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मराठवाड़ा में भाजपा का बड़ा दांव? क्या विधान परिषद जाएंगे डॉ. ओमप्रकाश शेटे, मुखमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नई रणनीति पर चर्चा तेज।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। आगामी बीड, लातूर और धाराशिव स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव को लेकर भाजपा के भीतर रणनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीड जिले के भूमिपुत्र और भाजपा से जुड़े प्रमुख चेहरे डॉ. ओमप्रकाश शेटे को विधान परिषद में भेजे जाने की संभावना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis अपनी चर्चित “सरप्राइज रणनीति” के तहत मराठवाड़ा में भाजपा का नया राजनीतिक समीकरण तैयार कर सकते हैं। स्वर्गीय Vinayak Mete के बाद मराठवाड़ा और विशेष रूप से बीड जिले में नेतृत्व के नए चेहरे की तलाश के बीच डॉ. शेटे का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने हमेशा संगठन और प्रशासनिक स्तर पर काम करने वाले भरोसेमंद सहयोगियों को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इससे पहले अभिमन्यु पवार, सुमित वानखेड़े और Shrikant Bharatiya जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब डॉ. ओमप्रकाश शेटे को भी भाजपा नेतृत्व की “गुडबुक” में माना जा रहा है।

मराठवाड़ा में भाजपा का नया चेहरा बनने की चर्चा

सूत्रों की मानें तो भाजपा आगामी स्थानीय निकाय और विधान परिषद चुनावों के जरिए मराठवाड़ा में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में है। बीड, लातूर और धाराशिव क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में डॉ. शेटे का नाम गंभीरता से लिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भाजपा डॉ. शेटे को विधान परिषद का मौका देती है, तो यह केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं बल्कि मराठवाड़ा की राजनीति में नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जाएगा।

प्रशासनिक जिम्मेदारी और सरकारी आदेशों पर भी उठे सवाल

इस बीच खबर में प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सरकारी आदेशों में होने वाली त्रुटियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों में छोटी-छोटी लिपिकीय गलतियों के कारण कई बार गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में देरी होती है और सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।

ऐसे मामलों को देखते हुए सरकारी आदेश जारी करने से पहले अधिक सतर्कता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग जोर पकड़ रही है। अब जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

भाजपा की अगली चाल पर सबकी नजर

फिलहाल मराठवाड़ा की राजनीति में भाजपा किसे आगे बढ़ाती है और विधान परिषद चुनाव में कौन सा नया चेहरा सामने आता है, इस पर राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री फडणवीस का फैसला मराठवाड़ा की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।














प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पर दुकान-गोदाम सील नहीं कर सकती उल्हासनगर महानगर पालिका - बॉम्बे हाईकोर्ट


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में नगर निकाय बकाया संपत्ति कर वसूलने के लिए किसी परिसर को सील नहीं कर सकते। अदालत ने मंगलवार को उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) को निर्देश दिया कि वह कथित टैक्स बकाया के कारण सील किए गए एक फास्ट-फूड आउटलेट और गोदाम को तुरंत खोल दे।

जस्टिस गौतम अंखाड और जस्टिस संदीप डी. पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश दुकान मालिक लछमन दुसेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दुसेजा की संपत्तियों को 30 मार्च को सील किया गया था।

पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी निगम के वकील हमें ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सके, जो संपत्ति कर का भुगतान न होने पर परिसर सील करने का अधिकार देता हो।”

अदालत ने UMC को दुसेजा के गोदाम और दुकान को तुरंत अनसील करने का आदेश दिया।

दुसेजा के अनुसार, UMC अधिकारियों ने 30 मार्च को उनके परिसरों का दौरा किया और दोनों संपत्तियों को सील करने से पहले अटैचमेंट आदेश जारी किया। निगम ने गोदाम पर ₹5.64 लाख और दुकान पर ₹1.30 लाख संपत्ति कर बकाया होने का दावा किया था।

दुसेजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस.बी. राव ने दलील दी कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1949 और उसके तहत बनाए गए नियम नगर निकायों को संपत्ति कर वसूली के लिए परिसर सील करने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

अदालत ने यह दलील स्वीकार कर ली, क्योंकि UMC के वकील सुरेश कांबले इस कार्रवाई के समर्थन में कोई वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके।

