मुंबई/उल्हासनगर: दिनेश मिरचंदानी
मुंबई के गोरेगांव स्थित नेस्को ग्राउंड में आयोजित म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की कथित ड्रग ओवरडोज से हुई मौत के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की जांच में अब अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए गए भुगतान का खुलासा हुआ है, जिसने इस पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी महेश खेमलानी ने यूरोप में मौजूद अपने संपर्कों के जरिए करीब 4,000 एक्स्टेसी पिल्स मंगवाई थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की यह खेप दो अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र लाई गई और बाद में उल्हासनगर तक पहुंचाई गई।
अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में करीब 3,000 एक्स्टेसी गोलियां भेजी गई थीं, जबकि दूसरी खेप में 1,000 गोलियां शामिल थीं। दोनों खेप कथित तौर पर कूरियर सेवा के माध्यम से आरोपी के साथी आयुष साहित्य के परिचित के पते पर पहुंचाई गईं। पुलिस अब इस सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों और स्थानीय संपर्कों की पहचान करने में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ड्रग सप्लायर को भुगतान पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से नहीं, बल्कि टेथर (Tether) नामक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का उद्देश्य लेन-देन को छिपाना और जांच एजेंसियों से बचना था।
सूत्रों के अनुसार, मामले में अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट, डार्क वेब नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन एंगल की भी गहन जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां अब विदेशी संपर्कों, ड्रग सप्लाई चैन और फंडिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा तथा ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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