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महाराष्ट्र पुलिस के आधुनिकीकरण पर जोर, हर दो महीने में होगी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक।


मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने, उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने और पुलिस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाने के उद्देश्य से समीक्षा बैठकों की श्रृंखला की चौथी बैठक मुंबई के सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित की गई।

इस पहल के तहत पुलिस महानिदेशक (DGP) सदानंद दाते और गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा पाटणकर-म्हैसकर ने पुलिस विभाग से संबंधित प्रमुख विषयों पर नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक दो महीने में समीक्षा बैठक आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के बेहतर इस्तेमाल, पुलिस बल के आधुनिकीकरण और विशेष अपराध जांच इकाइयों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। इसके साथ ही महाराष्ट्र की तटीय सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी जोर दिया गया।

नशामुक्त महाराष्ट्र से लेकर साइबर सुरक्षा तक अहम मुद्दों पर चर्चा

महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने, गढ़चिरौली में नक्सलवाद के बाद विकास एवं पुनर्वास कार्यों को गति देने और पुलिस व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग जैसे विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।

इसके अलावा साइबर अपराधों से निपटने की तैयारी, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने और पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पुलिस प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विजन के अनुरूप महाराष्ट्र पुलिस को अधिक सक्षम, सक्रिय और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। तकनीकी संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल, अपराधों की जांच में आधुनिक प्रणालियों के समावेश और नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने को इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हर दो महीने में होने वाली समीक्षा बैठकों का उद्देश्य प्रमुख पुलिस विभाग के मुद्दों पर प्रगति का आकलन करना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और लंबित विषयों पर समयबद्ध कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है।

इस पहल से पुलिस प्रशासन में जवाबदेही मजबूत करने, जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बदलती कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।

















उल्हासनगर में वर्षावास समापन एवं कठिन चीवरदान समारोह: नगरसेवक विकास रतन खरात की ओर से भव्य भोजनदान, बुद्ध के करुणा और डॉ. आंबेडकर के समानता के विचारों का संदेश।


 


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर में बौद्ध धम्म की परंपराओं, तथागत गौतम बुद्ध की करुणा एवं मैत्री की शिक्षाओं और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समतावादी विचारों को स्मरण करते हुए उल्हासनगर में वर्षावास समापन समारोह एवं कठिन चीवरदान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवक एवं स्थायी समिति सदस्य विकास रतन खरात की ओर से भोजनदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सेवा, दानशीलता और आपसी सद्भाव के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा।

मातोश्री आशा रतन खरात के सुपुत्र विकास रतन खरात की ओर से आयोजित इस भोजनदान पहल को धार्मिक परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय के रूप में देखा जा सकता है। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य बौद्ध धम्म के मानवीय मूल्यों को स्मरण करना तथा समाज में करुणा, समानता, बंधुत्व और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।

उल्हासनगर स्थित मैत्री विहार में संघमित्रा बुद्ध वंदना संघ की ओर से आयोजित इस समारोह में वर्षावास समापन, कठिन चीवरदान और बुद्ध वंदना जैसे धार्मिक उपक्रमों के माध्यम से बौद्ध परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया गया। भोजनदान के माध्यम से सेवा और सहभागिता की भावना को भी प्रमुखता मिली।

वर्षावास समापन समारोह का बौद्ध परंपरा में विशेष महत्व

बौद्ध धम्म में वर्षावास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। परंपरागत रूप से इस अवधि में भिक्खु संघ धम्म अध्ययन, साधना, चिंतन और आध्यात्मिक अनुशासन पर विशेष ध्यान देता है। वर्षावास की समाप्ति पर आयोजित समारोह उपासकों और भिक्खु संघ के बीच श्रद्धा, संवाद तथा धम्म के प्रति निष्ठा को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

इसी क्रम में कठिन चीवरदान समारोह बौद्ध दान परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। इस अवसर पर भिक्खु संघ को चीवर अर्पित करने की परंपरा के माध्यम से त्याग, संयम, श्रद्धा और सहयोग के मूल्यों को अभिव्यक्त किया जाता है।

उल्हासनगर में आयोजित इस कार्यक्रम ने बौद्ध धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और धम्म के विचारों को सामाजिक जीवन से जोड़ने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित किया। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को बौद्ध संस्कृति, उसकी परंपराओं और उसके नैतिक सिद्धांतों से परिचित कराने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

विकास रतन खरात की ओर से भोजनदान, सेवा और सहयोग पर जोर

समारोह के अवसर पर नगरसेवक एवं स्थायी समिति सदस्य विकास रतन खरात की ओर से भोजनदान का आयोजन किया गया। भारतीय सामाजिक और धार्मिक परंपराओं में भोजनदान को सेवा, उदारता और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति माना जाता है।

भोजनदान का व्यापक सामाजिक संदेश यह है कि समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव किए बिना मानवीय गरिमा, परस्पर सम्मान और सहयोग की भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस प्रकार के उपक्रम धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

जनप्रतिनिधियों की सामाजिक भूमिका केवल नागरिक समस्याओं और विकास कार्यों तक सीमित नहीं होती। सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता के माध्यम से भी वे नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर सकते हैं और सामुदायिक एकता को प्रोत्साहित करने में योगदान दे सकते हैं।

इसी संदर्भ में विकास रतन खरात की ओर से आयोजित भोजनदान कार्यक्रम को धम्म की दानशीलता और सेवाभाव की परंपरा से जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि, किसी भी पहल के व्यापक सामाजिक प्रभाव का आकलन उसके निरंतर क्रियान्वयन और समाज को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर किया जाना चाहिए।

भगवान बुद्ध की शिक्षाएं: करुणा, प्रज्ञा और मैत्री का मार्ग

तथागत गौतम बुद्ध की शिक्षाओं में करुणा, मैत्री, प्रज्ञा, नैतिक आचरण और आत्मचिंतन को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। बौद्ध धम्म व्यक्ति को विवेकपूर्ण जीवन जीने, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

बौद्ध परंपरा के पंचशील और नैतिक शिक्षाएं व्यक्तिगत आचरण के साथ सामाजिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन मूल्यों का उद्देश्य व्यक्ति को जिम्मेदार आचरण, अहिंसा, संयम और परस्पर सम्मान की दिशा में प्रेरित करना है।

मैत्री विहार में आयोजित वर्षावास समापन एवं कठिन चीवरदान समारोह इसी धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को स्मरण करने का अवसर रहा। बुद्ध वंदना, धम्मचिंतन और दान जैसे उपक्रमों के माध्यम से श्रद्धा को नैतिक जिम्मेदारी तथा सामाजिक सहयोग से जोड़ने का संदेश सामने आया।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समतावादी विचारों की प्रासंगिकता 

भारतीय समाज में बौद्ध धम्म के आधुनिक सामाजिक महत्व की चर्चा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के बिना अधूरी है। उन्होंने बौद्ध धम्म को अपनाकर समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज की कल्पना को नई दिशा दी।

डॉ. आंबेडकर के विचारों में जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और अन्याय का विरोध तथा प्रत्येक व्यक्ति के समान अधिकारों पर विशेष जोर मिलता है। भारतीय संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श भी लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला हैं।

वर्षावास समापन और कठिन चीवरदान जैसे अवसर इन मूल्यों को स्मरण करने तथा उन्हें व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा देते हैं। भोजनदान जैसे सामाजिक उपक्रम भी तभी अधिक सार्थक बनते हैं, जब उनके साथ समान व्यवहार, मानवीय संवेदनशीलता और समाज के सभी वर्गों के प्रति सम्मान की भावना जुड़ी हो।

इस दृष्टि से भगवान बुद्ध की करुणा की शिक्षा और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समतावादी दर्शन को सामाजिक जीवन में प्रासंगिक बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता का समन्वय

धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ आने, अपनी परंपराओं से जुड़ने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का अवसर देते हैं। ऐसे कार्यक्रमों का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वे सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक संवाद को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

उल्हासनगर में आयोजित समारोह के माध्यम से बौद्ध संस्कृति के संरक्षण, धम्म की शिक्षाओं के प्रसार और समाजोपयोगी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास सामने आया। बुद्ध वंदना, कठिन चीवरदान और भोजनदान जैसे उपक्रम धार्मिक श्रद्धा तथा सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संबंध को रेखांकित करते हैं।

विशेष रूप से युवा पीढ़ी को बौद्ध धम्म की परंपराओं और उनके मानवीय संदेश से परिचित कराना महत्वपूर्ण है। करुणा, विवेक, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्य केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन, सामाजिक व्यवहार और सार्वजनिक जिम्मेदारियों में भी दिखाई देने चाहिए।

समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन में मानवीय मूल्यों की भूमिका

सामाजिक सेवा का वास्तविक महत्व इस बात में है कि उससे लोगों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़े और सहयोग की भावना मजबूत हो। भोजनदान जैसे कार्यक्रम समाज में दानशीलता और सहभागिता की परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करते हैं।

