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आचार्य पवन त्रिपाठी: संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व का सशक्त चेहरा, भाजपा में निभा रहे अहम जिम्मेदारी।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आचार्य पवन त्रिपाठी संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक सरोकार और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका के कारण मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहचान रखते हैं। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े आचार्य पवन त्रिपाठी ने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

आचार्य पवन त्रिपाठी ने भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे और बाद में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्हें मुंबई भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं के समन्वय और जनसंपर्क को सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

राजनीतिक जीवन के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्हें देश के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़े विभिन्न कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह नियुक्ति उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का भी प्रमाण मानी जाती है।

मुंबई में विशेष रूप से उत्तर भारतीय (हिंदीभाषी) समाज के बीच आचार्य पवन त्रिपाठी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करते हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता से जुड़े कई अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

आचार्य पवन त्रिपाठी विभिन्न सरकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, वक्ता और मार्गदर्शक के रूप में भी आमंत्रित किए जाते हैं। संगठनात्मक अनुभव, समाजसेवा और जनसंपर्क के कारण वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व के संतुलित समन्वय के कारण आचार्य पवन त्रिपाठी ने मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की है। भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

















 

उल्हासनगर की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल: करोड़ों की लागत से बने अस्पतालों का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं? सुपर स्पेशियलिटी, कामगार और सेंट्रल हॉस्पिटल को लेकर उठे बड़े मुद्दे।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये के सरकारी खर्च से तैयार किए गए अस्पतालों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कामगार हॉस्पिटल और सेंट्रल हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सबसे अधिक चर्चा उल्हासनगर स्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को लेकर हो रही है। आरोप है कि राज्य सरकार ने इस अस्पताल के निर्माण और अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन बाद में इसके संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंप दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों से विभिन्न सेवाओं के नाम पर शुल्क लिया जाता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के लिए इस अस्पताल का लाभ लेना कठिन हो गया है। लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल सरकारी धन से तैयार किया गया है तो आम नागरिकों को सस्ती या निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं क्यों नहीं मिल रही हैं।

वहीं, उल्हासनगर-3 स्थित कामगार हॉस्पिटल को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यह अस्पताल पहले मुख्य रूप से औद्योगिक कामगारों के इलाज के लिए बनाया गया था। समय के साथ पर्याप्त सुविधाओं और मरीजों की कमी के कारण अस्पताल की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। आरोप है कि वर्षों तक सरकारी धन और कर्मचारियों के वेतन पर भारी खर्च होता रहा, लेकिन अस्पताल आम जनता के लिए प्रभावी स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाया। हाल ही में सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर इस अस्पताल का पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण कराया है। अब नागरिकों की मांग है कि सरकार स्पष्ट करे कि क्या यह अस्पताल अब गरीब और सामान्य नागरिकों के लिए पूरी तरह उपलब्ध है या फिर पहले जैसी स्थिति बनी हुई है।

उधर, उल्हासनगर-3 के सेंट्रल हॉस्पिटल की स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं और गरीब मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल रहा है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय निर्माण कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और फर्जी बिलों की जांच चल रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

सेंट्रल हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. बनसोडे को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि मरीजों के प्रति लापरवाही और उपचार में कथित अनियमितताओं के कारण उन्हें पहले भी निलंबन का सामना करना पड़ा था। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि वर्तमान में भी अस्पताल में मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इन सभी मुद्दों के बीच स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि सरकारी धन से निर्मित अस्पतालों का वास्तविक लाभ गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचे।

यदि समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया तो आम जनता के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि वे इन आरोपों और जनभावनाओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा आवश्यक कार्रवाई करते हैं।















सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का जनहित अभियान, 15 जुलाई को निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा और जनस्वास्थ्य को समर्पित सप्तध्यान फाउंडेशन एवं सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार, 15 जुलाई को मानसून स्पेशल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर का उद्देश्य सभी आयु वर्ग के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराना है, ताकि लोग समय रहते विभिन्न बीमारियों की पहचान कर उचित उपचार शुरू कर सकें।

