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डायबिटीज मरीजों में पैरों से जुड़ी बढ़ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में 10 मई को शिवसेना नगरसेविका मीना सोंडे की पहल पर निशुल्क विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

डायबिटीज के मरीजों में तेजी से बढ़ रही पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में एक विशेष “डायबिटिक फुट कैंप” का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर 10 मई 2026 को फिनिक्स हॉस्पिटल, कुर्ला कैंप रोड, बाबासाई नगर, उल्हासनगर में आयोजित होगा, जहां मुंबई के प्रसिद्ध डायबिटिक फुट विशेषज्ञ मरीजों की जांच और परामर्श देंगे।

डॉक्टरों के अनुसार डायबिटीज का असर केवल शुगर लेवल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समय पर उपचार न मिलने पर पैरों में सूजन, जलन, झुनझुनी, न भरने वाले घाव, बार-बार संक्रमण और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कई मामलों में मरीजों को पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।

इस विशेष कैंप में डायबिटिक फुट सर्जरी और उपचार के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. अरुण बाल और उनकी टीम मरीजों को मार्गदर्शन देंगे। कैंप में कंसल्टेंट डायबिटिक फुट सर्जन डॉ. सचिन विल्हेकर और डॉ. अर्चित चिटणीस भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही उल्हासनगर महानगरपालिका की सभापति डॉ. मीना सोंडे की भी उपस्थिति रहेगी।

कैंप में पैरों की सूजन, लालिमा, कॉर्न, कैलोसिटी, न भरने वाले घाव, तेज दर्द, ऐंठन, टखनों की विकृति, अंदर की ओर मुड़ने वाले नाखून और गैंग्रीन जैसी समस्याओं की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ मरीजों को उचित उपचार और भविष्य में सावधानी बरतने संबंधी सलाह भी देंगे।

यह कैंप सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कैंप में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। इच्छुक मरीज 88 79 88 28 32 और 91 67 67 67 90 नंबर पर संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल (ए फोर्टिस एसोसिएट), माहिम, मुंबई द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कैंप डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं और समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।














यूरोप से उल्हासनगर पहुंचा ड्रग्स नेटवर्क! मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स केस की जांच में सामने आए कई सनसनीखेज खुलासे।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की कथित ड्रग ओवरडोज से हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की जांच में अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए भुगतान का खुलासा हुआ है, जिसने इस पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी महेश खेमलानी ने यूरोप में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए करीब 4,000 एक्स्टेसी पिल्स मंगवाई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप दो अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र लाई गई और बाद में उल्हासनगर तक पहुंचाई गई।

अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में करीब 3,000 एक्स्टेसी गोलियां भेजी गई थीं, जबकि दूसरी खेप में 1,000 गोलियां शामिल थीं। दोनों खेप कथित तौर पर कूरियर सेवा के माध्यम से आरोपी के साथी आयुष साहित्य के परिचित के पते पर पहुंचाई गईं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी हुई है।

जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ड्रग सप्लायर को भुगतान पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से नहीं, बल्कि टेथर (Tether) नामक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का उद्देश्य लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों से बचना था।

सूत्रों के अनुसार, मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट, डार्क वेब नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन एंगल की भी गहन जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों, ड्रग सप्लाई चैन और फंडिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।















उल्हासनगर पर ड्रग्स नेटवर्क का साया: भविष्य में ‘हब’ बनने की आशंका, आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede की सख्त चेतावनी।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर का नाम सामने आने के बाद इस शहर को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उल्हासनगर भविष्य में ड्रग्स का बड़ा हब बन सकता है।

उल्हासनगर में आयोजित एक ड्रग्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि हालिया घटनाओं ने इस क्षेत्र को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और इसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने खासतौर पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ड्रग्स का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक व्यापक सामाजिक संकट है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

वानखेड़े ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान, खुफिया निगरानी को मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।














उल्हासनगर कैम्प-5 में अवैध डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ बड़ा आंदोलन: साईं हीरालाल जी बने नवगठित समिति के अध्यक्ष।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प-5 क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बने अवैध डंपिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब संगठित रूप से आवाज बुलंद कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार, 4 मई को संत प्रभाराम मंदिर, उल्हासनगर-5 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक नवगठित समिति का गठन किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से साईं वसनशाह दरबार के साईं हीरालाल जी को समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी सदस्यों के विशेष आग्रह पर साईं हीरालाल जी ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उनके नेतृत्व में अब इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है।

समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रकाश गोविंदराम लुंड (पिकी), मनीष नारा, राजकुमार कुकरेजा, राजेश चांगलानी, विजय वाधवा, मनीष ठाकुर, रॉकी शर्मा, नरेश आहुजा, निल शर्मा, जैकी सुखेजा और शशिकांत दायमा शामिल हैं। सभी सदस्यों ने एक स्वर में अवैध डंपिंग ग्राउंड को तत्काल हटाने की मांग की।

बैठक में यह भी गंभीर रूप से उठाया गया कि उक्त डंपिंग ग्राउंड में मृत पशुओं को फेंका जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए समिति ने मृत पशुओं के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए शवदाहिनी (इंसीनरेटर) की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, क्षेत्र में फैल रहे धुएं, प्रदूषण और बदबू की समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाययोजनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समिति ने निर्णय लिया कि इस पूरे मुद्दे को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी।

बैठक में उपस्थित नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रदूषण और अव्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए यह मामला अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में समिति की अगुवाई में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन होने की संभावना जताई जा रही है।














शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने उल्हासनगर में किया अहम बदलाव, दिलीप मिश्रा महानगर प्रमुख नियुक्त।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लेते हुए उल्हासनगर महानगर प्रमुख पद पर दिलीप मिश्रा की नियुक्ति की है। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर की गई इस नियुक्ति को आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिलीप मिश्रा लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए एक सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने और संगठन को जमीनी स्तर पर विस्तार देने की क्षमता रखते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को उल्हासनगर में पार्टी की गतिविधियों को तेज करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें स्थानीय जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों और विचारधारा को प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह नियुक्ति खास मायने रखती है। उल्हासनगर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में संगठन को मजबूत करना किसी भी पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम होता है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह कदम पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों का संकेत भी माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के जरिए शिवसेना (यूबीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। दिलीप मिश्रा की नियुक्ति से न केवल संगठन में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

उल्हासनगर की नियुक्तियां

उपज़िलाप्रमुख उल्हासनगर विधानसभा व महानगरपालिका क्षेत्र - राजेंद्र शाहू, महानगरप्रमुख - दिलीप मिश्रा, विधानसभा क्षेत्रप्रमुख - राजन वेलकर, विधानसभा क्षेत्र संगठक - कृष्णा पुजारी, शहरप्रमुख - शिवाजी जावळे, शहर संगठक - भगवान मोहिते।

उपशहरप्रमुख

 सुरेश पाटिल (कैम्प नं. 1)

 अवतार सिंह गिल (कैम्प नं. 2)

 शिवाजी हावळे (कैम्प नं. 3)

 दशरथ चौधरी (कैम्प नं. 3)

 विभागप्रमुख:

 करीम शेख (कैम्प नं. 1)

 अशोक सातपुते (कैम्प नं. 2)

 आदिनाथ पालवे (कैम्प नं. 3)

 संतोष यादव (कैम्प नं. 3)

उपविभागप्रमुख:

संतोष गवारे, भास्कर शिंदे, नरेंद्र हिंगोरानी, अशोक जाधव, साहेबराव ससाणे (सभी कैम्प नं. 3)

हकीम शेख (कैम्प नं. 1)













उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल में संदिग्ध निर्माण पर उठे सवाल: बिना बोर्ड, बिना जानकारी जारी कामकाज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-3 स्थित सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर परिसर में एक निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के शवगृह (मॉर्चरी) के समीप स्थित एक खुला मैदान(जगह) पड़ी इमारत में कथित रूप से निर्माण कार्य जारी है, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इससे पहले भी सेंट्रल हॉस्पिटल उल्हासनगर-3 के सिविल सर्जन डॉ. बनसोडे पर मनमानी तरीके से काम करने के आरोप लग चुके हैं। करोड़ों रुपये के विभिन्न कार्यों में गड़बड़ी और अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि ऑक्सीजन प्लांट को लोगों के घरों के सामने स्थापित किया गया, साथ ही सोलर सिस्टम, जनरेटर और MGPAY से जुड़े करोड़ों रुपये के कामों में भी धांधली की गई है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, जिस इमारत में निर्माण हो रहा है, वहां न तो संबंधित ठेकेदार कंपनी का नाम दर्शाने वाला बोर्ड लगाया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि निर्माण कार्य का प्लान संबंधित प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृत है या नहीं। आमतौर पर किसी भी सरकारी या सार्वजनिक परियोजना में प्लान पास होने की जानकारी, प्रोजेक्ट की लागत, ठेकेदार का नाम और समयसीमा का उल्लेख अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इस तरह की कोई पारदर्शिता नजर नहीं आ रही है।

इसके अलावा यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जिस जमीन पर यह निर्माण हो रहा है, वह आधिकारिक रूप से अस्पताल के नाम पर दर्ज है या नहीं। इस संबंध में किसी प्रकार के भूमि स्वामित्व या दस्तावेजों की जानकारी भी स्थल पर प्रदर्शित नहीं की गई है। नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले तहसीलदार या प्रांत कार्यालय में रॉयल्टी और अन्य सरकारी शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन इन प्रक्रियाओं के पालन को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य “चुपचाप” तरीके से किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले में अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है। नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि यह एक वैध और सार्वजनिक हित का प्रोजेक्ट है, तो फिर इसे लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जा रही है।

हैरानी की बात यह भी है कि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या स्थानीय नेता ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी है। न तो किसी ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और न ही उद्घाटन या आधिकारिक घोषणा की गई, जिससे राजनीतिक चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य की तत्काल जांच करे, सभी आवश्यक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों और स्थल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासनिक पक्ष सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)























कल्याण-उल्हासनगर बेल्ट में फिर सक्रिय हुए अवैध जींस वॉश कारखाने, नदियों पर मंडराया गंभीर प्रदूषण संकट।


कल्याण/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ के ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से संचालित जींस वॉश (धुलाई) कारखाने एक बार फिर बड़े पैमाने पर सक्रिय हो गए हैं। नियमों और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार करते हुए चल रही इन इकाइयों के कारण क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ—उल्हास, मुकी, गवर और कासाडी—गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्थानीय नागरिकों और किसानों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा उल्हासनगर क्षेत्र से सैकड़ों जींस वॉश यूनिट्स को हटाया गया था। उस समय इसे एक बड़ी कार्रवाई माना गया था। हालांकि अब वही यूनिट संचालक अंबरनाथ और कल्याण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को आर्थिक प्रलोभन देकर फिर से इन कारखानों को स्थापित कर रहे हैं।

