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उल्हासनगर में 'RRR' की तिकड़ी फिर एकजुट, राजेंद्रसिंह भुल्लर, राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण के साथ आने से शिवसैनिकों में उत्साह की नई लहर।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर की राजनीति में गुरुवार को उस समय एक भावनात्मक और चर्चित क्षण देखने को मिला, जब वरिष्ठ शिवसैनिक राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण एक साथ दिखाई दिए। तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद अनेक शिवसैनिकों और समर्थकों ने इसे संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक बताते हुए स्वागत किया।

शिवसैनिकों के बीच यह त्रिमूर्ति लंबे समय से संगठन के संघर्ष, समर्पण और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती रही है। समर्थकों का कहना है कि जब उल्हासनगर में अपराध, दहशत और अस्थिरता का माहौल था, उस दौर में शिवसेना से जुड़ना आसान नहीं था। ऐसे समय में हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित होकर तथा धर्मवीर आनंद दिघे के मार्गदर्शन में इन वरिष्ठ नेताओं ने संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।

समर्थकों के अनुसार, राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज), राजेंद्र चौधरी और रमेश चव्हाण ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में शिवसेना का संगठन खड़ा करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और भगवा विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका दावा है कि वर्षों के संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और नेतृत्व के कारण आगे चलकर उल्हासनगर महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा की सत्ता स्थापित होने की राह भी मजबूत हुई।

शिवसैनिकों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में अनेक कार्यकर्ताओं को विरोध, हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा तथा कई वरिष्ठ शिवसैनिकों ने संघर्ष के दौरान बलिदान भी दिया। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उस समय "आदेश दिघे साहेब का... और प्रेरणा बाळासाहेब की" का संदेश कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का प्रमुख आधार माना जाता था।

बीते वर्षों में संगठन के भीतर समय-समय पर मतभेदों और दूरियों की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। हालांकि, तीनों वरिष्ठ नेताओं के एक साथ दिखाई देने के बाद समर्थकों का मानना है कि यह तस्वीर संगठन में सकारात्मक संदेश देने वाली है। सोशल मीडिया पर कई कार्यकर्ताओं ने इसे "RRR की वापसी" बताते हुए संगठन के लिए शुभ संकेत बताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता संगठन को नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करती है। उनका मानना है कि यदि यह एकता आगे भी बनी रहती है तो संगठन को भविष्य में और मजबूती मिलेगी।

समर्थकों ने यह भी आशा व्यक्त की कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे के विचारों, धर्मवीर आनंद दिघे के संस्कारों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता निरंतर बनी रहेगी और कार्यकर्ताओं को इसी प्रकार प्रेरणा मिलती रहेगी।

हालांकि, इस पुनर्मिलन को लेकर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक घोषणा या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, उनकी एक साथ आई तस्वीर ने उल्हासनगर के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।



















उल्हासनगर-3 में सप्तध्यान फाउंडेशन व सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल का संयुक्त स्वास्थ्य अभियान, निःशुल्क नेत्र जांच शिविर 7 अगस्त 2026 को।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

सामाजिक संस्था सप्तध्यान फाउंडेशन द्वारा सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल के सहयोग से 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को निःशुल्क नेत्र जांच एवं मोतियाबिंद स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल, इंडियन बैंक के पास, सेंट्रल हॉस्पिटल रोड, उल्हासनगर-3 में आयोजित होगा।

शिविर का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को समय रहते आंखों की बीमारियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना तथा मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार के लिए जागरूक करना है।

आयोजकों के अनुसार, नियमित नेत्र जांच से मोतियाबिंद का समय पर पता लगाया जा सकता है, दृष्टि हानि से बचाव होता है, आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसी उद्देश्य के साथ नागरिकों से इस निःशुल्क शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।

शिविर में आने वाले मरीजों की विशेषज्ञों द्वारा नेत्र जांच की जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आगे के उपचार और परामर्श की भी जानकारी दी जाएगी।

अपॉइंटमेंट एवं अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:

योगाचार्य सतीश शर्मा: 9011808012

नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) डॉ. मनीष मिरानी: 8108098576

सुरेखा क्रिटिकेयर हॉस्पिटल: 8237898959

"अच्छी दृष्टि, बेहतर जीवन" के संदेश के साथ आयोजित इस शिविर के माध्यम से आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं भी अपनी आंखों की जांच कराएं और अपने परिवार के बुजुर्गों एवं जरूरतमंद लोगों को भी इस निःशुल्क स्वास्थ्य सेवा का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।

"स्वास्थ्य, शिक्षा और मानवता के लिए साथ मिलकर – आपकी दृष्टि, हमारा मिशन। आज का एक छोटा कदम, कल का उज्ज्वल भविष्य।"



















