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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या उल्हासनगर के कोचिंग क्लासेस में भी मंडरा रहा है मौत का खतरा?


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में कई छात्रों की जान चली गई, जबकि दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। आग लगने के बाद भवन में फंसे छात्रों की चीख-पुकार, खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से जान बचाने के लिए छलांग लगाने के दृश्य ने देशभर के अभिभावकों को भयभीत कर दिया।

लखनऊ की इस त्रासदी के बाद अब सवाल उल्हासनगर की ओर भी उठने लगे हैं। शिक्षा का बड़ा केंद्र बन चुके उल्हासनगर में सैकड़ों कोचिंग क्लासेस, ट्यूशन सेंटर, लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। लेकिन क्या इन संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या कोई बड़ा हादसा होने से पहले प्रशासन जागेगा?

संकरी गलियां, भीड़भाड़ वाली इमारतें और सुरक्षा पर सवाल

उल्हासनगर के कई कोचिंग क्लासेस ऐसी बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जहां प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही सीढ़ी उपलब्ध है। कई जगहों पर पार्किंग क्षेत्र, कॉरिडोर और सीढ़ियां भी अतिक्रमण या सामान से भरी हुई दिखाई देती हैं। यदि ऐसी स्थिति में आग लग जाए या कोई अन्य आपातकालीन घटना हो जाए, तो सैकड़ों छात्रों की सुरक्षित निकासी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आग से अधिक जानें धुएं, घबराहट और भगदड़ के कारण जाती हैं। यदि भवन में पर्याप्त वेंटिलेशन, फायर एग्जिट और आपातकालीन व्यवस्था न हो तो कुछ ही मिनटों में स्थिति भयावह रूप ले सकती है।

फायर NOC है या सिर्फ कागजों में सुरक्षा?

शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल सभी कोचिंग क्लासेस और शिक्षण संस्थानों का विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट कराए। यह जांच की जाए कि:

क्या सभी संस्थानों के पास वैध फायर NOC है?

क्या भवनों में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं?

क्या फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर कार्यरत हैं?

क्या आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था है?

क्या छात्रों और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है?

क्या अग्निशमन विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाता है?

हजारों अभिभावकों की बढ़ी चिंता

लखनऊ हादसे के बाद उल्हासनगर के अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए कोचिंग क्लासेस भेजते हैं, लेकिन यदि सुरक्षा व्यवस्था ही कमजोर हो तो यह किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है।

अभिभावकों का मानना है कि जिस तरह स्कूलों के लिए सुरक्षा मानक अनिवार्य हैं, उसी प्रकार कोचिंग संस्थानों के लिए भी कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए और उनके पालन की नियमित निगरानी होनी चाहिए।

प्रशासन के लिए चेतावनी या इंतजार किसी हादसे का?

उल्हासनगर में अब तक किसी बड़े कोचिंग अग्निकांड की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के मामले में लापरवाही अक्सर हादसे के बाद ही उजागर होती है। ऐसे में प्रशासन, उल्हासनगर महानगरपालिका, अग्निशमन विभाग और संबंधित अधिकारियों को समय रहते व्यापक निरीक्षण अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों की समीक्षा करनी चाहिए।

बड़ा सवाल

क्या उल्हासनगर में लखनऊ जैसी त्रासदी को रोकने के लिए प्रशासन अभी से सक्रिय होगा, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खुलेगी?

लखनऊ की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शिक्षा संस्थानों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्रों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई भी छोटी चूक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।














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