उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।
मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।
बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।
अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।
विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा
इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
उल्हासनगर स्थित विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे को लेकर जनहित स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों और पत्राचार का मामला अब उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक हित से जुड़े विषय को लेकर तरुण हिरानंदानी द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष प्रस्तुत प्रतिनिधित्व/शिकायत पर राज्य सरकार के स्तर से भी पत्राचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब का स्थान उल्हासनगर महानगरपालिका के पीछे स्थित सेमी-ओलंपिक स्विमिंग पूल परिसर के रूप में सार्वजनिक ऑनलाइन लिस्टिंग में दर्ज है।
मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री कार्यालय से UMC तक पहुंचा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तरुण हिरानंदानी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग-2 के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. एच. गोविंदराज, IAS के पास भेजा गया। इसके बाद मामला महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती मंजुषा ए. करांडे के स्तर तक पहुंचा।
बताया गया है कि 21 सितंबर 2026 को दोपहर 12:59 बजे श्रीमती मंजुषा करांडे द्वारा मामले को विचार एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त के पास अग्रेषित किया गया। इसकी प्रति शिकायतकर्ता को भी भेजे जाने की जानकारी है।
अब यह मामला UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के समक्ष विचाराधीन/प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। प्रशासन द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों, रिकॉर्ड, संबंधित समझौतों तथा लागू नियम-कानूनों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जानी है।
विधायक और विपक्षी नेता ने भी उठाया मुद्दा
इसी विषय को लेकर अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. बालाजी किणीकर तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की विपक्षी नेता अंजली सालवे द्वारा भी UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले को पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि इन पत्रों के माध्यम से विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से संबंधित विषय पर महानगरपालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
अब उल्हासनगर की जनता का सवाल—कार्रवाई कब?
मामले में विभिन्न स्तरों पर शिकायतों और पत्राचार की जानकारी सामने आने के बाद उल्हासनगर की जनता के बीच भी सवाल उठ रहा है कि विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब से जुड़े मुद्दे पर UMC प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और कब की जाएगी?
स्थानीय नागरिकों की नजर अब UMC आयुक्त मनिषा आव्हाले के कार्यालय से होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई, जांच या निर्णय पर बनी हुई है।
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप अथवा दावे रिकॉर्ड और नियमों की जांच में सही पाए जाते हैं, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार क्या कदम उठाए जाएंगे। वहीं, यदि शिकायतों में लगाए गए दावे रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो प्रशासन द्वारा उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जा सकती है।
जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी
फिलहाल शिकायतों में किए गए दावों या आरोपों की स्वतंत्र एवं अंतिम आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
मामले की वास्तविक स्थिति UMC प्रशासन द्वारा रिकॉर्ड एवं संबंधित दस्तावेजों की जांच तथा सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
उल्हासनगर में अब मुख्य सवाल यही है—राज्य सरकार के स्तर से मामला UMC तक पहुंचने और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किए जाने के बाद, विराट आम्बे स्पोर्ट्स क्लब के संबंध में महानगरपालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी?