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उल्हासनगर में फ्लैट सौदे में ₹35.50 लाख की कथित धोखाधड़ी, जमीन मालिक-डेवलपर समेत 4 के खिलाफ FIR दर्ज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में अधूरे प्रोजेक्ट के नाम पर फ्लैट खरीदने के सौदे में कथित आर्थिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता अनिल सीतलदास मंगतानी की शिकायत के आधार पर FIR क्रमांक 382/2026 उल्हासनगर-1 पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। शिकायत में जमीन मालिक, डेवलपर और दो एजेंटों पर आपसी मिलीभगत कर कथित रूप से ₹35.50 लाख की आर्थिक धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है।

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2023 में अनिल मंगतानी ने अपने मित्र एवं रियल एस्टेट ब्रोकर मनोजकुमार गोरघनदास थावरानी के माध्यम से उल्हासनगर-2 स्थित ‘सेवन हेवन’ अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदने की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद जमीन मालिक रजनी अर्जुनदास रामसिंधानी और उनके कथित डेवलपर मनोज कुल्लूमल पंजवानी से संपर्क हुआ।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, सेवन हेवन की तीसरी मंजिल पर फ्लैट नंबर 301, करीब 1100 वर्ग फुट क्षेत्रफल के फ्लैट का सौदा ₹37.50 लाख में तय हुआ। सौदे के तहत शिकायतकर्ता का मौजूदा 780 वर्ग फुट का फ्लैट ₹17.50 लाख में देने तथा शेष ₹20 लाख का भुगतान करने की बात तय हुई।

शिकायत में बताया गया है कि 19 अगस्त 2023 को ₹50,000, इसके बाद 21 अगस्त 2023 को ₹5.50 लाख और 1 नवंबर 2023 को कुल ₹10 लाख विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से रजनी रामसिंधानी को भुगतान किए गए। इस प्रकार फ्लैट सौदे के लिए कुल ₹16 लाख की बैंकिंग लेनदेन का उल्लेख शिकायत में किया गया है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के पुराने फ्लैट के बदले ₹17.50 लाख का सौदा भी किया गया था।

रजिस्ट्रेशन के बाद भी नहीं मिला कब्जा

शिकायत के अनुसार, 7 नवंबर 2023 को शिकायतकर्ता, उनकी पत्नी और बेटे के नाम पर सेवन हेवन के फ्लैट नंबर 301 का पंजीकरण कराया गया। रजिस्ट्रेशन के समय कथित तौर पर 15 महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा देने का आश्वासन दिया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तय अवधि बीतने के बावजूद इमारत का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ और उन्हें फ्लैट का कब्जा भी नहीं मिला।

जब शिकायतकर्ता ने बार-बार फ्लैट के बारे में जानकारी मांगी, तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि उनका पैसा डेवलपर मनोज पंजवानी को दिया जा चुका है और उनसे संपर्क किया जाए।

दो एजेंटों को ब्रोकरेज देने का भी आरोप

शिकायत में मनोजकुमार गोरघनदास थावरानी और सुनील चुन्नीलाल लालवानी पर भी ब्रोकरेज के नाम पर ₹1-1 लाख लेने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, थावरानी को ₹1 लाख Google Pay के माध्यम से तथा सुनील लालवानी को ₹1 लाख नकद दिए गए।

चार लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत

अनिल मंगतानी ने अपनी शिकायत में रजनी अर्जुनदास रामसिंधानी, मनोज कुल्लूमल पंजवानी, मनोजकुमार गोरघनदास थावरानी और सुनील चुन्नीलाल लालवानी को नामजद किया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चारों ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत कर उनका विश्वास हासिल किया और फ्लैट सौदे के नाम पर धनराशि प्राप्त करने के बाद न तो निर्धारित फ्लैट का कब्जा दिया और न ही उनका पैसा वापस किया।

शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले में कुल ₹35.50 लाख की आर्थिक धोखाधड़ी एवं गबन का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस द्वारा शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।



















उल्हासनगर में ‘मल्हार वॉटरफ्रंट’ में फ्लैट खरीदने से पहले दस्तावेजों की गहन जांच जरूरी, प्लॉट नंबर 63, सेक्शन 4/A और सी.टी.एस. नंबर 9113 से जुड़ी संपत्ति का मामला; खरीदारों से जल्दबाजी से बचने और सभी सरकारी मंजूरियों की पुष्टि करने की अपील।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 क्षेत्र में उल्हासनगर महानगरपालिका के पास स्थित ‘मल्हार वॉटरफ्रंट’ नामक इमारत में फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे नागरिकों के लिए संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों और सरकारी मंजूरियों की विस्तृत जांच करना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उक्त परियोजना प्लॉट नंबर 63, सेक्शन 4/A, शीट नंबर 51 और सी.टी.एस. नंबर 9113 से संबंधित बताई जा रही है।

इस संपत्ति से संबंधित नक्शा/खाका क्रमांक UMC/BP/46/24/148 के रूप में उल्लेखित है। ऐसे में संभावित खरीदारों के लिए जरूरी है कि वे केवल बिल्डिंग के नाम, प्रचार सामग्री, मौखिक जानकारी या ब्रोकर द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर फ्लैट खरीदने का निर्णय न लें।

हर दस्तावेज की करें स्वतंत्र जांच

फ्लैट खरीदना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा आर्थिक निर्णय होता है। इसलिए बुकिंग या भुगतान करने से पहले संबंधित संपत्ति के टाइटल दस्तावेज, भूमि रिकॉर्ड, सी.टी.एस. रिकॉर्ड, मंजूर बिल्डिंग प्लान, निर्माण अनुमति, विकास संबंधी अनुमतियां, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC), कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC), रेरा पंजीकरण जहां लागू हो तथा अन्य आवश्यक सरकारी मंजूरियों की जांच करना बेहद जरूरी है।

खरीदार संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर उन्हें संबंधित सरकारी विभागों और सक्षम प्राधिकरणों के रिकॉर्ड से मिलान कर सकते हैं। दस्तावेजों में किसी प्रकार की विसंगति, अंतर या अस्पष्टता दिखाई देने पर उसका स्पष्टीकरण प्राप्त किए बिना आर्थिक लेन-देन करना उचित नहीं होगा।

महानगरपालिका के रिकॉर्ड से करें पुष्टि

संभावित खरीदार संबंधित निर्माण योजना और मंजूरियों की जानकारी उल्हासनगर महानगरपालिका के संबंधित विभाग से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, जहां आवश्यक हो वहां भूमि एवं संपत्ति रिकॉर्ड की भी स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले दस्तावेजों की केवल सतही जांच के बजाय संपत्ति कानून के अनुभवी वकील या योग्य प्रॉपर्टी लीगल एक्सपर्ट से टाइटल और अन्य कानूनी दस्तावेजों की जांच कराना खरीदार के हित में हो सकता है।

बुकिंग और भुगतान में जल्दबाजी से बचें

‘मल्हार वॉटरफ्रंट’ में फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव या जल्दबाजी में बुकिंग राशि अथवा अन्य भुगतान न करें। पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों और सरकारी मंजूरियों की पुष्टि करें और उसके बाद ही खरीदारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।

खरीदारों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फ्लैट से संबंधित कारपेट एरिया, कीमत, पार्किंग, सुविधाएं, रखरखाव, कब्जा देने की समयसीमा और अन्य शर्तें लिखित रूप में स्पष्ट हों तथा संबंधित करार और दस्तावेजों में उनका उल्लेख हो।

सतर्कता ही सबसे सुरक्षित कदम

किसी भी आवासीय परियोजना में निवेश करने से पहले दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच खरीदार को भविष्य में संभावित कानूनी या आर्थिक परेशानी से बचाने में मदद कर सकती है। इसलिए नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे “पहले दस्तावेजों की जांच, फिर निवेश” के सिद्धांत को अपनाएं।

यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर खरीदारों को जागरूक और सतर्क करने के उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, बिल्डर, संस्था या परियोजना पर कोई आरोप लगाना या उसकी वैधता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष देना नहीं है। किसी भी परियोजना की वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक जानकारी से ही निर्धारित की जानी चाहिए।

यदि संबंधित बिल्डर, संस्था या अन्य पक्ष इस विषय में कोई आधिकारिक दस्तावेज, स्पष्टीकरण या अपना पक्ष प्रस्तुत करता है, तो उसे भी तथ्यात्मक रूप से उचित स्थान दिया जा सकता है।




















उल्हासनगर में पुनर्बांधणी विवाद पर मनपा का अंतिम स्मरणपत्र; 7 दिन में जवाब नहीं दिया तो होगी एकतरफा कार्रवाई।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के नगररचना विभाग ने उल्हासनगर-3 स्थित एक पुनर्बांधणी परियोजना को लेकर संबंधित संस्था को अंतिम स्मरणपत्र जारी किया है। मनपा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर निर्धारित समय के भीतर लिखित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया तो संबंधित पक्ष का कोई पक्ष नहीं है, ऐसा मानते हुए एकतरफा निर्णय लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मनपा नगररचना विभाग की ओर से यह पत्र 5 अगस्त 2026 को जारी किया गया है। पत्र के अनुसार, CTS नंबर 9113, प्लॉट नंबर 63, सेक्शन-4ए, शीट नंबर 51, उल्हासनगर-3 स्थित संपत्ति पर मल्हार को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की ओर से पुनर्बांधणी निर्माण की अनुमति प्रदान की गई है।

