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नवी मुंबई के अवैध निर्माणों पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के दिए निर्देश।


नवी मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

नवी मुंबई में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिडको (CIDCO), नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC), महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) तथा अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराज़गी व्यक्त की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक योजनाबद्ध शहर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होना प्रशासनिक विफलता का संकेत है और यह स्थिति कानून के शासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि नवी मुंबई जैसे नियोजित शहर में लगातार अवैध निर्माण होते रहना अत्यंत चिंताजनक है। यदि समय रहते संबंधित विभागों और अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। अदालत ने यह भी कहा कि अवैध निर्माण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि इससे शहरी नियोजन, नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि वर्षों पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों के बावजूद अवैध निर्माणों के खिलाफ अपेक्षित और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अदालत के अनुसार, प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण शहर में अनियोजित विकास को बढ़ावा मिला, जिससे आम नागरिकों को यातायात, जल निकासी, बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि नवी मुंबई क्षेत्र में मौजूद सभी अवैध निर्माणों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाए और कानून के अनुसार उनके विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही, न्यायालय ने यह भी पूछा कि अब तक अवैध निर्माणों को रोकने में विफल रहने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और उनकी जवाबदेही कैसे तय की गई है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अवैध निर्माणों को हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए, जिनकी लापरवाही या मिलीभगत के कारण ऐसे निर्माण खड़े हुए। अदालत ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उसके आदेशों का समयबद्ध पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई भी की जा सकती है।

गौरतलब है कि नवी मुंबई में अवैध निर्माणों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। विभिन्न नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण यह मामला न्यायालय तक पहुंचा। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।













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