उल्हासनगर-2 के गोल मैदान क्रिकेट ग्राउंड के कथित ₹1 करोड़ के फर्जी बिल को लेकर विवाद गहराया। यूएमसी के पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव पर कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर के आरोप लगे हैं। नागरिकों ने यूएमसी आयुक्त मनीषा आव्हाले से निष्पक्ष जांच कर भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कथित फर्जी बिलों और भुगतान प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सामने आए तथ्यों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा संबंधित बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से की है।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2022 में उल्हासनगर-2 स्थित गोल मैदान में क्रिकेट ग्राउंड के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी किया गया था। इस परियोजना की स्वीकृत लागत लगभग ₹2.85 करोड़ थी तथा कार्य छह माह में पूरा किया जाना था। दस्तावेजों में पांच वर्ष की दोष दायित्व अवधि (Defect Liability Period) का भी उल्लेख है।

बताया जाता है कि इसी कार्य के संबंध में मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को उक्त बिल भुगतान की प्रक्रिया के लिए लेखा विभाग को भेज दिया गया। इसी भुगतान प्रक्रिया को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित बिल पर पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव के कथित फर्जी बिल के उपर हस्ताक्षर किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति ने मिलकर विभाग में कई कथित फर्जी बिल तैयार किए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। उनका आरोप है कि जिस कार्य के लिए करोड़ों रुपये के बिल प्रस्तुत किए गए हैं, उस स्थल पर अपेक्षित निर्माण कार्य दिखाई नहीं देता और साइट की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। उनका कहना है कि भुगतान से पहले कार्य की वास्तविक प्रगति का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव द्वारा कार्यस्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। साथ ही, महाराष्ट्र शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्माण कार्य की प्रगति से संबंधित आवश्यक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी कथित रूप से नहीं कराई गई जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

मामले से जुड़े लोगों का यह भी आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पीडब्ल्यूडी विभाग का समुचित ऑडिट नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यदि स्वतंत्र वित्तीय और तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसी कारण नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूरे विभाग की व्यापक जांच कराने की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, शंकर नामक व्यक्ति पर पहले भी पीडब्ल्यूडी विभाग के तत्कालीन डिप्टी इंजीनियर महेश सीतलानी के कार्यकाल के दौरान कथित फर्जी बिल तैयार करने में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आज भी विभाग में कथित फर्जी बिलों के मामलों में शंकर की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित बिल का भुगतान जांच पूरी होने तक रोका जाए, कार्यस्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्य का मूल्यांकन कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

'मंत्रालय टाइम्स' का कहना है कि जनहित से जुड़े इस कथित फर्जी बिल प्रकरण की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अभिलेखों तथा जांच से जुड़े तथ्यों को क्रमवार प्रकाशित किया जाएगा ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।



















उल्हासनगर महानगरपालिका में अकाउंट ऑफिसर का पदभार अटका, तीन दिनों से नितल लव्हाले को नहीं मिला चार्ज; प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल।


 
उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में अकाउंट ऑफिसर के पदभार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद पिछले तीन दिनों से नितल लव्हाले को अब तक अकाउंट ऑफिसर का विधिवत पदभार नहीं सौंपा गया है। इस देरी को लेकर महानगरपालिका के कर्मचारियों और शहर के विभिन्न हलकों में चर्चा का माहौल है।

सूत्रों के अनुसार, अकाउंट ऑफिसर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि महानगरपालिका की वित्तीय व्यवस्था, भुगतान, बजट और लेखा संबंधी कार्य इसी विभाग के माध्यम से संचालित होते हैं। ऐसे में पदभार सौंपने में हो रही देरी को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।

चर्चाओं के बीच यह सवाल भी सामने आ रहा है कि पूर्व अकाउंट ऑफिसर किरण भिलारे का प्रभाव अब भी बना हुआ है या नहीं। कुछ लोग यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर नितल लव्हाले को समय पर चार्ज क्यों नहीं दिया जा रहा है और इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्पष्टता क्यों नहीं दी जा रही।

हालांकि, इन चर्चाओं और सवालों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। महानगरपालिका प्रशासन या आयुक्त की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

अब कर्मचारियों और नागरिकों की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि नितल लव्हाले को अकाउंट ऑफिसर का पदभार कब सौंपा जाएगा और पदभार में हो रही देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि प्रशासन इस विषय पर आधिकारिक जानकारी जारी करता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





















उल्हासनगर में सियासी चर्चाओं का दौर तेज! क्या 2029 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं शिवसेना नेता कमलेश निकम.?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों शिवसेना नेता कमलेश निकम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि निकम ने वर्ष 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अब तक न तो कमलेश निकम और न ही शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कमलेश निकम वर्ष 2029 में शिवसेना के टिकट पर उल्हासनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हो सकते हैं। इसी वजह से वे संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी राजनीति में संभावित उम्मीदवार अक्सर वर्षों पहले से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर देते हैं। ऐसे में कमलेश निकम की बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को भी आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों का दावा है कि हाल के समय में कमलेश निकम विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार भागीदारी कर रहे हैं तथा आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं के साथ उनका संपर्क भी बढ़ा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चुनाव नजदीक आने के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक माना जाता है। ऐसे में कमलेश निकम का नाम भी संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।

फिलहाल, वर्ष 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर शिवसेना ने किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए कमलेश निकम के चुनाव लड़ने की चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में यदि शिवसेना या कमलेश निकम की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा की जाती है, तो उल्हासनगर की राजनीति में नए समीकरण और नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।




















'गोल मैदान' क्रिकेट प्रोजेक्ट पर विवाद गहराया, सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वर्क ऑर्डर रद्द करने, भुगतान रोकने और ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।


 









उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के अंतर्गत 'गोल मैदान' में क्रिकेट मैदान के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत-पत्र सौंपकर संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल रद्द करने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा करोड़ों रुपये के कथित भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, वर्क ऑर्डर क्रमांक UMC/PWD/EE/2022-23/230 दिनांक 21 जुलाई 2022 को जारी किया गया था। पत्र में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए निधि पैनल क्रमांक 5 की पूर्व नगरसेविका गीता साधवानी के प्रयासों से स्वीकृत हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ठेकेदार ने वर्क ऑर्डर और निविदा की शर्तों का पालन नहीं किया तथा निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी परियोजना का 5 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं किया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर जो कार्य किया गया है, वह अत्यंत निम्न गुणवत्ता का है और उसे स्वीकृत एस्टिमेट तथा तकनीकी ड्रॉइंग के अनुरूप नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परियोजना की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शिकायत-पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया, जिसे 13 जुलाई 2026 को भुगतान के लिए लेखा विभाग भेज दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वास्तविकता में इस मूल्य का कार्य स्थल पर नहीं हुआ है और इसलिए प्रस्तुत बिल पूरी तरह फर्जी एवं बनावटी है।

पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि यह कथित बिल मेसर्स अनिरुद्ध नखावा तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण विभाग (PWD) के कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तैयार किया गया। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग भी की है।

मनोज साधवानी ने आयुक्त से मांग की है कि संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा मुख्य लेखा अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि विस्तृत जांच पूरी होने तक किसी भी बिल का भुगतान न किया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच से पहले भुगतान किया गया तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।

शिकायत-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच पूरी किए बिना भुगतान किया गया तो वे इस मामले को माननीय मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाएंगे।

शिकायत के साथ कथित तौर पर कार्यस्थल के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत किया है। शिकायत की प्रतिलिपि नगर विकास विभाग, मंत्रालय, जिलाधिकारी ठाणे, उल्हासनगर के महापौर, उप-आयुक्त (मुख्यालय) तथा मुख्य लेखा अधिकारी को भी भेजी गई है।

अब इस पूरे मामले में निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और संबंधित वर्क ऑर्डर तथा भुगतान प्रक्रिया पर क्या निर्णय लिया जाता है।

(नोट: यह समाचार शिकायत-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)यदि चाहें, मैं इसे और अधिक अखबार की खोजी (Investigative) शैली या ब्रेकिंग न्यूज़ शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।
















UMC के PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे की बदली को लेकर नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से पूछा— आखिर उनका तबादला कब होगा?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर शहर में चर्चा तेज हो गई है। नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से सवाल किया है कि PWD विभाग में डेप्युटी इंजीनियर संदीप जाधव और कर्मचारी दीप्ति लाडे का स्थानांतरण आखिर अब तक क्यों नहीं किया गया और उनकी बदली कब होगी?

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि दोनों पिछले 20 से अधिक वर्षों से इसी विभाग में कार्यरत हैं। इसे लेकर लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में पदस्थ रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि समय-समय पर स्थानांतरण होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनी रहती है।

नागरिकों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार के स्थानांतरण संबंधी प्रचलित सरकारी आदेश (GR) के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही विभाग या पद पर नहीं रखा जाना चाहिए। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद उसका स्थानांतरण किया जाना अपेक्षित होता है, ताकि प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।

इसी आधार पर शहर के लोगों का सवाल है कि यदि यह नीति अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होती है, तो PWD विभाग में कार्यरत इन दोनों कर्मचारियों के मामले में अब तक इसका पालन क्यों नहीं किया गया। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी विशेष प्रशासनिक कारण से उनका स्थानांतरण नहीं किया गया है, तो इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम या चर्चा की स्थिति समाप्त हो सके।

शहर के कई नागरिकों का मानना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य केवल कर्मचारियों का तबादला करना नहीं, बल्कि प्रशासन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। ऐसे में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही विभाग में बने रहने पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाज़िमी है।

नागरिकों ने आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए और यह बताया जाए कि संदीप जाधव एवं दीप्ति लाडे की बदली अब तक क्यों नहीं हुई। साथ ही, यदि स्थानांतरण संबंधी नियम लागू होते हैं, तो उनके अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या स्थानांतरण नीति के अनुरूप आगे कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।