालय के द्वितीय निरीक्षक को हार्ट अटैक, ICU में इलाज जारी। महिला कर्मचारी के बाद अब निरीक्षक की तबीयत बिगड़ने से अधीक्षक की कथित कार्यशैली पर सवाल उठे।


कल्याण: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के ठाणे-2 (कल्याण) कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित मानसिक दबाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कार्यालय में कार्यरत एक द्वितीय निरीक्षक को अचानक दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तत्काल गोरेगांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका ICU में उपचार जारी बताया जा रहा है। उनकी स्थिति गंभीर होने की जानकारी सामने आई है।

इस घटना के बाद विभाग के भीतर काम के दबाव और कथित तनावपूर्ण कार्य वातावरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या लगातार बढ़ता काम का बोझ और कथित मानसिक दबाव कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है?

⚠️ पहले महिला कर्मचारी, अब द्वितीय निरीक्षक

कल्याण आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ कर्मचारियों द्वारा अतिरिक्त कार्यभार, कथित मानसिक दबाव, अनुचित व्यवहार, छुट्टी से जुड़े मामलों और अवकाश के दिनों में भी काम करने के लिए बुलाए जाने जैसी शिकायतें किए जाने की जानकारी है।

इसी बीच, पहले एक महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। उस प्रकरण की जांच चल रही है। अब द्वितीय निरीक्षक को दिल का दौरा पड़ने की घटना ने विभागीय कामकाज और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं और कार्यालय में कथित तनाव के बीच सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

🔥 कर्मचारियों में कथित डर और दबाव का माहौल?

विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी और कर्मचारी काम के दौरान मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कर्मचारी अपनी शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने खुलकर रखने से हिचकिचाते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग में कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था मौजूद है? यदि किसी कर्मचारी को वरिष्ठ अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत हो, तो क्या वह बिना किसी डर के अपनी बात रख सकता है?

🔎 विभागीय जांच जारी

मिली जानकारी के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी अधीक्षक प्रवीण तांबे को सौंपी गई है। जांच के तहत 31 अगस्त को कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के अगले चरण में 8 सितंबर को विस्तृत बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।

जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है

- कर्मचारियों पर कथित अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति;

- कार्यालय के वातावरण और मानसिक दबाव से जुड़ी शिकायतें;

- छुट्टियों से संबंधित शिकायतें;

- अवकाश के दिनों में काम करने के कथित दबाव की जांच;

- अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ व्यवहार संबंधी आरोप;

- महिला कर्मचारी और द्वितीय निरीक्षक की स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं का कार्यालयीन परिस्थितियों से कोई संबंध है या नहीं।

⚖️ अब वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप पर नजर

इस पूरे प्रकरण में अब महाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख और विभागीय उपआयुक्त की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित रहेगी या आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ठोस प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी?

साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान कर्मचारियों को बिना किसी दबाव या भय के अपनी बात रखने का अवसर मिलता है या नहीं।

🚨 जांच से सामने आएगी असली तस्वीर?

एक के बाद एक कर्मचारियों की तबीयत से जुड़ी गंभीर घटनाओं के सामने आने के बाद कल्याण आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं को सीधे कार्यालयीन तनाव से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और विस्तृत जांच जरूरी मानी जा रही है, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनुचित दबाव साबित होता है तो उचित कार्रवाई की जा सके।

संबंधित अधीक्षक उत्तम राजाराम शिंदे और विभागीय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना अपेक्षित है।

अब निगाहें 8 सितंबर को होने वाली अगली जांच प्रक्रिया और दर्ज किए जाने वाले बयानों पर हैं। जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है और वरिष्ठ प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।



















कल्याण-उल्हासनगर क्षेत्र के चर्चित बिल्डर जयराम नेहलानी के कथित अपहरण से सनसनी, पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

कल्याण-उल्हासनगर क्षेत्र के चर्चित बिल्डर एवं एस्टेट एजेंट जयराम नेहलानी के कथित अपहरण की खबर सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे गोलमैदान परिसर से कुछ अज्ञात लोगों द्वारा जयराम नेहलानी को कथित तौर पर जबरन अपने साथ ले जाने की घटना सामने आई है। हालांकि, मामले की पूरी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

घटना की जानकारी मिलते ही उल्हासनगर पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। पुलिस द्वारा घटना से जुड़े संभावित सुरागों की जांच की जा रही है तथा कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए सफेद और काले रंग की स्कॉर्पियो वाहनों की भी तलाश एवं ट्रेसिंग की जा रही है।

