मुंबई: दिनेश मिरचंदानी
महाराष्ट्र सरकार ने तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे गांवों में जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने घोषणा की है कि अब शहरीकृत गांवों में पारंपरिक 7/12 उतारे (सातबारा) की जगह प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को भूमि अभिलेख व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, कई गांव अब शहरों का स्वरूप ले चुके हैं, लेकिन वहां अब भी ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड प्रणाली लागू है। इससे नागरिकों को जमीन खरीद-बिक्री, नामांतरण, बैंक लोन, निर्माण अनुमति और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़ी सभी जानकारी एकीकृत और डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी।
सरकार का मानना है कि प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली लागू होने से जमीन की सीमाएं, स्वामित्व और रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट होंगे। इससे फर्जीवाड़ा, दोहरे रिकॉर्ड और जमीन विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शहरीकृत क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और रियल एस्टेट गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक हो गया था। प्रॉपर्टी कार्ड प्रणाली पहले से ही कई शहरी क्षेत्रों में लागू है और अब इसे शहरीकृत गांवों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके तहत भूमि अभिलेखों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में स्मार्ट शहरी नियोजन और पारदर्शी भूमि प्रबंधन की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। इससे निवेशकों, घर खरीदने वालों और आम नागरिकों को अधिक भरोसेमंद और स्पष्ट दस्तावेज मिलेंगे।
राज्य सरकार जल्द ही इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस फैसले से महाराष्ट्र के हजारों शहरीकृत गांवों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

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