BREAKING NEWS
national

Slider

national

Slider Right

Maharashtra

उल्हासनगर

Ulhasnagar/block-2

कल्याण-डोंबिवली

Kalyan-Dombivli/block-2

ठाणे

Thane/block-3

क्राइम

Crime/block-7

महाराष्ट्र

Maharashtra/block-8

मुंबई

Mumbai/block-9

मनोरंजन

entertainment/block-4

राष्ट्रीय खबर

national/block-1

खेल

sports/block-6

बिजनेस

Business/block-6

लाइफस्टाइल

lifestyle/block-5

सियासत

politics

Latest Articles

उल्हासनगर में श्मशान घाटों पर कथित वसूली का मामला गरमाया, प्रहार सामाजिक संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के कैंप नंबर 1 से 5 में स्थित विभिन्न श्मशान घाटों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोलके ने आरोप लगाया है कि इन श्मशान घाटों में कुछ कथित गैर-कानूनी ट्रस्टों एवं संस्थाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद नागरिकों से आर्थिक वसूली की जा रही है।

शरद पोळके का दावा है कि संबंधित संस्थाओं और उल्हासनगर महानगरपालिका के बीच किसी भी प्रकार का समझौता या इकरारनामा नहीं हुआ है। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित ट्रस्टों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में श्मशान घाटों के संचालन तथा नागरिकों से कथित तौर पर की जा रही आर्थिक वसूली को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

प्रहार सामाजिक संगठन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों या संस्थाओं से कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के जुड़े होने के कारण महानगरपालिका प्रशासन पर कथित रूप से दबाव है। संगठन का आरोप है कि इसी वजह से प्रशासन संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है।

हालांकि, राजनीतिक दबाव या किसी व्यक्ति की संलिप्तता संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। संबंधित ट्रस्टों, संस्थाओं और महानगरपालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन से दस्तावेजों की जांच और कार्रवाई की मांग

शरद पोळके ने महानगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि कैंप नंबर 1 से 5 के सभी श्मशान घाटों के संचालन से संबंधित दस्तावेज, ट्रस्टों की वैधता, महानगरपालिका के साथ हुए किसी भी समझौते तथा नागरिकों से ली जाने वाली फीस या अन्य आर्थिक वसूली की पूरी जांच की जाए।

उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की है कि यदि संबंधित संस्थाओं के पास श्मशान घाटों के संचालन या आर्थिक वसूली का कोई वैध अधिकार नहीं है, तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए और गरीब नागरिकों पर पड़ रहे कथित आर्थिक बोझ को रोका जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोळके ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में महानगरपालिका प्रशासन ने अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो संगठन की ओर से बड़े जन आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन प्रहार जनशक्ति पक्ष के नेता बच्चू कडू के आदेश तथा स्वप्निल पाटिल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किए जाने की बात कही है।

श्मशान घाट जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक हित से जुड़े विषय में लगाए गए इन आरोपों के बाद अब निगाहें महानगरपालिका प्रशासन की ओर हैं। प्रशासन संबंधित ट्रस्टों की वैधता, उपलब्ध दस्तावेजों और कथित आर्थिक वसूली की जांच करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

— शरद पोळके

अध्यक्ष, प्रहार सामाजिक संगठन, उल्हासनगर
















ड्रग्स, युवा और समाज के मुद्दे पर विशेष इंस्टाग्राम लाइव; IRS अधिकारी समीर वानखेड़े रखेंगे मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनी बात।


नई दिल्ली/मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

भारत में मादक पदार्थों के सेवन, युवाओं पर इसके प्रभाव, रोकथाम, कानून के प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आगामी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को एक विशेष इंस्टाग्राम लाइव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का विषय ‘सुर्खियों से परे: भारत में ड्रग्स, युवा और समाज’ (Beyond the Headlines: Drugs, Youth & Society in India) रखा गया है। पोस्टर के अनुसार, यह बातचीत मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मादक पदार्थों से जुड़े विभिन्न सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं को समझने पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में समीर वानखेड़े, IRS, पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर, शामिल होंगे। कार्यक्रम में ड्रग्स से जुड़े मुद्दों को केवल कानून और कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोगों, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, नीति, प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे व्यापक पहलुओं के संदर्भ में चर्चा किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

युवा ड्रग्स की ओर क्यों आकर्षित होते हैं?

कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में मादक पदार्थों का सेवन (Substance Abuse) शामिल है। इसके तहत युवाओं के ड्रग्स की ओर आकर्षित होने के संभावित सामाजिक एवं व्यवहारिक कारणों पर चर्चा की जाएगी।

इसके साथ ही रोकथाम (Prevention) पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्चा का एक प्रमुख सवाल यह होगा कि मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए वास्तव में कौन से उपाय प्रभावी साबित हो सकते हैं और समाज, परिवार तथा संस्थाएं इस दिशा में किस प्रकार भूमिका निभा सकती हैं।

NDPS कानून और प्रवर्तन पर चर्चा

कार्यक्रम में NDPS अधिनियम से संबंधित कानून, प्रवर्तन और उसके प्रभाव पर भी चर्चा प्रस्तावित है। मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में कानून की भूमिका तथा उसके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।

पुनर्वास और दूसरा मौका भी चर्चा का हिस्सा

मादक पदार्थों से जुड़ी समस्या के उपचार और पुनर्वास को भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। रिकवरी, सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों को दूसरा मौका जैसे विषयों पर बातचीत होने की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम के व्यापक विषयों में ‘कानून, लोग, व्यवहार और वास्तविकता’ तथा ‘नीति, प्रवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास’ जैसे मुद्दे शामिल हैं।

कार्यक्रम की जानकारी

📅 दिनांक: 4 अक्टूबर 2026, रविवार

⏰ समय: शाम 6:30 बजे (IST)

📱 माध्यम: Instagram Live

🎙️ अतिथि: समीर वानखेड़े, IRS

पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर

मादक पदार्थों की समस्या को लेकर जागरूकता, रोकथाम, कानून और पुनर्वास पर केंद्रित यह संवाद युवाओं, अभिभावकों और समाज के लिए विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।



















उल्हासनगर-5 के सेक्शन-39 में प्रतिबंधित गुटखा के खिलाफ कार्रवाई, सरकारी काम में बाधा का आरोप; दो के खिलाफ हिललाइन पुलिस में मामला दर्ज।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर-5 के सेक्शन-39 परिसर में प्रतिबंधित खाद्य सामग्री, जिसमें गुटखा शामिल होने की जानकारी सामने आई है, के कथित भंडारण के मामले में हिललाइन पुलिस थाने में दो लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार, यह घटना 29 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे बैरक नंबर 1865/19 के सामने हुई।

पुलिस दस्तावेज में दर्ज शिकायत के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम प्रतिबंधित एवं मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताई गई खाद्य सामग्री के कथित भंडारण के संबंध में कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने की घटना सामने आई।

कार्रवाई के दौरान अधिकारी को धक्का देने का आरोप

शिकायत के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सहायक खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमित ढफड़े के साथ आरोपी सोनु उर्फ पुरुषोत्तम गोपालदास रोहरा द्वारा कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। शिकायत में आरोप है कि धक्का लगने के बाद अधिकारी जमीन पर गिर गए, जिससे उनके दोनों पैरों में चोट आई।

पुलिस दस्तावेज में यह भी आरोप दर्ज है कि घटना के बाद सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई और आरोपी मौके से फरार हो गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती है।

दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

इस मामले में शिकायतकर्ता के रूप में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रणजित हनुमंत माने का नाम दर्ज है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार, आरोपियों के रूप में सोनु उर्फ पुरुषोत्तम गोपालदास रोहरा और पारीबाई गोपालदास रोहरा के नाम दर्ज किए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम और BNS की धाराएं

पुलिस दस्तावेज के अनुसार, मामले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं 26(2)(i), 26(2)(iv), 27(3)(e), 59, 30(2)(a) और 62 के साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामले की जांच सपोनि/खुळे (सहायक पुलिस निरीक्षक खुळे) द्वारा किए जाने की जानकारी दस्तावेज में दी गई है।

प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई पर नजर

उल्हासनगर क्षेत्र में प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के कथित भंडारण और बिक्री के मामलों को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे मामलों में प्रतिबंधित सामग्री की जब्ती, उसके स्रोत और वितरण नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच संबंधित विभाग और पुलिस द्वारा की जाती है।

महत्वपूर्ण: यह समाचार पुलिस में दर्ज शिकायत एवं उपलब्ध दस्तावेज में दर्ज आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किया जाना बाकी है। आरोपियों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। मामले में पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर आगे की जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।



















उल्हासनगर-3: होटल डॉल्फीन क्लब के बाहर ₹20 हजार के लेन-देन को लेकर कथित मारपीट व चाकू हमले का आरोप। मध्यवर्ती पुलिस ने BNS की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू की।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर-3 स्थित होटल डॉल्फीन क्लब के गेट के सामने कथित तौर पर दिनदहाड़े मारपीट और चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्यवर्ती पुलिस थाने में FIR No. 0565/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026, को दर्ज की गई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत और उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता जयेश सुंदरदास आहूजा (31), निवासी कल्याण पश्चिम, का करीब ₹20 हजार का कथित आर्थिक लेन-देन फिरोज जवरानी नामक व्यक्ति के साथ था। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित रकम वापस नहीं मिलने तथा फोन पर संपर्क नहीं होने के बाद वह उक्त व्यक्ति से मिलने के लिए गया था।

बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने का आरोप

शिकायतकर्ता के बयान के मुताबिक, 25 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे वह होटल डॉल्फीन क्लब के पास मौजूद था। इसी दौरान रोशन हरेश पुरुस्वानी अपने दो साथियों के साथ कथित तौर पर वहां पहुंचा।

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर गाली-गलौज तथा मारपीट शुरू हो गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान उस पर चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी नाक पर चोट लगी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई तथा उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

BNS की इन धाराओं के तहत मामला दर्ज

उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, मध्यवर्ती पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118(1), 115(2), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जांच अधिकारी: पुलिस निरीक्षक विठ्ठल बाबासाहेब बधे।

राजनीतिक संबंध को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आरोपी रोशन पुरुस्वानी और शिवसेना के मौजूदा नगरसेवक जम्मू पुरुस्वानी के परिवार के बीच कथित पारिवारिक संबंध होने की चर्चा भी सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इस कथित पारिवारिक संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR को केवल कथित पारिवारिक या राजनीतिक संबंधों के आधार पर किसी राजनीतिक दल अथवा निर्वाचित प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से जोड़ना भी उचित नहीं होगा। यदि कोई आपराधिक कृत्य हुआ है, तो उसकी जांच संबंधित पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

पूर्व घटनाओं को लेकर भी दावे, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर आरोपी के खिलाफ पहले भी लोगों को डराने-धमकाने अथवा मारपीट जैसी घटनाओं में कथित रूप से शामिल होने की चर्चाएं होने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पुराने मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें किसी स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान यदि ऐसे किसी पूर्व रिकॉर्ड की पुष्टि होती है, तो संबंधित जानकारी आधिकारिक स्रोतों के आधार पर सामने आ सकती है।

नागरिकों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील

मारपीट, धमकी, जबरन वसूली या किसी अन्य प्रकार की आपराधिक घटना का सामना करने वाले नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। आपात स्थिति में 112 पर पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल यह मामला पुलिस में दर्ज FIR और शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

महत्वपूर्ण कानूनी नोट: FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। आरोपी को दोष सिद्ध होने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है।

स्रोत: मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, ठाणे शहर — FIR Copy No. 0565, दिनांक 25/09/2026; शिकायतकर्ता का बयान।



















उल्हासनगर की निर्माणाधीन इमारतों के OC-CC को लेकर विवाद, स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण में अंतर की जांच की मांग; बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और TPD विभाग की भूमिका पर भी सवाल।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में तेजी से हो रहे नए भवन निर्माण के बीच स्वीकृत प्लान, वास्तविक निर्माण और Occupancy Certificate (OC) तथा Completion Certificate (CC) जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में निर्माणाधीन इमारतों को लेकर कथित तौर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि निर्माण कार्य को स्वीकृत प्लान के अनुरूप पूर्ण दिखाने के बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत OC और CC जारी किए जाते हैं, जबकि बाद के चरण में उन्हीं इमारतों में स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण या बदलाव किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी इमारत को महानगरपालिका के संबंधित विभाग द्वारा OC या CC जारी किया गया है, तो उसके बाद वहां होने वाले कथित अतिरिक्त निर्माण, फेरबदल या प्लान से अलग किए गए कार्यों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।

बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतों और उठाए जा रहे सवालों के केंद्र में निर्माणकर्ताओं (Builders), आर्किटेक्ट्स तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग की भूमिका भी बताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जानकारों के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में स्वीकृत प्लान और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण के बीच समानता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किए जाने का आरोप है, तो संबंधित दस्तावेजों, मंजूर नक्शे, साइट निरीक्षण रिपोर्ट और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

OC और CC जारी होने के बाद कथित उल्लंघन का मुद्दा

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि OC और CC जारी किए जाने के समय संबंधित इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या निर्माण कार्य स्वीकृत प्लान के अनुरूप था?

यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी और वैधानिक स्थिति अलग-अलग तथ्यों एवं दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।

इसी वजह से शहर में कुछ नागरिकों और संबंधित शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग उठाई जा रही है कि हाल के वर्षों में जारी किए गए OC और CC से जुड़े मामलों का दस्तावेजी और स्थल निरीक्षण के आधार पर ऑडिट किया जाए।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है—

- संबंधित इमारत का मूल स्वीकृत प्लान क्या था?

- निर्माण के दौरान कितने संशोधित प्लान मंजूर किए गए?

- मौके पर वास्तविक निर्माण स्वीकृत प्लान के अनुरूप है या नहीं?

- OC और CC जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था या नहीं?

