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कला भारती के सदस्य अभिषेक कोली भाजपा में शामिल, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ भव्य कार्यक्रम संपन्न।


 


नवी मुंबई: दिपिका पारकर

राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को केंद्र में रखकर मुंबई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कला भारती एसोसिएशन के सदस्य अभिषेक कोली ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और उद्यमियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक विस्तार तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास करना भी था। इस दौरान महिलाओं को आर्थिक साक्षरता, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, GEM पोर्टल, मुद्रा योजना, स्वरोजगार के अवसर, उद्यमिता विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना ही इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार, मुंबई भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक अमित साटम, विधान परिषद सदस्य उमा खापरे, मुंबई भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष योजना ठोकले, विधान परिषद सदस्य माधवी नाइक, भाजपा के पदाधिकारी तथा अन्य कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी के मार्गदर्शन में नगरसेविका स्वप्ना म्हात्रे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा राष्ट्रहित और समाजसेवा की भावना से कार्य करने वाले लोगों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित लोगों के लिए भाजपा एक सशक्त मंच है। उन्होंने कला भारती एसोसिएशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का सराहनीय प्रयास कर रही है।

वहीं, मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भाजपा हमेशा नई पीढ़ी को अवसर देने और उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा से जोड़ने में विश्वास रखती है। उन्होंने अभिषेक कोली के भाजपा में प्रवेश का स्वागत करते हुए कहा कि युवा नेतृत्व समाज और राजनीति दोनों के लिए नई ऊर्जा लेकर आता है। उन्होंने उन्हें जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन के साथ मिलकर कार्य करने और जमीनी स्तर पर जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत करने का संदेश दिया।

महापौर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि राज्य में युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं रविंद्र चव्हाण, अमित साटम और चित्रा वाघ के योगदान की भी प्रशंसा की।

कला भारती एसोसिएशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष उषा बाजपेयी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। उनके अनुसार विकसित भारत के सपने को साकार करने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भाजपा में शामिल होने के बाद अभिषेक कोली ने कहा कि राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने कहा कि कला भारती एसोसिएशन और भाजपा मिलकर समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर कलाकारों और युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संगठन के माध्यम से समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक आकर्षण “उड़ान” दिव्यांग संगीत समूह (ब्लाइंड ऑर्केस्ट्रा) की प्रस्तुति रही। समूह के कलाकारों ने अपने संगीत और प्रतिभा से उपस्थित लोगों को भावुक और प्रेरित किया। कार्यक्रम में इस समूह का विशेष सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान समाज में प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित करने का प्रयास है।

इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों से आए महिला एवं पुरुष उद्यमियों, हस्तशिल्प कलाकारों और समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। गुजरात, महेश्वर, संभाजीनगर, पुणे सहित विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक कला, हस्तकला और महिला उद्यमिता को मंच प्रदान कर स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।














FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को मिल सकती है Z+ सुरक्षा, सख्त कार्रवाईयों के बीच सुरक्षा बढ़ाने पर मंथन।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार कर रही हैं तथा इस संबंध में उच्च स्तर पर चर्चा जारी है।

जानकारी के मुताबिक, हाल के महीनों में तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA ने राज्यभर में गुटखा, तंबाकू, निकोटीनयुक्त पान मसाला और अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। कई जिलों में बड़े पैमाने पर छापेमारी, जब्ती और कानूनी कार्रवाई के कारण अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में उनकी सुरक्षा को लेकर समीक्षा किए जाने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्राप्त इनपुट और सुरक्षा आकलन रिपोर्टों के आधार पर मुंढे की सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो उन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जो देश में उपलब्ध सबसे उच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है।

तुकाराम मुंढे अपनी कठोर प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और नियमों के कड़ाई से पालन के लिए जाने जाते हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। FDA आयुक्त के रूप में भी उन्होंने राज्यभर में कई चर्चित कार्रवाईयों को अंजाम दिया है, जिसके चलते वे लगातार सुर्खियों में रहे हैं।

हाल ही में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। इसके अलावा अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। माना जा रहा है कि इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।

हालांकि, Z+ सुरक्षा को लेकर अभी तक राज्य सरकार, गृह विभाग अथवा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो तुकाराम मुंढे उन चुनिंदा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।














उल्हासनगर में सेवा और समर्पण का अनूठा उदाहरण: संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सरोकारों के साथ धूमधाम से मनाया गया।


 






उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उल्हास जनपथ के संपादक शिव कुमार मिश्रा का जन्मदिन सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्यों के साथ अत्यंत उत्साह एवं भव्यता से मनाया गया। जन्मदिन के अवसर पर उल्हास जनपथ कार्यालय में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और शिव कुमार मिश्रा को शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं।

कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि जन्मदिन को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे समाजसेवा से जोड़ा गया। इस अवसर पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल बैग, पुस्तकें एवं पेंसिल सेट वितरित किए गए, ताकि उनकी शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा न आए और वे बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें।

