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‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना पर बढ़ा विवाद, अनिल भोईर ने मांगी कानूनी और पर्यावरणीय पुनर्तपासणी।


अंबरनाथ: दिनेश मीरचंदानी

अंबरनाथ शहर में नागरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर नगरपालिका की विशेष सभा आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नागरिक एवं प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन आनंदनगर औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर अपेक्षित चर्चा न होने का मुद्दा अब राजनीतिक और नागरिक स्तर पर उठने लगा है।

ठाकरे गुट के कल्याण उपजिलाप्रमुख एवं अंबरनाथ बचाव कृति समिति के अध्यक्ष अनिल भोईर ने इस मामले में महायुति से जुड़े स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए परियोजना के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट भूमिका सामने रखने की मांग की है।

विशेष सभा के एजेंडे में परियोजना क्यों नहीं?

अनिल भोईर के अनुसार, नगरपालिका की विशेष सभा में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, लेकिन नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से सीधे जुड़े प्रस्तावित जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया प्रकल्प को बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।

भोईर का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि शहर के कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अध्ययन एवं प्रशिक्षण दौरों में हिस्सा लेते हैं, तो ऐसे में प्रस्तावित परियोजना के संभावित प्रभावों पर भी सार्वजनिक और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

‘अध्ययन दौरा’ परियोजना स्थल से शुरू करने की मांग

परियोजना को लेकर वास्तविक स्थिति समझने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा संबंधित स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किए जाने की मांग भी सामने आई है।

भोईर ने कहा कि यदि परियोजना के संबंध में अध्ययन किया जाना है, तो सबसे पहले मानसुदेवी-गोवड़ी परिसर स्थित प्रस्तावित ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना स्थल का दौरा कर वहां की मौजूदा परिस्थितियों का जायजा लिया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, परियोजना से स्थानीय क्षेत्र में पर्यावरण, यातायात, कचरा प्रबंधन और नागरिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित प्रभावों का स्वतंत्र रूप से आकलन किया जाना आवश्यक है।

कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं की दोबारा जांच की मांग

अनिल भोईर ने परियोजना की कानूनी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रिया की पुनर्तपासणी करने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियों, पर्यावरणीय मानकों और नागरिक हितों से जुड़े पहलुओं की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर महायुति से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद इस संवेदनशील विषय पर स्पष्टता क्यों नहीं सामने आ रही है।

नागरिकों की शंकाओं का समाधान जरूरी

परियोजना को लेकर स्थानीय नागरिकों में यदि किसी प्रकार की आशंका या चिंता है, तो उसका समाधान तथ्यों और अधिकृत जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर निर्णय लेते समय विशेषज्ञों की राय, संबंधित विभागों की रिपोर्ट और लागू नियमों का भी संज्ञान लिया जाना जरूरी है।

भोईर ने मांग की है कि परियोजना को लेकर नागरिकों के सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से दिया जाए।

आंदोलन की चेतावनी, संघर्ष जारी रखने का संकेत

अनिल भोईर ने परियोजना के खिलाफ नागरिकों के हित में संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नागरिकों की चिंताओं का समाधान नहीं होता और परियोजना के पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं मिलती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

अब जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नजर

जैव-चिकित्सीय कचरा प्रक्रिया परियोजना को लेकर उठे सवालों के बाद अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाली नगरपालिका बैठकों में क्या इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा होती है, क्या परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाता है और क्या इसके कानूनी एवं पर्यावरणीय पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा होगी—इन सवालों पर अंबरनाथ के नागरिकों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल, ‘एसएमएस इको क्लीन’ परियोजना को लेकर उठी मांगों ने अंबरनाथ में नागरिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





















फाइलों में देरी अब नहीं चलेगी! उल्हासनगर मनपा में अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्ती, उप आयुक्त डॉ. दीपाली चौगुले ने दिए कड़े निर्देश।


 








उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने तथा नागरिकों के आवेदन, पत्रों और शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए महानगरपालिका प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उप आयुक्त (मुख्यालय) डॉ. दीपाली चौगुले ने महानगरपालिका के सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट एवं कड़े निर्देश जारी किए हैं।

