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शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष में नई जिम्मेदारी: मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख नियुक्त, गरीब मरीजों को मिलेगा उपचार और आर्थिक सहायता का लाभ।


 


उल्हासनगर/कल्याण: दिनेश मीरचंदानी

गरीब, जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बालासाहेब ठाकरे शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष ने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण नियुक्ति की है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के निर्देश एवं मंगेश नरसिंह चिवटे के मार्गदर्शन में श्रीमती मीना (ताई) सोंडे को कल्याण जिला कक्ष प्रमुख (उल्हासनगर एवं अंबरनाथ) पद पर छह माह के लिए नियुक्त किया गया है।

जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार, मीना (ताई) सोंडे को शिवसेना वैद्यकीय सहायता कक्ष के माध्यम से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और चिकित्सा सहायता सुविधाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस नियुक्ति के तहत वे धर्मार्थ अस्पतालों में उपलब्ध 10 प्रतिशत आरक्षित कोटा के माध्यम से मरीजों को उपचार दिलाने, निजी अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों की निःशुल्क अथवा रियायती दरों पर सर्जरी कराने में सहायता करेंगी। साथ ही महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों में पात्र मरीजों को निःशुल्क इलाज एवं शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी देंगी।

नियुक्ति पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गंभीर एवं महंगी सर्जरी की आवश्यकता वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सहायता दिलाने के लिए प्रधानमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता निधि, श्री सिद्धिविनायक ट्रस्ट, टाटा ट्रस्ट सहित विभिन्न सहायता निधियों एवं ट्रस्टों के माध्यम से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके लिए बालासाहेब भवन स्थित केंद्रीय कार्यालय से समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

पत्र पर संस्थापक एवं अध्यक्ष मंगेश नरसिंह चिवटे तथा कार्यालय प्रमुख रामहरी भीमराव राजन के हस्ताक्षर हैं। नियुक्ति पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति के बाद अधिकृत पदाधिकारियों को अपने लेटरहेड के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क अथवा रियायती चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

इस नियुक्ति से कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ क्षेत्र के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य योजनाओं, चिकित्सा सहायता और आर्थिक सहयोग तक पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।





















लोकतंत्र संवाद से मजबूत होता है, मौन से नहीं: सोनम वांगचुक के अनशन पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील।


नई दिल्ली | दिनेश मीरचंदानी

देश के प्रख्यात समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सोनम वांगचुक के जारी अनशन को लेकर लोकशाही रक्षक फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल संवेदनशील एवं सकारात्मक हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस विषय को केवल एक आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, उत्तरदायी शासन और नागरिकों के विश्वास से जुड़े राष्ट्रीय महत्व के विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।

डॉ. घाडगे ने कहा कि देश ने फिल्म '3 इडियट्स' के लोकप्रिय किरदार 'रैंचो' के माध्यम से सोनम वांगचुक के व्यक्तित्व, विचारों और शिक्षा सुधार के प्रति उनके समर्पण को सराहा तथा उन्हें प्रेरणा का स्रोत माना। आज वही व्यक्तित्व शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और राष्ट्रीय हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहा है। ऐसे में उनके अनशन की उपेक्षा करना किसी भी सशक्त लोकतंत्र के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्ता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारस्परिक विश्वास में निहित होती है। मतभेद किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन जब संवाद के रास्ते बंद हो जाएं और किसी जागरूक नागरिक को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए अनशन जैसा कठोर कदम उठाना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन जाता है।

डॉ. घाडगे ने कहा कि लोकतांत्रिक शासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नागरिकों की आवाज को सम्मानपूर्वक सुनना और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना है। सरकार और समाज—दोनों का दायित्व है कि वे संवेदनशीलता, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जनविश्वास को और मजबूत करें।

उन्होंने भारत सरकार से विनम्र किंतु दृढ़ आग्रह किया कि वह तत्काल पहल करते हुए सोनम वांगचुक के साथ सम्मानजनक, सकारात्मक और सार्थक संवाद स्थापित करे तथा उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए ऐसा सर्वमान्य समाधान निकाले, जिससे उनका अनशन सम्मानपूर्वक समाप्त हो और लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।

