उल्हासनगर महानगरपालिका के डंपिंग ग्राउंड को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि डंपिंग ग्राउंड में समय-समय पर लगने वाली आग बुझाने के लिए पीने योग्य पानी का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, वहां लगाई गई पानी की टंकियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये टंकियां किसके आदेश पर लगाई गईं और क्या इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति ली गई थी?
इस मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक घुले ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि डंपिंग ग्राउंड पर पानी की टंकियां लगाने के लिए महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिखित पत्र जारी किया गया था।
यह जानकारी उन्होंने नगरसेवक प्रधान पाटील, राजू गोपलानी और विपुल मयेकर के साथ हुई चर्चा के दौरान दी। इस खुलासे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि स्वास्थ्य विभाग ने लिखित रूप से टंकियां लगाने की अनुमति या निर्देश दिए थे, तो क्या पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई थी? साथ ही, क्या पीने योग्य पानी का उपयोग डंपिंग ग्राउंड में आग बुझाने के लिए करना उचित और वैध है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में कई क्षेत्रों में पहले से ही पानी की कमी बनी रहती है। ऐसे में यदि पीने योग्य पानी का इस्तेमाल डंपिंग ग्राउंड की आग बुझाने में किया जा रहा है, तो यह संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। लोगों का यह भी कहना है कि डंपिंग ग्राउंड में बार-बार आग लगने की घटनाओं पर स्थायी समाधान खोजने के बजाय केवल पानी डालकर स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे प्रकरण में अब कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं—
डंपिंग ग्राउंड पर पानी की टंकियां किसकी अनुमति से लगाई गईं?
क्या इन्हें लगाने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया?
आग बुझाने के लिए पीने योग्य पानी का उपयोग किसके निर्देश पर किया जा रहा है?
यदि स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी किया था, तो उसकी शर्तें और उद्देश्य क्या थे?
इस पूरे मामले की जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?
बर्बाद किए गए पानी की भरपाई आखिर कौन करेगा?"
अब देखना होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, इस खुलासे ने महानगरपालिका की कार्यप्रणाली और डंपिंग ग्राउंड के प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रहार संगठन के शरद पोळके ने कई अहम सवाल उठाए हैं, लेकिन अब तक उनका कोई जवाब नहीं दिया गया है।




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