अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्कमहाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित चिखलोली बांध से पानी के उपयोग और निजी टैंकरों के माध्यम से औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक जलापूर्ति किए जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। इस मामले में MIDC से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब के बाद Cloud 9 Beverages की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर स्पष्टता लाने की मांग की गई है। साथ ही Bisleri कंपनी से संबंधित जलापूर्ति स्रोतों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है।
वरिष्ठ पत्रकार एवं Sprouts News के वरिष्ठ प्रतिनिधि सुधीर शरद गुजर ने 2 नवंबर 2026 को इस संबंध में ठाणे जिलाधिकारी, पुलिस प्रशासन, सिंचाई विभाग, MIDC, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), FSSAI तथा केंद्रीय और महाराष्ट्र GST विभाग सहित विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों को शिकायत भेजी है। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी IAS तुकाराम मुंढे से भी मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
MIDC के RTI जवाब में क्या सामने आया?
शिकायत के अनुसार, सुधीर गुजर ने 8 जून 2026 को MIDC प्रशासन से जलापूर्ति संबंधी जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में 19 जून 2026 को अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC के उपअभियंता ने जानकारी दी कि मेसर्स Cloud 9 Beverages को बाहरी निजी टैंकरों से पानी लाने के संबंध में MIDC की ओर से कोई आधिकारिक अनुमति अथवा NOC जारी किए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा बाहरी स्रोत से पानी इस्तेमाल करने की अनुमति से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी RTI जवाब में सामने आई है।
MIDC प्रशासन ने 2 जून 2026 को कंपनी को नोटिस और 5 जून को रिमाइंडर जारी किया था। हालांकि, इन नोटिसों के बाद कंपनी ने क्या जवाब दिया और प्रशासन ने आगे क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी स्पष्ट होना अभी बाकी है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि RTI में उपलब्ध जानकारी Cloud 9 Beverages से संबंधित है। इसे Bisleri के खिलाफ किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Bisleri की जलापूर्ति व्यवस्था की जांच अलग से करने की मांग की गई है।
चिखलोली बांध से पानी लेने की अनुमति और टैंकर आपूर्ति की जांच की मांग
शिकायत में चिखलोली बांध से पानी निकालने की अनुमति, जल आवंटन, पानी की वास्तविक मात्रा और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड की जांच करने का आग्रह किया गया है।
इसके साथ ही बांध परिसर में पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप, मोटर, पाइपलाइन और अन्य उपकरणों की जांच करने की मांग भी की गई है।
निजी टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति होने की स्थिति में टैंकर मालिकों, वाहन नंबरों, चालकों, प्रतिदिन होने वाले चक्करों, पानी की मात्रा और संबंधित कंपनियों में टैंकरों के प्रवेश का रिकॉर्ड जांचने की मांग की गई है।
Cloud 9 Beverages और Bisleri के जलस्रोतों की स्वतंत्र जांच
शिकायत में अतिरिक्त अंबरनाथ MIDC स्थित प्लॉट नंबर K-29 पर मौजूद Cloud 9 Beverages (मेसर्स लवाडी फैब्रिका) तथा Bisleri से संबंधित जलापूर्ति व्यवस्था की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया है।
मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है:
- उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पानी का वास्तविक स्रोत।
- निजी टैंकरों से पानी लेने की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं का विवरण।
- जलापूर्ति से संबंधित वैध अनुमतियां और NOC।
- पानी की खरीद-बिक्री के बिल एवं भुगतान रिकॉर्ड।
- कंपनियों के जल उपयोग रजिस्टर और उत्पादन संबंधी दस्तावेज।
- पानी की गुणवत्ता और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट।
FDA और FSSAI से गुणवत्ता निरीक्षण का आग्रह
पेय पदार्थों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला पानी उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। इसलिए शिकायत में FDA और FSSAI से संबंधित उत्पादन केंद्रों का निरीक्षण करने तथा कच्चे पानी, शुद्ध किए गए पानी और तैयार पेय पदार्थों के नमूने मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांचने की मांग की गई है।
साथ ही फिल्ट्रेशन, डिसइन्फेक्शन, गुणवत्ता नियंत्रण और लाइसेंस की शर्तों के पालन की भी जांच करने का आग्रह किया गया है।
सुधीर गुजर ने कहा है कि यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए आवश्यक स्थिति में FSSAI लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
GST रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की मांग
शिकायत में केंद्रीय GST और महाराष्ट्र GST विभाग से पानी की खरीद-बिक्री से जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच करने का भी अनुरोध किया गया है।
इसमें जलापूर्ति करने वालों का GST रजिस्ट्रेशन, जारी किए गए इनवॉइस, GST रिटर्न, कंपनियों के खरीद रिकॉर्ड, भुगतान और लागू होने की स्थिति में ई-वे बिल का मिलान करने की मांग शामिल है।
यदि जांच में कर चोरी, गलत बिलिंग या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग
मामले में कई विभागों का अधिकार क्षेत्र शामिल होने के कारण सुधीर गुजर ने ठाणे जिलाधिकारी के समन्वय से संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग की है।
इसमें पुलिस प्रशासन, सिंचाई एवं जलसंपदा विभाग, MIDC, FDA, FSSAI और GST विभाग के सक्षम अधिकारियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
साथ ही चिखलोली बांध परिसर और संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के CCTV फुटेज, टैंकरों के आवागमन का रिकॉर्ड, पानी की खरीद-बिक्री के दस्तावेज, प्रयोगशाला रिपोर्ट और वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रह सके।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें
इस मामले में अब मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आने जरूरी हैं। पहला, संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले पानी का आधिकारिक स्रोत क्या है? दूसरा, निजी टैंकरों से जलापूर्ति की स्थिति में आवश्यक अनुमतियां और रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं? और तीसरा, MIDC द्वारा जारी नोटिसों के बाद क्या कार्रवाई की गई?
फिलहाल शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित कंपनियों या सरकारी विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ अनियमितता का निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
सार्वजनिक जलसंपदा का उचित उपयोग, औद्योगिक जलापूर्ति में पारदर्शिता और पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।