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उल्हासनगर में विकास पर ब्रेक! प्रशासन और नगरसेवकों के बीच बढ़ी खींचतान, विकास कार्यों की रफ्तार थमी, वार्डों में अटकी योजनाएं; जनता में बढ़ रहा असंतोष।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका में इन दिनों प्रशासन और नव-निर्वाचित नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान का सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर दिखाई देने लगा है। विभिन्न वार्डों में सड़क मरम्मत, नाला सफाई, पानी आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, कई नगरसेवकों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को जानबूझकर धीमी गति से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि नियमों और वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। इसी टकराव के चलते अनेक विकास योजनाओं की मंजूरी और कार्यादेश अटक गए हैं।

नगरसेवकों का दावा है कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए विकास के वादों को पूरा करने में प्रशासनिक अड़चनें सबसे बड़ी बाधा बन रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा उनके सुझावों और प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। बिना तकनीकी और वित्तीय मंजूरी के किसी भी काम को जल्दबाजी में शुरू नहीं किया जा सकता। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि पिछली कई परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद सतर्कता बढ़ाई गई है।

इस खींचतान का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कें, जलभराव और सफाई समस्याओं को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, शहर के नागरिक अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से टकराव खत्म कर विकास कार्यों को गति देने की मांग कर रहे हैं।














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