डॉ. घाडगे ने कहा कि एक सशक्त भारत केवल आर्थिक विकास से नहीं बनता, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व, लोकतांत्रिक परंपराओं के सम्मान, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और प्रत्येक जागरूक नागरिक के विश्वास पर खड़ा होता है। इसी विश्वास की रक्षा करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति और सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर डॉ. घाडगे ने देश में छात्र आंदोलनों की घटती सक्रियता पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत में आज भी श्रमिक संगठनों की आवाज विभिन्न मंचों पर सुनाई देती है, किंतु एक समय सामाजिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक जागरण का नेतृत्व करने वाले छात्र संगठन आज अपेक्षित रूप से सक्रिय दिखाई नहीं देते। यह स्थिति लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के महत्वपूर्ण प्रश्नों से स्वयं को दूर कर लेते हैं, तब लोकतांत्रिक जवाबदेही भी कमजोर होने लगती है। एक जागरूक छात्र समाज ही एक जवाबदेह शासन की सबसे मजबूत नींव होता है। इसलिए युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय, जागरूक, शांतिपूर्ण और संविधानसम्मत भागीदारी लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अपने संदेश के अंत में डॉ. घाडगे ने देश के विद्यार्थियों और युवाओं से भावनात्मक आह्वान करते हुए कहा:

"विद्यार्थियों, जागिए। प्रश्न पूछिए, संवाद कीजिए, संविधान के मूल्यों को आत्मसात कीजिए और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाइए। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों और सक्रिय विद्यार्थियों से जीवंत रहता है। आज का जागरूक छात्र ही कल के सशक्त, उत्तरदायी और संवेदनशील भारत का निर्माता होगा।"

उन्होंने अंत में देशवासियों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद, संवेदनशीलता और नागरिक सहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण सरकार और नागरिकों की समान भागीदारी से ही संभव है, और यही भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

















महाराष्ट्राच्या सशक्त प्रशासनाचे दोन प्रेरणादायी चेहरे; IRS समीर वानखेडे आणि IAS तुकाराम मुंढे यांच्या कार्याचा गौरव।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय व्यवस्थेत प्रामाणिकपणा, धाडसी निर्णयक्षमता आणि जनहिताला सर्वोच्च प्राधान्य देणाऱ्या अधिकाऱ्यांमध्ये IRS अधिकारी समीर वानखेडे आणि IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे यांची नावे विशेष आदराने घेतली जातात. आपल्या कर्तव्यनिष्ठ, निर्भीड आणि परिणामकारक कार्यपद्धतीमुळे या दोन्ही अधिकाऱ्यांनी राज्यातील प्रशासनाला वेगळी ओळख निर्माण करून दिली आहे.

IRS अधिकारी समीर वानखेडे यांनी अमली पदार्थांच्या अवैध तस्करीविरोधात कायद्याची कठोर अंमलबजावणी करत अनेक मोठ्या कारवायांद्वारे समाजहिताचे रक्षण करण्याचा प्रयत्न केला. कायद्यापुढे कोणताही व्यक्ती मोठा नसल्याचा संदेश देत त्यांनी आपल्या कार्यशैलीमुळे देशभरात वेगळी ओळख निर्माण केली.

दुसरीकडे, IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे, सध्या महाराष्ट्र अन्न व औषध प्रशासन (FDA) विभागात कार्यरत असून, अन्नभेसळ, बनावट औषधे आणि सार्वजनिक आरोग्याशी संबंधित नियमांची कठोर अंमलबजावणी करण्यासाठी ओळखले जातात. नागरिकांना सुरक्षित व दर्जेदार अन्न आणि औषधे उपलब्ध व्हावीत, यासाठी त्यांनी अनेक ठोस निर्णय घेतले असून राज्यभरात प्रभावी मोहिमा राबवल्या आहेत.

प्रशासनातील पारदर्शकता, निष्पक्ष निर्णयप्रक्रिया आणि जनहितासाठीची अविरत बांधिलकी हीच राज्याच्या प्रगतीची खरी ताकद असल्याचे या दोन्ही अधिकाऱ्यांच्या कार्यातून अधोरेखित होते. त्यांच्या धाडसी आणि लोकाभिमुख निर्णयांमुळे शासनाविषयीचा जनतेचा विश्वास अधिक दृढ होत असल्याचे मत विविध स्तरांतून व्यक्त केले जात आहे.

