नई दिल्ली: दिनेश मीरचंदानी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को बरकरार रखते हुए भारतीय राजस्व सेवा (IRS) और पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) अधिकारी समीर ज्ञानदेव वानखेड़े को प्रोन्नति दिए जाने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें CAT के दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
पृष्ठभूमि
28 अगस्त 2025 को सुनाए गए इस फैसले में हाईकोर्ट ने CAT के निर्देश को सही ठहराया, जिसके तहत सरकार को “सिल बंद लिफाफा” खोलकर वानखेड़े को UPSC की सिफारिश के आधार पर 1 जनवरी 2021 से अतिरिक्त आयुक्त (कस्टम्स एवं अप्रत्यक्ष कर) के पद पर पदोन्नत करने और उनका नाम वरिष्ठता सूची में शामिल करने का आदेश दिया गया था।
केंद्र का पक्ष
केंद्र की ओर से सीजीएससी (CGSC) आशिष के. दिक्षित ने अदालत में दलील दी कि वानखेड़े पर कई गंभीर आरोप लंबित हैं।
सीबीआई ने मई 2023 में FIR दर्ज की।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत ECIR दर्ज की।
2022 में दो बार गंभीर दंड प्रस्तावों वाली चार्ज-शीट का प्रारूप तैयार हुआ।
इसके अलावा जाति प्रमाणपत्र में कथित फर्जीवाड़ा, विदेशी यात्राओं व महंगी घड़ियों की खरीद जैसे मुद्दे भी लंबित थे।
सरकार का तर्क था कि यही कारण था कि उनकी पदोन्नति “सिल बंद लिफाफा” प्रक्रिया के तहत रोकी गई।
वानखेड़े का पक्ष
वरिष्ठ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के K.V. Jankiraman (1991) केस का हवाला देते हुए कहा कि “सिल बंद लिफाफा” नीति केवल तीन स्थितियों में लागू होती है—
1. चार्ज मेमो जारी होने पर
2. आपराधिक केस में चार्ज-शीट दायर होने पर
3. अधिकारी निलंबित होने पर
वानखेड़े पर इनमें से कोई भी स्थिति लागू नहीं थी। उन्हें न चार्ज-शीट दी गई थी, न निलंबन हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मार्च 2024 में SIT द्वारा जुटाए गए सबूतों पर रोक लगाई थी, और CVC ने आगे की कार्रवाई टाल दी थी।
न्यायालय की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी अधिकारी की पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती। यदि आरोप इतने गंभीर थे तो सरकार के पास निलंबन का विकल्प था, जो इस्तेमाल नहीं किया गया। लिहाज़ा CAT के आदेश में कोई खामी नहीं पाई गई और केंद्र को चार हफ्तों के भीतर प्रोन्नति आदेश लागू करने का निर्देश दिया गया।
समीर वानखेड़े का करियर
2008 बैच के आईआरएस अधिकारी वानखेड़े, मुंबई में एनसीबी के जोनल डायरेक्टर के रूप में कार्य करते हुए 2021 के बहुचर्चित कोर्डेलिया क्रूज ड्रग केस की जांच के दौरान सुर्खियों में आए थे। इसी दौरान उन पर राजनीतिक विवाद और विभिन्न जांचें भी शुरू हुईं।
👉 हाईकोर्ट के इस फैसले से समीर वानखेड़े के करियर को बड़ी राहत मिली है और अब उनके अतिरिक्त आयुक्त पद पर पदोन्नत होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।