उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर के चर्चित भूमि विवाद मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। हिल लाइन पुलिस स्टेशन ने विवादित भूमि के सर्वेक्षण और कथित कब्जे से जुड़े मामले में प्रमुख व्यवसायी नंद जेठानी, धीरज जेठानी सहित चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यावसायिक और रियल एस्टेट जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 426 (नुकसान पहुंचाना) और 34 (सामूहिक आपराधिक मंशा) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
यह मामला उल्हासनगर निवासी और निर्माण व्यवसायी अनिल आहूजा की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से एक ऐसी पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग किया, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी, और उसी के आधार पर विवादित भूमि का सरकारी सर्वेक्षण कराकर उस पर कब्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कथित कार्रवाई से न केवल उन्हें आर्थिक और संपत्ति संबंधी नुकसान हुआ, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं का भी दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को भी हानि पहुंची।
शाहाड स्थित 25 गुंठा भूमि को लेकर विवाद
एफआईआर के अनुसार, विवादित संपत्ति शाहाड गांव, उल्हासनगर स्थित सर्वे नंबर 171/C की लगभग 25 गुंठा भूमि है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह जमीन उनके परिवार की संपत्ति है।
मामले में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2001 में शिकायतकर्ता के पिता स्वर्गीय श्रीचंद भुलचंद आहूजा और उनके चाचा प्रकाश आहूजा ने भूमि के प्रबंधन संबंधी अधिकार नंद रामचंद जेठानी को पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्रदान किए थे।
पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता पर विवाद
शिकायतकर्ता का कहना है कि पावर ऑफ अटॉर्नी देने वाले दोनों व्यक्तियों के निधन के बाद उक्त दस्तावेज स्वतः प्रभावहीन और अवैध हो गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने कथित रूप से उसी दस्तावेज का उपयोग करते हुए 21 मार्च 2022 को सिटी सर्वे कार्यालय में भूमि सर्वेक्षण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
इसके बाद 13 मई 2022 को भूमि का सर्वेक्षण कराया गया और शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी प्रक्रिया के माध्यम से संपत्ति पर कब्जा प्राप्त करने का प्रयास किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरी कार्रवाई भ्रामक दस्तावेजों और गलत तथ्यों के आधार पर की गई।
चार आरोपियों के खिलाफ मामला
एफआईआर में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें:
धीरज जेठानी
नंद जेठानी
जगेश रघुनाथ गायकवाड़
एक अज्ञात व्यक्ति
शामिल हैं।
सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग की भी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में यह भी जांच की जा रही है कि भूमि सर्वेक्षण और उससे संबंधित राजस्व प्रक्रिया के दौरान किन-किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया तथा क्या संबंधित अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराई गई थी या नहीं। जांच के दौरान दस्तावेजों की वैधता, पावर ऑफ अटॉर्नी की कानूनी स्थिति और भूमि स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जाएगी।
पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
हिल लाइन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस प्रकरण की जांच पुलिस उपनिरीक्षक सुरवाडे कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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