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फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का वीडियो वायरल: पार्टी के बाद लिफ्ट में अचानक बैठे, बॉडीगार्ड के सहारे बाहर आए; घटना की वजह अब तक साफ नहीं।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उनके प्रशंसकों के बीच चिंता और कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। यह वीडियो अभिनेता राघव जुयाल की बर्थडे पार्टी के बाद का बताया जा रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पार्टी से बाहर निकलते समय आर्यन खान अचानक लिफ्ट के अंदर बैठ जाते हैं। कुछ क्षण बाद उनके बॉडीगार्ड और साथ मौजूद अन्य लोग उन्हें हाथ पकड़कर सहारा देते हुए लिफ्ट से बाहर लेकर आते हैं। इस दौरान आर्यन सामान्य से कुछ अलग नजर आते हैं, जिसके चलते सोशल मीडिया पर घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हालांकि, अब तक आर्यन खान, उनके परिवार या उनकी टीम की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने लिफ्ट में अचानक क्यों बैठना पड़ा और उन्हें सहारे की जरूरत क्यों महसूस हुई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कुछ लोग उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका जता रहे हैं, जबकि कई अन्य का मानना है कि यह केवल क्षणिक थकान, चक्कर आने या किसी अन्य सामान्य वजह का मामला भी हो सकता है। फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि आर्यन खान की तबीयत वास्तव में बिगड़ी थी या घटना के पीछे कोई दूसरी वजह थी। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशंसक आर्यन खान की कुशलता को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं।















उल्हासनगर मनपा में अवैध वसूली प्रकरण पर बड़ी कार्रवाई: लिपिक आदेश उभाळे निलंबित, सहायक आयुक्त अजय साबळे को अंतिम चेतावनी; मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही पर उठाए सवाल।


 




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रभाग समिति क्रमांक-1 में कथित अवैध वसूली के मामले में मनपा प्रशासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए लिपिक आदेश उभाळे को निलंबित कर दिया है। वहीं, प्रभाग समिति के सहायक आयुक्त अजय साबळे को इस प्रकरण में अंतिम चेतावनी (लास्ट वार्निंग) जारी की गई है। इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।

उल्हास जनपथ के संपादक शिव कुमार मिश्रा पिछले 7–8 महीनों से इस मुद्दे को लगातार उठाते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के समक्ष मजबूती से आवाज बुलंद कर रहे थे। आखिरकार उनकी सतत मेहनत रंग लाई और मामले में प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।

जानकारी के अनुसार, पदपथ (फुटपाथ) विभाग से जुड़े कथित अवैध वसूली के मामले को लेकर मंत्रालय, लोकायुक्त, जिला अधिकारी तथा उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन को विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पदपथ विभाग में नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वसूली की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद मनपा प्रशासन ने मामले की विभागीय जांच शुरू की।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर लिपिक आदेश उभाळे की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद मनपा आयुक्त ने उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए।

इसी प्रकरण में सहायक आयुक्त अजय साबळे को भी प्रशासन की ओर से अंतिम चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन का कहना है कि उनके विरुद्ध विभागीय स्तर पर उपलब्ध अधिकारों के अनुसार कार्रवाई की गई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि अवैध वसूली का मामला हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी केवल अधीनस्थ कर्मचारी की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग के प्रभारी अधिकारी की भी बनती है।

शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि इस मामले में सहायक आयुक्त अजय साबळे के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए जल्द ही कोकण भवन तथा महाराष्ट्र मंत्रालय में अलग से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशासनिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि यदि उच्च स्तर पर आगे जांच होती है तो इस प्रकरण में अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है।

फिलहाल, मनपा प्रशासन द्वारा लिपिक आदेश उभाळे के निलंबन और सहायक आयुक्त अजय साबळे को अंतिम चेतावनी दिए जाने के बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उच्च स्तर पर प्रस्तावित शिकायतों के बाद इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।














नवी मुंबई के अवैध निर्माणों पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के दिए निर्देश।


नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

नवी मुंबई में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिडको (CIDCO), नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC), महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) तथा अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराज़गी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक योजनाबद्ध शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होना प्रशासनिक विफलता का संकेत है और यह स्थिति कानून के शासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि नवी मुंबई जैसे नियोजित शहर में लगातार अवैध निर्माण होते रहना अत्यंत चिंताजनक है। यदि समय रहते संबंधित विभागों और अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। अदालत ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि इससे शहरी नियोजन, नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि वर्षों पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों के बावजूद अवैध निर्माणों के खिलाफ अपेक्षित और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अदालत के अनुसार, प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण शहर में अनियोजित विकास को बढ़ावा मिला, जिससे आम नागरिकों को यातायात, जल निकासी, बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि नवी मुंबई क्षेत्र में मौजूद सभी अवैध निर्माणों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाए और कानून के अनुसार उनके विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, न्यायालय ने यह भी पूछा कि अब तक अवैध निर्माणों को रोकने में विफल रहने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और उनकी जवाबदेही कैसे तय की गई है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अवैध निर्माणों को हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए, जिनकी लापरवाही या मिलीभगत के कारण ऐसे निर्माण खड़े हुए। अदालत ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उसके आदेशों का समयबद्ध पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई भी की जा सकती है।

गौरतलब है कि नवी मुंबई में अवैध निर्माणों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विभिन्न नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण यह मामला न्यायालय तक पहुंचा। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।













'भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण क्यों?' उल्हासनगर मनपा के खिलाफ राष्ट्र कल्याण पार्टी तथा छावा संगठन का धरना, 21 जुलाई को ठाणे में प्रदर्शन का ऐलान।


 




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों को उल्हासनगर महानगरपालिका में अब भी महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार दिए जाने के विरोध में मंगलवार (8 जुलाई) को मनपा आयुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी तथा छावा संगठन के निखिल गोळे के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में एसीबी की कार्रवाई का सामना कर चुके अनेक अधिकारी और कर्मचारी आज भी संवेदनशील एवं राजस्व से जुड़े विभागों में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, उन्हें अतिरिक्त महत्वपूर्ण पदभार भी सौंपे गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बजाय उसे बढ़ावा मिल रहा है।

धरना प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से गणेश शिंपी का मामला उठाया। उनका आरोप है कि गणेश शिंपी मूल रूप से लघुलेखक (स्टेनो) वर्ग-3 के पद पर नियुक्त हैं, लेकिन उन्हें उप आयुक्त (प्रभाग समिति-2), कर निर्धारक एवं संकलक, कर विभाग, चुनाव विभाग प्रमुख तथा अतिक्रमण निष्कासन विभाग सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

आंदोलनकारियों के अनुसार, मनपा प्रशासन ने उन्हें लिखित रूप से बताया कि चुनाव विभाग में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चल रही है, जो अक्टूबर तक जारी रहेगी, इसलिए फिलहाल कोई कार्रवाई संभव नहीं है। हालांकि आंदोलनकारियों का दावा है कि हाल ही में नगर निगम के सार्वत्रिक चुनाव 2025-26 की प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में गणेश शिंपी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त विभागों का प्रभार देना गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक स्टेनो स्तर के कर्मचारी को इतने महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी आखिर किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में दी गई। उनका कहना है कि यदि यह नियुक्तियां आर्थिक लेन-देन के आधार पर की गई हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इन सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा।

धरना प्रदर्शन में उन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया, जिनके खिलाफ एसीबी द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद वे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत बताए गए। इनमें वरिष्ठ लिपिक अजीत गोवारी, नगररचना विभाग के कनिष्ठ अभियंता संजय पवार, कर विभाग के वरिष्ठ लिपिक अनिल खतुराणी, भंडार विभाग के लिपिक अंकुश कदम, विधि विभाग के राजा बुलानी, छाया डगळे, कर विभाग के भानु परमार, बलराम गिधवा, जगदीश परमार सहित अन्य कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए। आंदोलनकारियों का दावा है कि ऐसे कुल 23 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एसीबी कार्रवाई कर चुकी है, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 8 दिनों के भीतर इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों से महत्वपूर्ण पदभार वापस लेकर उचित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना-आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे अधिकारियों को संवेदनशील विभागों में बनाए रखना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले को लेकर अब नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक तूल पकड़ सकता है।














मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण अभियान में भाजपा नेता दिनेश वासवानी की सक्रिय भूमिका, आईटी और सोशल मीडिया टीम के साथ बूथ स्तर पर संभाला मोर्चा।


 

हैदराबाद/सिकंदराबाद: दिनेश मीरचंदानी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तेलंगाना के वरिष्ठ नेता एवं सिकंदराबाद शहर के आईटी और सोशल मीडिया संयोजक श्री दिनेश वासवानी इन दिनों निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision - SIR) अभियान में पूरी सक्रियता के साथ भागीदारी निभा रहे हैं। वह अपने विधानसभा क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य में लगातार जनसेवा कर रहे हैं।

अभियान के तहत श्री वासवानी मतदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने, पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने, त्रुटियों के सुधार तथा मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वह विभिन्न बूथों का दौरा कर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित कर रहे हैं और उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

भाजपा संगठन का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बूथ स्तर तक पहुंचकर लोगों की सहायता कर रहे हैं। श्री दिनेश वासवानी भी इस अभियान में लगातार मौजूद रहकर नागरिकों की समस्याओं का समाधान कराने और निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जनसंपर्क अभियानों से लोगों को मतदान प्रक्रिया की बेहतर जानकारी मिलती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने और प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य करना भी है। इसी सोच के साथ श्री दिनेश वासवानी अपनी टीम और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान में पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ जनसेवा में जुटे हुए हैं।














'नशे से दूर रहें, भविष्य संवारें'— केबीपी कॉलेज में IRS अधिकारी समीर वानखेड़े का युवाओं को संदेश।


 



नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

वाशी स्थित कर्मवीर भाऊराव पाटिल (केबीपी) कॉलेज में 'अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस' के अवसर पर एक प्रभावशाली जन-जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। छात्र परिषद, छात्र कल्याण समिति तथा अन्वय नशामुक्ति केंद्र, बेलापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश देना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का बढ़ता दुरुपयोग केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और देश के भविष्य को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रहकर अपने लक्ष्य, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने मित्रों तथा परिवार को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।

समीर वानखेड़े ने अपने संबोधन में कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल कानून लागू करने से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और स्वयं युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा ही देश के भविष्य का निर्माता है।

कार्यक्रम में अन्वय फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अजीत मगदूम ने संस्था द्वारा संचालित नशामुक्ति अभियान, पुनर्वास सेवाओं और जन-जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है।

वहीं गैलेक्सी लिमिटेड के प्रमुख कर्नल अमरजीत दास ने अनुशासन, आत्म-संयम और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से जीवन में सकारात्मक आदतें अपनाने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का आग्रह किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. शुभदा नायक ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से नशामुक्त भारत के संकल्प को जीवन में अपनाने का आह्वान किया और कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है।

इस अवसर पर नशा जागरूकता विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेता छात्रों को सम्मानित किया गया। छात्र कल्याण समिति की अध्यक्षा डॉ. प्रतिभा देवणे ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. शुभदा नायक द्वारा पूर्व एनसीबी निदेशक समीर वानखेड़े का शॉल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान भी किया गया। संगोष्ठी का समापन नशामुक्त समाज के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।



















उल्हासनगर के एसडीओ और कर्मचारी के कार्यकाल की जांच की मांग, महापौर अश्विनी निकम ने सीएम, उपमुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और एंटी करप्शन विभाग से की शिकायत।


 







उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की महापौर अश्विनी कमलेश निकम ने उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद तथा एसडीओ कार्यालय के कर्मचारी गणेश वलवी के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले तथा भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एंटी करप्शन ब्यूरो) को शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

महापौर अश्विनी निकम का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि सरकारी जमीनों से जुड़े मामलों में फर्जी सनद (दस्तावेज) तैयार कर जारी किए गए, जिससे सरकारी संपत्तियों के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां होने की आशंका है।

उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। महापौर का कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों को भी प्रभावित कर सकती है।

इस शिकायत के सामने आने के बाद उल्हासनगर के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों पर है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच एजेंसियों द्वारा सत्यापन अभी होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।