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अंबरनाथ में दो युवकों से तलवारें मिलने का पुलिस का दावा; मनाही आदेश उल्लंघन का केस दर्ज, नोटिस देकर रिहाई पर सवाल—कार्रवाई में कथित खानापूर्ति को लेकर चर्चा तेज।


(फाइल इमेज) 

अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजीनगर पुलिस थाना क्षेत्र में दो युवकों के कब्जे से लोहे की तलवारें बरामद किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 5 अक्टूबर 2026 को हनुमान नगर चौक, समर्थ रिक्शा स्टैंड के पास, कानसाई-ओम दर्शन अपार्टमेंट परिसर के आसपास की गई।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मामले में सिद्धेश हेमंत शिंदे (21) और अनिकेत अशोक कसारे (29) के खिलाफ अपराध क्रमांक I-425/2026 दर्ज किया गया है। मामला भारतीय हथियार कानून की धारा 4 व 25, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) तथा महाराष्ट्र पुलिस कानून की धारा 37(1) और 135 के तहत दर्ज किए जाने का उल्लेख दस्तावेज़ में है।

दो तलवारें जब्त किए जाने का उल्लेख

पुलिस द्वारा दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से दो लोहे की तलवारें बरामद की गईं। इनमें एक तलवार की अनुमानित कीमत ₹350 और दूसरी की ₹250 बताई गई है। दोनों तलवारों की कुल अनुमानित कीमत ₹600 दर्ज की गई है।

दस्तावेज़ के अनुसार, पहली तलवार की कुल लंबाई करीब 33 इंच और दूसरी की करीब 31 इंच बताई गई है। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों हथियारों का विस्तृत माप भी दर्ज किया गया है।

मनाही आदेश लागू होने के दौरान हथियार रखने का आरोप

पुलिस के अनुसार, ठाणे शहर के पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा) द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी मनाही आदेश के तहत 2 अक्टूबर 2026 से 16 अक्टूबर 2026 तक तलवार, भाला, बंदूक, लाठी अथवा अन्य खतरनाक हथियार रखने पर प्रतिबंध लागू था।

पुलिस रिकॉर्ड में आरोप है कि इसी मनाही आदेश के प्रभावी रहने के दौरान दोनों युवकों के पास तलवारें पाई गईं। इसी आधार पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

BNSS 35(3) के तहत नोटिस

महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध पुलिस दस्तावेज़ के अनुसार दोनों आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि पुलिस ने जांच में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया है। यह अपने-आप में दोष सिद्ध होने या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले की जांच सहायक पुलिस निरीक्षक राजकुमार नरुटे कर रहे हैं। घटनास्थल का दौरा पुलिस अधिकारी, डी.बी. स्टाफ तथा बीट मार्शल के कर्मचारियों द्वारा किए जाने का भी उल्लेख दस्तावेज़ में है।

मामले में ई-साक्ष्य संकलित कर लिंक किए जाने की जानकारी भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है।

नोट: यह समाचार उपलब्ध पुलिस दस्तावेज़ में दर्ज जानकारी पर आधारित है। आरोपों और पुलिस के दावों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। संबंधित आरोपियों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

















गारमेंट व्यापारियों के संगठन UGMA का 70वां वार्षिक उत्सव, तीन दिनों तक होंगे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम।



 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA) की ओर से संगठन के 70वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5 में तीन दिवसीय अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर एसोसिएशन की ओर से दुकानदारों एवं व्यापारी भाइयों से इसमें सहभागी होकर सेवा कार्य में सहयोग करने और प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।

पोस्टर के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे पूज्य चालिहा साहिब मंदिर में होगी। इस अवसर पर अखंड पाठ साहिब का आरंभ साई कालीराम साहिब (वसण शाह दरबार वाले) द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद प्रसाद एवं आम भंडारे का आयोजन रहेगा तथा रात में भी भंडारा जारी रहने की जानकारी दी गई है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजे कन्याओं के भोजन की व्यवस्था रखी गई है। इसके पश्चात प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन जारी रहेगा।

वहीं बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे अखंड पाठ साहिब का भोग साई कालीराम साहिब द्वारा किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया है। इसके बाद उपस्थित दुकानदार भाइयों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

UGMA की ओर से जारी कार्यक्रम सूचना में 5 और 6 अक्टूबर की रात विशेष खीर (खीरनी) का प्रसाद ग्रहण करने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही व्यापारी भाइयों से अपनी यथाशक्ति के अनुसार सेवा कार्य में सहयोग करने की अपील की गई है।

एसोसिएशन की ओर से जारी संदेश में सभी दुकानदार भाइयों से तीनों दिन कार्यक्रम में उपस्थित होकर सेवा कार्य में सहभागी बनने, गुरु साहिब का आशीर्वाद लेने तथा भोजन-प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध किया गया है।

स्थान: पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5

दिनांक: 5, 6 एवं 7 अक्टूबर 2026

आयोजक: उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA)

बताया जाता है कि गोपी वाधवानी, किशन गंगवानी, बाबू ताराचंदानी, नरेश अमरलाल मास्टर तथा उनके कुछ साथियों और दुकानदारों द्वारा मिलकर यह गतिविधि की जाती रही हैं।

नोट: कार्यक्रम से संबंधित उपरोक्त विवरण आयोजक संस्था द्वारा जारी पोस्टर/सूचना के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।


















‘बंशी-बिर्जू’ नाम से चर्चित कथित जुआ अड्डे पर पुलिस की कार्रवाई? अंबरनाथ शिवाजीनगर थाने के रिकॉर्ड में 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज।


 

अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजीनगर पुलिस थाना क्षेत्र में कथित मटका-जुआ गतिविधि के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को शिवाजी चौक के पास, समुद्र बार के बगल की एक दुकान में कार्रवाई की गई। इस मामले में महाराष्ट्र जुआ प्रतिबंध अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत अपराध क्रमांक 424/2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस दस्तावेज के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुल ₹14,200 नकद तथा मटका-जुआ से संबंधित बताई गई सामग्री बरामद की गई। मामले में सात व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार इनमें कुछ व्यक्तियों पर जुआ खिलाने तथा अन्य पर जुआ खेलने के लिए मौजूद होने का आरोप है। सभी संबंधित आरोपियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिए जाने की जानकारी दस्तावेज में दर्ज है।

दो व्यक्तियों पर जुआ खिलाने का आरोप

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी क्रमांक 1 धरम रूपलाल गौर के कब्जे से ₹5,100 नकद तथा जुआ खेलने में इस्तेमाल होने वाली बताई गई सामग्री बरामद हुई। वहीं आरोपी क्रमांक 2 नादिर निअमतउल्ला खान के कब्जे से ₹4,300 नकद और मटका-जुआ से संबंधित बताई गई एक चकरी तथा अन्य सामग्री बरामद होने का उल्लेख है।

इसके अलावा सबीर हबीब शेख, अमर श्रीपति काले, मुरलीधर सुकण्या पाटिल, आकम अलीहुसैन शेख और संजय बाबू गरड के कब्जे से अलग-अलग रकम बरामद किए जाने की जानकारी पुलिस दस्तावेज में दी गई है।

कुल ₹14,200 की बरामदगी

दस्तावेज के अनुसार बरामद नकदी का विवरण इस प्रकार है:

- धरम रूपलाल गौर — ₹5,100

- नादिर निअमतउल्ला खान — ₹4,300

- आकम अलीहुसैन शेख — ₹1,350

- सबीर हबीब शेख — ₹1,200

- अमर श्रीपति काले — ₹900

- मुरलीधर सुकण्या पाटिल — ₹750

- संजय बाबू गरड — ₹600

कुल बरामदगी — ₹14,200।

पुलिस रिकॉर्ड में जुआ खेलने-खिलाने से संबंधित सामग्री, जिसमें पासे/गुड़गुड़ी, चकरी, अंक वाले प्लास्टिक बैनर और अन्य सामान शामिल होने का उल्लेख है। मामले में ई-साक्ष्य भी प्राप्त किए जाने की जानकारी दर्ज है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी का भी उल्लेख

पुलिस दस्तावेज के अनुसार, घटनास्थल का दौरा करने वाले अधिकारियों में शिवाजीनगर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटिल, पुलिस निरीक्षक गहिनीनाथ गमे तथा पुलिस उपनिरीक्षक नरूटे का उल्लेख है। घटनास्थल का दौरा 5 अक्टूबर 2026 को रात 00:05 बजे से आगे किए जाने की जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।

मामले की प्राथमिक जांच पुलिस उपनिरीक्षक नरूटे द्वारा किए जाने तथा अपराध दर्ज करने की कार्रवाई पुलिस हवलदार एस.एम. सालुंखे द्वारा किए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।

‘बंशी-बिर्जू’ अड्डे से जोड़ने की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि जरूरी

इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर इसे कथित रूप से ‘बंशी-बिर्जू’ नाम से चर्चित जुआ अड्डे से जोड़कर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस दस्तावेज में ‘बंशी-बिर्जू’ नाम को आरोपी के रूप में दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं होती। इसलिए इस नाम को किसी व्यक्ति या कथित जुआ अड्डे से जोड़कर निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।

इसी तरह, यह दावा कि संबंधित गतिविधि “वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की नाक के नीचे” चल रही थी, एक आरोप/दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पुलिस रिकॉर्ड में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटिल का घटनास्थल पर दौरा किए जाने का उल्लेख जरूर है।

आगे की जांच पर नजर

मामले में पुलिस द्वारा बरामद सामग्री, नकदी और ई-साक्ष्य के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। कार्रवाई के पीछे कथित जुआ नेटवर्क का दायरा क्या था, क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या संगठित तंत्र सक्रिय था और ‘बंशी-बिर्जू’ नाम से की जा रही चर्चाओं का वास्तविकता से कोई संबंध है या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मंत्रालय टाइम्स की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि इस समाचार में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज होना और आरोप सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। अंतिम निष्कर्ष सक्षम न्यायालय और जांच प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

















अंबरनाथ के शिवजी नगर पुलिस स्टेशन के आहते से जब्त ट्रक ले जाने की कथित कोशिश! मौके पर पकड़े जाने के बाद कार्रवाई को लेकर उठे सवाल.!


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

अंबरनाथ पूर्व के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में जब्त किए गए ट्रक को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कोशिश किए जाने के आरोप सामने आए हैं। दावा है कि यह प्रयास दिनदहाड़े किया गया और संबंधित व्यक्ति को मौके पर पकड़ भी लिया गया। हालांकि, उसके खिलाफ बाद में क्या कानूनी कार्रवाई की गई, इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर की शाम शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन के परिसर में खड़े सरकारी पानी की पाइपों से लदे जब्त ट्रक को कथित रूप से बाहर ले जाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने किसी अधिकारी का नाम लेकर पुलिस पर प्रभाव डालने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद पाटील ने मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति को पकड़ लिया।

हालांकि, इस कथित घटना के बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ रॉबरी, चोरी के माल को हटाने के प्रयास अथवा अन्य लागू कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया या नहीं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

27 सितंबर को कथित चोरी के मामले में ट्रक जब्त

इस मामले की पृष्ठभूमि 27 सितंबर की रात से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, अंबरनाथ पूर्व क्षेत्र से सरकारी पानी की पाइपों की कथित चोरी के मामले में एक व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा था। एसीपी शैलेश काळे के मार्गदर्शन में पीएसआई केशव हसगोले की टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने और पाइपों से लदे MH-01-EW-4252 नंबर के ट्रक को कब्जे में लेकर शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन परिसर में जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि ट्रक में मौजूद सामग्री की जांच तथा उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर पुलिस द्वारा पड़ताल की जा रही थी। ऐसे में जांच के दायरे में मौजूद वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने की कथित कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

BNSS की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख

मामले से जुड़ी जानकारी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(1)(e) का भी उल्लेख किया जा रहा है। इस प्रावधान के तहत पुलिस को ऐसी स्थिति में बिना वारंट कार्रवाई करने का अधिकार हो सकता है, जब किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसी वस्तु पाए जाने का उचित संदेह हो जो चोरी की संपत्ति हो।

हालांकि, इस प्रावधान का वास्तविक अनुप्रयोग मामले के उपलब्ध तथ्यों, पुलिस की जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए इस मामले में धारा 35(1)(e) के तहत हुई कार्रवाई और उसके बाद की प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जब्त ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की भी चर्चा

मामले में यह भी दावा किया जा रहा है कि जांच के दौरान न्यायालय के समक्ष संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया गया था और जब्त ट्रक को जांच के दायरे में रखा गया था। इसके बावजूद बाद में ट्रक को पर्सनल बॉण्ड पर छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

यदि ऐसा हुआ है, तो ट्रक को किस आदेश, किस प्रक्रिया और किन शर्तों के आधार पर छोड़ा गया, यह स्पष्ट होना आवश्यक है। साथ ही, पुलिस स्टेशन परिसर से उसी वाहन को दोबारा बाहर ले जाने के कथित प्रयास की स्थिति में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

