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विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा, डांस बार संचालन के नियम होंगे और कड़े।

(फाइल फोटो) 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में डांस बारों के संचालन पर और अधिक सख्ती करने का फैसला किया है। डांस बार संचालकों द्वारा कानून की खामियों का फायदा उठाकर नियमों से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में व्यापक संशोधन करने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार डांस बारों के संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की कानूनी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ डांस बार संचालक डांस बार संबंधी कानून के तहत लाइसेंस लेने के बजाय अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर संचालन की अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। इससे वे डांस बारों पर लागू सख्त नियमों और प्रतिबंधों से बच निकलते हैं। इस खामी को दूर करने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में संशोधन करेगी, ताकि ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को केवल संशोधित कानून के तहत ही लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य हो और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

यह घोषणा कांग्रेस विधायक नाना पटोले द्वारा विधानसभा में ठाणे जिले में संचालित डांस बारों का मुद्दा उठाए जाने के बाद की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले से ही डांस बारों के नियमन के लिए कई कठोर नियम लागू कर चुकी है, लेकिन कुछ संचालक कानूनी प्रावधानों की कमजोरियों का लाभ उठाकर इन नियमों से बचने का प्रयास करते हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसी सभी खामियों को पूरी तरह समाप्त करना है।

फडणवीस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार तेज आवाज में डीजे बजाने और ध्वनि प्रदूषण के मामलों को लेकर भी गंभीर है। उन्होंने बताया कि मौजूदा शोर प्रदूषण नियमों के तहत अनुमति दी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले डांस बारों और अन्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने के लिए भी कानून में आवश्यक संशोधन करने पर विधि एवं न्याय विभाग के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं और कानून-व्यवस्था दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील है। हालांकि, किसी भी कानून में संशोधन करते समय संवैधानिक अधिकारों और न्यायालयों द्वारा निर्धारित कानूनी सीमाओं का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में कानून का दुरुपयोग न हो और वह न्यायिक कसौटी पर भी खरा उतर सके।

उन्होंने यह भी बताया कि डांस बारों के संचालन में अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन में यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य डांस बारों के संचालन में पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।













उल्हासनगर महापालिका में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, एसीबी में पकड़े गए अधिकारियों से हटे महत्वपूर्ण पद; राज असरोंडकर ने स्थगित किया आमरण अनशन।




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रस्तावित बड़ा आंदोलन फिलहाल टल गया है। 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के प्रणेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राज असरोंडकर ने प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद 30 जून से प्रस्तावित अपना अनिश्चितकालीन आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की है।

महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाळे के निर्देश पर अनधिकृत निर्माण निष्कासन विभाग के नोडल अधिकारी गणेश शिंपी से नोडल अधिकारी का पदभार तथा सुरक्षा अधिकारी यशवंत सगळे से सुरक्षा अधिकारी का पदभार वापस ले लिया गया है। यशवंत सगळे का तबादला डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्ययन केंद्र में कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष मामलों की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से शासन के आदेशों का पालन किया जाएगा।

शासन के आदेशों के पालन की मांग पर चला आंदोलन

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को ऐसे महत्वपूर्ण पद नहीं दिए जाने चाहिए, जिनमें जनसंपर्क, संवेदनशील जिम्मेदारियां या नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार शामिल हो। इसके बावजूद उल्हासनगर महानगरपालिका में ऐसे कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने का आरोप लगाया गया था।

'कायद्याने वागा' लोकचळवळ का दावा है कि महानगरपालिका में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रंगेहाथ पकड़े गए लगभग 40 कर्मचारी-अधिकारी रहे हैं। इनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 23 कर्मचारी कार्यरत हैं। आरोप है कि इनमें से कई को शासन के निर्देशों की अनदेखी कर महत्वपूर्ण पदभार सौंपे गए थे। इन्हीं पदभारों को वापस लेने और शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था।

दो चरणों के आंदोलन के बाद अनशन की घोषणा

इस मांग को लेकर 16 जून और 23 जून को महानगरपालिका मुख्यालय के सामने आंदोलन किया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप था कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद राज असरोंडकर ने 30 जून से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की थी, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन

आंदोलन को कांग्रेस की नगरसेविका एवं विपक्ष की नेता अंजली साळवे का समर्थन मिला। उन्होंने इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी सौंपा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रोहित साळवे ने भी आंदोलन का सार्वजनिक समर्थन किया। इसके अलावा स्वराज्य संगठन सहित कई सामाजिक संगठनों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

सोमवार को 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के मीडिया समन्वयक प्रफुल केदारे, स्वराज्य संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट जय गायकवाड, समर्पण संस्था के अध्यक्ष मनोज कोरडे तथा कानून समन्वयक एडवोकेट वनिता ओवळेकर ने मुख्यालय उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले से मुलाकात कर प्रशासन से नियमों और कानूनों का स्वतः पालन करने की अपेक्षा व्यक्त की।

प्रशासन के आश्वासन के बाद बदला फैसला

उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले ने राज असरोंडकर से चर्चा कर उनसे आमरण अनशन न करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रत्येक मामले की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से संबंधित अधिकारियों से महत्वपूर्ण पदभार वापस लिए जाएंगे।

चर्चा के दौरान राज असरोंडकर ने "नोडल अधिकारी" जैसे कथित अवैध पद पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन ने उसी दिन गणेश शिंपी और यशवंत सगळे के पदभार वापस लेने की कार्रवाई कर दी।

आंदोलन फिलहाल स्थगित, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष रहेगा जारी

प्रशासन द्वारा सकारात्मक कदम उठाए जाने को देखते हुए राज असरोंडकर ने अपने सहयोगियों से चर्चा के बाद अनिश्चितकालीन आमरण अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। भविष्य में उल्हासनगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर एक संयुक्त महासंगठन बनाया जाएगा और महानगरपालिका सहित अन्य सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष पहले की तरह जारी रहेगा।

आंदोलन को रिपब्लिकन पार्टी के नेता नाना बागुल, सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति तायडे, एडवोकेट कल्पेश माने, पत्रकार प्रमोद रंदिल, प्रो. प्रवीण माळवे, शिवाजी म्हस्के, सतीश एटांबे, अभिमन्यू निकम, मनोज जगताप, विश्वास पाटील, हरेश ब्राह्मणे और देवेंद्र कांबळे सहित अनेक लोगों का समर्थन मिला। वहीं, परिमंडल-4 के पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे, गोपनीय विभाग के अधिकारियों तथा कई पत्रकारों के सहयोग के लिए राज असरोंडकर ने सभी का आभार व्यक्त किया। 













₹85 करोड़ के टेंडरों पर उल्हासनगर महापालिका में बवाल, स्टैंडिंग कमेटी को दरकिनार करने के आरोप।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में करीब ₹85 करोड़ के विकास कार्यों के टेंडरों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि इन करोड़ों रुपये के टेंडरों को स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए बिना ही महानगरपालिका प्रशासन ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए स्वीकृति दे दी। इस घटनाक्रम ने महापालिका की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

महापालिका सूत्रों के मुताबिक, स्टैंडिंग कमेटी के 16 सदस्यों का गठन होने के बावजूद इन विकास कार्यों के प्रस्ताव समिति के समक्ष चर्चा और अनुमोदन के लिए नहीं रखे गए। आरोप है कि एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता के कथित हस्तक्षेप और कुछ स्थानीय बिचौलियों की भूमिका के चलते टेंडरों का आवंटन सीधे कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) के स्टैंडिंग कमेटी सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसके बाद यह मामला प्रशासनिक दायरे से निकलकर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।

जानकारी के अनुसार, पी.पी. कॉन्ट्रैक्टर को दलित बस्ती विकास योजना के अंतर्गत ₹21 करोड़ और ₹10 करोड़, कुल ₹31 करोड़ के कार्य आवंटित किए गए हैं। वहीं, दलित बस्ती क्षेत्र में गार्डन सौंदर्यीकरण, समाज मंदिर निर्माण तथा अन्य विकास कार्यों से जुड़े लगभग ₹27 करोड़ के टेंडर जय भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिए गए हैं।

इसके अलावा, शहाड रेलवे स्टेशन के बाहर प्रस्तावित चार लेन सड़क निर्माण परियोजना के लिए राज्य सरकार से प्राप्त करीब ₹25 करोड़ की निधि से जुड़े कार्य भी जय भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इस प्रकार विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े लगभग ₹85 करोड़ के टेंडरों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

आरोप यह भी है कि टेंडरों को स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष रखने के बजाय सीधे प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी दी गई, जिससे वैधानिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी नगरसेवकों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को ही नजरअंदाज किया जाएगा, तो स्टैंडिंग कमेटी के गठन का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

इस बीच यह भी चर्चा है कि पिछले लगभग दो महीनों से महापालिका की सर्वसाधारण सभा आयोजित नहीं की गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर विवाद पर संभावित बहस और जवाबदेही से बचने के लिए सभा बुलाने में लगातार देरी की जा रही है।

हालांकि, इन आरोपों पर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी के चलते विवाद और गहराता जा रहा है।

अब सभी की निगाहें महानगरपालिका के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवादित टेंडरों की समीक्षा की जाती है या फिर पूरे मामले को नियमानुसार स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

फिलहाल, ₹85 करोड़ के टेंडरों को लेकर उठे इस विवाद ने उल्हासनगर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख और संभावित निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।यदि चाहें, इसे और अधिक खोजी (Investigative) या राष्ट्रीय समाचार पत्र की शैली में भी तैयार किया जा सकता है।














ड्रग्स के खिलाफ डरें नहीं, शिकायत करें": IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने जनता को दिए अहम कानूनी अधिकारों की जानकारी।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

देश में बढ़ते नशे और ड्रग्स के खतरे के बीच IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने आम जनता, अभिभावकों और युवाओं से नशे के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समाज को नशामुक्त बनाने की लड़ाई केवल पुलिस या सरकारी एजेंसियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

समीर वानखेड़े ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में ड्रग्स या नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी अथवा सेवन से जुड़ी जानकारी हो, तो लोग बिना किसी डर के संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। यदि शिकायत के बावजूद किसी पुलिस थाने का वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई करने में टालमटोल करता है, शिकायत को गंभीरता से नहीं लेता या शिकायतकर्ता को सहयोग देने से बचता है, तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने अभिभावकों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखें, उनके मित्रों और दिनचर्या के बारे में जानकारी रखें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें। समय रहते उठाया गया एक कदम किसी युवा का भविष्य बचा सकता है।

समीर वानखेड़े ने कहा कि ड्रग्स केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है। इसलिए इस सामाजिक बुराई के खिलाफ हर नागरिक को निर्भीक होकर आगे आना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नशे के कारोबारियों के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाएं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहयोग करें, ताकि युवाओं को इस दलदल से बचाया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से ही नशे के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। यदि नागरिक जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो देश को नशामुक्त बनाने के अभियान को नई मजबूती मिलेगी। वानखेड़े ने सभी नागरिकों से इस जनजागरूकता अभियान का हिस्सा बनने और नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।














उल्हासनगर के अवैध डंपिंग ग्राउंड पर आखिर किसके आदेश से लगीं पानी की टंकियां? आग बुझाने में हो रहा पीने के पानी का इस्तेमाल, कई गंभीर सवाल खड़े।





उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के डंपिंग ग्राउंड को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि डंपिंग ग्राउंड में समय-समय पर लगने वाली आग बुझाने के लिए पीने योग्य पानी का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, वहां लगाई गई पानी की टंकियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये टंकियां किसके आदेश पर लगाई गईं और क्या इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति ली गई थी?

इस मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक घुले ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि डंपिंग ग्राउंड पर पानी की टंकियां लगाने के लिए महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिखित पत्र जारी किया गया था।

यह जानकारी उन्होंने नगरसेवक प्रधान पाटील, राजू गोपलानी और विपुल मयेकर के साथ हुई चर्चा के दौरान दी। इस खुलासे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने लिखित रूप से टंकियां लगाने की अनुमति या निर्देश दिए थे, तो क्या पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई थी? साथ ही, क्या पीने योग्य पानी का उपयोग डंपिंग ग्राउंड में आग बुझाने के लिए करना उचित और वैध है?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में कई क्षेत्रों में पहले से ही पानी की कमी बनी रहती है। ऐसे में यदि पीने योग्य पानी का इस्तेमाल डंपिंग ग्राउंड की आग बुझाने में किया जा रहा है, तो यह संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। लोगों का यह भी कहना है कि डंपिंग ग्राउंड में बार-बार आग लगने की घटनाओं पर स्थायी समाधान खोजने के बजाय केवल पानी डालकर स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे प्रकरण में अब कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं—

डंपिंग ग्राउंड पर पानी की टंकियां किसकी अनुमति से लगाई गईं?

क्या इन्हें लगाने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया?

आग बुझाने के लिए पीने योग्य पानी का उपयोग किसके निर्देश पर किया जा रहा है?

यदि स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी किया था, तो उसकी शर्तें और उद्देश्य क्या थे?

इस पूरे मामले की जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?

बर्बाद किए गए पानी की भरपाई आखिर कौन करेगा?"

अब देखना होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, इस खुलासे ने महानगरपालिका की कार्यप्रणाली और डंपिंग ग्राउंड के प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रहार संगठन के शरद पोळके ने कई अहम सवाल उठाए हैं, लेकिन अब तक उनका कोई जवाब नहीं दिया गया है।
























TDCC बैंक चुनाव में भाजपा विधायक किशन कथोरे का जलवा बरकरार, सहकार पैनल ने प्रचंड जीत के साथ लहराया परचम।


ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

ठाणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (TDCC Bank) के चुनाव में भाजपा विधायक किशन कथोरे के नेतृत्व वाले सहकार पैनल ने शानदार जीत हासिल कर एक बार फिर अपने मजबूत जनाधार और प्रभाव का परिचय दिया है। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सहकारी क्षेत्र में विधायक किशन कथोरे की पकड़ पहले की तरह मजबूत बनी हुई है।

सहकार पैनल की इस बड़ी जीत के साथ बैंक की राजनीति में उसका वर्चस्व और अधिक मजबूत हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम विधायक किशन कथोरे की संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत तालमेल और सहकारी क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका का प्रतिफल है।

परिणाम घोषित होते ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल बन गया। कई स्थानों पर मिठाइयां बांटी गईं, ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जीत का जश्न मनाया गया और विजयी उम्मीदवारों का भव्य स्वागत किया गया। समर्थकों ने इसे सहकार, विकास और मजबूत नेतृत्व की जीत बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, TDCC बैंक चुनाव के नतीजे केवल बैंक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर आने वाले समय में ठाणे जिले की राजनीतिक और सहकारी गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। इस जीत को विधायक किशन कथोरे के बढ़ते प्रभाव और मजबूत जनसमर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

जीत के बाद विधायक किशन कथोरे ने सभी विजयी उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता सहकार क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक सदस्य के विश्वास और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि नई टीम किसानों, खाताधारकों और सहकारी संस्थाओं के हितों की रक्षा करते हुए बैंक को और अधिक मजबूत, आधुनिक तथा पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

उन्होंने भरोसा जताया कि बैंक की वित्तीय स्थिति को और सुदृढ़ करने, आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करने तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खाताधारकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नई टीम प्रभावी कदम उठाएगी।

सहकार पैनल की इस ऐतिहासिक जीत को ठाणे जिले की सहकारी राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे भाजपा विधायक किशन कथोरे के निरंतर बढ़ते प्रभाव और मजबूत नेतृत्व का प्रमाण माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर विरोधियों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है।














उल्हासनगर-5 की प्रतिष्ठित ट्रस्ट पर करोड़ों की संपत्ति में कथित घोटाले का साया, पुणे की बहुमूल्य जमीन कौड़ियों के भाव बेचने के आरोप; फर्जी हस्ताक्षरों से सौदे की भी चर्चा।


(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित एक प्रतिष्ठित ट्रस्ट इन दिनों गंभीर विवादों के घेरे में है। ट्रस्ट की पुणे स्थित बहुमूल्य जमीन को कथित तौर पर बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर बेचने की चर्चा तेज हो गई है। इस मामले को लेकर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों और स्थानीय नागरिकों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति का सौदा पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया, जिससे ट्रस्ट को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा।

सूत्रों के अनुसार, इस कथित सौदे में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों, ट्रस्टियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जमीन के दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा दिखाया गया। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला ट्रस्ट प्रशासन में गंभीर अनियमितताओं और धोखाधड़ी का रूप ले सकता है।

बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कुछ लोगों का दावा है कि वर्षों से ट्रस्ट की संपत्तियों और वित्तीय मामलों में कथित अनियमितताएं होती रही हैं, लेकिन अब पुणे की जमीन के सौदे ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इससे ट्रस्ट के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियां जल्द ही सार्वजनिक हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो ट्रस्ट के कई वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे ट्रस्ट के अंदरूनी कामकाज पर नया विवाद खड़ा हो सकता है।

हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित ट्रस्ट या आरोपों के घेरे में आए किसी भी व्यक्ति की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि भविष्य में उनका पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।