विकास रतन खरात की ओर से आयोजित भोजनदान कार्यक्रम इसी व्यापक सामाजिक संदर्भ में उल्लेखनीय है। इस पहल के माध्यम से धार्मिक समारोह के साथ सेवा और सहयोग के मूल्यों को जोड़ने का प्रयास किया गया।

हालांकि, सामाजिक प्रतिबद्धता को स्थायी रूप देने के लिए ऐसे उपक्रमों के साथ-साथ शिक्षा, जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक जागरूकता और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में भी निरंतर सहभागिता महत्वपूर्ण होती है। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी से सामुदायिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

बौद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश

वर्तमान समय में सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक उसके मूल्यों को पहुंचाना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बौद्ध धम्म की परंपराएं न केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं, बल्कि उनमें नैतिक जीवन, मानवीय गरिमा, करुणा और सामाजिक सद्भाव से जुड़े विचार भी समाहित हैं।

वर्षावास समापन समारोह, कठिन चीवरदान, बुद्ध वंदना और भोजनदान जैसे आयोजन इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं। इनका व्यापक सामाजिक महत्व तब और बढ़ जाता है, जब कार्यक्रमों से मिलने वाली प्रेरणा को व्यवहार में उतारा जाए।

उल्हासनगर में आयोजित इस समारोह के अवसर पर बौद्ध धम्म की दानशीलता, करुणा और बंधुत्व की परंपरा को प्रमुखता मिली। विकास रतन खरात की ओर से आयोजित भोजनदान ने धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम को सामाजिक सेवा से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

समग्र रूप से, वर्षावास समापन एवं कठिन चीवरदान समारोह ने भगवान बुद्ध की मानवीय शिक्षाओं, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समानता आधारित विचारों और समाज में सेवा एवं सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।** ऐसे आयोजनों से मिलने वाला संदेश तभी स्थायी रूप से प्रभावी होगा, जब करुणा, समानता, बंधुत्व और मानवीय गरिमा के सिद्धांत समाज के दैनिक व्यवहार में भी दिखाई दें।


















महाराष्ट्र की अपर मुख्य सचिव (गृह) मनीषा पाटणकर-म्हैसकर ने नवी मुंबई पुलिस मुख्यालय और साक्ष्य प्रबंधन केंद्र का किया दौरा।


 







नवी मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र शासन की अपर मुख्य सचिव (गृह) श्रीमती मनीषा पाटणकर-म्हैसकर ने नवी मुंबई पुलिस मुख्यालय एवं साक्ष्य प्रबंधन केंद्र (Evidence Management Centre – EMC) का दौरा किया। इस दौरे को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली, संस्थागत व्यवस्थाओं और साक्ष्यों के प्रबंधन से संबंधित सुविधाओं के अवलोकन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

साक्ष्य प्रबंधन केंद्र आपराधिक मामलों की जांच के दौरान एकत्र किए जाने वाले साक्ष्यों के व्यवस्थित रखरखाव, सुरक्षित संरक्षण और आवश्यकतानुसार उनके प्रबंधन से संबंधित व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे केंद्रों की कार्यप्रणाली जांच प्रक्रिया में साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उनकी उचित देखरेख सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से अहम मानी जाती है।

गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव के इस दौरे के दौरान नवी मुंबई पुलिस मुख्यालय और EMC से संबंधित विभिन्न व्यवस्थाओं का अवलोकन किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, दौरे के दौरान किन विशिष्ट विषयों पर चर्चा हुई, अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए अथवा किसी नई योजना या निर्णय की घोषणा की गई, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दौरा

पुलिस प्रशासन और साक्ष्य प्रबंधन से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं का निरीक्षण प्रशासनिक निगरानी तथा कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इस दौरे के उद्देश्य, निष्कर्षों और संभावित निर्देशों के संबंध में किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान या संबंधित विभाग की पुष्टि आवश्यक है।















पुलिस स्मृति दिवस पर महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर ने शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।


मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले पुलिसकर्मियों एवं सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कर्तव्य के प्रति समर्पण, साहस और निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के योगदान को याद किया गया।

पुलिस स्मृति दिवस देश के उन पुलिसकर्मियों के बलिदान को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने कर्तव्यपालन के दौरान अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिवस पुलिस बलों के साहस, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्मरण करने के साथ-साथ समाज में सुरक्षा एवं शांति बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

इस अवसर पर राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के उन कर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया, जिन्होंने देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन जवानों का बलिदान पुलिस सेवा की उस भावना को दर्शाता है, जिसमें व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर जनसेवा, कानून का पालन और राष्ट्र की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।

पुलिसकर्मी आतंकवाद, संगठित अपराध, हिंसा, आपातकालीन परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में शहीद जवानों का स्मरण न केवल उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों को कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सेवा की भावना से प्रेरित करने का माध्यम भी है।

स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके परिवारों के त्याग और धैर्य को सम्मान देने का भी प्रतीक है। देश की सुरक्षा के लिए अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों का योगदान भी इस स्मरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



























लातूर के सूखे पर सरकार गंभीर: मनीषा पाटणकर म्हैसकर हर महीने करेंगी दौरा।


 










लातूर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

महाराष्ट्र के लातूर जिले में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के दौरान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा पाटणकर म्हैसकर ने कहा कि सूखे से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने लातूर के मौजूदा हालात की तुलना वर्ष 2003 में सांगली में सामने आए सूखे की परिस्थितियों से करते हुए उस दौर की यादें साझा कीं।

मनीषा पाटणकर म्हैसकर ने कहा कि वर्ष 2003 में सांगली के नागरिकों से जो वादा किया था, उसी भावना के साथ आज लातूरवासियों को भी राज्य सरकार की ओर से भरोसा दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार सूखे के संकट से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी और इस कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए प्रशासन तथा नागरिक मिलकर प्रयास करेंगे।

जल सुरक्षा और पशुओं के चारे की उपलब्धता पर विशेष ध्यान

सूखे की स्थिति में पेयजल की उपलब्धता और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में शामिल होती है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की ओर से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

मनीषा पाटणकर म्हैसकर के मुताबिक, सरकार का प्रयास रहेगा कि सूखे के कारण आम नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को होने वाली परेशानियों को कम किया जाए। इसके लिए प्रशासन को आवश्यक उपायों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जा सके और संकटग्रस्त क्षेत्रों को राहत मिल सके।

सूखा समाप्त होने तक हर महीने लातूर दौरे का संकल्प

इस दौरे के दौरान मनीषा पाटणकर म्हैसकर ने एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूखे का संकट समाप्त होने तक वह हर महीने लातूर का दौरा करेंगी। इस घोषणा का उद्देश्य जिले की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखना और राहत एवं जल सुरक्षा से जुड़े प्रयासों की प्रगति पर ध्यान देना है।

उनकी इस प्रतिबद्धता के तहत लातूर में सूखे की स्थिति, पानी की उपलब्धता, पशुओं के चारे की व्यवस्था और प्रशासन द्वारा किए जा रहे उपायों पर नियमित रूप से ध्यान दिए जाने की अपेक्षा है।

मानसून के स्थिर होने तक प्रयास जारी रखने का भरोसा

मनीषा पाटणकर म्हैसकर ने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सूखे की चुनौती का सामना किया जा सकता है। उन्होंने मानसून के स्थिर होने तक आवश्यक प्रयास जारी रखने की बात कही और लातूरवासियों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस कठिन दौर में राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष: लातूर में सूखे की स्थिति को देखते हुए जल सुरक्षा, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और नियमित प्रशासनिक निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार की घोषणाओं और प्रशासनिक प्रयासों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है तथा प्रभावित नागरिकों को राहत किस प्रकार उपलब्ध कराई जाती है।































छत्रपति संभाजीनगर में पहली बार भव्य ऐतिहासिक महानाट्य ‘प्रौढ प्रताप पुरंदर’ की तैयारी, स्तंभ पूजन संपन्न।


 










छत्रपति संभाजीनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

छत्रपति संभाजीनगर: छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय पराक्रम, अदम्य साहस, दूरदर्शी नेतृत्व और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवनचरित्र पर आधारित भव्य ऐतिहासिक महानाट्य ‘प्रौढ प्रताप पुरंदर’ का स्तंभ पूजन विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। शहर में पहली बार प्रस्तुत किए जाने वाले इस महानाट्य के माध्यम से शिवराय के संघर्षपूर्ण जीवन, वीरता और स्वराज्य स्थापना के ऐतिहासिक सफर को रंगमंच पर जीवंत करने की तैयारी है।

इस महानाट्य को लेकर इतिहासप्रेमियों और रंगमंच के प्रशंसकों में उत्सुकता बढ़ने की उम्मीद है। भव्य मंचीय प्रस्तुति के जरिए छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों, उनके रणनीतिक कौशल, मावलों की निष्ठा और स्वराज्य के लिए किए गए संघर्ष को प्रभावशाली तरीके से दर्शाने की योजना है।

स्तंभ पूजन समारोह में कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

महानाट्य के स्तंभ पूजन समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विशेष कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र साबळे, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. भागवत कराड, कैबिनेट मंत्री अतुल सावे, विधायक अनुराधाताई चव्हाण, विधायक प्रशांत बंब और पूर्व विधायक संजय केणेकर उपस्थित रहे।

इसके अलावा महापौर समीर राजूरकर, स्थायी समिति के सभापति अनिल मकरीये, सभागृह नेता गोविंद केंद्रे, जिलाध्यक्ष किशोर शितोळे, दक्षिण जिलाध्यक्ष संजय खंबायतें सहित भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पार्षदों और पदाधिकारियों ने भी समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर महानाट्य के निर्माण और प्रस्तुति से जुड़े आगामी कार्यों की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत हुई। स्तंभ पूजन को इस भव्य ऐतिहासिक परियोजना के निर्माण कार्य का प्रारंभिक चरण माना जा रहा है।

शिवराय के संघर्ष, किलों के इतिहास और मावलों के बलिदान की गाथा

‘प्रौढ प्रताप पुरंदर’ महानाट्य में छत्रपति शिवाजी महाराज की संघर्षमय जीवनयात्रा, उनके नेतृत्व में हुए ऐतिहासिक घटनाक्रम, गढ़-किलों का गौरवशाली इतिहास तथा स्वराज्य की स्थापना में मावलों के योगदान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

स्वराज्य की स्थापना के लिए शिवराय और उनके साथियों ने जिन कठिन परिस्थितियों का सामना किया, उनके साहस, निष्ठा और बलिदान की गाथा को भव्य मंचीय स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को मराठा इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों से रूबरू कराने की योजना है।

महानाट्य में स्वराज्य के प्रेरणादायी ध्येय वाक्य ‘प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता’ की भावना को भी रेखांकित किया जाएगा। यह विचार स्वराज्य की निरंतर उन्नति और उसकी विश्वव्यापी प्रतिष्ठा के संकल्प को अभिव्यक्त करता है।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगा स्वराज्य, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का संदेश

छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास केवल युद्धों और विजयगाथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कुशल प्रशासन, दूरदर्शी रणनीति, जनकल्याण, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संकल्प का भी प्रतीक है। ऐसे में ‘प्रौढ प्रताप पुरंदर’ जैसे ऐतिहासिक महानाट्य के माध्यम से उनके विचारों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भव्य मंचीय प्रस्तुति के जरिए इतिहास को नाटकीय रूप में समझने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों, युवाओं, इतिहासप्रेमियों और रंगमंच के दर्शकों को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन एवं स्वराज्य आंदोलन से जुड़े प्रसंगों को करीब से जानने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक विरासत को मंच पर जीवंत करने की तैयारी

स्तंभ पूजन के साथ ही महानाट्य के निर्माण कार्य की शुरुआत हो गई है। आगामी समय में इस प्रस्तुति के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम, मावलों के समर्पण और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की गौरवगाथा को भव्य रूप में दर्शकों के सामने लाने की तैयारी है।

अब दर्शकों की निगाहें महानाट्य की आगामी तैयारियों, प्रस्तुति की तिथि और आयोजन से जुड़ी अन्य जानकारियों पर रहेंगी। यदि इसकी परिकल्पना और मंचीय प्रस्तुति निर्धारित योजना के अनुरूप साकार होती है, तो ‘प्रौढ प्रताप पुरंदर’ छत्रपति संभाजीनगर के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयोजनों में एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन सकता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों, स्वराज्य के स्वाभिमान और वीरता की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने की यह पहल इतिहास और संस्कृति के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।















आगरा में ‘नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’; IRS अधिकारी समीर वानखेड़े आमंत्रित। 1 नवंबर 2026 को सरदार पटेल जयंती पर नशामुक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश।




 




आगरा: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा में ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’ का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल के मार्गदर्शन एवं सहयोग से प्रस्तावित इस कार्यक्रम में पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर वानखेड़े, आईआरएस को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

इस संबंध में हिमांशु शर्मा, अतिरिक्त निजी सचिव, राज्य मंत्री की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को समीर वानखेड़े को औपचारिक आमंत्रण पत्र भेजा गया है। पत्र में कार्यक्रम के दौरान उनकी गरिमामयी उपस्थिति के साथ युवाओं और प्रतिभागियों को संबोधित करने का अनुरोध किया गया है।

नशामुक्त भारत और युवाओं की भूमिका पर रहेगा फोकस

आमंत्रण पत्र के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नशामुक्त एवं सशक्त भारत की सोच से प्रेरित बताई गई है। कार्यक्रम में विशेष रूप से युवाओं और Gen Z को मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, वॉकाथॉन के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी, स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त समाज का संदेश जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए दिए गए योगदान एवं उनके आदर्शों को भी स्मरण किया जाएगा।

समीर वानखेड़े के अनुभव को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया

आमंत्रण पत्र में नारकोटिक्स नियंत्रण और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के क्षेत्र में समीर वानखेड़े के कार्य एवं अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनकी उपस्थिति कार्यक्रम में शामिल युवाओं और नागरिकों के लिए प्रेरणादायी हो सकती है।

राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल की ओर से उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करते हुए 2047 तक नशामुक्त भारत के लक्ष्य तथा एक सशक्त, एकजुट और विकसित भारत के निर्माण के महत्व पर प्रतिभागियों के साथ अपने विचार साझा करने का अनुरोध किया गया है।

1 नवंबर को आगरा में आयोजन

प्रस्तावित कार्यक्रम का आयोजन 1 नवंबर 2026 को आगरा, उत्तर प्रदेश में किया जाएगा। कार्यक्रम का आधिकारिक नाम ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा–रन फॉर यूनिटी वॉकाथॉन’ रखा गया है।

आमंत्रण पत्र में कहा गया है कि जनहित और सामाजिक महत्व से जुड़े इस आयोजन में समीर वानखेड़े की उपस्थिति तथा मार्गदर्शन आयोजकों के लिए सम्मान का विषय होगा।

हालांकि, उपलब्ध पत्र के आधार पर फिलहाल इतना स्पष्ट है कि समीर वानखेड़े को कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। उनके द्वारा निमंत्रण स्वीकार किए जाने अथवा कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति की अंतिम पुष्टि अलग से होना बाकी है।




















उल्हासनगर के रिहायशी इलाकों में छोटे कारखानों के संचालन पर सवाल; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बीच उल्हासनगर-5 जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 समेत अन्य क्षेत्रों में भूमि उपयोग और वैध अनुमतियों की जांच की मांग।


उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

आवासीय क्षेत्रों में स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक अथवा औद्योगिक गतिविधियों के संचालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मौजूदा नगर नियोजन नियमों की पृष्ठभूमि में अब उल्हासनगर में भी इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में आवासीय परिसरों के भीतर छोटे सिलाई कारखाने, जींस से संबंधित कामकाज तथा अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की चर्चा सामने आती रही है।

विशेष रूप से उल्हासनगर-5 के जींस मार्केट, उल्हासनगर-2 तथा शहर के अन्य इलाकों में छोटे स्तर पर सिलाई एवं अन्य प्रकार के उत्पादन/व्यावसायिक कार्य संचालित होने की बात कही जाती रही है। हालांकि, किसी विशेष परिसर या प्रतिष्ठान के संबंध में यह निष्कर्ष निकालने से पहले उसके स्वीकृत भूमि उपयोग, मंजूर नक्शे, जोनिंग तथा संबंधित विभागों से प्राप्त अनुमतियों की आधिकारिक जांच आवश्यक है।

क्या Residential Property में Commercial या Industrial Activity की अनुमति है?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन परिसरों का मूल या स्वीकृत उपयोग आवासीय है, वहां संचालित होने वाली व्यावसायिक अथवा उत्पादन संबंधी गतिविधियों के लिए क्या सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है?

क्या संबंधित परिसरों में Change of User की अनुमति ली गई है? क्या वहां संचालित गतिविधि स्थानीय Development Plan और लागू Development Control Regulations के अनुरूप है? क्या संबंधित प्रतिष्ठानों के पास आवश्यक लाइसेंस अथवा अन्य वैधानिक अनुमतियां उपलब्ध हैं?

इन सवालों का जवाब केवल स्थल निरीक्षण से नहीं, बल्कि महानगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वीकृत दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

उल्हासनगर में व्यापक सर्वे की जरूरत?

यदि किसी आवासीय क्षेत्र में स्वीकृत उपयोग से अलग गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित महानगरपालिका विभागों द्वारा क्षेत्रवार सर्वेक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की आवश्यकता हो सकती है।

ऐसे सर्वेक्षण में प्रत्येक परिसर के Sanctioned Plan, Occupancy/Completion Certificate, Property Use, Zoning, Trade Licence, Change of User Permission तथा अन्य लागू अनुमतियों की जांच की जा सकती है।

इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सी गतिविधियां नियमों के तहत अनुमेय हैं और किन मामलों में अतिरिक्त अनुमति अथवा नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता है।

सिर्फ सिलाई कारखाने ही नहीं, अन्य गतिविधियों की भी जांच का सवाल

यह मुद्दा केवल सिलाई कारखानों तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि आवासीय परिसरों में अन्य प्रकार की उत्पादन इकाइयां, गोदाम, वर्कशॉप अथवा बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो उनके मामले में भी स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर की जांच की जा सकती है।

हालांकि, प्रत्येक गतिविधि की वैधानिकता अलग-अलग नियमों और स्थानीय प्रावधानों पर निर्भर करेगी। इसलिए किसी भी प्रतिष्ठान को केवल उसके बाहरी स्वरूप या गतिविधि के आधार पर अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा।

महानगरपालिका से स्पष्टता की अपेक्षा

अब मुख्य सवाल उल्हासनगर महानगरपालिका से जुड़ा है—क्या शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित छोटे कारखानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का कोई व्यापक सर्वेक्षण या रिकॉर्ड-आधारित जांच की गई है? यदि की गई है, तो कितने परिसरों को नियमों के अनुरूप पाया गया और कितने मामलों में नोटिस या अन्य वैधानिक कार्रवाई की गई?

नागरिकों की अपेक्षा है कि इस विषय पर कानून और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर पारदर्शी कार्रवाई की जाए, ताकि वैध रूप से संचालित व्यवसायों और नियमों के विपरीत संचालित गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।

महत्वपूर्ण: किसी भी विशेष क्षेत्र, दुकान, कारखाने या व्यक्ति के संबंध में अवैधता का निष्कर्ष संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, निरीक्षण और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक कार्रवाई के बिना नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में उल्हासनगर महानगरपालिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

















गारमेंट व्यापारियों के संगठन UGMA का 70वां वार्षिक उत्सव, तीन दिनों तक होंगे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम।



 



उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA) की ओर से संगठन के 70वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5 में तीन दिवसीय अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर एसोसिएशन की ओर से दुकानदारों एवं व्यापारी भाइयों से इसमें सहभागी होकर सेवा कार्य में सहयोग करने और प्रसाद ग्रहण करने की अपील की गई है।

पोस्टर के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे पूज्य चालिहा साहिब मंदिर में होगी। इस अवसर पर अखंड पाठ साहिब का आरंभ साई कालीराम साहिब (वसण शाह दरबार वाले) द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद प्रसाद एवं आम भंडारे का आयोजन रहेगा तथा रात में भी भंडारा जारी रहने की जानकारी दी गई है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजे कन्याओं के भोजन की व्यवस्था रखी गई है। इसके पश्चात प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन जारी रहेगा।

वहीं बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे अखंड पाठ साहिब का भोग साई कालीराम साहिब द्वारा किए जाने का कार्यक्रम निर्धारित बताया गया है। इसके बाद उपस्थित दुकानदार भाइयों के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

UGMA की ओर से जारी कार्यक्रम सूचना में 5 और 6 अक्टूबर की रात विशेष खीर (खीरनी) का प्रसाद ग्रहण करने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही व्यापारी भाइयों से अपनी यथाशक्ति के अनुसार सेवा कार्य में सहयोग करने की अपील की गई है।

एसोसिएशन की ओर से जारी संदेश में सभी दुकानदार भाइयों से तीनों दिन कार्यक्रम में उपस्थित होकर सेवा कार्य में सहभागी बनने, गुरु साहिब का आशीर्वाद लेने तथा भोजन-प्रसाद ग्रहण करने का अनुरोध किया गया है।

स्थान: पूज्य चालिहा साहिब मंदिर, उल्हासनगर-5

दिनांक: 5, 6 एवं 7 अक्टूबर 2026

आयोजक: उल्हासनगर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UGMA)

बताया जाता है कि गोपी वाधवानी, किशन गंगवानी, बाबू ताराचंदानी, नरेश अमरलाल मास्टर तथा उनके कुछ साथियों और दुकानदारों द्वारा मिलकर यह गतिविधि की जाती रही हैं।

नोट: कार्यक्रम से संबंधित उपरोक्त विवरण आयोजक संस्था द्वारा जारी पोस्टर/सूचना के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।


















ड्रग्स, युवा और समाज के मुद्दे पर विशेष इंस्टाग्राम लाइव; IRS अधिकारी समीर वानखेड़े रखेंगे मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपनी बात।


नई दिल्ली/मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

भारत में मादक पदार्थों के सेवन, युवाओं पर इसके प्रभाव, रोकथाम, कानून के प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर आगामी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को एक विशेष इंस्टाग्राम लाइव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का विषय ‘सुर्खियों से परे: भारत में ड्रग्स, युवा और समाज’ (Beyond the Headlines: Drugs, Youth & Society in India) रखा गया है। पोस्टर के अनुसार, यह बातचीत मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मादक पदार्थों से जुड़े विभिन्न सामाजिक और व्यवहारिक पहलुओं को समझने पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में समीर वानखेड़े, IRS, पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर, शामिल होंगे। कार्यक्रम में ड्रग्स से जुड़े मुद्दों को केवल कानून और कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोगों, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य, नीति, प्रवर्तन और पुनर्वास जैसे व्यापक पहलुओं के संदर्भ में चर्चा किए जाने की जानकारी पोस्टर में दी गई है।

युवा ड्रग्स की ओर क्यों आकर्षित होते हैं?

कार्यक्रम के प्रमुख विषयों में मादक पदार्थों का सेवन (Substance Abuse) शामिल है। इसके तहत युवाओं के ड्रग्स की ओर आकर्षित होने के संभावित सामाजिक एवं व्यवहारिक कारणों पर चर्चा की जाएगी।

इसके साथ ही रोकथाम (Prevention) पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्चा का एक प्रमुख सवाल यह होगा कि मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए वास्तव में कौन से उपाय प्रभावी साबित हो सकते हैं और समाज, परिवार तथा संस्थाएं इस दिशा में किस प्रकार भूमिका निभा सकती हैं।

NDPS कानून और प्रवर्तन पर चर्चा

कार्यक्रम में NDPS अधिनियम से संबंधित कानून, प्रवर्तन और उसके प्रभाव पर भी चर्चा प्रस्तावित है। मादक पदार्थों से संबंधित मामलों में कानून की भूमिका तथा उसके क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।

पुनर्वास और दूसरा मौका भी चर्चा का हिस्सा

मादक पदार्थों से जुड़ी समस्या के उपचार और पुनर्वास को भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। रिकवरी, सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों को दूसरा मौका जैसे विषयों पर बातचीत होने की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम के व्यापक विषयों में ‘कानून, लोग, व्यवहार और वास्तविकता’ तथा ‘नीति, प्रवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास’ जैसे मुद्दे शामिल हैं।

कार्यक्रम की जानकारी

📅 दिनांक: 4 अक्टूबर 2026, रविवार

⏰ समय: शाम 6:30 बजे (IST)

📱 माध्यम: Instagram Live

🎙️ अतिथि: समीर वानखेड़े, IRS

पूर्व NCB जोनल डायरेक्टर एवं एडिशनल कमिश्नर

मादक पदार्थों की समस्या को लेकर जागरूकता, रोकथाम, कानून और पुनर्वास पर केंद्रित यह संवाद युवाओं, अभिभावकों और समाज के लिए विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।



















एमएम ग्रुप की गणपति परंपरा जारी: 2012 में 321 से बढ़कर 2026 में 351 मूर्तियों की स्थापना, आज होगा विसर्जन।


 

उल्हासनगर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के अवसर पर एमएम ग्रुप की ओर से इस वर्ष बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रुप के अनुसार, साल 2026 में कुल 351 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई है। इन सभी मूर्तियों का विसर्जन आज किया जा रहा है।

एमएम ग्रुप से जुड़े सदस्यों के अनुसार, गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में गणपति मूर्तियों की स्थापना और उनके विधिवत विसर्जन की परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2012 में ग्रुप की ओर से 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। इसके बाद इस संख्या में बढ़ोतरी होने की जानकारी दी गई है।

2012 में 321 से 2026 में 351 मूर्तियां

एमएम ग्रुप के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2012 में 321 गणपति मूर्तियों की स्थापना की गई थी। वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 351 बताई जा रही है। इस तरह 14 वर्षों के दौरान स्थापित की जाने वाली गणपति मूर्तियों की संख्या में 30 की वृद्धि दर्ज होने की बात कही गई है।

आज गणपति विसर्जन के अवसर पर ग्रुप से जुड़े पदाधिकारी और सदस्य इस आयोजन में शामिल होकर स्थापित गणपति मूर्तियों का विसर्जन कर रहे हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने का दावा

एमएम ग्रुप की ओर से यह भी बताया गया है कि ग्रुप का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यह जानकारी ग्रुप के सदस्यों द्वारा साझा की गई है। रिकॉर्ड से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध होने पर उसके आधार पर अतिरिक्त जानकारी सामने रखी जा सकती है।

ये हैं एमएम ग्रुप के पदाधिकारी और सदस्य

एमएम ग्रुप से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:

अनिल — ग्रुप अध्यक्ष

सनी — ग्रुप उपाध्यक्ष

बंटी — सदस्य

बबलो — सदस्य

रवि — सदस्य

हिमेश — सदस्य

हिरेन — सदस्य

गणपति विसर्जन के साथ ही इस वर्ष के गणेशोत्सव का यह आयोजन भी संपन्न हो रहा है। एमएम ग्रुप की ओर से हर वर्ष गणपति स्थापना और विसर्जन से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता की जाती है।



















काळाचौकी महागणपति पंडाल में करंट से दो मौतों के बाद मानवाधिकार आयोग में शिकायत, सुरक्षा ऑडिट की मांग।


 
मुंबई: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

मुंबई के काळाचौकी स्थित महागणपति उत्सव मंडल में बिजली के करंट से दो लोगों की मौत और चार के घायल होने के बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दाखिल की गई है।

मुंबई के काळाचौकी स्थित महागणपति मंडप में बिजली का करंट लगने से दो लोगों की मौत और चार लोगों के घायल होने के बाद महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज हुई।

अधिवक्ता आशिष राय ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप मांगा

बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिवक्ता आशिष राय ने शिकायत में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग से गणेशोत्सव के दौरान सार्वजनिक पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तत्काल हस्तक्षेप और निर्देश जारी करने की मांग की है।

शिकायत में मुंबई पुलिस, बीएमसी, बेस्ट, महाराष्ट्र सरकार, मंत्रालय और महागणपति मंडल, काळाचौकी सहित संबंधित प्राधिकरणों की कथित लापरवाही की जांच तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

यह शिकायत 20 सितंबर की उस घटना के बाद सामने आई, जिसमें महागणपति उत्सव मंडल के प्रवेश द्वार के पास अस्थायी पानी और शीतपेय स्टॉल के निकट करंट फैलने की सूचना मिली।

मृतकों और घायलों की पहचान सामने आई

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की पहचान आठ वर्षीय रागिनी घनश्याम यादव और 33 वर्षीय सुजाता बालराज थोडेटी के रूप में हुई है; चार अन्य लोग घायल हुए।

घायलों में 12 वर्षीय रूही शैलेश सिंह की हालत गंभीर बताई गई, जबकि किरण अकबर नाइक, तन्वी नरेश हांडे और साहिल संदीप तारे स्थिर बताए गए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, घटना दत्ताराम लाड मार्ग स्थित दिग्विजय मिल चाल के पास हुई, जहां गणेशोत्सव की भीड़ के बीच अस्थायी विद्युत व्यवस्था और पानी का स्टॉल संचालित था।

बीएमसी के अनुसार, मंडल की रोशनी और शीतपेय स्टॉल के लिए अस्थायी बिजली मीटर लगाया गया था। बाद में स्थानीय बिजली मिस्त्री ने मीटर की वायरिंग और एमसीबी काट दी।

बेस्ट निरीक्षण और पुलिस जांच जारी

घटना के बाद बेस्ट अधिकारियों ने दिग्विजय मिल चाल में डीएलएम-14 पोल के पास विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया, जबकि काळाचौकी पुलिस ने जांच के लिए मीटर निरीक्षक को बुलाया।

पुलिस ने इस मामले में स्टॉल संचालक कमल शेट्टी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 125(b) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी दी।

आशिष राय की शिकायत में प्राथमिकी दर्ज करने में कथित देरी, पंडालों में भीड़ प्रबंधन की कमी, विद्युत सुरक्षा में लापरवाही और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर तत्काल अंतरिम आदेश मांगे गए हैं।

राज्यभर के गणेश पंडालों के सुरक्षा ऑडिट की मांग

शिकायतकर्ता ने राज्यभर के सार्वजनिक गणेश पंडालों में सुरक्षा ऑडिट और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है, क्योंकि गणेशोत्सव के अभी कुछ दिन शेष हैं।

मानवाधिकार आयोग के समक्ष यह शिकायत ऐसे समय आई है जब बड़े गणेश पंडालों में भारी भीड़, अस्थायी बिजली कनेक्शन और सार्वजनिक आवागमन की सुरक्षा प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

इस शिकायत में उठाए गए आरोपों और मांगों पर संबंधित प्राधिकरणों का पक्ष तथा महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी, जबकि घटना की पुलिस जांच जारी है।

















ग्रामीण विकासाला ध्येय मानून जनसेवेचा अविरत प्रवास संघर्षातून विकासाची अभेद्य वाटचाल— आमदार श्री. किसन कथोरे


 











बदलापुर: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

एखाद्या नेत्याची ओळख केवळ त्याने किती निवडणुका जिंकल्या यावर होत नाही, तर त्याने सामान्य माणसाच्या जीवनात किती सकारात्मक बदल घडवून आणला, आपल्या मातीतल्या प्रश्नांना किती ताकदीने वाचा फोडली आणि पुढच्या पिढीसाठी काय निर्माण केले, यावर त्याचे नेतृत्व सिद्ध होते. आमदार श्री. किसन कथोरे यांचा प्रवास हा अशाच संघर्षातून, जिद्दीतून, लोकसेवेच्या ध्यासातून आणि विकासाच्या दूरदृष्टीतून घडलेला प्रवास आहे.

संघर्षमय बालपणातून नेतृत्वाची पायाभरणी

आज मोठ्या विकासकामांसाठी शासनाच्या दारात ठामपणे उभे राहणाऱ्या किसन कथोरे यांच्या आयुष्याची सुरुवात मात्र अत्यंत साध्या आणि संघर्षमय परिस्थितीत झाली.

बालपणी उल्हासनगरहून गोळ्या-चॉकलेट आणून ती विकायची आणि त्यातून मिळणाऱ्या पैशांत घरासाठी भात खरेदी करायचा, असा त्यांचा संघर्षमय काळ. या अनुभवांनी त्यांना गरिबी, कष्ट आणि सामान्य कुटुंबाच्या अडचणी जवळून समजून घेतल्या, शिक्षण घेत असतानाच मागासलेल्या आणि विकासापासून दूर असलेल्या भागासाठी काहीतरी करण्याची धडपड त्यांच्या मनात निर्माण झाली. हीच धडपड पुढे सामाजिक आणि राजकीय प्रवासाची प्रेरणा ठरली.

बिनविरोध सरपंच ते व्यापक नेतृत्व

स्थानिक जनतेचा विश्वास संपादन करत त्यांनी बिनविरोध सरपंच म्हणून जबाबदारी स्वीकारली. पद मिळाले म्हणून काम करण्यापेक्षा कामातून पदाला प्रतिष्ठा मिळवून देण्याचा त्यांचा स्वभाव याच काळात दिसून आला, गावाच्या विकासासाठी त्यांनी तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबासाहेब भोसले यांना ग्रामपंचायत कार्यालयाच्या उद्घाटनासाठी निमंत्रित केले. मुख्यमंत्र्यांना गावात आणून केवळ उद्घाटन करण्यापुरते न थांबता त्यांनी स्थानिक रस्ते आणि वीजेचे प्रश्न त्यांच्या निदर्शनास आणून दिले आणि ते प्रश्न मार्गी लावण्यासाठी प्रयत्न केले. गावाचा प्रश्न हा छोटा नसतो, तर तो हजारो कुटुंबांच्या जीवनाशी जोडलेला असतो, ही त्यांची भूमिका याच काळात स्पष्ट झाली.

महाराष्ट्रातील सरपंच संघटनेपासून जिल्हा परिषदेपर्यंत

गावपातळीवर काम करताना अनेक सरपंचांच्या समस्या आणि अडचणी त्यांच्या लक्षात आल्या. त्यातूनच महाराष्ट्रात सरपंच संघटनेची स्थापना करण्याची कल्पना पुढे आली. स्थानिक स्वराज्य संस्थांना बळकटी देण्यासाठी संघटित नेतृत्वाची गरज त्यांनी ओळखली. यानंतर पंचायत सभापती निवडणूक आणि पुढे जिल्हा परिषद निवडणूक हा त्यांच्या राजकीय प्रवासातील महत्त्वाचा टप्पा ठरला. पहिल्याच जिल्हा परिषद कार्यकाळात त्यांनी बांधकाम व आरोग्य सभापती तसेच अध्यक्ष म्हणून जबाबदारी सांभाळली. प्रशासनातील कार्यपद्धती, नियोजन, निधीचा योग्य वापर आणि ग्रामीण भागाच्या गरजा यांचा जवळून अभ्यास त्यांनी केला, याच काळात जिल्हा परिषदेच्या कामकाजात नवे प्रयोग करण्याचा प्रयत्न झाला, भारतातील पहिली ISO मानांकन प्राप्त जिल्हा परिषद म्हणून ठाणे जिल्हा परिषदेला ओळख निर्माण करून देण्याच्या दिशेने त्यांनी महत्त्वपूर्ण काम केले.

‘विना दप्तर शाळा’ आणि शिक्षणाची नवी संकल्पना

ग्रामीण भागातील मुलांना दर्जेदार शिक्षण मिळावे, शिक्षणाचा बोजा न वाटता त्यातून ज्ञान, कौशल्य आणि व्यक्तिमत्त्व विकास व्हावा, यासाठी ‘विना दप्तर शाळा’ ही संकल्पना पुढे आली, शाळा ही केवळ इमारत नसून विद्यार्थ्यांच्या भवितव्याची पायाभरणी करणारे केंद्र असले पाहिजे, या विचारातून शिक्षण क्षेत्रात विविध प्रयोग करण्यात आले, ग्रामीण विकासाच्या कामांना आर्थिक पाठबळ मिळावे यासाठी नाबार्डच्या विविध आर्थिक योजनांचा प्रभावी वापर करण्यावरही त्यांनी भर दिला.

जिल्हा परिषद अध्यक्षपद

दुसऱ्या जिल्हा परिषद निवडणुकीतही जनतेने त्यांच्या नेतृत्वावर विश्वास ठेवला आणि त्यांची जिल्हा परिषद अध्यक्षपदी निवड झाली. या काळात ग्रामीण भागातील पायाभूत सुविधा, आरोग्य, शिक्षण, रस्ते आणि विकासकामांना अधिक व्यापक दिशा देण्यात आली.

विधानसभेच्या राजकारणात प्रवेशाची पहिली हाक

२००४ च्या विधानसभा निवडणुकीपूर्वी तत्कालीन ज्येष्ठ नेते मा. शरद पवार साहेबांनी ठाणे जिल्ह्यातील २४ आमदारांचा अहवाल मागवला. त्यानंतर अंबरनाथ विधानसभा मतदारसंघातून निवडणुकीची तयारी करण्याची जबाबदारी किसन कथोरे यांच्यावर सोपवण्यात आली हा त्यांच्या आयुष्यातील निर्णायक क्षण होता. या प्रवासात डोणगावकर साहेबांचा प्रभाव, कोकाटे साहेबांचे मार्गदर्शन आणि विशेषतः डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी यांचे जीवनातील महत्त्वपूर्ण स्थान त्यांनी कायम मान्य केले आहे. या व्यक्तिमत्त्वांकडून मिळालेली प्रेरणा, संस्कार आणि सामाजिक बांधिलकी त्यांच्या पुढील कार्यात दिसून येते.

विधानसभेची पहिली पायरी

पहिली विधानसभा निवडणूक म्हणजे त्यांच्या राजकीय प्रवासातील पहिली मोठी पायरी होती, विधानसभेत पोहोचल्यानंतर केवळ राजकारण करायचे नाही, तर मतदारसंघात नवे प्रकल्प आणायचे, ग्रामीण भागाला विकासाच्या मुख्य प्रवाहात आणायचे आणि सामान्य नागरिकांचे जीवनमान उंचवायचे, हा त्यांचा संकल्प होता. याच ध्यासातून त्यांनी विविध विकासकामांचा पाठपुरावा सुरू केला.युरोप अभ्यास दौरा आणि विकासाची नवी दृष्टी युरोप अभ्यास दौऱ्याने त्यांच्या विकासदृष्टीला आणखी व्यापक आकार दिला. जगातील विकसित देशांमधील पायाभूत सुविधा, वाहतूक व्यवस्था, नियोजन आणि पर्यटन विकासाचा अभ्यास करून आपल्या मतदारसंघात काय आणता येईल, याचा त्यांनी विचार केला. यातूनच भारतातील पहिल्या फ्युनिक्युलर ट्रॉली प्रकल्पासारख्या अभिनव संकल्पनांचा विचार पुढे आला. रस्ते, वीज आणि इतर पायाभूत सुविधांबरोबरच आधुनिक विकासाची जोड देण्याचा प्रयत्न झाला.

बारवी धरणग्रस्तांसाठी संवेदनशील नेतृत्व

बारवी धरणाच्या प्रकल्पामुळे प्रभावित झालेल्या १२०४ प्रकल्पग्रस्त कुटुंबांच्या पुनर्वसनाचा प्रश्न हा अत्यंत संवेदनशील होता. प्रकल्पासाठी जमीन देणाऱ्या कुटुंबांचे जीवन उद्ध्वस्त न होता त्यांना नव्याने उभे राहण्याची संधी मिळाली पाहिजे, या भूमिकेतून त्यांच्या पुनर्वसनाबरोबरच रोजगाराच्या संधी उपलब्ध करून देण्यासाठी त्यांनी प्रयत्न केले.

विकास आणि प्रकल्पग्रस्तांचे हित यांचा समतोल साधण्याची त्यांची भूमिका यामध्ये दिसून आली.

२००५ चा महाभयंकर बदलापूर पूर

२००५ मध्ये बदलापूरने महाभयंकर पुराचा सामना केला. या आपत्तीने संपूर्ण परिसराला मोठा धक्का दिला. या अनुभवातून पूरनियंत्रण, नाले, नदीपात्र, पायाभूत सुविधा आणि आपत्ती व्यवस्थापन या प्रश्नांकडे अधिक गांभीर्याने पाहण्याची गरज अधोरेखित झाली. संकटाच्या काळात लोकांच्या पाठीशी उभे राहणे आणि संकटातून भविष्यासाठी शिकणे, ही त्यांच्या कार्यपद्धतीची वैशिष्ट्ये राहिली.

विधानसभेची दुसरी पायरी

पहिल्या विधानसभा कार्यकाळानंतर जनतेने पुन्हा विश्वास दाखवला आणि दुसऱ्या विधानसभा निवडणुकीत त्यांना संधी मिळाली, आता अनुभव वाढला होता, संपर्क वाढला होता आणि विकासाचे स्वप्नही मोठे झाले होते. त्यामुळे मतदारसंघातील गावागावांत विकासकामे पोहोचविण्याचा वेग वाढला.

सामाजिक उपक्रम — विकासाबरोबर माणुसकी

किसन कथोरे यांच्या राजकीय प्रवासात सामाजिक उपक्रमांना विशेष स्थान आहे, गावोगावी रस्ते, कन्यादान योजना, हिमोग्लोबिन तपासणी, नेत्रचिकित्सा शिबिरे, आरोग्य तपासणी शिबिरे अशा विविध उपक्रमांच्या माध्यमातून समाजातील गरजू घटकांपर्यंत पोहोचण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. ३४ वर्षांपासून नेत्रचिकित्सा व मोतीबिंदू शस्त्रक्रिया उपक्रमाच्या माध्यमातून लाखो लोकांना लाभ देणारा दृष्टी मित्र साकीब गोरे सारखा मुस्लिम कार्यकर्ता ज्याने आज देवभाऊ चष्मा सुरू करून जणू कथोरे साहेबांनाच संपूर्ण जगात पोहोचवले आहे.

मतदारसंघात अनेक ठिकाणी जेव्हा दुःखद प्रसंग घडतात तेव्हा त्या घरातील करता पुरुष गेल्याने त्या कुटुंबातील मुलींचे कन्यादान कोण करेल असे लक्षात येताच कथोरे साहेबांनी विधवा महिलांच्या मुलींचे कन्यादान करण्यास सुरू केले व आज जवळपास ५५०० मुलींचे करण्याचे भाग्य त्यांना प्राप्त झाले आहे

कुटुंबात नवीन मुलगी जन्माला आली की तिचे स्वागत करण्याची योजना कथोरे साहेबांनी सुरू केली असून आजवर सुमारे १८०० मुलींच्या जन्माचे किसन कन्या रत्न सन्मान योजना अश्या नावाने हि योजना ओळखली जाते ज्यामध्ये नवजात बलिकेसाठी लागणारे बेबी केयर किट देण्यात येते, तिच्या नावाने महाराष्ट्र शासनाच्या सुकन्या सन्मान योजनेचा पहिला हफ्ता भरून दिला जातो,

कोकण पाटबंधारे विकास महामंडळ आणि तत्त्वनिष्ठ निर्णय

कोकण पाटबंधारे विकास महामंडळाशी संबंधित जबाबदारी स्वीकारल्यानंतरही त्यांनी सिंचन आणि ग्रामीण विकासाच्या प्रश्नांकडे गांभीर्याने पाहिले. मात्र राजकीय आणि वैचारिक भूमिकांशी तडजोड न करता त्यांनी पुढे राजीनामा देण्याचा निर्णय घेतला. सत्ता किंवा पदापेक्षा स्वतःच्या भूमिकेला महत्त्व देण्याची त्यांची वृत्ती या निर्णयातून दिसून आली.

२०१४ — राष्ट्रवादीकडून राष्ट्रवादाकडे भाजपचा झेंडा हाती घेऊन विधानसभेची तिसरी पायरी

२०१४ मध्ये किसन कथोरे यांनी राष्ट्रवादी काँग्रेस मधून भारतीय जनता पक्षात प्रवेश करण्याचा ऐतिहासिक निर्णय घेतला. हा निर्णय सोपा नव्हता. अनेक वर्षांच्या राजकीय प्रवासानंतर पक्ष बदलणे म्हणजे मोठे आव्हान होते. मात्र देशाच्या विकासासाठी पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या नेतृत्वाखालील राष्ट्रवादाच्या आणि विकासाच्या विचारधारेसोबत काम करण्याचा त्यांनी निर्णय घेतला, भाजपमध्ये प्रवेश केल्यानंतर त्यांनी पक्षाच्या संघटनात्मक कार्यपद्धतीत स्वतःला झोकून दिले. कार्यकर्त्यांशी संपर्क, बूथ पातळीवरील संघटन आणि पक्षविस्तार यावर त्यांनी भर दिला.