डॉ. चौगुले ने निर्देश दिया है कि महानगरपालिका में प्राप्त होने वाले आवेदन-पत्रों, पत्राचार एवं अन्य मामलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए। किसी भी आवेदन या पत्र को अनावश्यक रूप से लंबित रखने अथवा उसके निपटारे में दफ्तर-दिरंगाई बरतने को अब प्रशासन गंभीरता से लेगा।

समय पर काम नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई

महानगरपालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जानबूझकर फाइल लंबित रखी जाती है, कार्यवाही में अनावश्यक देरी की जाती है या निर्धारित समय-सीमा में आवेदन-पत्र का निपटारा नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस निर्देश का उद्देश्य महानगरपालिका के कामकाज में जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाना है, ताकि नागरिकों को अपने काम के लिए अनावश्यक रूप से महानगरपालिका कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

अधिकारियों-कर्मचारियों की बढ़ेगी जवाबदेही

उप आयुक्त डॉ. दीपाली चौगुले के इस सख्त निर्देश के बाद महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में लंबित आवेदनों और पत्रों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। प्रशासन की इस पहल से नागरिकों के काम समय पर पूरे होने के साथ-साथ महानगरपालिका की कार्यप्रणाली में भी सुधार आने की संभावना है।

“प्रशासन की लापरवाही अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता के हक और हितों के लिए प्रहार संगठन प्रशासन के खिलाफ मजबूती से संघर्ष करेगा। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सड़क पर उतरकर भी जनहित में आंदोलन किया जाएगा।”

ऐसा उल्हासनगर प्रहार संगठन के अध्यक्ष शरद पोळके ने कहा।






















इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी बने बॉम्बे हाईकोर्ट के 50वें मुख्य न्यायाधीश।

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट का 50वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट को नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में एक अनुभवी न्यायाधीश का नेतृत्व मिलेगा।

न्यायमूर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट महाराष्ट्र और गोवा से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक, प्रशासनिक एवं कानूनी मामलों की सुनवाई करता है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से अहम होगी।

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबे समय से न्यायिक सेवाएं दे रहे हैं। अब उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति के बाद न्यायपालिका से जुड़े लोगों और कानूनी क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

















 

‘पहले कानून, फिर प्रक्रिया’—महापौर अश्विनी निकम ने 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव पर लगाया विराम।


 


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में 7 मनोनीत (नामनिर्देशित) सदस्यों के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम ने मनोनीत सदस्यों के फॉर्म भरने सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

महापौर द्वारा 4 सितंबर 2026 को आयुक्त/महापालिका सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि 31 अगस्त 2026 को विशेष महासभा की सूचना जारी कर 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत 7 सितंबर को नामनिर्देशन फॉर्म भरने तथा 11 सितंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था।

हालांकि, इस मामले से संबंधित न्यायालयीन संदर्भ सामने आने के बाद महापौर ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने और शासन से आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता व्यक्त की है।

‘न्यायालयीन मामला लंबित, इसलिए जल्दबाजी उचित नहीं’

अपने पत्र में महापौर निकम ने उल्लेख किया है कि उन्हें 3 सितंबर को अधिवक्ता रामचंद्र मंदाडकर तथा 4 सितंबर को अधिवक्ता विनोद वी. पाटिल द्वारा संबंधित पत्रों के माध्यम से मामले की न्यायालयीन स्थिति से अवगत कराया गया है।

महापौर ने कहा कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने अथवा नहीं बढ़ाने के संबंध में शासन से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करना आवश्यक है। इसी कारण उन्होंने 31 अगस्त को बुलाई गई विशेष महासभा के आधार पर शुरू की गई आगे की चुनाव प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है।

उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि संबंधित विषय पर सक्षम स्तर से राय एवं अभिप्राय प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया लागू की जाए। तब तक मनोनीत सदस्यों के चुनाव से संबंधित पूरी प्रक्रिया स्थगित रहेगी।

कानून और संवैधानिक व्यवस्था को प्राथमिकता

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस निर्णय को महानगरपालिका की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके निर्णय से यह संदेश गया है कि किसी भी संवेदनशील चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी एवं संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।

