मुंबई: दिनेश मीरचंदानी
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों के बाहरी इलाकों तक इन दिनों ठेलों और चलती-फिरती गाड़ियों के माध्यम से आइसक्रीम, कुल्फी और रबड़ी की बिक्री बढ़ती नजर आ रही है। कम कीमत, आकर्षक रंग-रूप और अलग-अलग स्वाद के कारण इन उत्पादों की ओर खासकर बच्चे तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसी बीच ‘मेवाड आइसक्रीम’ नाम से बेचे जा रहे कुछ उत्पादों की गुणवत्ता और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लेकर नागरिकों ने चिंता जताई है।
नागरिकों का कहना है कि इन उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केवल आधिकारिक जांच के जरिए ही मिल सकता है। इसी कारण खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) से संबंधित उत्पादों के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक एवं प्रयोगशाला जांच कराने की मांग की जा रही है।
दूध की वसा या वनस्पति वसा? जांच से सामने आएगी वास्तविकता
नागरिकों की मांग है कि जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित उत्पादों में दूध की वसा का इस्तेमाल किया जा रहा है या वनस्पति वसा जैसी सामग्री का। साथ ही इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्य रंग, फ्लेवर और अन्य सामग्री निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जाए।
हालांकि, किसी भी उत्पाद में ‘डालडा’, वनस्पति वसा या अन्य किसी संदिग्ध सामग्री के इस्तेमाल का दावा बिना आधिकारिक नमूना जांच के प्रमाणित नहीं माना जा सकता। इसलिए इन आरोपों को लेकर निष्कर्ष निकालने के बजाय FDA द्वारा नमूने लेकर प्रयोगशाला रिपोर्ट सामने लाना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट में अंतर भी महत्वपूर्ण
खाद्य उत्पाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आधार पर आइसक्रीम और अन्य फ्रोजन डेजर्ट की श्रेणी अलग हो सकती है। ऐसे में केवल उत्पाद का नाम या उसकी कीमत देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह निर्धारित मानकों के अनुसार आइसक्रीम है या किसी अन्य श्रेणी का फ्रोजन उत्पाद।
चलती-फिरती गाड़ियों और खुले बाजार में बिकने वाले कई उत्पादों पर निर्माता, सामग्री, लाइसेंस या अन्य आवश्यक जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में आधिकारिक नमूना लेकर उसकी जांच कराना ही उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता और श्रेणी निर्धारित करने का उचित तरीका है।
कथित मिलावट को लेकर चर्चाएं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ नागरिकों ने आशंका जताई है कि कम कीमत पर उत्पाद तैयार करने के लिए वनस्पति वसा या अन्य वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा कृत्रिम रंग और फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कुछ लोगों द्वारा डिटर्जेंट, औद्योगिक रंग, यूरिया या फॉर्मेलिन जैसे पदार्थों के संभावित इस्तेमाल की आशंका भी व्यक्त की गई है। लेकिन इन गंभीर दावों की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसलिए बिना प्रयोगशाला जांच के ऐसे पदार्थों की मौजूदगी का दावा करना उचित नहीं होगा। खाद्य सुरक्षा के मामले में अफवाहों के बजाय वैज्ञानिक परीक्षण और आधिकारिक रिपोर्ट को ही आधार बनाया जाना चाहिए।
खुले में बिक्री और स्वच्छता भी जांच के दायरे में हो
गुणवत्ता के साथ-साथ चलती-फिरती गाड़ियों से खाद्य पदार्थों की बिक्री के दौरान स्वच्छता और भंडारण व्यवस्था की जांच भी जरूरी है।
खुले वातावरण में रखे गए खाद्य पदार्थ धूल, वाहनों के धुएं, मक्खियों और अन्य प्रदूषकों के संपर्क में आ सकते हैं। इसके अलावा विक्रेताओं की व्यक्तिगत स्वच्छता, इस्तेमाल किए जाने वाले पानी, चम्मच एवं बर्तनों की सफाई तथा उत्पादों के सुरक्षित तापमान पर भंडारण की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
चूंकि आइसक्रीम और कुल्फी बच्चों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हैं, इसलिए खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
FSSAI पंजीकरण और लाइसेंस की जांच की मांग
नागरिकों ने संबंधित विक्रेताओं के FSSAI पंजीकरण या आवश्यक लाइसेंस की भी जांच करने की मांग की है।
प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की गई है कि संबंधित खाद्य उत्पाद कहां तैयार किए जाते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल कहां से आता है, उत्पादों का भंडारण किस प्रकार किया जाता है और बिक्री के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ लागू कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
FDA से विशेष जांच अभियान चलाने की मांग
नागरिकों की ओर से FDA के समक्ष मुख्य रूप से निम्न मांगें रखे जाने की बात कही जा रही है—
- चलती-फिरती आइसक्रीम, कुल्फी और रबड़ी विक्रेताओं की विशेष जांच की जाए।
- बिक्री के लिए रखे खाद्य पदार्थों के आधिकारिक नमूने लिए जाएं।
- नमूनों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाए।
- खाद्य रंग, फ्लेवर, दूध की वसा या वनस्पति वसा सहित इस्तेमाल की जा रही सामग्री की जांच की जाए।
- संबंधित विक्रेताओं के FSSAI पंजीकरण और लाइसेंस की पुष्टि की जाए।
- खाद्य पदार्थों के भंडारण, तापमान नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की जाए।
- किसी भी नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
- जांच के निष्कर्षों को आवश्यकतानुसार सार्वजनिक किया जाए, ताकि अफवाहों और गलत जानकारी पर रोक लग सके।
सभी ‘मेवाड’ विक्रेताओं को दोषी मानना उचित नहीं
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘मेवाड आइसक्रीम’ नाम का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक विक्रेता या उत्पाद को खराब, मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताना उचित नहीं होगा।
किसी खास उत्पाद में मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि केवल आधिकारिक नमूना, वैज्ञानिक परीक्षण और सक्षम विभाग की रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है।
यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी। वहीं, यदि उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो यह जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए। इससे उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलेगी और बिना आधार की चर्चाओं पर भी रोक लगेगी।
अभिभावकों से सावधानी बरतने की अपील
जब तक संबंधित उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, अभिभावकों को बच्चों के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
खरीदारी करते समय यह देखना उपयोगी है कि उत्पाद सुरक्षित और साफ तरीके से रखा गया है या नहीं, बिक्री स्थल की स्वच्छता कैसी है तथा खाद्य पदार्थों का भंडारण उचित तरीके से किया जा रहा है या नहीं।
कम कीमत और आकर्षक स्वाद से अधिक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ की सुरक्षा और गुणवत्ता है।
अब मुख्य नजर FDA की संभावित कार्रवाई पर है। क्या संबंधित विक्रेताओं के नमूने लिए जाएंगे? क्या उनकी प्रयोगशाला जांच होगी? और क्या जांच रिपोर्ट से इन उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी?
फिलहाल यह मामला आरोपों से अधिक वैज्ञानिक जांच की मांग का है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।