उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के सैकड़ों प्रॉपर्टी धारकों का आरोप है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यक शुल्क जमा करने और महानगरपालिका से आधिकारिक प्रॉपर्टी ट्रांसफर (टाइटल म्यूटेशन) लेटर प्राप्त होने के बावजूद उनकी संपत्तियों का स्वामित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप नागरिक महीनों तक अपने ही अधिकार से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मनपा कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
बताया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के बाद खरीदार इंडेक्स-2, सेल डीड, स्टांप ड्यूटी तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए आवेदन करता है। दस्तावेजों की जांच के उपरांत मनपा प्रशासन स्वामित्व हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए आधिकारिक ट्रांसफर लेटर भी जारी कर देता है। लेकिन इसके बाद भी डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाता, जिससे पूरी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
कागजों पर नया मालिक, ऑनलाइन सिस्टम में अब भी पुराना नाम
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नागरिकों के हाथ में मनपा द्वारा जारी वैध ट्रांसफर लेटर मौजूद होता है, लेकिन जब वे प्रॉपर्टी टैक्स भरने, रिकॉर्ड डाउनलोड करने या ऑनलाइन विवरण देखने के लिए महानगरपालिका के पोर्टल पर जाते हैं, तो वहां अब भी पुराने मालिक या डेवलपर का नाम दिखाई देता है। इससे नागरिकों को यह साबित करने में भी कठिनाई होती है कि संबंधित संपत्ति अब उनके नाम पर है।
बैंक लोन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं पर असर
ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने का सबसे बड़ा असर बैंकिंग और वित्तीय प्रक्रियाओं पर पड़ रहा है। कई बैंक होम लोन, मॉर्गेज लोन अथवा संपत्ति से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड का सत्यापन करते हैं। जब पोर्टल पर पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है, तो ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया प्रभावित होती है और कई मामलों में आवेदन लंबित हो जाते हैं।
इसके अलावा नामांतरण से जुड़े अन्य सरकारी कार्य, संपत्ति के दस्तावेजों का सत्यापन तथा भविष्य में संपत्ति के विक्रय या हस्तांतरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
मनपा कार्यालयों के लगातार चक्कर, लेकिन समाधान नहीं
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे इस समस्या को लेकर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता है। कभी "सर्वर डाउन" होने की बात कही जाती है, कभी "डेटा अपडेट हो रहा है" का हवाला दिया जाता है, तो कभी अगले सप्ताह आने को कहा जाता है। कई नागरिकों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस कारण लोगों का समय, पैसा और श्रम तीनों बर्बाद हो रहे हैं। कई नागरिकों को नौकरी या व्यवसाय छोड़कर बार-बार मनपा कार्यालय जाना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।
नागरिकों में बढ़ रहा असंतोष
एक पीड़ित प्रॉपर्टी धारक ने बताया कि उन्हें लगभग छह महीने पहले महानगरपालिका से प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर मिल चुका है, लेकिन आज भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम ही दिखाई दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं किया गया।
इसी प्रकार अन्य नागरिकों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होगा, तब तक ट्रांसफर लेटर का वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल
उल्हासनगर महानगरपालिका समय-समय पर कर प्रणाली के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और डेटा प्रबंधन को बेहतर बनाने के दावे करती रही है। 'प्रोजेक्ट मंथन' जैसे अभियानों के माध्यम से रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और कर संग्रह प्रणाली को डिजिटल बनाने की बात भी कही गई थी।
लेकिन ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होना इन दावों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि विभागीय स्तर पर डेटा एंट्री या सिस्टम अपडेट समय पर नहीं हो रहा है, तो इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
शहर के समाजसेवियों, कर विशेषज्ञों और नागरिकों ने महानगरपालिका आयुक्त तथा प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि ट्रांसफर लेटर जारी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही इसके लिए जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नागरिकों की प्रमुख मांगें
प्रॉपर्टी ट्रांसफर लेटर जारी होने के साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड स्वतः अपडेट किया जाए।
नामांतरण प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा (SLA) तय की जाए।
लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देने हेतु पारदर्शी ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।
लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
जब महानगरपालिका स्वयं डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने का दावा कर रही है, तब स्वामित्व हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रक्रिया का महीनों तक अधूरा रहना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर उनके विश्वास को भी कमजोर करता है। अब देखना यह होगा कि मनपा प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्द करता है और नागरिकों को राहत कब मिलती है।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें