उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका की आय का प्रमुख स्रोत हाउस टैक्स है। प्रशासन बकाया कर वसूली के लिए सख्ती भी दिखा रहा है और कई संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। इसी बीच सेंचुरी रेयॉन कंपनी के टैक्स मामले को लेकर शहर में गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की है कि सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही इस पूरे मामले में महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग तेज हो गई है।
₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ — टैक्स में बड़ी कटौती पर विवाद
करीब सवा साल पहले उल्हासनगर बीजेपी जिला अध्यक्ष राजेश वढारिया ने उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया।
आरोपों के अनुसार:
पहले सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर लगभग 11 करोड़ 80 लाख रुपये टैक्स बकाया बताया गया
बाद में पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) के नाम पर नया बिल जारी किया गया
संशोधित बिल में टैक्स घटाकर करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये कर दिया गया
इस तरह कंपनी को लगभग 9 करोड़ 15 लाख रुपये का लाभ मिलने का आरोप लगाया गया
इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।
जांच के लिए बनी कमेटी, लेकिन रिपोर्ट अब तक गोपनीय
शिकायत के बाद तत्कालीन आयुक्त अज़ीज़ शेख द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। बताया गया कि कमेटी ने संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया।
टैक्स विभाग की अधिकारी नीलम कदम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी ने टैक्स असेसमेंट में त्रुटि होने की शिकायत की थी।
उनके अनुसार:
कंपनी ने असेसमेंट गलत होने की बात रखी
प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया गया
हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
6 बड़े सवाल, जिन पर सबकी नजर
इस मामले में शहर के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई अहम सवाल उठाए हैं:
1. री-असेसमेंट में कुल कितने लाख स्क्वेयर फीट का अंतर निकाला गया?
2. री-असेसमेंट के बाद टैक्स राशि में कितना अंतर आया?
3. कंपनी का संशोधित असेसमेंट आधिकारिक रूप से लागू किया गया या नहीं?
4. टैक्स वर्तमान वित्त वर्ष से लागू किया गया या पिछली तारीख से?
5. सेंचुरी रेयॉन कंपनी की सेल्फ री-असेसमेंट रिपोर्ट क्या थी?
6. क्या इस मामले में न्यायालय में कोई याचिका दायर हुई थी? यदि हां, तो अदालत का निर्णय क्या रहा?
इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं, जिससे मामले को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।
नागरिकों की मांग — रिपोर्ट सार्वजनिक कर हो पारदर्शिता
शहर के नागरिकों का कहना है कि जब महानगरपालिका आम नागरिकों से टैक्स वसूली के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है, तो बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग:
कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए
यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध हो तो कार्रवाई की जाए
महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज
इस पूरे मामले को लेकर अब महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
फिलहाल, सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है और इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।