उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी
विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब के कथित 29 मार्च 2025 के बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर विवाद और गहरा गया है। क्लब के निदेशक तरुण हिरानंदानी ने एक विस्तृत लिखित बयान जारी करते हुए दावा किया है कि उक्त बोर्ड प्रस्ताव पर उनके नाम से दर्शाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से फर्जी (Forged) हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी उस बोर्ड प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और न ही उसे अपनी स्वीकृति प्रदान की।
तरुण हिरानंदानी ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह 29 मार्च 2025 को कंपनी की किसी भी बोर्ड बैठक के आयोजन से भी पूरी तरह इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उनकी जानकारी और विश्वास के अनुसार उस दिन कंपनी की कोई बोर्ड बैठक आयोजित ही नहीं हुई थी। ऐसे में उस बैठक के आधार पर तैयार किए गए किसी भी बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता और प्रामाणिकता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि कंपनी यह दावा करती है कि 29 मार्च 2025 को विधिवत बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी, तो उसे इस दावे के समर्थन में ठोस और दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक करने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कंपनी से चार महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की है।
इनमें सबसे पहले बोर्ड बैठक की कार्यवाही (Minutes of Meeting) की प्रमाणित प्रति, दूसरे यदि उपलब्ध हो तो बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी, तीसरे बैठक में उपस्थित निदेशकों और सदस्यों का उपस्थिति रजिस्टर अथवा अन्य कोई दस्तावेज जिससे यह सिद्ध हो सके कि वह स्वयं बैठक में उपस्थित थे, तथा चौथे भवन परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, जिससे यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो सके कि 29 मार्च 2025 को उन्होंने कार्यालय परिसर में प्रवेश किया था और कथित बोर्ड बैठक में भाग लिया था।
तरुण हिरानंदानी ने यह भी कहा कि कंपनी का कार्यालय ऐसे भवन में स्थित है जहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। यदि वास्तव में उस दिन बोर्ड बैठक आयोजित हुई थी और वह उसमें शामिल हुए थे, तो कंपनी के लिए संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करना कठिन नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि यदि कंपनी उपरोक्त में से कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहती है, तो यह स्पष्ट माना जाना चाहिए कि 29 मार्च 2025 को कोई बोर्ड बैठक आयोजित नहीं हुई थी। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कथित बोर्ड रेजोल्यूशन पर उनके नाम से किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ीपूर्वक उनके ज्ञान एवं सहमति के बिना तैयार किए गए हैं।
तरुण हिरानंदानी ने स्पष्ट किया कि वह उक्त बोर्ड प्रस्ताव की वैधता, प्रामाणिकता और सत्यता को पूरी तरह अस्वीकार करते हैं तथा भविष्य में इस संबंध में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
इस मामले में अब सबकी निगाहें कंपनी के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हुई हैं। यदि कंपनी बोर्ड बैठक और बोर्ड रेजोल्यूशन की वैधता का दावा करती है, तो उसके समक्ष संबंधित दस्तावेज, उपस्थिति रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इस कथित बोर्ड रेजोल्यूशन को लेकर उठे सवाल और भी गंभीर हो सकते हैं।
नोट: विराट अंबे स्पोर्ट्स क्लब और सिंघानिया स्कूल के बीच हुए कथित समझौते में कई गंभीर अनियमितताओं और सवालों की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों का खुलासा हमारे अगले अंक में किया जाएगा।

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