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मुंबई प्रेस क्लब चुनाव: 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल का दबदबा, सभी प्रमुख पदों पर जीत; सुरेंद्र गंगन बने अध्यक्ष।


 


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई प्रेस क्लब के चुनाव में 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। अध्यक्ष, चेयरमैन, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे सभी महत्वपूर्ण पदों पर इस पैनल के उम्मीदवारों ने निर्णायक बढ़त के साथ जीत हासिल की। चुनाव परिणामों ने स्पष्ट संकेत दिया कि प्रेस क्लब के अधिकांश सदस्यों ने 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल पर अपना भरोसा जताया है। वहीं, कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना का कार्य अभी जारी है।

अध्यक्ष पद पर 'सेव द प्रेस क्लब' के उम्मीदवार सुरेंद्र गंगन ने 579 वोट प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। उनके मुकाबले प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवार राजीव खांडेकर को 258 वोट मिले। इस चुनाव में 22 मत अमान्य घोषित किए गए।

चेयरमैन पद पर बालकृष्ण ने 508 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी मयुरेश गणपत को 320 वोट मिले।

उपाध्यक्ष (वाइस चेयरमैन) पद पर धोंडिबा पांडुरंग म्हस्के ने 537 वोट प्राप्त कर विजय हासिल की। उनके मुकाबले आशिष राजे को 290 वोट मिले।

सचिव पद के लिए हुए मुकाबले में अनिल कुमार सिंह ने 513 वोट के साथ जीत दर्ज की, जबकि सौरभ शर्मा को 313 वोट प्राप्त हुए।

संयुक्त सचिव पद पर सुधाकर कश्यप ने 515 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी रुचा कोनालकर को 323 वोट मिले।

कोषाध्यक्ष पद पर ओम प्रकाश तिवारी ने 487 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि शशांक परदे को 330 वोट मिले।

फिलहाल प्रेस क्लब की कमेटी सदस्य पदों के लिए मतगणना जारी है। प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस की ओर से आशिष राणे, अनुराग कांबले, अनीश पाटिल, ज्योत्स्ना गंगणे, गिरीश गायकवाड़, गिरीश चित्रे, स्वप्नील मिश्रा, संजय रंजीत, सचिन हराळकर और गौरव गुप्ता मैदान में हैं। वहीं, 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की ओर से आदित्य दुबे, वैभव परब, मनीषा रेगे, अंसारी शहीद, मधु नैहान, पूनम अपराज, अनीता शुक्ला, स्वप्नील शिंदे, उमेश गोस्वामी और के. जे. बेनीयचन चुनावी मुकाबले में हैं।

मुंबई प्रेस क्लब के इन चुनाव परिणामों को मीडिया जगत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी प्रमुख पदों पर 'सेव द प्रेस क्लब' पैनल की जीत ने संगठन में उसके प्रभाव और सदस्यों के व्यापक समर्थन को दर्शाया है। अब सभी की निगाहें कमेटी सदस्य पदों की मतगणना पर टिकी हैं, जिसके बाद प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।


























उल्हासनगर महानगरपालिका की ई-निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल, 26-26 लाख के टेंडरों में अनियमितता के आरोप।


 





उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सरकारी निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ई-टेंडरिंग (ई-निविदा) प्रणाली लागू की थी। इसका मकसद मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर उपलब्ध कराना था। लेकिन उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

आरोप लगाए जा रहे हैं कि महानगरपालिका में ई-निविदा प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। चर्चा है कि कई मामलों में टेंडर खुलने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि संबंधित ठेका किस ठेकेदार को दिया जाएगा। ऐसे में ई-टेंडरिंग का मूल उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ गया है।

सूत्रों के अनुसार, कैंप-1 से कैंप-5 तक लगभग 26-26 लाख रुपये की लागत वाले चेंबर निर्माण कार्यों के टेंडरों को लेकर भी इसी प्रकार की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि यदि कोई अन्य ठेकेदार निविदा भरता है, तो उसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर अपात्र घोषित कर दिया जाता है या फिर कथित रूप से उसे "बॉस का फोन" आने जैसी बातें कहकर पीछे हटने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय ठेकेदारों और नागरिकों का कहना है कि यदि ई-निविदा प्रक्रिया में पहले से ही परिणाम तय किए जा रहे हैं, तो पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि इससे योग्य और ईमानदार ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पाता, जबकि सरकारी धन के उपयोग पर भी संदेह पैदा होता है।

