उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के अंतर्गत 'गोल मैदान' में क्रिकेट मैदान के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साधवानी ने महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत-पत्र सौंपकर संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल रद्द करने, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने तथा करोड़ों रुपये के कथित भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, वर्क ऑर्डर क्रमांक UMC/PWD/EE/2022-23/230 दिनांक 21 जुलाई 2022 को जारी किया गया था। पत्र में दावा किया गया है कि इस परियोजना के लिए निधि पैनल क्रमांक 5 की पूर्व नगरसेविका गीता साधवानी के प्रयासों से स्वीकृत हुई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ठेकेदार ने वर्क ऑर्डर और निविदा की शर्तों का पालन नहीं किया तथा निर्धारित छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी परियोजना का 5 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं किया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मौके पर जो कार्य किया गया है, वह अत्यंत निम्न गुणवत्ता का है और उसे स्वीकृत एस्टिमेट तथा तकनीकी ड्रॉइंग के अनुरूप नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे परियोजना की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
शिकायत-पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय भारत कंस्ट्रक्शन्स ने 26 मई 2026 को लगभग ₹1,00,08,652.94 का बिल प्रस्तुत किया, जिसे 13 जुलाई 2026 को भुगतान के लिए लेखा विभाग भेज दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वास्तविकता में इस मूल्य का कार्य स्थल पर नहीं हुआ है और इसलिए प्रस्तुत बिल पूरी तरह फर्जी एवं बनावटी है।
पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि यह कथित बिल मेसर्स अनिरुद्ध नखावा तथा उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण विभाग (PWD) के कुछ अभियंताओं और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से तैयार किया गया। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग भी की है।
मनोज साधवानी ने आयुक्त से मांग की है कि संबंधित वर्क ऑर्डर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा मुख्य लेखा अधिकारी को निर्देश दिए जाएं कि विस्तृत जांच पूरी होने तक किसी भी बिल का भुगतान न किया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच से पहले भुगतान किया गया तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच सकता है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।
शिकायत-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि जांच पूरी किए बिना भुगतान किया गया तो वे इस मामले को माननीय मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाएंगे।
शिकायत के साथ कथित तौर पर कार्यस्थल के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत किया है। शिकायत की प्रतिलिपि नगर विकास विभाग, मंत्रालय, जिलाधिकारी ठाणे, उल्हासनगर के महापौर, उप-आयुक्त (मुख्यालय) तथा मुख्य लेखा अधिकारी को भी भेजी गई है।
अब इस पूरे मामले में निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है और संबंधित वर्क ऑर्डर तथा भुगतान प्रक्रिया पर क्या निर्णय लिया जाता है।
(नोट: यह समाचार शिकायत-पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)यदि चाहें, मैं इसे और अधिक अखबार की खोजी (Investigative) शैली या ब्रेकिंग न्यूज़ शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।