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उल्हासनगर के क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर शिकायतें; कथित सट्टा-जुआ और बिजली चोरी के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में संचालित कुछ क्रिकेट टर्फ ग्राउंड को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर शिकायतें और सवाल सामने आने की जानकारी मिल रही है। टर्फ ग्राउंड के संचालन, आवश्यक अनुमतियों और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ वहां कथित रूप से सट्टा-जुआ जैसी गतिविधियां चलने तथा बड़े पैमाने पर बिजली के अनधिकृत उपयोग की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में किसी व्यक्ति, संस्था या टर्फ ग्राउंड संचालक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। शिकायतों की वास्तविकता संबंधित पुलिस प्रशासन, महानगरपालिका और बिजली वितरण कंपनी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सट्टा और जुआ को लेकर क्या है शिकायत?

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों में दावा किया जा रहा है कि कुछ टर्फ ग्राउंड में क्रिकेट खेलने की गतिविधियों के अलावा कथित तौर पर सट्टेबाजी अथवा जुए से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित हो सकती हैं।

यदि ऐसी गतिविधियों की शिकायत पुलिस प्रशासन के पास प्राप्त हुई है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतों में कितनी वास्तविकता है। जांच में यदि किसी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग पर भी सवाल

इसी के साथ कुछ टर्फ ग्राउंड में बड़े पैमाने पर बिजली के कथित अनधिकृत उपयोग अथवा बिजली चोरी की शिकायतें भी सामने आने की चर्चा है।

टर्फ ग्राउंड में फ्लडलाइट, अन्य विद्युत उपकरण और रात के समय होने वाली गतिविधियों के कारण बिजली की खपत स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है। ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि वहां वैध विद्युत कनेक्शन, मीटर और संबंधित अनुमति मौजूद है या नहीं तथा बिजली का उपयोग नियमों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।

यदि बिजली चोरी की शिकायत आधिकारिक रूप से प्राप्त हुई है, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी द्वारा मीटर और कनेक्शन की जांच किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस और प्रशासन कब करेगा जांच?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन शिकायतों पर पुलिस प्रशासन, उल्हासनगर महानगरपालिका और संबंधित बिजली विभाग की ओर से कोई निरीक्षण या जांच की जाती है या नहीं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शिकायतों में तथ्य हैं, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार जांच करनी चाहिए और यदि शिकायतें निराधार हैं, तो आधिकारिक स्पष्टीकरण देकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

इसके अलावा टर्फ ग्राउंड के निर्माण, जमीन के उपयोग, व्यावसायिक संचालन, फायर सेफ्टी, आवश्यक परवाने और अन्य लागू नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी प्रशासनिक स्तर पर जांच किए जाने की मांग उठ सकती है।

शिकायतों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल सट्टा-जुआ और बिजली चोरी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन शिकायतों को फिलहाल शिकायत और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मंत्रालय टाइम्स का स्पष्ट मत है कि यदि किसी टर्फ ग्राउंड के खिलाफ गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तो संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और आरोप गलत पाए जाने पर संबंधित पक्ष को क्लीन चिट—दोनों ही स्थितियों में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।

अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर कब संज्ञान लेते हैं और क्रिकेट टर्फ ग्राउंड के संचालन से जुड़े इन सवालों पर क्या कार्रवाई अथवा स्पष्टीकरण सामने आता है।

















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