BREAKING NEWS
national

Slider

national

Slider Right

Maharashtra

उल्हासनगर

Ulhasnagar/block-2

कल्याण-डोंबिवली

Kalyan-Dombivli/block-2

ठाणे

Thane/block-3

क्राइम

Crime/block-7

महाराष्ट्र

Maharashtra/block-8

मुंबई

Mumbai/block-9

मनोरंजन

entertainment/block-4

राष्ट्रीय खबर

national/block-1

खेल

sports/block-6

बिजनेस

Business/block-6

लाइफस्टाइल

lifestyle/block-5

सियासत

politics

Latest Articles

विधायक किसन कथोरे के प्रयास सफल! कल्याण में अपर जिलाधिकारी कार्यालय को महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी, चार तहसीलों के नागरिकों को मिलेगी राहत।





बदलापुर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

ठाणे जिले के नागरिकों के लिए प्रशासनिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग ने कल्याण में अपर जिलाधिकारी (Additional Collector) कार्यालय शुरू करने को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय से कल्याण, उल्हासनगर, अंबरनाथ और मुरबाड इन चार तहसीलों के नागरिकों को राजस्व प्रशासन से संबंधित कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर एक नया प्रशासनिक केंद्र उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।

इस कार्यालय की स्थापना की मांग मुरबाड विधानसभा क्षेत्र के विधायक किसन कथोरे द्वारा लगातार शासन स्तर पर उठाई जा रही थी। शासन की ओर से 6 नवंबर 2026 को मंजूरी दिए जाने के बाद उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

चार तहसीलों के नागरिकों को मिलेगी बड़ी राहत

अब तक इन चार तहसीलों के नागरिकों को अपर जिलाधिकारी स्तर पर आने वाले विभिन्न राजस्व मामलों के लिए कई बार ठाणे जिला मुख्यालय जाना पड़ता था। जिले का विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र, बढ़ती आबादी, शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों से ठाणे तक की दूरी को देखते हुए नागरिकों को समय और आर्थिक खर्च दोनों का सामना करना पड़ता था।

कल्याण में नया अपर जिलाधिकारी कार्यालय शुरू होने के बाद संबंधित अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजस्व मामलों के लिए नागरिकों को नजदीकी प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

इसका विशेष लाभ मुरबाड के ग्रामीण क्षेत्रों, अंबरनाथ तहसील के बदलापुर शहर, उल्हासनगर तथा कल्याण के नागरिकों को मिलने की उम्मीद है।

नागरिकों को किन कार्यों में मिल सकती है सुविधा?

नए कार्यालय के कार्यक्षेत्र और शासन द्वारा निर्धारित विषय आवंटन के अनुसार नागरिकों को निम्नलिखित सुविधाएं मिल सकती हैं:

1. राजस्व मामलों की सुनवाई: अपर जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की सुनवाई और पैरवी कल्याण में करना संभव होगा।

2. भूमि संबंधी प्रकरण: भूमि और अन्य राजस्व मामलों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों के लिए नजदीकी कार्यालय उपलब्ध होगा।

3. समय और खर्च की बचत: ठाणे जिला मुख्यालय तक बार-बार यात्रा करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

4. किसानों और ग्रामीण नागरिकों को लाभ: मुरबाड सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को प्रशासनिक कामकाज में सुविधा मिलने की संभावना है।

5. प्रशासनिक समन्वय में सुधार: चारों तहसीलों के राजस्व संबंधी मामलों और स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों के निपटारे में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

हालांकि, कार्यालय में किन-किन मामलों की सुनवाई और निपटारा किया जाएगा, यह शासन के विषय आवंटन और निर्धारित अधिकारों के अनुसार तय होगा।

ठाणे जिले का प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र भी किया गया स्पष्ट

शासन के निर्णय के अनुसार कल्याण स्थित अपर जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में चार तहसीलें शामिल रहेंगी:

