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उल्हासनगर मनपा और पुलिस के दावों की खुली पोल, फर्जी डॉक्टर अब भी कर रहे इलाज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर शहर में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और दर्जनों शिकायतों के बावजूद अवैध चिकित्सा का कारोबार खुलेआम जारी रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस में मामले दर्ज होने और महानगरपालिका द्वारा कार्रवाई के दावे किए जाने के बावजूद कई कथित फर्जी डॉक्टर अब भी बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शहर में ऐसे कई व्यक्तियों की पहचान की गई थी जो बिना वैध मेडिकल लाइसेंस के क्लीनिक संचालित कर रहे थे। इनमें से कई के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गईं और कुछ मामलों में पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की। इसके बावजूद संबंधित क्लीनिकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

26 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें, फिर भी जारी है प्रैक्टिस

जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 26 कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें की गई थीं। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि इनमें से कुछ लोग बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं, बीमारियों का उपचार कर रहे हैं और चिकित्सा परामर्श भी दे रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि वास्तविकता में कई क्लीनिक आज भी संचालित हो रहे हैं। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

महानगरपालिका प्रशासन पर उठे सवाल

फर्जी डॉक्टरों के मामले में महानगरपालिका प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और निरीक्षण के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों का आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम उठाए होते, तो लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर जोखिमों को रोका जा सकता था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता

चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिना योग्य डॉक्टरों द्वारा किया जाने वाला उपचार मरीजों के लिए घातक साबित हो सकता है। गलत निदान, अनुचित दवाइयों का उपयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में सही चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अवैध क्लीनिकों को तत्काल सील कर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कड़ी कार्रवाई की मांग

शहर के नागरिकों ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सभी अवैध क्लीनिकों की जांच की जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति लोगों की जान से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिक प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।














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