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उल्हासनगर महापालिका में एसीबी के शिकंजे में आ चुके अधिकारियों को अहम पदभार देने पर उठे सवाल, राष्ट्र कल्याण पार्टी के प्रमुख शैलेश तिवारी ने 8 जुलाई को यूएमसी आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना आंदोलन की घोषणा की।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) द्वारा पूर्व में कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महत्वपूर्ण विभागों का पदभार दिए जाने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के पदाधिकारी शैलेश तिवारी ने महापालिका प्रशासक को पत्र सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल पदभार नहीं हटाया गया, तो 8 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना आंदोलन किया जाएगा तथा शासनादेश (जीआर) की प्रतीकात्मक होली जलाई जाएगी।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले कई वर्षों से ऐसे अधिकारी और कर्मचारी, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता अथवा एसीबी की कार्रवाई से जुड़े आरोप रहे हैं, उन्हें लगातार महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा जा रहा है। इससे महापालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गणेश शिंपी को लेकर सबसे गंभीर आरोप

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने अपने पत्र में सबसे अधिक सवाल गणेश शिंपी को दिए गए विभिन्न पदभारों को लेकर उठाए हैं। आरोप है कि मूल रूप से लघुलेखक (स्टेनो) पद पर कार्यरत होने के बावजूद उन्हें उपआयुक्त (प्रभाग समिति क्रमांक-2), कर निर्धारक एवं संकलक, चुनाव विभाग प्रमुख, अतिक्रमण विभाग सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

पत्र में दावा किया गया है कि शहर में बढ़ रहे अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण संबंधी मामलों तथा खतरनाक इमारतों को तोड़ने की प्रक्रिया में कथित आर्थिक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले कई वर्षों से अतिक्रमण विभाग में कार्यरत रहते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किया है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया है कि नोडल अधिकारी का पद समाप्त किए जाने के बावजूद उन्हें अन्य नामों से समान प्रकार की जिम्मेदारियां क्यों सौंपी गईं। संगठन ने मांग की है कि उनसे सभी अतिरिक्त पदभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर ही नियुक्त किया जाए।

अन्य अधिकारियों पर भी लगाए गए गंभीर आरोप

पत्र में कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल तथा विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अजीत गोवारी पर अनधिकृत निर्माण मामलों में कथित आर्थिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए उन्हें क्रीड़ा एवं उद्यान विभाग का प्रभार दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

संजय पवार पर नगररचना विभाग में लंबे समय से कार्यरत रहते हुए निर्माण अनुमति प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है तथा उनके स्थानांतरण की मांग की गई है।

अनिल खतुराणी के संबंध में कर विभाग और प्रभाग समिति में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग का प्रमुख बनाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

अंकुश कदग पर भंडार विभाग में खरीद-बिक्री संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए उन्हें दिए गए पदभारों की समीक्षा की मांग की गई है।

राजा बुलानी के विरुद्ध विधि विभाग से जुड़े मामलों में कथित आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।

छाया डगळे और भानु परमार के संबंध में भी पूर्व में भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का उल्लेख करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने पर आपत्ति दर्ज की गई है।

23 अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की मांग

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने दावा किया है कि एसीबी द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके लगभग 23 अन्य कर्मचारियों को भी विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पदभार दिए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि ऐसे सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित कर्मचारियों को संवेदनशील पदों से हटाया जाए।

प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

शैलेश तिवारी ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 8 जुलाई तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आयुक्त कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना आंदोलन किया जाएगा। साथ ही शासनादेश की प्रतीकात्मक होली जलाकर महापालिका प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा।

इस पूरे मामले ने उल्हासनगर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली, पदभार वितरण प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या कदम उठाता है।














वीटीसी क्रीड़ा संकुल में ₹26.36 करोड़ के भुगतान की जांच की मांग, श्मशान भूमि की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील; सामाजिक कार्यकर्ता अमर जगियासी ने उठाए दोनों जनहित के मुद्दे।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के दो महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। सेक्शन-30 निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमर जगियासी ने एक ओर वीटीसी ग्राउंड पर निर्माणाधीन बालासाहेब ठाकरे क्रीड़ा संकुल में हुए करोड़ों रुपये के भुगतान की पारदर्शी जांच की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर उल्हासनगर-4 स्थित श्मशान भूमि से संबंधित आरक्षित जमीन को कथित अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

क्रीड़ा संकुल में 26.36 करोड़ रुपये के भुगतान पर उठे सवाल

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा वीटीसी ग्राउंड पर निर्माणाधीन बालासाहेब ठाकरे क्रीड़ा संकुल के लिए संबंधित ठेकेदार को अब तक 26 करोड़ 36 लाख 66 हजार 923 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

हालांकि, सूत्रों एवं स्थल पर किए गए आकलन के अनुसार, वर्तमान में परियोजना स्थल पर केवल भूतल सहित दो मंजिला ढांचा तथा लगभग 75 हजार वर्ग फुट आरसीसी एवं ईंट का निर्माण कार्य ही पूर्ण दिखाई देता है। निर्माण क्षेत्र के जानकारों द्वारा बाजार की प्रचलित दरों के आधार पर इस स्तर के कार्य की अनुमानित लागत लगभग 6 से 6.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इसी कथित अंतर को देखते हुए अमर जगियासी ने उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकल्प की स्वतंत्र तृतीय पक्षीय तकनीकी एवं वित्तीय लेखा परीक्षा (थर्ड पार्टी टेक्निकल एवं फाइनेंशियल ऑडिट) कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि जब तक ऑडिट रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक संबंधित ठेकेदार को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भुगतान न किया जाए।

यदि अतिरिक्त भुगतान साबित हो तो राशि सड़क निर्माण में लगाने की मांग

जगियासी ने अपनी शिकायत में यह भी सुझाव दिया है कि यदि जांच में अतिरिक्त भुगतान या वित्तीय अनियमितता सामने आती है और उसकी वसूली होती है, तो उस राशि का उपयोग सेक्शन-30 मार्ग के निर्माण एवं सुधार कार्य में किया जाए।

उन्होंने कहा कि यही सड़क वीटीसी ग्राउंड का मुख्य प्रवेश मार्ग है, जहां प्रतिदिन पांच हजार से अधिक वाहन आवागमन करते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति, गड्ढों और बरसात के दौरान जलभराव के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाएं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में इस मार्ग का शीघ्र निर्माण जनहित में अत्यंत आवश्यक है।

श्मशान भूमि से जुड़ी आरक्षित जमीन पर कथित कब्जे की आशंका

दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में अमर जगियासी ने उल्हासनगर-4 स्थित श्मशान भूमि के सामने मौजूद उस आरक्षित भूमि का मामला उठाया है, जिसे हिंदू मृत बच्चों के दफन संस्कार के लिए सुरक्षित बताया जाता है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस भूमि पर कुछ कथित भूमि माफिया द्वारा कब्जा करने का प्रयास किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस संबंध में जगियासी पिछले तीन महीनों से उल्हासनगर महानगरपालिका के मालमता विभाग के साथ लगातार पत्राचार कर रहे हैं।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित भूमि का विधिवत सीमांकन (डिमार्केशन) कराया जाए तथा राजस्व अभिलेख (7/12) एवं नगर भूमि अभिलेखों में इस भूमि का स्वामित्व स्पष्ट रूप से उल्हासनगर महानगरपालिका के नाम दर्ज कराया जाए। उनका कहना है कि ऐसा होने से भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या स्वामित्व विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी और सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रहेगी।

स्थानीय नागरिकों का मिला समर्थन

सूत्रों के अनुसार, सेक्शन-30 सहित आसपास के क्षेत्रों के अनेक नागरिक अमर जगियासी द्वारा उठाए गए इन दोनों जनहित के मुद्दों का समर्थन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक संपत्तियों को अतिक्रमण से बचाना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब शहरवासियों की निगाहें उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वीटीसी ग्राउंड क्रीड़ा संकुल में किए गए भुगतान और निर्माण कार्य की जांच की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है तथा श्मशान भूमि से जुड़ी आरक्षित जमीन की सुरक्षा और सीमांकन को लेकर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।