"कर्तव्य प्रथम, जनहित सर्वोच्च" या मूल्यांचा अंगीकार करून कार्य करणारे अधिकारी हेच सक्षम, सुरक्षित आणि प्रगत महाराष्ट्राच्या उभारणीचे भक्कम आधारस्तंभ असल्याचे नागरिकांमध्ये बोलले जात आहे.
















कल्याण को मिले क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, विधायक किशन कथोरे ने अमित शाह, जयशंकर और फडणवीस को लिखा पत्र।


 

कल्याण: दिनेश मीरचंदानी

मुरबाड विधानसभा क्षेत्र के विधायक किशन कथोरे ने कल्याण में स्वतंत्र क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (Regional Passport Office-RPO) स्थापित करने की मांग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से पहल करने का आग्रह किया है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर कल्याण में जल्द से जल्द क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शुरू करने की मांग की है।

विधायक कथोरे ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान में ठाणे, रायगढ़, पालघर सहित आसपास के कई जिलों के नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी सेवाओं के लिए मुंबई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है। लगातार बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विकास और विदेश यात्रा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए कल्याण में स्वतंत्र क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना अब समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

उन्होंने बताया कि यदि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय स्थापित किया जाता है तो कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी, अंबरनाथ, बदलापुर, मुरबाड, शाहापुर, नेरळ और कर्जत सहित विस्तृत क्षेत्र के नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इन शहरों और तालुकों की संयुक्त आबादी 40 से 45 लाख से अधिक है। शिक्षा, रोजगार, उद्योग, व्यापार, पर्यटन तथा चिकित्सा उपचार के लिए विदेश जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे पासपोर्ट की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

पासपोर्ट कार्य के लिए मुंबई-ठाणे जाना बनता है परेशानी का कारण

वर्तमान व्यवस्था के तहत क्षेत्र के लोगों को पासपोर्ट आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और अन्य संबंधित कार्यों के लिए ठाणे अथवा मुंबई जाना पड़ता है। इससे नागरिकों का समय और धन दोनों खर्च होते हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, विद्यार्थियों, दिव्यांगजनों, नौकरीपेशा लोगों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को लंबी दूरी तय करने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से होंगे कई बड़े लाभ

विधायक किशन कथोरे ने कहा कि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय शुरू होने से लाखों नागरिकों को अनेक सुविधाएं मिलेंगी। इससे नागरिकों का समय और यात्रा खर्च बचेगा, पासपोर्ट आवेदनों का तेजी से निपटारा होगा तथा विद्यार्थियों, उद्यमियों, व्यवसायियों और विदेश में रोजगार के इच्छुक युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि नया कार्यालय शुरू होने से मुंबई और ठाणे स्थित मौजूदा पासपोर्ट कार्यालयों पर बढ़ता कार्यभार कम होगा। साथ ही बढ़ती आबादी को बेहतर, आधुनिक और आसानी से उपलब्ध सरकारी सेवाएं मिल सकेंगी। भविष्य में विकसित हो रहे कल्याण महानगर क्षेत्र की प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

सरकार से शीघ्र मंजूरी देने की अपील

विधायक किशन कथोरे ने केंद्र और राज्य सरकार से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कल्याण में जल्द से जल्द क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को मंजूरी देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह निर्णय ठाणे, रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लाखों नागरिकों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा तथा सरकार की नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

इस मांग का समर्थन करते हुए भारतीय जनता पार्टी के कोंकण विभाग के आईटी सेल संयोजक एवं ठाणे ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष मिलिंद धारवाडकर ने विश्वास व्यक्त किया कि कल्याण में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना से क्षेत्र के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और सरकारी सेवाओं की पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान और प्रभावी हो सकेगी।

















मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदर्शी संकल्पना 'चरण सेवा' अभियान: वारकरियों के लिए स्वास्थ्य और सेवा का अनूठा संगम।


 

बारामती: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी वारी केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और सेवा का अद्भुत संगम है। भगवान विठ्ठल के दर्शन की लालसा लिए लाखों वारकरी हर वर्ष सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं। इस कठिन यात्रा के दौरान उनके थके हुए पैरों को राहत देने और उन्हें आगे बढ़ने की नई शक्ति प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना पर आधारित 'चरण सेवा' अभियान इस वर्ष भी बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा है। बारामती में इस सेवा अभियान को वारकरियों और स्थानीय नागरिकों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिल रहा है।

