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6 करोड़ के गार्डन टेंडर के बाद छोटे टेंडरों पर उठे सवाल, उल्हासनगर मनपा की टेंडर प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के PWD विभाग की ओर से कुछ दिन पहले शहर में एक बड़े गार्डन के विकास कार्य के लिए करीब 6 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि यह महत्वपूर्ण टेंडर शहर की एक नामी कंपनी को मिला। इसके बाद महानगरपालिका की ओर से विभिन्न छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए भी कई टेंडर जारी किए गए।

इसी टेंडर प्रक्रिया को लेकर अब उल्हासनगर की जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब संबंधित कंपनी को करीब 6 करोड़ रुपये के बड़े टेंडर में पात्र किया गया, तो बाद में जारी किए गए छोटे टेंडरों में उसे अपात्र कर टेन्डर को साठ गाँठ कर के किसी पसंदीदा कंपनी को फायदा पहुंचाया जा रहा है? आखिर छोटे टेंडरों की पात्रता और प्रक्रिया के पीछे क्या नियम और मापदंड अपनाए गए थे?

🔎 टेंडर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग

नागरिकों का सवाल है कि क्या सभी टेंडरों में समान और पारदर्शी नियम लागू किए गए हैं? यदि किसी कंपनी को बड़े प्रोजेक्ट में काम करने का अवसर दिया गया है, तो छोटे टेंडरों में उसकी भागीदारी को लेकर अलग नियम क्यों लागू किए गए? इस पूरे मामले में टेंडर की शर्तों, पात्रता मानदंड और प्रक्रिया की निष्पक्षता को स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है।

जनता के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं इन छोटे टेंडरों की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

📢 आयुक्त मनीषा आव्हाले से जनता का सीधा सवाल

उल्हासनगर की जनता अब महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान संबंधित टेंडरों की शर्तों, कंपनियों की पात्रता, प्राप्त निविदाओं, तकनीकी एवं वित्तीय प्रक्रिया तथा टेंडर मंजूर करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए।

नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका के करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से जुड़े टेंडरों में किसी भी प्रकार का संदेह या सवाल नहीं रहना चाहिए। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब देखना होगा कि 6 करोड़ रुपये के गार्डन टेंडर और उसके बाद जारी किए गए छोटे टेंडरों को लेकर उठ रहे सवालों पर मनपा प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाते हैं।



















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