इस परियोजना के लिए मनपा ने 9 जनवरी 2025 को पुनर्बांधणी निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति प्रमाणपत्र जारी किया था। इसी अनुमति के आधार पर वर्तमान में इमारत का निर्माण कार्य चल रहा है।

निर्माण कार्य को लेकर शिकायत

मनपा के पत्र में बताया गया है कि शिकायतकर्ता अमित किशिनचंद पमनानी की ओर से अधिवक्ता निखिल एच. टेकवाणी ने 15 मई 2026 को नगररचना विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में मंजूर पुनर्बांधणी निर्माण अनुमति के आधार पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर विभिन्न मुद्दे उठाए गए हैं।

शिकायत के बाद नगररचना विभाग ने संबंधित संस्था को 10 जुलाई 2026 के पत्र के माध्यम से शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

निर्धारित समय बीतने के बावजूद जवाब नहीं

मनपा के अनुसार, निर्धारित सात दिनों की अवधि बीत जाने के बावजूद संबंधित पक्ष की ओर से अब तक कोई लिखित खुलासा या स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी कारण नगररचना विभाग ने अब अंतिम स्मरणपत्र जारी करते हुए दोबारा सात दिनों की मोहलत दी है।

मनपा ने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि शिकायत में उठाए गए मुद्दों के संबंध में 7 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण/कहना प्रस्तुत नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि संबंधित पक्ष को इस मामले में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद विभाग द्वारा एकतरफा निर्णय लेकर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

यह अंतिम स्मरणपत्र उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रभारी सहायक संचालक, नगररचना चेतन पाटील के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। पत्र की एक प्रति शिकायतकर्ता अमित किशिनचंद पमनानी को भी जानकारी के लिए भेजी गई है।

निर्माण परियोजना पर बढ़ी नजर

मनपा के इस अंतिम नोटिस के बाद उल्हासनगर-3 की उक्त पुनर्बांधणी परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, पत्र में शिकायत के आरोपों को सही ठहराने संबंधी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। फिलहाल संबंधित पक्ष को अपना लिखित पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और आगे की कार्रवाई उसके जवाब तथा मनपा के नियमानुसार निर्णय पर निर्भर करेगी।
























उल्हासनगर-2 के राशन वितरण कार्यालय क्रमांक 40-एफ (उप) में कथित अनियमितताओं के आरोप, गरीब लाभार्थियों को पूरा राशन न मिलने की शिकायत; राशन दुकानदारों और RO-ARO अधिकारियों की भूमिका पर सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-2 के राशन वितरण कार्यालय क्रमांक 40-एफ (उप) में अंतर्गत आने वाली विभिन्न राशन दुकानों में राशन वितरण को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि राशन दुकानदारों को उनके अंतर्गत दर्ज राशन कार्डों की संख्या के आधार पर निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसके बावजूद पात्र गरीब लाभार्थियों तक पूरा राशन नहीं पहुंच रहा है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि राशन वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के चलते कई जरूरतमंद परिवार अपने निर्धारित राशन से वंचित रह जाते हैं। वहीं, क्षेत्र के RO और ARO अधिकारियों की कथित मिलीभगत के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राशन दुकानों में उपलब्ध स्टॉक, राशन कार्डधारकों की संख्या और वास्तविक वितरण की निष्पक्ष जांच की जाए तो कथित गड़बड़ियों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकार की ओर से मिलने वाला राशन उनका अधिकार है। ऐसे में नागरिकों ने संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से उल्हासनगर-2 के राशन वितरण कार्यालय क्रमांक 40-एफ (उप) में अंतर्गत आने वाली सभी राशन दुकानों की जांच, स्टॉक का सत्यापन और वितरण व्यवस्था का ऑडिट कराने की मांग की है।

अब देखना होगा कि इन शिकायतों और आरोपों को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों एवं राशन दुकानदारों की भूमिका की जांच होती है।


















2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर उल्हासनगर में सियासी हलचल तेज, शिवसेना से कमलेश निकम के नाम की चर्चा। BJP-शिवसेना का गठबंधन नहीं हुआ तो बदल सकते हैं समीकरण, डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में कमलेश निकम का बढ़ता कद।