- कल्याण
- उल्हासनगर
- अंबरनाथ
- मुरबाड

वहीं ठाणे, भिवंडी और शहापुर तहसीलों का अधिकार क्षेत्र ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के अंतर्गत ही रहेगा। जिलाधिकारी के अधिकारों में इस निर्णय से कोई बदलाव नहीं किया गया है।

15 दिनों के भीतर सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

शासन निर्णय के अनुसार नए कार्यालय को कार्यान्वित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

इसके तहत आवश्यक पदों पर नियुक्तियों, अस्थायी कार्यालय के लिए स्थान का चयन तथा अन्य प्रारंभिक व्यवस्थाओं के संबंध में 15 दिनों के भीतर शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

इसके अलावा कार्यालय के लिए स्थायी जगह तलाशने और भविष्य में स्वतंत्र कार्यालय भवन के निर्माण का प्रस्ताव भी सरकार के समक्ष भेजा जाएगा।

कार्यालय का प्रत्यक्ष कामकाज किस तारीख से शुरू होगा, इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग से घोषित की जाएगी।

विधायक किसन कथोरे की पहल को मिली प्रशासनिक मंजूरी

कल्याण में अपर जिलाधिकारी कार्यालय स्थापित करने की मांग लंबे समय से नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से जुड़ी हुई थी। विधायक किसन कथोरे द्वारा इस विषय को शासन स्तर पर लगातार उठाए जाने के बाद अब राजस्व विभाग ने इसे मंजूरी प्रदान की है।

इस निर्णय को ठाणे जिले के चार तहसील क्षेत्रों के नागरिकों के लिए प्रशासनिक सुविधाओं को नजदीक लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार का आभार, विधायक किसन कथोरे को बधाई

चार तहसीलों के नागरिकों के हित में लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए महाराष्ट्र सरकार का आभार व्यक्त किया गया है। साथ ही इस मांग को लगातार आगे बढ़ाने के लिए विधायक किसन कथोरे को बधाई दी गई है।

यह जानकारी कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद की नियोजन एवं विकास समिति के सभापति श्री संभाजी शिंदे की ओर से साझा की गई है।

आधिकारिक संदर्भ: महाराष्ट्र शासन, राजस्व विभाग का शासन निर्णय दिनांक 6 नवंबर 2026।

शासन निर्णय सांकेतांक: 202611061815441648

विशेष टिप्पणी: कार्यालय की स्थापना की मंजूरी मिलना प्रशासनिक प्रक्रिया की शुरुआत है। नियुक्तियां, कार्यालय का स्थान, विषय आवंटन और प्रत्यक्ष कामकाज शुरू होने की तारीख संबंधित शासन एवं प्रशासनिक आदेशों के अनुसार निर्धारित होगी।























नशामुक्त ठाणे के लिए पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे का संकल्प! ड्रग्स तस्करों पर सख्ती, युवाओं को जागरूक करने पर विशेष जोर।


ठाणे: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और ठाणे को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से ठाणे पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ अपनी कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियान पर विशेष जोर दिया है। पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे के नेतृत्व में मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन और तस्करी पर रोक लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अभियान के तहत ठाणे पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टीम और अपराध शाखा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने की दिशा में काम कर रही हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में मादक पदार्थों के खिलाफ विभिन्न कार्रवाइयों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री को कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट करने की कार्रवाई भी की गई है।

पुलिस का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से नशे की समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और विशेष रूप से युवाओं में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देने तथा उन्हें शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस पहल में अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। बच्चों के व्यवहार पर ध्यान देने, उनसे नियमित संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर संबंधित पुलिस थाने को सूचित करने की अपील की गई है।

ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे ने नशामुक्त और सुरक्षित शहर के निर्माण के लिए पुलिस तथा नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है।

संदेश स्पष्ट है—नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता और नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रखा जा सके।

































उल्हासनगर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा का मुद्दा गरमाया! पुलिस विभाग की भूमि के संरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में Writ Petition = रिट याचिका (न्यायालय में दायर संवैधानिक याचिका)। दायर किए जाने की जानकारी।


 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में सरकारी आरक्षित जमीनों के संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शहर में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र राज्य सरकार और पुलिस विभाग के स्वामित्व वाली जमीनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण न हो, इसके लिए संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग की सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखने और उनके संरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर ठाणे पुलिस आयुक्तालय की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में Writ Petition = रिट याचिका (न्यायालय में दायर संवैधानिक याचिका) दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस याचिका के विषय, उसमें की गई मांगों और न्यायालय की ओर से पारित किसी आदेश की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरकारी जमीनें सार्वजनिक संपत्ति होती हैं और उनका उपयोग निर्धारित सरकारी एवं जनहित के उद्देश्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में इन जमीनों के रिकॉर्ड, सीमांकन, वर्तमान कब्जे की स्थिति और संबंधित विभागों के स्वामित्व दस्तावेजों की नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

स्थानीय प्रशासन, महानगरपालिका, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि सरकारी जमीनों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए तथा किसी भी संभावित अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, इस पूरे मामले में संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जनहित याचिका से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।





































उल्हासनगर में रियल एस्टेट को लेकर चर्चा तेज! 50 से अधिक RERA रजिस्ट्रेशन रद्द होने की खबर से खरीदारों की बढ़ी चिंता।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में 50 से अधिक इमारतों के RERA रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की खबर सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी और संबंधित प्राधिकरण की पुष्टि सामने आना अभी बाकी है। इस खबर के मद्देनजर शहर में नई इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले नागरिकों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

शहर में जो नागरिक नई इमारतों में फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनसे अपील की जाती है कि किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन करने से पहले संबंधित बिल्डिंग का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, उसकी वैधता और वर्तमान स्थिति की जांच अवश्य करें। इसके अलावा बिल्डिंग की आवश्यक सरकारी मंजूरियों, निर्माण संबंधी दस्तावेजों और अन्य कानूनी पहलुओं की भी पुष्टि करें।

वहीं, जिन नागरिकों ने पहले ही नई इमारतों में फ्लैट खरीद लिए हैं, उन्हें भी अपने फ्लैट और संबंधित प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर जांचने की सलाह दी जाती है। इसके लिए महाराष्ट्र RERA (MahaRERA) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड का सहारा लिया जा सकता है।

उल्हासनगरवासियों से विशेष अपील

फ्लैट खरीदना किसी भी परिवार के जीवन का एक बड़ा आर्थिक निर्णय होता है। इसमें वर्षों की मेहनत और जीवनभर की बचत लगी होती है। इसलिए केवल बिल्डर या ब्रोकर द्वारा दी गई जानकारी पर निर्भर न रहें, बल्कि सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

नागरिकों से अपील है कि वे अपने-अपने RERA रजिस्ट्रेशन नंबर की स्थिति अवश्य जांचें और किसी भी तरह की जल्दबाजी में निवेश करने से बचें।

सतर्कता ही आर्थिक सुरक्षा का आधार है। अपने परिवार की मेहनत की कमाई और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक बनें।

संपादकीय सावधानी: 50 से अधिक प्रोजेक्ट के RERA रजिस्ट्रेशन रद्द होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

MahaRERA की आधिकारिक वेबसाइट: [https://maharera.maharashtra.gov.in/]















चिखलोली बांध से औद्योगिक जलापूर्ति का मामला गरमाया! MIDC के RTI जवाब के बाद Cloud 9 Beverages की भूमिका पर उठे सवाल।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित चिखलोली बांध से पानी के उपयोग और निजी टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक जलापूर्ति किए जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। इस मामले में MIDC से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब के बाद Cloud 9 Beverages की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर स्पष्टता लाने की मांग की गई है। साथ ही Bisleri कंपनी से संबंधित जलापूर्ति स्रोतों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं Sprouts News के वरिष्ठ प्रतिनिधि सुधीर शरद गुजर ने 2 नवंबर 2026 को इस संबंध में ठाणे जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन, सिंचाई विभाग, MIDC, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), FSSAI तथा केंद्रीय और महाराष्ट्र GST विभाग सहित विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों को शिकायत भेजी है। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी IAS तुकाराम मुंढे से भी मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

MIDC के RTI जवाब में क्या सामने आया?

शिकायत के अनुसार, सुधीर गुजर ने 8 जून 2026 को MIDC प्रशासन से जलापूर्ति संबंधी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में 19 जून 2026 को अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC के उपअभियंता ने जानकारी दी कि मेसर्स Cloud 9 Beverages को बाहरी निजी टैंकरों से पानी लाने के संबंध में MIDC की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति अथवा NOC जारी किए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा बाहरी स्रोत से पानी इस्तेमाल करने की अनुमति से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी RTI जवाब में सामने आई है।

MIDC प्रशासन ने 2 जून 2026 को कंपनी को नोटिस और 5 जून को रिमाइंडर जारी किया था। हालांकि, इन नोटिसों के बाद कंपनी ने क्या जवाब दिया और प्रशासन ने आगे क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी स्पष्ट होना अभी बाकी है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि RTI में उपलब्ध जानकारी Cloud 9 Beverages से संबंधित है। इसे Bisleri के खिलाफ किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Bisleri की जलापूर्ति व्यवस्था की जांच अलग से करने की मांग की गई है।

चिखलोली बांध से पानी लेने की अनुमति और टैंकर आपूर्ति की जांच की मांग

शिकायत में चिखलोली बांध से पानी निकालने की अनुमति, जल आवंटन, पानी की वास्तविक मात्रा और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की जांच करने का आग्रह किया गया है।

इसके साथ ही बांध परिसर में पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप, मोटर, पाइपलाइन और अन्य उपकरणों की जांच करने की मांग भी की गई है।

निजी टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति होने की स्थिति में टैंकर मालिकों, वाहन नंबरों, चालकों, प्रतिदिन होने वाले चक्करों, पानी की मात्रा और संबंधित कंपनियों में टैंकरों के प्रवेश का रिकॉर्ड जांचने की मांग की गई है।

Cloud 9 Beverages और Bisleri के जलस्रोतों की स्वतंत्र जांच

शिकायत में अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC स्थित प्लॉट नंबर K-29 पर मौजूद Cloud 9 Beverages (मेसर्स लवाडी फैब्रिका) तथा Bisleri से संबंधित जलापूर्ति व्यवस्था की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया है।

मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है:

- उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पानी का वास्तविक स्रोत।

- निजी टैंकरों से पानी लेने की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं का विवरण।

- जलापूर्ति से संबंधित वैध अनुमतियां और NOC।

- पानी की खरीद-बिक्री के बिल एवं भुगतान रिकॉर्ड।

- कंपनियों के जल उपयोग रजिस्टर और उत्पादन संबंधी दस्तावेज।

- पानी की गुणवत्ता और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट।

FDA और FSSAI से गुणवत्ता निरीक्षण का आग्रह

पेय पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला पानी उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए शिकायत में FDA और FSSAI से संबंधित उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करने तथा कच्चे पानी, शुद्ध किए गए पानी और तैयार पेय पदार्थों के नमूने मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांचने की मांग की गई है।

साथ ही फिल्ट्रेशन, डिसइन्फेक्शन, गुणवत्ता नियंत्रण और लाइसेंस की शर्तों के पालन की भी जांच करने का आग्रह किया गया है।

सुधीर गुजर ने कहा है कि यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए आवश्यक स्थिति में FSSAI लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

GST रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की मांग

शिकायत में केंद्रीय GST और महाराष्ट्र GST विभाग से पानी की खरीद-बिक्री से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच करने का भी अनुरोध किया गया है।

इसमें जलापूर्ति करने वालों का GST रजिस्ट्रेशन, जारी किए गए इनवॉइस, GST रिटर्न, कंपनियों के खरीद रिकॉर्ड, भुगतान और लागू होने की स्थिति में ई-वे बिल का मिलान करने की मांग शामिल है।