यह स्वास्थ्य शिविर दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा। शिविर में सभी जांच और परामर्श पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस विशेष शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी कि मुंबई के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी स्वयं उपस्थित रहकर लोगों की आंखों की जांच करेंगे। मोतियाबिंद सहित विभिन्न नेत्र रोगों की जांच कर मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया जाएगा। इससे क्षेत्र के नागरिकों को महानगर स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा अपने शहर में ही प्राप्त होगी।

शिविर के दौरान मधुमेह, किडनी, फेफड़ों, थायरॉयड, नसों और हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान के लिए कई महत्वपूर्ण जांचें निःशुल्क की जाएंगी। इनमें HbA1c (डायबिटीज जांच), RBS (ब्लड शुगर), PFT (फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच), UACR (किडनी स्वास्थ्य जांच), न्यूरोपैथी स्क्रीनिंग, थायरॉयड जांच, लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल जांच) तथा मोतियाबिंद एवं अन्य नेत्र रोगों की जांच शामिल हैं।

आयोजकों ने क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं मधुमेह, रक्तचाप तथा आंखों की समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी जांच के लिए अवश्य लेकर आएं। समय पर स्वास्थ्य जांच कई गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिविर से संबंधित अधिक जानकारी एवं पंजीकरण के लिए सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल से 8237898959 तथा योगाचार्य सतीश शर्मा से 9011808012 पर संपर्क किया जा सकता है।

"आपका स्वास्थ्य हमारा मिशन है, आपकी मुस्कान हमारा सम्मान है।"
















'देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव' के अंतर्गत छत्रपति संभाजीनगर में तलवारबाजी प्रतियोगिता का आयोजन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटिल की रही विशेष उपस्थिति।


 







छत्रपति संभाजीनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र के लोकप्रिय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पूरे राज्य में आयोजित किए जा रहे "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" के अंतर्गत छत्रपति संभाजीनगर में भव्य तलवारबाजी (फेंसिंग) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

प्रतियोगिता में उपस्थित अतिथियों ने आयोजकों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में खेल भावना, अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही ऐसी प्रतियोगिताएं राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का उत्कृष्ट मंच भी प्रदान करती हैं।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटिल की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेल संस्कृति को मजबूत बनाने और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आयोजकों द्वारा किए गए सफल आयोजन की भी प्रशंसा की।

कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों ने तलवारबाजी की रोमांचक प्रतिस्पर्धाओं में अपने कौशल का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने भाग लेकर खेल के प्रति अपने समर्पण और प्रतिभा का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ना, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा राज्य में खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। इस महोत्सव के माध्यम से प्रदेशभर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिससे हजारों युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।

स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें नशामुक्त, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन की ओर प्रेरित करने की दिशा में "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" एक प्रेरणादायी पहल के रूप में देखा जा रहा है।





















उल्हासनगर मनपा के मैन्युअल टेंडर विवाद ने पकड़ा तूल: भाजपा नगरसेवक संजय सिंह ने आयुक्त पर नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में मैन्युअल पद्धति से जारी किए गए टेंडरों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवक एवं स्थायी समिति सदस्य संजय अयोध्याप्रसाद सिंह ने महानगरपालिका आयुक्त को एक लिखित पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि विभिन्न विकास कार्यों के लिए मैन्युअल प्रणाली से जारी की गई निविदाओं (टेंडरों) की जानकारी नियमानुसार स्थायी समिति को नहीं दी जा रही, जिससे महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है।

संजय सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 73 के अनुसार आयुक्त द्वारा किए गए ऐसे अनुबंध, जिनकी राशि निर्धारित सीमा के अंतर्गत आती है, उनकी जानकारी अनुबंध किए जाने की तारीख से 15 दिनों के भीतर स्थायी समिति को देना अनिवार्य है। उनका आरोप है कि प्रशासन इस कानूनी प्रावधान का पालन नहीं कर रहा है और स्थायी समिति को अंधेरे में रखकर कार्यवाही की जा रही है।

पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर न केवल अधिनियम की अवहेलना की जा रही है, बल्कि स्थायी समिति का भी अपमान किया जा रहा है। साथ ही, स्थायी समिति के सदस्यों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया है।

इन आरोपों के आधार पर संजय सिंह ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि मैन्युअल पद्धति से जारी किए गए सभी टेंडरों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए, जब तक कि पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर नियमों के अनुसार जानकारी स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जाती।

उन्होंने अपने पत्र की प्रतिलिपि मुख्य लेखा अधिकारी, मुख्य लेखा परीक्षक तथा शहर अभियंता को भी भेजी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल प्रशासनिक पत्राचार तक सीमित न रहकर वित्तीय और तकनीकी विभागों के संज्ञान में भी लाया गया है।

उल्हासनगर महानगरपालिका में पिछले कुछ समय से टेंडर प्रक्रिया, विकास कार्यों और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में संजय सिंह द्वारा उठाया गया यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है। यदि इस मामले की जांच होती है और आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।















ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद में बड़ा फैसला: नवाब मलिक की भांजी और AIMIM पार्षद अयोग्य, बीएमसी की दो सीटें खाली।

 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में जाति प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर की जा रही जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला सामने आया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की दो महिला पार्षदों की सदस्यता उनके जाति प्रमाणपत्र अमान्य पाए जाने के बाद समाप्त कर दी गई है। इस कार्रवाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता नवाब मलिक की भांजी सनोबर मलिक और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की पार्षद नाज़िया पटेल को अयोग्य घोषित किया गया है।

राज्य सरकार ने यह निर्णय सक्षम जाति सत्यापन समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया। समिति ने जांच के दौरान दोनों जनप्रतिनिधियों के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के जाति प्रमाणपत्रों को वैध नहीं माना। इसके बाद महाराष्ट्र के संबंधित प्रावधानों के तहत उनकी पार्षद सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।

सनोबर मलिक मुंबई महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 137, जबकि नाज़िया पटेल वार्ड क्रमांक 98 से निर्वाचित हुई थीं। दोनों वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित थे। आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र और उसका सत्यापन अनिवार्य होता है। जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित होने के बाद संबंधित निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त होने का प्रावधान है।

इस फैसले के बाद दोनों वार्डों की सीटें रिक्त हो गई हैं। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, उपचुनाव की तारीखों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी पड़ सकता है। जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर राज्य में पहले भी कई जनप्रतिनिधियों की सदस्यता पर सवाल उठ चुके हैं और विभिन्न मामलों की सुनवाई जारी है।

यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि आरक्षित श्रेणी की सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जाति प्रमाणपत्र की वैधता और उसका विधिवत सत्यापन कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि जांच में प्रमाणपत्र अमान्य पाया जाता है, तो निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।















महादेव बेटिंग ऐप पर बड़ा शिकंजा: मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार, जांच के दायरे में देशभर के नेटवर्क; उल्हासनगर कनेक्शन पर भी एजेंसियों की नजर।


मुंबई/नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप प्रकरण में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। महादेव ऐप के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद ओमान से गिरफ्तार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही उसे भारत लाकर पूछताछ की जाएगी। इस गिरफ्तारी को ऑनलाइन सट्टेबाजी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप के माध्यम से देशभर में हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी कारोबार का संचालन किए जाने के आरोप हैं। इस मामले में पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच एजेंसियां तथा अन्य संबंधित संस्थाएं मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है। एजेंसियां उन व्यक्तियों, ऑपरेटरों और कथित बुकी नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनके माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किए जाने की आशंका है। डिजिटल भुगतान, बैंक खातों, हवाला चैनलों, विदेशी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है।

उल्हासनगर के कथित सट्टा नेटवर्क पर भी उठे सवाल

जांच के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि महाराष्ट्र के उल्हासनगर से जुड़े कुछ कथित सट्टा संचालकों और बुकी नेटवर्क की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, इन नेटवर्कों के गोवा, दुबई और अन्य विदेशी ठिकानों से कथित संपर्कों की भी जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि वित्तीय लेन-देन और डिजिटल ट्रेल में कोई कड़ी मिलती है, तो जांच एजेंसियां संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर सकती हैं।

हालांकि, अब तक किसी भी व्यक्ति, बुकी या संगठन का नाम ईडी, सीबीआई, पुलिस अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि इस समय नहीं की जा सकती।

पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। इससे देशभर में फैले ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट, हवाला नेटवर्क, फर्जी कंपनियों, बैंकिंग चैनलों तथा कथित सहयोगियों की भूमिका पर भी नया खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से जितनी जानकारी साझा की जाएगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई और खुलासे सामने आएंगे।