मुंबई/संगमनेर: दिनेश मिरचंदानी
महाराष्ट्र की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को हिला देने वाला एक बेहद सनसनीखेज और हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कथित सलाहकार बनकर मंत्रालय, विधानमंडल और अन्य संवेदनशील सरकारी परिसरों में बेखौफ आवाजाही करने वाले संगमनेर के एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान दत्तात्रय गुंजाळ के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने कुल 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें से अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 2 आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
मुख्यमंत्री का नाम लेकर बनाता था दबाव
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी दत्तात्रय गुंजाळ अहमदनगर जिले के संगमनेर का निवासी है। वह खुद को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सलाहकार बताकर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े होने का दावा कर कई सरकारी विभागों में फोन करता था, अधिकारियों पर दबाव बनाता था और कुछ मामलों में निजी लाभ लेने की भी कोशिश कर रहा था।
पुलिस को ऐसे कई मामलों के संकेत मिले हैं, जिनमें आरोपी ने अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों को धमकाने, काम निकलवाने और आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की।
मंत्रालय और विधानमंडल में संदिग्ध आवाजाही से सुरक्षा पर सवाल
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी मंत्रालय और विधानमंडल जैसे अति-संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में फर्जी पहचान के आधार पर लगातार आवाजाही कर रहा था।
इस खुलासे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी को प्रवेश कैसे मिला, किसने मदद की और क्या सुरक्षा प्रक्रिया में कहीं चूक हुई।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी कई बार सरकारी बैठकों के आसपास भी देखा गया था, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
7 लोगों का संगठित रैकेट सामने आया
जांच के दौरान पुलिस को इस पूरे मामले में एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं। आरोपी दत्तात्रय गुंजाळ अकेले नहीं था, बल्कि उसके साथ एक पूरा समूह सक्रिय था।
पुलिस ने इस मामले में कुल 7 लोगों की संलिप्तता सामने आने की पुष्टि की है। इनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि 2 अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं।
किन-किन लोगों को ठगा, जांच तेज
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर किन-किन लोगों से संपर्क किया, किन लोगों को ठगा और किन सरकारी विभागों में प्रभाव जमाने की कोशिश की।
जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया और दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े से जुड़े और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
इस घटना के सामने आने के बाद मंत्रालय और विधानमंडल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और फर्जी पहचान के मामलों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।
पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक प्रणाली और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जबकि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