यदि जांच में कर चोरी, गलत बिलिंग या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग

मामले में कई विभागों का अधिकार क्षेत्र शामिल होने के कारण सुधीर गुजर ने ठाणे जिलाधिकारी के समन्वय से संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग की है।

इसमें पुलिस प्रशासन, सिंचाई एवं जलसंपदा विभाग, MIDC, FDA, FSSAI और GST विभाग के सक्षम अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

साथ ही चिखलोली बांध परिसर और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के CCTV फुटेज, टैंकरों के आवागमन का रिकॉर्ड, पानी की खरीद-बिक्री के दस्तावेज, प्रयोगशाला रिपोर्ट और वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रह सके।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें

इस मामले में अब मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आने जरूरी हैं। पहला, संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले पानी का आधिकारिक स्रोत क्या है? दूसरा, निजी टैंकरों से जलापूर्ति की स्थिति में आवश्यक अनुमतियां और रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं? और तीसरा, MIDC द्वारा जारी नोटिसों के बाद क्या कार्रवाई की गई?

फिलहाल शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित कंपनियों या सरकारी विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ अनियमितता का निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सार्वजनिक जलसंपदा का उचित उपयोग, औद्योगिक जलापूर्ति में पारदर्शिता और पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।


















महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण पर जोर, हर दो महीने में होगी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक।


मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने, उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने और पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से समीक्षा बैठकों की श्रृंखला की चौथी बैठक मुंबई के सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित की गई।

इस पहल के तहत पुलिस महानिदेशक (DGP) सदानंद दाते और गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा पाटणकर-म्हैसकर ने पुलिस विभाग से संबंधित प्रमुख विषयों पर नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक दो महीने में समीक्षा बैठक आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के बेहतर इस्तेमाल, पुलिस बल के आधुनिकीकरण और विशेष अपराध जांच इकाइयों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। इसके साथ ही महाराष्ट्र की तटीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी जोर दिया गया।

नशामुक्त महाराष्ट्र से लेकर साइबर सुरक्षा तक अहम मुद्दों पर चर्चा

महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने, गढ़चिरौली में नक्सलवाद के बाद विकास एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने और पुलिस व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग जैसे विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।

इसके अलावा साइबर अपराधों से निपटने की तैयारी, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने और पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पुलिस प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विजन के अनुरूप महाराष्ट्र पुलिस को अधिक सक्षम, सक्रिय और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल, अपराधों की जांच में आधुनिक प्रणालियों के समावेश और नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने को इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हर दो महीने में होने वाली समीक्षा बैठकों का उद्देश्य प्रमुख पुलिस विभाग के मुद्दों पर प्रगति का आकलन करना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और लंबित विषयों पर समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है।

इस पहल से पुलिस प्रशासन में जवाबदेही मजबूत करने, जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बदलती कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।

















पनवेल में कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला: दो बिल्डर गिरफ्तार, अदालत ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा।


 





नवी मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

पनवेल में संपत्ति के अधिकारों और व्यावसायिक साझेदारी से जुड़े एक मामले में दो बिल्डरों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता डॉ. भगवान जयवंत बिरमिळे की शिकायत के आधार पर पनवेल शहर पुलिस ने अविनाश दगडू जगदाळे और मनोज जयसिंह डोंगरे को गिरफ्तार किया है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, अदालत ने दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

यह मामला पनवेल के पुष्पकनगर, सेक्टर-2 स्थित भूखंड संख्या 456 से संबंधित है। आरोप है कि संपत्ति पर अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद के दौरान कुछ दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। मामले की वास्तविक परिस्थितियों, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।

क्या है पूरा मामला?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. भगवान जयवंत बिरमिळे और उनके व्यावसायिक साझेदार अविनाश दगडू जगदाळे तथा मनोज जयसिंह डोंगरे के बीच पुष्पकनगर स्थित भूखंड के विकास और उससे जुड़े व्यावसायिक लेन-देन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।

बताया गया है कि संबंधित भूखंड किसानों से विकास के उद्देश्य से साझेदारी के तहत लिया गया था। बाद में साझेदारों के बीच मतभेद बढ़ने के बाद मामला दीवानी न्यायालय तक पहुंच गया।

इस संपत्ति से संबंधित विशेष दीवानी वाद क्रमांक 208/2026 पनवेल स्थित दीवानी न्यायालय में लंबित होने की जानकारी दी गई है। इस मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों और संपत्ति पर अधिकारों को लेकर उठे सवाल अब पुलिस जांच का भी हिस्सा हैं।

कथित फर्जी दस्तावेजों को लेकर शिकायत

शिकायत के अनुसार, विवादित संपत्ति के संबंध में एक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और घोषणा-पत्र तैयार किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर उनकी जानकारी और सहमति के बिना किए गए तथा दस्तावेजों को वास्तविक बताकर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

शिकायतकर्ता का पक्ष है कि इन दस्तावेजों के इस्तेमाल से संपत्ति पर उनके अधिकारों की स्थिति प्रभावित हो सकती थी।

हालांकि, दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता, उन्हें तैयार करने वाले व्यक्तियों और न्यायालय में उनके इस्तेमाल से संबंधित परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। फिलहाल, इन आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और दर्ज धाराएं

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों की अनुमति से पनवेल शहर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

आरोपी अविनाश दगडू जगदाळे (32) और मनोज जयसिंह डोंगरे (37) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ये धाराएं आरोपों की प्रकृति के अनुसार धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने और साझा मंशा से किए गए कृत्यों से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी हैं। इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होना अपने आप में आरोपों के दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

दो दिन की पुलिस हिरासत, जांच में इन बिंदुओं पर ध्यान

प्रकाशित समाचार के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत मिली।

जांच के दौरान कथित तौर पर विवादित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया, उन पर किए गए हस्ताक्षर, दस्तावेजों के स्रोत और उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने की परिस्थितियों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, संबंधित संपत्ति के लेन-देन और साझेदारी से जुड़े अभिलेखों की जांच भी मामले की दिशा स्पष्ट करने में सहायक हो सकती है।

इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाला कुंभार के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन पोवार द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है।

तीन कंपनियों के नाम भी दस्तावेजों में दर्ज

उपलब्ध विवरण में जे. प्राइम बिल्डकॉन एलएलपी (J. Prime Buildcon LLP), वेंकटेशा रियल्टी एलएलपी (Venkatesha Realty LLP) और डी. बी. प्राइम बिल्डकॉन एलएलपी (D. B. Prime Buildcon LLP) के नामों का उल्लेख है।

हालांकि, इन कंपनियों की संबंधित संपत्ति के विकास या लेन-देन में वास्तविक भूमिका और कथित विवादित दस्तावेजों से उनके किसी संबंध के बारे में फिलहाल पर्याप्त स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। केवल किसी दस्तावेज में कंपनी का नाम दर्ज होने के आधार पर उसके खिलाफ किसी प्रकार की अनियमितता या आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

संपत्ति विवाद और आपराधिक जांच के बीच अंतर

इस प्रकरण में संपत्ति के स्वामित्व, साझेदारी और विकास से संबंधित दीवानी विवाद तथा कथित दस्तावेजी अनियमितताओं से जुड़ी आपराधिक जांच अलग-अलग कानूनी पहलू हैं।

दीवानी मुकदमे में संपत्ति से जुड़े अधिकारों और दावों पर न्यायालय विचार करेगा, जबकि पुलिस जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों तथा कथित दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पड़ताल की जाएगी। दोनों प्रक्रियाओं के निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होंगे।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

पनवेल के इस मामले में दो बिल्डरों की गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत की कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। विवादित दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों की जांच और संबंधित लेन-देन के अभिलेखों से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उचित होगा।