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उल्हासनगर मनपा के अधिकारी गणेश शिंपी के खिलाफ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिकायत। राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश राममूर्ति तिवारी ने कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की SIT/ACB/ED से स्वतंत्र जांच की मांग की।


 



उल्हासनगर: दिनेश मीरचंदानी

उल्हासनगर महानगरपालिका के एक वरिष्ठ अधिकारी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक नया विवाद सामने आया है। राष्ट्र कल्याण पार्टी के अध्यक्ष शैलेश राममूर्ति तिवारी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर उल्हासनगर महानगरपालिका के अधिकारी गणेश अरविंद शिंपी के विरुद्ध लगाए गए विभिन्न कथित आरोपों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री को भेजे गए इस ज्ञापन में कहा गया है कि संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली, संवेदनशील पदों पर उनकी नियुक्तियां, कथित प्रशासनिक अनियमितताएं, कथित भ्रष्टाचार, कथित आय से अधिक संपत्ति तथा अन्य संबंधित मामलों की जांच विशेष जांच दल (SIT) अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी सक्षम एजेंसियों से कराई जाए।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नागरिकों की ओर से समय-समय पर विभिन्न प्रकार की गंभीर शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके विरुद्ध जांच या कार्रवाई लंबित होने की चर्चाएं विभिन्न स्तरों पर होती रही हैं। ऐसे में, शिकायतकर्ता का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अधिकारी के पास महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रशासनिक जिम्मेदारियां बने रहने से प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यदि आरोपों में कोई सच्चाई हो तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके और यदि आरोप निराधार हों तो संबंधित अधिकारी को भी स्पष्ट रूप से न्याय मिल सके।

यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इस शिकायत में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि या किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सत्यापन होना अभी शेष है। संबंधित अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष आने तक इन आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

















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