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उल्हासनगर-3: होटल डॉल्फीन क्लब के बाहर ₹20 हजार के लेन-देन को लेकर कथित मारपीट व चाकू हमले का आरोप। मध्यवर्ती पुलिस ने BNS की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू की।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर-3 स्थित होटल डॉल्फीन क्लब के गेट के सामने कथित तौर पर दिनदहाड़े मारपीट और चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्यवर्ती पुलिस थाने में FIR No. 0565/2026, दिनांक 25 सितंबर 2026, को दर्ज की गई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत और उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता जयेश सुंदरदास आहूजा (31), निवासी कल्याण पश्चिम, का करीब ₹20 हजार का कथित आर्थिक लेन-देन फिरोज जवरानी नामक व्यक्ति के साथ था। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित रकम वापस नहीं मिलने तथा फोन पर संपर्क नहीं होने के बाद वह उक्त व्यक्ति से मिलने के लिए गया था।

बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने का आरोप

शिकायतकर्ता के बयान के मुताबिक, 25 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे वह होटल डॉल्फीन क्लब के पास मौजूद था। इसी दौरान रोशन हरेश पुरुस्वानी अपने दो साथियों के साथ कथित तौर पर वहां पहुंचा।

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर गाली-गलौज तथा मारपीट शुरू हो गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान उस पर चाकू/कटरनुमा हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी नाक पर चोट लगी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई तथा उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

BNS की इन धाराओं के तहत मामला दर्ज

उपलब्ध FIR विवरण के अनुसार, मध्यवर्ती पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 118(1), 115(2), 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जांच अधिकारी: पुलिस निरीक्षक विठ्ठल बाबासाहेब बधे।

राजनीतिक संबंध को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आरोपी रोशन पुरुस्वानी और शिवसेना के मौजूदा नगरसेवक जम्मू पुरुस्वानी के परिवार के बीच कथित पारिवारिक संबंध होने की चर्चा भी सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध स्रोतों के आधार पर इस कथित पारिवारिक संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR को केवल कथित पारिवारिक या राजनीतिक संबंधों के आधार पर किसी राजनीतिक दल अथवा निर्वाचित प्रतिनिधि की जिम्मेदारी से जोड़ना भी उचित नहीं होगा। यदि कोई आपराधिक कृत्य हुआ है, तो उसकी जांच संबंधित पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

पूर्व घटनाओं को लेकर भी दावे, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर आरोपी के खिलाफ पहले भी लोगों को डराने-धमकाने अथवा मारपीट जैसी घटनाओं में कथित रूप से शामिल होने की चर्चाएं होने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इन अतिरिक्त आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पुराने मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें किसी स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। पुलिस जांच के दौरान यदि ऐसे किसी पूर्व रिकॉर्ड की पुष्टि होती है, तो संबंधित जानकारी आधिकारिक स्रोतों के आधार पर सामने आ सकती है।

नागरिकों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील

मारपीट, धमकी, जबरन वसूली या किसी अन्य प्रकार की आपराधिक घटना का सामना करने वाले नागरिकों को कानून अपने हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। आपात स्थिति में 112 पर पुलिस सहायता प्राप्त की जा सकती है।

पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल यह मामला पुलिस में दर्ज FIR और शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। पुलिस जांच के दौरान उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

महत्वपूर्ण कानूनी नोट: FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। आरोपी को दोष सिद्ध होने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है।

स्रोत: मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, ठाणे शहर — FIR Copy No. 0565, दिनांक 25/09/2026; शिकायतकर्ता का बयान।



















उल्हासनगर की निर्माणाधीन इमारतों के OC-CC को लेकर विवाद, स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण में अंतर की जांच की मांग; बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और TPD विभाग की भूमिका पर भी सवाल।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में तेजी से हो रहे नए भवन निर्माण के बीच स्वीकृत प्लान, वास्तविक निर्माण और Occupancy Certificate (OC) तथा Completion Certificate (CC) जारी किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर में निर्माणाधीन इमारतों को लेकर कथित तौर पर यह शिकायत सामने आ रही है कि निर्माण कार्य को स्वीकृत प्लान के अनुरूप पूर्ण दिखाने के बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत OC और CC जारी किए जाते हैं, जबकि बाद के चरण में उन्हीं इमारतों में स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण या बदलाव किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी इमारत को महानगरपालिका के संबंधित विभाग द्वारा OC या CC जारी किया गया है, तो उसके बाद वहां होने वाले कथित अतिरिक्त निर्माण, फेरबदल या प्लान से अलग किए गए कार्यों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है।

बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतों और उठाए जा रहे सवालों के केंद्र में निर्माणकर्ताओं (Builders), आर्किटेक्ट्स तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग की भूमिका भी बताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जानकारों के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना में स्वीकृत प्लान और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण के बीच समानता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किए जाने का आरोप है, तो संबंधित दस्तावेजों, मंजूर नक्शे, साइट निरीक्षण रिपोर्ट और जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

OC और CC जारी होने के बाद कथित उल्लंघन का मुद्दा

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि OC और CC जारी किए जाने के समय संबंधित इमारत की वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या निर्माण कार्य स्वीकृत प्लान के अनुरूप था?

यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद किसी इमारत में स्वीकृत प्लान से अलग निर्माण किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी और वैधानिक स्थिति अलग-अलग तथ्यों एवं दस्तावेजों की जांच के बाद ही निर्धारित की जा सकती है।

इसी वजह से शहर में कुछ नागरिकों और संबंधित शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग उठाई जा रही है कि हाल के वर्षों में जारी किए गए OC और CC से जुड़े मामलों का दस्तावेजी और स्थल निरीक्षण के आधार पर ऑडिट किया जाए।

रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर

मामले की निष्पक्ष जांच के दौरान निम्न बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है—

- संबंधित इमारत का मूल स्वीकृत प्लान क्या था?

- निर्माण के दौरान कितने संशोधित प्लान मंजूर किए गए?

