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ट्रेड लाइसेंस पर उल्हासनगर के व्यापारियों का विरोध, मुख्यमंत्री फडणवीस और आयुक्त आवहाले से हस्तक्षेप की मांग।


 


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य ट्रेड लाइसेंस की प्रक्रिया को लेकर व्यापारी वर्ग की ओर से अब सरकार और महानगरपालिका प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। व्यापारियों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आवहाले, IAS से अपील करते हुए ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्य प्रक्रिया को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित रखने का अनुरोध किया है।

व्यापारी वर्ग का कहना है कि इस मामले में कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्टता आवश्यक है। इसी संदर्भ में ‘चेंबर ऑफ एसोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड’ (CAMIT) द्वारा महाराष्ट्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए गए ज्ञापन का भी हवाला दिया गया है।

MMC अधिनियम के प्रावधानों का दिया गया हवाला

व्यापारियों की ओर से कहा गया है कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉरपोरेशन अधिनियम, 1949 के संबंधित प्रावधानों, विशेष रूप से धारा 370 (376) तथा अनुसूची ‘D’ (Schedule D) में निर्दिष्ट व्यवसायों के संदर्भ में ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता को समझा जाना चाहिए।

व्यापारी वर्ग का तर्क है कि जब तक इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार की ओर से अंतिम एवं स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, तब तक सभी प्रकार के व्यापार एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक समान रूप से अनिवार्य ट्रेड लाइसेंस लागू करने की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

दंडात्मक कार्रवाई रोकने की मांग

व्यापारियों ने विशेष रूप से अनुरोध किया है कि जब तक सरकार इस विषय पर अंतिम निर्णय या दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तब तक धारा 370 (376) के दायरे में स्पष्ट रूप से नहीं आने वाले व्यापारियों के खिलाफ ट्रेड लाइसेंस के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई, जुर्माना अथवा अन्य कठोर कदम नहीं उठाए जाएं।

व्यापारी वर्ग का कहना है कि वह कानून और प्रशासन का सम्मान करता है तथा महानगरपालिका के साथ सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अंतिम कानूनी एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होने तक व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक और प्रशासनिक परेशानी से बचाया जाना चाहिए।

सरकार और मनपा प्रशासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

व्यापारी समुदाय ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मनपा आयुक्त मनीषा आवहाले से इस पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने तथा सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश आने तक ट्रेड लाइसेंस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित रखने की मांग की है।

अब इस मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार और उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से क्या भूमिका सामने आती है, इस पर व्यापारी वर्ग की नजर बनी हुई है। यदि सरकार की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होते हैं, तो उससे उल्हासनगर के हजारों व्यापारियों के लिए स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।




















खारघर शराब जब्ती से उठे बड़े सवाल: वाहन, गोदाम और डिस्पैच रिकॉर्ड की जांच कहां तक पहुंची?


 


खारघर/नवी मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

जनवरी 2026 में खारघर में महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग द्वारा की गई शराब जब्ती की कार्रवाई के बाद अब जांच के दायरे को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान एक वाहन से कथित तौर पर बिना वैध परिवहन दस्तावेजों के शराब के दो कार्टन सहित विदेशी शराब जब्त किए जाने और वाहन चालक को गिरफ्तार किए जाने का उल्लेख है।

हालांकि, दस्तावेजों में सामने आने वाली वाहन, लाइसेंस, गोदाम और परिवहन संबंधी जानकारियों को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच केवल वाहन चालक तक सीमित रही, या फिर माल के स्रोत से लेकर उसके डिस्पैच और विभिन्न डिलीवरी पॉइंट्स तक पूरी सप्लाई चेन की भी पड़ताल की गई?

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर बालाजी एंटरप्रायझेस, उसके लाइसेंस धारक, प्रबंधक, कर्मचारियों या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी सिद्ध नहीं हुई है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जांच से जुड़े सवालों को सामने रखना है।

3 जनवरी को खारघर में हुई थी कार्रवाई

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 3 जनवरी 2026 को पनवेल शहर प्रभाग-2 के महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क अधिकारियों ने खारघर के सेक्टर-6 क्षेत्र में गोल्ड कॉइन वाइन मार्ट के पास एक अशोक लेलैंड वाहन को रोका था।

दस्तावेजों में जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब ₹7.94 लाख बताई गई है। जब्त सामग्री में ब्लेंडर्स प्राइड, रॉयल स्टैग और इंपीरियल ब्लू जैसे ब्रांड के लेबल वाली बोतलों का उल्लेख मिलता है।

