उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) में कथित भ्रष्टाचार और बिजली चोरी को संरक्षण देने का गंभीर मामला सामने आया है। उल्हासनगर-3 स्थित स्नेहदीप अपार्टमेंट्स में हुई कार्रवाई के दौरान MSEDCL के एक वरिष्ठ अधिकारी पर बिजली चोरी पकड़ने के बाद कथित रूप से रिश्वत लेकर दोबारा बिजली कनेक्शन जोड़ने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और फोटो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
सोसायटी प्रशासन का आरोप है कि 22 मई 2026 को MSEDCL उल्हासनगर डिवीजन के अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता श्री भास्कर कोले अपनी टीम के साथ स्नेहदीप अपार्टमेंट्स पहुंचे थे। सोसायटी द्वारा लंबे समय से फ्लैट नंबर 105 (A-विंग) और फ्लैट नंबर 204 (B-विंग) में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग की शिकायत की जा रही थी।
बिना मीटर चल रही थी भारी बिजली खपत
सोसायटी के अनुसार दोनों फ्लैटों में बिना मीटर के भारी बिजली उपयोग किया जा रहा था, जो बिजली अधिनियम की धारा 126 और 135 का उल्लंघन है। आरोप है कि इन फ्लैटों पर लाल पंजाबी और गोविंद पंजाबी नामक व्यक्तियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बताया गया कि मूल फ्लैट मालिकों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है।
शिकायत के बाद MSEDCL की टीम मौके पर पहुंची और कथित रूप से अवैध बिजली लाइन काटी गई। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।
“30 मिनट की बंद कमरे की डील” का आरोप
सोसायटी सदस्यों का आरोप है कि बिजली लाइन काटने के तुरंत बाद अधिकारी श्री भास्कर कोले अपनी टीम और एक निजी मध्यस्थ के साथ आरोपी फ्लैट के अंदर गए। करीब 30 मिनट तक टीम फ्लैट के भीतर रही और इस दौरान किसी भी सोसायटी सदस्य को अंदर नहीं आने दिया गया।
आरोप यह भी है कि मौके पर कोई पंचनामा तैयार नहीं किया गया और बाहर आने के बाद FIR दर्ज करने की बजाय उसी बिजली लाइन को दोबारा जोड़ दिया गया जिसे कुछ मिनट पहले अवैध बताते हुए काटा गया था।
रिश्वत लेकर मामला दबाने का आरोप
स्थानीय सूत्रों और सोसायटी प्रशासन का दावा है कि बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान करीब ₹25,000 की रिश्वत देकर मामले को दबा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कथित फोटो और वीडियो अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय नागरिकों ने अधिकारी से सवाल किया कि बिजली चोरी करने वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, तो उन्होंने कथित रूप से कहा:
“अब यह मामला लीगल डिपार्टमेंट का है, मेरा काम खत्म हो गया।”
इसके बाद अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके से रवाना हो गए।
Vigilance और ACB को भेजे गए सबूत
सोसायटी सचिव भूषण बलदेव खत्री ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े फोटो और दस्तावेज मुंबई स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO), ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।
सोसायटी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल की गई MSEB की गाड़ी को जानबूझकर बिल्डिंग से दूर खड़ा किया गया ताकि पूरी कार्रवाई सार्वजनिक नजरों से दूर रहे।
“सरकारी खजाने की खुली लूट” – सोसायटी प्रशासन
सोसायटी प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:
“यह सरकारी खजाने की खुलेआम लूट है। जिन अधिकारियों को बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, वही आरोपियों को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। यदि 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी।”
मीडिया को सौंपे गए दस्तावेज
सोसायटी प्रशासन ने मीडिया को निम्न दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया है:
MSEDCL को दी गई प्रारंभिक शिकायतों की प्रतियां
मौके पर ली गई तस्वीरें और कथित वीडियो
अधिकारी और टीम की मौजूदगी के फोटो
कथित अवैध बिजली इंस्टॉलेशन से जुड़े रिकॉर्ड
अब इस पूरे मामले में MSEDCL, Vigilance विभाग और ACB की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।