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सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को मिला प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान 2026"


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं जनहितैषी व्यक्तित्व डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण, जनसेवा तथा मानव एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और प्रभावशाली योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

भारत गौरव फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान देश के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समर्पित है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, नागरिक जागरूकता बढ़ाने तथा राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. घाडगे का चयन उनके वर्षों से चले आ रहे समर्पित सामाजिक कार्यों, जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को ध्यान में रखते हुए किया गया।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपने कार्यकाल के दौरान सामाजिक न्याय, समान अवसर, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने, जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित विभिन्न जनहितकारी अभियानों ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विशेष रूप से मानव और पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके प्रयासों की व्यापक सराहना की गई है। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथा सेवा भाव ने उन्हें एक जिम्मेदार और प्रेरणादायी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है। उनके कार्यों में सदैव पारदर्शिता, नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा है।

इस अवसर पर जारी आधिकारिक प्रशस्ति में कहा गया है—

"सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण और मानवीय सेवा के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता तथा एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को भारत भूषण सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाता है।"

भारत भूषण सम्मान को देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है जिनकी सेवाएं व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर व्यापक समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। डॉ. घाडगे का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब समाज को संवेदनशील, जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब डॉ. सागर प्रकाश घाडगे जैसे व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य करते हैं। उनका जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि समर्पण, सेवा, साहस और नैतिक मूल्यों के आधार पर समाज में सार्थक एवं स्थायी परिवर्तन संभव है।

देश के विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और जनसेवी संगठनों ने डॉ. घाडगे को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर जनसेवा की कामना की है।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को "भारत भूषण सम्मान 2026" प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

"समाज सेवा • न्याय के प्रति प्रतिबद्धता • राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण'














उल्हासनगर के कथित बोगस सनद मामले में पत्रकार दिलीप मालवणकर ने मुख्यमंत्री और महसूल मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में कथित बोगस सनद (फर्जी प्रमाणपत्र) प्रकरण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार एवं अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दिलीप मालवणकर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वर्षों से चल रही कथित अनियमितताओं के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।

मालवणकर का आरोप है कि उल्हासनगर महानगरपालिका का टाउन प्लानिंग विभाग लंबे समय से विवादों के घेरे में रहा है। बिना वैध अनुमति निर्मित इमारतों को नियमित करने, एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) में कथित हेरफेर तथा टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) से जुड़े मामलों में समय-समय पर गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। उनका कहना है कि विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति और पदस्थापन को लेकर भी प्रतिस्पर्धा रहती है तथा इन पदों के लिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं।

पूर्व प्रशासक के कार्यकाल पर सवाल

दिलीप मालवणकर ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे के कार्यकाल के दौरान कथित रूप से सैकड़ों गैरकानूनी सनदें जारी की गईं, जिनकी विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। उनका दावा है कि इन मामलों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने बाकी हैं और जांच लंबित रहने से अनेक प्रश्न अनुत्तरित बने हुए हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रांत अधिकारी (एसडीओ) विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में भी कथित रूप से इसी प्रकार की प्रक्रिया जारी है। मालवणकर का कहना है कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने का आरोप

मालवणकर के अनुसार, कई मामलों में प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में अपील स्तर तक कथित लेनदेन की व्यवस्था होने की चर्चाएं सामने आई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दुरुपयोग का आरोप

दिलीप मालवणकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2005 से पूर्व के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर दिए गए निर्देशों का कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किए गए और बाद में प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए।

मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मालवणकर ने मुख्यमंत्री तथा राज्य के महसूल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि पूर्व प्रशासक जगतसिंह गिरासे और वर्तमान प्रांत अधिकारी विजयानंद शर्मा के कार्यकाल में जारी सभी सनदों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने संबंधित कार्यालयों की सीसीटीवी फुटेज की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, आर्थिक लेनदेन की पड़ताल तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस मुद्दे ने शहर की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिकों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला उल्हासनगर के सबसे बड़े कथित प्रशासनिक और राजस्व घोटालों में से एक साबित हो सकता है।














आरटीओ की नोटिस के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! उल्हासनगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर फिर दिखी लाल-नीली फ्लैशिंग बत्ती, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देशभर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वर्षों पहले वाहनों पर लाल-नीली बत्तियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन में नियमों की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले की सरकारी गाड़ी पर प्रतिबंधित फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी मुद्दे पर कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से वही ‘जिगजैग’ फ्लैशिंग बत्ती दिखाई देने से प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

आरटीओ की कार्रवाई के बाद भी नहीं हटी बत्ती

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कल्याण आरटीओ ने आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर अनधिकृत फ्लैशिंग बत्ती लगाए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था। उम्मीद की जा रही थी कि इसके बाद संबंधित वाहन से प्रतिबंधित उपकरण हटा दिए जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

सोमवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए आयुक्त मनीषा आव्हाले जिस सरकारी वाहन से पहुंचीं, उस पर फिर वही फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती देखी गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।

कल्याण आरटीओ ने जारी की आधिकारिक नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याण उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी आशुतोष बारकुल द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को आधिकारिक नोटिस जारी की गई है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रमांक MH-05-FP-9445 पर लाल एवं नीली फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। आरटीओ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी वाहन पर इस प्रकार की फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग वैध नहीं है।

नोटिस के माध्यम से संबंधित वाहन से फ्लैशिंग बत्ती तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि महानगरपालिका के वाहन विभाग के उप आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

क्या कहते हैं नियम?