मौके पर किए गए प्रारंभिक फील्ड टेस्ट में अल्कोहल की रीडिंग करीब 30 प्रतिशत दर्ज होने की बात सामने आती है, जबकि संबंधित उत्पाद के लेबल पर करीब 42.8 प्रतिशत ABV का उल्लेख बताया गया है।

हालांकि, फील्ड टेस्ट के इस अंतर के आधार पर शराब को तत्काल "जहरीली" या निश्चित रूप से "मिलावटी" घोषित करना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। इसकी वास्तविक प्रकृति और गुणवत्ता का अंतिम निष्कर्ष अधिकृत प्रयोगशाला की केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकता है।

वाहन से बालाजी एंटरप्रायझेस तक जुड़ती दस्तावेजी कड़ी

इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू जब्त वाहन MH-05-FJ-8234 से जुड़ी जानकारी है। उपलब्ध दस्तावेजों में यह वाहन मेसर्स बालाजी एंटरप्रायझेस के नाम पर पंजीकृत बताया गया है।

इसके साथ ही दस्तावेजों में FL-1 लाइसेंस क्रमांक 140 तथा भिवंडी तालुका के कोनगांव स्थित बॉन्डेड वेयरहाउस का संदर्भ भी सामने आता है। परिवहन दस्तावेजों में F.L. 1-A पास और बालाजी एंटरप्रायझेस से संबंधित चालान का उल्लेख होने की बात कही गई है।

यदि ये दस्तावेज पूर्ण और प्रामाणिक पाए जाते हैं, तो जांच के लिहाज से यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है कि वाहन में मौजूद प्रत्येक कार्टन किस स्रोत से आया था और उसका अधिकृत रिकॉर्ड क्या था।

दो कार्टन को लेकर सबसे बड़ा सवाल

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वाहन में मौजूद दो कार्टन के संबंध में वैध ट्रांसपोर्ट पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आती है।

यहीं से जांच का महत्वपूर्ण प्रश्न शुरू होता है—

इन कार्टनों को वाहन में किसने लोड किया?

क्या यह माल अधिकृत डिस्पैच प्रक्रिया का हिस्सा था?
क्या किसी कर्मचारी या सुपरवाइजर ने इसे लोड कराया?
क्या चालक को इसकी जानकारी थी?
क्या गोदाम के स्टॉक रजिस्टर में इसका कोई रिकॉर्ड था?
क्या संबंधित कार्टनों का चालान या परिवहन पास जारी हुआ था?

इन सवालों का उत्तर गोदाम के लोडिंग रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड, डिस्पैच रजिस्टर, चालान, परिवहन पास, कर्मचारियों के बयान और उपलब्ध CCTV फुटेज के मिलान से ही स्पष्ट हो सकता है।

सुबह 5:05 बजे डिस्पैच का रिकॉर्ड क्या कहता है?

चालक के उपलब्ध बयान में कथित तौर पर गोदाम प्रबंधक के रूप में उल्लेखित राहुल सपकाळे द्वारा 2 जनवरी की रात फोन कर वाहन रवाना करने के निर्देश दिए जाने की बात दर्ज है।

बयान के अनुसार, वाहन 3 जनवरी की सुबह लगभग 5:05 बजे कोनगांव से रवाना हुआ।

इससे एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं नियामक प्रश्न सामने आता है—यदि उस समय शराब का स्टॉक डिस्पैच करने पर लाइसेंस की शर्तों के तहत कोई समय संबंधी प्रतिबंध था, तो उस समय माल रवाना करने की अनुमति किसके स्तर से दी गई थी और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है?

यह सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि लाइसेंस की शर्तों, गोदाम के अधिकृत कार्य समय और उस दिन के वास्तविक डिस्पैच रिकॉर्ड के बीच मिलान करने के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या कोनगांव गोदाम की जांच हुई?

