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समीर वानखेड़े के खिलाफ NCB की विभागीय जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट की रोक, अदालत ने एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।


मुंबई: दिनेश मीरचंदानी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूर्व मुंबई जोनल निदेशक समीर वानखेड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और पूछताछ की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान एनसीबी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गुमनाम शिकायतों और उन आरोपियों के बयानों के आधार पर किसी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि यदि जांच एजेंसियों के अधिकारियों को हर मामले में आरोपियों द्वारा लगाए गए आरोपों या अनाम शिकायतों के आधार पर जांच का सामना करना पड़ेगा, तो वे भविष्य में अपने कर्तव्यों का निष्पक्ष और निर्भीक होकर पालन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति जांच एजेंसियों के मनोबल और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

समीर वानखेड़े ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि एनसीबी उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में संभाले गए चर्चित मामलों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और विभागीय जांच का उद्देश्य उन्हें परेशान करना है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले उसके समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है। केवल आरोपियों के आरोप या गुमनाम शिकायतें किसी निष्पक्ष जांच का पर्याप्त आधार नहीं बन सकतीं।

अदालत ने फिलहाल समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी विभागीय पूछताछ और जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत इस पूरे विवाद पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि समीर वानखेड़े अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल मादक पदार्थ मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।

















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