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डेढ़ सौ दिवसीय ई-गवर्नेंस में उत्कृष्ट कार्य, ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे को CM फडणवीस ने किया सम्मानित।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई स्थित सह्याद्री अतिथीगृह में आयोजित एक महत्वपूर्ण राजकीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाणे शहर पुलिस आयुक्तालय के पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे को डेढ़ सौ दिवसीय ई-गवर्नेंस अभियान में उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

यह सम्मान ठाणे पुलिस आयुक्तालय द्वारा ई-गवर्नेंस प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता, त्वरित नागरिक सेवा और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक सक्षम और नागरिक-हितैषी बनाने के प्रयासों को देखते हुए प्रदान किया गया।

प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी नवाचार की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाणे पुलिस आयुक्तालय की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पुलिस प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ठाणे पुलिस ने कम समय में ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर राज्य के अन्य पुलिस आयुक्तालयों के लिए एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नागरिकों को त्वरित सेवा, ऑनलाइन शिकायत प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और स्मार्ट पुलिसिंग जैसे उपायों ने पुलिस प्रशासन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे की भूमिका अहम

ठाणे पुलिस आयुक्त आशुतोष डुंबरे के नेतृत्व में डेढ़ सौ दिवसीय ई-गवर्नेंस अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए, जिनमें —

ऑनलाइन नागरिक सेवा प्रणाली का विस्तार

डिजिटल शिकायत निवारण तंत्र

अपराध डेटा का स्मार्ट विश्लेषण

पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय

नागरिक-पुलिस संवाद को मजबूत बनाने की पहल

इन सभी प्रयासों के कारण ठाणे पुलिस आयुक्तालय ने प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी सुधारों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस अवसर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ठाणे पुलिस आयुक्तालय के कार्यों की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई, जिसे उपस्थित अधिकारियों ने सराहा।

प्रेरणादायक उपलब्धि

ठाणे पुलिस आयुक्तालय को मिला यह सम्मान न केवल विभाग के लिए गौरव की बात है, बल्कि राज्य के अन्य पुलिस आयुक्तालयों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से पुलिस प्रशासन को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।














NCB मुंबई के जोनल डायरेक्टर अमित घावते पर FIR — ड्रग केस आरोपी के पिता की आत्महत्या से मचा हड़कंप।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। नवी मुंबई के बिल्डर गुरुनाथ चिंचकर की आत्महत्या मामले में अदालत के निर्देश के बाद NCB मुंबई के जोनल डायरेक्टर अमित घावते के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, नवी मुंबई के बिल्डर गुरुनाथ चिंचकर ने 25 अप्रैल 2025 को अपने कार्यालय में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर NCB और कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न और दबाव का आरोप लगाया था।

परिवार के अनुसार, चिंचकर पिछले कुछ समय से काफी तनाव में थे और जांच एजेंसियों द्वारा लगातार पूछताछ से परेशान थे।

बेटे पर ड्रग सिंडिकेट चलाने का आरोप

बताया गया कि गुरुनाथ चिंचकर के बेटे नवीन चिंचकर पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप थे। इसी मामले में NCB जांच कर रही थी। जांच के दौरान बार-बार पूछताछ, दबाव और कथित कार्रवाई की आशंका के कारण चिंचकर मानसिक तनाव में आ गए थे।

परिवार ने आरोप लगाया कि एजेंसियों के दबाव के कारण ही उन्होंने यह कदम उठाया।

कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज

मामले में परिवार द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बाद अदालत ने पुलिस को जांच के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद अब अमित घावते के खिलाफ निम्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है:

आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide)

आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)

जबरन वसूली (Extortion)

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस घटनाक्रम के बाद एंटी-ड्रग एजेंसी की जांच प्रक्रिया और पूछताछ के तरीकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय करने वाला महत्वपूर्ण केस साबित हो सकता है।

फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हुई हैं और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

🚨 यह मामला अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।














शिकायत के बाद उल्हासनगर-3 के खत्री भवन में भीषण आग — नशेड़ियों की गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल, पहले ही दी गई थी पुलिस को चेतावनी।


 

उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प‑3 खत्री भवन में देर रात लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। आग इतनी भयंकर थी कि एक जीन्स निर्माण कंपनी पूरी तरह जलकर खाक हो गई। फैक्ट्री में रखा तैयार माल, मशीनरी और अन्य सामान पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। घटना के समय फैक्ट्री बंद थी, जिसके चलते किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले ही दी गई थी पुलिस को चेतावनी

