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टी.ओ.के./शिंदे गुट में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर खींचतान, संतोष पांडे के दावे की अग्निपरीक्षा।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

मनोनीत नगरसेवक पदों के चयन को लेकर उल्हासनगर की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा के साथ-साथ टीम ओमी कालानी (टी.ओ.के.) और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में आने वाले मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर कालानी परिवार के साथ लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े संतोष पांडे के नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा है।

संतोष पांडे को उत्तर भारतीय समाज की आवाज के रूप में देखा जाता है और बताया जाता है कि वह पिछले करीब 17 वर्षों से कालानी परिवार और संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी वर्षों की निष्ठा, संगठन के प्रति समर्पण और राजनीतिक योगदान को इस बार मनोनीत नगरसेवक पद के रूप में सम्मान मिलेगा या फिर बदलते राजनीतिक समीकरण किसी दूसरे नाम के पक्ष में जाएंगे।

चार-चार पदों के समीकरण से बदली पूरी तस्वीर

बताया जाता है कि शुरुआत में भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में चार-चार मनोनीत नगरसेवक पद जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक गणित तैयार किया जा रहा था। लेकिन शिवसेना शिंदे गुट से जुड़े पूजा भोईर और विक्की लबाना के जाति प्रमाणपत्र से संबंधित मामले में उनके पद निरस्त होने के बाद मनोनीत नगरसेवक पदों का पूरा समीकरण बदल गया है।

इसी बदले हुए राजनीतिक गणित के बीच अब विभिन्न नामों को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज हो गई है।

 पूर्व महापौर पंचम कालानी ओर संतोष पांडे के नाम चर्चा में?

सूत्रों के हवाले से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि संतोष पांडे या पूर्व महापौर पंचम कालानी सूत्रों के अनुसार मनोनीत नगरसेवक बनाने की पंचम कालानी की तैयारी रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।

यदि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया जाता है, तो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं और कालानी समर्थक खेमे के भीतर राजनीतिक असंतोष पैदा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। खासकर 17 वर्षों से संगठन के लिए सक्रिय रहे संतोष पांडे के समर्थक इस निर्णय को किस रूप में लेते हैं, यह भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार

दूसरी ओर भाजपा के कोटे से मनोनीत नगरसेवक पद के लिए भी कई नामों को लेकर जोरदार लॉबिंग की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार धनंजय बोड़ारे, हेमा पिंजानी, मनु खेमचंदानी और प्रदीप रामचंदानी और प्रमुख दावेदारों में बताए जा रहे हैं।

इन प्रमुख नामों के अलावा करीब 20 भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मनोनीत नगरसेवक पद के लिए अपनी इच्छा शीर्ष नेतृत्व के समक्ष व्यक्त की है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने भी अंतिम नाम तय करना आसान नहीं माना जा रहा है।

11 सितंबर पर टिकी सभी की निगाहें

अब इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन 11 सितंबर माना जा रहा है। इसी दिन होने वाले चयन से स्पष्ट होगा कि भाजपा अपने संभावित दावेदारों में से किसे अवसर देती है और टी.ओ.के./शिवसेना शिंदे गुट संतोष पांडे की करीब 17 वर्षों की राजनीतिक निष्ठा एवं संगठनात्मक योगदान को सम्मान देता है या फिर बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते किसी अन्य नाम पर मुहर लगती है।

मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार निष्ठा और संगठनात्मक योगदान की जीत होगी या राजनीतिक समीकरण भारी पड़ेंगे?

11 सितंबर को होने वाला फैसला न केवल नए मनोनीत नगरसेवकों के नाम तय करेगा, बल्कि स्थानीय राजनीति में आने वाले दिनों के नए समीकरणों के संकेत भी दे सकता है।



















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