सरकारी निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ई-टेंडरिंग (ई-निविदा) प्रणाली लागू की थी। इसका मकसद मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर उपलब्ध कराना था। लेकिन उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
आरोप लगाए जा रहे हैं कि महानगरपालिका में ई-निविदा प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। चर्चा है कि कई मामलों में टेंडर खुलने से पहले ही यह तय कर लिया जाता है कि संबंधित ठेका किस ठेकेदार को दिया जाएगा। ऐसे में ई-टेंडरिंग का मूल उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ गया है।
सूत्रों के अनुसार, कैंप-1 से कैंप-5 तक लगभग 26-26 लाख रुपये की लागत वाले चेंबर निर्माण कार्यों के टेंडरों को लेकर भी इसी प्रकार की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि यदि कोई अन्य ठेकेदार निविदा भरता है, तो उसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर अपात्र घोषित कर दिया जाता है या फिर कथित रूप से उसे "बॉस का फोन" आने जैसी बातें कहकर पीछे हटने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय ठेकेदारों और नागरिकों का कहना है कि यदि ई-निविदा प्रक्रिया में पहले से ही परिणाम तय किए जा रहे हैं, तो पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि इससे योग्य और ईमानदार ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पाता, जबकि सरकारी धन के उपयोग पर भी संदेह पैदा होता है।
गौरतलब है कि उल्हासनगर महानगरपालिका पहले से ही कथित 85 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले को लेकर चर्चा में रही है। उस मामले में भी निविदा प्रक्रिया और ठेके आवंटन को लेकर कई सवाल उठे थे। ऐसे में अब 26-26 लाख रुपये के इन नए टेंडरों को लेकर सामने आए आरोपों ने एक बार फिर महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं बल्कि सरकारी ई-टेंडरिंग प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितना दम है और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों और चर्चाओं पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित प्रशासन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)






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