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में 2029 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। खासतौर पर उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि 2029 के विधानसभा चुनाव में BJP और शिवसेना के बीच गठबंधन नहीं होता है और दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो शिवसेना की ओर से उल्हासनगर में एक नए चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सूत्रों का दावा है कि कल्याण लोकसभा क्षेत्र के शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की नजरों में उल्हासनगर के शिवसेना नेता कमलेश निकम लगातार अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं। निकम पिछले कुछ समय से उल्हासनगर में संगठन को मजबूत करने और शिवसैनिकों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर शिवसेना के कार्यक्रमों, संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क के चलते कमलेश निकम की सक्रियता चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ शिवसैनिकों के बीच अपना तालमेल और जनसंपर्क भी लगातार बढ़ा रहे हैं।

शिवसैनिकों में भी उत्साह का माहौल

कमलेश निकम की बढ़ती सक्रियता का असर स्थानीय शिवसैनिकों के बीच भी दिखाई देने की बात कही जा रही है। पार्टी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं में उनके नाम को लेकर सकारात्मक माहौल बनने की चर्चा है। ऐसे में यदि आगामी विधानसभा चुनाव में शिवसेना और BJP अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं, तो उल्हासनगर सीट पर पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताएगी, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

टिकट को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं

हालांकि, 2029 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर अभी काफी समय बाकी है और शिवसेना की ओर से कमलेश निकम के नाम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संगठन में उनकी बढ़ती सक्रियता और डॉ. श्रीकांत शिंदे के साथ बेहतर समन्वय को देखते हुए उनका नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में आ सकता है।

आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति और महायुति के समीकरण किस दिशा में जाते हैं, यह तय करेगा कि 2029 में उल्हासनगर विधानसभा सीट पर मुकाबला किस तरह का होगा। फिलहाल कमलेश निकम के संभावित विधानसभा टिकट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।


















दूध-पनीर समेत खाद्य पदार्थों में मिलावट पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, MCOCA की तैयारी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। आम नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की जान और स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को निर्देश दिया है कि दूध, पनीर सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ व्यापक और प्रभावी कार्रवाई की जाए। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच, नमूने लेने, छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को और तेज करने पर जोर दिया गया है।

संगठित मिलावटखोरी पर MCOCA का शिकंजा

सरकार की ओर से गंभीर और संगठित तरीके से मिलावट का कारोबार चलाने वालों के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य उन लोगों और गिरोहों पर शिकंजा कसना है, जो बड़े पैमाने पर मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

दूध-पनीर की गुणवत्ता पर विशेष नजर

दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं। ऐसे में इन उत्पादों में मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार के निर्देशों के बाद FDA द्वारा मिलावटखोरों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है। मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मिलावटखोरों को सरकार की दो टूक चेतावनी

सरकार के इस सख्त रुख से खाद्य पदार्थों में मिलावट का अवैध कारोबार करने वालों में हड़कंप मचने की संभावना है। प्रशासन का संदेश साफ है कि मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

दूध, पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में राज्यभर में जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
















उज्ज्वल निकम बनेंगे केंद्रीय मंत्री? अमित शाह से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज।

नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर सियासी हलचल के बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में निकम को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि संसद के मौजूदा सत्र के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावना को लेकर चर्चा चल रही है। ऐसे में अमित शाह और उज्ज्वल निकम के बीच हुई मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, निकम को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मुंबई से दिल्ली तक पहुंची सकारात्मक रिपोर्ट!

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उज्ज्वल निकम के राजनीतिक और सामाजिक कामकाज को लेकर मुंबई से दिल्ली तक सकारात्मक रिपोर्ट पहुंची है। इसी वजह से उन्हें केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण मंत्रालय या अहम जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

निकम का नाम देश के चर्चित सरकारी वकीलों में प्रमुखता से लिया जाता है। लंबे समय तक उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील आपराधिक मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की है। आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में उनकी प्रभावी पैरवी के कारण उन्हें देशभर में पहचान मिली।

कई चर्चित मामलों में कर चुके हैं पैरवी

उज्ज्वल निकम ने 1993 मुंबई बम धमाके, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और कोपर्डी बलात्कार-हत्या मामले समेत कई चर्चित मामलों में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।

उनकी कानूनी विशेषज्ञता और लंबे सार्वजनिक जीवन को देखते हुए अब उनके संभावित राजनीतिक दायित्व को लेकर चर्चा हो रही है। अमित शाह के साथ उनकी हालिया मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

2025 में राज्यसभा के लिए हुए मनोनीत

उज्ज्वल निकम को वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। इससे पहले उन्हें वर्ष 2016 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार के बीच अमित शाह से मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उज्ज्वल निकम को मोदी सरकार में मंत्री पद या कोई बड़ी संवैधानिक/राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने जा रही है?

फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन निकम की अमित शाह से मुलाकात ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।