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उल्हासनगर के श्मशान घाटों में कथित अवैध वसूली का मामला गरमाया, ट्रस्ट संचालकों पर कार्रवाई की मांग।


 







































उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत संचालित विभिन्न श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं, अवैध कब्जे और मृतकों के परिजनों से जबरन धन वसूली के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। इस पूरे मामले में प्रहार जनशक्ति पक्ष के प्रभारी अध्यक्ष शरद दिनकर पोळके द्वारा महानगरपालिका आयुक्त और पुलिस प्रशासन को विस्तृत शिकायत सौंपकर व्यापक जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है।

शिकायत के अनुसार, उल्हासनगर-1 से लेकर उल्हासनगर-5 तक स्थित विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कुछ ट्रस्टों द्वारा किया जा रहा है, जबकि संबंधित भूमि और वहां उपलब्ध सभी मूलभूत सुविधाएं उल्हासनगर महानगरपालिका की हैं। आरोप है कि बिजली, पानी, रखरखाव, मरम्मत और गरीब परिवारों के लिए अंतिम संस्कार हेतु लकड़ियों का खर्च महानगरपालिका उठाती है, लेकिन इसके बावजूद ट्रस्ट संचालक मृतकों के परिजनों से अंतिम संस्कार के नाम पर ₹500 से लेकर ₹2500 तक की राशि वसूल रहे हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि मृतक के परिजन ट्रस्ट द्वारा मांगी गई राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें आवश्यक रसीद देने में टालमटोल की जाती है और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे शोकाकुल परिवारों को मानसिक और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

शरद पोळके ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि जब श्मशान घाटों की सभी सुविधाओं का खर्च महानगरपालिका वहन कर रही है, तब ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ट्रस्टों की रसीद पुस्तिकाओं पर चैरिटी कमिश्नर का पंजीकरण नंबर तक अंकित नहीं है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो जाता है।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि महानगरपालिका द्वारा संबंधित ट्रस्टों को हर वर्ष अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली लकड़ियों के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि ट्रस्टों और महानगरपालिका के बीच किसी प्रकार का वैध लिखित करार या दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना किसी विधिवत समझौते के सरकारी धन का भुगतान किया जाना सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी के समान बताया गया है।

प्रहार जनशक्ति पक्ष ने मांग की है कि संबंधित ट्रस्टों को दी जाने वाली सभी आर्थिक सहायता तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, महानगरपालिका सभी श्मशान घाटों को अपने सीधे नियंत्रण में ले, ट्रस्टों के वित्तीय लेन-देन और ऑडिट की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ट्रस्ट संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रहार जनशक्ति पक्ष लगातार प्रशासन से पत्राचार करता रहा है। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व राज्यमंत्री बच्चू कड़ू ने उल्हासनगर महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त धीरज चव्हाण को इस विषय में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि इस मामले का लगातार फॉलोअप प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिला अध्यक्ष स्वप्नील पाटील के मार्गदर्शन में शरद पोळके द्वारा किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन और कानूनी संघर्ष जारी रहेगा।

अब सभी की निगाहें महानगरपालिका प्रशासन और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल श्मशान घाटों के संचालन में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करेगा, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और आम नागरिकों से कथित अवैध वसूली से जुड़े बड़े घोटाले का भी खुलासा हो सकता है।














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