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उल्हासनगर SDO कार्यालय में गणेश नामक सरकारी कर्मचारी की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना, तबादला नीति, सनद प्रक्रिया और RTI जवाबों की पारदर्शिता पर सवाल; निष्पक्ष जांच की मांग।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर उपविभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय में गणेश नामक एक सरकारी कर्मचारी की लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि महाराष्ट्र सरकार की तबादला नीति के तहत सामान्यतः तीन वर्ष की सेवा अवधि के बाद कर्मचारियों के स्थानांतरण की समीक्षा की जानी चाहिए। ऐसे में संबंधित कर्मचारी की लंबे समय से जारी पदस्थापना का प्रशासनिक आधार क्या है, यह सवाल महत्वपूर्ण बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी पर कथित तौर पर संदिग्ध एवं फर्जी सनद जारी करने की प्रक्रिया में बिचौलियों के साथ संपर्क होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, कुछ बिल्डरों और कथित भू-माफियाओं के साथ उनके संबंधों को लेकर भी शिकायतें सामने आने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की अब तक कोई स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में यह भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्रभाव को लेकर विभिन्न चर्चाएं क्यों हो रही हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कर्मचारी अपने प्रभावशाली संपर्कों का हवाला देते हैं। इन दावों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

RTI के जवाबों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल

इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिलने वाले जवाबों को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ ऑनलाइन RTI आवेदनों के जवाब अपेक्षित जानकारी के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक नहीं होते। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार मांगी गई जानकारी के बजाय अस्पष्ट अथवा अधूरी जानकारी प्राप्त होती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि SDO कार्यालय में RTI आवेदनों का निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है और क्या आवेदकों को मांगी गई जानकारी नियमानुसार उपलब्ध कराई जा रही है? इस संबंध में RTI आवेदनों और उनके जवाबों की सक्षम अधिकारियों द्वारा समीक्षा किए जाने की मांग उठ रही है।

मोबाइल नंबर बदलने को लेकर भी चर्चा

सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी के कथित तौर पर बार-बार मोबाइल नंबर बदलने को लेकर भी कुछ शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, केवल मोबाइल नंबर बदलना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। यदि किसी शिकायत में ठोस आधार सामने आते हैं, तो सक्षम जांच एजेंसी कानून के अनुसार आवश्यक तथ्यों की जांच कर सकती है।कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से संबंधित जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।












सामाजिक संगठनों द्वारा शिकायत की तैयारी?

सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर के कुछ सामाजिक संगठन और समाजसेवक इस मामले को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष औपचारिक शिकायत प्रस्तुत करने की तैयारी कर सकते हैं। शिकायत में कर्मचारी की पदस्थापना, तबादला नीति के अनुपालन, सनद जारी करने की प्रक्रिया और RTI के जवाबों की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की संभावना है।

प्रशासन के सामने उठे ये अहम सवाल

1. संबंधित कर्मचारी की लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापना का प्रशासनिक आधार क्या है?

2. क्या तीन वर्ष की सामान्य तबादला नीति के संदर्भ में उनकी पदस्थापना की समीक्षा की गई है?

3. सनद जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या आंतरिक जांच की गई है?

4. क्या सनद जारी करने से संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराया जा सकता है?

5. RTI आवेदनों के जवाबों की गुणवत्ता और समयबद्धता की समीक्षा कौन करेगा?

6. क्या जिला प्रशासन शिकायत मिलने पर निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की पहल करेगा?

निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग

उल्हासनगर SDO कार्यालय से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि नागरिकों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो उनकी जांच दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर की जानी चाहिए।

फिलहाल, संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कर्मचारी का पक्ष और SDO कार्यालय तथा जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से शिवसेना की R.R.R. टीम ने की शिष्टाचार भेंट; संगठन विस्तार और जनसेवा को लेकर मिला मार्गदर्शन।


 






उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

दीपावली के पावन अवसर पर शिवसेना के मुख्य नेता एवं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे से शिवसेना के पदाधिकारियों एवं R.R.R. टीम के सदस्यों ने शिष्टाचार भेंट कर उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर हुई मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने R.R.R. टीम द्वारा किए जा रहे कार्यों और संगठन के प्रति उसके योगदान की विशेष सराहना की। उन्होंने पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, शिवसेना का जनाधार बढ़ाने तथा आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर सक्रिय रहने का मार्गदर्शन किया।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक गतिविधियों में अधिक ऊर्जा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ जुटने का संदेश दिया। उन्होंने जनसंपर्क को मजबूत करने और जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान के लिए प्रयासरत रहने पर भी जोर दिया।

नेतृत्व के मार्गदर्शन से संगठन विस्तार का संकल्प

इस मुलाकात के बाद R.R.R. टीम की ओर से कहा गया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा व्यक्त किया गया विश्वास और दिया गया मार्गदर्शन टीम के लिए प्रेरणादायक है। टीम भविष्य में भी शिवसेना की संगठनात्मक मजबूती, जनसंपर्क और जनसेवा के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए दोगुनी ऊर्जा के साथ काम करती रहेगी।

मुलाकात में ये पदाधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर शिवसेना महानगर प्रमुख श्री राजेंद्र चौधरी, शिवसेना शहर प्रमुख श्री राजेंद्र सिंह भुल्लर (महाराज), नगरसेवक श्री रमेश चव्हाण, कल्याण युवासेना लोकसभा सचिव श्री हरजिंदर सिंह (विक्की) भुल्लर, शहर संगठक श्री कैलाश तेजी, उत्तर भारतीय शहर संगठक श्री के.डी. तिवारी, समाजसेवक श्री युवराज भदाणे, उपशहर प्रमुख श्री जीतू उपाध्याय, विभाग प्रमुख श्री प्रमोद पांडेय, उत्तर भारतीय सह-उप विधानसभा संगठक श्री रामकृपाल यादव तथा शाखा प्रमुख श्री मुकेश यादव सहित शिवसेना के अन्य पदाधिकारी एवं शिवसैनिक उपस्थित थे।

दीपावली के शुभ अवसर पर हुई यह शिष्टाचार मुलाकात संगठनात्मक संवाद, कार्यकर्ताओं के उत्साह और जनसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही।

नेतृत्व का मार्गदर्शन, कार्यकर्ताओं का समर्पण और संगठन की मजबूती—इसी संकल्प के साथ R.R.R. टीम ने आगे भी जनसेवा के कार्य जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

🚩 जय महाराष्ट्र! जय शिवसेना!














विधायक किसन कथोरे के प्रयास सफल! कल्याण में अपर जिलाधिकारी कार्यालय को महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी, चार तहसीलों के नागरिकों को मिलेगी राहत।





बदलापुर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

ठाणे जिले के नागरिकों के लिए प्रशासनिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग ने कल्याण में अपर जिलाधिकारी (Additional Collector) कार्यालय शुरू करने को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय से कल्याण, उल्हासनगर, अंबरनाथ और मुरबाड इन चार तहसीलों के नागरिकों को राजस्व प्रशासन से संबंधित कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर एक नया प्रशासनिक केंद्र उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।

इस कार्यालय की स्थापना की मांग मुरबाड विधानसभा क्षेत्र के विधायक किसन कथोरे द्वारा लगातार शासन स्तर पर उठाई जा रही थी। शासन की ओर से 6 नवंबर 2026 को मंजूरी दिए जाने के बाद उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

चार तहसीलों के नागरिकों को मिलेगी बड़ी राहत

अब तक इन चार तहसीलों के नागरिकों को अपर जिलाधिकारी स्तर पर आने वाले विभिन्न राजस्व मामलों के लिए कई बार ठाणे जिला मुख्यालय जाना पड़ता था। जिले का विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र, बढ़ती आबादी, शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों से ठाणे तक की दूरी को देखते हुए नागरिकों को समय और आर्थिक खर्च दोनों का सामना करना पड़ता था।

कल्याण में नया अपर जिलाधिकारी कार्यालय शुरू होने के बाद संबंधित अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजस्व मामलों के लिए नागरिकों को नजदीकी प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

इसका विशेष लाभ मुरबाड के ग्रामीण क्षेत्रों, अंबरनाथ तहसील के बदलापुर शहर, उल्हासनगर तथा कल्याण के नागरिकों को मिलने की उम्मीद है।

नागरिकों को किन कार्यों में मिल सकती है सुविधा?

नए कार्यालय के कार्यक्षेत्र और शासन द्वारा निर्धारित विषय आवंटन के अनुसार नागरिकों को निम्नलिखित सुविधाएं मिल सकती हैं:

1. राजस्व मामलों की सुनवाई: अपर जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की सुनवाई और पैरवी कल्याण में करना संभव होगा।

2. भूमि संबंधी प्रकरण: भूमि और अन्य राजस्व मामलों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों के लिए नजदीकी कार्यालय उपलब्ध होगा।

3. समय और खर्च की बचत: ठाणे जिला मुख्यालय तक बार-बार यात्रा करने की आवश्यकता कम हो सकती है।

4. किसानों और ग्रामीण नागरिकों को लाभ: मुरबाड सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को प्रशासनिक कामकाज में सुविधा मिलने की संभावना है।

5. प्रशासनिक समन्वय में सुधार: चारों तहसीलों के राजस्व संबंधी मामलों और स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों के निपटारे में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

हालांकि, कार्यालय में किन-किन मामलों की सुनवाई और निपटारा किया जाएगा, यह शासन के विषय आवंटन और निर्धारित अधिकारों के अनुसार तय होगा।

ठाणे जिले का प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र भी किया गया स्पष्ट

शासन के निर्णय के अनुसार कल्याण स्थित अपर जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में चार तहसीलें शामिल रहेंगी:

- कल्याण
- उल्हासनगर
- अंबरनाथ
- मुरबाड

वहीं ठाणे, भिवंडी और शहापुर तहसीलों का अधिकार क्षेत्र ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के अंतर्गत ही रहेगा। जिलाधिकारी के अधिकारों में इस निर्णय से कोई बदलाव नहीं किया गया है।

15 दिनों के भीतर सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

शासन निर्णय के अनुसार नए कार्यालय को कार्यान्वित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

इसके तहत आवश्यक पदों पर नियुक्तियों, अस्थायी कार्यालय के लिए स्थान का चयन तथा अन्य प्रारंभिक व्यवस्थाओं के संबंध में 15 दिनों के भीतर शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

इसके अलावा कार्यालय के लिए स्थायी जगह तलाशने और भविष्य में स्वतंत्र कार्यालय भवन के निर्माण का प्रस्ताव भी सरकार के समक्ष भेजा जाएगा।

कार्यालय का प्रत्यक्ष कामकाज किस तारीख से शुरू होगा, इसकी जानकारी संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग से घोषित की जाएगी।

विधायक किसन कथोरे की पहल को मिली प्रशासनिक मंजूरी

कल्याण में अपर जिलाधिकारी कार्यालय स्थापित करने की मांग लंबे समय से नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से जुड़ी हुई थी। विधायक किसन कथोरे द्वारा इस विषय को शासन स्तर पर लगातार उठाए जाने के बाद अब राजस्व विभाग ने इसे मंजूरी प्रदान की है।

इस निर्णय को ठाणे जिले के चार तहसील क्षेत्रों के नागरिकों के लिए प्रशासनिक सुविधाओं को नजदीक लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार का आभार, विधायक किसन कथोरे को बधाई

चार तहसीलों के नागरिकों के हित में लिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए महाराष्ट्र सरकार का आभार व्यक्त किया गया है। साथ ही इस मांग को लगातार आगे बढ़ाने के लिए विधायक किसन कथोरे को बधाई दी गई है।

