उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका के आम चुनाव के लिए खरीदी गई चुनावी सामग्री में करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान खरीदी गई सामग्री को बाजार मूल्य से कहीं अधिक दरों पर खरीदने तथा चुनाव समाप्त होने के बाद उसे महानगरपालिका के रिकॉर्ड और कब्जे में जमा न कर निजी स्तर पर ठिकाने लगाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव विभाग के माध्यम से कंप्यूटर, कैमरे, पेन-कागज, टेबल-कुर्सियां, डस्टबिन, मंडप, पानी की बोतलें समेत अन्य आवश्यक सामग्री की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी। आरोप है कि इन वस्तुओं की खरीद में नियमों को दरकिनार करते हुए बाजार भाव से अधिक कीमतें दिखाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सामग्री महानगरपालिका के स्वामित्व में वापस जमा होना अपेक्षित था, लेकिन बड़ी मात्रा में सामग्री का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चुनावी सामग्री का गैरकानूनी तरीके से निपटारा किया गया।
बताया जा रहा है कि चुनाव विभाग के खर्चों का नियमित ऑडिट न होने का फायदा उठाकर वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। जब यह मामला आयुक्त मनीषा आव्हाले के संज्ञान में आया, तब उन्होंने तत्काल उस समय चुनाव विभाग में कार्यरत अतिरिक्त आयुक्त, उपायुक्त, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।
आयुक्त की इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की मांग उठाई है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में यदि अनियमितताएं साबित होती हैं, तो प्रशासन दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की परतें कब तक खुलती हैं।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें