उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
रिजेंसी परिसर में लगभग 30,000 वर्गफुट के कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर अतिरिक्त आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत एवं स्पष्ट रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि इतने बड़े पैमाने पर हुए कथित अवैध निर्माण के बावजूद नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं की गई और इसमें किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
मामले को लेकर नगररचनाकार विकास बिरारी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने रिजेंसी के कथित अवैध निर्माण को बचाने का प्रयास किया, हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की मांग भी तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि इस मामले को प्रहार संगठन के नेता एडवोकेट स्वप्निल पाटिल ने शुरुआत से ही लगातार उठाया। उन्होंने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन को कई बार शिकायतें दीं और कार्रवाई की मांग की। संगठन के लगातार विरोध और दबाव के बाद संबंधित निर्माण पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी।
हालांकि, प्रहार संगठन का आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद भी मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ। संगठन का दावा है कि नगररचनाकार विकास बिरारी की कथित मंजूरी से उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कराया गया, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रहार संगठन का यह भी आरोप है कि कई नगरसेवकों ने इस मामले का विरोध किया और कथित अनियमितताओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया। संगठन का कहना है कि नगररचनाकार विकास बिरारी ने कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध निर्माण को संरक्षण देने का प्रयास किया।
संगठन ने यह भी दावा किया है कि उसने पूर्व नगररचनाकारों के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को भी लगातार उजागर किया है। प्रहार संगठन का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
अब अतिरिक्त आयुक्त द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने और आगे की कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें प्रशासन पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
नगररचनाकार विकास बिरारी के गैरव्यव्हार के खिलाफ संचालक नगररचनाकार पुणे मे सोमवार दिनांक १० अगस्ट २०२६ को होगा प्रहार का आंदोलन।





कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें