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उल्हासनगर मनपा के PWD विभाग में करोड़ों के कथित फर्जी बिलों का खेल, 'शंकर' नामक व्यक्ति पर नेटवर्क संचालित करने का आरोप।


उल्हासनगर | दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों से जुड़े एक बड़े घोटाले की चर्चा जोर पकड़ रही है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि "शंकर" नाम का एक व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक है, जो लंबे समय से कथित रूप से जाली बिलों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदारी कार्यों से जुड़े भुगतान के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए और इसके एवज में कथित रूप से कमीशन का लेन-देन भी हुआ।

कार्यालय और आवास की जांच से हो सकते हैं बड़े खुलासे

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यदि संबंधित व्यक्ति के कार्यालय और निवास स्थान की गहन एवं निष्पक्ष जांच की जाए, तो कथित फर्जी बिलों, संदिग्ध दस्तावेजों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि हाल के दिनों में संबंधित व्यक्ति ने अपना कार्यालय दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर लिया है, जिससे मामले को लेकर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उठाई जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल

इस कथित घोटाले ने महानगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी धन के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सार्वजनिक धन और जनविश्वास दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

फिलहाल मामले में संबंधित अधिकारियों या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां और प्रशासन इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं।














महाराष्ट्र में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, महावितरण ने हाईकोर्ट में दी जानकारी।


नागपुर: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र में प्रीपेड इलेक्ट्रिक स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रहे विरोध और आशंकाओं के बीच महावितरण (MSEDCL) ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में राज्य में किसी भी उपभोक्ता के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं। कंपनी ने अदालत को बताया कि प्रीपेड मीटर केवल उन्हीं ग्राहकों को उपलब्ध कराए जाएंगे जो स्वयं इसकी मांग करेंगे।

महावितरण के इस बयान को लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध प्रदर्शन और जनजागरण अभियान चलाए जा रहे हैं।

जनहित याचिका के बाद अदालत में सुनवाई

यह मामला विदर्भ वीज ग्राहक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से अदालत के समक्ष पहुंचा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रीपेड मीटर लागू करने का निर्णय बिना पर्याप्त अध्ययन और जनहित के व्यापक मूल्यांकन के लिया गया है।

न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। यदि रिचार्ज समाप्त हो जाता है तो बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो सकती है, जिससे आम नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य के सभी नागरिक डिजिटल भुगतान या ऑनलाइन लेनदेन करने में सक्षम नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण मीटर रीडिंग लेने और बिजली बिल वितरित करने वाले हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं

महावितरण ने अदालत को बताया कि वर्तमान में राज्यभर में केवल पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इन मीटरों के माध्यम से उपभोक्ता पहले की तरह बिजली का उपयोग कर बाद में बिल का भुगतान करते हैं।

जानकारी के अनुसार राज्य में ठेकेदार कंपनियों द्वारा अब तक एक करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। बिजली मीटर तकनीक के विकास की प्रक्रिया में पहले इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक मीटर, फिर इलेक्ट्रॉनिक मीटर, उसके बाद डिजिटल और कम्युनिकेशन आधारित मीटर लगाए गए और अब स्मार्ट मीटरों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

उपभोक्ताओं के अधिकारों पर हाईकोर्ट के अहम सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है? क्या स्मार्ट मीटर स्थापित करने से पहले उपभोक्ता की अनुमति लेना अनिवार्य है? क्या ऐसा कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान मौजूद है?

खंडपीठ ने इन सभी सवालों पर याचिकाकर्ता को आगामी सोमवार तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आशंकाओं और निराधार आरोपों के आधार पर किसी योजना का विरोध करना उचित नहीं माना जा सकता।

राज्यभर में बहस तेज

स्मार्ट मीटरों को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। विपक्षी दलों और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और महावितरण इसे बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहे हैं।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां उपभोक्ताओं के अधिकारों, स्मार्ट मीटरों की वैधता और प्रीपेड व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।














उल्हासनगर मनपा और पुलिस के दावों की खुली पोल, फर्जी डॉक्टर अब भी कर रहे इलाज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और दर्जनों शिकायतों के बावजूद अवैध चिकित्सा का कारोबार खुलेआम जारी रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस में मामले दर्ज होने और महानगरपालिका द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाने के बावजूद कई कथित फर्जी डॉक्टर अब भी बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शहर में ऐसे कई व्यक्तियों की पहचान की गई थी जो बिना वैध मेडिकल लाइसेंस के क्लीनिक संचालित कर रहे थे। इनमें से कई के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं और कुछ मामलों में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की। इसके बावजूद संबंधित क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

26 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें, फिर भी जारी है प्रैक्टिस

जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 26 कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोग बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं, बीमारियों का उपचार कर रहे हैं और चिकित्सा परामर्श भी दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि वास्तविकता में कई क्लीनिक आज भी संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

महानगरपालिका प्रशासन पर उठे सवाल

फर्जी डॉक्टरों के मामले में महानगरपालिका प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और निरीक्षण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम उठाए होते, तो लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर जोखिमों को रोका जा सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिना योग्य डॉक्टरों द्वारा किया जाने वाला उपचार मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। गलत निदान, अनुचित दवाइयों का उपयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में सही चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध क्लीनिकों को तत्काल सील कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कड़ी कार्रवाई की मांग

शहर के नागरिकों ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध क्लीनिकों की जांच की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोगों की जान से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।














उल्हासनगर शाहाड भूमि विवाद में बड़ा एक्शन: कारोबारी नंद जेठानी समेत चार पर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के चर्चित भूमि विवाद मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। हिल लाइन पुलिस स्टेशन ने विवादित भूमि के सर्वेक्षण और कथित कब्जे से जुड़े मामले में प्रमुख व्यवसायी नंद जेठानी, धीरज जेठानी सहित चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यावसायिक और रियल एस्टेट जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 426 (नुकसान पहुंचाना) और 34 (सामूहिक आपराधिक मंशा) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

यह मामला उल्हासनगर निवासी और निर्माण व्यवसायी अनिल आहूजा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से एक ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग किया, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी, और उसी के आधार पर विवादित भूमि का सरकारी सर्वेक्षण कराकर उस पर कब्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कथित कार्रवाई से न केवल उन्हें आर्थिक और संपत्ति संबंधी नुकसान हुआ, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का भी दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को भी हानि पहुंची।

शाहाड स्थित 25 गुंठा भूमि को लेकर विवाद

एफआईआर के अनुसार, विवादित संपत्ति शाहाड गांव, उल्हासनगर स्थित सर्वे नंबर 171/C की लगभग 25 गुंठा भूमि है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह जमीन उनके परिवार की संपत्ति है।

मामले में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2001 में शिकायतकर्ता के पिता स्वर्गीय श्रीचंद भुलचंद आहूजा और उनके चाचा प्रकाश आहूजा ने भूमि के प्रबंधन संबंधी अधिकार नंद रामचंद जेठानी को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्रदान किए थे।

पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता पर विवाद

शिकायतकर्ता का कहना है कि पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले दोनों व्यक्तियों के निधन के बाद उक्त दस्तावेज स्वतः प्रभावहीन और अवैध हो गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित रूप से उसी दस्तावेज का उपयोग करते हुए 21 मार्च 2022 को सिटी सर्वे कार्यालय में भूमि सर्वेक्षण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।

इसके बाद 13 मई 2022 को भूमि का सर्वेक्षण कराया गया और शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी प्रक्रिया के माध्यम से संपत्ति पर कब्जा प्राप्त करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरी कार्रवाई भ्रामक दस्तावेजों और गलत तथ्यों के आधार पर की गई।

चार आरोपियों के खिलाफ मामला

एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें:

धीरज जेठानी

नंद जेठानी

जगेश रघुनाथ गायकवाड़

एक अज्ञात व्यक्ति

शामिल हैं।

सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग की भी जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में यह भी जांच की जा रही है कि भूमि सर्वेक्षण और उससे संबंधित राजस्व प्रक्रिया के दौरान किन-किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया तथा क्या संबंधित अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं। जांच के दौरान दस्तावेजों की वैधता, पावर ऑफ अटॉर्नी की कानूनी स्थिति और भूमि स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।

पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच

हिल लाइन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस प्रकरण की जांच पुलिस उपनिरीक्षक सुरवाडे कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट में एक कारोबारी संकट की चर्चाएं तेज, सट्टेबाजी में नुकसान और बकाया भुगतान को लेकर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-5 स्थित देश के प्रमुख रेडीमेड एवं जींस व्यापार केंद्रों में से एक जींस मार्केट इन दिनों एक व्यापारी परिवार को लेकर चल रही चर्चाओं के कारण सुर्खियों में है। बाजार के व्यापारिक गलियारों में पिछले कुछ समय से एक प्रमुख जींस व्यापारी और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं और दावों की अभी तक किसी भी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।