संघटनात्मक जबाबदारी आणि नवे राजकीय पर्व

आगामी लोकसभा निवडणुकांच्या पार्श्वभूमीवर पक्षाने त्यांच्यावर विविध संघटनात्मक जबाबदाऱ्या सोपवल्या. भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश सचिव म्हणूनही त्यांनी काम केले. याच काळात जिल्हा बँक निवडणूक आणि कृषी उत्पन्न बाजार समिती, मुरबाड नगरपंचायत निवडणूक, शहापूर नगरपंचायत निवडणुकीत संघटनात्मक ताकदीचे त्यांनी प्रदर्शन झाले.

२०१९ विक्रमी विजयासह विधानसभेची चौथी पायरी 

२०१९ च्या विधानसभा निवडणुकीत आमदार किसन कथोरे यांनी मोठ्या मताधिक्याने विजय मिळवला. महायुतीतील सर्वाधिक मताधिक्यांपैकी एक आणि महाराष्ट्रातील तिसऱ्या क्रमांकाचे मताधिक्य अशी त्यांच्या विजयाची नोंद झाली. अजितदादांसोबत लावलेली पैज आणि त्यानंतर मिळालेला प्रचंड विजय हा त्यांच्या राजकीय प्रवासातील चर्चेचा विषय ठरला. या विजयाने एक गोष्ट स्पष्ट केली कितीही मोठी राजकीय समीकरणे असली तरी शेवटी जनतेशी असलेला संपर्क आणि केलेले कामच निर्णायक ठरते.

‘डांबरमुक्त मुरबाड’ — विकासाचा वेगळा प्रयोग

मुरबाड विधानसभा मतदारसंघातील ग्रामीण रस्त्यांची अवस्था बदलण्यासाठी त्यांनी मोठ्या प्रमाणावर प्रयत्न केले. ‘डांबरमुक्त मुरबाड’ ही संकल्पना पुढे आणत आधुनिक तंत्रज्ञान आणि काँक्रीटच्या रस्त्यांच्या माध्यमातून दीर्घकाळ टिकणारी पायाभूत सुविधा उभारण्याचा प्रयत्न केला.

नवीन पिढीसाठी कार्यकर्ते घडविण्याचा किसन कथोरे यांचा संकल्प

त्यांच्या मते केवळ स्वतःचे नेतृत्व टिकवणे हा राजकारणाचा उद्देश नसावा, नवीन पिढीला दिशा देण्यासाठी कार्यकर्ते घडवले पाहिजेत, युवा नेतृत्व तयार करणे, कार्यकर्त्यांना जबाबदाऱ्या देणे आणि भविष्यातील नेतृत्वाची दुसरी फळी निर्माण करणे, यावर त्यांनी सातत्याने भर दिला आहे.

२०२२ — गोवा विधानसभा निवडणुकीची जबाबदारी

२०२२ च्या गोवा विधानसभा निवडणुकीत पक्षाने त्यांच्यावर ८ मतदारसंघांची जबाबदारी सोपवली होती, त्यांच्या सोबत गोव्यातील निवडणुकीत काम करतांना एक गोष्ट मला प्रकर्षाने जाणवली ती म्हणजे कथोरे साहेबांचा संपर्क केवळ मुरबाड, भिवंडी, ठाणे, पालघर, किंवा महाराष्ट्रात नसून तो गोव्यात देखील होता, गोव्याला पोहोचे पर्यंत त्यांनी संपूर्ण प्रवासात त्यांच्या सर्व प्रमुख कार्यकर्त्यांना फोन करून ओळखीच्या लोकांची यादी मागवली विशेष करून कोकणातल्या त्यांच्या संपर्कातील लोकांकडून व गोव्यात त्यांच्या भेटी गाठी घेतल्या. महाराष्ट्राबाहेर पक्ष संघटनेसाठी काम करण्याची त्यांना ही मोठी संधी होती आणि ही जबाबदारी त्यांनी यशस्वीपणे पार पाडली.

दिल्लीशी थेट संवाद — मतदारसंघासाठी योजना आणण्याचा ध्यास

केंद्र सरकारच्या विविध योजना आपल्या मतदारसंघात कशा आणता येतील, यासाठी त्यांनी दिल्लीचे दौरे केले.केंद्रातील मंत्री, अधिकारी आणि विविध मंत्रालयांशी संपर्क साधून मतदारसंघाच्या विकासासाठी केंद्र सरकारच्या योजना आणि निधी आणण्याचा प्रयत्न केला. दिल्लीतील प्रशासनिक पातळीवर मतदारसंघाच्या प्रश्नांना मिळणारा प्रतिसाद हा त्यांच्या सातत्यपूर्ण पाठपुराव्याचा परिणाम ठरला. गेल्या ५ वर्षात कथोरे साहेबां सोबत मी अनेक दिल्ली दौरे केले व मतदारसंघातील विकासकामांचा पाठपुरावा करण्यासाठी केंद्रीय मंत्रिमंडळातील अनेक दिग्गज मंत्र्यांना भेटलो आहे कथोरे साहेबांच्या कामाची पद्धत व कामाचा आवाका बघून अनेक केंद्रीय मंत्र्यांनी त्यांचे कौतुक करतांना मी बघितले व अनुभवले आहे, याचे ज्वलंत उदाहरण म्हणजे कल्याण माळशेज राष्ट्रीय महामार्ग, बदलापूर मार्गे जाणारा जेएनपीटी- वडोदरा एक्सप्रेस हायवे, माळशेज घाटात होणारा काचेचा स्कायवॉक साठी केंद्रीय रस्ते वाहतूक महामार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी व बदलापूर रेल्वे स्टेशनच्या सुशोभीकरण व नूतनीकरण प्रकल्पासाठी केंद्रीय रेल्वेमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी यांनी केलेले कौतुक अश्या अनेक विकास प्रकल्पांच्या प्रशासकीय मंजुरीचा मी प्रत्यक्ष साक्षीदार आहे, त्यांच्या सोबत केलेल्या प्रत्येक दौऱ्यात मला खूप काही नवीन गोष्टी शिकायला मिळाल्या आहेत.

माळशेजचा काचेचा पूल आणि पर्यटन विकास

मुरबाड आणि परिसरातील पर्यटनाला चालना देण्यासाठी माळशेज काचेचा पूल यांसारख्या संकल्पना पुढे आणण्यात आल्या. पर्यटन म्हणजे केवळ मनोरंजन नव्हे, तर स्थानिक युवकांना रोजगार, स्थानिक व्यवसायांना चालना आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला बळ देणारे प्रभावी माध्यम आहे, या विचारातून पर्यटन विकासाकडे पाहिले गेले.

किसन कथोरे यांच्या राजकीय प्रवासाची खरी ताकद त्यांच्या कार्यकर्त्यांमध्ये आहे, गावोगावी, वाडी-वस्त्यांमध्ये, शहरातील प्रभागांमध्ये आणि बूथ पातळीवर काम करणाऱ्या असंख्य कार्यकर्त्यांशी त्यांनी वैयक्तिक नाते जपले. पदे बदलतात, निवडणुका येतात-जातात; पण मनात घर केलेले कार्यकर्ते हेच त्यांच्या राजकीय प्रवासाची खरी पुंजी आहे.

२०२४ — लोकसभा निवडणूक आणि पंतप्रधानांच्या शपथविधीचे निमंत्रण

२०२४ च्या लोकसभा निवडणुकीत पक्षाच्या संघटनात्मक कार्यात त्यांनी सक्रिय भूमिका बजावली. त्यानंतर पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या शपथविधी सोहळ्यासाठी निमंत्रण मिळणे, हा त्यांच्या सार्वजनिक जीवनातील एक अभिमानाचा क्षण ठरला आणि हा प्रसंग अनुभवायला मला देखील कथोरे साहेबां सोबत राष्ट्रपती भवनात जाता आले हे मी माझे भाग्यच समजतो.

बदलापूरच्या विकासाला नवी गती

बदलापूरसाठी तब्बल २६२ कोटी रुपयांची पाणी योजनेला मंजूरी देण्यात आली. वाढत्या लोकसंख्येला भविष्यात पुरेसा आणि शाश्वत पाणीपुरवठा मिळावा, यासाठी हा महत्त्वाचा टप्पा आहे.

कांजूरमार्ग ते बदलापूर - मेट्रो १४ प्रकल्पाला मंजुरी मिळाल्याने बदलापूर मधून मुंबईकडे नोकरी, शिक्षण, व्यवसायासाठी जाणाऱ्या प्रवाश्यांना दिलासा मिळणार आहे, 

जेएनपीटी वडोदरा बदलापूर मार्गे जोडणीचे स्वप्न
मतदारसंघाच्या भविष्यातील आर्थिक विकासाचा विचार करताना मोठ्या पायाभूत प्रकल्पांकडेही त्यांनी लक्ष दिले. जेएनपीटी–वडोदरा एक्सप्रेस हायवे ला बदलापूर मार्गे जोडण्याचा प्रयत्न हा त्याच व्यापक विकासदृष्टीचा भाग आहे.