🔎 कई सवालों के बीच जांच जारी

घटना के पीछे क्या कारण है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस विभिन्न संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। मामला किसी व्यक्तिगत या व्यावसायिक विवाद से जुड़ा है अथवा इसके पीछे कोई अन्य कारण है, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जयराम नेहलानी की सुरक्षित तलाश और घटना में शामिल लोगों की पहचान को प्राथमिकता दी जा रही है। संभावित मार्गों, संदिग्ध वाहनों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

🚔 वरिष्ठ अधिकारी मामले पर रख रहे नजर

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सचिन गोरे, एसीपी शंकर अवताड़े और सीनियर पीआई सुभाष आहवाड जांच की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों और संदिग्ध वाहनों की जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।

📹 CCTV व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल

इस घटना ने उल्हासनगर, अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की CCTV निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। क्षेत्र के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर CCTV कैमरे लगे होने के बावजूद कथित रूप से इस्तेमाल किए गए वाहन और उसके रूट की पहचान में कितना समय लगा तथा तकनीकी जांच में क्या सामने आया, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्या वाहन की नंबर प्लेट बदली गई थी, क्या आरोपियों ने CCTV से बचने के लिए कोई रणनीति अपनाई थी या फिर वाहन की पहचान में कोई तकनीकी अड़चन सामने आई—इन सभी पहलुओं की जांच किए जाने की संभावना है।

⚠️ पुलिस पुष्टि का इंतजार

फिलहाल मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन बिना आधिकारिक पुलिस पुष्टि के किसी व्यक्ति, गिरोह या संगठन को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच जारी है। जयराम नेहलानी की स्थिति, घटना की वास्तविक परिस्थितियां और इसमें शामिल लोगों के संबंध में आधिकारिक जानकारी जांच के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।

दिनदहाड़े सामने आई इस कथित घटना ने शहर की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर पुलिस जांच के अगले अपडेट और आधिकारिक बयान पर है।


















6 करोड़ के गार्डन टेंडर के बाद छोटे टेंडरों पर उठे सवाल, उल्हासनगर मनपा की टेंडर प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के PWD विभाग की ओर से कुछ दिन पहले शहर में एक बड़े गार्डन के विकास कार्य के लिए करीब 6 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि यह महत्वपूर्ण टेंडर शहर की एक नामी कंपनी को मिला। इसके बाद महानगरपालिका की ओर से विभिन्न छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी कई टेंडर जारी किए गए।

इसी टेंडर प्रक्रिया को लेकर अब उल्हासनगर की जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब संबंधित कंपनी को करीब 6 करोड़ रुपये के बड़े टेंडर में पात्र किया गया, तो बाद में जारी किए गए छोटे टेंडरों में उसे अपात्र कर टेन्डर को साठ गाँठ कर के किसी पसंदीदा कंपनी को फायदा पहुंचाया जा रहा है? आखिर छोटे टेंडरों की पात्रता और प्रक्रिया के पीछे क्या नियम और मापदंड अपनाए गए थे?

🔎 टेंडर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग

नागरिकों का सवाल है कि क्या सभी टेंडरों में समान और पारदर्शी नियम लागू किए गए हैं? यदि किसी कंपनी को बड़े प्रोजेक्ट में काम करने का अवसर दिया गया है, तो छोटे टेंडरों में उसकी भागीदारी को लेकर अलग नियम क्यों लागू किए गए? इस पूरे मामले में टेंडर की शर्तों, पात्रता मानदंड और प्रक्रिया की निष्पक्षता को स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है।

जनता के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं इन छोटे टेंडरों की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

📢 आयुक्त मनीषा आव्हाले से जनता का सीधा सवाल

उल्हासनगर की जनता अब महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान संबंधित टेंडरों की शर्तों, कंपनियों की पात्रता, प्राप्त निविदाओं, तकनीकी एवं वित्तीय प्रक्रिया तथा टेंडर मंजूर करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए।

नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका के करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से जुड़े टेंडरों में किसी भी प्रकार का संदेह या सवाल नहीं रहना चाहिए। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब देखना होगा कि 6 करोड़ रुपये के गार्डन टेंडर और उसके बाद जारी किए गए छोटे टेंडरों को लेकर उठ रहे सवालों पर मनपा प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाते हैं।