व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित व्यापारी के पुत्र को कथित तौर पर IPL सट्टेबाजी में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार में चर्चा है कि इस नुकसान का प्रभाव परिवार के व्यवसाय पर भी पड़ा है, जिसके कारण कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन पर दबाव बढ़ गया है।

सूत्रों का कहना है कि डेनिम रोड क्षेत्र के कई कपड़ा व्यापारियों का भुगतान लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है। इसी वजह से व्यापारिक समुदाय के बीच संबंधित कारोबारी की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ व्यापारियों का दावा है कि बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण संबंधित व्यापारी गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और भविष्य में उसके सामने दिवालियापन जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

बाजार में यह चर्चा भी जोरों पर है कि उक्त व्यापारी पहले अपनी दुकान का संचालन "K" अक्षर से शुरू होने वाले एक नाम से करता था और अब उसने उसी अक्षर से शुरू होने वाले नए नाम के साथ व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ की हैं। व्यापारिक हलकों में इसे लेकर भी कई तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित दुकान दूध नाका रोड और आश्रम रोड के बीच स्थित क्षेत्र में, डिस्को टी के आसपास संचालित होने की चर्चा है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अगले महीने रीजेंसी एंटीलिया में आयोजित होने वाले बड़े जींस व्यापार मेले में उक्त कारोबारी नए नाम और नई पहचान के साथ भाग लेने की तैयारी कर रहा है।

"इस पूरे घटनाक्रम के बीच जींस मार्केट के एक अन्य बड़े कारोबारी का नाम भी चर्चा में है। व्यापारिक हलकों में कहा जा रहा है कि उनके नाम की शुरुआत 'के' अक्षर से होती है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है"। कुछ व्यापारियों का दावा है कि संबंधित पक्षों के बीच पूर्व में कारोबारी साझेदारी अथवा वित्तीय संबंध रहे हैं। हालांकि, इन संबंधों की प्रकृति और वर्तमान स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। बाजार में इस विषय को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें और चर्चाएं जारी हैं।

व्यापारिक जानकारों का मानना है कि यदि बाजार में चल रही चर्चाओं में किसी प्रकार की सच्चाई है, तो इसका प्रभाव केवल एक व्यापारी या परिवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जींस व्यापार क्षेत्र में विश्वास और लेन-देन की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कई व्यापारी यह भी कह रहे हैं कि बिना आधिकारिक दस्तावेजों और पुष्ट जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल, संबंधित व्यापारी, उसके परिवार अथवा अन्य चर्चित पक्षों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही किसी सरकारी एजेंसी, बैंक अथवा न्यायिक मंच द्वारा दिवालियापन या वित्तीय अनियमितता से जुड़ी कोई पुष्टि की गई है।

अस्वीकरण: यह समाचार व्यापारिक सूत्रों, बाजार में चल रही चर्चाओं और अपुष्ट दावों पर आधारित है। समाचार में उल्लिखित तथ्यों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।














कुंभ 2027 की तैयारियों में बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री कार्यालय के OSD रामेश्वर नाईक बने विशेष समन्वयक, संत समाज और प्रशासन के बीच निभाएंगे अहम भूमिका।


 

मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत विशेष कार्य अधिकारी (OSD) रामेश्वर नाईक को कुंभ मेले के लिए विशेष समन्वयक (Coordinator) नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी इस आदेश को कुंभ मेले की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

22 जून 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि कुंभ मेले की सफलता में साधु-संतों, महंतों और विभिन्न अखाड़ों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए संत समाज, अखाड़ों, कुंभमेला प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन तथा राज्य शासन के बीच प्रभावी संवाद और समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से रामेश्वर नाईक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संत समाज, अखाड़ों और प्रशासन के बीच बनेंगे प्रमुख कड़ी

सरकारी आदेश के अनुसार रामेश्वर नाईक साधु-संतों, विभिन्न अखाड़ों, कुंभमेला प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करेंगे। कुंभ मेले से जुड़े धार्मिक, प्रशासनिक और व्यवस्थागत विषयों पर समन्वय बनाए रखने के साथ-साथ वे विभिन्न पक्षों की मांगों और सुझावों को संबंधित विभागों तक पहुंचाने तथा उनके समाधान की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कुंभ मेले जैसे विशाल आयोजन में कई बार धार्मिक परंपराओं, व्यवस्थाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होती है। ऐसे में सरकार द्वारा एक समर्पित समन्वयक की नियुक्ति को दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी हुआ आदेश