उनके समर्थकों का कहना है कि महापौर ने इस मामले में जल्दबाजी करने के बजाय न्यायालयीन स्थिति और शासन के मार्गदर्शन को प्राथमिकता देकर कानून की मर्यादा तथा संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब उल्हासनगर महानगरपालिका में मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज थी। अब शासन से मिलने वाले मार्गदर्शन और न्यायालयीन प्रक्रिया के अगले घटनाक्रम पर सभी की नजरें रहेंगी।

‘संविधान और कानून सर्वोपरि’ का संदेश

महापौर अधिवक्ता अश्विनी कमलेश निकम के इस फैसले को उनके समर्थकों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधानवादी विचारों के प्रति सम्मान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून की सर्वोच्चता के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, उनके समर्थकों का कहना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के न्याय, प्रशासन और जनहित के आदर्शों को भी महत्व देती हैं।

हालांकि, इस निर्णय का अंतिम प्रभाव शासन के निर्देश और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे के परिणाम पर निर्भर करेगा। फिलहाल उल्हासनगर महानगरपालिका के 7 मनोनीत सदस्यों के चुनाव की पूरी प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई है।


















बिहार के मोतिहारी में ‘नशामुक्त युवा’ पर सेमिनार, पूर्व NCB निदेशक समीर वानखेड़े ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने की।


 

मोतिहारी: दिनेश मीरचंदानी

युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और समाज में नशामुक्ति को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को मोतिहारी स्थित बापू सभागार में ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘नशामुक्त युवा’ विषय पर विशेष सेमिनार आयोजित कर युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), मुंबई जोन के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए नशे के दुष्प्रभावों, इससे उत्पन्न सामाजिक चुनौतियों और नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

समीर वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहकर अपने भविष्य और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाकर ही मजबूत और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने की। उन्होंने भी युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहने तथा स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।

नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर

‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति को लेकर व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है। कार्यक्रम के दौरान नशे की लत से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान पर भी चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि युवाओं को नशे से दूर रखकर शिक्षा, रोजगार, खेल और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जाए, तो देश के विकास को नई गति मिल सकती है।

सेमिनार में युवाओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इस सामाजिक बुराई से बचाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम की जानकारी भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गुलरेज शहजाद ने दी। उन्होंने बताया कि ‘नशामुक्त युवा’ के संदेश को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने तथा नशे के खिलाफ सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।











































टी.ओ.के./शिंदे गुट में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर खींचतान, संतोष पांडे के दावे की अग्निपरीक्षा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

मनोनीत नगरसेवक पदों के चयन को लेकर उल्हासनगर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा के साथ-साथ टीम ओमी कालानी (टी.ओ.के.) और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में आने वाले मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर कालानी परिवार के साथ लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े संतोष पांडे के नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है।

संतोष पांडे को उत्तर भारतीय समाज की आवाज के रूप में देखा जाता है और बताया जाता है कि वह पिछले करीब 17 वर्षों से कालानी परिवार और संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी वर्षों की निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राजनीतिक योगदान को इस बार मनोनीत नगरसेवक पद के रूप में सम्मान मिलेगा या फिर बदलते राजनीतिक समीकरण किसी दूसरे नाम के पक्ष में जाएंगे।

चार-चार पदों के समीकरण से बदली पूरी तस्वीर

बताया जाता है कि शुरुआत में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में चार-चार मनोनीत नगरसेवक पद जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गणित तैयार किया जा रहा था। लेकिन शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े पूजा भोईर और विक्की लबाना के जाति प्रमाणपत्र से संबंधित मामले में उनके पद निरस्त होने के बाद मनोनीत नगरसेवक पदों का पूरा समीकरण बदल गया है।

इसी बदले हुए राजनीतिक गणित के बीच अब विभिन्न नामों को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई है।

 पूर्व महापौर पंचम कालानी ओर संतोष पांडे के नाम चर्चा में?