२०२४ विधानसभा — संघर्षातून पुन्हा विजय

२०२४ च्या विधानसभा निवडणुकीत सर्व विरोधक एकत्र येऊन आपल्याला पराभूत करण्यासाठी प्रयत्न करत असतानाही जनतेने पुन्हा एकदा विश्वास दाखवला, हा विजय केवळ एका उमेदवाराचा नव्हता; तो काम, संघटन, कार्यकर्त्यांची मेहनत आणि जनतेशी असलेल्या नात्याचा विजय होता.

मुरबाड-बदलापूर परिसराच्या सांस्कृतिक आणि ऐतिहासिक वारशाला नवी ओळख देण्यासाठी छत्रपती शिवाजी महाराजांचा अश्वारूढ पुतळा आणि शिवसृष्टी उभारण्याची संकल्पना पुढे आली. छत्रपती शिवाजी महाराजांचा इतिहास केवळ वाचण्यासाठी नाही, तर तो नव्या पिढीला अनुभवता आला पाहिजे हा यामागचा विचार होता व त्यासाठी बदलापूरगावा जवळ उल्हास नदीला लागून असलेल्या जागेत छत्रपती शिवाजी महाराज यांचा अश्वारूढ पुतळा उभारण्यात आला व त्याचे अनावरण महाराष्ट्र राज्याचे मुख्यमंत्री मा श्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या हस्ते १९ फेब्रुवारी २०२५ रोजी करण्यात आले, अखंड भारताचे प्रेरणास्थान असलेल्या छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या या पुतळ्याच्या उभारणीत माझा देखील खारीचा वाट असल्याचा मला सार्थ अभिमान आहे हा पुतळा ज्या शिल्पकाराच्या पुण्यातील कारखान्यात बनवण्यात आला तेथून तो पुतळा बदलापूरला आणण्याची जबाबदारी कथोरे साहेबांनी मला दिली होती, १५० किलोमीटरचा प्रवास जो आपण साधारणपणे ३-४ तासात पूर्ण करतो तोच प्रवास छत्रपती शिवाजी महाराजांचा पुतळा घेऊन येतांना आम्हाला ३६ तास लागले, वाटेत अनेक अडचणी आल्या, २ वेळा रस्ता बदलावा लागला, वाटेत ज्या ज्या ठिकाणी ब्रिज आले त्या त्या ठिकाणी महाराजांचा पुतळा ट्रेलरवरून क्रेनने उचलून ट्रॉलीच्या मदतीने ब्रिज खालून न्यावा लागायचा व पुन्हा ट्रेलरवर बसवायला लागायचा, असं एकूण ९ वेळा करावं लागलं खंडाळा घाटातील प्रत्येक वळणावर संकटं आली परंतु महाराजांच्या कृपेने प्रत्येक संकटावर मात करत आम्ही बदलापूरला सुखरूप पोहोचलो, या संपूर्ण प्रवासात जणू महाराज स्वतः त्यांच्या नजरेनेने रयतेचे निरीक्षण करत पुढे मार्गस्थ होत आमच्या सोबत असल्याची भावना आमच्या सोबत असलेल्या सर्वांच्या मनात होती, कथोरे साहेबांनी मला हि महत्वपूर्ण जबाबदारी सोपवल्या बद्दल मी कायमच त्यांचा ऋणी राहीन.

२०२५ मधील कुळगाव-बदलापूर नगरपालिका निवडणुकीत भाजपचा झेंडा फडकवण्यात यश आले. स्थानिक स्वराज्य संस्थांमध्ये संघटन मजबूत करण्याच्या दृष्टीने हा महत्त्वाचा टप्पा ठरला. संघर्षातून निर्माण झालेली विकासाची दृष्टी

बाहेरून कणखर तितकेच आतून संवेदनशील 

कथोरे साहेबांनी जरी राष्ट्रवादी काँग्रेस पक्ष सोडला असला तरी त्यांचे स्व अजित दादांवर असलेलं प्रेम व आपुलकी आम्ही कोणीही विसरू शकणार नाही, २८ जानेवारी २०२६ रोजी सकाळी मुंबईला असतांना राज्याचे उपमुख्यमंत्री स्व अजित पवारांच्या निधनाची बातमी येताच कथोरे साहेब स्तब्ध झाले, मी काही कामासाठी कथोरे साहेबांना भेटायला मुंबईला पोहोचलो होतो परंतू कथोरे साहेबांनी एका क्षणाचा ही विलंब न करता तात्काळ बारामती ला निघाले, त्या ठिकाणी प्रथम पोहोचणाऱ्या काही मोजक्याच नेत्यांपैकी कथोरे साहेब होते, आजही स्व अजित दादांचा विषय निघाला की न कळत कथोरे साहेबांचे डोळे पाणावतात

किसन कथोरे यांच्या प्रवासाकडे पाहिले तर त्यात अनेक टप्पे दिसतात — गोळ्या-चॉकलेट विकणारे संघर्षमय बालपण, शिक्षणाची धडपड, बिनविरोध सरपंच, सरपंच संघटना, पंचायत सभापती, जिल्हा परिषद अध्यक्ष, आमदारकीच्या निवडणुका, पक्षबदल, संघटनात्मक जबाबदाऱ्या, विक्रमी विजय आणि आजही सुरू असलेला विकासाचा पाठपुरावा

या संपूर्ण प्रवासाला जोडणारा एक समान धागा आहे — सामान्य माणूस आणि ग्रामीण भागाचा विकास पद कोणतेही असो, पक्ष कोणताही असो किंवा राजकीय परिस्थिती कितीही बदलली असो, त्यांच्या कामाचा केंद्रबिंदू राहिला आहे तो मतदारसंघाचा विकास आणि जनतेचे हित, आज त्यांच्या समोर केवळ पुढील निवडणुकीचे लक्ष्य नाही; तर पुढील पिढीचे भविष्य घडविण्याचे ध्येय आहे कारण त्यांना माहीत आहे, रस्ते बांधले की गाव जोडले जाते, शाळा उभारली की भविष्य घडते, पाणी आणले की जीवन समृद्ध होते, रोजगार निर्माण केला की कुटुंब सक्षम होते, आणि कार्यकर्ते घडवले की नेतृत्वाची परंपरा पुढे जाते. म्हणूनच किसन कथोरे यांचा राजकीय प्रवास हा केवळ एका नेत्याचा प्रवास नाही; तो संघर्षातून उभ्या राहिलेल्या एका ग्रामीण विकासाच्या स्वप्नाचा प्रवास आहे. अश्या विकसनशील व सामाजिक परिवर्तन घडवणाऱ्या आमदार किसन कथोरे यांचा १९ सप्टेंबर रोजी वाढदिवस आहे, त्यांना वाढदिवसाच्या मनःपूर्व आरोग्यदायी शुभेच्छा  

श्री मिलिंद विजय धारवाडकर
संयोजक- आयटी सेल कोकण विभाग, भाजपा
उपाध्यक्ष- भाजपा ठाणे ग्रामीण जिल्हा

























गणेशोत्सव में डीजे की तेज आवाज पर लगाम, अंबरनाथ-बदलापुर की सोसायटियों के लिए नए निर्देश।


अंबरनाथ: मंत्रालय टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क

गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र में प्रशासन ने हाउसिंग सोसायटियों के लिए सख्त रुख अपनाया है। सोसायटी परिसरों में निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करते हुए तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनिक्षेपक उपकरण बजाए जाने की शिकायत मिलने पर संबंधित सोसायटी के पदाधिकारियों और प्रबंधन समिति की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

इस संबंध में अंबरनाथ तालुका के सहायक निबंधक राजेंद्र विठ्ठल मरकड ने 8 सितंबर 2026 को अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सहकारी संस्थाओं की प्रबंधन समितियों को परिपत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन अनिवार्य

प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर निर्धारित नियमों और ध्वनि सीमा का पालन करना आवश्यक है। गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में ध्वनिक्षेपक या डीजे का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मानकों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

यदि किसी सोसायटी परिसर से निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे या लाउडस्पीकर बजाने की शिकायत प्राप्त होती है, तो मामले में संबंधित सोसायटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष तथा प्रबंधन समिति के सदस्यों की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों को परेशानी का मुद्दा

गणेशोत्सव और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से आसपास रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों, विद्यार्थियों तथा बीमार लोगों को परेशानी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सोसायटी पदाधिकारियों से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि धार्मिक उत्सव और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान नागरिकों की सुविधा तथा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्वनि की निर्धारित सीमा का पालन किया जाना चाहिए।

14 से 25 सितंबर तक विशेष सतर्कता

गणेशोत्सव की अवधि में 14 से 25 सितंबर 2026 के दौरान सोसायटियों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सोसायटी प्रबंधन से अपेक्षा की गई है कि कार्यक्रमों के दौरान ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन न हो और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में गणेशोत्सव के दौरान सोसायटियों के पदाधिकारियों के सामने उत्सव आयोजन के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी रहेगी।

सोसायटी पदाधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी

प्रशासन के इस परिपत्र के बाद अंबरनाथ और बदलापुर क्षेत्र की हाउसिंग सोसायटियों में गणेशोत्सव के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने की संभावना है। नियमों का पालन कराने में सोसायटी प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इस कदम का उद्देश्य गणेशोत्सव जैसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के दौरान उत्सव का माहौल बनाए रखते हुए ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करना बताया गया है।