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी आदेश पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह नियुक्ति मुख्यमंत्री की मंजूरी से की गई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि राज्य सरकार ने कुंभ 2027 की तैयारियों को प्राथमिकता देते हुए प्रारंभिक स्तर से ही समन्वय तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

राज्य के शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि

इस आदेश की प्रतिलिपि महाराष्ट्र शासन के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कार्यालयों, नगर विकास विभाग, जलसंपदा विभाग, नासिक विभागीय आयुक्त, नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण, नासिक महानगरपालिका, जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक सहित सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई है।

इससे स्पष्ट है कि सरकार कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर बहुस्तरीय समन्वय व्यवस्था विकसित करना चाहती है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या व्यवस्थागत बाधा उत्पन्न न हो।

करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना

नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। इस आयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत, महंत और अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, आवास और बुनियादी सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धार्मिक संगठनों और प्रशासन के बीच समय रहते प्रभावी संवाद स्थापित हो जाए तो आयोजन को अधिक सुचारु और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। रामेश्वर नाईक की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

सरकार के इस फैसले को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि कुंभ 2027 को लेकर सरकार अब तैयारी के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले महीनों में बुनियादी ढांचे, सड़क विकास, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा रामेश्वर नाईक को कुंभ मेले का समन्वयक नियुक्त किए जाने का निर्णय आगामी नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ 2027 की तैयारियों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस नियुक्ति से संत समाज, अखाड़ों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा और दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक कुंभ मेला सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा।















कला भारती के सदस्य अभिषेक कोली भाजपा में शामिल, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ भव्य कार्यक्रम संपन्न।


 


नवी मुंबई: दिपिका पारकर

राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कला भारती एसोसिएशन के सदस्य अभिषेक कोली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और उद्यमियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास करना भी था। इस दौरान महिलाओं को आर्थिक साक्षरता, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, GEM पोर्टल, मुद्रा योजना, स्वरोजगार के अवसर, उद्यमिता विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना ही इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम, विधान परिषद सदस्य उमा खापरे, मुंबई भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष योजना ठोकले, विधान परिषद सदस्य माधवी नाइक, भाजपा के पदाधिकारी तथा अन्य कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी के मार्गदर्शन में नगरसेविका स्वप्ना म्हात्रे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा राष्ट्रहित और समाजसेवा की भावना से कार्य करने वाले लोगों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोगों के लिए भाजपा एक सशक्त मंच है। उन्होंने कला भारती एसोसिएशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का सराहनीय प्रयास कर रही है।

वहीं, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाजपा हमेशा नई पीढ़ी को अवसर देने और उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने में विश्वास रखती है। उन्होंने अभिषेक कोली के भाजपा में प्रवेश का स्वागत करते हुए कहा कि युवा नेतृत्व समाज और राजनीति दोनों के लिए नई ऊर्जा लेकर आता है। उन्होंने उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन के साथ मिलकर कार्य करने और जमीनी स्तर पर जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत करने का संदेश दिया।

महापौर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि राज्य में युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं रविंद्र चव्हाण, अमित साटम और चित्रा वाघ के योगदान की भी प्रशंसा की।

कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनके अनुसार विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भाजपा में शामिल होने के बाद अभिषेक कोली ने कहा कि राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने कहा कि कला भारती एसोसिएशन और भाजपा मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठन के माध्यम से समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक आकर्षण “उड़ान” दिव्यांग संगीत समूह (ब्लाइंड ऑर्केस्ट्रा) की प्रस्तुति रही। समूह के कलाकारों ने अपने संगीत और प्रतिभा से उपस्थित लोगों को भावुक और प्रेरित किया। कार्यक्रम में इस समूह का विशेष सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान समाज में प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास है।

इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए महिला एवं पुरुष उद्यमियों, हस्तशिल्प कलाकारों और समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। गुजरात, महेश्वर, संभाजीनगर, पुणे सहित विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला, हस्तकला और महिला उद्यमिता को मंच प्रदान कर स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।