दुसेजा ने अदालत को बताया कि वह संपत्ति कर चुकाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निकाय द्वारा लगाए गए जुर्माने और विलंब शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने उन्हें बकाया कर जमा करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की।














उल्हासनगर में बिजली चोरी पर बड़ा खुलासा, MSEDCL अधिकारी पर रिश्वत लेकर कनेक्शन जोड़ने का आरोप।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) में कथित भ्रष्टाचार और बिजली चोरी को संरक्षण देने का गंभीर मामला सामने आया है। उल्हासनगर-3 स्थित स्नेहदीप अपार्टमेंट्स में हुई कार्रवाई के दौरान MSEDCL के एक वरिष्ठ अधिकारी पर बिजली चोरी पकड़ने के बाद कथित रूप से रिश्वत लेकर दोबारा बिजली कनेक्शन जोड़ने का आरोप लगा है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और फोटो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

सोसायटी प्रशासन का आरोप है कि 22 मई 2026 को MSEDCL उल्हासनगर डिवीजन के अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता श्री भास्कर कोले अपनी टीम के साथ स्नेहदीप अपार्टमेंट्स पहुंचे थे। सोसायटी द्वारा लंबे समय से फ्लैट नंबर 105 (A-विंग) और फ्लैट नंबर 204 (B-विंग) में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग की शिकायत की जा रही थी।

बिना मीटर चल रही थी भारी बिजली खपत

सोसायटी के अनुसार दोनों फ्लैटों में बिना मीटर के भारी बिजली उपयोग किया जा रहा था, जो बिजली अधिनियम की धारा 126 और 135 का उल्लंघन है। आरोप है कि इन फ्लैटों पर लाल पंजाबी और गोविंद पंजाबी नामक व्यक्तियों ने अवैध कब्जा कर रखा है। बताया गया कि मूल फ्लैट मालिकों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है।

शिकायत के बाद MSEDCL की टीम मौके पर पहुंची और कथित रूप से अवैध बिजली लाइन काटी गई। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया।

“30 मिनट की बंद कमरे की डील” का आरोप

सोसायटी सदस्यों का आरोप है कि बिजली लाइन काटने के तुरंत बाद अधिकारी श्री भास्कर कोले अपनी टीम और एक निजी मध्यस्थ के साथ आरोपी फ्लैट के अंदर गए। करीब 30 मिनट तक टीम फ्लैट के भीतर रही और इस दौरान किसी भी सोसायटी सदस्य को अंदर नहीं आने दिया गया।

आरोप यह भी है कि मौके पर कोई पंचनामा तैयार नहीं किया गया और बाहर आने के बाद FIR दर्ज करने की बजाय उसी बिजली लाइन को दोबारा जोड़ दिया गया जिसे कुछ मिनट पहले अवैध बताते हुए काटा गया था।

रिश्वत लेकर मामला दबाने का आरोप

स्थानीय सूत्रों और सोसायटी प्रशासन का दावा है कि बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान करीब ₹25,000 की रिश्वत देकर मामले को दबा दिया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कथित फोटो और वीडियो अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय नागरिकों ने अधिकारी से सवाल किया कि बिजली चोरी करने वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है, तो उन्होंने कथित रूप से कहा:

“अब यह मामला लीगल डिपार्टमेंट का है, मेरा काम खत्म हो गया।”

इसके बाद अधिकारी अपनी टीम के साथ मौके से रवाना हो गए।

Vigilance और ACB को भेजे गए सबूत

सोसायटी सचिव भूषण बलदेव खत्री ने दावा किया है कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े फोटो और दस्तावेज मुंबई स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिसर (CVO), ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।

सोसायटी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल की गई MSEB की गाड़ी को जानबूझकर बिल्डिंग से दूर खड़ा किया गया ताकि पूरी कार्रवाई सार्वजनिक नजरों से दूर रहे।

“सरकारी खजाने की खुली लूट” – सोसायटी प्रशासन

सोसायटी प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:

“यह सरकारी खजाने की खुलेआम लूट है। जिन अधिकारियों को बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, वही आरोपियों को संरक्षण देते नजर आ रहे हैं। यदि 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज कर कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी।”

मीडिया को सौंपे गए दस्तावेज

सोसायटी प्रशासन ने मीडिया को निम्न दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया है:

MSEDCL को दी गई प्रारंभिक शिकायतों की प्रतियां

मौके पर ली गई तस्वीरें और कथित वीडियो

अधिकारी और टीम की मौजूदगी के फोटो

कथित अवैध बिजली इंस्टॉलेशन से जुड़े रिकॉर्ड

अब इस पूरे मामले में MSEDCL, Vigilance विभाग और ACB की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।























पूर्व मुंबई ज़ोनल NCB अधिकारी समीर वानखेड़े को बड़ी सफलता, अंडर वर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क के आरोपियों को अदालत ने दोषी माना।


ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

मुंबई और ठाणे से जुड़े अंडरवर्ल्ड तथा अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई में ठाणे की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दाऊद इब्राहिम के कथित करीबी सहयोगी परवेज नसरुल्लाह खान उर्फ “चिंकू पठान” समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहरा दिया है। यह मामला वर्ष 2021 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा उजागर किए गए बहुचर्चित सिंथेटिक ड्रग्स रैकेट से जुड़ा है, जिसने देशभर की जांच एजेंसियों को चौंका दिया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के तार सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल और हवाला चैनलों से भी जुड़े हुए थे। मामले में डोंगरी निवासी कथित ड्रग कारोबारी मोहम्मद आरिफ भुजवाला का नाम भी प्रमुखता से सामने आया था, जिस पर बड़े स्तर पर सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण और सप्लाई का आरोप है।

समीर वानखेड़े की अगुवाई में शुरू हुई थी हाई-प्रोफाइल जांच

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जनवरी 2021 में उस समय शुरू हुई थी, जब तत्कालीन NCB जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के नेतृत्व में कई स्थानों पर देर रात छापेमारी की गई थी। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई में मिले सुरागों ने जांच एजेंसियों को अंडरवर्ल्ड से जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचा दिया।

अदालत ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की कड़ी धाराओं के तहत पांच आरोपियों को दोषी माना, जबकि पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। विशेष लोक अभियोजक इरानी ने अदालत में अंतिम दलीलें पेश करते हुए पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और बरामद सबूतों को विस्तार से रखा।

कैसे खुला ड्रग्स फैक्ट्री का राज?

जांच के दौरान NCB अधिकारियों ने नवी मुंबई के घनसोली इलाके में चिंकू पठान को मेफेड्रोन (MD) और हेरोइन की व्यावसायिक मात्रा के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

सूत्रों के मुताबिक, चिंकू पठान ने अधिकारियों को डोंगरी स्थित एक फ्लैट में चल रही गुप्त सिंथेटिक ड्रग्स लैब की जानकारी दी, जहां मोहम्मद आरिफ भुजवाला के संचालन का आरोप था। इसके बाद NCB ने वहां छापा मारा।

बताया जाता है कि छापेमारी के दौरान भुजवाला इमारत की स्कैफोल्डिंग के सहारे नीचे उतरकर फरार हो गया था। हालांकि बाद में उसे रायगढ़ जिले के माणगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?

NCB की कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने भारी मात्रा में नशीले पदार्थों और अन्य संदिग्ध सामग्री को जब्त किया। बरामदगी में शामिल हैं:

मेफेड्रोन (MD)

मेथामफेटामाइन

एफेड्रिन

हेरोइन

12 किलो से अधिक सिंथेटिक नशीले पदार्थ

ऑटोमैटिक हथियार

हवाला नेटवर्क से जुड़े कोडेड दस्तावेज

2.18 करोड़ रुपये से अधिक नकद रकम

अंडरवर्ल्ड-ड्रग्स-हवाला गठजोड़ पर बड़ा संकेत

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए अंडरवर्ल्ड, हवाला नेटवर्क और अवैध हथियारों के गठजोड़ की भी परतें खुली हैं। अदालत का यह फैसला महाराष्ट्र में सक्रिय संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।














उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट में हवाला और चेक डिस्काउंटिंग का बड़ा खेल? “हरगुन” नामक कारोबारी पर करोड़ों के फर्जी लेनदेन का आरोप, ED, INCOMETAX और EOW तक पहुंच सकती है शिकायत।