- मौके पर वास्तविक निर्माण स्वीकृत प्लान के अनुरूप है या नहीं?

- OC और CC जारी करने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था या नहीं?

- निरीक्षण के दौरान तैयार की गई रिपोर्ट में क्या उल्लेख किया गया है?

- प्रमाणपत्र जारी होने के बाद इमारत में कोई अतिरिक्त निर्माण या बदलाव किया गया या नहीं?

- यदि कोई कथित उल्लंघन पाया गया, तो महानगरपालिका द्वारा उस पर क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों के जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकते हैं।

प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ रहे निर्माण को देखते हुए OC और CC जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमानुसार निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी निर्माण परियोजना के संबंध में शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित स्वीकृत प्लान, साइट की मौजूदा स्थिति और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच से विवाद की वास्तविकता सामने आ सकती है।

फिलहाल, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स अथवा महानगरपालिका के किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को आधिकारिक रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजी जांच और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

उल्हासनगर महानगरपालिका के TPD विभाग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित बिल्डरों/आर्किटेक्ट्स की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

















एमएम ग्रुप की गणपति परंपरा जारी: 2012 में 321 से बढ़कर 2026 में 351 मूर्तियों की स्थापना, आज होगा विसर्जन।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के अवसर पर एमएम ग्रुप की ओर से इस वर्ष बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रुप के अनुसार, साल 2026 में कुल 351 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई है। इन सभी मूर्तियों का विसर्जन आज किया जा रहा है।

एमएम ग्रुप से जुड़े सदस्यों के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना और उनके विधिवत विसर्जन की परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012 में ग्रुप की ओर से 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। इसके बाद इस संख्या में बढ़ोतरी होने की जानकारी दी गई है।

2012 में 321 से 2026 में 351 मूर्तियां

एमएम ग्रुप के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2012 में 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 351 बताई जा रही है। इस तरह 14 वर्षों के दौरान स्थापित की जाने वाली गणपति मूर्तियों की संख्या में 30 की वृद्धि दर्ज होने की बात कही गई है।

आज गणपति विसर्जन के अवसर पर ग्रुप से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य इस आयोजन में शामिल होकर स्थापित गणपति मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने का दावा

एमएम ग्रुप की ओर से यह भी बताया गया है कि ग्रुप का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह जानकारी ग्रुप के सदस्यों द्वारा साझा की गई है। रिकॉर्ड से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर उसके आधार पर अतिरिक्त जानकारी सामने रखी जा सकती है।

ये हैं एमएम ग्रुप के पदाधिकारी और सदस्य

एमएम ग्रुप से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:

अनिल — ग्रुप अध्यक्ष

सनी — ग्रुप उपाध्यक्ष

बंटी — सदस्य

बबलो — सदस्य

रवि — सदस्य

हिमेश — सदस्य

हिरेन — सदस्य

गणपति विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के गणेशोत्सव का यह आयोजन भी संपन्न हो रहा है। एमएम ग्रुप की ओर से हर वर्ष गणपति स्थापना और विसर्जन से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता की जाती है।



















उल्हासनगर में सनद वितरण को लेकर विवाद: SDO विजयानंद शर्मा के खिलाफ जांच के निर्देश, 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी।



 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर शहर में जमीन एवं संपत्ति से संबंधित सनद वितरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद राज्य सरकार की ओर से कोंकण आयुक्त और ठाणे जिलाधिकारी को मामले की जांच कर निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का दावा किया गया है।

उपलब्ध ठाणे जिला प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार श्री विजयानंद स्वानंद शर्मा उल्हासनगर के उपविभागीय अधिकारी (SDO) के पद पर कार्यरत हैं।

सनद वितरण में अनियमितताओं का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने आरोप लगाया है कि उल्हासनगर उपविभागीय अधिकारी कार्यालय के माध्यम से सनद वितरण की प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले कोंकण आयुक्त के समक्ष शिकायत रखते हुए विभागीय जांच की मांग की थी।

साल्वे का दावा है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने राज्य सरकार का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया और मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन/अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया।

राज्य सरकार के हस्तक्षेप का दावा

साल्वे के अनुसार, उनके आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मामले का संज्ञान लेते हुए कोंकण आयुक्त तथा ठाणे जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। इसमें उल्हासनगर के SDO श्री विजयानंद शर्मा से संबंधित लगाए गए आरोपों की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

यदि यह जांच औपचारिक रूप से शुरू होती है, तो सनद वितरण से संबंधित रिकॉर्ड, प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण होगी।

निष्पक्ष जांच और संपत्ति की जांच की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता नोवेल साल्वे ने राज्य सरकार से मांग की है कि सनद वितरण से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ SDO विजयानंद शर्मा को निलंबित करने और उनकी व्यक्तिगत संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है।

साल्वे ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

जांच पूरी होने तक आरोपों की पुष्टि नहीं

हालांकि, किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष आने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। राज्य सरकार द्वारा कथित तौर पर मांगी गई जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की प्रशासनिक अथवा अन्य स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।

इस मामले में SDO विजयानंद शर्मा, कोंकण आयुक्त कार्यालय और ठाणे जिलाधिकारी प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

नोट: सनद वितरण से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध स्रोतों से नहीं हुई है। यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और कथित सरकारी जांच-निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है।




















काळाचौकी महागणपति पंडाल में करंट से दो मौतों के बाद मानवाधिकार आयोग में शिकायत, सुरक्षा ऑडिट की मांग।


 
मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

मुंबई के काळाचौकी स्थित महागणपति उत्सव मंडल में बिजली के करंट से दो लोगों की मौत और चार के घायल होने के बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दाखिल की गई है।

मुंबई के काळाचौकी स्थित महागणपति मंडप में बिजली का करंट लगने से दो लोगों की मौत और चार लोगों के घायल होने के बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज हुई।