गौरतलब है कि गुरु गुलराज साहेब मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले ही ओ.टी. सेक्शन में बढ़ती नशेड़ियों की गतिविधियों को लेकर उप पुलिस आयुक्त (DCP) ज़ोन-4 को लिखित शिकायत सौंपी थी।

दिनांक 24 मार्च 2026 को भेजी गई इस शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि क्षेत्र में नशेड़ियों का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है और वे सुनसान जगहों पर नशा करने के साथ-साथ कचरे में आग लगाने जैसी खतरनाक गतिविधियां भी कर रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इन गतिविधियों से आसपास की फैक्ट्रियों, दुकानों और घरों को आग लगने का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों ने जताई गंभीर आशंका

स्थानीय व्यापारियों, नागरिकों और सूत्रों के अनुसार, जिस जीन्स कंपनी में आग लगी, उसके आसपास रोजाना रात के समय कुछ नशेड़ी जमा होकर नशा करते थे। कई बार इन लोगों द्वारा कचरा जलाने और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं भी सामने आई थीं।

निवासियों का कहना है कि शिकायत के बाद यदि नशेड़ियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आग की घटना को उनकी नाराजगी या लापरवाही का परिणाम मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

शिकायत में बताए गए प्रभावित क्षेत्र

गुरु गुलराज साहेब मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में जिन क्षेत्रों को अत्यधिक प्रभावित बताया था, उनमें शामिल हैं:

किरपी सोसायटी

खत्री भवन क्षेत्र

केके इंडस्ट्रियल एस्टेट

फ्लाईओवर के नीचे का इलाका

पिंटो पार्क क्षेत्र

पहलूमल कंपाउंड

मुरलीधर कंपाउंड

संतोष नगर

इन इलाकों में रहने वाले लोगों ने लंबे समय से नशेड़ियों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी।

जांच शुरू, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे

पुलिस और दमकल विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का जल्द खुलासा किया जाएगा।

व्यापारियों में रोष, सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों में रोष का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:

क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए

नशेड़ियों और ड्रग डीलरों पर सख्त कार्रवाई की जाए

औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर उल्हासनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती नशे की समस्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो शायद इतनी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकता था।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।














समीर वानखेड़े को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत — Cordelia Cruise केस में बड़ी खबर।


न्यू दिल्ली: दिनेश मिरचंदानी

पूर्व NCB अधिकारी Sameer Wankhede को Supreme Court of India से Cordelia Cruise ड्रग्स मामले में अंतरिम राहत मिल गई है।

क्या हुआ अदालत में

सुप्रीम कोर्ट ने वानखेड़े के खिलाफ विभागीय जांच पर रोक लगा दी है (अंतरिम राहत)

कोर्ट ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को नोटिस जारी किया

मामले की अगली सुनवाई तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया

वानखेड़े ने दलील दी कि उनके खिलाफ जांच एक ही आरोपों पर बार-बार की जा रही है

मामला क्या है

यह मामला 2021 Cordelia Cruise ड्रग्स केस से जुड़ा है

इसी केस में Aryan Khan, बेटे Shah Rukh Khan को गिरफ्तार किया गया था

बाद में SIT ने आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी

वानखेड़े पर आरोप लगा कि 25 करोड़ रुपये रिश्वत मांगने की साजिश हुई थी

इस मामले में CBI और विभागीय जांच चल रही है 

सुप्रीम कोर्ट का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

पहले यह तय करना जरूरी है कि एक ही आरोप पर दो-दो जांच हो सकती है या नहीं

इसलिए फिलहाल वानखेड़े को अंतरिम राहत दी गई

इसका मतलब

👉 वानखेड़े को फिलहाल बड़ी राहत

👉 जांच पूरी तरह बंद नहीं — लेकिन कार्रवाई रुकी

👉 अगली सुनवाई में फैसला तय करेगा कि जांच जारी रहेगी या नहीं













उल्हासनगर TDR घोटाला: महाराष्ट्र राज्य में हड़कंप, मुख्य सचिव की बैठक में कड़े फैसले — खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक।


 



उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर में उजागर हुए बहुचर्चित TDR (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) घोटाले ने महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें व्यापक जांच के आदेश दिए गए और कई अहम निर्णय लिए गए।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए TDR से जुड़े सभी खरीद-बिक्री लेनदेन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत ऑडिट जांच कराने, संबंधित दस्तावेजों की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं।

सरकार ने इस पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए साफ किया है कि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने शहर में अब तक हुए सभी TDR लेनदेन की गहन जांच शुरू कर दी है, जिससे पूरे घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद है।

📌 सरकार के सख्त फैसले

TDR खरीद-बिक्री पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध

पूरे मामले की व्यापक ऑडिट जांच के आदेश

दोषी अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई

सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच

💻 डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

मुंबई महानगरपालिका की तर्ज पर अब उल्हासनगर में भी TDR से जुड़ी संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाएगी। नगर निगम को निर्देश दिए गए हैं कि अगले 10 दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

🗣️ राजनीतिक प्रतिक्रिया: दबाव और साजिश के आरोप

प्रहार जनशक्ति पार्टी के ठाणे जिलाध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल पाटील ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस घोटाले को उजागर करने के दौरान उन पर भारी दबाव बनाया गया और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा,
"सरकार द्वारा जांच के आदेश देना सच्चाई की जीत की शुरुआत है। जब तक इस घोटाले के हर दोषी पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"

📊 🔍 जांच में सामने आए प्रारंभिक संकेत

• TDR नंबर 14 —  गौरव राजेश गेमनानी के नाम दर्ज

• TDR नंबर 17 —  राजेश जवाहरलाल गेमनानी के नाम दर्ज

• TDR नंबर 18 —  सुरेश गुरलदास थदानी के नाम दर्ज

⚠️ प्रमुख निष्कर्ष:

• कई जगहों पर अनियमितताओं के ठोस संकेत मिले हैं
• करोड़ों रुपये के संभावित घोटाले की आशंका जताई जा रही है
• परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी और निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन सामने आया है

🔍 आगे क्या?

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले से जुड़े नए नाम और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर तेज हलचल के बीच यह मामला राज्य की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

👉 निष्कर्ष

उल्हासनगर का TDR घोटाला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी विकास योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस मामले का प्रभाव व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर देखने को मिल सकता है।























आर्यन खान ड्रग्स केस: ₹25 करोड़ रिश्वत आरोपों पर समीर वानखेड़े का बड़ा बयान, बॉम्बे हाईकोर्ट में दी सफाई।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई में चर्चित आर्यन खान ड्रग्स केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने अपने ऊपर लगे रिश्वत के गंभीर आरोपों पर पहली बार खुलकर जवाब दिया है।

समीर वानखेड़े ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान से उनके बेटे आर्यन खान को बचाने के लिए किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग नहीं की थी। उन्होंने इन आरोपों को “पूरी तरह से बेबुनियाद और मनगढ़ंत” बताया है।

🔍 मामले की पृष्ठभूमि:

यह मामला अक्टूबर 2021 में सामने आया था, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने मुंबई के पास एक क्रूज जहाज पर कथित ड्रग्स पार्टी की सूचना के आधार पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान आर्यन खान सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।

यह मामला कुछ ही घंटों में राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया और लंबे समय तक मीडिया, राजनीति और फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का केंद्र बना रहा।

💰 ₹25 करोड़ डील का आरोप:

बाद में इस केस में बड़ा मोड़ तब आया, जब आरोप लगाया गया कि आर्यन खान को राहत देने के बदले करीब ₹25 करोड़ की रिश्वत मांगी गई थी।

इसी आधार पर मई 2023 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने समीर वानखेड़े और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोपों में मामला दर्ज किया था।

⚖️ अदालत में वानखेड़े का पक्ष:

अब इस मामले में नई कानूनी हलचल के बीच, वानखेड़े की ओर से अदालत में पेश दलीलों में कहा गया है कि:

जांच एजेंसी के पास रिश्वत मांगने या लेने का कोई ठोस सबूत नहीं है

पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई थी

उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत आधार पर प्रेरित हैं

📌 मामले की वर्तमान स्थिति:

इस बयान के बाद एक बार फिर यह हाई-प्रोफाइल केस चर्चा में आ गया है। अब सबकी नजरें बॉम्बे हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। 

👉 यह मामला न सिर्फ कानून और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में आरोप और सच्चाई के बीच की दूरी कितनी जटिल हो सकती है।














अवैध बांग्लादेशी कारीगरों का मुद्दा गरमाया: उल्हासनगर के सराफा बाजारों में काम करने का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल..!


ल्हासनगर:  दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-2 के प्रसिद्ध सिरू चौक स्थित सोनार गली और जवेरी बाजार में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी कारीगरों के काम करने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन बाजारों में बड़ी संख्या में बाहरी कारीगर सक्रिय हैं, जिनकी वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, इन कारीगरों की पहचान और दस्तावेजों की जांच को लेकर अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह सुरक्षा और रोजगार दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

इस बीच, उल्हासनगर की कई सामाजिक संस्थाएं और समाजसेवक इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही भाजपा के पूर्व सांसद Kirit Somaiya को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं।

सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और यदि अवैध रूप से रह रहे कारीगर पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।