उल्हासनगर-5 के शांत रेजिडेंशियल इलाकों में अवैध जींस और गाउन सिलाई कारखानों का जाल दिनोंदिन फैलता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों की मानें तो इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया है, जिससे न केवल क्षेत्र की मूल संरचना प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनजीवन भी संकट में है।
🏭 अवैध कारखाने, वैध सवाल
इन अवैध गारमेंट यूनिटों में:
बिना अनुमति निर्माण और कमर्शियल उपयोग किया जा रहा है।
न तो फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न ही कोई स्ट्रक्चरल ऑडिट होता है।
बाहर से आए श्रमिकों का कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं — जिससे आपराधिक घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
🛑 नागरिकों की परेशानी:
लगातार ट्रैफिक जाम और ध्वनि प्रदूषण।
पानी और बिजली की चोरी जैसी समस्याएं।
अव्यवस्थित जनसंख्या और सुरक्षा संकट।
❓ प्रशासनिक चुप्पी क्यों?
उल्हासनगर महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन की चुप्पी से नागरिकों में गुस्सा है। अब तक न कोई अतिक्रमण विरोधी मुहिम चलाई गई, न कोई सख्त कार्रवाई की गई। सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी कौन लेगा?
✅ नागरिकों की पांच प्रमुख मांगें:
1. रेजिडेंशियल एरिया से अवैध गारमेंट यूनिटों को तत्काल हटाया जाए।
2. बाहर से आए कारीगरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाए।
3. उल्हासनगर महानगर पालिका नियोजन के उल्लंघन पर नियमित निरीक्षण व कार्रवाई हो।
4. खतरनाक इमारतों की फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल जांच कर उन्हें सील किया जाए।
5 यह सब अवैध जींस और गाउन सिलाई कारखाने कब इंडस्ट्रियल जोन में जाएंगे।
🔍 सवाल यही है:
क्या प्रशासन की नींद टूटेगी? या फिर एक हादसे का इंतजार है?
उल्हासनगर महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन को अब "कार्रवाई" शब्द को सिर्फ फाइलों से निकालकर जमीनी हकीकत में बदलना होगा — इससे पहले कि यह संकट और गहरा हो जाए।