(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र के Ulhasnagar के उल्हासनगर-5 स्थित जींस मार्केट में कथित हवाला कारोबार, चेक डिस्काउंटिंग और फर्जी बैंक खातों के जरिए बड़े आर्थिक खेल का मामला सामने आने की चर्चा तेज हो गई है। मार्केट के कुछ व्यापारियों और सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, “हरगुन” नामक व्यक्ति लंबे समय से करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी गतिविधियों को संचालित कर रहा है, जिससे भारत सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने अपने कर्मचारियों, करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर कई कथित फर्जी करंट अकाउंट खुलवा रखे हैं। “हरगुन” नामक व्यक्ति कर्मचारियों, करीबी रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों के नाम पर फर्जी करंट अकाउंट खुलवाने के लिए मोटी रकम देता है। इन खातों के माध्यम से प्रतिदिन लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का लेनदेन होने की बात सामने आ रही है। आरोप यह भी हैं कि कई ट्रांजैक्शन फर्जी बिलों और कागजी कंपनियों के आधार पर किए जा रहे हैं, ताकि वास्तविक कारोबारी गतिविधियों को छिपाया जा सके।

व्यापारिक सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का उपयोग चेक डिस्काउंटिंग, हवाला ट्रांजैक्शन और टैक्स चोरी जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ व्यापारियों ने इस मामले से जुड़े बैंक खातों, लेनदेन और दस्तावेजों की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है, जिसके आधार पर जल्द ही विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जानकारी के अनुसार, इस मामले की शिकायत Enforcement Directorate, Income Tax Department, Central Bureau of Investigation और Economic Offences Wing समेत अन्य जांच एजेंसियों तक पहुंच सकती है। यदि शिकायत दर्ज होती है, तो बैंकिंग ट्रांजैक्शन, GST रिकॉर्ड, फर्जी बिलिंग और संदिग्ध खातों की गहन जांच की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर जींस मार्केट से जुड़े कुछ अन्य व्यापारियों और सहयोगियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही आरोपों पर संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

फिलहाल, उल्हासनगर के व्यापारिक क्षेत्र में इस कथित वित्तीय नेटवर्क को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और सभी की नजर संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।














आम जनता पर सख्ती, सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर नरमी? उल्हासनगर मनपा पर उठे सवाल


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के टैक्स बिल तेजी से अपडेट किए जा रहे हैं, लेकिन प्रसिद्ध सेंचुरी रेयान कंपनी के मामले में अब तक कोई स्पष्ट अपडेट सामने नहीं आने से गंभीर संदेह पैदा हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सेंचुरी रेयान कंपनी पर बकाया टैक्स की रकम को लेकर महानगरपालिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड और बिल अपडेट करने की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा गया है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब आम जनता से टैक्स वसूली के लिए महानगरपालिका सख्ती दिखाती है, तब बड़े उद्योग समूहों के मामले में नरमी क्यों बरती जा रही है? इस दोहरे रवैये को लेकर अब टैक्स विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में महानगरपालिका के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि करोड़ों रुपये के संभावित टैक्स बकाया को लेकर फाइलों को दबाने और प्रक्रिया को धीमा करने का खेल चल रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नागरिकों की ओर से उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को इस पूरे प्रकरण की बड़ी स्तर पर स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर सेंचुरी रेयान कंपनी के टैक्स रिकॉर्ड अब तक अपडेट क्यों नहीं किए गए और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार है।

यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह मुद्दा शहर की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ा विवाद बन सकता है।














उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में पेड़ों की कटाई को लेकर बड़ा विवाद, जांच और कार्रवाई की मांग तेज।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल होस्पिटल परिसर में कथित रूप से बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अस्पताल परिसर के हिरणी कक्ष, नवनाथ मंदिर तथा अपघात (दुर्घटना) विभाग के पास स्थित करीब 6 से 8 बड़े पेड़ों को काट दिया गया और बाद में लकड़ी को बेच भी दिया गया।

मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पेड़ों की कटाई बिना आवश्यक अनुमति के की गई। पर्यावरण नियमों के अनुसार बिना अनुमति पेड़ काटना दंडनीय अपराध माना जाता है। आरोप यह भी है कि पेड़ काटने के बाद अस्पताल से जुड़े एक जूनियर क्लर्क द्वारा लकड़ी को बेचने का काम किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील परिसर में इस प्रकार पेड़ों की कटाई बेहद गंभीर विषय है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

साथ ही Central Hospital Ulhasnagar के सिविल सर्जन समेत संबंधित प्रशासनिक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे गए हैं, तो यह केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला है।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामले ने शहर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।