ठाणे: दिनेश मीरचंदानीमहाराष्ट्र राज्य आबकारी विभाग के ठाणे-2 (कल्याण डिवीजन) में कार्यरत कुछ कर्मचारियों की ओर से की गई शिकायतों के बाद विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। शिकायतों में अधीक्षक उत्तम राजाराम शिंदे के कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के साथ कथित व्यवहार को लेकर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ स्तर पर जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर शिकायतों में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता तथा परिस्थितियों का तथ्यात्मक सत्यापन किया जाएगा।
🔴 कर्मचारियों की शिकायतों में क्या आरोप हैं?
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों ने कथित रूप से आरोप लगाया है कि कार्यालय में काम के दौरान उन पर अत्यधिक दबाव बनाया जाता था। शिकायतों में महिला कर्मचारियों को कथित मानसिक तनाव, अभद्र या अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल, कार्यालय समय के बाद भी काम करने के लिए दबाव तथा छुट्टियों के दिनों में कार्यालय बुलाए जाने जैसे आरोपों का उल्लेख होने की जानकारी है।
इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों द्वारा अवकाश आवेदन से संबंधित समस्याओं की शिकायत किए जाने की भी बात सामने आई है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है।
❤️ महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ने का भी उल्लेख
शिकायतों में एक महिला कर्मचारी की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर घटना का भी उल्लेख किए जाने की जानकारी है। आरोपों के मुताबिक, कथित मानसिक तनाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में उपचार कराना पड़ा।
कुछ शिकायतों में हार्ट अटैक और ICU में उपचार का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी स्वास्थ्य संबंधी घटना का कार्यस्थल के कथित तनाव से सीधा संबंध है या नहीं, यह केवल चिकित्सकीय दस्तावेजों और सक्षम जांच के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है।
इसलिए इस घटना को फिलहाल आरोप/शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।
🔎 प्रवीण तांबे को जांच की जिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी विभाग के अधीक्षक प्रवीण तांबे को जांच की जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच के दौरान मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है—
- संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज करना।
- शिकायतों में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच करना।
- कार्यालय में काम के समय और कर्मचारियों पर डाले गए कार्यभार से संबंधित जानकारी का परीक्षण।
- अवकाश आवेदन एवं कार्यालय उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच।
- संबंधित स्वास्थ्य घटना से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन।
- शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों का पक्ष दर्ज करना।
- जांच के निष्कर्षों के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपना।
📅 31 अगस्त को दर्ज होंगे कर्मचारियों के बयान
जानकारी के अनुसार, कल्याण डिवीजन में कार्यरत निरीक्षक, उपनिरीक्षक, लिपिक तथा अन्य कर्मचारियों को 31 अगस्त को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने की बात सामने आई है।
यदि सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाते हैं, तो इससे जांच अधिकारियों को घटनाक्रम और कार्यालयीन परिस्थितियों को अलग-अलग पक्षों से समझने में मदद मिल सकती है।
⚖️ जांच रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर होगी साफ
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभागीय जांच है। शिकायतों में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं और किसी कर्मचारी के साथ नियमों के विपरीत व्यवहार किया गया या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच रिपोर्ट उसी के अनुरूप निष्कर्ष देगी।
⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी नोट
यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायतों और जांच से संबंधित प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें उल्लेखित किसी भी आरोप को न्यायिक या विभागीय रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी या विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए। किसी कर्मचारी की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को भी आधिकारिक चिकित्सकीय दस्तावेजों के बिना अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही माना जाएगा।