BREAKING NEWS
national

Slider

national

Slider Right

Maharashtra

उल्हासनगर

Ulhasnagar/block-2

कल्याण-डोंबिवली

Kalyan-Dombivli/block-2

ठाणे

Thane/block-3

क्राइम

Crime/block-7

महाराष्ट्र

Maharashtra/block-8

मुंबई

Mumbai/block-9

मनोरंजन

entertainment/block-4

राष्ट्रीय खबर

national/block-1

खेल

sports/block-6

बिजनेस

Business/block-6

लाइफस्टाइल

lifestyle/block-5

सियासत

politics

Latest Articles

UMC की डिजिटल व्यवस्था पर सवाल: प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बाद भी पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम बरकरार।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के सैकड़ों प्रॉपर्टी धारकों का आरोप है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और महानगरपालिका से आधिकारिक प्रॉपर्टी ट्रांसफर (टाइटल म्यूटेशन) लेटर प्राप्त होने के बावजूद उनकी संपत्तियों का स्वामित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप नागरिक महीनों तक अपने ही अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनपा कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार इंडेक्स-2, सेल डीड, स्टांप ड्यूटी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है। दस्तावेजों की जांच के उपरांत मनपा प्रशासन स्वामित्व हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए आधिकारिक ट्रांसफर लेटर भी जारी कर देता है। लेकिन इसके बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाता, जिससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।

कागजों पर नया मालिक, ऑनलाइन सिस्टम में अब भी पुराना नाम

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिकों के हाथ में मनपा द्वारा जारी वैध ट्रांसफर लेटर मौजूद होता है, लेकिन जब वे प्रॉपर्टी टैक्स भरने, रिकॉर्ड डाउनलोड करने या ऑनलाइन विवरण देखने के लिए महानगरपालिका के पोर्टल पर जाते हैं, तो वहां अब भी पुराने मालिक या डेवलपर का नाम दिखाई देता है। इससे नागरिकों को यह साबित करने में भी कठिनाई होती है कि संबंधित संपत्ति अब उनके नाम पर है।

बैंक लोन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर असर

ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने का सबसे बड़ा असर बैंकिंग और वित्तीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। कई बैंक होम लोन, मॉर्गेज लोन अथवा संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं। जब पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है, तो ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई मामलों में आवेदन लंबित हो जाते हैं।

इसके अलावा नामांतरण से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन तथा भविष्य में संपत्ति के विक्रय या हस्तांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

मनपा कार्यालयों के लगातार चक्कर, लेकिन समाधान नहीं

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इस समस्या को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी "सर्वर डाउन" होने की बात कही जाती है, कभी "डेटा अपडेट हो रहा है" का हवाला दिया जाता है, तो कभी अगले सप्ताह आने को कहा जाता है। कई नागरिकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस कारण लोगों का समय, पैसा और श्रम तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कई नागरिकों को नौकरी या व्यवसाय छोड़कर बार-बार मनपा कार्यालय जाना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।

नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष

एक पीड़ित प्रॉपर्टी धारक ने बताया कि उन्हें लगभग छह महीने पहले महानगरपालिका से प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर मिल चुका है, लेकिन आज भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दिखाई दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया।

इसी प्रकार अन्य नागरिकों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, तब तक ट्रांसफर लेटर का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।

डिजिटल व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

उल्हासनगर महानगरपालिका समय-समय पर कर प्रणाली के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। 'प्रोजेक्ट मंथन' जैसे अभियानों के माध्यम से रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और कर संग्रह प्रणाली को डिजिटल बनाने की बात भी कही गई थी।

लेकिन ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होना इन दावों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि विभागीय स्तर पर डेटा एंट्री या सिस्टम अपडेट समय पर नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

शहर के समाजसेवियों, कर विशेषज्ञों और नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही इसके लिए जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर जारी होने के साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जाए।

नामांतरण प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (SLA) तय की जाए।

लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने हेतु पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।

जब महानगरपालिका स्वयं डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब स्वामित्व हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रक्रिया का महीनों तक अधूरा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर उनके विश्वास को भी कमजोर करता है। अब देखना यह होगा कि मनपा प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है और नागरिकों को राहत कब मिलती है।


















ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ चुनाव 2026–2028: दिलीप शिंदे बने अध्यक्ष, नई कार्यकारिणी का हुआ गठन।


 

ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ के द्विवार्षिक चुनाव (2026–2028) का परिणाम रविवार, 19 जुलाई 2026 को घोषित किया गया। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लेकर नई कार्यकारिणी का चयन किया।

घोषित परिणामों के अनुसार दिलीप शिंदे को संघ का अध्यक्ष चुना गया। वहीं दीपक शेलार कार्याध्यक्ष, निलेश मंडलिक उपाध्यक्ष तथा राजेश शेटकर कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए। महासचिव पद के लिए राजीव डाके और प्रसाद सकट का चयन किया गया।

नई कार्यकारिणी में निकेश शार्दुल, अमर राजभर, सचिन देशमाने, गजानन हरिमकर, प्रफुल्ल गांगुर्डे और नितीन दूधसागर को कार्यकारिणी सदस्य चुना गया है। वहीं सारिका साळुंखे महिला कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित हुई हैं।

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पत्रकारों के हितों की रक्षा, संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा पत्रकारिता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने संगठन में सभी सदस्यों को साथ लेकर चलने और पत्रकारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प भी व्यक्त किया।

नवनिर्वाचित पदाधिकारी

अध्यक्ष: दिलीप शिंदे

कार्याध्यक्ष: दीपक शेलार

उपाध्यक्ष: निलेश मंडलिक

कोषाध्यक्ष: राजेश शेटकर

महासचिव: राजीव डाके

महासचिव: प्रसाद सकट

कार्यकारिणी सदस्य: निकेश शार्दुल, अमर राजभर, सचिन देशमाने, गजानन हरिमकर, प्रफुल्ल गांगुर्डे, नितीन दूधसागर

महिला कार्यकारिणी सदस्य: सारिका साळुंखे

















'आरोपित अधिकारियों को तुरंत हटाओ'— राष्ट्र कल्याण पार्टी का अल्टीमेटम, 21 जुलाई को ठाणे में प्रदर्शन।


ठाणे: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अब भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में राष्ट्र कल्याण पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश तिवारी ने घोषणा की है कि यदि ऐसे अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पदभार से नहीं हटाया गया तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेश तिवारी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 8 जुलाई को उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त कार्यालय के बाहर आयुक्त कक्ष के सामने राष्ट्र कल्याण पार्टी एवं छावा संगठन के निखिल गोळे के नेतृत्व में धरना आंदोलन किया गया था। आंदोलन के दौरान प्रशासन को भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने की मांग वाला ज्ञापन भी सौंपा गया था।

आंदोलन के बाद महानगरपालिका प्रशासन ने लिखित उत्तर देते हुए बताया कि गणेश शिंपी, जो मूल रूप से लघुलेखक (वर्ग-3) के पद पर हैं और वर्तमान में उप-आयुक्त (प्रभाग समिति क्रमांक-2), कर निर्धारक एवं संकलक तथा चुनाव विभाग प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं, उनके संदर्भ में एसआईआर (Summary Inquiry Report) प्रक्रिया जारी है। प्रशासन के अनुसार यह प्रक्रिया अक्टूबर तक चलेगी, इसलिए उसके पूर्ण होने तक उनके खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई संभव नहीं है।

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने प्रशासन के इस जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि जांच लंबित होने का हवाला देकर भ्रष्टाचार के आरोपित अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बनाए रखना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

तिवारी ने बताया कि गणेश शिंपी के अलावा अजीत गोवारी (वरिष्ठ लिपिक), संजय पवार (कनिष्ठ अभियंता, नगररचना विभाग), अनिल खतुराणी (वरिष्ठ लिपिक, कर विभाग), अंकुश कदम (लिपिक, भंडार विभाग), राजा बुलानी (लिपिक एवं विधि विभाग प्रमुख), छाया डगळे (लिपिक, विधि विभाग), भानु परमार (लिपिक, कर विभाग) सहित अन्य कर्मचारियों को भी, जो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा कार्रवाई का सामना कर चुके हैं, महत्वपूर्ण पदभार दिया गया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि संजय पवार, बलराम गिधवा, जगदीश परमार सहित कुल 23 अधिकारी एवं कर्मचारी, जिन्हें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़ा गया था, अब भी विभिन्न विभागों में प्रभावशाली जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

शैलेश तिवारी ने कहा कि यदि इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से तत्काल प्रभाव से महत्वपूर्ण पदभार वापस नहीं लिया गया तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

राष्ट्र कल्याण पार्टी ने मांग की है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का सामना कर रहे अधिकारियों को जांच पूरी होने तक किसी भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक अथवा वित्तीय जिम्मेदारी से दूर रखा जाए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता का विश्वास कायम रह सके।

















15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों को मंजूरी मिलने पर विधायक किसन कथोरे ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार जताया। इस फैसले से लाखों यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।


 


बदलापुर: दिनेश मीरचंदानी

बदलापुर से मुंबई के बीच प्रतिदिन नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत देने वाला निर्णय सामने आया है। वर्षों से चली आ रही 15 डिब्बों वाली उपनगरीय (लोकल) ट्रेनों की मांग को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। इस महत्वपूर्ण निर्णय पर भाजपा विधायक किसन कथोरे ने केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इसे बदलापुर सहित पूरे ठाणे जिले के रेल यात्रियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