इसके साथ ही जरूरतमंद महिलाओं को दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं से युक्त राशन किट प्रदान की गईं, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को मानसून को ध्यान में रखते हुए छतरियां वितरित की गईं। इस पहल की उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की और इसे समाज के प्रति संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावुक क्षण तब देखने को मिला जब सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम एवं द्वितीय कक्षा की बालिकाओं के लिए विशेष लकी ड्रॉ आयोजित किया गया। लकी ड्रॉ के माध्यम से चयनित छात्राओं को साइकिलें भेंट की गईं। इस उपहार से बालिकाओं और उनके अभिभावकों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस प्रकार की पहल न केवल बेटियों को प्रोत्साहित करती है, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश भी देती है।

कार्यक्रम में मौजूद सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और विभिन्न क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने शिव कुमार मिश्रा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। साथ ही समाजहित में लगातार किए जा रहे उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।

जन्मदिन समारोह सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी शिव कुमार मिश्रा इसी तरह समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए प्रेरणादायी कार्य करते रहेंगे।























सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को मिला प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान 2026"


नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी

देश के सामाजिक, मानवीय और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं जनहितैषी व्यक्तित्व डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित "भारत भूषण सम्मान" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण, जनसेवा तथा मानव एवं पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय और प्रभावशाली योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

भारत गौरव फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान देश के उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को समर्पित है जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, नागरिक जागरूकता बढ़ाने तथा राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. घाडगे का चयन उनके वर्षों से चले आ रहे समर्पित सामाजिक कार्यों, जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों को ध्यान में रखते हुए किया गया।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपने कार्यकाल के दौरान सामाजिक न्याय, समान अवसर, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने, जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया है। उनके नेतृत्व में संचालित विभिन्न जनहितकारी अभियानों ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विशेष रूप से मानव और पशु कल्याण के क्षेत्र में उनके प्रयासों की व्यापक सराहना की गई है। समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथा सेवा भाव ने उन्हें एक जिम्मेदार और प्रेरणादायी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है। उनके कार्यों में सदैव पारदर्शिता, नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा है।

इस अवसर पर जारी आधिकारिक प्रशस्ति में कहा गया है—

"सामाजिक सुधार, श्रमिक कल्याण, नैतिक सुशासन, राष्ट्र निर्माण और मानवीय सेवा के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता तथा एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत और प्रगतिशील समाज के निर्माण में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को भारत भूषण सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाता है।"

भारत भूषण सम्मान को देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है, जिसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है जिनकी सेवाएं व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर व्यापक समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। डॉ. घाडगे का यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब समाज को संवेदनशील, जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब डॉ. सागर प्रकाश घाडगे जैसे व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य करते हैं। उनका जीवन और कार्य यह संदेश देता है कि समर्पण, सेवा, साहस और नैतिक मूल्यों के आधार पर समाज में सार्थक एवं स्थायी परिवर्तन संभव है।

देश के विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और जनसेवी संगठनों ने डॉ. घाडगे को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर जनसेवा की कामना की है।

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को "भारत भूषण सम्मान 2026" प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

"समाज सेवा • न्याय के प्रति प्रतिबद्धता • राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण'














आरटीओ की नोटिस के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! उल्हासनगर आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर फिर दिखी लाल-नीली फ्लैशिंग बत्ती, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

देशभर में वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार द्वारा वर्षों पहले वाहनों पर लाल-नीली बत्तियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद ठाणे जिले के उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन में नियमों की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले की सरकारी गाड़ी पर प्रतिबंधित फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती लगाए जाने का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी मुद्दे पर कल्याण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर कथित रूप से वही ‘जिगजैग’ फ्लैशिंग बत्ती दिखाई देने से प्रशासनिक व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

आरटीओ की कार्रवाई के बाद भी नहीं हटी बत्ती

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कल्याण आरटीओ ने आयुक्त की सरकारी गाड़ी पर अनधिकृत फ्लैशिंग बत्ती लगाए जाने के मामले में कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया था। उम्मीद की जा रही थी कि इसके बाद संबंधित वाहन से प्रतिबंधित उपकरण हटा दिए जाएंगे, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया।

सोमवार को कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए आयुक्त मनीषा आव्हाले जिस सरकारी वाहन से पहुंचीं, उस पर फिर वही फ्लैशिंग लाल-नीली बत्ती देखी गई। इस घटना ने यह संकेत दिया कि पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है।

कल्याण आरटीओ ने जारी की आधिकारिक नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए कल्याण उप प्रादेशिक परिवहन कार्यालय ने तत्काल हस्तक्षेप किया है। उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी आशुतोष बारकुल द्वारा उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को आधिकारिक नोटिस जारी की गई है।

नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वाहन क्रमांक MH-05-FP-9445 पर लाल एवं नीली फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग किया जा रहा है। आरटीओ ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 108 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए कहा है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को छोड़कर अन्य किसी भी सरकारी वाहन पर इस प्रकार की फ्लैशिंग बत्तियों का उपयोग वैध नहीं है।

नोटिस के माध्यम से संबंधित वाहन से फ्लैशिंग बत्ती तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इसकी प्रतिलिपि महानगरपालिका के वाहन विभाग के उप आयुक्त को भी भेजी गई है, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

क्या कहते हैं नियम?

केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 से वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के उद्देश्य से देशभर में लाल बत्ती के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किया था। इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी पद और शक्ति प्रदर्शन की मानसिकता को समाप्त करना तथा आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच समानता का संदेश देना था।

वर्तमान नियमों के अनुसार केवल एम्बुलेंस, अग्निशमन विभाग और पुलिस जैसी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लाल अथवा नीली फ्लैशिंग बत्तियों के उपयोग की अनुमति है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश जैसे सीमित संवैधानिक पदों को छोड़कर किसी भी मंत्री, जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी को अपने वाहन पर ऐसी बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है।

जनता के बीच चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से कानून का सम्मान करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। नागरिकों का मानना है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनका पालन भी बिना किसी अपवाद के किया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

आरटीओ द्वारा जारी नोटिस के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस आदेश का तत्काल पालन करेगा? क्या आयुक्त की सरकारी गाड़ी से प्रतिबंधित फ्लैशिंग बत्ती हटाई जाएगी, या फिर यह विवाद आगे और बढ़ेगा?

फिलहाल आरटीओ की सख्त नोटिस के बाद प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है और आम जनता की नजरें अब आयुक्त कार्यालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।














उल्हासनगर में बढ़ रही जनआक्रोश की भावना: आयुक्त मनीषा आव्हाले से मुलाकात नहीं होने पर नागरिकों ने जताई नाराजगी.!


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से आम नागरिकों की नियमित मुलाकात नहीं हो पाने के कारण शहर में असंतोष का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन द्वारा प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक आयुक्त से मिलने का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लोग अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुंचा सकें। हालांकि, पिछले कई सप्ताहों से नागरिकों को आयुक्त से मुलाकात का अवसर नहीं मिल पा रहा है।

शिकायत लेकर महानगरपालिका मुख्यालय पहुंचने वाले नागरिकों का आरोप है कि कई बार उन्हें आयुक्त कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बताया जाता है कि आयुक्त मंत्रालय में किसी बैठक के लिए गई हैं, जबकि कुछ अवसरों पर अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने का कारण बताया जाता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि वे जलापूर्ति, सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण, संपत्ति कर, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर आयुक्त से मिलने पहुंचते हैं, लेकिन लगातार मुलाकात नहीं हो पाने से उनकी समस्याओं के समाधान में देरी हो रही है। इससे लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है।

नागरिकों के बीच अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि महानगरपालिका आयुक्त से ही मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है, तो वे अपनी समस्याओं और शिकायतों के निराकरण के लिए किस अधिकारी के पास जाएं। कई लोगों का मानना है कि जनसुनवाई की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना होता है, लेकिन यदि निर्धारित समय पर भी अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते, तो इस व्यवस्था का महत्व कम हो जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका प्रशासन को इस विषय पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यदि आयुक्त किसी कारणवश निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं हैं, तो नागरिकों की शिकायतें सुनने और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही नागरिकों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस पूरे मुद्दे को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है और नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि महानगरपालिका प्रशासन जनसुनवाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाएगा, ताकि आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे।















उल्हासनगर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात की तैयारी, सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी होंगे एकजुट।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर के कई सामाजिक संगठन, नागरिक मंच और शहर के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवी जल्द ही FDA आयुक्त Tukaram Munde से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तावित बैठक में शहर से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा नागरिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल शहर में खाद्य सुरक्षा, अवैध गुटखा कारोबार, जनस्वास्थ्य से जुड़े विषयों तथा आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले अन्य मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित करेगा। इसके अलावा, विभिन्न संगठनों द्वारा तैयार किए गए शिकायत पत्र और सुझाव भी आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में FDA द्वारा राज्यभर में चलाए जा रहे सख्त अभियान और आयुक्त तुकाराम मुंढे की सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए स्थानीय संगठनों ने सीधे संवाद का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। इस मुलाकात के माध्यम से शहर की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई की मांग किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्तावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन शहर के सामाजिक और नागरिक संगठनों के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि यह बैठक होती है, तो उल्हासनगर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिल सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, जिससे शहर की विभिन्न समस्याओं के समाधान को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।














भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 से सम्मानित हुए डॉ. सागर प्रकाश घाडगे समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण एवं राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान।


नई दिल्ली/मुंबई : दिनेश मीरचंदानी

समाजसेवा, श्रमिक कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण, जनजागरण तथा राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय और प्रेरणादायी योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त समाजसेवक, श्रमिक नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को प्रतिष्ठित "भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दीर्घकालिक समर्पण, उत्कृष्ट नेतृत्व तथा जनकल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति और सराहना का प्रतीक है।

डॉ. घाडगे को प्राप्त यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी गौरव का विषय है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

समाज परिवर्तन के सशक्त सूत्रधार

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे ने अपना जीवन समाज के वंचित, पीड़ित, श्रमिक, उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। श्रमिक अधिकारों की रक्षा, मानवाधिकार संरक्षण, उपभोक्ता जागरूकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

उनके नेतृत्व में अनेक जनहितकारी अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक पहलों को सफलतापूर्वक संचालित किया गया, जिनसे हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर सामाजिक सद्भाव, जनसहभागिता और सामुदायिक विकास को नई दिशा प्रदान की है।

नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण में महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. घाडगे ने सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध प्रभावी जनजागरण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से नशामुक्ति अभियान, अपराध विरोधी जागरूकता अभियान तथा आतंकवाद विरोधी जनजागरण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने युवाओं और नागरिकों को राष्ट्रहित, सामाजिक उत्तरदायित्व और कानून के प्रति सम्मान का संदेश दिया है।

उनके प्रयासों ने अनेक युवाओं को नशे, अपराध और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता और जनजागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय माना जाता है।

उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—

• श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर संघर्ष एवं प्रभावी नेतृत्व।

• मानवाधिकार संरक्षण और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय जनजागरण अभियान।

• उपभोक्ता अधिकारों और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु उल्लेखनीय कार्य।

• वंचित एवं उपेक्षित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास।

• नशामुक्ति, अपराध नियंत्रण और आतंकवाद विरोधी जनजागरण अभियानों में सक्रिय योगदान।

• पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सामाजिक उपक्रमों में महत्वपूर्ण सहभागिता।

• युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने हेतु प्रेरणादायी कार्य।

• राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से जनजागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन को बढ़ावा देना।

• बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक के रूप में समाजहित से जुड़े नवाचारपूर्ण अभियानों का सफल संचालन।

राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा गौरव

"भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026" देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है। डॉ. घाडगे को यह सम्मान मिलना समाजसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उनके अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता माना जा रहा है।

सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक तथा मानवाधिकार क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, संगठनों और नागरिकों ने इस उपलब्धि पर डॉ. घाडगे को शुभकामनाएँ देते हुए उनके योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

डॉ. सागर प्रकाश घाडगे की दूरदृष्टि, संघर्षशीलता, नेतृत्व क्षमता और समाजहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि समर्पण, सेवा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है।

समाज के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

"आपकी दृष्टि हमारी प्रेरणा है, आपकी सेवा समाज की शक्ति है।"

भारत गौरव एक्सीलेंस अवॉर्ड 2026 की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. सागर प्रकाश घाडगे को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएँ।














उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।














प्रॉपर्टी टैक्स बकाया पर दुकान-गोदाम सील नहीं कर सकती उल्हासनगर महानगर पालिका - बॉम्बे हाईकोर्ट


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक प्रावधान के अभाव में नगर निकाय बकाया संपत्ति कर वसूलने के लिए किसी परिसर को सील नहीं कर सकते। अदालत ने मंगलवार को उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) को निर्देश दिया कि वह कथित टैक्स बकाया के कारण सील किए गए एक फास्ट-फूड आउटलेट और गोदाम को तुरंत खोल दे।

जस्टिस गौतम अंखाड और जस्टिस संदीप डी. पाटिल की अवकाशकालीन पीठ ने यह आदेश दुकान मालिक लछमन दुसेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दुसेजा की संपत्तियों को 30 मार्च को सील किया गया था।

पीठ ने कहा,

“प्रतिवादी निगम के वकील हमें ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सके, जो संपत्ति कर का भुगतान न होने पर परिसर सील करने का अधिकार देता हो।”

अदालत ने UMC को दुसेजा के गोदाम और दुकान को तुरंत अनसील करने का आदेश दिया।

दुसेजा के अनुसार, UMC अधिकारियों ने 30 मार्च को उनके परिसरों का दौरा किया और दोनों संपत्तियों को सील करने से पहले अटैचमेंट आदेश जारी किया। निगम ने गोदाम पर ₹5.64 लाख और दुकान पर ₹1.30 लाख संपत्ति कर बकाया होने का दावा किया था।

दुसेजा की ओर से पेश अधिवक्ता एस.बी. राव ने दलील दी कि महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1949 और उसके तहत बनाए गए नियम नगर निकायों को संपत्ति कर वसूली के लिए परिसर सील करने का अधिकार नहीं देते। उन्होंने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया।

अदालत ने यह दलील स्वीकार कर ली, क्योंकि UMC के वकील सुरेश कांबले इस कार्रवाई के समर्थन में कोई वैधानिक प्रावधान पेश नहीं कर सके।

दुसेजा ने अदालत को बताया कि वह संपत्ति कर चुकाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निकाय द्वारा लगाए गए जुर्माने और विलंब शुल्क का विरोध कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने उन्हें बकाया कर जमा करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की।














डायबिटीज मरीजों में पैरों से जुड़ी बढ़ती बीमारियों को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में 10 मई को शिवसेना नगरसेविका मीना सोंडे की पहल पर निशुल्क विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा।


 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

डायबिटीज के मरीजों में तेजी से बढ़ रही पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उल्हासनगर में एक विशेष “डायबिटिक फुट कैंप” का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर 10 मई 2026 को फिनिक्स हॉस्पिटल, कुर्ला कैंप रोड, बाबासाई नगर, उल्हासनगर में आयोजित होगा, जहां मुंबई के प्रसिद्ध डायबिटिक फुट विशेषज्ञ मरीजों की जांच और परामर्श देंगे।

डॉक्टरों के अनुसार डायबिटीज का असर केवल शुगर लेवल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समय पर उपचार न मिलने पर पैरों में सूजन, जलन, झुनझुनी, न भरने वाले घाव, बार-बार संक्रमण और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कई मामलों में मरीजों को पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।

इस विशेष कैंप में डायबिटिक फुट सर्जरी और उपचार के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. अरुण बाल और उनकी टीम मरीजों को मार्गदर्शन देंगे। कैंप में कंसल्टेंट डायबिटिक फुट सर्जन डॉ. सचिन विल्हेकर और डॉ. अर्चित चिटणीस भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही उल्हासनगर महानगरपालिका की सभापति डॉ. मीना सोंडे की भी उपस्थिति रहेगी।

कैंप में पैरों की सूजन, लालिमा, कॉर्न, कैलोसिटी, न भरने वाले घाव, तेज दर्द, ऐंठन, टखनों की विकृति, अंदर की ओर मुड़ने वाले नाखून और गैंग्रीन जैसी समस्याओं की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ मरीजों को उचित उपचार और भविष्य में सावधानी बरतने संबंधी सलाह भी देंगे।

यह कैंप सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कैंप में शामिल होने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है। इच्छुक मरीज 88 79 88 28 32 और 91 67 67 67 90 नंबर पर संपर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इस स्वास्थ्य शिविर का आयोजन एस.एल. रहेजा हॉस्पिटल (ए फोर्टिस एसोसिएट), माहिम, मुंबई द्वारा किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कैंप डायबिटीज मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं और समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।














फर्जीवाड़े और विवादों पर लगेगी रोक: महाराष्ट्र सरकार लाएगी प्रॉपर्टी कार्ड व्यवस्था।


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

महाराष्ट्र सरकार ने तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे गांवों में जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने घोषणा की है कि अब शहरीकृत गांवों में पारंपरिक 7/12 उतारे (सातबारा) की जगह प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को भूमि अभिलेख व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार, कई गांव अब शहरों का स्वरूप ले चुके हैं, लेकिन वहां अब भी ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड प्रणाली लागू है। इससे नागरिकों को जमीन खरीद-बिक्री, नामांतरण, बैंक लोन, निर्माण अनुमति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़ी सभी जानकारी एकीकृत और डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी।

सरकार का मानना है कि प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली लागू होने से जमीन की सीमाएं, स्वामित्व और रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट होंगे। इससे फर्जीवाड़ा, दोहरे रिकॉर्ड और जमीन विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे।

राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शहरीकृत क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और रियल एस्टेट गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक हो गया था। प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली पहले से ही कई शहरी क्षेत्रों में लागू है और अब इसे शहरीकृत गांवों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके तहत भूमि अभिलेखों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में स्मार्ट शहरी नियोजन और पारदर्शी भूमि प्रबंधन की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। इससे निवेशकों, घर खरीदने वालों और आम नागरिकों को अधिक भरोसेमंद और स्पष्ट दस्तावेज मिलेंगे।

राज्य सरकार जल्द ही इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस फैसले से महाराष्ट्र के हजारों शहरीकृत गांवों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।














उल्हासनगर पर ड्रग्स नेटवर्क का साया: भविष्य में ‘हब’ बनने की आशंका, आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede की सख्त चेतावनी।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ड्रग्स मामले में उल्हासनगर का नाम सामने आने के बाद इस शहर को लेकर चिंताएं गहराने लगी हैं। आईआरएस अधिकारी Sameer Wankhede ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो उल्हासनगर भविष्य में ड्रग्स का बड़ा हब बन सकता है।

उल्हासनगर में आयोजित एक ड्रग्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानखेड़े ने कहा कि हालिया घटनाओं ने इस क्षेत्र को न केवल राज्य स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि ड्रग्स नेटवर्क की जड़ें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव और इसके सामाजिक, आर्थिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने खासतौर पर युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्तिगत जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। वानखेड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ड्रग्स का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक व्यापक सामाजिक संकट है। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

वानखेड़े ने जोर देकर कहा कि जागरूकता अभियान, खुफिया निगरानी को मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है।














