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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस व्यवस्था पर रोक। अब न नए लाइसेंस जारी होंगे और न ही पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाएगा। गृह विभाग ने सभी पुलिस आयुक्तों, एसपी और जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।


 
मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और बार में ‘ऑर्केस्ट्रा’ के नाम पर चल रही कथित अश्लील गतिविधियों और कानून के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत ऑर्केस्ट्रा (लाइव म्यूजिकल परफॉर्मेंस) के लिए कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, वर्तमान में जारी लाइसेंसों की अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं होगा।

गृह विभाग द्वारा सोमवार को जारी परिपत्र के माध्यम से राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और जिलाधिकारियों को इस निर्णय का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद राज्य में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस के माध्यम से संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

सरकार के अनुसार वर्ष 2016 में लागू 'महाराष्ट्र होटल, उपाहारगृह एवं मद्यपान कक्ष (डांस बार) में अश्लील नृत्य पर प्रतिबंध तथा महिलाओं की गरिमा की रक्षा अधिनियम' के बाद डांस बारों पर कई कानूनी प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, समय के साथ कई प्रतिष्ठानों ने इन प्रतिबंधों से बचने के लिए महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की 'सार्वजनिक मनोरंजन नियमावली' के अंतर्गत ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस प्राप्त करना शुरू कर दिया। सरकार के संज्ञान में यह बात आई कि इन लाइसेंसों की आड़ में कई स्थानों पर कथित रूप से अश्लील नृत्य और अन्य अवैध गतिविधियां फिर से संचालित की जा रही थीं।

इन्हीं शिकायतों और लगातार मिल रही सूचनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने ऑर्केस्ट्रा प्रतिष्ठानों को भी 2016 के अश्लील नृत्य प्रतिबंध कानून के दायरे में लाने का निर्णय लिया। इस संबंध में 2 जुलाई 2026 को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद महाराष्ट्र विधानसभा के हालिया मानसून सत्र में संशोधित विधेयक पारित किया गया और राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के उपरांत 22 जुलाई 2026 को इसे राज्य सरकार के राजपत्र में प्रकाशित कर अधिनियम लागू कर दिया गया।

गृह विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

गृह विभाग की सहसचिव मुग्धा धुरी द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत ऑर्केस्ट्रा के लिए कोई नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाएगा। साथ ही, जिन प्रतिष्ठानों के पास वर्तमान में ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस हैं, उनकी अवधि समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन को इस निर्णय का सख्ती से पालन कराने तथा किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

दुरुपयोग रोकने की दिशा में अहम कदम

सरकार का मानना है कि इस फैसले से ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस की आड़ में डांस बार कानून को दरकिनार कर संचालित की जा रही कथित अश्लील गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, महिलाओं की गरिमा की रक्षा, कानून का कड़ाई से पालन और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण और सख्त पहल माना जा रहा है।


















उल्हासनगर मनपा में एसीबी के हत्थे चढ़े अधिकारियों को प्रभारी पदों से हटाने की मांग, 15 अगस्त से ठाणे कलेक्टर कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगे शैलेश तिवारी।


 



ठाणे/उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अब भी प्रभारी पदों पर बनाए रखने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय कल्याण भाटी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल प्रभाव से प्रभारी पदभार वापस नहीं लिया गया, तो 15 अगस्त 2026 (स्वतंत्रता दिवस) से ठाणे जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

शैलेश तिवारी ने जारी प्रेस बयान में कहा कि एसीबी द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदार पदों पर बनाए रखना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि इससे जनता का सरकारी तंत्र पर विश्वास भी कमजोर होता है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में आरोपित अधिकारियों को प्रभारी पदों पर बनाए रखना पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन की भावना के विपरीत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के प्रभारी पद नहीं हटाए गए हैं, जिससे यह संदेश जा रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रशासन का रवैया नरम है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कठोर प्रशासनिक निर्णय नहीं लिए गए, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का आक्रोश और बढ़ेगा।

शैलेश तिवारी ने मांग की कि एसीबी की कार्रवाई में पकड़े गए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल प्रभाव से प्रभारी पद वापस लिए जाएं तथा उनके विरुद्ध सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। उनका कहना है कि प्रशासन को भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए, ताकि सरकारी व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम रह सके।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रशासन को पहले भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाने के लिए स्वतंत्रता दिवस से आमरण अनशन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और जनहित के उद्देश्य से किया जाएगा।

शैलेश तिवारी ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 अगस्त से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे ठाणे जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अनशन के दौरान यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना या स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि जनता के हित, सुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त एवं निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी व्यवस्था में जनता का भरोसा बना रहे।

नोट: यह समाचार शैलेश तिवारी द्वारा जारी बयान और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




















मुलुंड के वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का भव्य आयोजन, संत परंपरा और नैतिक मूल्यों का दिया गया संदेश।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर मुलुंड (पूर्व) स्थित वी.पी.एम्स बी.आर. टोल इंग्लिश हाई स्कूल में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और मातृभाषाओं के सम्मान को समर्पित एक भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में "विठ्ठल... विठ्ठल..." के जयघोष, संतों के अभंग, पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आध्यात्मिक वातावरण ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक एवं अतिथि भक्ति रस में सराबोर हो गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री विठ्ठल माऊली की भव्य पालकी यात्रा के आगमन से हुआ। इसके बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। सामूहिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके पश्चात विद्यार्थियों ने संत परंपरा पर आधारित मराठी अभंगों का मधुर गायन और वारकरी संप्रदाय की संस्कृति को जीवंत करती आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कलाकार विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भक्त पुंडलिक और भगवान विठ्ठल के जीवन प्रसंगों पर आधारित प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया गया। संत तुकाराम महाराज के विचारों पर आधारित प्रेरक प्रस्तुति, पारंपरिक भारुड, सामाजिक जागरूकता से ओतप्रोत पथनाट्य तथा भगवान विठ्ठल को समर्पित भावपूर्ण पत्र वाचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए पथनाट्य में विद्यार्थियों ने आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पीढ़ियों के बीच संवाद, भारतीय संस्कृति की विरासत और मातृभाषाओं के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि तकनीकी युग में भी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बनाए रखना समय की आवश्यकता है।

वारकरी संप्रदाय के प्रसिद्ध अभंगों और भगवान विठ्ठल के जयघोष से विद्यालय का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध लोक परंपरा और संत संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रत्येक प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या अजीता नायर ने अपने संबोधन में कहा कि संतों की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। उन्होंने विद्यार्थियों से संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संत महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गौरव की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से भी जोड़ना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय समय-समय पर ऐसे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने भगवान विठ्ठल को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर पूरे समारोह को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और मातृभाषा के प्रति सम्मान भी जुड़ा हो। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर आयोजित यह भव्य उत्सव न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और भाषा संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला एक अविस्मरणीय आयोजन भी साबित हुआ।



















मुंबई प्रेस क्लब चुनाव: 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल का दबदबा, सभी प्रमुख पदों पर जीत; सुरेंद्र गंगन बने अध्यक्ष।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई प्रेस क्लब के चुनाव में 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। अध्यक्ष, चेयरमैन, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे सभी महत्वपूर्ण पदों पर इस पैनल के उम्मीदवारों ने निर्णायक बढ़त के साथ जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्रेस क्लब के अधिकांश सदस्यों ने 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल पर अपना भरोसा जताया है। वहीं, कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना का कार्य अभी जारी है।

अध्यक्ष पद पर 'सेव द प्रेस क्लब' के उम्मीदवार सुरेंद्र गंगन ने 579 वोट प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उनके मुकाबले प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवार राजीव खांडेकर को 258 वोट मिले। इस चुनाव में 22 मत अमान्य घोषित किए गए।

चेयरमैन पद पर बालकृष्ण ने 508 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी मयुरेश गणपत को 320 वोट मिले।

उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) पद पर धोंडिबा पांडुरंग म्हस्के ने 537 वोट प्राप्त कर विजय हासिल की। उनके मुकाबले आशिष राजे को 290 वोट मिले।

सचिव पद के लिए हुए मुकाबले में अनिल कुमार सिंह ने 513 वोट के साथ जीत दर्ज की, जबकि सौरभ शर्मा को 313 वोट प्राप्त हुए।

संयुक्त सचिव पद पर सुधाकर कश्यप ने 515 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी रुचा कोनालकर को 323 वोट मिले।

कोषाध्यक्ष पद पर ओम प्रकाश तिवारी ने 487 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि शशांक परदे को 330 वोट मिले।

फिलहाल प्रेस क्लब की कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना जारी है। प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस की ओर से आशिष राणे, अनुराग कांबले, अनीश पाटिल, ज्योत्स्ना गंगणे, गिरीश गायकवाड़, गिरीश चित्रे, स्वप्नील मिश्रा, संजय रंजीत, सचिन हराळकर और गौरव गुप्ता मैदान में हैं। वहीं, 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की ओर से आदित्य दुबे, वैभव परब, मनीषा रेगे, अंसारी शहीद, मधु नैहान, पूनम अपराज, अनीता शुक्ला, स्वप्नील शिंदे, उमेश गोस्वामी और के. जे. बेनीयचन चुनावी मुकाबले में हैं।

मुंबई प्रेस क्लब के इन चुनाव परिणामों को मीडिया जगत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी प्रमुख पदों पर 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की जीत ने संगठन में उसके प्रभाव और सदस्यों के व्यापक समर्थन को दर्शाया है। अब सभी की निगाहें कमेटी सदस्य पदों की मतगणना पर टिकी हैं, जिसके बाद प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।


























उल्हासनगर महानगरपालिका की ई-निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल, 26-26 लाख के टेंडरों में अनियमितता के आरोप।


 





उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सरकारी निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ई-टेंडरिंग (ई-निविदा) प्रणाली लागू की थी। इसका मकसद मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर उपलब्ध कराना था। लेकिन उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

आरोप लगाए जा रहे हैं कि महानगरपालिका में ई-निविदा प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। चर्चा है कि कई मामलों में टेंडर खुलने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि संबंधित ठेका किस ठेकेदार को दिया जाएगा। ऐसे में ई-टेंडरिंग का मूल उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ गया है।

सूत्रों के अनुसार, कैंप-1 से कैंप-5 तक लगभग 26-26 लाख रुपये की लागत वाले चेंबर निर्माण कार्यों के टेंडरों को लेकर भी इसी प्रकार की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि यदि कोई अन्य ठेकेदार निविदा भरता है, तो उसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर अपात्र घोषित कर दिया जाता है या फिर कथित रूप से उसे "बॉस का फोन" आने जैसी बातें कहकर पीछे हटने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय ठेकेदारों और नागरिकों का कहना है कि यदि ई-निविदा प्रक्रिया में पहले से ही परिणाम तय किए जा रहे हैं, तो पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि इससे योग्य और ईमानदार ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पाता, जबकि सरकारी धन के उपयोग पर भी संदेह पैदा होता है।

गौरतलब है कि उल्हासनगर महानगरपालिका पहले से ही कथित 85 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले को लेकर चर्चा में रही है। उस मामले में भी निविदा प्रक्रिया और ठेके आवंटन को लेकर कई सवाल उठे थे। ऐसे में अब 26-26 लाख रुपये के इन नए टेंडरों को लेकर सामने आए आरोपों ने एक बार फिर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं बल्कि सरकारी ई-टेंडरिंग प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितना दम है और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों और चर्चाओं पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

















राष्ट्र कल्याण पार्टी का ठाणे कलेक्टर कार्यालय पर धरना, ACB मामलों के आरोपित अधिकारियों को हटाने की मांग पर प्रशासन सक्रिय।


 



ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर बनाए रखने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी एवं छावा संगठन द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। सोमवार, 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें संबंधित अधिकारियों को तत्काल महत्वपूर्ण पदों से हटाने की मांग दोहराई गई।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी तथा छावा संगठन के निखिल गोळे ने किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को ACB ने रिश्वतखोरी अथवा भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़ा है, उन्हें संवेदनशील और प्रभावशाली विभागों का प्रभार देना प्रशासनिक पारदर्शिता एवं सुशासन की भावना के विपरीत है।

आंदोलनकारियों ने बताया कि इससे पहले 8 जुलाई को उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय के बाहर भी इसी मांग को लेकर धरना दिया गया था। उस समय मनपा प्रशासन ने लिखित रूप से जवाब दिया था कि गणेश शिंपी, जो मूलतः लघुलेखक (वर्ग-3) के पद पर हैं और वर्तमान में उपआयुक्त (प्रभाग समिति-2), कर निर्धारक एवं संकलक तथा चुनाव विभाग के प्रमुख का दायित्व संभाल रहे हैं, उन्हें फिलहाल हटाना संभव नहीं है क्योंकि वे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हैं, जो अक्टूबर तक जारी रहेगी।

हालांकि आंदोलनकारियों ने इस जवाब को असंतोषजनक बताते हुए आरोप लगाया कि केवल चुनावी प्रक्रिया का हवाला देकर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखना उचित नहीं है।

धरने के दौरान जिन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का उल्लेख किया गया, उनमें अजीत गोवारी (वरिष्ठ लिपिक), संजय पवार (कनिष्ठ अभियंता, नगररचना विभाग), अनिल खतुराणी (वरिष्ठ लिपिक, कर विभाग), अंकुश कदम (लिपिक, भंडार विभाग), राजा बुलानी (विधि विभाग प्रमुख), छाया डगळे (लिपिक, विधि विभाग), भानु परमार (लिपिक, कर विभाग), संजय पवार (लिपिक), बलराम गिधवा (लिपिक), जगदीश परमार (लिपिक) सहित वे अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें आंदोलनकारियों के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा पकड़ा जा चुका है, लेकिन वे अब भी विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि ऐसे कुल 23 कर्मचारी अभी भी प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं।

धरना प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ठाणे जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया। आंदोलनकारियों के अनुसार जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, ठाणे उपजिला चुनाव अधिकारी की ओर से भी आंदोलनकारियों को पत्र सौंपा गया। पत्र में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के लिए जिन सहायक अधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है, उनके संबंध में प्राप्त शिकायतों पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे कि यदि किसी अधिकारी को हटाया जाता है तो संबंधित पद रिक्त न रहें और चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संचालित होती रहे।

धरना समाप्त होने के बाद शैलेश तिवारी ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द ठोस कार्रवाई नहीं करता और ACB मामलों में पकड़े गए अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से नहीं हटाया जाता, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर बनाए रखना जनता के विश्वास और प्रशासनिक निष्पक्षता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

फिलहाल आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी एवं चुनाव प्रशासन द्वारा लिए गए संज्ञान के बाद उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस पूरे मामले में शीघ्र निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा।
























UMC की डिजिटल व्यवस्था पर सवाल: प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बाद भी पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम बरकरार।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के सैकड़ों प्रॉपर्टी धारकों का आरोप है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और महानगरपालिका से आधिकारिक प्रॉपर्टी ट्रांसफर (टाइटल म्यूटेशन) लेटर प्राप्त होने के बावजूद उनकी संपत्तियों का स्वामित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप नागरिक महीनों तक अपने ही अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनपा कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार इंडेक्स-2, सेल डीड, स्टांप ड्यूटी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है। दस्तावेजों की जांच के उपरांत मनपा प्रशासन स्वामित्व हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए आधिकारिक ट्रांसफर लेटर भी जारी कर देता है। लेकिन इसके बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाता, जिससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

कागजों पर नया मालिक, ऑनलाइन सिस्टम में अब भी पुराना नाम

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिकों के हाथ में मनपा द्वारा जारी वैध ट्रांसफर लेटर मौजूद होता है, लेकिन जब वे प्रॉपर्टी टैक्स भरने, रिकॉर्ड डाउनलोड करने या ऑनलाइन विवरण देखने के लिए महानगरपालिका के पोर्टल पर जाते हैं, तो वहां अब भी पुराने मालिक या डेवलपर का नाम दिखाई देता है। इससे नागरिकों को यह साबित करने में भी कठिनाई होती है कि संबंधित संपत्ति अब उनके नाम पर है।

बैंक लोन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर असर

ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने का सबसे बड़ा असर बैंकिंग और वित्तीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। कई बैंक होम लोन, मॉर्गेज लोन अथवा संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं। जब पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है, तो ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई मामलों में आवेदन लंबित हो जाते हैं।

इसके अलावा नामांतरण से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन तथा भविष्य में संपत्ति के विक्रय या हस्तांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

मनपा कार्यालयों के लगातार चक्कर, लेकिन समाधान नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इस समस्या को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी "सर्वर डाउन" होने की बात कही जाती है, कभी "डेटा अपडेट हो रहा है" का हवाला दिया जाता है, तो कभी अगले सप्ताह आने को कहा जाता है। कई नागरिकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस कारण लोगों का समय, पैसा और श्रम तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कई नागरिकों को नौकरी या व्यवसाय छोड़कर बार-बार मनपा कार्यालय जाना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।

नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष

एक पीड़ित प्रॉपर्टी धारक ने बताया कि उन्हें लगभग छह महीने पहले महानगरपालिका से प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर मिल चुका है, लेकिन आज भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दिखाई दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया।

इसी प्रकार अन्य नागरिकों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, तब तक ट्रांसफर लेटर का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

उल्हासनगर महानगरपालिका समय-समय पर कर प्रणाली के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। 'प्रोजेक्ट मंथन' जैसे अभियानों के माध्यम से रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और कर संग्रह प्रणाली को डिजिटल बनाने की बात भी कही गई थी।

लेकिन ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होना इन दावों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि विभागीय स्तर पर डेटा एंट्री या सिस्टम अपडेट समय पर नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

शहर के समाजसेवियों, कर विशेषज्ञों और नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही इसके लिए जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर जारी होने के साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जाए।

नामांतरण प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (SLA) तय की जाए।

लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने हेतु पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

जब महानगरपालिका स्वयं डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब स्वामित्व हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रक्रिया का महीनों तक अधूरा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर उनके विश्वास को भी कमजोर करता है। अब देखना यह होगा कि मनपा प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है और नागरिकों को राहत कब मिलती है।