गौरतलब है कि उल्हासनगर महानगरपालिका पहले से ही कथित 85 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले को लेकर चर्चा में रही है। उस मामले में भी निविदा प्रक्रिया और ठेके आवंटन को लेकर कई सवाल उठे थे। ऐसे में अब 26-26 लाख रुपये के इन नए टेंडरों को लेकर सामने आए आरोपों ने एक बार फिर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं बल्कि सरकारी ई-टेंडरिंग प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितना दम है और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों और चर्चाओं पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

















राष्ट्र कल्याण पार्टी का ठाणे कलेक्टर कार्यालय पर धरना, ACB मामलों के आरोपित अधिकारियों को हटाने की मांग पर प्रशासन सक्रिय।


 



ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर बनाए रखने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी एवं छावा संगठन द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। सोमवार, 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें संबंधित अधिकारियों को तत्काल महत्वपूर्ण पदों से हटाने की मांग दोहराई गई।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी तथा छावा संगठन के निखिल गोळे ने किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को ACB ने रिश्वतखोरी अथवा भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़ा है, उन्हें संवेदनशील और प्रभावशाली विभागों का प्रभार देना प्रशासनिक पारदर्शिता एवं सुशासन की भावना के विपरीत है।

आंदोलनकारियों ने बताया कि इससे पहले 8 जुलाई को उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय के बाहर भी इसी मांग को लेकर धरना दिया गया था। उस समय मनपा प्रशासन ने लिखित रूप से जवाब दिया था कि गणेश शिंपी, जो मूलतः लघुलेखक (वर्ग-3) के पद पर हैं और वर्तमान में उपआयुक्त (प्रभाग समिति-2), कर निर्धारक एवं संकलक तथा चुनाव विभाग के प्रमुख का दायित्व संभाल रहे हैं, उन्हें फिलहाल हटाना संभव नहीं है क्योंकि वे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) चुनाव प्रक्रिया से जुड़े हैं, जो अक्टूबर तक जारी रहेगी।

हालांकि आंदोलनकारियों ने इस जवाब को असंतोषजनक बताते हुए आरोप लगाया कि केवल चुनावी प्रक्रिया का हवाला देकर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखना उचित नहीं है।

धरने के दौरान जिन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का उल्लेख किया गया, उनमें अजीत गोवारी (वरिष्ठ लिपिक), संजय पवार (कनिष्ठ अभियंता, नगररचना विभाग), अनिल खतुराणी (वरिष्ठ लिपिक, कर विभाग), अंकुश कदम (लिपिक, भंडार विभाग), राजा बुलानी (विधि विभाग प्रमुख), छाया डगळे (लिपिक, विधि विभाग), भानु परमार (लिपिक, कर विभाग), संजय पवार (लिपिक), बलराम गिधवा (लिपिक), जगदीश परमार (लिपिक) सहित वे अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें आंदोलनकारियों के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा पकड़ा जा चुका है, लेकिन वे अब भी विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि ऐसे कुल 23 कर्मचारी अभी भी प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं।

धरना प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ठाणे जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया। आंदोलनकारियों के अनुसार जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, ठाणे उपजिला चुनाव अधिकारी की ओर से भी आंदोलनकारियों को पत्र सौंपा गया। पत्र में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के लिए जिन सहायक अधिकारियों को दायित्व सौंपा गया है, उनके संबंध में प्राप्त शिकायतों पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे कि यदि किसी अधिकारी को हटाया जाता है तो संबंधित पद रिक्त न रहें और चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संचालित होती रहे।

धरना समाप्त होने के बाद शैलेश तिवारी ने कहा कि यदि प्रशासन जल्द ठोस कार्रवाई नहीं करता और ACB मामलों में पकड़े गए अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से नहीं हटाया जाता, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर बनाए रखना जनता के विश्वास और प्रशासनिक निष्पक्षता दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

फिलहाल आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी एवं चुनाव प्रशासन द्वारा लिए गए संज्ञान के बाद उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस पूरे मामले में शीघ्र निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा।
























UMC की डिजिटल व्यवस्था पर सवाल: प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बाद भी पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम बरकरार।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के सैकड़ों प्रॉपर्टी धारकों का आरोप है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और महानगरपालिका से आधिकारिक प्रॉपर्टी ट्रांसफर (टाइटल म्यूटेशन) लेटर प्राप्त होने के बावजूद उनकी संपत्तियों का स्वामित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप नागरिक महीनों तक अपने ही अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनपा कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार इंडेक्स-2, सेल डीड, स्टांप ड्यूटी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है। दस्तावेजों की जांच के उपरांत मनपा प्रशासन स्वामित्व हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए आधिकारिक ट्रांसफर लेटर भी जारी कर देता है। लेकिन इसके बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाता, जिससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

कागजों पर नया मालिक, ऑनलाइन सिस्टम में अब भी पुराना नाम

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिकों के हाथ में मनपा द्वारा जारी वैध ट्रांसफर लेटर मौजूद होता है, लेकिन जब वे प्रॉपर्टी टैक्स भरने, रिकॉर्ड डाउनलोड करने या ऑनलाइन विवरण देखने के लिए महानगरपालिका के पोर्टल पर जाते हैं, तो वहां अब भी पुराने मालिक या डेवलपर का नाम दिखाई देता है। इससे नागरिकों को यह साबित करने में भी कठिनाई होती है कि संबंधित संपत्ति अब उनके नाम पर है।

बैंक लोन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर असर

ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने का सबसे बड़ा असर बैंकिंग और वित्तीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। कई बैंक होम लोन, मॉर्गेज लोन अथवा संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं। जब पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है, तो ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई मामलों में आवेदन लंबित हो जाते हैं।

इसके अलावा नामांतरण से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन तथा भविष्य में संपत्ति के विक्रय या हस्तांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

मनपा कार्यालयों के लगातार चक्कर, लेकिन समाधान नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इस समस्या को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी "सर्वर डाउन" होने की बात कही जाती है, कभी "डेटा अपडेट हो रहा है" का हवाला दिया जाता है, तो कभी अगले सप्ताह आने को कहा जाता है। कई नागरिकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस कारण लोगों का समय, पैसा और श्रम तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कई नागरिकों को नौकरी या व्यवसाय छोड़कर बार-बार मनपा कार्यालय जाना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।

नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष

एक पीड़ित प्रॉपर्टी धारक ने बताया कि उन्हें लगभग छह महीने पहले महानगरपालिका से प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर मिल चुका है, लेकिन आज भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दिखाई दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया।

इसी प्रकार अन्य नागरिकों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, तब तक ट्रांसफर लेटर का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

उल्हासनगर महानगरपालिका समय-समय पर कर प्रणाली के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। 'प्रोजेक्ट मंथन' जैसे अभियानों के माध्यम से रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और कर संग्रह प्रणाली को डिजिटल बनाने की बात भी कही गई थी।

लेकिन ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होना इन दावों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि विभागीय स्तर पर डेटा एंट्री या सिस्टम अपडेट समय पर नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

शहर के समाजसेवियों, कर विशेषज्ञों और नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही इसके लिए जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर जारी होने के साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जाए।

नामांतरण प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (SLA) तय की जाए।

लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने हेतु पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

जब महानगरपालिका स्वयं डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब स्वामित्व हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रक्रिया का महीनों तक अधूरा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर उनके विश्वास को भी कमजोर करता है। अब देखना यह होगा कि मनपा प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है और नागरिकों को राहत कब मिलती है।


















ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ चुनाव 2026–2028: दिलीप शिंदे बने अध्यक्ष, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन।


 

ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ के द्विवार्षिक चुनाव (2026–2028) का परिणाम रविवार, 19 जुलाई 2026 को घोषित किया गया। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लेकर नई कार्यकारिणी का चयन किया।

घोषित परिणामों के अनुसार दिलीप शिंदे को संघ का अध्यक्ष चुना गया। वहीं दीपक शेलार कार्याध्यक्ष, निलेश मंडलिक उपाध्यक्ष तथा राजेश शेटकर कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए। महासचिव पद के लिए राजीव डाके और प्रसाद सकट का चयन किया गया।

नई कार्यकारिणी में निकेश शार्दुल, अमर राजभर, सचिन देशमाने, गजानन हरिमकर, प्रफुल्ल गांगुर्डे और नितीन दूधसागर को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया है। वहीं सारिका साळुंखे महिला कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित हुई हैं।

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पत्रकारों के हितों की रक्षा, संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा पत्रकारिता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने संगठन में सभी सदस्यों को साथ लेकर चलने और पत्रकारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प भी व्यक्त किया।

नवनिर्वाचित पदाधिकारी

अध्यक्ष: दिलीप शिंदे

कार्याध्यक्ष: दीपक शेलार

उपाध्यक्ष: निलेश मंडलिक

कोषाध्यक्ष: राजेश शेटकर

महासचिव: राजीव डाके

महासचिव: प्रसाद सकट

कार्यकारिणी सदस्य: निकेश शार्दुल, अमर राजभर, सचिन देशमाने, गजानन हरिमकर, प्रफुल्ल गांगुर्डे, नितीन दूधसागर

महिला कार्यकारिणी सदस्य: सारिका साळुंखे

















'आरोपित अधिकारियों को तुरंत हटाओ'— राष्ट्र कल्याण पार्टी का अल्टीमेटम, 21 जुलाई को ठाणे में प्रदर्शन।


ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अब भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश तिवारी ने घोषणा की है कि यदि ऐसे अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदभार से नहीं हटाया गया तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेश तिवारी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 8 जुलाई को उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय के बाहर आयुक्त कक्ष के सामने राष्ट्र कल्याण पार्टी एवं छावा संगठन के निखिल गोळे के नेतृत्व में धरना आंदोलन किया गया था। आंदोलन के दौरान प्रशासन को भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने की मांग वाला ज्ञापन भी सौंपा गया था।

आंदोलन के बाद महानगरपालिका प्रशासन ने लिखित उत्तर देते हुए बताया कि गणेश शिंपी, जो मूल रूप से लघुलेखक (वर्ग-3) के पद पर हैं और वर्तमान में उप-आयुक्त (प्रभाग समिति क्रमांक-2), कर निर्धारक एवं संकलक तथा चुनाव विभाग प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उनके संदर्भ में एसआईआर (Summary Inquiry Report) प्रक्रिया जारी है। प्रशासन के अनुसार यह प्रक्रिया अक्टूबर तक चलेगी, इसलिए उसके पूर्ण होने तक उनके खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई संभव नहीं है।

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने प्रशासन के इस जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि जांच लंबित होने का हवाला देकर भ्रष्टाचार के आरोपित अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

तिवारी ने बताया कि गणेश शिंपी के अलावा अजीत गोवारी (वरिष्ठ लिपिक), संजय पवार (कनिष्ठ अभियंता, नगररचना विभाग), अनिल खतुराणी (वरिष्ठ लिपिक, कर विभाग), अंकुश कदम (लिपिक, भंडार विभाग), राजा बुलानी (लिपिक एवं विधि विभाग प्रमुख), छाया डगळे (लिपिक, विधि विभाग), भानु परमार (लिपिक, कर विभाग) सहित अन्य कर्मचारियों को भी, जो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके हैं, महत्वपूर्ण पदभार दिया गया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि संजय पवार, बलराम गिधवा, जगदीश परमार सहित कुल 23 अधिकारी एवं कर्मचारी, जिन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़ा गया था, अब भी विभिन्न विभागों में प्रभावशाली जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

शैलेश तिवारी ने कहा कि यदि इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल प्रभाव से महत्वपूर्ण पदभार वापस नहीं लिया गया तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने मांग की है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे अधिकारियों को जांच पूरी होने तक किसी भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक अथवा वित्तीय जिम्मेदारी से दूर रखा जाए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता का विश्वास कायम रह सके।

















15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों को मंजूरी मिलने पर विधायक किसन कथोरे ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार जताया। इस फैसले से लाखों यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।


 


बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

बदलापुर से मुंबई के बीच प्रतिदिन नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत देने वाला निर्णय सामने आया है। वर्षों से चली आ रही 15 डिब्बों वाली उपनगरीय (लोकल) ट्रेनों की मांग को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। इस महत्वपूर्ण निर्णय पर भाजपा विधायक किसन कथोरे ने केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इसे बदलापुर सहित पूरे ठाणे जिले के रेल यात्रियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

विधायक किसन कथोरे ने कहा कि बदलापुर महाराष्ट्र के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। बढ़ती आबादी और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के कारण लंबे समय से 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब इस मांग को स्वीकृति मिलने से यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी, ट्रेनों की यात्री क्षमता बढ़ेगी और दैनिक सफर अधिक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक बनेगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक रेल सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलापुर, अंबरनाथ, उल्हासनगर, कल्याण और आसपास के क्षेत्रों से मुंबई आने-जाने वाले यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

विधायक कथोरे ने इस महत्वपूर्ण मांग को मंजूरी देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस का बदलापुर क्षेत्र के सभी यात्रियों की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से महाराष्ट्र की रेल व्यवस्था लगातार आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बन रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी बदलापुर और ठाणे जिले की रेल अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए इसी प्रकार सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं और यात्रियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है, जिसका लाभ आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र को मिलेगा।

इस अवसर पर भाजपा कोंकण विभाग आईटी सेल के संयोजक एवं ठाणे जिला ग्रामीण के उपाध्यक्ष श्री मिलिंद धारवाडकर ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बदलापुर के नागरिकों, विशेषकर प्रतिदिन लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों ने वर्षों तक धैर्य और संयम के साथ इस मांग के पूरा होने का इंतजार किया। उनका यह धैर्य और संघर्ष सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की शुरुआत से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि भीड़ का दबाव भी कम होगा और दैनिक यात्रा पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तथा सुरक्षित बनेगी। यह निर्णय बदलापुर क्षेत्र के समग्र विकास और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।