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पनवेल में कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला: दो बिल्डर गिरफ्तार, अदालत ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा।


 





नवी मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

पनवेल में संपत्ति के अधिकारों और व्यावसायिक साझेदारी से जुड़े एक मामले में दो बिल्डरों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता डॉ. भगवान जयवंत बिरमिळे की शिकायत के आधार पर पनवेल शहर पुलिस ने अविनाश दगडू जगदाळे और मनोज जयसिंह डोंगरे को गिरफ्तार किया है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, अदालत ने दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है।

यह मामला पनवेल के पुष्पकनगर, सेक्टर-2 स्थित भूखंड संख्या 456 से संबंधित है। आरोप है कि संपत्ति पर अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद के दौरान कुछ दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। मामले की वास्तविक परिस्थितियों, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।

क्या है पूरा मामला?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. भगवान जयवंत बिरमिळे और उनके व्यावसायिक साझेदार अविनाश दगडू जगदाळे तथा मनोज जयसिंह डोंगरे के बीच पुष्पकनगर स्थित भूखंड के विकास और उससे जुड़े व्यावसायिक लेन-देन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।

बताया गया है कि संबंधित भूखंड किसानों से विकास के उद्देश्य से साझेदारी के तहत लिया गया था। बाद में साझेदारों के बीच मतभेद बढ़ने के बाद मामला दीवानी न्यायालय तक पहुंच गया।

इस संपत्ति से संबंधित विशेष दीवानी वाद क्रमांक 208/2026 पनवेल स्थित दीवानी न्यायालय में लंबित होने की जानकारी दी गई है। इस मुकदमे से जुड़े दस्तावेजों और संपत्ति पर अधिकारों को लेकर उठे सवाल अब पुलिस जांच का भी हिस्सा हैं।

कथित फर्जी दस्तावेजों को लेकर शिकायत

शिकायत के अनुसार, विवादित संपत्ति के संबंध में एक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और घोषणा-पत्र तैयार किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन दस्तावेजों पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर उनकी जानकारी और सहमति के बिना किए गए तथा दस्तावेजों को वास्तविक बताकर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

शिकायतकर्ता का पक्ष है कि इन दस्तावेजों के इस्तेमाल से संपत्ति पर उनके अधिकारों की स्थिति प्रभावित हो सकती थी।

हालांकि, दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता, उन्हें तैयार करने वाले व्यक्तियों और न्यायालय में उनके इस्तेमाल से संबंधित परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। फिलहाल, इन आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और दर्ज धाराएं

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों की अनुमति से पनवेल शहर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

आरोपी अविनाश दगडू जगदाळे (32) और मनोज जयसिंह डोंगरे (37) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ये धाराएं आरोपों की प्रकृति के अनुसार धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने और साझा मंशा से किए गए कृत्यों से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी हैं। इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होना अपने आप में आरोपों के दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

दो दिन की पुलिस हिरासत, जांच में इन बिंदुओं पर ध्यान

प्रकाशित समाचार के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत मिली।

जांच के दौरान कथित तौर पर विवादित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया, उन पर किए गए हस्ताक्षर, दस्तावेजों के स्रोत और उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने की परिस्थितियों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, संबंधित संपत्ति के लेन-देन और साझेदारी से जुड़े अभिलेखों की जांच भी मामले की दिशा स्पष्ट करने में सहायक हो सकती है।

इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बाला कुंभार के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन पोवार द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है।

तीन कंपनियों के नाम भी दस्तावेजों में दर्ज

उपलब्ध विवरण में जे. प्राइम बिल्डकॉन एलएलपी (J. Prime Buildcon LLP), वेंकटेशा रियल्टी एलएलपी (Venkatesha Realty LLP) और डी. बी. प्राइम बिल्डकॉन एलएलपी (D. B. Prime Buildcon LLP) के नामों का उल्लेख है।

हालांकि, इन कंपनियों की संबंधित संपत्ति के विकास या लेन-देन में वास्तविक भूमिका और कथित विवादित दस्तावेजों से उनके किसी संबंध के बारे में फिलहाल पर्याप्त स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। केवल किसी दस्तावेज में कंपनी का नाम दर्ज होने के आधार पर उसके खिलाफ किसी प्रकार की अनियमितता या आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

संपत्ति विवाद और आपराधिक जांच के बीच अंतर

इस प्रकरण में संपत्ति के स्वामित्व, साझेदारी और विकास से संबंधित दीवानी विवाद तथा कथित दस्तावेजी अनियमितताओं से जुड़ी आपराधिक जांच अलग-अलग कानूनी पहलू हैं।

दीवानी मुकदमे में संपत्ति से जुड़े अधिकारों और दावों पर न्यायालय विचार करेगा, जबकि पुलिस जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों तथा कथित दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पड़ताल की जाएगी। दोनों प्रक्रियाओं के निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होंगे।

निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

पनवेल के इस मामले में दो बिल्डरों की गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत की कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। विवादित दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों की जांच और संबंधित लेन-देन के अभिलेखों से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। इसलिए मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उचित होगा।















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