उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
उल्हासनगर महानगरपालिका में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर एक नया मामला सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के महानगर प्रमुख दिलीप मिश्रा ने महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती मनीषा आव्हाळे को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि दो महानगरपालिका कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कानून की गलत व्याख्या की गई और जानकारी देने से परहेज किया गया।
शिकायत में मिश्रा ने आयुक्त से संबंधित अधिकारी के उत्तर की जांच करने, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कानूनी रूप से उपलब्ध जानकारी प्रदान करने के निर्देश देने तथा यदि जानकारी अनुचित तरीके से अस्वीकार की गई हो, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
6 अगस्त को किया था RTI आवेदन
शिकायत के अनुसार, दिलीप मिश्रा ने 6 अगस्त 2026 को टोकन क्रमांक 2766 के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में उल्हासनगर महानगरपालिका के कर्मचारी श्री अक्षय मनोज जाधव और श्री मनीष सुरेश लहांडे से संबंधित नियुक्ति एवं सेवा संबंधी विभिन्न जानकारियां मांगी गई थीं।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मांगी गई जानकारी में दोनों कर्मचारियों की नियुक्ति की तिथि, नियुक्ति की पृष्ठभूमि, उनके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेज, नियुक्ति से संबंधित नियमावली और लागू कोटे की जानकारी शामिल थी।
आवेदक के अनुसार, यह जानकारी प्रशासनिक एवं वस्तुनिष्ठ प्रकृति की थी और इसका उद्देश्य संबंधित नियुक्तियों की प्रक्रिया तथा नियमों के अनुपालन से जुड़े तथ्यों को समझना था।
10 सितंबर के पत्र को लेकर जताई आपत्ति
दिलीप मिश्रा ने अपनी शिकायत में पत्र क्रमांक 258/2026, दिनांक 10 सितंबर 2026 का उल्लेख करते हुए कहा है कि जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग के उत्तर में कानून की गलत व्याख्या करते हुए मांगी गई जानकारी देने से परहेज किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उपलब्ध कराई जा सकने वाली जानकारी पर नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए था। उन्होंने संबंधित उत्तर पर आपत्ति जताते हुए आयुक्त से पूरे मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है।
हालांकि, संबंधित अधिकारी द्वारा दिए गए मूल उत्तर, उसमें उल्लिखित कानूनी आधार और मांगी गई प्रत्येक जानकारी का विवरण स्वतंत्र रूप से उपलब्ध न होने के कारण यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि जानकारी का इनकार निश्चित रूप से कानून के विरुद्ध था। इस संबंध में महानगरपालिका प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
आयुक्त मनीषा आव्हाळे से तीन प्रमुख मांगें
शिकायत में आयुक्त से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
- उत्तर की जांच: जन सूचना अधिकारी, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिए गए जवाब की कानूनी एवं तथ्यात्मक समीक्षा की जाए।
- जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश: सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कानूनी रूप से उपलब्ध जानकारी नियमानुसार प्रदान की जाए।
- जिम्मेदारी तय करने की मांग: यदि जांच में जानकारी अनुचित तरीके से अस्वीकार किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए।
इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता ने आयुक्त से अनुरोध किया है कि इस शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।
RTI और प्रशासनिक पारदर्शिता का मुद्दा
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास उपलब्ध रिकॉर्ड तक पहुंच प्राप्त करने का कानूनी माध्यम प्रदान करता है। हालांकि, मांगी गई प्रत्येक जानकारी का खुलासा स्वतः अनिवार्य नहीं होता। संबंधित जानकारी की प्रकृति, अधिनियम के तहत लागू अपवादों और अन्य वैधानिक प्रावधानों के आधार पर उसका निर्णय किया जाता है।
इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि क्या आवेदन में मांगी गई जानकारी पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उचित विचार किया गया था और यदि किसी जानकारी को देने से इनकार किया गया, तो क्या उसके लिए पर्याप्त कानूनी आधार बताया गया था।
यदि शिकायतकर्ता संबंधित उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं, तो अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध अपील के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
अब महानगरपालिका प्रशासन के रुख पर नजर
दिलीप मिश्रा की शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महानगरपालिका आयुक्त इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और संबंधित विभाग से क्या स्पष्टीकरण मांगा जाता है।
फिलहाल, शिकायतकर्ता ने जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में आयुक्त कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग और संबंधित जन सूचना अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
निष्कर्ष: उल्हासनगर महानगरपालिका में नियुक्ति संबंधी जानकारी को लेकर उठे इस मामले ने सूचना का अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। अब शिकायत पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और नियमानुसार की जाने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए पत्र में उल्लिखित तथ्यों और आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा मूल RTI उत्तर स्वतंत्र रूप से सत्यापित होने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।





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