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विवाह प्रमाणपत्र के लिए इलेक्शन कार्ड अनिवार्य बताए जाने पर सवाल, उल्हासनगर मनपा के CFC विभाग की प्रक्रिया पर उठी जांच की मांग।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के CFC विभाग में विवाह प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहुंचने वाले कुछ दंपतियों को कथित तौर पर इलेक्शन कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) लाने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही, उन्हें कथित रूप से यह बताया जा रहा है कि आधार कार्ड स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रक्रिया को लेकर अब नागरिकों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

नागरिकों का कहना है कि यदि विवाह प्रमाणपत्र के लिए किसी विशेष पहचान दस्तावेज को अनिवार्य किया गया है, तो उसके संबंध में स्पष्ट एवं आधिकारिक नियम, शासनादेश या विभागीय निर्देश सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि महाराष्ट्र की अन्य महानगरपालिकाओं में विवाह प्रमाणपत्र की प्रक्रिया के दौरान पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर ऐसी कोई समान व्यवस्था दिखाई नहीं देती, जिसमें केवल इलेक्शन कार्ड को अनिवार्य बताया जाए और आधार कार्ड को स्वीकार न किया जाए। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक नियम और वर्तमान प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित विभाग से किया जाना आवश्यक है।

नागरिकों ने उठाए सवाल

यदि CFC विभाग में वास्तव में इलेक्शन कार्ड को अनिवार्य किया गया है, तो नागरिकों का सवाल है कि

इसका आधार क्या है?

क्या इसके संबंध में कोई आधिकारिक शासनादेश या मनपा का लिखित आदेश जारी किया गया है?

आधार कार्ड को स्वीकार नहीं करने का कारण क्या है?

क्या सभी नागरिकों को इस संबंध में समान और स्पष्ट जानकारी दी जा रही है?

इन सवालों के कारण नागरिकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग

नागरिकों ने उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए CFC विभाग की विवाह प्रमाणपत्र संबंधी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।

साथ ही, यदि इलेक्शन कार्ड को अनिवार्य करने का कोई आधिकारिक नियम या आदेश मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए और नागरिकों को स्पष्ट जानकारी दी जाए। वहीं, यदि ऐसी कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है, तो कथित रूप से अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की प्रक्रिया पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, यह मामला नागरिकों द्वारा उठाई गई शिकायत और आरोपों पर आधारित है। संबंधित विभाग या महानगरपालिका प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

















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