महाराष्ट्र में 288 विधायक, लेकिन सड़कों पर 'MLA' स्टिकर लगी हजारों-लाखों गाड़ियां! नियमों के पालन और वीआईपी संस्कृति पर उठे गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र विधानसभा में निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या केवल 288 है, लेकिन राज्यभर की सड़कों पर 'MLA' (विधायक) स्टिकर लगी गाड़ियों की बड़ी संख्या लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर, कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दिखाई देते हैं, जिन पर 'MLA', 'Government of Maharashtra', 'On Duty' या अन्य वीआईपी पहचान वाले स्टिकर लगे होते हैं।

इसी को लेकर अब आम नागरिकों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब पूरे राज्य में केवल 288 विधायक हैं, तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियां किसकी हैं? क्या इन सभी वाहनों का उपयोग वास्तव में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है, या फिर प्रभाव जमाने और विशेष पहचान दिखाने के लिए इन स्टिकरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है?

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी यह मुद्दा समय-समय पर चर्चा में रहा है। जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक पदों और संवैधानिक पहचान का अनधिकृत उपयोग कानून के शासन के लिए चुनौती बन सकता है। इससे न केवल आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि कई बार ऐसे स्टिकरों का इस्तेमाल ट्रैफिक नियमों से बचने, सरकारी प्रतिष्ठानों में अनावश्यक प्रभाव दिखाने या वीआईपी होने का आभास देने के लिए भी किया जाता है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बिना वैधानिक अधिकार के सरकारी पद अथवा जनप्रतिनिधि का संकेत देने वाले स्टिकर या प्रतीक का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। इसी कारण पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर अनधिकृत वीआईपी स्टिकर, हूटर, फ्लैशर लाइट और अन्य अवैध पहचान चिह्नों के खिलाफ कार्रवाई करते रहे हैं।

हालांकि, इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे वाहनों की संख्या कम होती दिखाई नहीं देती। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों का मानना है कि इस विषय पर व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वीआईपी संस्कृति पर अंकुश लगाया जा सके और सभी नागरिकों के लिए समान कानून की भावना मजबूत हो।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा जमकर वायरल हो रहा है। एक व्यंग्यात्मक पोस्ट में लिखा गया—

"महाराष्ट्र में विधायक 288, लेकिन 'MLA' स्टिकर वाली गाड़ियां लाखों! लगता है राज्य में विधायक कम और विधायकों की गाड़ियां ज्यादा हैं… हर घर विधायक योजना!"

यह पोस्ट लोगों के बीच तेजी से साझा की जा रही है और वीआईपी संस्कृति पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रचलित 2,80,000 'MLA' स्टिकर लगी गाड़ियों का दावा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। यह संख्या व्यंग्य और जनचर्चा के संदर्भ में साझा की जाती है। बावजूद इसके, अनधिकृत वीआईपी स्टिकरों का मुद्दा लंबे समय से सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है और नागरिकों की मांग है कि इस पर प्रभावी एवं समान रूप से कानून का पालन सुनिश्चित किया जाए।














सेवा की विरासत से वैश्विक नेतृत्व तक: डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने समाजसेवा को दिया नया आयाम, महाराष्ट्र से विश्व पटल तक बनाई विशिष्ट पहचान।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा केवल व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं होती, बल्कि वह पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार, समर्पण और जनहित की भावना का विस्तार होती है। कुछ व्यक्तित्व अपनी अलग पहचान बनाते हैं, तो कुछ अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित आदर्शों को समय के अनुरूप नई दिशा देकर उन्हें और अधिक व्यापक बनाते हैं। डॉ. सागर प्रकाश घाडगे का सार्वजनिक जीवन इसी प्रेरणादायी परंपरा का सशक्त उदाहरण माना जाता है, जिन्होंने समाजसेवा की विरासत को महाराष्ट्र की सीमाओं से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नई पहचान दिलाई है।

डॉ. घाडगे के व्यक्तित्व और कार्यों की नींव उनके पिता स्वर्गीय कर्मवीर प्रकाश घाडगे द्वारा स्थापित सेवा, संघर्ष और जनकल्याण की परंपरा में दिखाई देती है। स्वर्गीय प्रकाश घाडगे का जन्म महाराष्ट्र के सातारा जिले के खटाव तालुका स्थित नांदोशी गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए मुंबई पहुंचे। ग्रामीण परिवेश से मिले संस्कार, कठिन परिश्रम की भावना और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता ने उन्हें छात्र आंदोलन, संगठन निर्माण, जनजागरण और आमजन के अधिकारों के लिए संघर्षपूर्ण सार्वजनिक जीवन की ओर अग्रसर किया।

