उल्हासनगर महानगरपालिका में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रस्तावित बड़ा आंदोलन फिलहाल टल गया है। 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के प्रणेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राज असरोंडकर ने प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद 30 जून से प्रस्तावित अपना अनिश्चितकालीन आमरण अनशन स्थगित करने की घोषणा की है।
महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाळे के निर्देश पर अनधिकृत निर्माण निष्कासन विभाग के नोडल अधिकारी गणेश शिंपी से नोडल अधिकारी का पदभार तथा सुरक्षा अधिकारी यशवंत सगळे से सुरक्षा अधिकारी का पदभार वापस ले लिया गया है। यशवंत सगळे का तबादला डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्ययन केंद्र में कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेष मामलों की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से शासन के आदेशों का पालन किया जाएगा।
शासन के आदेशों के पालन की मांग पर चला आंदोलन
राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारियों और अधिकारियों को ऐसे महत्वपूर्ण पद नहीं दिए जाने चाहिए, जिनमें जनसंपर्क, संवेदनशील जिम्मेदारियां या नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार शामिल हो। इसके बावजूद उल्हासनगर महानगरपालिका में ऐसे कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने का आरोप लगाया गया था।
'कायद्याने वागा' लोकचळवळ का दावा है कि महानगरपालिका में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा रंगेहाथ पकड़े गए लगभग 40 कर्मचारी-अधिकारी रहे हैं। इनमें से कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 23 कर्मचारी कार्यरत हैं। आरोप है कि इनमें से कई को शासन के निर्देशों की अनदेखी कर महत्वपूर्ण पदभार सौंपे गए थे। इन्हीं पदभारों को वापस लेने और शासनादेश का कड़ाई से पालन कराने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था।
दो चरणों के आंदोलन के बाद अनशन की घोषणा
इस मांग को लेकर 16 जून और 23 जून को महानगरपालिका मुख्यालय के सामने आंदोलन किया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप था कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बाद राज असरोंडकर ने 30 जून से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की थी, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन
आंदोलन को कांग्रेस की नगरसेविका एवं विपक्ष की नेता अंजली साळवे का समर्थन मिला। उन्होंने इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी सौंपा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रोहित साळवे ने भी आंदोलन का सार्वजनिक समर्थन किया। इसके अलावा स्वराज्य संगठन सहित कई सामाजिक संगठनों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
सोमवार को 'कायद्याने वागा' लोकचळवळ के मीडिया समन्वयक प्रफुल केदारे, स्वराज्य संगठन के अध्यक्ष एडवोकेट जय गायकवाड, समर्पण संस्था के अध्यक्ष मनोज कोरडे तथा कानून समन्वयक एडवोकेट वनिता ओवळेकर ने मुख्यालय उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले से मुलाकात कर प्रशासन से नियमों और कानूनों का स्वतः पालन करने की अपेक्षा व्यक्त की।
प्रशासन के आश्वासन के बाद बदला फैसला
उपायुक्त डॉ. दीपाली चौगले ने राज असरोंडकर से चर्चा कर उनसे आमरण अनशन न करने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रत्येक मामले की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से संबंधित अधिकारियों से महत्वपूर्ण पदभार वापस लिए जाएंगे।
चर्चा के दौरान राज असरोंडकर ने "नोडल अधिकारी" जैसे कथित अवैध पद पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन ने उसी दिन गणेश शिंपी और यशवंत सगळे के पदभार वापस लेने की कार्रवाई कर दी।
आंदोलन फिलहाल स्थगित, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष रहेगा जारी
प्रशासन द्वारा सकारात्मक कदम उठाए जाने को देखते हुए राज असरोंडकर ने अपने सहयोगियों से चर्चा के बाद अनिश्चितकालीन आमरण अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। भविष्य में उल्हासनगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर एक संयुक्त महासंगठन बनाया जाएगा और महानगरपालिका सहित अन्य सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष पहले की तरह जारी रहेगा।
आंदोलन को रिपब्लिकन पार्टी के नेता नाना बागुल, सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति तायडे, एडवोकेट कल्पेश माने, पत्रकार प्रमोद रंदिल, प्रो. प्रवीण माळवे, शिवाजी म्हस्के, सतीश एटांबे, अभिमन्यू निकम, मनोज जगताप, विश्वास पाटील, हरेश ब्राह्मणे और देवेंद्र कांबळे सहित अनेक लोगों का समर्थन मिला। वहीं, परिमंडल-4 के पुलिस उपायुक्त सचिन गोरे, गोपनीय विभाग के अधिकारियों तथा कई पत्रकारों के सहयोग के लिए राज असरोंडकर ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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