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'भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण क्यों?' उल्हासनगर मनपा के खिलाफ राष्ट्र कल्याण पार्टी तथा छावा संगठन का धरना, 21 जुलाई को ठाणे में प्रदर्शन का ऐलान।


 




उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों को उल्हासनगर महानगरपालिका में अब भी महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार दिए जाने के विरोध में मंगलवार (8 जुलाई) को मनपा आयुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी तथा छावा संगठन के निखिल गोळे के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में एसीबी की कार्रवाई का सामना कर चुके अनेक अधिकारी और कर्मचारी आज भी संवेदनशील एवं राजस्व से जुड़े विभागों में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, उन्हें अतिरिक्त महत्वपूर्ण पदभार भी सौंपे गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के बजाय उसे बढ़ावा मिल रहा है।

धरना प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से गणेश शिंपी का मामला उठाया। उनका आरोप है कि गणेश शिंपी मूल रूप से लघुलेखक (स्टेनो) वर्ग-3 के पद पर नियुक्त हैं, लेकिन उन्हें उप आयुक्त (प्रभाग समिति-2), कर निर्धारक एवं संकलक, कर विभाग, चुनाव विभाग प्रमुख तथा अतिक्रमण निष्कासन विभाग सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

आंदोलनकारियों के अनुसार, मनपा प्रशासन ने उन्हें लिखित रूप से बताया कि चुनाव विभाग में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चल रही है, जो अक्टूबर तक जारी रहेगी, इसलिए फिलहाल कोई कार्रवाई संभव नहीं है। हालांकि आंदोलनकारियों का दावा है कि हाल ही में नगर निगम के सार्वत्रिक चुनाव 2025-26 की प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में गणेश शिंपी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त विभागों का प्रभार देना गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक स्टेनो स्तर के कर्मचारी को इतने महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी आखिर किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में दी गई। उनका कहना है कि यदि यह नियुक्तियां आर्थिक लेन-देन के आधार पर की गई हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इन सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा।

धरना प्रदर्शन में उन अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया, जिनके खिलाफ एसीबी द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद वे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत बताए गए। इनमें वरिष्ठ लिपिक अजीत गोवारी, नगररचना विभाग के कनिष्ठ अभियंता संजय पवार, कर विभाग के वरिष्ठ लिपिक अनिल खतुराणी, भंडार विभाग के लिपिक अंकुश कदम, विधि विभाग के राजा बुलानी, छाया डगळे, कर विभाग के भानु परमार, बलराम गिधवा, जगदीश परमार सहित अन्य कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए। आंदोलनकारियों का दावा है कि ऐसे कुल 23 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ एसीबी कार्रवाई कर चुकी है, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 8 दिनों के भीतर इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों से महत्वपूर्ण पदभार वापस लेकर उचित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो 21 जुलाई को ठाणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष व्यापक धरना-आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे अधिकारियों को संवेदनशील विभागों में बनाए रखना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले को लेकर अब नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक तूल पकड़ सकता है।














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