अधिवक्ता आशिष राय ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप मांगा

बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिवक्ता आशिष राय ने शिकायत में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग से गणेशोत्सव के दौरान सार्वजनिक पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल हस्तक्षेप और निर्देश जारी करने की मांग की है।

शिकायत में मुंबई पुलिस, बीएमसी, बेस्ट, महाराष्ट्र सरकार, मंत्रालय और महागणपति मंडल, काळाचौकी सहित संबंधित प्राधिकरणों की कथित लापरवाही की जांच तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

यह शिकायत 20 सितंबर की उस घटना के बाद सामने आई, जिसमें महागणपति उत्सव मंडल के प्रवेश द्वार के पास अस्थायी पानी और शीतपेय स्टॉल के निकट करंट फैलने की सूचना मिली।

मृतकों और घायलों की पहचान सामने आई

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की पहचान आठ वर्षीय रागिनी घनश्याम यादव और 33 वर्षीय सुजाता बालराज थोडेटी के रूप में हुई है; चार अन्य लोग घायल हुए।

घायलों में 12 वर्षीय रूही शैलेश सिंह की हालत गंभीर बताई गई, जबकि किरण अकबर नाइक, तन्वी नरेश हांडे और साहिल संदीप तारे स्थिर बताए गए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, घटना दत्ताराम लाड मार्ग स्थित दिग्विजय मिल चाल के पास हुई, जहां गणेशोत्सव की भीड़ के बीच अस्थायी विद्युत व्यवस्था और पानी का स्टॉल संचालित था।

बीएमसी के अनुसार, मंडल की रोशनी और शीतपेय स्टॉल के लिए अस्थायी बिजली मीटर लगाया गया था। बाद में स्थानीय बिजली मिस्त्री ने मीटर की वायरिंग और एमसीबी काट दी।

बेस्ट निरीक्षण और पुलिस जांच जारी

घटना के बाद बेस्ट अधिकारियों ने दिग्विजय मिल चाल में डीएलएम-14 पोल के पास विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया, जबकि काळाचौकी पुलिस ने जांच के लिए मीटर निरीक्षक को बुलाया।

पुलिस ने इस मामले में स्टॉल संचालक कमल शेट्टी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 125(b) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी।

आशिष राय की शिकायत में प्राथमिकी दर्ज करने में कथित देरी, पंडालों में भीड़ प्रबंधन की कमी, विद्युत सुरक्षा में लापरवाही और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर तत्काल अंतरिम आदेश मांगे गए हैं।

राज्यभर के गणेश पंडालों के सुरक्षा ऑडिट की मांग

शिकायतकर्ता ने राज्यभर के सार्वजनिक गणेश पंडालों में सुरक्षा ऑडिट और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, क्योंकि गणेशोत्सव के अभी कुछ दिन शेष हैं।

मानवाधिकार आयोग के समक्ष यह शिकायत ऐसे समय आई है जब बड़े गणेश पंडालों में भारी भीड़, अस्थायी बिजली कनेक्शन और सार्वजनिक आवागमन की सुरक्षा प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

इस शिकायत में उठाए गए आरोपों और मांगों पर संबंधित प्राधिकरणों का पक्ष तथा महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी, जबकि घटना की पुलिस जांच जारी है।

















ग्रामीण विकासाला ध्येय मानून जनसेवेचा अविरत प्रवास संघर्षातून विकासाची अभेद्य वाटचाल— आमदार श्री. किसन कथोरे


 











बदलापुर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

एखाद्या नेत्याची ओळख केवळ त्याने किती निवडणुका जिंकल्या यावर होत नाही, तर त्याने सामान्य माणसाच्या जीवनात किती सकारात्मक बदल घडवून आणला, आपल्या मातीतल्या प्रश्नांना किती ताकदीने वाचा फोडली आणि पुढच्या पिढीसाठी काय निर्माण केले, यावर त्याचे नेतृत्व सिद्ध होते. आमदार श्री. किसन कथोरे यांचा प्रवास हा अशाच संघर्षातून, जिद्दीतून, लोकसेवेच्या ध्यासातून आणि विकासाच्या दूरदृष्टीतून घडलेला प्रवास आहे.

संघर्षमय बालपणातून नेतृत्वाची पायाभरणी

आज मोठ्या विकासकामांसाठी शासनाच्या दारात ठामपणे उभे राहणाऱ्या किसन कथोरे यांच्या आयुष्याची सुरुवात मात्र अत्यंत साध्या आणि संघर्षमय परिस्थितीत झाली.

बालपणी उल्हासनगरहून गोळ्या-चॉकलेट आणून ती विकायची आणि त्यातून मिळणाऱ्या पैशांत घरासाठी भात खरेदी करायचा, असा त्यांचा संघर्षमय काळ. या अनुभवांनी त्यांना गरिबी, कष्ट आणि सामान्य कुटुंबाच्या अडचणी जवळून समजून घेतल्या, शिक्षण घेत असतानाच मागासलेल्या आणि विकासापासून दूर असलेल्या भागासाठी काहीतरी करण्याची धडपड त्यांच्या मनात निर्माण झाली. हीच धडपड पुढे सामाजिक आणि राजकीय प्रवासाची प्रेरणा ठरली.

बिनविरोध सरपंच ते व्यापक नेतृत्व

स्थानिक जनतेचा विश्वास संपादन करत त्यांनी बिनविरोध सरपंच म्हणून जबाबदारी स्वीकारली. पद मिळाले म्हणून काम करण्यापेक्षा कामातून पदाला प्रतिष्ठा मिळवून देण्याचा त्यांचा स्वभाव याच काळात दिसून आला, गावाच्या विकासासाठी त्यांनी तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबासाहेब भोसले यांना ग्रामपंचायत कार्यालयाच्या उद्घाटनासाठी निमंत्रित केले. मुख्यमंत्र्यांना गावात आणून केवळ उद्घाटन करण्यापुरते न थांबता त्यांनी स्थानिक रस्ते आणि वीजेचे प्रश्न त्यांच्या निदर्शनास आणून दिले आणि ते प्रश्न मार्गी लावण्यासाठी प्रयत्न केले. गावाचा प्रश्न हा छोटा नसतो, तर तो हजारो कुटुंबांच्या जीवनाशी जोडलेला असतो, ही त्यांची भूमिका याच काळात स्पष्ट झाली.

महाराष्ट्रातील सरपंच संघटनेपासून जिल्हा परिषदेपर्यंत

गावपातळीवर काम करताना अनेक सरपंचांच्या समस्या आणि अडचणी त्यांच्या लक्षात आल्या. त्यातूनच महाराष्ट्रात सरपंच संघटनेची स्थापना करण्याची कल्पना पुढे आली. स्थानिक स्वराज्य संस्थांना बळकटी देण्यासाठी संघटित नेतृत्वाची गरज त्यांनी ओळखली. यानंतर पंचायत सभापती निवडणूक आणि पुढे जिल्हा परिषद निवडणूक हा त्यांच्या राजकीय प्रवासातील महत्त्वाचा टप्पा ठरला. पहिल्याच जिल्हा परिषद कार्यकाळात त्यांनी बांधकाम व आरोग्य सभापती तसेच अध्यक्ष म्हणून जबाबदारी सांभाळली. प्रशासनातील कार्यपद्धती, नियोजन, निधीचा योग्य वापर आणि ग्रामीण भागाच्या गरजा यांचा जवळून अभ्यास त्यांनी केला, याच काळात जिल्हा परिषदेच्या कामकाजात नवे प्रयोग करण्याचा प्रयत्न झाला, भारतातील पहिली ISO मानांकन प्राप्त जिल्हा परिषद म्हणून ठाणे जिल्हा परिषदेला ओळख निर्माण करून देण्याच्या दिशेने त्यांनी महत्त्वपूर्ण काम केले.

‘विना दप्तर शाळा’ आणि शिक्षणाची नवी संकल्पना

ग्रामीण भागातील मुलांना दर्जेदार शिक्षण मिळावे, शिक्षणाचा बोजा न वाटता त्यातून ज्ञान, कौशल्य आणि व्यक्तिमत्त्व विकास व्हावा, यासाठी ‘विना दप्तर शाळा’ ही संकल्पना पुढे आली, शाळा ही केवळ इमारत नसून विद्यार्थ्यांच्या भवितव्याची पायाभरणी करणारे केंद्र असले पाहिजे, या विचारातून शिक्षण क्षेत्रात विविध प्रयोग करण्यात आले, ग्रामीण विकासाच्या कामांना आर्थिक पाठबळ मिळावे यासाठी नाबार्डच्या विविध आर्थिक योजनांचा प्रभावी वापर करण्यावरही त्यांनी भर दिला.

जिल्हा परिषद अध्यक्षपद

दुसऱ्या जिल्हा परिषद निवडणुकीतही जनतेने त्यांच्या नेतृत्वावर विश्वास ठेवला आणि त्यांची जिल्हा परिषद अध्यक्षपदी निवड झाली. या काळात ग्रामीण भागातील पायाभूत सुविधा, आरोग्य, शिक्षण, रस्ते आणि विकासकामांना अधिक व्यापक दिशा देण्यात आली.

विधानसभेच्या राजकारणात प्रवेशाची पहिली हाक

२००४ च्या विधानसभा निवडणुकीपूर्वी तत्कालीन ज्येष्ठ नेते मा. शरद पवार साहेबांनी ठाणे जिल्ह्यातील २४ आमदारांचा अहवाल मागवला. त्यानंतर अंबरनाथ विधानसभा मतदारसंघातून निवडणुकीची तयारी करण्याची जबाबदारी किसन कथोरे यांच्यावर सोपवण्यात आली हा त्यांच्या आयुष्यातील निर्णायक क्षण होता. या प्रवासात डोणगावकर साहेबांचा प्रभाव, कोकाटे साहेबांचे मार्गदर्शन आणि विशेषतः डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी यांचे जीवनातील महत्त्वपूर्ण स्थान त्यांनी कायम मान्य केले आहे. या व्यक्तिमत्त्वांकडून मिळालेली प्रेरणा, संस्कार आणि सामाजिक बांधिलकी त्यांच्या पुढील कार्यात दिसून येते.

विधानसभेची पहिली पायरी

पहिली विधानसभा निवडणूक म्हणजे त्यांच्या राजकीय प्रवासातील पहिली मोठी पायरी होती, विधानसभेत पोहोचल्यानंतर केवळ राजकारण करायचे नाही, तर मतदारसंघात नवे प्रकल्प आणायचे, ग्रामीण भागाला विकासाच्या मुख्य प्रवाहात आणायचे आणि सामान्य नागरिकांचे जीवनमान उंचवायचे, हा त्यांचा संकल्प होता. याच ध्यासातून त्यांनी विविध विकासकामांचा पाठपुरावा सुरू केला.युरोप अभ्यास दौरा आणि विकासाची नवी दृष्टी युरोप अभ्यास दौऱ्याने त्यांच्या विकासदृष्टीला आणखी व्यापक आकार दिला. जगातील विकसित देशांमधील पायाभूत सुविधा, वाहतूक व्यवस्था, नियोजन आणि पर्यटन विकासाचा अभ्यास करून आपल्या मतदारसंघात काय आणता येईल, याचा त्यांनी विचार केला. यातूनच भारतातील पहिल्या फ्युनिक्युलर ट्रॉली प्रकल्पासारख्या अभिनव संकल्पनांचा विचार पुढे आला. रस्ते, वीज आणि इतर पायाभूत सुविधांबरोबरच आधुनिक विकासाची जोड देण्याचा प्रयत्न झाला.

बारवी धरणग्रस्तांसाठी संवेदनशील नेतृत्व

बारवी धरणाच्या प्रकल्पामुळे प्रभावित झालेल्या १२०४ प्रकल्पग्रस्त कुटुंबांच्या पुनर्वसनाचा प्रश्न हा अत्यंत संवेदनशील होता. प्रकल्पासाठी जमीन देणाऱ्या कुटुंबांचे जीवन उद्ध्वस्त न होता त्यांना नव्याने उभे राहण्याची संधी मिळाली पाहिजे, या भूमिकेतून त्यांच्या पुनर्वसनाबरोबरच रोजगाराच्या संधी उपलब्ध करून देण्यासाठी त्यांनी प्रयत्न केले.

विकास आणि प्रकल्पग्रस्तांचे हित यांचा समतोल साधण्याची त्यांची भूमिका यामध्ये दिसून आली.

२००५ चा महाभयंकर बदलापूर पूर

२००५ मध्ये बदलापूरने महाभयंकर पुराचा सामना केला. या आपत्तीने संपूर्ण परिसराला मोठा धक्का दिला. या अनुभवातून पूरनियंत्रण, नाले, नदीपात्र, पायाभूत सुविधा आणि आपत्ती व्यवस्थापन या प्रश्नांकडे अधिक गांभीर्याने पाहण्याची गरज अधोरेखित झाली. संकटाच्या काळात लोकांच्या पाठीशी उभे राहणे आणि संकटातून भविष्यासाठी शिकणे, ही त्यांच्या कार्यपद्धतीची वैशिष्ट्ये राहिली.

विधानसभेची दुसरी पायरी

पहिल्या विधानसभा कार्यकाळानंतर जनतेने पुन्हा विश्वास दाखवला आणि दुसऱ्या विधानसभा निवडणुकीत त्यांना संधी मिळाली, आता अनुभव वाढला होता, संपर्क वाढला होता आणि विकासाचे स्वप्नही मोठे झाले होते. त्यामुळे मतदारसंघातील गावागावांत विकासकामे पोहोचविण्याचा वेग वाढला.

सामाजिक उपक्रम — विकासाबरोबर माणुसकी

किसन कथोरे यांच्या राजकीय प्रवासात सामाजिक उपक्रमांना विशेष स्थान आहे, गावोगावी रस्ते, कन्यादान योजना, हिमोग्लोबिन तपासणी, नेत्रचिकित्सा शिबिरे, आरोग्य तपासणी शिबिरे अशा विविध उपक्रमांच्या माध्यमातून समाजातील गरजू घटकांपर्यंत पोहोचण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. ३४ वर्षांपासून नेत्रचिकित्सा व मोतीबिंदू शस्त्रक्रिया उपक्रमाच्या माध्यमातून लाखो लोकांना लाभ देणारा दृष्टी मित्र साकीब गोरे सारखा मुस्लिम कार्यकर्ता ज्याने आज देवभाऊ चष्मा सुरू करून जणू कथोरे साहेबांनाच संपूर्ण जगात पोहोचवले आहे.

मतदारसंघात अनेक ठिकाणी जेव्हा दुःखद प्रसंग घडतात तेव्हा त्या घरातील करता पुरुष गेल्याने त्या कुटुंबातील मुलींचे कन्यादान कोण करेल असे लक्षात येताच कथोरे साहेबांनी विधवा महिलांच्या मुलींचे कन्यादान करण्यास सुरू केले व आज जवळपास ५५०० मुलींचे करण्याचे भाग्य त्यांना प्राप्त झाले आहे

कुटुंबात नवीन मुलगी जन्माला आली की तिचे स्वागत करण्याची योजना कथोरे साहेबांनी सुरू केली असून आजवर सुमारे १८०० मुलींच्या जन्माचे किसन कन्या रत्न सन्मान योजना अश्या नावाने हि योजना ओळखली जाते ज्यामध्ये नवजात बलिकेसाठी लागणारे बेबी केयर किट देण्यात येते, तिच्या नावाने महाराष्ट्र शासनाच्या सुकन्या सन्मान योजनेचा पहिला हफ्ता भरून दिला जातो,

कोकण पाटबंधारे विकास महामंडळ आणि तत्त्वनिष्ठ निर्णय

कोकण पाटबंधारे विकास महामंडळाशी संबंधित जबाबदारी स्वीकारल्यानंतरही त्यांनी सिंचन आणि ग्रामीण विकासाच्या प्रश्नांकडे गांभीर्याने पाहिले. मात्र राजकीय आणि वैचारिक भूमिकांशी तडजोड न करता त्यांनी पुढे राजीनामा देण्याचा निर्णय घेतला. सत्ता किंवा पदापेक्षा स्वतःच्या भूमिकेला महत्त्व देण्याची त्यांची वृत्ती या निर्णयातून दिसून आली.

२०१४ — राष्ट्रवादीकडून राष्ट्रवादाकडे भाजपचा झेंडा हाती घेऊन विधानसभेची तिसरी पायरी

२०१४ मध्ये किसन कथोरे यांनी राष्ट्रवादी काँग्रेस मधून भारतीय जनता पक्षात प्रवेश करण्याचा ऐतिहासिक निर्णय घेतला. हा निर्णय सोपा नव्हता. अनेक वर्षांच्या राजकीय प्रवासानंतर पक्ष बदलणे म्हणजे मोठे आव्हान होते. मात्र देशाच्या विकासासाठी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या नेतृत्वाखालील राष्ट्रवादाच्या आणि विकासाच्या विचारधारेसोबत काम करण्याचा त्यांनी निर्णय घेतला, भाजपमध्ये प्रवेश केल्यानंतर त्यांनी पक्षाच्या संघटनात्मक कार्यपद्धतीत स्वतःला झोकून दिले. कार्यकर्त्यांशी संपर्क, बूथ पातळीवरील संघटन आणि पक्षविस्तार यावर त्यांनी भर दिला.

संघटनात्मक जबाबदारी आणि नवे राजकीय पर्व

आगामी लोकसभा निवडणुकांच्या पार्श्वभूमीवर पक्षाने त्यांच्यावर विविध संघटनात्मक जबाबदाऱ्या सोपवल्या. भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश सचिव म्हणूनही त्यांनी काम केले. याच काळात जिल्हा बँक निवडणूक आणि कृषी उत्पन्न बाजार समिती, मुरबाड नगरपंचायत निवडणूक, शहापूर नगरपंचायत निवडणुकीत संघटनात्मक ताकदीचे त्यांनी प्रदर्शन झाले.

२०१९ विक्रमी विजयासह विधानसभेची चौथी पायरी 

२०१९ च्या विधानसभा निवडणुकीत आमदार किसन कथोरे यांनी मोठ्या मताधिक्याने विजय मिळवला. महायुतीतील सर्वाधिक मताधिक्यांपैकी एक आणि महाराष्ट्रातील तिसऱ्या क्रमांकाचे मताधिक्य अशी त्यांच्या विजयाची नोंद झाली. अजितदादांसोबत लावलेली पैज आणि त्यानंतर मिळालेला प्रचंड विजय हा त्यांच्या राजकीय प्रवासातील चर्चेचा विषय ठरला. या विजयाने एक गोष्ट स्पष्ट केली कितीही मोठी राजकीय समीकरणे असली तरी शेवटी जनतेशी असलेला संपर्क आणि केलेले कामच निर्णायक ठरते.

‘डांबरमुक्त मुरबाड’ — विकासाचा वेगळा प्रयोग

मुरबाड विधानसभा मतदारसंघातील ग्रामीण रस्त्यांची अवस्था बदलण्यासाठी त्यांनी मोठ्या प्रमाणावर प्रयत्न केले. ‘डांबरमुक्त मुरबाड’ ही संकल्पना पुढे आणत आधुनिक तंत्रज्ञान आणि काँक्रीटच्या रस्त्यांच्या माध्यमातून दीर्घकाळ टिकणारी पायाभूत सुविधा उभारण्याचा प्रयत्न केला.

नवीन पिढीसाठी कार्यकर्ते घडविण्याचा किसन कथोरे यांचा संकल्प

त्यांच्या मते केवळ स्वतःचे नेतृत्व टिकवणे हा राजकारणाचा उद्देश नसावा, नवीन पिढीला दिशा देण्यासाठी कार्यकर्ते घडवले पाहिजेत, युवा नेतृत्व तयार करणे, कार्यकर्त्यांना जबाबदाऱ्या देणे आणि भविष्यातील नेतृत्वाची दुसरी फळी निर्माण करणे, यावर त्यांनी सातत्याने भर दिला आहे.

२०२२ — गोवा विधानसभा निवडणुकीची जबाबदारी

२०२२ च्या गोवा विधानसभा निवडणुकीत पक्षाने त्यांच्यावर ८ मतदारसंघांची जबाबदारी सोपवली होती, त्यांच्या सोबत गोव्यातील निवडणुकीत काम करतांना एक गोष्ट मला प्रकर्षाने जाणवली ती म्हणजे कथोरे साहेबांचा संपर्क केवळ मुरबाड, भिवंडी, ठाणे, पालघर, किंवा महाराष्ट्रात नसून तो गोव्यात देखील होता, गोव्याला पोहोचे पर्यंत त्यांनी संपूर्ण प्रवासात त्यांच्या सर्व प्रमुख कार्यकर्त्यांना फोन करून ओळखीच्या लोकांची यादी मागवली विशेष करून कोकणातल्या त्यांच्या संपर्कातील लोकांकडून व गोव्यात त्यांच्या भेटी गाठी घेतल्या. महाराष्ट्राबाहेर पक्ष संघटनेसाठी काम करण्याची त्यांना ही मोठी संधी होती आणि ही जबाबदारी त्यांनी यशस्वीपणे पार पाडली.

दिल्लीशी थेट संवाद — मतदारसंघासाठी योजना आणण्याचा ध्यास

केंद्र सरकारच्या विविध योजना आपल्या मतदारसंघात कशा आणता येतील, यासाठी त्यांनी दिल्लीचे दौरे केले.केंद्रातील मंत्री, अधिकारी आणि विविध मंत्रालयांशी संपर्क साधून मतदारसंघाच्या विकासासाठी केंद्र सरकारच्या योजना आणि निधी आणण्याचा प्रयत्न केला. दिल्लीतील प्रशासनिक पातळीवर मतदारसंघाच्या प्रश्नांना मिळणारा प्रतिसाद हा त्यांच्या सातत्यपूर्ण पाठपुराव्याचा परिणाम ठरला. गेल्या ५ वर्षात कथोरे साहेबां सोबत मी अनेक दिल्ली दौरे केले व मतदारसंघातील विकासकामांचा पाठपुरावा करण्यासाठी केंद्रीय मंत्रिमंडळातील अनेक दिग्गज मंत्र्यांना भेटलो आहे कथोरे साहेबांच्या कामाची पद्धत व कामाचा आवाका बघून अनेक केंद्रीय मंत्र्यांनी त्यांचे कौतुक करतांना मी बघितले व अनुभवले आहे, याचे ज्वलंत उदाहरण म्हणजे कल्याण माळशेज राष्ट्रीय महामार्ग, बदलापूर मार्गे जाणारा जेएनपीटी- वडोदरा एक्सप्रेस हायवे, माळशेज घाटात होणारा काचेचा स्कायवॉक साठी केंद्रीय रस्ते वाहतूक महामार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी व बदलापूर रेल्वे स्टेशनच्या सुशोभीकरण व नूतनीकरण प्रकल्पासाठी केंद्रीय रेल्वेमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी यांनी केलेले कौतुक अश्या अनेक विकास प्रकल्पांच्या प्रशासकीय मंजुरीचा मी प्रत्यक्ष साक्षीदार आहे, त्यांच्या सोबत केलेल्या प्रत्येक दौऱ्यात मला खूप काही नवीन गोष्टी शिकायला मिळाल्या आहेत.

माळशेजचा काचेचा पूल आणि पर्यटन विकास

मुरबाड आणि परिसरातील पर्यटनाला चालना देण्यासाठी माळशेज काचेचा पूल यांसारख्या संकल्पना पुढे आणण्यात आल्या. पर्यटन म्हणजे केवळ मनोरंजन नव्हे, तर स्थानिक युवकांना रोजगार, स्थानिक व्यवसायांना चालना आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला बळ देणारे प्रभावी माध्यम आहे, या विचारातून पर्यटन विकासाकडे पाहिले गेले.

किसन कथोरे यांच्या राजकीय प्रवासाची खरी ताकद त्यांच्या कार्यकर्त्यांमध्ये आहे, गावोगावी, वाडी-वस्त्यांमध्ये, शहरातील प्रभागांमध्ये आणि बूथ पातळीवर काम करणाऱ्या असंख्य कार्यकर्त्यांशी त्यांनी वैयक्तिक नाते जपले. पदे बदलतात, निवडणुका येतात-जातात; पण मनात घर केलेले कार्यकर्ते हेच त्यांच्या राजकीय प्रवासाची खरी पुंजी आहे.

२०२४ — लोकसभा निवडणूक आणि पंतप्रधानांच्या शपथविधीचे निमंत्रण

२०२४ च्या लोकसभा निवडणुकीत पक्षाच्या संघटनात्मक कार्यात त्यांनी सक्रिय भूमिका बजावली. त्यानंतर पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या शपथविधी सोहळ्यासाठी निमंत्रण मिळणे, हा त्यांच्या सार्वजनिक जीवनातील एक अभिमानाचा क्षण ठरला आणि हा प्रसंग अनुभवायला मला देखील कथोरे साहेबां सोबत राष्ट्रपती भवनात जाता आले हे मी माझे भाग्यच समजतो.

बदलापूरच्या विकासाला नवी गती

बदलापूरसाठी तब्बल २६२ कोटी रुपयांची पाणी योजनेला मंजूरी देण्यात आली. वाढत्या लोकसंख्येला भविष्यात पुरेसा आणि शाश्वत पाणीपुरवठा मिळावा, यासाठी हा महत्त्वाचा टप्पा आहे.

कांजूरमार्ग ते बदलापूर - मेट्रो १४ प्रकल्पाला मंजुरी मिळाल्याने बदलापूर मधून मुंबईकडे नोकरी, शिक्षण, व्यवसायासाठी जाणाऱ्या प्रवाश्यांना दिलासा मिळणार आहे, 

जेएनपीटी वडोदरा बदलापूर मार्गे जोडणीचे स्वप्न
मतदारसंघाच्या भविष्यातील आर्थिक विकासाचा विचार करताना मोठ्या पायाभूत प्रकल्पांकडेही त्यांनी लक्ष दिले. जेएनपीटी–वडोदरा एक्सप्रेस हायवे ला बदलापूर मार्गे जोडण्याचा प्रयत्न हा त्याच व्यापक विकासदृष्टीचा भाग आहे.

२०२४ विधानसभा — संघर्षातून पुन्हा विजय

२०२४ च्या विधानसभा निवडणुकीत सर्व विरोधक एकत्र येऊन आपल्याला पराभूत करण्यासाठी प्रयत्न करत असतानाही जनतेने पुन्हा एकदा विश्वास दाखवला, हा विजय केवळ एका उमेदवाराचा नव्हता; तो काम, संघटन, कार्यकर्त्यांची मेहनत आणि जनतेशी असलेल्या नात्याचा विजय होता.

मुरबाड-बदलापूर परिसराच्या सांस्कृतिक आणि ऐतिहासिक वारशाला नवी ओळख देण्यासाठी छत्रपती शिवाजी महाराजांचा अश्वारूढ पुतळा आणि शिवसृष्टी उभारण्याची संकल्पना पुढे आली. छत्रपती शिवाजी महाराजांचा इतिहास केवळ वाचण्यासाठी नाही, तर तो नव्या पिढीला अनुभवता आला पाहिजे हा यामागचा विचार होता व त्यासाठी बदलापूरगावा जवळ उल्हास नदीला लागून असलेल्या जागेत छत्रपती शिवाजी महाराज यांचा अश्वारूढ पुतळा उभारण्यात आला व त्याचे अनावरण महाराष्ट्र राज्याचे मुख्यमंत्री मा श्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हस्ते १९ फेब्रुवारी २०२५ रोजी करण्यात आले, अखंड भारताचे प्रेरणास्थान असलेल्या छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या या पुतळ्याच्या उभारणीत माझा देखील खारीचा वाट असल्याचा मला सार्थ अभिमान आहे हा पुतळा ज्या शिल्पकाराच्या पुण्यातील कारखान्यात बनवण्यात आला तेथून तो पुतळा बदलापूरला आणण्याची जबाबदारी कथोरे साहेबांनी मला दिली होती, १५० किलोमीटरचा प्रवास जो आपण साधारणपणे ३-४ तासात पूर्ण करतो तोच प्रवास छत्रपती शिवाजी महाराजांचा पुतळा घेऊन येतांना आम्हाला ३६ तास लागले, वाटेत अनेक अडचणी आल्या, २ वेळा रस्ता बदलावा लागला, वाटेत ज्या ज्या ठिकाणी ब्रिज आले त्या त्या ठिकाणी महाराजांचा पुतळा ट्रेलरवरून क्रेनने उचलून ट्रॉलीच्या मदतीने ब्रिज खालून न्यावा लागायचा व पुन्हा ट्रेलरवर बसवायला लागायचा, असं एकूण ९ वेळा करावं लागलं खंडाळा घाटातील प्रत्येक वळणावर संकटं आली परंतु महाराजांच्या कृपेने प्रत्येक संकटावर मात करत आम्ही बदलापूरला सुखरूप पोहोचलो, या संपूर्ण प्रवासात जणू महाराज स्वतः त्यांच्या नजरेनेने रयतेचे निरीक्षण करत पुढे मार्गस्थ होत आमच्या सोबत असल्याची भावना आमच्या सोबत असलेल्या सर्वांच्या मनात होती, कथोरे साहेबांनी मला हि महत्वपूर्ण जबाबदारी सोपवल्या बद्दल मी कायमच त्यांचा ऋणी राहीन.

२०२५ मधील कुळगाव-बदलापूर नगरपालिका निवडणुकीत भाजपचा झेंडा फडकवण्यात यश आले. स्थानिक स्वराज्य संस्थांमध्ये संघटन मजबूत करण्याच्या दृष्टीने हा महत्त्वाचा टप्पा ठरला. संघर्षातून निर्माण झालेली विकासाची दृष्टी

बाहेरून कणखर तितकेच आतून संवेदनशील 

कथोरे साहेबांनी जरी राष्ट्रवादी काँग्रेस पक्ष सोडला असला तरी त्यांचे स्व अजित दादांवर असलेलं प्रेम व आपुलकी आम्ही कोणीही विसरू शकणार नाही, २८ जानेवारी २०२६ रोजी सकाळी मुंबईला असतांना राज्याचे उपमुख्यमंत्री स्व अजित पवारांच्या निधनाची बातमी येताच कथोरे साहेब स्तब्ध झाले, मी काही कामासाठी कथोरे साहेबांना भेटायला मुंबईला पोहोचलो होतो परंतू कथोरे साहेबांनी एका क्षणाचा ही विलंब न करता तात्काळ बारामती ला निघाले, त्या ठिकाणी प्रथम पोहोचणाऱ्या काही मोजक्याच नेत्यांपैकी कथोरे साहेब होते, आजही स्व अजित दादांचा विषय निघाला की न कळत कथोरे साहेबांचे डोळे पाणावतात

किसन कथोरे यांच्या प्रवासाकडे पाहिले तर त्यात अनेक टप्पे दिसतात — गोळ्या-चॉकलेट विकणारे संघर्षमय बालपण, शिक्षणाची धडपड, बिनविरोध सरपंच, सरपंच संघटना, पंचायत सभापती, जिल्हा परिषद अध्यक्ष, आमदारकीच्या निवडणुका, पक्षबदल, संघटनात्मक जबाबदाऱ्या, विक्रमी विजय आणि आजही सुरू असलेला विकासाचा पाठपुरावा

या संपूर्ण प्रवासाला जोडणारा एक समान धागा आहे — सामान्य माणूस आणि ग्रामीण भागाचा विकास पद कोणतेही असो, पक्ष कोणताही असो किंवा राजकीय परिस्थिती कितीही बदलली असो, त्यांच्या कामाचा केंद्रबिंदू राहिला आहे तो मतदारसंघाचा विकास आणि जनतेचे हित, आज त्यांच्या समोर केवळ पुढील निवडणुकीचे लक्ष्य नाही; तर पुढील पिढीचे भविष्य घडविण्याचे ध्येय आहे कारण त्यांना माहीत आहे, रस्ते बांधले की गाव जोडले जाते, शाळा उभारली की भविष्य घडते, पाणी आणले की जीवन समृद्ध होते, रोजगार निर्माण केला की कुटुंब सक्षम होते, आणि कार्यकर्ते घडवले की नेतृत्वाची परंपरा पुढे जाते. म्हणूनच किसन कथोरे यांचा राजकीय प्रवास हा केवळ एका नेत्याचा प्रवास नाही; तो संघर्षातून उभ्या राहिलेल्या एका ग्रामीण विकासाच्या स्वप्नाचा प्रवास आहे. अश्या विकसनशील व सामाजिक परिवर्तन घडवणाऱ्या आमदार किसन कथोरे यांचा १९ सप्टेंबर रोजी वाढदिवस आहे, त्यांना वाढदिवसाच्या मनःपूर्व आरोग्यदायी शुभेच्छा  

श्री मिलिंद विजय धारवाडकर
संयोजक- आयटी सेल कोकण विभाग, भाजपा
उपाध्यक्ष- भाजपा ठाणे ग्रामीण जिल्हा

























गणेशोत्सव में डीजे की तेज आवाज पर लगाम, अंबरनाथ-बदलापुर की सोसायटियों के लिए नए निर्देश।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र में प्रशासन ने हाउसिंग सोसायटियों के लिए सख्त रुख अपनाया है। सोसायटी परिसरों में निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करते हुए तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनिक्षेपक उपकरण बजाए जाने की शिकायत मिलने पर संबंधित सोसायटी के पदाधिकारियों और प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

इस संबंध में अंबरनाथ तालुका के सहायक निबंधक राजेंद्र विठ्ठल मरकड ने 8 सितंबर 2026 को अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सहकारी संस्थाओं की प्रबंधन समितियों को परिपत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन अनिवार्य

प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर निर्धारित नियमों और ध्वनि सीमा का पालन करना आवश्यक है। गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में ध्वनिक्षेपक या डीजे का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मानकों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

यदि किसी सोसायटी परिसर से निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे या लाउडस्पीकर बजाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो मामले में संबंधित सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष तथा प्रबंधन समिति के सदस्यों की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों को परेशानी का मुद्दा

गणेशोत्सव और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से आसपास रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों, विद्यार्थियों तथा बीमार लोगों को परेशानी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सोसायटी पदाधिकारियों से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक उत्सव और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान नागरिकों की सुविधा तथा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्वनि की निर्धारित सीमा का पालन किया जाना चाहिए।

14 से 25 सितंबर तक विशेष सतर्कता

गणेशोत्सव की अवधि में 14 से 25 सितंबर 2026 के दौरान सोसायटियों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सोसायटी प्रबंधन से अपेक्षा की गई है कि कार्यक्रमों के दौरान ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन न हो और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों के पदाधिकारियों के सामने उत्सव आयोजन के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी रहेगी।

सोसायटी पदाधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी

प्रशासन के इस परिपत्र के बाद अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सोसायटियों में गणेशोत्सव के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की संभावना है। नियमों का पालन कराने में सोसायटी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस कदम का उद्देश्य गणेशोत्सव जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के दौरान उत्सव का माहौल बनाए रखते हुए ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करना बताया गया है।