₹1.70 लाख के कथित लेन-देन का आरोप

इस पूरे प्रकरण के बीच एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर ₹1.70 लाख लिए जाने और बाद में रकम वापस किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इस कथित आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

ऐसे आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए संबंधित व्यक्तियों के बयान, आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल—पुलिस स्टेशन परिसर में सुरक्षा और जब्त माल की निगरानी पर

यदि पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को वास्तव में बाहर ले जाने का प्रयास किया गया था, तो यह केवल एक व्यक्ति की कथित हरकत तक सीमित मामला नहीं माना जा सकता। इससे जब्त संपत्ति की सुरक्षा, पुलिस स्टेशन की निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे सवाल भी उठते हैं।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि कथित प्रयास में कौन-कौन लोग शामिल थे, वाहन को बाहर ले जाने का उद्देश्य क्या था और घटना के बाद पुलिस ने कौन-सी कानूनी कार्रवाई की।

डीसीपी स्तर पर जांच की मांग

घटना से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अब निगाहें उल्हासनगर जोन-4 के डीसीपी सचिन गोरे की ओर हैं। यदि आरोपों में तथ्यात्मक आधार है, तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि जब्त वाहन को पुलिस स्टेशन परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

अब बड़ा सवाल यही है—पुलिस स्टेशन परिसर में जब्त वाहन को बाहर ले जाने की कथित कोशिश के मामले में आखिर आधिकारिक तौर पर क्या कार्रवाई हुई?





















उल्हासनगर के क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर शिकायतें; कथित सट्टा-जुआ और बिजली चोरी के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में संचालित कुछ क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर शिकायतें और सवाल सामने आने की जानकारी मिल रही है। टर्फ ग्राउंड के संचालन, आवश्यक अनुमतियों और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ वहां कथित रूप से सट्टा-जुआ जैसी गतिविधियां चलने तथा बड़े पैमाने पर बिजली के अनधिकृत उपयोग की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में किसी व्यक्ति, संस्था या टर्फ ग्राउंड संचालक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। शिकायतों की वास्तविकता संबंधित पुलिस प्रशासन, महानगरपालिका और बिजली वितरण कंपनी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सट्टा और जुआ को लेकर क्या है शिकायत?

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों में दावा किया जा रहा है कि कुछ टर्फ ग्राउंड में क्रिकेट खेलने की गतिविधियों के अलावा कथित तौर पर सट्टेबाजी अथवा जुए से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित हो सकती हैं।

यदि ऐसी गतिविधियों की शिकायत पुलिस प्रशासन के पास प्राप्त हुई है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों में कितनी वास्तविकता है। जांच में यदि किसी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग पर भी सवाल

इसी के साथ कुछ टर्फ ग्राउंड में बड़े पैमाने पर बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग अथवा बिजली चोरी की शिकायतें भी सामने आने की चर्चा है।

टर्फ ग्राउंड में फ्लडलाइट, अन्य विद्युत उपकरण और रात के समय होने वाली गतिविधियों के कारण बिजली की खपत स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है। ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि वहां वैध विद्युत कनेक्शन, मीटर और संबंधित अनुमति मौजूद है या नहीं तथा बिजली का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।

यदि बिजली चोरी की शिकायत आधिकारिक रूप से प्राप्त हुई है, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी द्वारा मीटर और कनेक्शन की जांच किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस और प्रशासन कब करेगा जांच?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन शिकायतों पर पुलिस प्रशासन, उल्हासनगर महानगरपालिका और संबंधित बिजली विभाग की ओर से कोई निरीक्षण या जांच की जाती है या नहीं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतों में तथ्य हैं, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार जांच करनी चाहिए और यदि शिकायतें निराधार हैं, तो आधिकारिक स्पष्टीकरण देकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

इसके अलावा टर्फ ग्राउंड के निर्माण, जमीन के उपयोग, व्यावसायिक संचालन, फायर सेफ्टी, आवश्यक परवाने और अन्य लागू नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी प्रशासनिक स्तर पर जांच किए जाने की मांग उठ सकती है।

शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल सट्टा-जुआ और बिजली चोरी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन शिकायतों को फिलहाल शिकायत और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मंत्रालय टाइम्स का स्पष्ट मत है कि यदि किसी टर्फ ग्राउंड के खिलाफ गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और आरोप गलत पाए जाने पर संबंधित पक्ष को क्लीन चिट—दोनों ही स्थितियों में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।

अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेते हैं और क्रिकेट टर्फ ग्राउंड के संचालन से जुड़े इन सवालों पर क्या कार्रवाई अथवा स्पष्टीकरण सामने आता है।

















विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब मामले में अब UMC की बारी! मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से पहुंची शिकायत, जनता की निगाहें आयुक्त के फैसले पर।


 









उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क


उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।


विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।


मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला


प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।


बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।


अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।


विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा


इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।











उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।

मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।

बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।

अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।

विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा

इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि इन पत्रों के माध्यम से विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से संबंधित विषय पर महानगरपालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

अब उल्हासनगर की जनता का सवाल—कार्रवाई कब?

मामले में विभिन्न स्तरों पर शिकायतों और पत्राचार की जानकारी सामने आने के बाद उल्हासनगर की जनता के बीच भी सवाल उठ रहा है कि विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे पर UMC प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और कब की जाएगी?

स्थानीय नागरिकों की नजर अब UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के कार्यालय से होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई, जांच या निर्णय पर बनी हुई है।

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप अथवा दावे रिकॉर्ड और नियमों की जांच में सही पाए जाते हैं, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार क्या कदम उठाए जाएंगे। वहीं, यदि शिकायतों में लगाए गए दावे रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो प्रशासन द्वारा उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जा सकती है।

जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी

फिलहाल शिकायतों में किए गए दावों या आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

मामले की वास्तविक स्थिति UMC प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

उल्हासनगर में अब मुख्य सवाल यही है—राज्य सरकार के स्तर से मामला UMC तक पहुंचने और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किए जाने के बाद, विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब के संबंध में महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी?















उल्हासनगर में श्मशान घाटों पर कथित वसूली का मामला गरमाया, प्रहार सामाजिक संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के कैंप नंबर 1 से 5 में स्थित विभिन्न श्मशान घाटों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोलके ने आरोप लगाया है कि इन श्मशान घाटों में कुछ कथित गैर-कानूनी ट्रस्टों एवं संस्थाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद नागरिकों से आर्थिक वसूली की जा रही है।

शरद पोळके का दावा है कि संबंधित संस्थाओं और उल्हासनगर महानगरपालिका के बीच किसी भी प्रकार का समझौता या इकरारनामा नहीं हुआ है। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित ट्रस्टों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में श्मशान घाटों के संचालन तथा नागरिकों से कथित तौर पर की जा रही आर्थिक वसूली को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

प्रहार सामाजिक संगठन की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों या संस्थाओं से कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के जुड़े होने के कारण महानगरपालिका प्रशासन पर कथित रूप से दबाव है। संगठन का आरोप है कि इसी वजह से प्रशासन संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है।

हालांकि, राजनीतिक दबाव या किसी व्यक्ति की संलिप्तता संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। संबंधित ट्रस्टों, संस्थाओं और महानगरपालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन से दस्तावेजों की जांच और कार्रवाई की मांग

शरद पोळके ने महानगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि कैंप नंबर 1 से 5 के सभी श्मशान घाटों के संचालन से संबंधित दस्तावेज, ट्रस्टों की वैधता, महानगरपालिका के साथ हुए किसी भी समझौते तथा नागरिकों से ली जाने वाली फीस या अन्य आर्थिक वसूली की पूरी जांच की जाए।

उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की है कि यदि संबंधित संस्थाओं के पास श्मशान घाटों के संचालन या आर्थिक वसूली का कोई वैध अधिकार नहीं है, तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए और गरीब नागरिकों पर पड़ रहे कथित आर्थिक बोझ को रोका जाए।

कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रहार सामाजिक संगठन के अध्यक्ष शरद पोळके ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में महानगरपालिका प्रशासन ने अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो संगठन की ओर से बड़े जन आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन प्रहार जनशक्ति पक्ष के नेता बच्चू कडू के आदेश तथा स्वप्निल पाटिल के नेतृत्व और मार्गदर्शन में किए जाने की बात कही है।

श्मशान घाट जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक हित से जुड़े विषय में लगाए गए इन आरोपों के बाद अब निगाहें महानगरपालिका प्रशासन की ओर हैं। प्रशासन संबंधित ट्रस्टों की वैधता, उपलब्ध दस्तावेजों और कथित आर्थिक वसूली की जांच करता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।

— शरद पोळके

अध्यक्ष, प्रहार सामाजिक संगठन, उल्हासनगर