- निरीक्षण के दौरान तैयार की गई रिपोर्ट में क्या उल्लेख किया गया है?

- प्रमाणपत्र जारी होने के बाद इमारत में कोई अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किया गया या नहीं?

- यदि कोई कथित उल्लंघन पाया गया, तो महानगरपालिका द्वारा उस पर क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकते हैं।

प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण को देखते हुए OC और CC जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमानुसार निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी निर्माण परियोजना के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित स्वीकृत प्लान, साइट की मौजूदा स्थिति और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच से विवाद की वास्तविकता सामने आ सकती है।

फिलहाल, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स अथवा महानगरपालिका के किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित बिल्डरों/आर्किटेक्ट्स की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

















एमएम ग्रुप की गणपति परंपरा जारी: 2012 में 321 से बढ़कर 2026 में 351 मूर्तियों की स्थापना, आज होगा विसर्जन।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के अवसर पर एमएम ग्रुप की ओर से इस वर्ष बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रुप के अनुसार, साल 2026 में कुल 351 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई है। इन सभी मूर्तियों का विसर्जन आज किया जा रहा है।

एमएम ग्रुप से जुड़े सदस्यों के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना और उनके विधिवत विसर्जन की परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012 में ग्रुप की ओर से 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। इसके बाद इस संख्या में बढ़ोतरी होने की जानकारी दी गई है।

2012 में 321 से 2026 में 351 मूर्तियां

एमएम ग्रुप के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2012 में 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 351 बताई जा रही है। इस तरह 14 वर्षों के दौरान स्थापित की जाने वाली गणपति मूर्तियों की संख्या में 30 की वृद्धि दर्ज होने की बात कही गई है।

आज गणपति विसर्जन के अवसर पर ग्रुप से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य इस आयोजन में शामिल होकर स्थापित गणपति मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने का दावा

एमएम ग्रुप की ओर से यह भी बताया गया है कि ग्रुप का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह जानकारी ग्रुप के सदस्यों द्वारा साझा की गई है। रिकॉर्ड से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर उसके आधार पर अतिरिक्त जानकारी सामने रखी जा सकती है।

ये हैं एमएम ग्रुप के पदाधिकारी और सदस्य

एमएम ग्रुप से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:

अनिल — ग्रुप अध्यक्ष

सनी — ग्रुप उपाध्यक्ष

बंटी — सदस्य

बबलो — सदस्य

रवि — सदस्य

हिमेश — सदस्य

हिरेन — सदस्य

गणपति विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के गणेशोत्सव का यह आयोजन भी संपन्न हो रहा है। एमएम ग्रुप की ओर से हर वर्ष गणपति स्थापना और विसर्जन से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता की जाती है।



















उल्हासनगर में सनद वितरण को लेकर विवाद: SDO विजयानंद शर्मा के खिलाफ जांच के निर्देश, 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी।



 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में जमीन एवं संपत्ति से संबंधित सनद वितरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद राज्य सरकार की ओर से कोंकण आयुक्त और ठाणे जिलाधिकारी को मामले की जांच कर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का दावा किया गया है।

उपलब्ध ठाणे जिला प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार श्री विजयानंद स्वानंद शर्मा उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी (SDO) के पद पर कार्यरत हैं।

सनद वितरण में अनियमितताओं का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने आरोप लगाया है कि उल्हासनगर उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के माध्यम से सनद वितरण की प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले कोंकण आयुक्त के समक्ष शिकायत रखते हुए विभागीय जांच की मांग की थी।

साल्वे का दावा है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने राज्य सरकार का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया और मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन/अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया।

राज्य सरकार के हस्तक्षेप का दावा

साल्वे के अनुसार, उनके आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोंकण आयुक्त तथा ठाणे जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें उल्हासनगर के SDO श्री विजयानंद शर्मा से संबंधित लगाए गए आरोपों की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

यदि यह जांच औपचारिक रूप से शुरू होती है, तो सनद वितरण से संबंधित रिकॉर्ड, प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण होगी।

निष्पक्ष जांच और संपत्ति की जांच की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने राज्य सरकार से मांग की है कि सनद वितरण से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ SDO विजयानंद शर्मा को निलंबित करने और उनकी व्यक्तिगत संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है।

साल्वे ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

जांच पूरी होने तक आरोपों की पुष्टि नहीं

हालांकि, किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष आने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राज्य सरकार द्वारा कथित तौर पर मांगी गई जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की प्रशासनिक अथवा अन्य स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।

इस मामले में SDO विजयानंद शर्मा, कोंकण आयुक्त कार्यालय और ठाणे जिलाधिकारी प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

नोट: सनद वितरण से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और कथित सरकारी जांच-निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है।