उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
असम के गुवाहाटी में नवनिर्वाचित नगरसेवकों के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। आर्थिक तंगी से जूझ रही उल्हासनगर महानगरपालिका (यूएमसी) द्वारा इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब 65 लाख रुपये खर्च करने की प्रशासनिक मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्ष ने पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि जब नगरसेवकों के आधिकारिक खर्च का वहन महानगरपालिका ने किया, तब उनके साथ गए परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के यात्रा, ठहरने और अन्य खर्च का भुगतान किसने किया, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रशासन को सार्वजनिक करनी चाहिए।
जानकारी के अनुसार, 22 से 26 जुलाई के बीच अखिल भारतीय स्थानीय स्वराज्य संस्था की ओर से गुवाहाटी में नवनिर्वाचित नगरसेवकों के लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली, स्थानीय स्वशासन और विकास योजनाओं से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए 75 में से 71 नगरसेवकों ने सहमति दी थी। महानगरपालिका ने नगरसेवकों के हवाई यात्रा, आवास, भोजन तथा दैनिक भत्ते सहित पूरे आधिकारिक खर्च का वहन किया।
हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ जब यह सामने आया कि कई नगरसेवक अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को भी इस दौरे पर साथ ले गए थे। सोशल मीडिया पर विमान के अंदर नगरसेवकों और उनके परिजनों की तस्वीरें वायरल होने के बाद विपक्ष ने इस दौरे की पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हैरानी की बात यह भी रही कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित एक भी आधिकारिक तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई कि आखिर प्रशिक्षण कार्यक्रम में वास्तविक रूप से क्या गतिविधियां हुईं।
विपक्ष का कहना है कि यदि यह दौरा पूरी तरह प्रशिक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, तो परिवार के सदस्यों की इसमें क्या भूमिका थी और उनके यात्रा एवं ठहरने का खर्च किस स्रोत से वहन किया गया। विपक्ष ने प्रशासन से पूरे खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने तथा इस मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
इस पूरे विवाद के बीच एक और तथ्य चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, नगरसेवकों और उनके परिवारों के ठहरने की व्यवस्था उसी आलीशान होटल में की गई थी, जहां वर्ष 2022 में शिवसेना में राजनीतिक विभाजन के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी विधायक कई दिनों तक ठहरे थे। इस वजह से भी यह दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
इस मामले में महानगरपालिका की प्रभारी सचिव एवं उपायुक्त दीपाली चौगुले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि गुवाहाटी में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 60 से 70 नगरसेवकों ने भाग लिया। हालांकि, प्रशासन ने अब तक प्रशिक्षण में शामिल नगरसेवकों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब पूरे कार्यक्रम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, तो प्रतिभागियों की सही संख्या और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है।
अब विपक्ष ने महानगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि गुवाहाटी प्रशिक्षण दौरे पर हुए प्रत्येक खर्च का हिसाब सार्वजनिक किया जाए, नगरसेवकों के साथ गए परिजनों के खर्च का स्रोत स्पष्ट किया जाए तथा यदि सरकारी धन का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला उल्हासनगर की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें