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उल्हासनगर मनपा के पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित फर्जी बिलों का मामला गरमाया, 'शंकर' और डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव की भूमिका पर उठे सवाल; कनेक्शन की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।


उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कथित फर्जी बिल घोटाले को लेकर नए आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे कथित प्रकरण में 'शंकर' नामक एक व्यक्ति की भूमिका अहम बताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि उक्त व्यक्ति लंबे समय से पीडब्ल्यूडी विभाग में कथित फर्जी बिल तैयार कराने और उनसे जुड़े कार्यों में सक्रिय रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है। विशेष रूप से पीडब्ल्यूडी विभाग के डिप्टी इंजीनियर संदीप जाधव और शंकर नामक व्यक्ति की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच किए जाने की मांग उठ रही है। आरोप है कि दोनों के बीच हुई बातचीत और संपर्कों की जांच से कथित फर्जी बिलों के पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने आ सकती है।

इतना ही नहीं, सूत्रों का यह भी दावा है कि शंकर नामक व्यक्ति के कार्यालय और निवास स्थान पर कथित फर्जी बिलों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों तथा अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में संबंधित स्थानों की जांच और दस्तावेजों को जब्त कर उनकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग भी की जा रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

सूत्रों के अनुसार, यदि संबंधित व्यक्ति का पीडब्ल्यूडी विभाग में आना-जाना तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए, तो कथित रूप से फर्जी बिल तैयार होने की प्रक्रिया पर भी रोक लग सकती है। इस कारण जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की भी मांग की जा रही है।

इस कथित घोटाले को लेकर शहर में विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर जारी है। नागरिकों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला हो सकता है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उल्हासनगर की जनता ने महानगरपालिका आयुक्त मनीषा आव्हाले से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की कथित अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप सूत्रों और स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


















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