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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदर्शी संकल्पना 'चरण सेवा' अभियान: वारकरियों के लिए स्वास्थ्य और सेवा का अनूठा संगम।


 

बारामती: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी वारी केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और सेवा का अद्भुत संगम है। भगवान विठ्ठल के दर्शन की लालसा लिए लाखों वारकरी हर वर्ष सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं। इस कठिन यात्रा के दौरान उनके थके हुए पैरों को राहत देने और उन्हें आगे बढ़ने की नई शक्ति प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना पर आधारित 'चरण सेवा' अभियान इस वर्ष भी बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा है। बारामती में इस सेवा अभियान को वारकरियों और स्थानीय नागरिकों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिल रहा है।

आषाढ़ी वारी के दौरान प्रतिदिन हजारों वारकरी सेवा केंद्रों पर पहुंचकर अपने थके हुए पैरों की निःशुल्क चिकित्सा और मालिश का लाभ उठा रहे हैं। लगातार कई दिनों तक पैदल चलने के कारण होने वाली थकान, सूजन और दर्द को कम करने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी वारकरियों की चरण सेवा कर रहे हैं, जिससे उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने में काफी राहत और ऊर्जा मिल रही है।

इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न सेवा केंद्रों पर डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सें, पैरामेडिकल कर्मचारी, मेडिकल छात्र तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वारकरियों के पैरों की औषधीय आयुर्वेदिक तेल से मालिश की जा रही है, वहीं आवश्यकता पड़ने पर प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श और एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है।

'भक्ति विठोबा की... सेवा स्वास्थ्य की' इस संकल्पना पर आधारित यह अभियान पालखी मार्ग के प्रमुख विश्राम स्थलों पर संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल वारकरियों के पैरों की सेवा करना नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इस पहल के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध वारकरी परंपरा की सेवा भावना को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष ने सभी वारकरियों, दिंडी प्रमुखों तथा पालखी मार्ग पर रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे इस निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चरण सेवा अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। अधिकारियों के अनुसार, आषाढ़ी वारी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वस्थ और निर्बाध यात्रा का अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।
















उल्हासनगर के श्मशान घाटों में कथित अवैध वसूली का मामला गरमाया, ट्रस्ट संचालकों पर कार्रवाई की मांग।


 







































उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत संचालित विभिन्न श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं, अवैध कब्जे और मृतकों के परिजनों से जबरन धन वसूली के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले में प्रहार जनशक्ति पक्ष के प्रभारी अध्यक्ष शरद दिनकर पोळके द्वारा महानगरपालिका आयुक्त और पुलिस प्रशासन को विस्तृत शिकायत सौंपकर व्यापक जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर-1 से लेकर उल्हासनगर-5 तक स्थित विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कुछ ट्रस्टों द्वारा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूमि और वहां उपलब्ध सभी मूलभूत सुविधाएं उल्हासनगर महानगरपालिका की हैं। आरोप है कि बिजली, पानी, रखरखाव, मरम्मत और गरीब परिवारों के लिए अंतिम संस्कार हेतु लकड़ियों का खर्च महानगरपालिका उठाती है, लेकिन इसके बावजूद ट्रस्ट संचालक मृतकों के परिजनों से अंतिम संस्कार के नाम पर ₹500 से लेकर ₹2500 तक की राशि वसूल रहे हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि मृतक के परिजन ट्रस्ट द्वारा मांगी गई राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें आवश्यक रसीद देने में टालमटोल की जाती है और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे शोकाकुल परिवारों को मानसिक और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शरद पोळके ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जब श्मशान घाटों की सभी सुविधाओं का खर्च महानगरपालिका वहन कर रही है, तब ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ट्रस्टों की रसीद पुस्तिकाओं पर चैरिटी कमिश्नर का पंजीकरण नंबर तक अंकित नहीं है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो जाता है।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि महानगरपालिका द्वारा संबंधित ट्रस्टों को हर वर्ष अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली लकड़ियों के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि ट्रस्टों और महानगरपालिका के बीच किसी प्रकार का वैध लिखित करार या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना किसी विधिवत समझौते के सरकारी धन का भुगतान किया जाना सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी के समान बताया गया है।

प्रहार जनशक्ति पक्ष ने मांग की है कि संबंधित ट्रस्टों को दी जाने वाली सभी आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, महानगरपालिका सभी श्मशान घाटों को अपने सीधे नियंत्रण में ले, ट्रस्टों के वित्तीय लेन-देन और ऑडिट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ट्रस्ट संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रहार जनशक्ति पक्ष लगातार प्रशासन से पत्राचार करता रहा है। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कड़ू ने उल्हासनगर महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त धीरज चव्हाण को इस विषय में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले का लगातार फॉलोअप प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिला अध्यक्ष स्वप्नील पाटील के मार्गदर्शन में शरद पोळके द्वारा किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन और कानूनी संघर्ष जारी रहेगा।

अब सभी की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल श्मशान घाटों के संचालन में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और आम नागरिकों से कथित अवैध वसूली से जुड़े बड़े घोटाले का भी खुलासा हो सकता है।














आचार्य पवन त्रिपाठी: संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व का सशक्त चेहरा, भाजपा में निभा रहे अहम जिम्मेदारी।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता आचार्य पवन त्रिपाठी संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक सरोकार और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका के कारण मुंबई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहचान रखते हैं। लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े आचार्य पवन त्रिपाठी ने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

आचार्य पवन त्रिपाठी ने भाजपा में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे और बाद में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उन्हें मुंबई भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं के समन्वय और जनसंपर्क को सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

राजनीतिक जीवन के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। उन्हें देश के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़े विभिन्न कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह नियुक्ति उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का भी प्रमाण मानी जाती है।

मुंबई में विशेष रूप से उत्तर भारतीय (हिंदीभाषी) समाज के बीच आचार्य पवन त्रिपाठी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करते हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता से जुड़े कई अभियानों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

आचार्य पवन त्रिपाठी विभिन्न सरकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, वक्ता और मार्गदर्शक के रूप में भी आमंत्रित किए जाते हैं। संगठनात्मक अनुभव, समाजसेवा और जनसंपर्क के कारण वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन, समाजसेवा और धार्मिक नेतृत्व के संतुलित समन्वय के कारण आचार्य पवन त्रिपाठी ने मुंबई ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान स्थापित की है। भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।

















 

उल्हासनगर की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल: करोड़ों की लागत से बने अस्पतालों का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं? सुपर स्पेशियलिटी, कामगार और सेंट्रल हॉस्पिटल को लेकर उठे बड़े मुद्दे।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये के सरकारी खर्च से तैयार किए गए अस्पतालों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, कामगार हॉस्पिटल और सेंट्रल हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सबसे अधिक चर्चा उल्हासनगर स्थित सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को लेकर हो रही है। आरोप है कि राज्य सरकार ने इस अस्पताल के निर्माण और अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन बाद में इसके संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंप दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों से विभिन्न सेवाओं के नाम पर शुल्क लिया जाता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के लिए इस अस्पताल का लाभ लेना कठिन हो गया है। लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल सरकारी धन से तैयार किया गया है तो आम नागरिकों को सस्ती या निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं क्यों नहीं मिल रही हैं।

वहीं, उल्हासनगर-3 स्थित कामगार हॉस्पिटल को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यह अस्पताल पहले मुख्य रूप से औद्योगिक कामगारों के इलाज के लिए बनाया गया था। समय के साथ पर्याप्त सुविधाओं और मरीजों की कमी के कारण अस्पताल की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। आरोप है कि वर्षों तक सरकारी धन और कर्मचारियों के वेतन पर भारी खर्च होता रहा, लेकिन अस्पताल आम जनता के लिए प्रभावी स्वास्थ्य केंद्र नहीं बन पाया। हाल ही में सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर इस अस्पताल का पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण कराया है। अब नागरिकों की मांग है कि सरकार स्पष्ट करे कि क्या यह अस्पताल अब गरीब और सामान्य नागरिकों के लिए पूरी तरह उपलब्ध है या फिर पहले जैसी स्थिति बनी हुई है।

उधर, उल्हासनगर-3 के सेंट्रल हॉस्पिटल की स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं और गरीब मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल रहा है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय निर्माण कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभिन्न निर्माण कार्यों के नाम पर सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और फर्जी बिलों की जांच चल रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

सेंट्रल हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. बनसोडे को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि मरीजों के प्रति लापरवाही और उपचार में कथित अनियमितताओं के कारण उन्हें पहले भी निलंबन का सामना करना पड़ा था। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि वर्तमान में भी अस्पताल में मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इन सभी मुद्दों के बीच स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि सरकारी धन से निर्मित अस्पतालों का वास्तविक लाभ गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचे।

यदि समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया तो आम जनता के बीच सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरे हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि वे इन आरोपों और जनभावनाओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा आवश्यक कार्रवाई करते हैं।















सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का जनहित अभियान, 15 जुलाई को निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा और जनस्वास्थ्य को समर्पित सप्तध्यान फाउंडेशन एवं सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार, 15 जुलाई को मानसून स्पेशल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर का उद्देश्य सभी आयु वर्ग के लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराना है, ताकि लोग समय रहते विभिन्न बीमारियों की पहचान कर उचित उपचार शुरू कर सकें।

यह स्वास्थ्य शिविर दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा। शिविर में सभी जांच और परामर्श पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस विशेष शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रहेगी कि मुंबई के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी स्वयं उपस्थित रहकर लोगों की आंखों की जांच करेंगे। मोतियाबिंद सहित विभिन्न नेत्र रोगों की जांच कर मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया जाएगा। इससे क्षेत्र के नागरिकों को महानगर स्तर की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा अपने शहर में ही प्राप्त होगी।

शिविर के दौरान मधुमेह, किडनी, फेफड़ों, थायरॉयड, नसों और हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान के लिए कई महत्वपूर्ण जांचें निःशुल्क की जाएंगी। इनमें HbA1c (डायबिटीज जांच), RBS (ब्लड शुगर), PFT (फेफड़ों की कार्यक्षमता जांच), UACR (किडनी स्वास्थ्य जांच), न्यूरोपैथी स्क्रीनिंग, थायरॉयड जांच, लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल जांच) तथा मोतियाबिंद एवं अन्य नेत्र रोगों की जांच शामिल हैं।

आयोजकों ने क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों एवं मधुमेह, रक्तचाप तथा आंखों की समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी जांच के लिए अवश्य लेकर आएं। समय पर स्वास्थ्य जांच कई गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

शिविर से संबंधित अधिक जानकारी एवं पंजीकरण के लिए सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल से 8237898959 तथा योगाचार्य सतीश शर्मा से 9011808012 पर संपर्क किया जा सकता है।

"आपका स्वास्थ्य हमारा मिशन है, आपकी मुस्कान हमारा सम्मान है।"
















'देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव' के अंतर्गत छत्रपति संभाजीनगर में तलवारबाजी प्रतियोगिता का आयोजन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटिल की रही विशेष उपस्थिति।


 







छत्रपति संभाजीनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र के लोकप्रिय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पूरे राज्य में आयोजित किए जा रहे "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" के अंतर्गत छत्रपति संभाजीनगर में भव्य तलवारबाजी (फेंसिंग) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

प्रतियोगिता में उपस्थित अतिथियों ने आयोजकों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं में खेल भावना, अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही ऐसी प्रतियोगिताएं राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का उत्कृष्ट मंच भी प्रदान करती हैं।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ओएसडी राजेंद्र साबळे पाटिल की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेल संस्कृति को मजबूत बनाने और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आयोजकों द्वारा किए गए सफल आयोजन की भी प्रशंसा की।

कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों ने तलवारबाजी की रोमांचक प्रतिस्पर्धाओं में अपने कौशल का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने भाग लेकर खेल के प्रति अपने समर्पण और प्रतिभा का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ना, उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा राज्य में खेल संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। इस महोत्सव के माध्यम से प्रदेशभर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिससे हजारों युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है।

स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। युवाओं के सर्वांगीण विकास और उन्हें नशामुक्त, स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन की ओर प्रेरित करने की दिशा में "देवाभाऊ क्रीड़ा महोत्सव" एक प्रेरणादायी पहल के रूप में देखा जा रहा है।