आषाढ़ी वारी के दौरान प्रतिदिन हजारों वारकरी सेवा केंद्रों पर पहुंचकर अपने थके हुए पैरों की निःशुल्क चिकित्सा और मालिश का लाभ उठा रहे हैं। लगातार कई दिनों तक पैदल चलने के कारण होने वाली थकान, सूजन और दर्द को कम करने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी वारकरियों की चरण सेवा कर रहे हैं, जिससे उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने में काफी राहत और ऊर्जा मिल रही है।

इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न सेवा केंद्रों पर डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सें, पैरामेडिकल कर्मचारी, मेडिकल छात्र तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वारकरियों के पैरों की औषधीय आयुर्वेदिक तेल से मालिश की जा रही है, वहीं आवश्यकता पड़ने पर प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श और एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है।

'भक्ति विठोबा की... सेवा स्वास्थ्य की' इस संकल्पना पर आधारित यह अभियान पालखी मार्ग के प्रमुख विश्राम स्थलों पर संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल वारकरियों के पैरों की सेवा करना नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इस पहल के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध वारकरी परंपरा की सेवा भावना को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष ने सभी वारकरियों, दिंडी प्रमुखों तथा पालखी मार्ग पर रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे इस निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चरण सेवा अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। अधिकारियों के अनुसार, आषाढ़ी वारी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वस्थ और निर्बाध यात्रा का अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।
















उल्हासनगर के श्मशान घाटों में कथित अवैध वसूली का मामला गरमाया, ट्रस्ट संचालकों पर कार्रवाई की मांग।


 







































उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत संचालित विभिन्न श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं, अवैध कब्जे और मृतकों के परिजनों से जबरन धन वसूली के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले में प्रहार जनशक्ति पक्ष के प्रभारी अध्यक्ष शरद दिनकर पोळके द्वारा महानगरपालिका आयुक्त और पुलिस प्रशासन को विस्तृत शिकायत सौंपकर व्यापक जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर-1 से लेकर उल्हासनगर-5 तक स्थित विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कुछ ट्रस्टों द्वारा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूमि और वहां उपलब्ध सभी मूलभूत सुविधाएं उल्हासनगर महानगरपालिका की हैं। आरोप है कि बिजली, पानी, रखरखाव, मरम्मत और गरीब परिवारों के लिए अंतिम संस्कार हेतु लकड़ियों का खर्च महानगरपालिका उठाती है, लेकिन इसके बावजूद ट्रस्ट संचालक मृतकों के परिजनों से अंतिम संस्कार के नाम पर ₹500 से लेकर ₹2500 तक की राशि वसूल रहे हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि मृतक के परिजन ट्रस्ट द्वारा मांगी गई राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें आवश्यक रसीद देने में टालमटोल की जाती है और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे शोकाकुल परिवारों को मानसिक और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शरद पोळके ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जब श्मशान घाटों की सभी सुविधाओं का खर्च महानगरपालिका वहन कर रही है, तब ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ट्रस्टों की रसीद पुस्तिकाओं पर चैरिटी कमिश्नर का पंजीकरण नंबर तक अंकित नहीं है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो जाता है।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि महानगरपालिका द्वारा संबंधित ट्रस्टों को हर वर्ष अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली लकड़ियों के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि ट्रस्टों और महानगरपालिका के बीच किसी प्रकार का वैध लिखित करार या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना किसी विधिवत समझौते के सरकारी धन का भुगतान किया जाना सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी के समान बताया गया है।

प्रहार जनशक्ति पक्ष ने मांग की है कि संबंधित ट्रस्टों को दी जाने वाली सभी आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, महानगरपालिका सभी श्मशान घाटों को अपने सीधे नियंत्रण में ले, ट्रस्टों के वित्तीय लेन-देन और ऑडिट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ट्रस्ट संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रहार जनशक्ति पक्ष लगातार प्रशासन से पत्राचार करता रहा है। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कड़ू ने उल्हासनगर महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त धीरज चव्हाण को इस विषय में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले का लगातार फॉलोअप प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिला अध्यक्ष स्वप्नील पाटील के मार्गदर्शन में शरद पोळके द्वारा किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन और कानूनी संघर्ष जारी रहेगा।

अब सभी की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल श्मशान घाटों के संचालन में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और आम नागरिकों से कथित अवैध वसूली से जुड़े बड़े घोटाले का भी खुलासा हो सकता है।