सूत्रों के हवाले से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि संतोष पांडे या पूर्व महापौर पंचम कालानी सूत्रों के अनुसार मनोनीत नगरसेवक बनाने की पंचम कालानी की तैयारी रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।

यदि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया जाता है, तो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और कालानी समर्थक खेमे के भीतर राजनीतिक असंतोष पैदा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। खासकर 17 वर्षों से संगठन के लिए सक्रिय रहे संतोष पांडे के समर्थक इस निर्णय को किस रूप में लेते हैं, यह भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार

दूसरी ओर भाजपा के कोटे से मनोनीत नगरसेवक पद के लिए भी कई नामों को लेकर जोरदार लॉबिंग की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार धनंजय बोड़ारे, हेमा पिंजानी, मनु खेमचंदानी और प्रदीप रामचंदानी और प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं।

इन प्रमुख नामों के अलावा करीब 20 भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मनोनीत नगरसेवक पद के लिए अपनी इच्छा शीर्ष नेतृत्व के समक्ष व्यक्त की है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने भी अंतिम नाम तय करना आसान नहीं माना जा रहा है।

11 सितंबर पर टिकी सभी की निगाहें

अब इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन 11 सितंबर माना जा रहा है। इसी दिन होने वाले चयन से स्पष्ट होगा कि भाजपा अपने संभावित दावेदारों में से किसे अवसर देती है और टी.ओ.के./शिवसेना शिंदे गुट संतोष पांडे की करीब 17 वर्षों की राजनीतिक निष्ठा एवं संगठनात्मक योगदान को सम्मान देता है या फिर बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते किसी अन्य नाम पर मुहर लगती है।

मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार निष्ठा और संगठनात्मक योगदान की जीत होगी या राजनीतिक समीकरण भारी पड़ेंगे?

11 सितंबर को होने वाला फैसला न केवल नए मनोनीत नगरसेवकों के नाम तय करेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में आने वाले दिनों के नए समीकरणों के संकेत भी दे सकता है।



















उल्हासनगर में CHM कॉलेज के बैंक खाते से ₹16.69 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी, UPI के जरिए रकम उड़ाने का आरोप।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन बैंकिंग और UPI के माध्यम से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C) और 66(D) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता डॉ. मंजू निशीकांत लालवाणी/पाठक (53) पेशे से प्रिंसिपल हैं और अंबरनाथ पूर्व के रॉयल पार्क क्षेत्र में रहती हैं। शिकायत के मुताबिक, उनके CHM कॉलेज के कैनरा बैंक स्थित करंट अकाउंट से बिना अनुमति के UPI के माध्यम से कथित तौर पर अनधिकृत लेनदेन किए गए।

ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा शुरू नहीं होने के बावजूद खाते में सेंध

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 15 अगस्त 2025 से 13 अगस्त 2026 के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने बैंक खाते से संबंधित UPI प्रणाली में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया। बताया गया है कि संबंधित खाते में ऑनलाइन बैंकिंग अथवा UPI सुविधा शुरू नहीं की गई थी और कॉलेज के शिकायतकर्ता या किसी अधिकृत व्यक्ति ने भी इस प्रकार के लेनदेन की अनुमति नहीं दी थी।

इसके बावजूद आरोपी ने कथित तौर पर ऑनलाइन UPI के जरिए कई अनधिकृत लेनदेन किए। इन लेनदेन के दौरान शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर OTP संदेश प्राप्त होने की बात भी सामने आई है।

OTP का कथित रूप से किया गया दुरुपयोग

शिकायत के अनुसार, अज्ञात आरोपी ने शिकायतकर्ता की जानकारी और अनुमति के बिना प्राप्त OTP का कथित रूप से अनधिकृत इस्तेमाल किया। इसके माध्यम से बैंक खाते से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण प्रक्रिया का दुरुपयोग कर UPI प्रणाली के जरिए लेनदेन किए गए।

पुलिस शिकायत में दावा किया गया है कि इस कथित साइबर धोखाधड़ी के जरिए कुल ₹16,69,229 की राशि खाते से निकाल ली गई, जिससे शिकायतकर्ता को आर्थिक नुकसान हुआ।

अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

मामले में आरोपी की पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है। मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब कथित ऑनलाइन लेनदेन, OTP के इस्तेमाल, UPI गतिविधियों और बैंक खाते से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

इस मामले की जांच पुलिस निरीक्षक (अपराध) तुकाराम पाटिल, मध्यवर्ती पुलिस स्टेशन, उल्हासनगर-3 द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान आरोपी की पहचान और कथित लेनदेन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।