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कल्याण-उल्हासनगर बेल्ट में फिर सक्रिय हुए अवैध जींस वॉश कारखाने, नदियों पर मंडराया गंभीर प्रदूषण संकट।


कल्याण/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी

कल्याण, उल्हासनगर और अंबरनाथ के ग्रामीण इलाकों में अवैध रूप से संचालित जींस वॉश (धुलाई) कारखाने एक बार फिर बड़े पैमाने पर सक्रिय हो गए हैं। नियमों और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार करते हुए चल रही इन इकाइयों के कारण क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ—उल्हास, मुकी, गवर और कासाडी—गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ गई हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्थानीय नागरिकों और किसानों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा उल्हासनगर क्षेत्र से सैकड़ों जींस वॉश यूनिट्स को हटाया गया था। उस समय इसे एक बड़ी कार्रवाई माना गया था। हालांकि अब वही यूनिट संचालक अंबरनाथ और कल्याण ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को आर्थिक प्रलोभन देकर फिर से इन कारखानों को स्थापित कर रहे हैं।

प्रदूषण का बढ़ता दायरा

इन कारखानों से निकलने वाला रासायनिक युक्त गंदा पानी बिना किसी शोधन प्रक्रिया के सीधे जमीन और जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है। कई स्थानों पर पानी की आपूर्ति के लिए सैकड़ों बोरवेल खोदे गए हैं, जिनसे अब दूषित और बदबूदार पानी निकलने की शिकायतें मिल रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो भूजल भी पूरी तरह से प्रदूषित हो सकता है।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

स्थानीय नागरिकों, किसानों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और संबंधित प्रशासनिक विभागों को बार-बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। नोटिस जारी करने के बावजूद इन यूनिट्स का संचालन बेरोकटोक जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिर्फ कागजी कार्रवाई का आरोप

सूत्रों के अनुसार, पहले की गई सख्त कार्रवाई के बाद ये कारखाने बंद हो गए थे, लेकिन कुछ समय बाद फिर से शुरू हो गए। आरोप है कि संबंधित विभाग केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई स्थानों पर केमिकल युक्त पानी को गड्ढों में जमा किया जा रहा है, जो धीरे-धीरे जमीन के भीतर समा रहा है।

एनजीओ की चेतावनी और मांग

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक एनजीओ के प्रतिनिधियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी केवल दिखावटी कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस गंभीर मुद्दे को न्यायिक स्तर पर ले जाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और इन अवैध कारखानों को तत्काल बंद किया जाए।

निष्कर्ष

हालांकि प्रशासन द्वारा इन यूनिट्स के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद ये जींस वॉश कारखाने खुलेआम संचालित हो रहे हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या एक बड़े पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है।














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