उल्हासनगर कैम्प-5 में अवैध डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ बड़ा आंदोलन: साईं हीरालाल जी बने नवगठित समिति के अध्यक्ष।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर के कैम्प-5 क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बने अवैध डंपिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब संगठित रूप से आवाज बुलंद कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार, 4 मई को संत प्रभाराम मंदिर, उल्हासनगर-5 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु एक नवगठित समिति का गठन किया गया।

बैठक में सर्वसम्मति से साईं वसनशाह दरबार के साईं हीरालाल जी को समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी सदस्यों के विशेष आग्रह पर साईं हीरालाल जी ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। उनके नेतृत्व में अब इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की रणनीति बनाई जा रही है।

समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में प्रकाश गोविंदराम लुंड (पिकी), मनीष नारा, राजकुमार कुकरेजा, राजेश चांगलानी, विजय वाधवा, मनीष ठाकुर, रॉकी शर्मा, नरेश आहुजा, निल शर्मा, जैकी सुखेजा और शशिकांत दायमा शामिल हैं। सभी सदस्यों ने एक स्वर में अवैध डंपिंग ग्राउंड को तत्काल हटाने की मांग की।

बैठक में यह भी गंभीर रूप से उठाया गया कि उक्त डंपिंग ग्राउंड में मृत पशुओं को फेंका जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। इस अमानवीय स्थिति को देखते हुए समिति ने मृत पशुओं के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए शवदाहिनी (इंसीनरेटर) की व्यवस्था किए जाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, क्षेत्र में फैल रहे धुएं, प्रदूषण और बदबू की समस्या से निपटने के लिए ठोस उपाययोजनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। समिति ने निर्णय लिया कि इस पूरे मुद्दे को लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाई जाएगी।

बैठक में उपस्थित नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रदूषण और अव्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए यह मामला अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में समिति की अगुवाई में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर आंदोलन होने की संभावना जताई जा रही है।














उल्हासनगर में ड्रग्स नेटवर्क पर चिंता: Sameer Wankhede की सख्त अपील—नशे से दूर रहें युवा


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर में तेजी से बढ़ते नशे के मामलों के बीच भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के वरिष्ठ अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है—“ड्रग्स से दूर रहना ही सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।”

हाल के समय में उल्हासनगर शहर और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए ड्रग्स से जुड़े मामलों ने प्रशासन और समाज दोनों को चिंतित कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में वानखेड़े का यह बयान न केवल एक चेतावनी है, बल्कि युवाओं को सही दिशा दिखाने का प्रयास भी है।

उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे जीवन को प्रभावित करती है। “ड्रग्स एक ऐसी बुराई है जो धीरे-धीरे व्यक्ति के करियर, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को खत्म कर देती है। युवा अगर एक बार इस जाल में फंस जाएं, तो बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है,” उन्होंने कहा।

वानखेड़े ने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में कुछ युवा गलत संगत, सोशल मीडिया के प्रभाव और आसान पैसे के लालच में आकर नशे की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

कानूनी सख्ती और प्रशासनिक कार्रवाई

उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स से जुड़े मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है और आने वाले समय में यह और तेज होगी। “कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे, ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए,” उन्होंने कहा।

परिवार और शिक्षकों की अहम भूमिका

समीर वानखेड़े ने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें। “युवाओं को सही दिशा देना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का कर्तव्य है,” उन्होंने कहा।

समाज को एकजुट होने की जरूरत

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तभी सफल हो सकती है जब समाज का हर वर्ग—परिवार, स्कूल, कॉलेज और प्रशासन—एक साथ मिलकर काम करे।

उल्हासनगर जैसे शहरों में बढ़ते नशे के मामलों के बीच यह संदेश युवाओं के लिए एक चेतावनी भी है और एक प्रेरणा भी—कि सही रास्ता चुनना ही असली सफलता और सुरक्षित भविष्य की पहचान है।














मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने की मांग तेज, RPI (रामदास आठवले गुट) की CM फडणवीस से अपील — समीर वानखेड़े को नारकोटिक्स विभाग में तैनात करें।


 


मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

मुंबई में हाल ही में सामने आए गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले के बाद शहर में ड्रग्स के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच RPI (रामदास आठवले गुट) और मुंबई की आम जनता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हाथ जोड़कर अपील की है कि IRS अधिकारी समीर वानखेड़े को मुंबई के नारकोटिक्स विभाग में तत्काल तैनात किया जाए, ताकि ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

यह मांग ऐसे समय में उठी है जब नेस्को ड्रग्स मामले ने युवाओं में फैलते नशे के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन पर कड़े कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

मुंबई और महाराष्ट्र को ड्रग्स मुक्त बनाने की मांग

RPI (रामदास आठवले गुट) के पदाधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुंबई में ड्रग्स का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।

गोरेगांव स्थित नेस्को सेंटर में हुए हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामले ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। संगठन ने कहा कि यदि अभी सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।

संगठन की ओर से जारी अपील में कहा गया:

> "हम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि IRS अधिकारी समीर वानखेड़े को मुंबई के नारकोटिक्स विभाग में तैनात किया जाए, ताकि ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाया जा सके।"

समीर वानखेड़े की कार्यशैली पर भरोसा

RPI नेताओं और मुंबई की जनता का मानना है कि समीर वानखेड़े ने पहले भी ड्रग्स और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अपनी मजबूत छवि बनाई है।

उनकी कार्यशैली को लेकर लोगों में भरोसा है कि यदि उन्हें मुंबई में नारकोटिक्स विभाग में जिम्मेदारी दी जाती है, तो ड्रग्स माफिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शहर में बढ़ते ड्रग्स नेटवर्क को रोकने के लिए अनुभवी और सख्त अधिकारियों की जरूरत है।

नेस्को जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग

गोरेगांव के नेस्को सेंटर में सामने आए ड्रग्स मामले ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद लोगों ने प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है।

RPI (रामदास आठवले गुट) और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के सामने निम्न मांगें रखीं:

मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाया जाए

युवाओं को ड्रग्स के जाल से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए

बड़े इवेंट्स और कॉन्सर्ट्स पर सख्त निगरानी रखी जाए

ड्रग्स सप्लाई चेन पर कड़ी कार्रवाई की जाए

गोरेगांव नेस्को जैसी घटना दोबारा न हो

सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग

RPI (रामदास आठवले गुट) और मुंबई की जनता ने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो ड्रग्स का नेटवर्क और फैल सकता है, जो युवाओं के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।

मुंबई की जनता का साफ संदेश है —

> "मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाना जरूरी है और इसके लिए समीर वानखेड़े जैसे सख्त अधिकारी की तैनाती बेहद आवश्यक है।"

बढ़ता जनदबाव, सरकार के फैसले पर नजर

गोरेगांव नेस्को ड्रग्स मामले के बाद लगातार सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से सख्त कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।

अब सभी की नजर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर टिकी हुई है कि क्या सरकार इस मांग पर निर्णय लेकर मुंबई को ड्रग्स मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाती है या नहीं।






















डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती पर नशा मुक्त भारत का संकल्प: सांसद उज्ज्वल निकम और IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने युवाओं को किया प्रेरित।


 

मुंबई: दिनेश मिरचंदानी

भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती के अवसर पर नशा मुक्त भारत के संकल्प को लेकर एक भव्य और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय सांसद उज्ज्वल निकम तथा आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने अभिभावकों और युवाओं को संबोधित करते हुए नशा मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने जीवन में शिक्षा, अनुशासन, आत्मसम्मान और सामाजिक जागरूकता को सबसे अधिक महत्व दिया। आज की युवा पीढ़ी को इन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है, विशेष रूप से उस समय जब समाज में नशे की प्रवृत्ति युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

माननीय सांसद उज्ज्वल निकम ने अपने संबोधन में कहा कि बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनकी जयंती मनाने से नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने से होगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सही मार्गदर्शन दें और युवाओं से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

वहीं आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, शिक्षा और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है, और यदि युवा नशे से दूर रहेंगे तो देश मजबूत और विकसित बनेगा।

इस अवसर पर पंचशील के महत्वपूर्ण सिद्धांत को भी विशेष रूप से याद किया गया:

“सुरामेरय मज्ज पमादट्ठाना वेरमणि सिक्खापदं समाधियामि”

अर्थात — मैं नशा और मादक पदार्थों से दूर रहने का संकल्प लेता हूं, क्योंकि यह लापरवाही और पतन का कारण बनते हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों और युवाओं ने सामूहिक रूप से “नशा मुक्त भारत” का संकल्प लिया। “Say NO to Nasha… Say YES to Life, Discipline & Self-Respect” का संदेश पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसे सभी ने उत्साहपूर्वक समर्थन दिया।

इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए चंद्रशेखर कांबले को विशेष धन्यवाद एवं सराहना दी गई। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती केवल उत्सव का अवसर नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने का संकल्प लेने का दिन है। यदि युवा नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और आत्मसम्मान के मार्ग पर चलें, तो यही बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और एक मजबूत, जागरूक और नशा मुक्त भारत का निर्माण संभव होगा। 🇮🇳✨














उल्हासनगर में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के अवसर पर शिवसेना नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग 19) के मार्गदर्शन में महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

महामानव, बोधिसत्व, विश्वरत्न परम पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर उल्हासनगर में एक भव्य महा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिवसेना के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

यह महा स्वास्थ्य जांच शिविर रविवार, 13 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन काली माता मंदिर, कुल्ला कैंप, उल्हासनगर-4 में किया गया है, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों के पहुंचने की उम्मीद है।

आयोजकों के अनुसार, इस शिविर में विभिन्न प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें सामान्य स्वास्थ्य जांच से लेकर गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

शिविर में उपलब्ध निःशुल्क सुविधाएं

- जनरल हेल्थ जांच

- आंखों की जांच

- स्त्री रोग जांच

- एंजियोप्लास्टी संबंधी मार्गदर्शन

- हड्डियों से संबंधित जांच

- निःशुल्क दवाइयां वितरण

- ECG जांच

- मधुमेह (डायबिटीज) जांच

- एंजियोग्राफी संबंधी मार्गदर्शन

- बाल रोग जांच

- कैंसर संबंधी निःशुल्क मार्गदर्शन

- निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन सुविधा

इस शिविर का आयोजन नगरसेविका डॉ. मिन्ना सोंडे (प्रभाग क्रमांक 19) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने परिवार के साथ स्वास्थ्य जांच करवाएं।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर को सामाजिक सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों के लिए यह शिविर विशेष रूप से लाभकारी साबित होने की उम्मीद है।

आयोजकों ने बताया कि शिविर में अनुभवी डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी और जरूरतमंद मरीजों को आगे के इलाज के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस महा स्वास्थ्य जांच शिविर का लाभ उठाने की अपील की गई है।















उल्हासनगर महानगरपालिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव, उल्हासनगर मनपा को जल्द मिल सकता है नया आयुक्त, वर्तमान आयुक्त के तबादले की चर्चा तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मनपा के वर्तमान आयुक्त का जल्द ही तबादला होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि उनकी जगह नए आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चा चल रही है और इसी क्रम में उल्हासनगर महानगरपालिका का भी नाम प्रमुखता से सामने आया है। बताया जा रहा है कि शहर में चल रहे कई महत्वपूर्ण विकास कार्य, प्रशासनिक निर्णय और कुछ लंबित मामलों को देखते हुए सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति पर विचार कर रही है।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

इस संभावित बदलाव की खबर सामने आते ही मनपा के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारी वर्ग में नए आयुक्त को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, वहीं कई विभागों में लंबित फाइलों को लेकर भी तेजी देखी जा रही है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

उल्हासनगर शहर में इस समय कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें —

शहर के बुनियादी ढांचे का विकास

प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान

अवैध निर्माण पर कार्रवाई

स्वच्छता और जल निकासी परियोजनाएं

इन सभी पर नए आयुक्त की नियुक्ति के बाद प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी बढ़ी दिलचस्पी

उल्हासनगर की राजनीति हमेशा से प्रशासनिक बदलावों को लेकर संवेदनशील रही है। ऐसे में आयुक्त के संभावित तबादले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नए आयुक्त के साथ विकास कार्यों को गति देने की उम्मीद जता रहे हैं।

जल्द हो सकता है आधिकारिक आदेश

हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में राज्य सरकार द्वारा तबादला आदेश जारी किया जा सकता है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि उल्हासनगर महानगरपालिका को नया आयुक्त कब मिलता है और नए प्रशासनिक नेतृत्व में शहर के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।














महावीर जयंती 2026 पर समाज सेवा को सम्मान नरेश सुराना को “महावीर पुरस्कार 2026” से किया गया सम्मानित, जरूरतमंद मरीजों की सहायता कार्यों की हुई सराहना।


 

शिरडी | दिनेश मिरचंदानी

महावीर जयंती 2026 के पावन अवसर पर आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए समाजसेवी नरेश सुराना को प्रतिष्ठित “महावीर पुरस्कार 2026” से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निरंतर सहायता उपलब्ध कराने के उनके उल्लेखनीय कार्यों की इस अवसर पर विशेष सराहना की गई।

कार्यक्रम में उपस्थित जैन समाज के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने नरेश सुराना द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में नरेश सुराना ने इसे अपने जीवन का अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि समाज सेवा का कार्य बिना किसी अपेक्षा के किया जाता है, लेकिन जब समाज स्वयं इस कार्य को पहचान देता है और सम्मानित करता है, तो यह सम्मान और अधिक प्रेरणा देने वाला बन जाता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सहायता निधि के माध्यम से जरूरतमंद एवं गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का कार्य लगातार जारी है। जैन समाज द्वारा इस कार्य की सराहना किए जाने से उनके उत्साह में और वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि समाज से मिलने वाला यह सम्मान न केवल मनोबल बढ़ाता है, बल्कि सेवा कार्यों की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ा देता है।

कार्यक्रम के दौरान नरेश सुराना ने महावीर जयंती समिति एवं संघपति पुखराजजी लोढ़ा का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा दिया गया यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक सेवा कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा तथा वे जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के प्रयास और तेज करेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि समाज सेवा के इस कार्य को आगे बढ़ाने की प्रेरणा उन्हें महाराष्ट्र के माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन से मिलती है। उनके सहयोग एवं प्रेरणा से जरूरतमंद मरीजों तक सहायता पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी है और आने वाले समय में इसे और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

नरेश सुराना ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी वे इसी प्रकार जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे तथा समाज सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाए रखेंगे।

महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान समाज सेवा, मानवता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।

यह सम्मान न केवल नरेश सुराना के कार्यों की सराहना है, बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी माना जा रहा है।