यह जानकारी कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद की नियोजन एवं विकास समिति के सभापति श्री संभाजी शिंदे की ओर से साझा की गई है।

आधिकारिक संदर्भ: महाराष्ट्र शासन, राजस्व विभाग का शासन निर्णय दिनांक 6 नवंबर 2026।

शासन निर्णय सांकेतांक: 202611061815441648

विशेष टिप्पणी: कार्यालय की स्थापना की मंजूरी मिलना प्रशासनिक प्रक्रिया की शुरुआत है। नियुक्तियां, कार्यालय का स्थान, विषय आवंटन और प्रत्यक्ष कामकाज शुरू होने की तारीख संबंधित शासन एवं प्रशासनिक आदेशों के अनुसार निर्धारित होगी।























नशामुक्त ठाणे के लिए पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे का संकल्प! ड्रग्स तस्करों पर सख्ती, युवाओं को जागरूक करने पर विशेष जोर।


ठाणे: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और ठाणे को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से ठाणे पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ अपनी कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियान पर विशेष जोर दिया है। पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे के नेतृत्व में मादक पदार्थों की बिक्री, परिवहन और तस्करी पर रोक लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अभियान के तहत ठाणे पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टीम और अपराध शाखा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने की दिशा में काम कर रही हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2026 में मादक पदार्थों के खिलाफ विभिन्न कार्रवाइयों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री को कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट करने की कार्रवाई भी की गई है।

पुलिस का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से नशे की समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और विशेष रूप से युवाओं में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देने तथा उन्हें शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस पहल में अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। बच्चों के व्यवहार पर ध्यान देने, उनसे नियमित संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर संबंधित पुलिस थाने को सूचित करने की अपील की गई है।

ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे ने नशामुक्त और सुरक्षित शहर के निर्माण के लिए पुलिस तथा नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है।

संदेश स्पष्ट है—नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता और नागरिकों का सहयोग भी जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रखा जा सके।

































उल्हासनगर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा का मुद्दा गरमाया! पुलिस विभाग की भूमि के संरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में Writ Petition = रिट याचिका (न्यायालय में दायर संवैधानिक याचिका)। दायर किए जाने की जानकारी।


 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में सरकारी आरक्षित जमीनों के संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शहर में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र राज्य सरकार और पुलिस विभाग के स्वामित्व वाली जमीनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन सरकारी जमीनों पर किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण न हो, इसके लिए संबंधित प्रशासनिक विभागों द्वारा समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग की सरकारी जमीनों को सुरक्षित रखने और उनके संरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर ठाणे पुलिस आयुक्तालय की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में Writ Petition = रिट याचिका (न्यायालय में दायर संवैधानिक याचिका) दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस याचिका के विषय, उसमें की गई मांगों और न्यायालय की ओर से पारित किसी आदेश की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरकारी जमीनें सार्वजनिक संपत्ति होती हैं और उनका उपयोग निर्धारित सरकारी एवं जनहित के उद्देश्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में इन जमीनों के रिकॉर्ड, सीमांकन, वर्तमान कब्जे की स्थिति और संबंधित विभागों के स्वामित्व दस्तावेजों की नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

स्थानीय प्रशासन, महानगरपालिका, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि सरकारी जमीनों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए तथा किसी भी संभावित अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, इस पूरे मामले में संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जनहित याचिका से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।





































उल्हासनगर में रियल एस्टेट को लेकर चर्चा तेज! 50 से अधिक RERA रजिस्ट्रेशन रद्द होने की खबर से खरीदारों की बढ़ी चिंता।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में 50 से अधिक इमारतों के RERA रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने की खबर सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी और संबंधित प्राधिकरण की पुष्टि सामने आना अभी बाकी है। इस खबर के मद्देनजर शहर में नई इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले नागरिकों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

शहर में जो नागरिक नई इमारतों में फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनसे अपील की जाती है कि किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन करने से पहले संबंधित बिल्डिंग का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, उसकी वैधता और वर्तमान स्थिति की जांच अवश्य करें। इसके अलावा बिल्डिंग की आवश्यक सरकारी मंजूरियों, निर्माण संबंधी दस्तावेजों और अन्य कानूनी पहलुओं की भी पुष्टि करें।

वहीं, जिन नागरिकों ने पहले ही नई इमारतों में फ्लैट खरीद लिए हैं, उन्हें भी अपने फ्लैट और संबंधित प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन नंबर जांचने की सलाह दी जाती है। इसके लिए महाराष्ट्र RERA (MahaRERA) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड का सहारा लिया जा सकता है।

उल्हासनगरवासियों से विशेष अपील

फ्लैट खरीदना किसी भी परिवार के जीवन का एक बड़ा आर्थिक निर्णय होता है। इसमें वर्षों की मेहनत और जीवनभर की बचत लगी होती है। इसलिए केवल बिल्डर या ब्रोकर द्वारा दी गई जानकारी पर निर्भर न रहें, बल्कि सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

नागरिकों से अपील है कि वे अपने-अपने RERA रजिस्ट्रेशन नंबर की स्थिति अवश्य जांचें और किसी भी तरह की जल्दबाजी में निवेश करने से बचें।

सतर्कता ही आर्थिक सुरक्षा का आधार है। अपने परिवार की मेहनत की कमाई और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक बनें।

संपादकीय सावधानी: 50 से अधिक प्रोजेक्ट के RERA रजिस्ट्रेशन रद्द होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

MahaRERA की आधिकारिक वेबसाइट: [https://maharera.maharashtra.gov.in/]















चिखलोली बांध से औद्योगिक जलापूर्ति का मामला गरमाया! MIDC के RTI जवाब के बाद Cloud 9 Beverages की भूमिका पर उठे सवाल।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित चिखलोली बांध से पानी के उपयोग और निजी टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक जलापूर्ति किए जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। इस मामले में MIDC से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब के बाद Cloud 9 Beverages की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर स्पष्टता लाने की मांग की गई है। साथ ही Bisleri कंपनी से संबंधित जलापूर्ति स्रोतों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं Sprouts News के वरिष्ठ प्रतिनिधि सुधीर शरद गुजर ने 2 नवंबर 2026 को इस संबंध में ठाणे जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन, सिंचाई विभाग, MIDC, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), FSSAI तथा केंद्रीय और महाराष्ट्र GST विभाग सहित विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों को शिकायत भेजी है। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी IAS तुकाराम मुंढे से भी मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

MIDC के RTI जवाब में क्या सामने आया?

शिकायत के अनुसार, सुधीर गुजर ने 8 जून 2026 को MIDC प्रशासन से जलापूर्ति संबंधी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में 19 जून 2026 को अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC के उपअभियंता ने जानकारी दी कि मेसर्स Cloud 9 Beverages को बाहरी निजी टैंकरों से पानी लाने के संबंध में MIDC की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति अथवा NOC जारी किए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा बाहरी स्रोत से पानी इस्तेमाल करने की अनुमति से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी RTI जवाब में सामने आई है।

MIDC प्रशासन ने 2 जून 2026 को कंपनी को नोटिस और 5 जून को रिमाइंडर जारी किया था। हालांकि, इन नोटिसों के बाद कंपनी ने क्या जवाब दिया और प्रशासन ने आगे क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी स्पष्ट होना अभी बाकी है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि RTI में उपलब्ध जानकारी Cloud 9 Beverages से संबंधित है। इसे Bisleri के खिलाफ किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Bisleri की जलापूर्ति व्यवस्था की जांच अलग से करने की मांग की गई है।