विधायक किसन कथोरे ने कहा कि बदलापुर महाराष्ट्र के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। बढ़ती आबादी और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के कारण लंबे समय से 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब इस मांग को स्वीकृति मिलने से यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत मिलेगी, ट्रेनों की यात्री क्षमता बढ़ेगी और दैनिक सफर अधिक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक बनेगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक रेल सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि लाखों यात्रियों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलापुर, अंबरनाथ, उल्हासनगर, कल्याण और आसपास के क्षेत्रों से मुंबई आने-जाने वाले यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

विधायक कथोरे ने इस महत्वपूर्ण मांग को मंजूरी देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस का बदलापुर क्षेत्र के सभी यात्रियों की ओर से हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से महाराष्ट्र की रेल व्यवस्था लगातार आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बन रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी बदलापुर और ठाणे जिले की रेल अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए इसी प्रकार सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेल नेटवर्क के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं और यात्रियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है, जिसका लाभ आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र को मिलेगा।

इस अवसर पर भाजपा कोंकण विभाग आईटी सेल के संयोजक एवं ठाणे जिला ग्रामीण के उपाध्यक्ष श्री मिलिंद धारवाडकर ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बदलापुर के नागरिकों, विशेषकर प्रतिदिन लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों ने वर्षों तक धैर्य और संयम के साथ इस मांग के पूरा होने का इंतजार किया। उनका यह धैर्य और संघर्ष सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि 15 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनों की शुरुआत से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि भीड़ का दबाव भी कम होगा और दैनिक यात्रा पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तथा सुरक्षित बनेगी। यह निर्णय बदलापुर क्षेत्र के समग्र विकास और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।


















पंढरपुर वारी में शामिल हुए भाजपा विधायक किसन कथोरे, विठ्ठल चरणों में टेका माथा; समाज के सुख-समृद्धि की प्रार्थना।


 




पंढरपुर: दिनेश मीरचंदानी

आषाढ़ी वारी के पावन अवसर पर विधायक किसन कथोरे ने पंढरपुर पहुंचकर भगवान विठ्ठल के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक शीश नवाया तथा वारकरी संप्रदाय के साथ वारी में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने वारी की अनुशासनप्रिय परंपरा, सादगी, सेवा भावना और भक्ति के अद्वितीय स्वरूप का निकट से अनुभव किया। विधायक कथोरे ने कहा कि पंढरपुर की वारी केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा, समर्पण, समानता और मानवता का दिव्य महापर्व है, जो समाज को एकता और सद्भाव का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि टाल-मृदंग की मधुर ध्वनि, "ज्ञानोबा-तुकाराम" के अखंड नामस्मरण और लाखों वारकरियों की अटूट श्रद्धा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। इस आध्यात्मिक यात्रा का प्रत्येक कदम समाजसेवा, जनकल्याण और जनता के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है तथा जीवन को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

विधायक कथोरे ने कहा कि पंढरपुर की वारी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का सबसे जीवंत स्वरूप है। यहां जाति, धर्म, वर्ग और आर्थिक स्थिति का कोई भेदभाव नहीं होता, बल्कि सभी श्रद्धालु एक समान भाव से भगवान विठ्ठल की भक्ति में लीन होकर प्रेम, सेवा और समानता का संदेश देते हैं। यही वारी की सबसे बड़ी विशेषता है, जिसने सदियों से समाज को जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य किया है।

उन्होंने वारकरी संप्रदाय की अनुशासित जीवनशैली, संत परंपरा और सेवा संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संतों द्वारा दिखाया गया मार्ग आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। वारी हमें सिखाती है कि सेवा ही सच्ची भक्ति है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।

भगवान विठ्ठल के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हुए विधायक किसन कथोरे ने प्रदेश एवं देशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि ईश्वर सभी को समाजसेवा की शक्ति प्रदान करें तथा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सद्भाव बना रहे।

अपने संदेश के अंत में उन्होंने वारकरी परंपरा के पावन उद्घोष—

॥ पुंडलिक वरदे हरि विठ्ठल ॥
॥ श्री ज्ञानदेव तुकाराम ॥

—के साथ भगवान विठ्ठल से समस्त मानव समाज के कल्याण की प्रार्थना की।























उल्हासनगर में अवैध गुटखे का काला कारोबार जारी, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के रडार पर संदिग्ध नेटवर्क।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रतिबंध के बावजूद उल्हासनगर शहर में अवैध गुटखे का कारोबार कथित रूप से आज भी धड़ल्ले से जारी है। शहर के विभिन्न इलाकों में चोरी-छिपे गुटखा और सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रतिबंधित उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और इससे जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में अवैध गुटखा कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उल्हासनगर के कुछ संदिग्ध कारोबारी भी विभाग की निगरानी में बताए जा रहे हैं। विभाग द्वारा ऐसे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है, जो प्रतिबंधित गुटखे के भंडारण, परिवहन और वितरण में कथित रूप से शामिल हो सकते हैं।

जानकारों का कहना है कि अवैध गुटखे का कारोबार संगठित तरीके से संचालित किया जाता है, जिसमें सप्लाई चेन, गोदाम और वितरण नेटवर्क का उपयोग किया जाता है। ऐसे मामलों में केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध गुटखे के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, शहर के प्रमुख बाजारों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर नियमित छापेमारी कर इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जाए।

हालांकि, इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से उल्हासनगर के किसी विशेष कारोबारी के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई या नाम की पुष्टि नहीं की गई है। यदि विभाग द्वारा अभियान चलाया जाता है, तो इससे अवैध गुटखा कारोबार पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।यदि यह खबर प्रकाशन के लिए है, तो इसे उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों या पुष्टि किए गए तथ्यों के अनुसार और अधिक सटीक बनाया जा सकता है।

Direct Email Contacts:

Food Complaints: jc-foodhq@gov.inDrug

Complaints: jchq.fda-mah@nic.in or Hqfdadesk13@gmail

comVigilance: pavigilancefda@gmail.com

Mumbai FDA Office Contact Numbers: 022-26590548 or 022-2612265

Maharashtra State FDA, call the toll-free helpdesk number at 1800 222 365.

















उल्हासनगर के चारो श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, धर्मादाय आयुक्त और मनपा से कार्रवाई की अपील।


 







उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के विभिन्न श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के नाम पर कथित अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने धर्मादाय आयुक्त, ठाणे विभाग तथा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शहर के चार पंजीकृत श्मशान घाट ट्रस्टों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिवारों से कथित रूप से अनुचित एवं अवैध तरीके से राशि वसूली जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है।

इन चार ट्रस्टों पर उठे सवाल

शिकायत पत्र के अनुसार धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत निम्नलिखित ट्रस्ट वर्तमान में शहर के विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कर रहे हैं—

प्रबंधक श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-1)

श्मशान घाट स्वर्गधाम आश्रम (उल्हासनगर-3)

प्रबंधक मुक्तिधाम सामाजिक संस्था (उल्हासनगर-4)

प्रबंधक स्वर्गद्वार श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-5)

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन सभी ट्रस्टों के संचालन और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मुफ्त लकड़ी उपलब्ध होने के बावजूद परिजनों से वसूली का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि उल्हासनगर महानगरपालिका अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी नि:शुल्क उपलब्ध कराती है तथा इसकी विधिवत रसीद भी संबंधित श्मशान घाटों के माध्यम से मृतकों के परिजनों को दी जाती है।

इसके बावजूद आरोप है कि श्मशान घाट संचालित करने वाले ट्रस्ट अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों से रसीद बुक के माध्यम से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये अथवा उससे अधिक राशि की मांग करते हैं। शिकायतकर्ता ने इसे अवैध वसूली करार देते हुए सवाल उठाया है कि जब आवश्यक सामग्री पहले से ही महानगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, तब अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है।

उन्होंने मांग की है कि ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि यह धन किस उद्देश्य और किस मद में खर्च किया गया।

ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों द्वारा धर्मादाय विभाग में प्रस्तुत की गई ऑडिट रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी तो धर्मादाय विभाग ने उसे स्वीकार कैसे किया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अधूरी अथवा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले ट्रस्टों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने मांग की है कि सभी ट्रस्टों की ऑडिट रिपोर्ट, आय-व्यय का पूरा विवरण तथा वित्तीय अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं ताकि नागरिकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

महानगरपालिका और ट्रस्टों के अनुबंध पर भी उठे सवाल

शिकायत में महानगरपालिका और संबंधित ट्रस्टों के बीच हुए अनुबंध को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि इन ट्रस्टों को श्मशान घाट संचालन का अधिकार किन शर्तों पर दिया गया, अनुबंध की अवधि कितनी है, वित्तीय जिम्मेदारियां क्या हैं तथा महानगरपालिका द्वारा इनकी निगरानी किस प्रकार की जाती है।

आरोप लगाया गया है कि धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने भी इस संबंध में महानगरपालिका से कोई स्पष्ट जानकारी या स्पष्टीकरण प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया।

तीन से चार महीने से केवल जांच का आश्वासन

शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले तीन से चार महीनों से संबंधित विभागों द्वारा केवल जांच का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद उन्हें जांच की प्रगति अथवा विभागीय कार्रवाई की कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन

प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तथा जांच की लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद यदि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था या अन्य स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और विभागों की होगी।

इन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि

शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिलाध्यक्ष स्वप्निल पाटिल, उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है।

अब यह पूरा मामला धर्मादाय आयुक्त कार्यालय और उल्हासनगर महानगरपालिका की आगामी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे श्मशान घाटों के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता और नागरिकों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा।