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सोशल मीडिया यूजर्स को बड़ी राहत: पोस्ट पर कार्रवाई नहीं, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।


न्यू दिल्ली: दिनेश मिरचंदानी

देशभर के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए राहत भरी और बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने या विचार व्यक्त करने के आधार पर किसी नागरिक के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा दिया गया मौलिक अधिकार है और इसे मनमाने तरीके से सीमित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सोशल मीडिया युग में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

धारा 66A पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने आईटी एक्ट की धारा 66A को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह धारा नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और इसका उपयोग सोशल मीडिया पर राय रखने वाले लोगों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि पहले इस धारा के तहत पुलिस को सोशल मीडिया पोस्ट, कमेंट या मैसेज के आधार पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मिलता था। इसके कारण कई मामलों में नागरिकों को गिरफ्तार भी किया गया था, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठे थे।

अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई संभव नहीं होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स को बड़ी राहत

इस फैसले से Facebook, Twitter, LinkedIn और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय लाखों उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

अब नागरिक बिना डर अपनी राय रख सकेंगे और सरकार, प्रशासन या किसी भी सार्वजनिक मुद्दे पर खुलकर अपनी बात कह सकेंगे, बशर्ते वह कानून के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन न करें।

पहले दर्ज हुए थे कई मामले

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। कई नागरिकों को केवल टिप्पणी या पोस्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में पुलिस को पहले ठोस कानूनी आधार साबित करना होगा, तभी कार्रवाई संभव होगी।

विधि विशेषज्ञों ने बताया ऐतिहासिक फैसला

विधि आयोग के सदस्य एडवोकेट विजय सावंत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करेगा और लोकतंत्र को और सशक्त बनाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया आज लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इस मंच पर नागरिकों की आवाज को दबाना संविधान की भावना के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

सोशल मीडिया पर विचार रखना अपराध नहीं

केवल पोस्ट के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी

नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित

पुलिस को कार्रवाई से पहले ठोस कानूनी आधार आवश्यक

लोकतांत्रिक अधिकारों को प्राथमिकता दी जाएगी

देशभर में फैसले की चर्चा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कानूनी विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़ी जीत बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह के फैसले बेहद महत्वपूर्ण हैं। इससे नागरिकों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार मिलेगा और लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा।














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