प्रदूषण का बढ़ता दायरा

इन कारखानों से निकलने वाला रासायनिक युक्त गंदा पानी बिना किसी शोधन प्रक्रिया के सीधे जमीन और जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है। कई स्थानों पर पानी की आपूर्ति के लिए सैकड़ों बोरवेल खोदे गए हैं, जिनसे अब दूषित और बदबूदार पानी निकलने की शिकायतें मिल रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो भूजल भी पूरी तरह से प्रदूषित हो सकता है।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

स्थानीय नागरिकों, किसानों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और संबंधित प्रशासनिक विभागों को बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। नोटिस जारी करने के बावजूद इन यूनिट्स का संचालन बेरोकटोक जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिर्फ कागजी कार्रवाई का आरोप

सूत्रों के अनुसार, पहले की गई सख्त कार्रवाई के बाद ये कारखाने बंद हो गए थे, लेकिन कुछ समय बाद फिर से शुरू हो गए। आरोप है कि संबंधित विभाग केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई स्थानों पर केमिकल युक्त पानी को गड्ढों में जमा किया जा रहा है, जो धीरे-धीरे जमीन के भीतर समा रहा है।

एनजीओ की चेतावनी और मांग

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक एनजीओ के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल दिखावटी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस गंभीर मुद्दे को न्यायिक स्तर पर ले जाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और इन अवैध कारखानों को तत्काल बंद किया जाए।

निष्कर्ष

हालांकि प्रशासन द्वारा इन यूनिट्स के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद ये जींस वॉश कारखाने खुलेआम संचालित हो रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है।














उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट में डेनिम रोल (कपड़े) के व्यापारियों पर GST और आयकर विभाग की कड़ी नजर.!


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर-5 का मशहूर जींस मार्केट इन दिनों कर विभागों की सख्त निगरानी में आ गया है। जींस निर्माण और डेनिम कपड़े के थोक व्यापार के लिए जाना जाने वाला यह बाजार अब कथित तौर पर टैक्स अनियमितताओं और कच्चे लेनदेन के चलते चर्चा में है। प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, यहां बड़े पैमाने पर “जींस रोल” यानी डेनिम कपड़े के थोक रोल का व्यापार किया जाता है, जिसमें टैक्स अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर के व्यापारी अहमदाबाद (गुजरात), इचलकरंजी (महाराष्ट्र) और भीलवाड़ा (राजस्थान) जैसे प्रमुख टेक्सटाइल हब से विधिवत GST भुगतान कर डेनिम कपड़ा खरीदते हैं। यह कपड़ा पूरी तरह से बिल और टैक्स के साथ शहर में लाया जाता है, जिससे प्रारंभिक स्तर पर लेनदेन पूरी तरह वैध दिखाई देता है।

हालांकि, स्थानीय बाजार में पहुंचने के बाद इसी कपड़े की बिक्री में कथित तौर पर दोहरी प्रणाली अपनाई जा रही है। जानकारी के अनुसार, कुछ माल को GST बिल के साथ बेचा जाता है, जबकि बड़ी मात्रा में कपड़ा बिना बिल यानी “कच्चे” रूप में खपाया जाता है। यह व्यवस्था टैक्स चोरी की ओर इशारा करती है और इसे लेकर विभागों की चिंता बढ़ गई है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का समानांतर कच्चा कारोबार न केवल कर कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार दोनों के लिए बड़े राजस्व नुकसान का कारण बन रहा है। अनुमान है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो यह नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा, यह स्थिति उन व्यापारियों के लिए भी चुनौती बन रही है जो नियमों के तहत ईमानदारी से GST का भुगतान करते हैं। कच्चे लेनदेन करने वाले व्यापारी कम कीमत पर माल बेचकर बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं, जिससे व्यवस्थित कारोबार प्रभावित हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, GST विभाग और आयकर विभाग इस पूरे नेटवर्क पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। संदिग्ध व्यापारियों की सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही संयुक्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इसमें छापेमारी, खातों की जांच, ई-वे बिल और लेनदेन के रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन और कर विभागों का कहना है कि कर चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले में बड़े खुलासे और कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है, जिससे जींस मार्केट के व्यापारिक ढांचे पर व्यापक असर पड़ सकता है।













उल्हासनगर में फैलता ड्रग्स नेटवर्क बना गंभीर चुनौती: सख्त कार्रवाई की मांग तेज, IRS अधिकारी समीर वानखेड़े कर सकते हैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैलते ड्रग्स नेटवर्क ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रही शिकायतों और स्थानीय स्तर पर बढ़ती गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि यह इलाका धीरे-धीरे नशे के कारोबार का केंद्र बनता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अभिभावकों के बीच इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। उनका कहना है कि नशे की बढ़ती उपलब्धता के कारण युवाओं और छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है, जिससे समाज पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसी बीच, सूत्रों के अनुसार IRS अधिकारी Sameer Wankhede इस गंभीर मुद्दे को राज्य सरकार के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि वे जल्द ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मुलाकात कर सकते हैं। इस संभावित बैठक में ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ व्यापक और सख्त कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित चर्चा में राज्य स्तर पर विशेष अभियान चलाने, पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तथा ड्रग्स सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा सकता है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई इलाकों में खुलेआम नशे की बिक्री हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित छापेमारी, सख्त निगरानी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है।

फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए किस स्तर की कार्रवाई की जाती है।














उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क पर चिंता: Sameer Wankhede की सख्त अपील—नशे से दूर रहें युवा


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ते नशे के मामलों के बीच भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है—“ड्रग्स से दूर रहना ही सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।”

हाल के समय में उल्हासनगर शहर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए ड्रग्स से जुड़े मामलों ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंतित कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में वानखेड़े का यह बयान न केवल एक चेतावनी है, बल्कि युवाओं को सही दिशा दिखाने का प्रयास भी है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे जीवन को प्रभावित करती है। “ड्रग्स एक ऐसी बुराई है जो धीरे-धीरे व्यक्ति के करियर, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को खत्म कर देती है। युवा अगर एक बार इस जाल में फंस जाएं, तो बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है,” उन्होंने कहा।

वानखेड़े ने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में कुछ युवा गलत संगत, सोशल मीडिया के प्रभाव और आसान पैसे के लालच में आकर नशे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कानूनी सख्ती और प्रशासनिक कार्रवाई

उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और आने वाले समय में यह और तेज होगी। “कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए,” उन्होंने कहा।

परिवार और शिक्षकों की अहम भूमिका

समीर वानखेड़े ने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें। “युवाओं को सही दिशा देना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का कर्तव्य है,” उन्होंने कहा।

समाज को एकजुट होने की जरूरत

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल हो सकती है जब समाज का हर वर्ग—परिवार, स्कूल, कॉलेज और प्रशासन—एक साथ मिलकर काम करे।

उल्हासनगर जैसे शहरों में बढ़ते नशे के मामलों के बीच यह संदेश युवाओं के लिए एक चेतावनी भी है और एक प्रेरणा भी—कि सही रास्ता चुनना ही असली सफलता और सुरक्षित भविष्य की पहचान है।














मुंबई के गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर कनेक्शन गहराया — ड्रग्स का उभरता मुख्य केंद्र बनता उल्हासनगर.!


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में सामने आए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले ने अब बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों को इस पूरे मामले में उल्हासनगर का मजबूत कनेक्शन मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस ड्रग्स नेटवर्क का संचालन केवल मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि उल्हासनगर से बड़े पैमाने पर ड्रग्स की सप्लाई होने की आशंका जताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि पार्टी, कॉन्सर्ट और हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में ड्रग्स की सप्लाई के लिए उल्हासनगर को एक प्रमुख हब के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

उल्हासनगर बनता जा रहा ड्रग्स सप्लाई का नया हब

जांच एजेंसियों के मुताबिक, उल्हासनगर में पिछले कुछ महीनों से ड्रग्स से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि:

उल्हासनगर में छोटे-छोटे नेटवर्क बन चुके हैं

युवाओं को ड्रग्स सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है

मुंबई के हाई-प्रोफाइल इवेंट्स तक ड्रग्स पहुंचाई जा रही थी

व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम टेलीग्राम और स्नॅपचॅट प्लेटफॉर्म के जरिए सप्लाई नेटवर्क चलाया जा रहा था

यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की डिलीवरी के लिए अलग-अलग शहरों के बीच कूरियर चैनल बनाए गए थे, जिससे पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई का शक

जांच में यह भी सामने आया है कि गोरेगांव नेस्को सेंटर में आयोजित कॉन्सर्ट और निजी पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई की जाती थी। इस दौरान:

MDMA (एक्स्टेसी)

कोकीन

गांजा

सिंथेटिक ड्रग्स

जैसे नशीले पदार्थों की सप्लाई होने की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ ड्रग्स सप्लायर सीधे उल्हासनगर से मुंबई पहुंचते थे और इवेंट के दौरान ग्राहकों को सप्लाई करते थे।

युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि इस नेटवर्क का मुख्य निशाना युवा वर्ग था। कॉलेज स्टूडेंट्स और पार्टी सर्कल में ड्रग्स तेजी से फैलने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और धीरे-धीरे मुंबई महानगर क्षेत्र में अपना विस्तार कर रहा था।

पुलिस और एजेंसियां अलर्ट मोड पर

मुंबई पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम ने इस मामले में कई संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस अब:

उल्हासनगर में छापेमारी की तैयारी कर रही है

ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े लोगों की सूची तैयार कर रही है

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया डेटा की जांच कर रही है

सप्लाई चैन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है

सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

मामला क्यों है बेहद गंभीर

ड्रग्स नेटवर्क का अंतर-शहर कनेक्शन

युवाओं को निशाना बनाया जा रहा

हाई-प्रोफाइल पार्टियों में सप्लाई

संगठित नेटवर्क का विस्तार

इन सभी कारणों से यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।

आगे क्या?

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कोशिश में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और उल्हासनगर से जुड़े बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।

🚨 यह मामला केवल एक ड्रग्स सप्लाई का नहीं, बल्कि शहरों में तेजी से फैलते संगठित ड्रग्स नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है — जो आने वाले समय में कानून व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।














मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस की जांच तेज, आठवां आरोपी शुभ अग्रवाल गिरफ्तार — उल्हासनगर का मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार, उल्हासनगर से ड्रग नेटवर्क के तार गहराए।

मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर ड्रग ओवरडोज़ मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आठवें आरोपी शुभ अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी को मामले में अहम सफलता माना जा रहा है। वानराई पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद अब ड्रग सप्लाई नेटवर्क के कई नए तार सामने आने लगे हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य सप्लायर उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य अभी भी फरार है। जांच एजेंसियों को Snapchat चैट, डिजिटल ट्रेल, मोबाइल लोकेशन और UPI लेनदेन से जुड़े अहम सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर पुलिस ड्रग नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।

गिरफ्तार आरोपी शुभ अग्रवाल को अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी से ड्रग सप्लाई चेन, पार्टी नेटवर्क और अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

उल्हासनगर कनेक्शन गहराया, कई संदिग्ध रडार पर

जांच के दौरान उल्हासनगर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, उल्हासनगर निवासी साहिल, मोहित, दीपेश और धीरज का नाम भी संदेह के दायरे में आया है।

पुलिस को शक है कि ये सभी कथित तौर पर ड्रग सप्लाई, पार्टी नेटवर्क और युवाओं तक ड्रग्स पहुंचाने में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इन सभी की गतिविधियों और संपर्कों की जांच कर रही है।

उल्हासनगर की कुछ युवतियों की भूमिका की भी जांच

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में उल्हासनगर की कुछ युवतियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ये युवतियां कथित तौर पर पार्टी नेटवर्क और ड्रग वितरण चैनल से जुड़ी हो सकती हैं।

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है।

गिरफ्तारी के डर से कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे गिरफ्तारी के डर से अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी, तकनीकी सर्विलांस और लोकेशन ट्रैकिंग कर रही हैं।

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल ट्रांजैक्शन और संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है। 

हाई-प्रोफाइल पार्टी नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि यह नेटवर्क केवल नेस्को सेंटर में आयोजित एक म्यूज़िक कॉन्सर्ट तक सीमित था या फिर मुंबई के अन्य हाई-प्रोफाइल पार्टियों और इवेंट्स तक फैला हुआ है।

पुलिस को शक है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर Snapchat, के जरिए ड्रग्स की डीलिंग की जा रही थी, जबकि UPI और डिजिटल पेमेंट के माध्यम से लेनदेन किया जा रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 11 अप्रैल को गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित म्यूज़िक कॉन्सर्ट के दौरान संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से दो मैनेजमेंट छात्रों की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह मामला हाई-प्रोफाइल बन गया।

घटना के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क की कई परतें सामने आने लगीं।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ड्रग सप्लाई चेन, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और पार्टी नेटवर्क को लेकर जांच तेज कर दी गई है।

मुंबई पुलिस का कहना है कि पूरे ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।

🚨 अब तक की स्थिति

8 आरोपी गिरफ्तार

मुख्य सप्लायर आयुष साहित्य फरार

कई संदिग्ध अंडरग्राउंड

उल्हासनगर ड्रग नेटवर्क की जांच तेज

Snapchat और UPI लेनदेन जांच के दायरे में

🚨 मुंबई नेस्को ड्रग ओवरडोज़ केस में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














 

मुंबई नेस्को ड्रग्स केस में बड़ा खुलासा: उल्हासनगर के आयुष साहित्य आरोपी का नाम आया सामने, मुंबई पुलिस की कई टीमें तलाश में जुटीं।


मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में आयोजित हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट में सामने आए ड्रग्स ओवरडोज़ मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आयुष साहित्य फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए मुंबई पुलिस ने कई विशेष टीमें गठित कर दी हैं।

यह मामला पहले ही दो युवाओं की मौत के कारण सुर्खियों में था, और अब नए नाम सामने आने से जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

क्या है पूरा मामला

11 अप्रैल को मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में एक हाई-प्रोफाइल म्यूज़िक कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स का सेवन किया गया, जिसके बाद दो मैनेजमेंट छात्रों की संदिग्ध ड्रग ओवरडोज़ से मौत हो गई। 

इसके अलावा एक अन्य युवक की तबीयत भी बिगड़ गई थी, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और मुंबई पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

जांच में सामने आया नया नाम

पुलिस जांच के दौरान ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े कई लोगों के नाम सामने आए हैं। इसी क्रम में अब उल्हासनगर निवासी आयुष साहित्य का नाम भी सामने आया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आयुष साहित्य की भूमिका ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी होने की आशंका है। जांच एजेंसियों को शक है कि कॉन्सर्ट में ड्रग्स उपलब्ध कराने या सप्लाई चेन में उसकी सक्रिय भूमिका हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी तक उसकी भूमिका को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापेमारी

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उल्हासनगर, मुंबई और आसपास के कई इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस आयुष साहित्य के मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल्स और संपर्कों की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अब तक कितनी हुई गिरफ्तारी

नेस्को ड्रग्स मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ड्रग्स सप्लाई चेन से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां इस मामले को संगठित ड्रग्स नेटवर्क से जोड़कर भी देख रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आने की संभावना है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस का आधिकारिक बयान

पुलिस अधिकारियों ने मामले को लेकर कहा है कि,

"जांच के दौरान सामने आने वाले हर व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।"

हाई-प्रोफाइल पार्टियों पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर हाई-प्रोफाइल पार्टियों और म्यूज़िक कॉन्सर्ट में ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे टिकट, निजी टेबल और वीआईपी पास वाले ऐसे आयोजनों में ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, जो युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

मुंबई पुलिस अब इस मामले में आयोजकों, सप्लाई चेन और शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

⚠️ जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














मुंबई के गोरेगांव ड्रग्स पार्टी मामला: उल्हासनगर का आयुष साठ्ये फरार, मुंबई पुलिस की तलाश तेज — दो MBA छात्रों की मौत के बाद बड़ा खुलासा।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित टेक्नो म्यूज़िक कॉन्सर्ट में हुए ड्रग्स ओवरडोज़ मामले में जांच तेज हो गई है। इस सनसनीखेज मामले में अब उल्हासनगर का नाम भी सामने आया है। मुंबई पुलिस उल्हासनगर निवासी आयुष साठ्ये की तलाश कर रही है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

दो MBA छात्रों की मौत से मचा हड़कंप

कुछ दिन पहले गोरेगांव में आयोजित टेक्नो म्यूज़िक कॉन्सर्ट के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स का अधिक सेवन करने से MBA के दो छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य छात्रों की तबीयत भी बिगड़ गई थी। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी।

कल्याण से आनंद पटेल गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने कल्याण निवासी आनंद पटेल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान आनंद पटेल ने पुलिस को अहम जानकारी देते हुए बताया कि उसने ड्रग्स उल्हासनगर के आयुष साठ्ये से खरीदे थे।

आनंद पटेल के इस खुलासे के बाद पुलिस ने आयुष साठ्ये की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही आयुष साठ्ये फरार हो गया।

सप्लाई चेन का खुलासा

जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सामने आई है। मामले में गिरफ्तार प्रतीक पांडेय ने पुलिस को बताया कि उसने ड्रग्स आनंद पटेल से खरीदा था। इससे ड्रग्स सप्लाई की एक चेन सामने आई है:

आयुष साठ्ये (उल्हासनगर) → आनंद पटेल (कल्याण) → प्रतीक पांडेय → कॉन्सर्ट में छात्र

इस खुलासे के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

बड़े ड्रग्स रैकेट की आशंका

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे बड़े ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क का कनेक्शन मुंबई, ठाणे, कल्याण और उल्हासनगर के अन्य इलाकों से भी जुड़ा हुआ है।

पुलिस की टीमें तलाश में जुटीं

मुंबई पुलिस की कई टीमें आयुष साठ्ये की तलाश में जुटी हुई हैं। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और मोबाइल लोकेशन व संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

युवाओं में बढ़ते ड्रग्स चलन पर चिंता

इस घटना ने मुंबई और आसपास के इलाकों में युवाओं के बीच बढ़ते ड्रग्स चलन को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पुलिस अब ऐसे कॉन्सर्ट और पार्टियों पर भी नजर रख रही है, जहां ड्रग्स के इस्तेमाल की आशंका रहती है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।














उल्हासनगर-2 जवेरी बाजार में बड़ा खतरा: अवैध गैस सिलेंडरों से चल रहे सोने के कारखाने, प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल।

(फाइल इमेज)

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर-2 के सिरू चौक स्थित प्रसिद्ध जवेरी बाजार की सोनारा गली में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां बड़ी संख्या में सोने के अवैध कारखाने बिना अनुमति संचालित किए जा रहे हैं, जहां अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। इस गंभीर लापरवाही के कारण कभी भी बड़ा विस्फोट या आगजनी जैसी घटना होने का खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सोनारा गली में संचालित कई गोल्ड प्रोसेसिंग और ज्वेलरी निर्माण इकाइयों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का अवैध उपयोग किया जा रहा है। इन कारखानों में न तो फायर सेफ्टी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही आपातकालीन निकास की कोई सुविधा मौजूद है। ऐसे में यह क्षेत्र किसी भी समय बड़े हादसे का केंद्र बन सकता है। 

⚠️ संकरी गली में चल रहे कारखाने, बचाव कार्य होगा मुश्किल

सोनारा गली अत्यंत संकरी होने के कारण यदि आग या विस्फोट जैसी घटना होती है, तो दमकल विभाग और राहत टीमों को मौके पर पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। आसपास घनी आबादी, दुकानों और कारखानों की मौजूदगी से खतरा कई गुना बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के कारखानों में उच्च तापमान, गैस और ज्वलनशील रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यदि गैस सिलेंडर में रिसाव या विस्फोट होता है, तो आग तेजी से फैल सकती है और बड़ा नुकसान हो सकता है।

📄 पहले भी जारी हुए थे नोटिस, लेकिन कार्रवाई शून्य

सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा इन अवैध गैस सिलेंडरों और बिना अनुमति चल रहे कारखानों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

नोटिस जारी होने के बाद भी कारखाने पहले की तरह संचालित हो रहे हैं, जिससे महानगरपालिका और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

❓ उठ रहे बड़े सवाल

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं:

• क्या अवैध कारखानों को लेकर किसी प्रकार का लेन-देन हुआ है?

• क्या राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई रोकी गई है?

• नोटिस जारी होने के बावजूद महानगरपालिका कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

• क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

इन सवालों ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

⚡ हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई बड़ा विस्फोट या आग लगने की घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी उल्हासनगर महानगरपालिका और महानगरपालिका के फायर विभाग पर तय की जानी चाहिए।

नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण हजारों लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

📢 प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है:

• अवैध गैस सिलेंडरों की तुरंत जांच की जाए

• बिना अनुमति चल रहे कारखानों को तुरंत सील किया जाए

• फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए

• जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए

• क्षेत्र में नियमित निरीक्षण शुरू किया जाए

⚠️ प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का विषय

फिलहाल इस गंभीर मुद्दे पर उल्हासनगर महानगरपालिका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

उल्हासनगर-2 के जवेरी बाजार की सोनारा गली में बढ़ता यह खतरा अब प्रशासन की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। नागरिकों की मांग है कि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले प्रशासन जागे और ठोस कार्रवाई करे।














उल्हासनगर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर शिवसेना नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग 19) के मार्गदर्शन में महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महामानव, बोधिसत्व, विश्वरत्न परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उल्हासनगर में एक भव्य महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिवसेना के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

यह महा स्वास्थ्य जांच शिविर रविवार, 13 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन काली माता मंदिर, कुल्ला कैंप, उल्हासनगर-4 में किया गया है, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों के पहुंचने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार, इस शिविर में विभिन्न प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें सामान्य स्वास्थ्य जांच से लेकर गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

शिविर में उपलब्ध निःशुल्क सुविधाएं

- जनरल हेल्थ जांच

- आंखों की जांच

- स्त्री रोग जांच

- एंजियोप्लास्टी संबंधी मार्गदर्शन

- हड्डियों से संबंधित जांच

- निःशुल्क दवाइयां वितरण

- ECG जांच

- मधुमेह (डायबिटीज) जांच

- एंजियोग्राफी संबंधी मार्गदर्शन

- बाल रोग जांच

- कैंसर संबंधी निःशुल्क मार्गदर्शन

- निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सुविधा

इस शिविर का आयोजन नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग क्रमांक 19) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार के साथ स्वास्थ्य जांच करवाएं।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर को सामाजिक सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों के लिए यह शिविर विशेष रूप से लाभकारी साबित होने की उम्मीद है।

आयोजकों ने बताया कि शिविर में अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी और जरूरतमंद मरीजों को आगे के इलाज के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस महा स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ उठाने की अपील की गई है।















उल्हासनगर महानगरपालिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव, उल्हासनगर मनपा को जल्द मिल सकता है नया आयुक्त, वर्तमान आयुक्त के तबादले की चर्चा तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मनपा के वर्तमान आयुक्त का जल्द ही तबादला होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि उनकी जगह नए आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चा चल रही है और इसी क्रम में उल्हासनगर महानगरपालिका का भी नाम प्रमुखता से सामने आया है। बताया जा रहा है कि शहर में चल रहे कई महत्वपूर्ण विकास कार्य, प्रशासनिक निर्णय और कुछ लंबित मामलों को देखते हुए सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति पर विचार कर रही है।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

इस संभावित बदलाव की खबर सामने आते ही मनपा के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारी वर्ग में नए आयुक्त को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं कई विभागों में लंबित फाइलों को लेकर भी तेजी देखी जा रही है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

उल्हासनगर शहर में इस समय कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें —

शहर के बुनियादी ढांचे का विकास

प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान

अवैध निर्माण पर कार्रवाई

स्वच्छता और जल निकासी परियोजनाएं

इन सभी पर नए आयुक्त की नियुक्ति के बाद प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी बढ़ी दिलचस्पी

उल्हासनगर की राजनीति हमेशा से प्रशासनिक बदलावों को लेकर संवेदनशील रही है। ऐसे में आयुक्त के संभावित तबादले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नए आयुक्त के साथ विकास कार्यों को गति देने की उम्मीद जता रहे हैं।

जल्द हो सकता है आधिकारिक आदेश

हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार द्वारा तबादला आदेश जारी किया जा सकता है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को नया आयुक्त कब मिलता है और नए प्रशासनिक नेतृत्व में शहर के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।














उल्हासनगर मनपा में बड़ा राजनीतिक फेरबदल संभव, स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद पर राजेंद्र सिंह भुल्लर का नाम सबसे आगे, शिवसेना आलाकमान जल्द कर सकता है घोषणा।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, शिवसेना के वरिष्ठ नगरसेवक और प्रभावशाली नेता राजेंद्र सिंह भुल्लर को स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इस संबंध में शिवसेना आलाकमान जल्द ही औपचारिक घोषणा कर सकता है।

सूत्रों का कहना है कि मनपा में सत्ता समीकरण को मजबूत करने और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से पार्टी नेतृत्व अनुभवी और सक्रिय चेहरे को आगे लाने के पक्ष में है। इसी क्रम में राजेंद्र सिंह भुल्लर का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।

राजेंद्र सिंह भुल्लर को शिवसेना के वरिष्ठ, सक्रिय और जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है। मनपा के विभिन्न विकास कार्यों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। नगरसेवक के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र में कई बुनियादी सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसके चलते संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिवसेना नेतृत्व ऐसे चेहरे को स्टैंडिंग कमेटी की जिम्मेदारी देना चाहता है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ संगठन को भी मजबूत कर सके। भुल्लर को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है।

स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष पद को उल्हासनगर महानगरपालिका में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद पर बैठने वाले नेता को मनपा के आर्थिक और विकास कार्यों पर महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं। बजट स्वीकृति, विकास कार्यों की मंजूरी और विभिन्न प्रशासनिक फैसलों में स्टैंडिंग कमेटी की अहम भूमिका रहती है।

अगर शिवसेना आलाकमान राजेंद्र सिंह भुल्लर के नाम पर मुहर लगाता है, तो यह उल्हासनगर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा। साथ ही आने वाले समय में मनपा की कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें शिवसेना आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जिसकी घोषणा कभी भी की जा सकती है।














सेंचुरी रेयॉन टैक्स विवाद: ₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ तक कटौती, कमेटी रिपोर्ट पर बढ़ा सस्पेंस, ₹9.15 करोड़ के कथित लाभ पर उठे सवाल, महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज।


 


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आय का प्रमुख स्रोत हाउस टैक्स है। प्रशासन बकाया कर वसूली के लिए सख्ती भी दिखा रहा है और कई संपत्तियों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की जा रही है। इसी बीच सेंचुरी रेयॉन कंपनी के टैक्स मामले को लेकर शहर में गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने मांग की है कि सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही इस पूरे मामले में महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग तेज हो गई है।

₹11.80 करोड़ से ₹2.65 करोड़ — टैक्स में बड़ी कटौती पर विवाद

करीब सवा साल पहले उल्हासनगर बीजेपी जिला अध्यक्ष राजेश वढारिया ने उल्हासनगर महानगरपालिका के टैक्स विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया गया।

आरोपों के अनुसार:

पहले सेंचुरी रेयॉन कंपनी पर लगभग 11 करोड़ 80 लाख रुपये टैक्स बकाया बताया गया

बाद में पुनर्मूल्यांकन (री-असेसमेंट) के नाम पर नया बिल जारी किया गया

संशोधित बिल में टैक्स घटाकर करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये कर दिया गया

इस तरह कंपनी को लगभग 9 करोड़ 15 लाख रुपये का लाभ मिलने का आरोप लगाया गया

इस पूरे मामले को लेकर तत्कालीन आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई थी।

जांच के लिए बनी कमेटी, लेकिन रिपोर्ट अब तक गोपनीय

शिकायत के बाद तत्कालीन आयुक्त अज़ीज़ शेख द्वारा मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। बताया गया कि कमेटी ने संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया।

टैक्स विभाग की अधिकारी नीलम कदम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सेंचुरी रेयॉन कंपनी ने टैक्स असेसमेंट में त्रुटि होने की शिकायत की थी।

उनके अनुसार:

कंपनी ने असेसमेंट गलत होने की बात रखी

प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की

कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर टैक्स राशि में संशोधन किया गया

हालांकि, कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

6 बड़े सवाल, जिन पर सबकी नजर

इस मामले में शहर के नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई अहम सवाल उठाए हैं:

1. री-असेसमेंट में कुल कितने लाख स्क्वेयर फीट का अंतर निकाला गया?

2. री-असेसमेंट के बाद टैक्स राशि में कितना अंतर आया?

3. कंपनी का संशोधित असेसमेंट आधिकारिक रूप से लागू किया गया या नहीं?

4. टैक्स वर्तमान वित्त वर्ष से लागू किया गया या पिछली तारीख से?

5. सेंचुरी रेयॉन कंपनी की सेल्फ री-असेसमेंट रिपोर्ट क्या थी?

6. क्या इस मामले में न्यायालय में कोई याचिका दायर हुई थी? यदि हां, तो अदालत का निर्णय क्या रहा?

इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं, जिससे मामले को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।

नागरिकों की मांग — रिपोर्ट सार्वजनिक कर हो पारदर्शिता

शहर के नागरिकों का कहना है कि जब महानगरपालिका आम नागरिकों से टैक्स वसूली के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है, तो बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मामलों में भी पारदर्शिता जरूरी है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग:

कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए

यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध हो तो कार्रवाई की जाए

महापौर से हस्तक्षेप की मांग तेज

इस पूरे मामले को लेकर अब महापौर अश्विनी कमलेश निकम से हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। नागरिकों का कहना है कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

फिलहाल, सेंचुरी रेयॉन टैक्स मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार किया जा रहा है और इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।























उल्हासनगर मनपा के कर विभाग पर गंभीर आरोप दलालों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत, ‘चेंज ऑफ नेम’ समेत कई कार्यों में भेदभाव के आरोप — आयुक्त के हस्तक्षेप की मांग तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगर पालिका के कर विभाग में अनियमितताओं और पक्षपात के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार, विभाग में कुछ पुराने कर्मचारियों और दलालों की कथित मिलीभगत से ‘चेंज ऑफ नेम’ सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि साधारण नागरिकों को अपने काम के लिए महीनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि चुनिंदा दलालों के माध्यम से आने वाले मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। इस कथित व्यवस्था के कारण पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कर विभाग में प्रक्रिया स्पष्ट होने के बावजूद जानबूझकर फाइलें लंबित रखी जा रही हैं। कई आवेदकों ने आरोप लगाया है कि बिना दलालों की मदद के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अविश्वास बढ़ रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने उल्हासनगर महानगर पालिका आयुक्त मनीष अव्हाले से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो भ्रष्टाचार और पक्षपात की यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद अब आयुक्त स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि विभागीय कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और आम जनता के लिए पारदर्शी तथा समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।

इस पूरे प्रकरण में कुछ पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत है जिनके नाम आनेवाले समय में सामने आने की संभावनाएं है, जो कई वर्षों से इसी विभाग में ढेरा जमाकर बैठे हैं। 

⚠️ फिलहाल, उल्हासनगर महानगर पालिका प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।