आषाढ़ी वारी के पावन अवसर पर विधायक किसन कथोरे ने पंढरपुर पहुंचकर भगवान विठ्ठल के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक शीश नवाया तथा वारकरी संप्रदाय के साथ वारी में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने वारी की अनुशासनप्रिय परंपरा, सादगी, सेवा भावना और भक्ति के अद्वितीय स्वरूप का निकट से अनुभव किया। विधायक कथोरे ने कहा कि पंढरपुर की वारी केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा, समर्पण, समानता और मानवता का दिव्य महापर्व है, जो समाज को एकता और सद्भाव का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि टाल-मृदंग की मधुर ध्वनि, "ज्ञानोबा-तुकाराम" के अखंड नामस्मरण और लाखों वारकरियों की अटूट श्रद्धा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। इस आध्यात्मिक यात्रा का प्रत्येक कदम समाजसेवा, जनकल्याण और जनता के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है तथा जीवन को नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
विधायक कथोरे ने कहा कि पंढरपुर की वारी महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का सबसे जीवंत स्वरूप है। यहां जाति, धर्म, वर्ग और आर्थिक स्थिति का कोई भेदभाव नहीं होता, बल्कि सभी श्रद्धालु एक समान भाव से भगवान विठ्ठल की भक्ति में लीन होकर प्रेम, सेवा और समानता का संदेश देते हैं। यही वारी की सबसे बड़ी विशेषता है, जिसने सदियों से समाज को जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य किया है।
उन्होंने वारकरी संप्रदाय की अनुशासित जीवनशैली, संत परंपरा और सेवा संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और अन्य संतों द्वारा दिखाया गया मार्ग आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। वारी हमें सिखाती है कि सेवा ही सच्ची भक्ति है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
भगवान विठ्ठल के श्रीचरणों में प्रार्थना करते हुए विधायक किसन कथोरे ने प्रदेश एवं देशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि ईश्वर सभी को समाजसेवा की शक्ति प्रदान करें तथा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सद्भाव बना रहे।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने वारकरी परंपरा के पावन उद्घोष—
॥ पुंडलिक वरदे हरि विठ्ठल ॥
॥ श्री ज्ञानदेव तुकाराम ॥
—के साथ भगवान विठ्ठल से समस्त मानव समाज के कल्याण की प्रार्थना की।



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