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12 करोड़ के उल्हासनगर मनपा विकास कार्यों को लेकर विवाद गहराया कथित फर्जी बिलों की जांच और संबंधित भुगतान तत्काल रोकने की मांग।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में करीब 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से संबंधित निविदाओं और कथित बिल भुगतान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि ये कार्य ठाणे जिला प्रशासन तथा मूलभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं के अंतर्गत महानगरपालिका क्षेत्र में प्रस्तावित किए गए थे। इन कार्यों में से कई कार्य चुनाव से पहले के बताए जा रहे हैं। हालांकि, संबंधित कार्य वास्तव में किस स्तर तक पूरे हुए हैं और उनके नाम पर तैयार किए गए बिल वास्तविक कार्यों के अनुरूप हैं या नहीं, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में स्थानीय स्तर पर कथित तौर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ विकास कार्य मौके पर हुए बिना ही कागजों पर पूर्ण दिखाए गए और उनके आधार पर बिल तैयार किए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी होना बाकी है। इसी कारण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

भुगतान रोककर जांच कराने की मांग

उल्हासनगर की जनता की ओर से मांग उठाई जा रही है कि करीब 12 करोड़ रुपये के इन सभी विकास कार्यों की तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर विस्तृत जांच कराई जाए। प्रत्येक कार्य की मौके पर जाकर जांच की जाए तथा कार्य की वास्तविक स्थिति, माप पुस्तिका, कार्यादेश, ठेकेदारों के बिल और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाए।

मांग की गई है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित कार्यों के लंबित बिलों का भुगतान रोक दिया जाए। साथ ही, यदि किसी कार्य में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

पीडब्ल्यूडी विभाग की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका के पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ आरोपों में विभाग के उपअभियंता संदीप जाधव की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की गई है। उनके संबंध में कथित फर्जी बिल तैयार करने तथा ठेकेदारों से कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, ये गंभीर आरोप फिलहाल आरोपों के स्तर पर हैं और उनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारी या अन्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले दस्तावेजी एवं स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

‘मास्टरमाइंड’ होने के दावे की भी जांच जरूरी

कथित फर्जी बिलों के मामले में ‘शंकर'’ नामक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होने और उसे कथित तौर पर पूरे मामले का ‘मास्टरमाइंड’ बताए जाने की चर्चा भी सामने आई है। लेकिन इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच एजेंसियों द्वारा संबंधित दस्तावेजों, बिल प्रक्रिया, स्वीकृतियों, माप पुस्तिकाओं, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों की भूमिका की जांच करना महत्वपूर्ण होगा।

आयुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाळे से मांग की गई है कि पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक विवादित अथवा संदिग्ध बिलों का भुगतान रोकने, प्रत्येक कार्य का स्थल निरीक्षण कराने और दोष सिद्ध होने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महानगरपालिका प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या 12 करोड़ रुपये के कथित विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति तथा बिलों की सत्यता की स्वतंत्र जांच कराई जाती है।

नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप संबंधित शिकायत/दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि का दावा नहीं किया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों का पक्ष जांच के दौरान सामने आना आवश्यक है।


















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