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अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु, मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन ने जारी की सूचना।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3 द्वारा एक अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की गई है। यह मामला आकस्मिक मृत्यु प्रकरण क्रमांक 02/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह सूचना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के अंतर्गत दी है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 4 जनवरी 2026 को आपातकालीन सेवा 112 के माध्यम से मैक्सलाइफ हॉस्पिटल, शांतिनगर, उल्हासनगर-3 से सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे, जहां एक अज्ञात पुरुष व्यक्ति अचेत अवस्था में पाया गया। व्यक्ति के शरीर में किसी प्रकार की हलचल नहीं थी और वह गंदे कपड़े पहने हुए था।

उक्त व्यक्ति को तत्काल एम्बुलेंस की सहायता से उपचार के लिए मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3 ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद शाम 5:05 बजे (17:05) उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक का हुलिया

पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष के बीच बताई जा रही है। उसकी लंबाई करीब 6 फीट, शरीर मजबूत, रंग काला-सांवला और बाल काले हैं। मृतक की आंखें और जीभ बाहर निकली हुई तथा सूजी हुई पाई गईं। दांत सुरक्षित थे।

दाहिने हाथ की कोहनी के पास हरी पट्टी बंधी हुई थी, जबकि दाहिने पैर के घुटने, पिंडली और पंजे के पास पट्टियों के निशान पाए गए। मृतक ने नीले-काले रंग की गंदी टी-शर्ट (सफेद आड़ी धारियों वाली) और लाल बॉर्डर वाली काली ट्रैक पैंट पहन रखी थी। उसके माथे के दाहिने हिस्से पर एक दाग था, जहां की त्वचा उखड़ी हुई पाई गई। शरीर पर किसी प्रकार का टैटू या अन्य पहचान चिन्ह नहीं मिला।

बीमारी से मौत की आशंका

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि व्यक्ति की मृत्यु शारीरिक बीमारी के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, मामले की आगे की जांच जारी है।

नागरिकों से अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को इस अज्ञात मृतक के रिश्तेदारों या पहचान से संबंधित कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3, जिला ठाणे से संपर्क करें।
संपर्क नंबर: 0251-2706900
एपीआई दिपाली अंकुश वाघ
मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन,
9011977567

पुलिस का कहना है कि मृतक की पहचान होने से उसके परिजनों को सूचित किया जा सकेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।



















सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: समीर वानखेड़े के प्रमोशन में हस्तक्षेप से इनकार, केंद्र की याचिका खारिज।


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी 

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े की पदोन्नति से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल (CAT) के फैसले को सही ठहराया गया था।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अलोक अराड़े की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं के जरिए अगस्त 2025 में आए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें CAT के निर्णय को वैध माना गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाओं की खारिजी का किसी अन्य लंबित या भविष्य की कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में CAT के दिसंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा था। CAT ने अपने आदेश में कहा था कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने समीर वानखेड़े के नाम की अनुशंसा की है, तो उन्हें 1 जनवरी 2021 से अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) के पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए।

केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि वानखेड़े के खिलाफ कई मामले लंबित हैं, जिनमें CBI में दर्ज FIR, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तहत ECIR, और संभावित चार्जशीट शामिल हैं। इसी आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी गई थी। हालांकि, CAT और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह स्पष्ट किया कि अब तक न तो कोई चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही कोई औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है, ऐसे में प्रमोशन रोकने का कोई वैध आधार नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समीर वानखेड़े की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है और यह निर्णय सेवा मामलों में लंबित जांच के आधार पर प्रमोशन रोकने की नीति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।












नांदेड में ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के 350वें शहीदी समागम को लेकर सिंधी समाज की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न।


नांदेड: दिनेश मीरचंदानी

‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के 350वें शहीदी समागम के भव्य आयोजन को लेकर नांदेड में तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। आगामी 24 और 25 जनवरी 2026 को नांदेड में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक शहीदी समागम की पृष्ठभूमि में नांदेड के सिंधी समाज की एक अहम और मार्गदर्शक बैठक सम्पन्न हुई।

इस बैठक में मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष के कार्यकारी अधिकारी डॉ. जगदीश सकवान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ समाज के अनेक प्रतिष्ठित और सक्रिय पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए, जिनमें श्री सतीश मुलचंद नेहलानी, श्री प्रकाश नेहलानी, श्री रेवाचंद नाथानी, श्री नंदू धनवानी, श्री मुकेश रंगनानी, श्री हरीश लालवानी, श्री गणेश बिडवई, सौ. सिमरन प्रेमचंदानी, काव्या प्रेमचंदानी, सौ. सोनी आलमचंदानी, श्रीमती लालवानी मैडम सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।

बैठक में बताया गया कि इस शहीदी समागम में देशभर से सिंधी समाज सहित विभिन्न समुदायों के श्रद्धालु और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग लेने वाले हैं। इसी उद्देश्य से नांदेड जिले के प्रमुख सिंधी समाजबांधवों की यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा, व्यवस्थाएं, आवास, यातायात, अनुशासन और समाज की सक्रिय सहभागिता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के अद्वितीय त्याग, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु दिए गए सर्वोच्च बलिदान और मानवता के लिए उनके ऐतिहासिक योगदान को जन-जन तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, अधिक से अधिक संख्या में समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जनजागरण, आपसी समन्वय और संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर सभी समाजघटकों से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक शहीदी समागम को भव्य, अनुशासित और ऐतिहासिक बनाने की अपील की गई, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक गुरु तेग बहादुर साहेब के बलिदान, साहस और धर्मरक्षा की प्रेरणा पहुँच सके।

उल्लेखनीय है कि इस शहीदी समागम में सिख, सिकलीगर, बंजारा, लबाना, सिंधी, मोहयाल, वाल्मीकी, उदासीन एवं भगत नामदेव (वारकरी) संप्रदाय सहित विभिन्न समाज और समुदाय बड़े पैमाने पर शामिल होने जा रहे हैं, जिससे यह आयोजन सामाजिक एकता, धार्मिक सौहार्द और ऐतिहासिक चेतना का एक भव्य प्रतीक बनने जा रहा है।













दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक बरकरार, केंद्र की याचिका खारिज।


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें वानखेड़े के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक जांच (डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी) पर रोक लगाई गई थी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल CAT के आदेश में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह समीर वानखेड़े द्वारा दायर याचिका का निपटारा 14 जनवरी तक या उसके बाद 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर करे।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2021 के चर्चित आर्यन खान ड्रग्स केस से जुड़ा हुआ है। समीर वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022 में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से हटाए जाने के बावजूद, एजेंसी के एक कानूनी सलाहकार से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि वानखेड़े को जनवरी 2022 में NCB से हटा दिया गया था।

इन आरोपों के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से उनके खिलाफ चार्ज मेमो जारी किया गया था, जिसे वानखेड़े ने CAT में चुनौती दी थी।

27 अगस्त को CAT ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह वानखेड़े के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाए। इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।

अदालत का रुख

उच्च न्यायालय ने केंद्र की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि CAT के आदेश को फिलहाल कायम रखा जाएगा। अदालत के इस फैसले को वानखेड़े के लिए एक अहम कानूनी राहत माना जा रहा है।

कौन हैं समीर वानखेड़े?

समीर वानखेड़े पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के मुंबई जोनल डायरेक्टर रह चुके हैं। वे वर्ष 2021 में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद देशभर में चर्चा का विषय बने थे।

इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें CAT पर टिकी हैं, जहां आने वाले दिनों में वानखेड़े के मामले पर अंतिम फैसला आने की संभावना है।













उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘तीर-कमान और टीवी’ वाली अपील से पैनल नंबर 9 में सियासी उलझन, मतदाताओं के सामने बड़ा सवाल..??


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 में अब सियासी तस्वीर और भी जटिल होती जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया बयान ने पैनल नंबर 9 को चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज पैनल बना दिया है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से गठबंधन को मजबूत करने के लिए ‘तीर-कमान’ (शिवसेना) और ‘टीवी’ (साई पार्टी) चुनाव चिन्हों को वोट देने की खुली अपील की।

उपमुख्यमंत्री की इस अपील के बाद पैनल नंबर 9 के मतदाताओं के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है।

उपमुख्यमंत्री की अपील बनाम जमीनी सियासत

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मंच से एकता और गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया, लेकिन पैनल नंबर 9 की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

इसी पैनल में श्रीमती कविता मनोज लस्सी (शिवसेना / TOK समर्थित)

और श्रीमती आशा जीवन इदनानी (साई पार्टी – ‘टीवी’ चुनाव चिन्ह)

दोनों ही एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।

मतदाताओं के सामने धर्मसंकट

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

जब उपमुख्यमंत्री दोनों चुनाव चिन्हों को जिताने की अपील कर रहे हैं, तो पैनल 9 का मतदाता किसे वोट दे?

एक ओर शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार

दूसरी ओर गठबंधन की ही साई पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी

यही टकराव मतदाताओं को दो हिस्सों में बांटता नजर आ रहा है।

वोटों के बिखराव का खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री शिंदे का बयान भले ही गठबंधन को एकजुट करने के उद्देश्य से दिया गया हो, लेकिन पैनल नंबर 9 में यह बयान “दुधारी तलवार” बन गया है।

यदि वोट ‘टीवी’ चिन्ह को जाते हैं, तो साई पार्टी को सीधा फायदा होगा।

यदि वोट शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार को मिलते हैं, तो गठबंधन का दूसरा घटक कमजोर पड़ सकता है।

इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ भाजपा की प्रत्याशी दीपा नारायण पंजाबी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गठबंधन के वोटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है।

गली-मोहल्लों में चर्चा तेज

पैनल नंबर 9 की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—

“जब बड़े नेता एकता की बात कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार क्यों नहीं?”

उपमुख्यमंत्री की अपील से कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस पैनल में असमंजस और सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है।

निष्कर्ष

पैनल नंबर 9 अब केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संदेश, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि मतदाता ‘तीर-कमान’ पर भरोसा जताते हैं, ‘टीवी’ को चुनते हैं, या फिर इस आपसी फूट का फायदा भाजपा उठाने में सफल होती है

📌 उल्हासनगर चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।













नववर्ष पर सेवा और संवेदना का संदेश: उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा की पहल से सैकड़ों जरूरतमंदों को ठंड से राहत।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

नववर्ष के पावन अवसर पर सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उल्हास जनपथ के संपादक शिवकुमार मिश्रा द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के माध्यम से सैकड़ों गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाव हेतु कंबल वितरित कर राहत पहुंचाई गई।

कैंप क्रमांक 3, दशहरा मैदान, इंदिरा गांधी गार्डन के सामने स्थित उल्हास जनपथ कार्यालय में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जरूरतमंदों ने लाभ उठाया। इसके अतिरिक्त, समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक सहायता पहुंचाने की भावना के तहत रात्रि के समय फुटपाथों, रेलवे स्टेशन परिसरों तथा मंदिरों के बाहर खुले आसमान के नीचे जीवनयापन कर रहे गरीब एवं बेसहारा लोगों तक स्वयं पहुंचकर कंबल वितरित किए गए, जिससे वे कड़ाके की सर्दी से सुरक्षित रह सकें।

इस मानवीय पहल को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं लाभार्थियों ने शिवकुमार मिश्रा के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की है। नववर्ष की शुरुआत सेवा, करुणा और सामाजिक समर्पण के इस संदेश के साथ समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।













उल्हासनगर में ट्रांसफर विवाद ने पकड़ा तूल — TPD विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार पर गंभीर आरोप, उल्हासनगर महानगर पालिका के आयुक्त से जनता का सवाल: कार्रवाई कब.?


(फाइल फोटो)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के टाउन प्लानिंग (TPD) विभाग के जूनियर इंजीनियर संजय युवराज पवार की ट्रांसफर को लेकर शहर में तीव्र विरोध और सवालों की हवा तेज हो गई है।

शहर के जागरूक नागरिकों, आविभिन्न सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्टों ने उल्हासनगर महानगर पालिक आयुक्त मनीषा अव्हाले तथा प्रशासन से यह पूछा है कि सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन होने के बावजूद अभी तक संजय पवार की बदली क्यों नहीं की गई?

महाराष्ट्र सरकारी सेवा नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण हर 3 वर्षों में अनिवार्य है, लेकिन संजय पवार पिछले 10 से अधिक वर्षों से लगातार TPD विभाग में पदस्थापित हैं।

नियमों की यह अवहेलना नागरिकों के बीच गंभीर संदेह और असंतोष का कारण बन रही है।

🚨 गंभीर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के आरोप

सूत्रों के अनुसार, संजय युवराज पवार पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने, बिल्डर और भूमाफिया से मिलीभगत, तथा TDR से जुड़े अनियमित कार्यों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप हैं।

इसके अलावा, बताया जाता है कि साल 2014 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें कथित रूप से 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

इसके बावजूद आज तक न तो विभागीय स्तर पर कोई कठोर कार्रवाई हुई और न ही उनका ट्रांसफर किया गया, जिससे नागरिकों में रोष और बढ़ गया है।

📑 राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों में शिकायतें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय पवार के विरुद्ध

CBI, ACB, ED और आयकर विभाग

जैसी जांच एजेंसियों में भी शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि:

“प्रशासन की खामोशी और लंबे समय तक पदस्थ बने रहना, दोनों ही स्थितियाँ अत्यंत संदिग्ध हैं।”

✊ जनता और सामाजिक संगठनों की स्पष्ट मांग

नागरिकों ने कड़े शब्दों में कहा:

“जब नियम सभी पर समान लागू होते हैं, तो फिर 10 साल से अधिक समय से एक ही पद पर जमे अधिकारी को हटाने में देरी क्यों?”

लोगों की प्रमुख माँग:

संजय युवराज पवार का तत्काल ट्रांसफर किया जाए

सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए

❓ अब प्रशासन के सामने बड़े सवाल

👉 क्या उल्हासनगर प्रशासन जनता की आवाज सुनेगा?

👉 क्या संजय युवराज पवार की बहुप्रतीक्षित बदली अब होगी या मामला फिर दबा दिया जाएगा?

👉 क्या नागरिकों को न्यायपूर्ण और पारदर्शी निर्णय मिलेगा?

📍 इस पूरे मामले पर शहर की निगाहें अब UMC प्रशासन और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।