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राधेश्याम गौशाला में कथित भ्रष्टाचार का आरोप: उच्चस्तरीय जांच, प्रशासक नियुक्ति की मांग और बैंक खाते फ्रीज करने की जलदगतीसे मांग।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर स्थित स्वामी शांतिप्रकाश आश्रम ट्रस्ट द्वारा संचालित राधेश्याम गौशाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। राष्ट्रीय छावा संगठन ने गौशाला के संचालन में कथित भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितताओं और गोवंश की देखभाल में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

संगठनों के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष निखिल नामदेव गोळे पाटिल ने इस संबंध में सांसद श्रीकांत शिंदे को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि गौशाला के संचालन को लेकर लंबे समय से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि गौशाला में मौजूद तीन हजार से अधिक गोवंश के लिए चारा, स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे पशुओं के संरक्षण और कल्याण पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

उल्हासनगर राधेश्याम गौशाला ( स्वामी शांती प्रकाश आश्रम संचालित ) इस गौशाला से बैल / नंदी और बिमार गाय को नाशिक स्थित गौशाला मे भेजा जाता है , जीसका कोई भी लेखा स्थानीय गौशाला मे नोंदणी नही होती ना हो स्थानीय पोलीस प्रशासन को जाणकारी दि जाती है , और ये सिधा आरोप लगाया इन नंदी महाराज और बैल को कत्तल खानो मे रवाना किया जाता होगा / अगर इसका कोई दस्तऐवज है तो गौशाला प्रबंधन स्थानीय पोलीस ठाणे मे इन्का नोंद दिखाये / 

ज्ञापन के अनुसार, चारा खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, ट्रस्ट को प्राप्त होने वाली निधि के कथित दुरुपयोग तथा वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो गौशाला की व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।

संगठनों ने मांग की है कि वर्तमान प्रबंधन समिति को तत्काल भंग कर गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक को सौंपी जाए। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संस्था के बैंक खातों एवं सभी वित्तीय लेनदेन को फ्रीज किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि गौशाला जैसी धार्मिक और सामाजिक महत्व की संस्था में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू करना आवश्यक है, ताकि गोवंश के संरक्षण, देखभाल और गौशाला के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया जा सके।

निखिल गोळे जी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा गौशाला की व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग की है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।













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