मुंबई से प्रारंभ हुआ उनका सामाजिक और जनआंदोलन का सफर धीरे-धीरे पूरे महाराष्ट्र में फैल गया। समाजहित, न्याय, संगठन शक्ति और लोकसेवा को केंद्र में रखकर उन्होंने जिस कार्य संस्कृति की स्थापना की, वह हजारों सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। उनके नेतृत्व में समाज के विभिन्न वर्गों को संगठित करने तथा जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की परंपरा विकसित हुई।

स्वर्गीय प्रकाश नाना घाडगे के निधन के बाद यह अपेक्षा थी कि उनके द्वारा स्थापित सेवा का यह अभियान शायद धीमा पड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके पुत्र डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने इस विरासत को न केवल आगे बढ़ाया, बल्कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप उसे आधुनिक दृष्टिकोण, व्यापक सोच और वैश्विक विस्तार भी प्रदान किया। उन्होंने संस्था निर्माण, सामाजिक नेतृत्व और जनसेवा को महाराष्ट्र से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक स्थापित करने का उल्लेखनीय कार्य किया।

विशेष रूप से यह तथ्य उल्लेखनीय माना जाता है कि चालीस वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले ही डॉ. घाडगे ने अनेक राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की स्थापना की, विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया तथा विविध क्षेत्रों को जोड़ने वाला प्रभावशाली नेतृत्व विकसित किया। इतनी कम आयु में उनकी उपलब्धियों का विस्तार और प्रभाव सार्वजनिक जीवन में कई दशकों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का विषय बन चुका है।

आज उनके नेतृत्व से देशभर के हजारों श्रमिक, उद्यमी, उद्योगपति, पत्रकार, अधिवक्ता, चिकित्सक, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिला प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के नागरिक राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से जुड़े हुए हैं। संस्था निर्माण, जनसंपर्क, सामाजिक समन्वय और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में उनका योगदान लगातार व्यापक होता जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. सागर प्रकाश घाडगे के कार्यों में परंपरा और आधुनिक नेतृत्व का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। एक ओर वे अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित सेवा और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक समय की चुनौतियों के अनुरूप संस्थागत नेतृत्व, राष्ट्रीय समन्वय और वैश्विक सहभागिता को नई दिशा दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में विकसित संस्थाएं आज समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास, सहयोग और सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं।

समाजसेवा के क्षेत्र में उनका दृष्टिकोण केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थाओं के माध्यम से स्थायी और दीर्घकालिक परिवर्तन लाने पर केंद्रित है। यही कारण है कि उन्होंने व्यक्तिगत पहचान से अधिक संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर बल दिया और समाज के विविध वर्गों को एक साझा मंच पर लाने का सतत प्रयास किया।

डॉ. घाडगे का मानना है कि किसी भी सामाजिक नेतृत्व की वास्तविक सफलता पुरस्कारों या पदों से नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से मापी जाती है। उनके शब्दों में—

"पुरस्कार मेरा लक्ष्य नहीं होते; वे समाज द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास की स्वीकृति मात्र हैं। लोगों के चेहरों पर दिखाई देने वाली संतुष्टि की मुस्कान ही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।"

उनकी नेतृत्व शैली का सार भी सेवा और विश्वास पर आधारित है। वे कहते हैं—

"नेतृत्व का अर्थ पद नहीं, बल्कि विश्वास है। नेतृत्व का अर्थ सत्ता नहीं, बल्कि सेवा है। और नेतृत्व का अर्थ स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना जीवन समर्पित करना है।"

आज डॉ. सागर प्रकाश घाडगे का जीवन-प्रवास केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं माना जाता, बल्कि यह संस्कार, समर्पण, संस्था निर्माण, मूल्य आधारित नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की निरंतर विकसित होती परंपरा का सशक्त उदाहरण बन चुका है। महाराष्ट्र की धरती पर बोए गए समाजसेवा के बीजों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का उनका प्रयास उन्हें समकालीन सामाजिक नेतृत्व की अग्रणी पंक्ति में स्थापित करता है।













पुणे के स्वामी चंदन प्रकाश आश्रम ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप, स्वामी देव प्रकाश महाराज के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से बिक्री का दावा।


 






पुणे/उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

पुणे स्थित स्वामी चंदन प्रकाश आश्रम ट्रस्ट की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। आरोप है कि ट्रस्ट की बहुमूल्य संपत्ति की बिक्री स्वामी देव प्रकाश महाराज के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर की गई। इस मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 तक स्वामी देव प्रकाश महाराज स्वामी चंदन प्रकाश आश्रम ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी थे। आरोप है कि उन्हें दबाव बनाकर ट्रस्टी पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद ट्रस्ट के प्रशासन और संपत्तियों से जुड़े निर्णयों में बदलाव हुए।

बताया जा रहा है कि वर्तमान में स्वामी देव प्रकाश महाराज उल्हासनगर-5 स्थित स्वामी शांति प्रकाश आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। आरोप है कि उनके ट्रस्ट से अलग होने के बाद उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर पुणे स्थित ट्रस्ट की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन का सौदा किया गया।

यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल ट्रस्ट की संपत्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह फर्जी दस्तावेज, कूटरचना, धोखाधड़ी और ट्रस्ट संपत्ति के कथित दुरुपयोग जैसे गंभीर कानूनी पहलुओं से भी जुड़ सकता है।

हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी सामने आनी बाकी है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग तेज हो गई है।













विधानसभा में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा, डांस बार संचालन के नियम होंगे और कड़े।

(फाइल फोटो) 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में डांस बारों के संचालन पर और अधिक सख्ती करने का फैसला किया है। डांस बार संचालकों द्वारा कानून की खामियों का फायदा उठाकर नियमों से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में व्यापक संशोधन करने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार डांस बारों के संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की कानूनी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ डांस बार संचालक डांस बार संबंधी कानून के तहत लाइसेंस लेने के बजाय अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर संचालन की अनुमति प्राप्त कर लेते हैं। इससे वे डांस बारों पर लागू सख्त नियमों और प्रतिबंधों से बच निकलते हैं। इस खामी को दूर करने के लिए सरकार मुंबई पुलिस अधिनियम में संशोधन करेगी, ताकि ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को केवल संशोधित कानून के तहत ही लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य हो और नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

यह घोषणा कांग्रेस विधायक नाना पटोले द्वारा विधानसभा में ठाणे जिले में संचालित डांस बारों का मुद्दा उठाए जाने के बाद की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पहले से ही डांस बारों के नियमन के लिए कई कठोर नियम लागू कर चुकी है, लेकिन कुछ संचालक कानूनी प्रावधानों की कमजोरियों का लाभ उठाकर इन नियमों से बचने का प्रयास करते हैं। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसी सभी खामियों को पूरी तरह समाप्त करना है।

फडणवीस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार तेज आवाज में डीजे बजाने और ध्वनि प्रदूषण के मामलों को लेकर भी गंभीर है। उन्होंने बताया कि मौजूदा शोर प्रदूषण नियमों के तहत अनुमति दी जाती है और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले डांस बारों और अन्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने के लिए भी कानून में आवश्यक संशोधन करने पर विधि एवं न्याय विभाग के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं और कानून-व्यवस्था दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील है। हालांकि, किसी भी कानून में संशोधन करते समय संवैधानिक अधिकारों और न्यायालयों द्वारा निर्धारित कानूनी सीमाओं का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में कानून का दुरुपयोग न हो और वह न्यायिक कसौटी पर भी खरा उतर सके।

उन्होंने यह भी बताया कि डांस बारों के संचालन में अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन में यदि किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का उद्देश्य डांस बारों के संचालन में पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।













उल्हासनगर महापालिका में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई, एसीबी में पकड़े गए अधिकारियों से हटे महत्वपूर्ण पद; राज असरोंडकर ने स्थगित किया आमरण अनशन।




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रस्तावित बड़ा आंदोलन फिलहाल टल गया है। 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के प्रणेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राज असरोंडकर ने प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद 30 जून से प्रस्तावित अपना अनिश्चितकालीन आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की है।

महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाळे के निर्देश पर अनधिकृत निर्माण निष्कासन विभाग के नोडल अधिकारी गणेश शिंपी से नोडल अधिकारी का पदभार तथा सुरक्षा अधिकारी यशवंत सगळे से सुरक्षा अधिकारी का पदभार वापस ले लिया गया है। यशवंत सगळे का तबादला डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्ययन केंद्र में कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष मामलों की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से शासन के आदेशों का पालन किया जाएगा।

शासन के आदेशों के पालन की मांग पर चला आंदोलन

राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को ऐसे महत्वपूर्ण पद नहीं दिए जाने चाहिए, जिनमें जनसंपर्क, संवेदनशील जिम्मेदारियां या नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार शामिल हो। इसके बावजूद उल्हासनगर महानगरपालिका में ऐसे कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने का आरोप लगाया गया था।

'कायद्याने वागा' लोकचळवळ का दावा है कि महानगरपालिका में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रंगेहाथ पकड़े गए लगभग 40 कर्मचारी-अधिकारी रहे हैं। इनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 23 कर्मचारी कार्यरत हैं। आरोप है कि इनमें से कई को शासन के निर्देशों की अनदेखी कर महत्वपूर्ण पदभार सौंपे गए थे। इन्हीं पदभारों को वापस लेने और शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था।

दो चरणों के आंदोलन के बाद अनशन की घोषणा

इस मांग को लेकर 16 जून और 23 जून को महानगरपालिका मुख्यालय के सामने आंदोलन किया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप था कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद राज असरोंडकर ने 30 जून से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की थी, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन

आंदोलन को कांग्रेस की नगरसेविका एवं विपक्ष की नेता अंजली साळवे का समर्थन मिला। उन्होंने इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी सौंपा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रोहित साळवे ने भी आंदोलन का सार्वजनिक समर्थन किया। इसके अलावा स्वराज्य संगठन सहित कई सामाजिक संगठनों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

सोमवार को 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के मीडिया समन्वयक प्रफुल केदारे, स्वराज्य संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट जय गायकवाड, समर्पण संस्था के अध्यक्ष मनोज कोरडे तथा कानून समन्वयक एडवोकेट वनिता ओवळेकर ने मुख्यालय उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले से मुलाकात कर प्रशासन से नियमों और कानूनों का स्वतः पालन करने की अपेक्षा व्यक्त की।

प्रशासन के आश्वासन के बाद बदला फैसला

उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले ने राज असरोंडकर से चर्चा कर उनसे आमरण अनशन न करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रत्येक मामले की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से संबंधित अधिकारियों से महत्वपूर्ण पदभार वापस लिए जाएंगे।

चर्चा के दौरान राज असरोंडकर ने "नोडल अधिकारी" जैसे कथित अवैध पद पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन ने उसी दिन गणेश शिंपी और यशवंत सगळे के पदभार वापस लेने की कार्रवाई कर दी।

आंदोलन फिलहाल स्थगित, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष रहेगा जारी

प्रशासन द्वारा सकारात्मक कदम उठाए जाने को देखते हुए राज असरोंडकर ने अपने सहयोगियों से चर्चा के बाद अनिश्चितकालीन आमरण अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। भविष्य में उल्हासनगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर एक संयुक्त महासंगठन बनाया जाएगा और महानगरपालिका सहित अन्य सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष पहले की तरह जारी रहेगा।

आंदोलन को रिपब्लिकन पार्टी के नेता नाना बागुल, सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति तायडे, एडवोकेट कल्पेश माने, पत्रकार प्रमोद रंदिल, प्रो. प्रवीण माळवे, शिवाजी म्हस्के, सतीश एटांबे, अभिमन्यू निकम, मनोज जगताप, विश्वास पाटील, हरेश ब्राह्मणे और देवेंद्र कांबळे सहित अनेक लोगों का समर्थन मिला। वहीं, परिमंडल-4 के पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे, गोपनीय विभाग के अधिकारियों तथा कई पत्रकारों के सहयोग के लिए राज असरोंडकर ने सभी का आभार व्यक्त किया।