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मुंबई में फिरौती रैकेट का भंडाफोड़: “लॉरेंस बिश्नोई गैंग” के नाम पर ज्वेलर्स से 20 लाख की मांग, चार आरोपी गिरफ्तार।


 






मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

मुंबई पुलिस ने विलेपार्ले के एक ज्वेलर्स कारोबारी से खुद को “Lawrence Bishnoi Gang” का सदस्य बताकर फिरौती मांगने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों को कुर्ला स्थित Lokmanya Tilak Terminus से 5 लाख रुपये नकद के साथ दबोचा गया।

इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिवक्ता आशीष राय, पंकज मिश्रा और प्राची पाण्डेय आरोपियों की पैरवी कर रहे हैं। आरोपियों को तीसरी बार 21 फरवरी को अंधेरी न्यायालय में पुनः पुलिस रिमांड के लिए पेश किया जाएगा।

ऐसे रची गई फिरौती की साजिश

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता अजित सोहनलाल जैन (46) विलेपार्ले पूर्व में ज्वेलरी शॉप चलाते हैं।
उन्हें 12 फरवरी 2026 से व्हॉट्सऐप पर धमकी भरे संदेश मिलने शुरू हुए।

संदेश भेजने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताया

20 लाख रुपये की मांग की गई

रकम नहीं देने पर गोली मारने की धमकी दी गई

बाद में बातचीत के बाद रकम 5 लाख रुपये पर तय हुई।

लगातार कॉल और कुर्ला में डिलीवरी का निर्देश

15 और 16 फरवरी को आरोपियों ने लगातार कॉल और संदेश भेजकर पैसे तैयार रखने को कहा।
16 फरवरी को दोपहर 2 बजे रकम Lokmanya Tilak Terminus पहुंचाने का निर्देश दिया गया।

कारोबारी ने अपने कर्मचारियों 

मनीष परिहार (30) और अशोक त्रिवेदी (32) — को 5 लाख रुपये बैग में देकर पार्किंग परिसर स्थित हल्दीराम रेस्टोरेंट के पास खड़ा रहने को कहा।

“लालपरी” था कोड वर्ड

शाम लगभग 4:30 बजे कॉलर ने बताया कि उसका व्यक्ति “लालपरी” कोड वर्ड बोलेगा।
कुछ देर बाद चार संदिग्ध युवक पहुंचे। टोह लेने के बाद दो युवकों ने कोड वर्ड बोला और बैग लेकर आगे बढ़ गए।

200 मीटर पीछा कर दबोचे गए

पहले से सादी वर्दी में तैनात पुलिस टीम ने आरोपियों का लगभग 200 मीटर पीछा किया और उन्हें ऑटो में बैठकर भागने की कोशिश करते समय पकड़ लिया।

तलाशी में बरामद हुआ:

₹5 लाख नकद

कई मोबाइल फोन

एक सोने रंग का मोबाइल हैंडसेट

गिरफ्तार आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान:

दीपक नरेंद्र डंगोल (19), निवासी पुणे

माजिद साजिद खान (21), निवासी गोवंडी, मुंबई

फैजान फिरोज खान (27), निवासी पुणे

साहिल इलियाज शेख (20), निवासी गोवंडी, मुंबई

पूछताछ में आरोपियों ने इम्तियाज और वशीर नामक व्यक्तियों के कहने पर रकम लेने की बात कबूल की है।

आगे की जांच जारी

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच के तहत:

मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं

अंतरराज्यीय लिंक की जांच की जा रही है

मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश जारी है

मुंबई पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध के नाम पर डर पैदा कर फिरौती वसूलने की ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।




















डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान हेतु ऐतिहासिक नामांकन।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी 

महाराष्ट्र सहित पूरे देश के लिए गर्व का विषय है कि प्रतिष्ठित श्रमिक नेता एवं दूरदर्शी सामाजिक सुधारक डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर की तीन प्रमुख रिकॉर्ड संस्थाओं द्वारा सम्मान हेतु आधिकारिक रूप से नामांकित किया गया है।

उन्हें निम्नलिखित प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा “प्रतिष्ठित श्रमिक नेता एवं दूरदर्शी सामाजिक सुधारक” श्रेणी में नामांकन प्राप्त हुआ है—

United Nations Book of World Records (UNBWR)

Asian Book of World Records

Bharat Book of World Records

यह नामांकन उनके बहुआयामी सामाजिक योगदान, सशक्त नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक स्वीकार है।

36 वर्ष की आयु में असाधारण उपलब्धि

सिर्फ 36 वर्ष की आयु में डॉ. घाडगे ने भारत के विभिन्न राज्यों में 40 से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों का सफल नेतृत्व एवं समन्वय किया है। ये सभी यूनियनें भारत सरकार के ट्रेड यूनियन अधिनियम के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत हैं।

उनके नेतृत्व में श्रमिक अधिकारों को सुदृढ़ करने, कामगारों को कानूनी एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तथा पारदर्शी और नैतिक प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए गए हैं। श्रमिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर उन्होंने संवाद, संगठन और संघर्ष के माध्यम से श्रम क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भूमिका

ट्रेड यूनियन गतिविधियों के अतिरिक्त, डॉ. घाडगे ने पशु कल्याण, सामाजिक न्याय और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर निरंतर सक्रिय भागीदारी निभाई है।

उन्होंने नशा-मुक्ति अभियान, अपराध विरोधी जनजागरण और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ जनजागरूकता को मजबूत करने के लिए विभिन्न सामाजिक मंचों के माध्यम से आवाज उठाई है। उनका कार्य ईमानदारी-आधारित नेतृत्व, संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता के सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करता है।

राष्ट्रीय विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता

यह प्रतिष्ठित नामांकन डॉ. घाडगे की प्रगतिशील सोच, सामाजिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय विकास के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रमाण है। श्रमिक वर्ग के उत्थान के साथ-साथ समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के लिए उनके प्रयास उन्हें एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करते हैं।

आभार व्यक्त किया

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपने सहयोगियों, समर्थकों और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन सभी श्रमिक साथियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का है, जिन्होंने उनके साथ मिलकर संघर्ष और सेवा की राह पर कदम बढ़ाया।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे का यह नामांकन न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है, जो यह दर्शाता है कि समर्पण, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित की जा सकती है।














अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु, मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन ने जारी की सूचना।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3 द्वारा एक अज्ञात व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु को लेकर आधिकारिक सूचना जारी की गई है। यह मामला आकस्मिक मृत्यु प्रकरण क्रमांक 02/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह सूचना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के अंतर्गत दी है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 4 जनवरी 2026 को आपातकालीन सेवा 112 के माध्यम से मैक्सलाइफ हॉस्पिटल, शांतिनगर, उल्हासनगर-3 से सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे, जहां एक अज्ञात पुरुष व्यक्ति अचेत अवस्था में पाया गया। व्यक्ति के शरीर में किसी प्रकार की हलचल नहीं थी और वह गंदे कपड़े पहने हुए था।

उक्त व्यक्ति को तत्काल एम्बुलेंस की सहायता से उपचार के लिए मध्यवर्ती अस्पताल, उल्हासनगर-3 ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद शाम 5:05 बजे (17:05) उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक का हुलिया

पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 35 से 40 वर्ष के बीच बताई जा रही है। उसकी लंबाई करीब 6 फीट, शरीर मजबूत, रंग काला-सांवला और बाल काले हैं। मृतक की आंखें और जीभ बाहर निकली हुई तथा सूजी हुई पाई गईं। दांत सुरक्षित थे।

दाहिने हाथ की कोहनी के पास हरी पट्टी बंधी हुई थी, जबकि दाहिने पैर के घुटने, पिंडली और पंजे के पास पट्टियों के निशान पाए गए। मृतक ने नीले-काले रंग की गंदी टी-शर्ट (सफेद आड़ी धारियों वाली) और लाल बॉर्डर वाली काली ट्रैक पैंट पहन रखी थी। उसके माथे के दाहिने हिस्से पर एक दाग था, जहां की त्वचा उखड़ी हुई पाई गई। शरीर पर किसी प्रकार का टैटू या अन्य पहचान चिन्ह नहीं मिला।

बीमारी से मौत की आशंका

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि व्यक्ति की मृत्यु शारीरिक बीमारी के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, मामले की आगे की जांच जारी है।

नागरिकों से अपील

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को इस अज्ञात मृतक के रिश्तेदारों या पहचान से संबंधित कोई भी जानकारी हो, तो वे तुरंत मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3, जिला ठाणे से संपर्क करें।
संपर्क नंबर: 0251-2706900
एपीआई दिपाली अंकुश वाघ
मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन,
9011977567

पुलिस का कहना है कि मृतक की पहचान होने से उसके परिजनों को सूचित किया जा सकेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।



















सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: समीर वानखेड़े के प्रमोशन में हस्तक्षेप से इनकार, केंद्र की याचिका खारिज।


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी 

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी समीर वानखेड़े की पदोन्नति से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल (CAT) के फैसले को सही ठहराया गया था।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अलोक अराड़े की पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं के जरिए अगस्त 2025 में आए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें CAT के निर्णय को वैध माना गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाओं की खारिजी का किसी अन्य लंबित या भविष्य की कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में CAT के दिसंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा था। CAT ने अपने आदेश में कहा था कि यदि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने समीर वानखेड़े के नाम की अनुशंसा की है, तो उन्हें 1 जनवरी 2021 से अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) के पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए।

केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि वानखेड़े के खिलाफ कई मामले लंबित हैं, जिनमें CBI में दर्ज FIR, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के तहत ECIR, और संभावित चार्जशीट शामिल हैं। इसी आधार पर उनकी पदोन्नति रोकी गई थी। हालांकि, CAT और दिल्ली हाई कोर्ट दोनों ने यह स्पष्ट किया कि अब तक न तो कोई चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही कोई औपचारिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है, ऐसे में प्रमोशन रोकने का कोई वैध आधार नहीं बनता।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से समीर वानखेड़े की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है और यह निर्णय सेवा मामलों में लंबित जांच के आधार पर प्रमोशन रोकने की नीति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।












नांदेड में ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के 350वें शहीदी समागम को लेकर सिंधी समाज की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न।


नांदेड: दिनेश मीरचंदानी

‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के 350वें शहीदी समागम के भव्य आयोजन को लेकर नांदेड में तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। आगामी 24 और 25 जनवरी 2026 को नांदेड में आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक शहीदी समागम की पृष्ठभूमि में नांदेड के सिंधी समाज की एक अहम और मार्गदर्शक बैठक सम्पन्न हुई।

इस बैठक में मुख्यमंत्री सहायता निधि कक्ष के कार्यकारी अधिकारी डॉ. जगदीश सकवान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ समाज के अनेक प्रतिष्ठित और सक्रिय पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए, जिनमें श्री सतीश मुलचंद नेहलानी, श्री प्रकाश नेहलानी, श्री रेवाचंद नाथानी, श्री नंदू धनवानी, श्री मुकेश रंगनानी, श्री हरीश लालवानी, श्री गणेश बिडवई, सौ. सिमरन प्रेमचंदानी, काव्या प्रेमचंदानी, सौ. सोनी आलमचंदानी, श्रीमती लालवानी मैडम सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।

बैठक में बताया गया कि इस शहीदी समागम में देशभर से सिंधी समाज सहित विभिन्न समुदायों के श्रद्धालु और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग लेने वाले हैं। इसी उद्देश्य से नांदेड जिले के प्रमुख सिंधी समाजबांधवों की यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा, व्यवस्थाएं, आवास, यातायात, अनुशासन और समाज की सक्रिय सहभागिता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहेब के अद्वितीय त्याग, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु दिए गए सर्वोच्च बलिदान और मानवता के लिए उनके ऐतिहासिक योगदान को जन-जन तक पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, अधिक से अधिक संख्या में समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जनजागरण, आपसी समन्वय और संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर सभी समाजघटकों से एकजुट होकर इस ऐतिहासिक शहीदी समागम को भव्य, अनुशासित और ऐतिहासिक बनाने की अपील की गई, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक गुरु तेग बहादुर साहेब के बलिदान, साहस और धर्मरक्षा की प्रेरणा पहुँच सके।

उल्लेखनीय है कि इस शहीदी समागम में सिख, सिकलीगर, बंजारा, लबाना, सिंधी, मोहयाल, वाल्मीकी, उदासीन एवं भगत नामदेव (वारकरी) संप्रदाय सहित विभिन्न समाज और समुदाय बड़े पैमाने पर शामिल होने जा रहे हैं, जिससे यह आयोजन सामाजिक एकता, धार्मिक सौहार्द और ऐतिहासिक चेतना का एक भव्य प्रतीक बनने जा रहा है।













दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक बरकरार, केंद्र की याचिका खारिज।


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें वानखेड़े के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक जांच (डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी) पर रोक लगाई गई थी।

सोमवार को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल CAT के आदेश में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह समीर वानखेड़े द्वारा दायर याचिका का निपटारा 14 जनवरी तक या उसके बाद 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर करे।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2021 के चर्चित आर्यन खान ड्रग्स केस से जुड़ा हुआ है। समीर वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2022 में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से हटाए जाने के बावजूद, एजेंसी के एक कानूनी सलाहकार से गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि वानखेड़े को जनवरी 2022 में NCB से हटा दिया गया था।

इन आरोपों के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से उनके खिलाफ चार्ज मेमो जारी किया गया था, जिसे वानखेड़े ने CAT में चुनौती दी थी।

27 अगस्त को CAT ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह वानखेड़े के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाए। इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।

अदालत का रुख

उच्च न्यायालय ने केंद्र की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि CAT के आदेश को फिलहाल कायम रखा जाएगा। अदालत के इस फैसले को वानखेड़े के लिए एक अहम कानूनी राहत माना जा रहा है।

कौन हैं समीर वानखेड़े?

समीर वानखेड़े पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के मुंबई जोनल डायरेक्टर रह चुके हैं। वे वर्ष 2021 में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद देशभर में चर्चा का विषय बने थे।

इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें CAT पर टिकी हैं, जहां आने वाले दिनों में वानखेड़े के मामले पर अंतिम फैसला आने की संभावना है।













उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘तीर-कमान और टीवी’ वाली अपील से पैनल नंबर 9 में सियासी उलझन, मतदाताओं के सामने बड़ा सवाल..??


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी 

उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव 2026 में अब सियासी तस्वीर और भी जटिल होती जा रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया बयान ने पैनल नंबर 9 को चुनाव का सबसे हाई-वोल्टेज पैनल बना दिया है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने मतदाताओं से गठबंधन को मजबूत करने के लिए ‘तीर-कमान’ (शिवसेना) और ‘टीवी’ (साई पार्टी) चुनाव चिन्हों को वोट देने की खुली अपील की।

उपमुख्यमंत्री की इस अपील के बाद पैनल नंबर 9 के मतदाताओं के बीच भ्रम और असमंजस की स्थिति और गहरी हो गई है।

उपमुख्यमंत्री की अपील बनाम जमीनी सियासत

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मंच से एकता और गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया, लेकिन पैनल नंबर 9 की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

इसी पैनल में श्रीमती कविता मनोज लस्सी (शिवसेना / TOK समर्थित)

और श्रीमती आशा जीवन इदनानी (साई पार्टी – ‘टीवी’ चुनाव चिन्ह)

दोनों ही एक ही सीट पर आमने-सामने हैं।

मतदाताओं के सामने धर्मसंकट

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि

जब उपमुख्यमंत्री दोनों चुनाव चिन्हों को जिताने की अपील कर रहे हैं, तो पैनल 9 का मतदाता किसे वोट दे?

एक ओर शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार

दूसरी ओर गठबंधन की ही साई पार्टी की आधिकारिक प्रत्याशी

यही टकराव मतदाताओं को दो हिस्सों में बांटता नजर आ रहा है।

वोटों के बिखराव का खतरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री शिंदे का बयान भले ही गठबंधन को एकजुट करने के उद्देश्य से दिया गया हो, लेकिन पैनल नंबर 9 में यह बयान “दुधारी तलवार” बन गया है।

यदि वोट ‘टीवी’ चिन्ह को जाते हैं, तो साई पार्टी को सीधा फायदा होगा।

यदि वोट शिवसेना/TOK समर्थित उम्मीदवार को मिलते हैं, तो गठबंधन का दूसरा घटक कमजोर पड़ सकता है।

इस आपसी खींचतान का सीधा लाभ भाजपा की प्रत्याशी दीपा नारायण पंजाबी को मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि गठबंधन के वोटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है।

गली-मोहल्लों में चर्चा तेज

पैनल नंबर 9 की गलियों में एक ही सवाल गूंज रहा है—

“जब बड़े नेता एकता की बात कर रहे हैं, तो स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार पीछे हटने को तैयार क्यों नहीं?”

उपमुख्यमंत्री की अपील से कार्यकर्ताओं में जोश तो बढ़ा है, लेकिन इस पैनल में असमंजस और सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है।

निष्कर्ष

पैनल नंबर 9 अब केवल एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संदेश, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

अब देखना यह होगा कि मतदाता ‘तीर-कमान’ पर भरोसा जताते हैं, ‘टीवी’ को चुनते हैं, या फिर इस आपसी फूट का फायदा भाजपा उठाने में सफल होती है

📌 उल्हासनगर चुनाव की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।