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“15 साल बनाम 5 महीने”: विधायक कुमार ऐलानी पर बरसे शिव सेना नेता कमलेश निकम, विकास कार्यों को लेकर किया बड़ा दावा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

शिवसेना नेता कमलेश निकम ने उल्हासनगर के विधायक कुमार ऐलानी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके कार्यकाल और शहर के विकास को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। निकम ने आरोप लगाया कि विधायक कुमार ऐलानी करीब 15 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन इस लंबे कार्यकाल के बावजूद उल्हासनगर के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय काम दिखाई नहीं देता।

कमलेश निकम ने कहा कि महापौर के महज पांच महीने के कार्यकाल में 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों को गति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं, परिवहन और अन्य विकास कार्यों को लेकर महापौर की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

15 अगस्त से 30 नई बस सेवाओं का दावा

निकम ने कहा कि महापौर के प्रयासों से आगामी 15 अगस्त को उल्हासनगर शहरवासियों को 30 नई बस सेवाओं की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने इसे शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी और नागरिकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई बस सेवाएं शुरू होना आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती हैं।

“ऐलानी सिर्फ एंटीलिया और साहूकारों के विधायक”

विधायक कुमार ऐलानी पर निशाना साधते हुए कमलेश निकम ने आरोप लगाया कि “कुमार ऐलानी केवल एंटीलिया इमारत और साहूकारों के विधायक बनकर रह गए हैं।” उन्होंने कहा कि विधायक को शहर के आम नागरिकों, उनकी समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

विधानसभा में उल्हासनगर की आवाज नहीं उठाने का आरोप

निकम ने आगे आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा सत्रों में भी विधायक कुमार ऐलानी ने उल्हासनगर के महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में सड़क, यातायात, सार्वजनिक परिवहन, पानी, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन्हें विधानसभा में मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

कमलेश निकम ने कहा कि “उल्हासनगर की जनता अब केवल राजनीतिक दावों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले विकास कार्यों पर विश्वास करेगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शहर की जनता यह तय करेगी कि कौन जनहित के मुद्दों के लिए काम कर रहा है और कौन केवल राजनीति तक सीमित है।

हालांकि, निकम द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विधायक कुमार ऐलानी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।


















IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने त्रिची के प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर में किए दर्शन, विधिवत पूजा-अर्चना कर लिया भगवान शिव का आशीर्वाद।



त्रिची, तमिलनाडु: दिनेश मीरचंदानी

IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने आज तमिलनाडु के त्रिची (तिरुचिरापल्ली) स्थित प्रसिद्ध रॉकफोर्ट शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर पहुंचने के बाद उन्होंने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

ऐतिहासिक रॉकफोर्ट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर त्रिची के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, धार्मिक महत्व और पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर में पहुंचकर धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए देश और समाज की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की।

धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक स्थल का किया अनुभव

रॉकफोर्ट मंदिर की यात्रा के दौरान समीर वानखेड़े ने मंदिर परिसर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विशेषताओं का भी अनुभव किया। त्रिची का रॉकफोर्ट क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है तथा तमिलनाडु के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है।

समीर वानखेड़े की मंदिर यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह दौरा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। उनकी इस धार्मिक यात्रा को आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

भगवान शिव के दर्शन के साथ समीर वानखेड़े ने मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव किया।































उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।



















उल्हासनगर-3 में सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का संयुक्त स्वास्थ्य अभियान, निःशुल्क नेत्र जांच शिविर 7 अगस्त 2026 को।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सामाजिक संस्था सप्तध्यान फाउंडेशन द्वारा सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के सहयोग से 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को निःशुल्क नेत्र जांच एवं मोतियाबिंद स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, सेंट्रल हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा।

शिविर का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को समय रहते आंखों की बीमारियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना तथा मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के लिए जागरूक करना है।

आयोजकों के अनुसार, नियमित नेत्र जांच से मोतियाबिंद का समय पर पता लगाया जा सकता है, दृष्टि हानि से बचाव होता है, आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसी उद्देश्य के साथ नागरिकों से इस निःशुल्क शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।

शिविर में आने वाले मरीजों की विशेषज्ञों द्वारा नेत्र जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के उपचार और परामर्श की भी जानकारी दी जाएगी।

अपॉइंटमेंट एवं अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

योगाचार्य सतीश शर्मा: 9011808012

नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी: 8108098576

सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल: 8237898959

"अच्छी दृष्टि, बेहतर जीवन" के संदेश के साथ आयोजित इस शिविर के माध्यम से आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी अपनी आंखों की जांच कराएं और अपने परिवार के बुजुर्गों एवं जरूरतमंद लोगों को भी इस निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।

"स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवता के लिए साथ मिलकर – आपकी दृष्टि, हमारा मिशन। आज का एक छोटा कदम, कल का उज्ज्वल भविष्य।"



















उल्हासनगर-2 के गोल मैदान क्रिकेट ग्राउंड के कथित ₹1 करोड़ के फर्जी बिल को लेकर विवाद गहराया। यूएमसी के पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव पर कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर के आरोप लगे हैं। नागरिकों ने यूएमसी आयुक्त मनीषा आव्हाले से निष्पक्ष जांच कर भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित फर्जी बिलों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सामने आए तथ्यों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से की है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022 में उल्हासनगर-2 स्थित गोल मैदान में क्रिकेट ग्राउंड के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया था। इस परियोजना की स्वीकृत लागत लगभग ₹2.85 करोड़ थी तथा कार्य छह माह में पूरा किया जाना था। दस्तावेजों में पांच वर्ष की दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) का भी उल्लेख है।

बताया जाता है कि इसी कार्य के संबंध में मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को उक्त बिल भुगतान की प्रक्रिया के लिए लेखा विभाग को भेज दिया गया। इसी भुगतान प्रक्रिया को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित बिल पर पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव के कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति ने मिलकर विभाग में कई कथित फर्जी बिल तैयार किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। उनका आरोप है कि जिस कार्य के लिए करोड़ों रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं, उस स्थल पर अपेक्षित निर्माण कार्य दिखाई नहीं देता और साइट की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। उनका कहना है कि भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक प्रगति का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव द्वारा कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। साथ ही, महाराष्ट्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य की प्रगति से संबंधित आवश्यक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी कथित रूप से नहीं कराई गई जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

मामले से जुड़े लोगों का यह भी आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पीडब्ल्यूडी विभाग का समुचित ऑडिट नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यदि स्वतंत्र वित्तीय और तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसी कारण नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूरे विभाग की व्यापक जांच कराने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, शंकर नामक व्यक्ति पर पहले भी पीडब्ल्यूडी विभाग के तत्कालीन डिप्टी इंजीनियर महेश सीतलानी के कार्यकाल के दौरान कथित फर्जी बिल तैयार करने में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आज भी विभाग में कथित फर्जी बिलों के मामलों में शंकर की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित बिल का भुगतान जांच पूरी होने तक रोका जाए, कार्यस्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्य का मूल्यांकन कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

'मंत्रालय टाइम्स' का कहना है कि जनहित से जुड़े इस कथित फर्जी बिल प्रकरण की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अभिलेखों तथा जांच से जुड़े तथ्यों को क्रमवार प्रकाशित किया जाएगा ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।



















उल्हासनगर महानगरपालिका में अकाउंट ऑफिसर का पदभार अटका, तीन दिनों से नितल लव्हाले को नहीं मिला चार्ज; प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में अकाउंट ऑफिसर के पदभार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद पिछले तीन दिनों से नितल लव्हाले को अब तक अकाउंट ऑफिसर का विधिवत पदभार नहीं सौंपा गया है। इस देरी को लेकर महानगरपालिका के कर्मचारियों और शहर के विभिन्न हलकों में चर्चा का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार, अकाउंट ऑफिसर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि महानगरपालिका की वित्तीय व्यवस्था, भुगतान, बजट और लेखा संबंधी कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में पदभार सौंपने में हो रही देरी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

चर्चाओं के बीच यह सवाल भी सामने आ रहा है कि पूर्व अकाउंट ऑफिसर किरण भिलारे का प्रभाव अब भी बना हुआ है या नहीं। कुछ लोग यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर नितल लव्हाले को समय पर चार्ज क्यों नहीं दिया जा रहा है और इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्पष्टता क्यों नहीं दी जा रही।

हालांकि, इन चर्चाओं और सवालों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। महानगरपालिका प्रशासन या आयुक्त की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

अब कर्मचारियों और नागरिकों की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि नितल लव्हाले को अकाउंट ऑफिसर का पदभार कब सौंपा जाएगा और पदभार में हो रही देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि प्रशासन इस विषय पर आधिकारिक जानकारी जारी करता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





















उल्हासनगर में सियासी चर्चाओं का दौर तेज! क्या 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं शिवसेना नेता कमलेश निकम.?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों शिवसेना नेता कमलेश निकम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकम ने वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो कमलेश निकम और न ही शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कमलेश निकम वर्ष 2029 में शिवसेना के टिकट पर उल्हासनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हो सकते हैं। इसी वजह से वे संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में संभावित उम्मीदवार अक्सर वर्षों पहले से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर देते हैं। ऐसे में कमलेश निकम की बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को भी आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि हाल के समय में कमलेश निकम विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं तथा आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में कमलेश निकम का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

फिलहाल, वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए कमलेश निकम के चुनाव लड़ने की चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में यदि शिवसेना या कमलेश निकम की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो उल्हासनगर की राजनीति में नए समीकरण और नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।