उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका के PWD विभाग में अधिकारियों की पदोन्नति और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में कार्यरत उप अभियंता संदीप जाधव पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने मनपा से जुड़े एक कथित दलाल के साथ मिलीभगत कर श्रीमती रमाबाई नारायण पाटिल (विवाह के बाद: मनाली मनील भोईर) को आगे कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer) के पद पर नियुक्त अथवा पदोन्नत कराने के लिए कथित रूप से प्रयास किए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती रमाबाई नारायण पाटिल इ.मा.व. यानी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी से संबंधित हैं और उनका क्षेत्र कोंकण-2 बताया गया है। उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से उप अभियंता (सिविल/स्थापत्य) के रिक्त पद पर नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब इसी नियुक्ति के बाद उन्हें कार्यकारी अभियंता के पद तक पहुंचाने के लिए कथित रूप से कुछ अधिकारियों और मनपा से जुड़े लोगों द्वारा प्रयास किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
🔴 पदोन्नति प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी अधिकारी की नियुक्ति उप अभियंता पद पर हुई है, तो उसे कार्यकारी अभियंता पद पर पदोन्नत करने के लिए नियम, पात्रता, वरिष्ठता, विभागीय प्रक्रिया और शासन के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है या नहीं।
आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में संदीप जाधव की कथित भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में संबंधित नियुक्ति एवं पदोन्नति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
🔎 ACB जांच को लेकर भी सवाल
संदीप जाधव को लेकर यह भी आरोप सामने आया है कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संबंधित जांच पहले से चल रही है। यदि यह जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों से सत्यापित होती है, तो ऐसी स्थिति में उनके प्रशासनिक निर्णयों और पदोन्नति प्रक्रिया में कथित भूमिका की भी निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
💰 PWD में कथित बोगस बिलों का मामला
इसके अलावा, PWD विभाग में संदीप जाधव के कार्यकाल को लेकर कथित बोगस बिलों के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे बिल तैयार किए गए, जिनकी जांच किए जाने की आवश्यकता है।
यह भी आरोप है कि संदीप जाधव पिछले करीब 20 वर्षों से PWD विभाग में कार्यरत हैं और इस दौरान शंकर नामक व्यक्ति के साथ मिलकर कथित रूप से कई अनियमितताएं की गईं।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, बिलों, टेंडर दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकती है।
📌 उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले को लेकर मांग की जा रही है कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार द्वारा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। विशेष रूप से—
उप अभियंता से कार्यकारी अभियंता पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया की जांच हो।
संबंधित अधिकारी की पात्रता और वरिष्ठता की जांच की जाए।
नियुक्ति एवं पदोन्नति से संबंधित शासनादेश और विभागीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।
PWD विभाग के पिछले वर्षों के कथित बोगस बिलों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
संबंधित ठेकेदारों एवं मध्यस्थों की भूमिका की जांच की जाए।
यदि ACB जांच वास्तव में लंबित है, तो उसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।
उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से उल्हासनगर की जनता की विनम्र अपील है कि संदीप जाधव को उप अभियंता अथवा कार्यकारी अभियंता का पद न दिया जाए, बल्कि उन्हें केवल कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer) के पद पर ही नियुक्त/तैनात किया जाए।
अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाती है।
नोट: उपरोक्त रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों/व्यक्तियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।