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उल्हासनगर पीडब्ल्यूडी विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, वरिष्ठ अधिकारी और उनके सहयोगी शंकर की भूमिका पर उठे सवाल।


(फाइल इमेज) 

उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के लोक निर्माण (पीडब्ल्यूडी) विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनसे जुड़े कुछ लोगों पर अवैध वसूली, फर्जी बिल तैयार कराने तथा सरकारी नियमों के कथित उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि शंकर नामक एक व्यक्ति कथित रूप से विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के लिए अवैध वसूली का काम करता है, जबकि उसी व्यक्ति पर फर्जी बिल तैयार कराने में भी भूमिका निभाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन मामलों ने अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। वहीं संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ पहले से ही एसीबी द्वारा जांच चलने की भी चर्चा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीडब्ल्यूडी विभाग में विकास कार्यों के संबंध में भी कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अनेक कार्यों की शुरुआत से पहले तथा कार्य पूर्ण होने के बाद आवश्यक फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं कराई जा रही है, जबकि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा, थर्ड पार्टी बिल ऑडिट की प्रक्रिया का भी कथित रूप से पालन नहीं किए जाने के आरोप हैं, जिससे सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि विभाग में बड़ी संख्या में फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, विभागीय प्रक्रियाओं और वित्तीय नियमों के खुलेआम उल्लंघन के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

इन आरोपों के बीच उल्हासनगर महानगरपालिका की आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की जा रही है कि वह पीडब्ल्यूडी विभाग के कामकाज, बिल भुगतान प्रक्रिया, विकास कार्यों की गुणवत्ता, दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की व्यापक जांच कराएं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई हो तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

गौरतलब है कि इस समय महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चल रहा है। ऐसे में यदि विपक्ष या जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को सदन में उठाया जाता है, तो उल्हासनगर महानगरपालिका के पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित भ्रष्टाचार का मामला राज्य स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या इनकी निष्पक्ष जांच कराई जाती है।














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