चिखलोली बांध से पानी लेने की अनुमति और टैंकर आपूर्ति की जांच की मांग

शिकायत में चिखलोली बांध से पानी निकालने की अनुमति, जल आवंटन, पानी की वास्तविक मात्रा और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की जांच करने का आग्रह किया गया है।

इसके साथ ही बांध परिसर में पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप, मोटर, पाइपलाइन और अन्य उपकरणों की जांच करने की मांग भी की गई है।

निजी टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति होने की स्थिति में टैंकर मालिकों, वाहन नंबरों, चालकों, प्रतिदिन होने वाले चक्करों, पानी की मात्रा और संबंधित कंपनियों में टैंकरों के प्रवेश का रिकॉर्ड जांचने की मांग की गई है।

Cloud 9 Beverages और Bisleri के जलस्रोतों की स्वतंत्र जांच

शिकायत में अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC स्थित प्लॉट नंबर K-29 पर मौजूद Cloud 9 Beverages (मेसर्स लवाडी फैब्रिका) तथा Bisleri से संबंधित जलापूर्ति व्यवस्था की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया है।

मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है:

- उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पानी का वास्तविक स्रोत।

- निजी टैंकरों से पानी लेने की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं का विवरण।

- जलापूर्ति से संबंधित वैध अनुमतियां और NOC।

- पानी की खरीद-बिक्री के बिल एवं भुगतान रिकॉर्ड।

- कंपनियों के जल उपयोग रजिस्टर और उत्पादन संबंधी दस्तावेज।

- पानी की गुणवत्ता और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट।

FDA और FSSAI से गुणवत्ता निरीक्षण का आग्रह

पेय पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला पानी उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए शिकायत में FDA और FSSAI से संबंधित उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करने तथा कच्चे पानी, शुद्ध किए गए पानी और तैयार पेय पदार्थों के नमूने मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांचने की मांग की गई है।

साथ ही फिल्ट्रेशन, डिसइन्फेक्शन, गुणवत्ता नियंत्रण और लाइसेंस की शर्तों के पालन की भी जांच करने का आग्रह किया गया है।

सुधीर गुजर ने कहा है कि यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए आवश्यक स्थिति में FSSAI लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

GST रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की मांग

शिकायत में केंद्रीय GST और महाराष्ट्र GST विभाग से पानी की खरीद-बिक्री से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच करने का भी अनुरोध किया गया है।

इसमें जलापूर्ति करने वालों का GST रजिस्ट्रेशन, जारी किए गए इनवॉइस, GST रिटर्न, कंपनियों के खरीद रिकॉर्ड, भुगतान और लागू होने की स्थिति में ई-वे बिल का मिलान करने की मांग शामिल है।

यदि जांच में कर चोरी, गलत बिलिंग या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।

संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग

मामले में कई विभागों का अधिकार क्षेत्र शामिल होने के कारण सुधीर गुजर ने ठाणे जिलाधिकारी के समन्वय से संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग की है।

इसमें पुलिस प्रशासन, सिंचाई एवं जलसंपदा विभाग, MIDC, FDA, FSSAI और GST विभाग के सक्षम अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

साथ ही चिखलोली बांध परिसर और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के CCTV फुटेज, टैंकरों के आवागमन का रिकॉर्ड, पानी की खरीद-बिक्री के दस्तावेज, प्रयोगशाला रिपोर्ट और वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रह सके।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें

इस मामले में अब मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आने जरूरी हैं। पहला, संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले पानी का आधिकारिक स्रोत क्या है? दूसरा, निजी टैंकरों से जलापूर्ति की स्थिति में आवश्यक अनुमतियां और रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं? और तीसरा, MIDC द्वारा जारी नोटिसों के बाद क्या कार्रवाई की गई?

फिलहाल शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित कंपनियों या सरकारी विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ अनियमितता का निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

सार्वजनिक जलसंपदा का उचित उपयोग, औद्योगिक जलापूर्ति में पारदर्शिता और पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।