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उल्हासनगर के चारो श्मशान घाटों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग, धर्मादाय आयुक्त और मनपा से कार्रवाई की अपील।


 







उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर के विभिन्न श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार के नाम पर कथित अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने धर्मादाय आयुक्त, ठाणे विभाग तथा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शहर के चार पंजीकृत श्मशान घाट ट्रस्टों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिवारों से कथित रूप से अनुचित एवं अवैध तरीके से राशि वसूली जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास, पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है।

इन चार ट्रस्टों पर उठे सवाल

शिकायत पत्र के अनुसार धर्मादाय आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत निम्नलिखित ट्रस्ट वर्तमान में शहर के विभिन्न श्मशान घाटों का संचालन कर रहे हैं—

प्रबंधक श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-1)

श्मशान घाट स्वर्गधाम आश्रम (उल्हासनगर-3)

प्रबंधक मुक्तिधाम सामाजिक संस्था (उल्हासनगर-4)

प्रबंधक स्वर्गद्वार श्मशान घाट ट्रस्ट (उल्हासनगर-5)

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन सभी ट्रस्टों के संचालन और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मुफ्त लकड़ी उपलब्ध होने के बावजूद परिजनों से वसूली का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि उल्हासनगर महानगरपालिका अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी नि:शुल्क उपलब्ध कराती है तथा इसकी विधिवत रसीद भी संबंधित श्मशान घाटों के माध्यम से मृतकों के परिजनों को दी जाती है।

इसके बावजूद आरोप है कि श्मशान घाट संचालित करने वाले ट्रस्ट अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों से रसीद बुक के माध्यम से 500 रुपये से लेकर 1000 रुपये अथवा उससे अधिक राशि की मांग करते हैं। शिकायतकर्ता ने इसे अवैध वसूली करार देते हुए सवाल उठाया है कि जब आवश्यक सामग्री पहले से ही महानगरपालिका द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है, तब अतिरिक्त राशि किस आधार पर ली जा रही है।

उन्होंने मांग की है कि ट्रस्टों द्वारा वसूली गई राशि का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि यह धन किस उद्देश्य और किस मद में खर्च किया गया।

ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित ट्रस्टों द्वारा धर्मादाय विभाग में प्रस्तुत की गई ऑडिट रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट है।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी तो धर्मादाय विभाग ने उसे स्वीकार कैसे किया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अधूरी अथवा त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले ट्रस्टों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने मांग की है कि सभी ट्रस्टों की ऑडिट रिपोर्ट, आय-व्यय का पूरा विवरण तथा वित्तीय अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं ताकि नागरिकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

महानगरपालिका और ट्रस्टों के अनुबंध पर भी उठे सवाल

शिकायत में महानगरपालिका और संबंधित ट्रस्टों के बीच हुए अनुबंध को लेकर भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया गया है कि इन ट्रस्टों को श्मशान घाट संचालन का अधिकार किन शर्तों पर दिया गया, अनुबंध की अवधि कितनी है, वित्तीय जिम्मेदारियां क्या हैं तथा महानगरपालिका द्वारा इनकी निगरानी किस प्रकार की जाती है।

आरोप लगाया गया है कि धर्मादाय आयुक्त कार्यालय ने भी इस संबंध में महानगरपालिका से कोई स्पष्ट जानकारी या स्पष्टीकरण प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया।

तीन से चार महीने से केवल जांच का आश्वासन

शिकायतकर्ता ने बताया कि पिछले तीन से चार महीनों से संबंधित विभागों द्वारा केवल जांच का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद उन्हें जांच की प्रगति अथवा विभागीय कार्रवाई की कोई लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन

प्रहार जनशक्ति पक्ष के पदाधिकारी शरद दिनकर पोलके ने स्पष्ट किया है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तथा जांच की लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद यदि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था या अन्य स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और विभागों की होगी।

इन अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि

शिकायत पत्र की प्रतिलिपि प्रहार जनशक्ति पक्ष के ठाणे जिलाध्यक्ष स्वप्निल पाटिल, उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है।

अब यह पूरा मामला धर्मादाय आयुक्त कार्यालय और उल्हासनगर महानगरपालिका की आगामी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे श्मशान घाटों के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता और नागरिकों से लिए जाने वाले शुल्क को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार रहेगा।


















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