जांच के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक कोनगांव स्थित बॉन्डेड वेयरहाउस है।

यदि जब्त वाहन और परिवहन दस्तावेजों की कड़ी इस गोदाम तक पहुंचती है, तो जांच के तहत निम्न पहलुओं का सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है—

उस दिन का पूरा स्टॉक रिकॉर्ड

स्टॉक का भौतिक सत्यापन

माल की आवक-जावक का विवरण

डिस्पैच रजिस्टर

लोडिंग रिकॉर्ड

संबंधित चालान एवं ट्रांसपोर्ट पास

उस समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की जानकारी

वाहन की एंट्री और एग्जिट रिकॉर्ड

CCTV/DVR/NVR रिकॉर्ड

अन्य वाहनों के डिस्पैच का विवरण


यदि यह जांच पहले ही की जा चुकी है, तो उसके निष्कर्ष आधिकारिक केस रिकॉर्ड या विभागीय दस्तावेजों से स्पष्ट हो सकते हैं।

CCTV फुटेज का सवाल भी महत्वपूर्ण

उपलब्ध सामग्री के अनुसार, 5 मार्च को एक गोदाम सुपरवाइजर के बयान में संबंधित अवधि की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, फुटेज उपलब्ध न होना अपने आप में सबूत नष्ट किए जाने का प्रमाण नहीं है। तकनीकी खराबी, सीमित स्टोरेज, ऑटोमैटिक ओवरराइटिंग या अन्य तकनीकी कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं।

फिर भी जांच के लिहाज से यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि—

घटना के दिन कैमरे काम कर रहे थे या नहीं?

DVR/NVR में रिकॉर्डिंग कितने दिनों तक सुरक्षित रहती थी?

संबंधित अवधि की रिकॉर्डिंग ऑटोमैटिक ओवरराइट हुई थी या नहीं?

DVR/NVR की तकनीकी जांच हुई या नहीं?

किसी डिजिटल फॉरेंसिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया या नहीं?


यदि माल लोड करने की प्रक्रिया का CCTV रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो अन्य दस्तावेजी एवं डिजिटल साक्ष्यों का महत्व और बढ़ जाता है।

खारघर से पहले की डिलीवरी भी जांच का हिस्सा बन सकती है

चालक के उपलब्ध बयान के अनुसार, वाहन खारघर पहुंचने से पहले कई शराब दुकानों पर गया था।

बताई गई समय-सारिणी के अनुसार वाहन ने कथित तौर पर घनसोली, कोपरखैरणे, नेरुल और बेलापुर क्षेत्र में कई डिलीवरी कीं और बाद में खारघर स्थित गोल्ड कॉइन वाइन मार्ट पहुंचा।

यदि यह समय-सारिणी आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होती है, तो इन सभी डिलीवरी पॉइंट्स के दस्तावेजों का मिलान जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।

मसलन—

संबंधित दुकानों के चालान

ट्रांसपोर्ट पास

बैच नंबर

स्टॉक रजिस्टर

संबंधित शराब का स्टॉक

डिलीवरी का समय

वाहन की आवाजाही

दुकानदारों एवं कर्मचारियों के बयान


इनका मिलान करने से यह स्पष्ट हो सकता है कि जब्त माल किसी बड़े कंसाइनमेंट का हिस्सा था या अलग से वाहन में आया था।

FL-1 लाइसेंस नंबर 140 की स्थिति पर भी सवाल

दस्तावेजों में FL-1 लाइसेंस नंबर 140 का संदर्भ होने के कारण इस लाइसेंस की विभागीय स्थिति भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है।

यदि जांच में लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठान से संबंधित किसी माल के अनधिकृत परिवहन, दस्तावेजी अनियमितता या लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो आपराधिक जांच के अलावा विभागीय और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई का प्रश्न भी सामने आ सकता है।

इसलिए यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि—

क्या लाइसेंस की विभागीय समीक्षा की गई?
क्या गोदाम का निरीक्षण हुआ?
क्या स्टॉक का पूर्ण मिलान कराया गया?
क्या लाइसेंस धारक अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए?

इन प्रश्नों के उत्तर आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकते हैं।

महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 का पहलू

इस मामले में महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 से संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार हुआ या नहीं, यह भी जांच का विषय हो सकता है।

हालांकि, किसी कर्मचारी या एजेंट के कथित कृत्य के आधार पर लाइसेंस धारक को स्वतः दोषी नहीं माना जा सकता। इसके लिए कानून में निर्धारित आवश्यक शर्तों, संबंधित व्यक्ति की भूमिका, नियंत्रण एवं जानकारी तथा उपलब्ध वैधानिक बचावों का परीक्षण आवश्यक होता है।

इसलिए इस मामले में धारा 79 सहित अन्य संभावित कानूनी प्रावधानों का प्रयोग हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड और अभियोजन दस्तावेजों से ही की जानी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य: अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट

इस पूरे मामले में वैज्ञानिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट हो सकती है।

फील्ड टेस्ट में अल्कोहल की रीडिंग और लेबल पर दर्ज ABV में अंतर दिखाई देना अपने आप में अंतिम निष्कर्ष नहीं है। प्रयोगशाला परीक्षण से ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि जब्त तरल की वास्तविक संरचना क्या थी और वह निर्धारित मानकों के अनुरूप था या नहीं।

इसलिए अंतिम रिपोर्ट आने या उपलब्ध होने से पहले "जहरीली शराब", "घातक शराब" या किसी विशेष विषैले पदार्थ की मौजूदगी जैसे निष्कर्षों से बचना आवश्यक है।

उत्पाद शुल्क विभाग से 15 प्रमुख सवाल

इस मामले की पारदर्शिता और जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग से निम्न प्रश्नों पर आधिकारिक जानकारी अपेक्षित है—

1. क्या खारघर कार्रवाई के बाद कोनगांव बॉन्डेड वेयरहाउस का आधिकारिक निरीक्षण किया गया?


2. क्या गोदाम का संपूर्ण भौतिक स्टॉक ऑडिट किया गया?


3. क्या डिस्पैच रजिस्टर, चालान और ट्रांसपोर्ट पास का मिलान किया गया?


4. वाहन में माल लोड करने वाले कर्मचारियों की पहचान कर बयान दर्ज किए गए?


5. 3 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 5:05 बजे वाहन रवाना करने की अनुमति किस रिकॉर्ड के आधार पर दी गई?


6. दो कथित बिना-पास वाले कार्टनों का स्रोत क्या पाया गया?


7. उन कार्टनों के संबंध में स्टॉक रिकॉर्ड में क्या प्रविष्टि थी?


8. क्या गोदाम के CCTV/DVR/NVR की तकनीकी या फॉरेंसिक जांच की गई?


9. क्या खारघर से पहले के डिलीवरी पॉइंट्स की जांच की गई?


10. क्या संबंधित दुकानों के स्टॉक और चालानों का मिलान किया गया?


11. अंतिम केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति क्या है?


12. FL-1 लाइसेंस नंबर 140 की कोई विभागीय समीक्षा की गई?


13. क्या संबंधित लाइसेंस धारक, प्रबंधक और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए?


14. क्या महाराष्ट्र मद्यनिषेध अधिनियम की धारा 79 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों पर विचार किया गया?


15. वर्तमान में मामले की जांच, अभियोजन और चार्जशीट की वास्तविक स्थिति क्या है?



जांच का दायरा वाहन से आगे क्यों जाना चाहिए?

यह मामला केवल इस सवाल तक सीमित नहीं होना चाहिए कि "वाहन कौन चला रहा था?"

यदि दस्तावेजों से वाहन, लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय, गोदाम, डिस्पैच रिकॉर्ड और डिलीवरी नेटवर्क के बीच संबंध सामने आते हैं, तो जांच का स्वाभाविक दायरा यह निर्धारित करना होगा कि माल की पूरी श्रृंखला में किस स्तर पर क्या हुआ।

एक संभावित जांच-श्रृंखला इस प्रकार हो सकती है—

लाइसेंस धारक → कोनगांव गोदाम → स्टॉक रिकॉर्ड → लोडिंग → डिस्पैच → वाहन → चालक → डिलीवरी पॉइंट्स → खारघर में जब्ती

यह श्रृंखला अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं करती। लेकिन यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति है, तो प्रत्येक चरण की जिम्मेदारी और नियंत्रण का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

दो संभावित स्थितियां, दोनों में जांच जरूरी

उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर व्यापक जांच से मोटे तौर पर दो संभावित स्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।

पहली स्थिति: जब्त माल किसी लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय के आधिकारिक स्टॉक या डिस्पैच से जुड़ा पाया जाए।

दूसरी स्थिति: संदिग्ध कार्टन अधिकृत व्यवसाय की जानकारी या अनुमति के बिना वाहन में रखे गए हों।

दोनों परिस्थितियों में सच्चाई सामने लाने के लिए दस्तावेजी रिकॉर्ड, स्टॉक मिलान, गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल कई सवालों के जवाब बाकी

खारघर में वाहन पकड़ा गया, चालक अस्पाक महबूब शेख को गिरफ्तार किया गया और शराब जब्त की गई। लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों में जांच की संभावित कड़ियां वाहन से आगे बालाजी एंटरप्रायझेस, FL-1 लाइसेंस नंबर 140, कोनगांव गोदाम, डिस्पैच रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और कथित डिलीवरी पॉइंट्स तक जाती दिखाई देती हैं।

ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या इन सभी कड़ियों की जांच वास्तव में की गई है?

यदि जांच की गई है तो उसके निष्कर्ष सार्वजनिक या आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्ट होने चाहिए। यदि नहीं की गई है, तो इसके कारणों को भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

संपादकीय एवं कानूनी सावधानी

यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, दर्ज बयानों और उनसे उठने वाले जांच संबंधी प्रश्नों पर आधारित है। उपलब्ध सामग्री के आधार पर बालाजी एंटरप्रायझेस, उसके लाइसेंस धारक, राहुल सपकाळे, चालक अस्पाक महबूब शेख अथवा किसी अन्य संबंधित व्यक्ति को दोषी ठहराने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है।

"बनावटी", "मिलावटी", "जहरीली" अथवा "घातक" जैसे शब्दों का अंतिम और निश्चित प्रयोग केवल संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट या अन्य सक्षम आधिकारिक साक्ष्य से पुष्टि होने के बाद ही किया जाना उचित होगा।

इसी प्रकार, किसी अधिकारी या विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत अथवा जानबूझकर लापरवाही का निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होंगे।

महाराष्ट्र राज्य उत्पाद शुल्क विभाग, संबंधित अधिकारियों, बालाजी एंटरप्रायझेस, लाइसेंस धारक, राहुल सपकाळे, अस्पाक महबूब शेख तथा अन्य संबंधित पक्षों का पक्ष इस रिपोर्ट में महत्वपूर्ण है। उनका आधिकारिक स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे उचित स्थान दिया जाना चाहिए।

केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट, गोदाम निरीक्षण रिपोर्ट, CCTV/DVR संबंधी जांच, FL-1 लाइसेंस की विभागीय स्थिति, केस डायरी/चार्जशीट तथा अन्य सत्यापन योग्य आधिकारिक दस्तावेज सामने आने पर रिपोर्ट को उसके अनुसार अपडेट किया जा सकता है।

मुख्य सवाल अब भी यही है—जांच की अगली कड़ी कहां तक पहुंची




























भाजपा युवा मोर्चा मुंबई सचिव प्रणव सिंह ठाकुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भाजपा युवा मोर्चा मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी नियुक्त।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई में संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। युवा मोर्चा मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद पर नियुक्त किया है।

इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति पत्र में दीपक सिंह ने प्रणव सिंह ठाकुर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे संगठन द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।

नियुक्ति पत्र में कहा गया है कि प्रणव सिंह ठाकुर को भाजपा युवा मोर्चा, मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। साथ ही, उनके आगामी कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं भी दी गई हैं।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में युवा मोर्चा के सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी संगठन की गतिविधियों, कार्यक्रमों और जनसंपर्क से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाने में अहम मानी जाती है।

यह नियुक्ति पत्र भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।


















उल्हासनगर मनपा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, आयुक्त मनीषा आव्हाळे ने बदली विभागीय जिम्मेदारियां।


 





उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुचारु एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयुक्त मनीषा आव्हाळे (भा.प्र.से.) ने अतिरिक्त आयुक्त, उप-आयुक्त एवं सहायक आयुक्तों के विभागीय कामकाज में आंशिक फेरबदल किया है। इस संबंध में 9 सितंबर 2026 को कार्यालयीन आदेश जारी किया गया है।

आदेश के अनुसार, अतिरिक्त आयुक्त श्री धीरज चव्हाण को सामान्य प्रशासन, संपत्ति कर, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रिकॉर्ड, विधि, भंडार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, बाजार एवं लाइसेंस, जनसंपर्क, चुनाव, शिक्षा, सार्वजनिक निर्माण, चिकित्सा स्वास्थ्य, जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण, वाहन एवं परिवहन, खेल एवं सांस्कृतिक, दिव्यांग कल्याण, समाज विकास, संपत्ति, अनधिकृत निर्माण निष्कासन, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा सहित कुल 25 विभागों का कामकाज सौंपा गया है।

उप-आयुक्तों के विभागों में भी बदलाव

आदेश के तहत डॉ. दीपाली चौगुले को सामान्य प्रशासन, विधि, अग्निशमन, भंडार, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

श्री अनंत जवाबदार को जल आपूर्ति, महिला एवं बाल कल्याण, चिकित्सा स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्यान, चुनाव, संपत्ति कर तथा वृक्ष प्राधिकरण विभाग सौंपे गए हैं।

श्रीमती स्नेहा करपे के जिम्मे संपत्ति, पर्यावरण, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, वाहन एवं परिवहन, समाज विकास, रिकॉर्ड, जनगणना एवं आधार केंद्र, जनसंपर्क, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, विवाह पंजीकरण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण तथा दिव्यांग कल्याणकारी योजना विभाग किए गए हैं।

वहीं, श्रीमती सुषमा पाटिल, मुख्य लेखा परीक्षक एवं प्रभारी उप-आयुक्त, को खेल एवं सांस्कृतिक विभाग का कामकाज सौंपा गया है।

सहायक आयुक्तों को भी नई जिम्मेदारियां

महानगरपालिका के विभिन्न प्रभागों और विभागों के कामकाज में भी बदलाव किया गया है। आदेश के अनुसार सहायक आयुक्त अजय साबळे को प्रभाग समिति क्रमांक 1 का कार्यभार दिया गया है।

किरण कापसे को सामान्य प्रशासन (स्थापना), वाहन, परिवहन तथा बाजार एवं लाइसेंस विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

अक्षय पाटील को खेल एवं सांस्कृतिक, पर्यावरण, संपत्ति तथा भंडार विभाग सौंपे गए हैं, जबकि विशाल कदम को खेल विभाग एवं सामान्य प्रशासन (प्रशासन) का कामकाज दिया गया है।

सलोनी निवकर को जनगणना एवं आधार विभाग तथा अलका पवार को आपदा प्रबंधन, सुरक्षा एवं रिकॉर्ड विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

इसी प्रकार गणेश शिंपी, प्रभारी सहायक आयुक्त, को प्रभाग समिति क्रमांक 2, दिव्यांग विभाग एवं चुनाव विभाग का कार्यभार दिया गया है। अजित गोवारी को प्रभाग समिति क्रमांक 3 का कार्यभार मूल जिम्मेदारियों के साथ संभालने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मनिष हिवरे के संबंध में प्रभाग समिति क्रमांक 4 का कार्यभार तथा सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पद के कार्यभार में बदलाव का उल्लेख आदेश में किया गया है।

तीन विभाग प्रमुखों को भी जिम्मेदारी

आदेश में विभाग प्रमुखों के स्तर पर भी जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं। गणेश पवार, प्रभारी विभाग प्रमुख को भंडार विभाग, सतीश राठोड, प्रभारी विभाग प्रमुख को खेल विभाग तथा विशाखा सावंत, प्रभारी विभाग प्रमुख को वाहन एवं परिवहन विभाग का कार्यभार सौंपा गया है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए अधिकार एवं कर्तव्य महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त के नियंत्रण एवं पुनरीक्षण के अधीन रहेंगे।

आयुक्त मनीषा आव्हाळे द्वारा जारी इस कार्यालयीन आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फेरबदल का उद्देश्य महानगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज में विभागीय समन्वय, जिम्मेदारी और कार्यक्षमता को बेहतर बनाना बताया गया है।

















‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना पर बढ़ा विवाद, अनिल भोईर ने मांगी कानूनी और पर्यावरणीय पुनर्तपासणी।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ शहर में नागरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर नगरपालिका की विशेष सभा आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नागरिक एवं प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन आनंदनगर औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर अपेक्षित चर्चा न होने का मुद्दा अब राजनीतिक और नागरिक स्तर पर उठने लगा है।

ठाकरे गुट के कल्याण उपजिलाप्रमुख एवं अंबरनाथ बचाव कृति समिति के अध्यक्ष अनिल भोईर ने इस मामले में महायुति से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए परियोजना के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की है।

विशेष सभा के एजेंडे में परियोजना क्यों नहीं?

अनिल भोईर के अनुसार, नगरपालिका की विशेष सभा में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से सीधे जुड़े प्रस्तावित जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया प्रकल्प को बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।

भोईर का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि शहर के कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अध्ययन एवं प्रशिक्षण दौरों में हिस्सा लेते हैं, तो ऐसे में प्रस्तावित परियोजना के संभावित प्रभावों पर भी सार्वजनिक और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

‘अध्ययन दौरा’ परियोजना स्थल से शुरू करने की मांग

परियोजना को लेकर वास्तविक स्थिति समझने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा संबंधित स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किए जाने की मांग भी सामने आई है।

भोईर ने कहा कि यदि परियोजना के संबंध में अध्ययन किया जाना है, तो सबसे पहले मानसुदेवी-गोवड़ी परिसर स्थित प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना स्थल का दौरा कर वहां की मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, परियोजना से स्थानीय क्षेत्र में पर्यावरण, यातायात, कचरा प्रबंधन और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित प्रभावों का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाना आवश्यक है।

कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की दोबारा जांच की मांग

अनिल भोईर ने परियोजना की कानूनी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रिया की पुनर्तपासणी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियों, पर्यावरणीय मानकों और नागरिक हितों से जुड़े पहलुओं की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर महायुति से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद इस संवेदनशील विषय पर स्पष्टता क्यों नहीं सामने आ रही है।

नागरिकों की शंकाओं का समाधान जरूरी

परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों में यदि किसी प्रकार की आशंका या चिंता है, तो उसका समाधान तथ्यों और अधिकृत जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर निर्णय लेते समय विशेषज्ञों की राय, संबंधित विभागों की रिपोर्ट और लागू नियमों का भी संज्ञान लिया जाना जरूरी है।

भोईर ने मांग की है कि परियोजना को लेकर नागरिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया जाए।

आंदोलन की चेतावनी, संघर्ष जारी रखने का संकेत

अनिल भोईर ने परियोजना के खिलाफ नागरिकों के हित में संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों की चिंताओं का समाधान नहीं होता और परियोजना के पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिलती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

अब जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नजर

जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर उठे सवालों के बाद अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाली नगरपालिका बैठकों में क्या इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा होती है, क्या परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाता है और क्या इसके कानूनी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा होगी—इन सवालों पर अंबरनाथ के नागरिकों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल, ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना को लेकर उठी मांगों ने अंबरनाथ में नागरिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





















फाइलों में देरी अब नहीं चलेगी! उल्हासनगर मनपा में अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्ती, उप आयुक्त डॉ. दीपाली चौगुले ने दिए कड़े निर्देश।


 








उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने तथा नागरिकों के आवेदन, पत्रों और शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए महानगरपालिका प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उप आयुक्त (मुख्यालय) डॉ. दीपाली चौगुले ने महानगरपालिका के सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट एवं कड़े निर्देश जारी किए हैं।

डॉ. चौगुले ने निर्देश दिया है कि महानगरपालिका में प्राप्त होने वाले आवेदन-पत्रों, पत्राचार एवं अन्य मामलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए। किसी भी आवेदन या पत्र को अनावश्यक रूप से लंबित रखने अथवा उसके निपटारे में दफ्तर-दिरंगाई बरतने को अब प्रशासन गंभीरता से लेगा।

समय पर काम नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई

महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जानबूझकर फाइल लंबित रखी जाती है, कार्यवाही में अनावश्यक देरी की जाती है या निर्धारित समय-सीमा में आवेदन-पत्र का निपटारा नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस निर्देश का उद्देश्य महानगरपालिका के कामकाज में जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाना है, ताकि नागरिकों को अपने काम के लिए अनावश्यक रूप से महानगरपालिका कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

अधिकारियों-कर्मचारियों की बढ़ेगी जवाबदेही

उप आयुक्त डॉ. दीपाली चौगुले के इस सख्त निर्देश के बाद महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में लंबित आवेदनों और पत्रों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। प्रशासन की इस पहल से नागरिकों के काम समय पर पूरे होने के साथ-साथ महानगरपालिका की कार्यप्रणाली में भी सुधार आने की संभावना है।

“प्रशासन की लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता के हक और हितों के लिए प्रहार संगठन प्रशासन के खिलाफ मजबूती से संघर्ष करेगा। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सड़क पर उतरकर भी जनहित में आंदोलन किया जाएगा।”

ऐसा उल्हासनगर प्रहार संगठन के अध्यक्ष शरद पोळके ने कहा।






















इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी बने बॉम्बे हाईकोर्ट के 50वें मुख्य न्यायाधीश।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का 50वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट को नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक अनुभवी न्यायाधीश का नेतृत्व मिलेगा।

न्यायमूर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट महाराष्ट्र और गोवा से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों की सुनवाई करता है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से अहम होगी।

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायिक सेवाएं दे रहे हैं। अब उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद न्यायपालिका से जुड़े लोगों और कानूनी क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।