उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
उल्हासनगर महानगरपालिका के प्रभाग समिति क्रमांक-1 में कथित अवैध वसूली के मामले में मनपा प्रशासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए लिपिक आदेश उभाळे को निलंबित कर दिया है। वहीं, प्रभाग समिति के सहायक आयुक्त अजय साबळे को इस प्रकरण में अंतिम चेतावनी (लास्ट वार्निंग) जारी की गई है। इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।
उल्हास जनपथ के संपादक शिव कुमार मिश्रा पिछले 7–8 महीनों से इस मुद्दे को लगातार उठाते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन के समक्ष मजबूती से आवाज बुलंद कर रहे थे। आखिरकार उनकी सतत मेहनत रंग लाई और मामले में प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, पदपथ (फुटपाथ) विभाग से जुड़े कथित अवैध वसूली के मामले को लेकर मंत्रालय, लोकायुक्त, जिला अधिकारी तथा उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन को विस्तृत लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पदपथ विभाग में नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वसूली की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद मनपा प्रशासन ने मामले की विभागीय जांच शुरू की।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर लिपिक आदेश उभाळे की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद मनपा आयुक्त ने उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए।
इसी प्रकरण में सहायक आयुक्त अजय साबळे को भी प्रशासन की ओर से अंतिम चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन का कहना है कि उनके विरुद्ध विभागीय स्तर पर उपलब्ध अधिकारों के अनुसार कार्रवाई की गई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि अवैध वसूली का मामला हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी केवल अधीनस्थ कर्मचारी की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग के प्रभारी अधिकारी की भी बनती है।
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि इस मामले में सहायक आयुक्त अजय साबळे के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के लिए जल्द ही कोकण भवन तथा महाराष्ट्र मंत्रालय में अलग से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
इस कार्रवाई के बाद महानगरपालिका के विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशासनिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि यदि उच्च स्तर पर आगे जांच होती है तो इस प्रकरण में अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल, मनपा प्रशासन द्वारा लिपिक आदेश उभाळे के निलंबन और सहायक आयुक्त अजय साबळे को अंतिम चेतावनी दिए जाने के बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उच्च स्तर पर प्रस्तावित शिकायतों के बाद इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।






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