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के उद्देश्य से देशभर में लाल बत्ती के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किया था। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पद और शक्ति प्रदर्शन की मानसिकता को समाप्त करना तथा आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच समानता का संदेश देना था।

वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन विभाग और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लाल अथवा नीली फ्लैशिंग बत्तियों के उपयोग की अनुमति है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सीमित संवैधानिक पदों को छोड़कर किसी भी मंत्री, जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी को अपने वाहन पर ऐसी बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से कानून का सम्मान करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनका पालन भी बिना किसी अपवाद के किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

आरटीओ द्वारा जारी नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस आदेश का तत्काल पालन करेगा? क्या आयुक्त की सरकारी गाड़ी से प्रतिबंधित फ्लैशिंग बत्ती हटाई जाएगी, या फिर यह विवाद आगे और बढ़ेगा?

फिलहाल आरटीओ की सख्त नोटिस के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है और आम जनता की नजरें अब आयुक्त कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।















उल्हासनगर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की तैयारी, सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी होंगे एकजुट।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के कई सामाजिक संगठन, नागरिक मंच और शहर के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवी जल्द ही FDA आयुक्त Tukaram Munde से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित बैठक में शहर से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल शहर में खाद्य सुरक्षा, अवैध गुटखा कारोबार, जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों तथा आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों द्वारा तैयार किए गए शिकायत पत्र और सुझाव भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में FDA द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे सख्त अभियान और आयुक्त तुकाराम मुंढे की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय संगठनों ने सीधे संवाद का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। इस मुलाकात के माध्यम से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन शहर के सामाजिक और नागरिक संगठनों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि यह बैठक होती है, तो उल्हासनगर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 से सम्मानित हुए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण एवं राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान।


नई दिल्ली/मुंबई : दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण, जनजागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवक, श्रमिक नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को प्रतिष्ठित "भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दीर्घकालिक समर्पण, उत्कृष्ट नेतृत्व तथा जनकल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति और सराहना का प्रतीक है।

डॉ. घाडगे को प्राप्त यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी गौरव का विषय है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

समाज परिवर्तन के सशक्त सूत्रधार

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपना जीवन समाज के वंचित, पीड़ित, श्रमिक, उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। श्रमिक अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकार संरक्षण, उपभोक्ता जागरूकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

उनके नेतृत्व में अनेक जनहितकारी अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक पहलों को सफलतापूर्वक संचालित किया गया, जिनसे हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर सामाजिक सद्भाव, जनसहभागिता और सामुदायिक विकास को नई दिशा प्रदान की है।

नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण में महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. घाडगे ने सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध प्रभावी जनजागरण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से नशामुक्ति अभियान, अपराध विरोधी जागरूकता अभियान तथा आतंकवाद विरोधी जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने युवाओं और नागरिकों को राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व और कानून के प्रति सम्मान का संदेश दिया है।

उनके प्रयासों ने अनेक युवाओं को नशे, अपराध और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और जनजागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय माना जाता है।

उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—

• श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर संघर्ष एवं प्रभावी नेतृत्व।

• मानवाधिकार संरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय जनजागरण अभियान।

• उपभोक्ता अधिकारों और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु उल्लेखनीय कार्य।

• वंचित एवं उपेक्षित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास।

• नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण अभियानों में सक्रिय योगदान।

• पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सामाजिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण सहभागिता।

• युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने हेतु प्रेरणादायी कार्य।

• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से जनजागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देना।

• बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक के रूप में समाजहित से जुड़े नवाचारपूर्ण अभियानों का सफल संचालन।

राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा गौरव

"भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है। डॉ. घाडगे को यह सम्मान मिलना समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक तथा मानवाधिकार क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, संगठनों और नागरिकों ने इस उपलब्धि पर डॉ. घाडगे को शुभकामनाएँ देते हुए उनके योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की दूरदृष्टि, संघर्षशीलता, नेतृत्व क्षमता और समाजहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि समर्पण, सेवा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

समाज के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

"आपकी दृष्टि हमारी प्रेरणा है, आपकी सेवा समाज की शक्ति है।"

भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ।














उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।